Shankh-शंख दे सुख और रोग से मुक्ति

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हमारे हिन्दू धर्म में शंख(Shankh)को पवित्र और शुभ फलदायी माना गया है इसलिए पूजा-पाठ में Shankh(शंख) बजाने का नियम है हम अगर इसके धार्मिक पहलू को दर किनार भी कर दें तो भी घर में शंख(Shankh) रखने और इसे नियमित तौर पर बजाने के ऐसे कई फायदे हैं जो सीधे तौर पर हमारी सेहत और घर की सुख-शांति(Peace Happiness)से जुड़े हैं-

Shankh-शंख दे सुख और रोग से मुक्ति


ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, शंख चंद्रमा और सूर्य के समान ही देवस्वरूप है इसके मध्य में वरुण, पृष्ठ भाग में ब्रह्मा और अग्र भाग में गंगा और सरस्वती का निवास है-शंख(Shankh)से शिवलिंग, कृष्ण या लक्ष्मी विग्रह पर जल या पंचामृत अभिषेक करने पर देवता प्रसन्न होते हैं-

कल्याणकारी शंख(Shankh)दैनिक जीवन में दिनचर्या को कुछ समय के लिए विराम देकर मौन रूप से देव अर्चना के लिए प्रेरित करता है-यह भारतीय संस्कृति की धरोहर है-विज्ञान के अनुसार शंख समुद्र में पाए जाने वाले एक प्रकार के घोंघे का खोल है जिसे वह अपनी सुरक्षा के लिए बनाता है समुद्री प्राणी का खोल शंख कितना चमत्कारी हो सकता है-

हिन्दू धर्म में पूजा स्थल पर शंख(Shankh)रखने की परंपरा है क्योंकि शंख को सनातन धर्म का प्रतीक माना जाता है-शंख(Shankh)निधि का प्रतीक है- ऐसा माना जाता है कि इस मंगलचिह्न को घर के पूजास्थल में रखने से अरिष्टों एवं अनिष्टों का नाश होता है और सौभाग्य की वृद्धि होती है-स्वर्गलोक में अष्टसिद्धियों एवं नव -निधियों में भी शंख(Shankh)का महत्त्वपूर्ण स्थान है हिन्दू धर्म में शंख(Shankh)का महत्त्व अनादि काल से चला आ रहा है- शंख का हमारी पूजा से निकट का सम्बन्ध है-

यहाँ तक कहा जाता है कि शंख(Shankh)का स्पर्श पाकर साधारण जल भी गंगाजल के सदृश पवित्र हो जाता है- मन्दिर में शंख(Shankh)में जल भरकर भगवान की आरती की जाती है-आरती के बाद शंख का जल भक्तों पर छिड़का जाता है जिससे वे प्रसन्न होते हैं-जो भगवान कृष्ण को शंख में फूल, जल और अक्षत रखकर उन्हें अर्ध्य देता है उसको अनन्त पुण्य की प्राप्ति होती है-

Shankh-शंख में जल भरकर "ऊँ नमोनारायण"  का उच्चारण करते हुए भगवान को स्नान कराने से पापों का नाश होता है-

सभी धार्मिक कृत्यों में शंख का उपयोग किया जाता है पूजा-आराधना, अनुष्ठान-साधना, आरती, महायज्ञ एवं तांत्रिक क्रियाओं के साथ शंख का वैज्ञानिक एवं आयुर्वेदिक महत्त्व भी है-

हिन्दू मान्यता के अनुसार कोई भी पूजा, हवन, यज्ञ आदि शंख के उपयोग के बिना पूर्ण नहीं माना जाता है-कुछ गुह्य साधनाओं में इसकी अनिवार्यता होती है-शंख(Shankh)साधक को उसकी इच्छित मनोकामना पूर्ण करने में सहायक होते हैं तथा जीवन को सुखमय बनाते हैं शंख को विजय, समृद्धि, सुख, यश, कीर्ति तथा लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है-वैदिक अनुष्ठानों एवं तांत्रिक क्रियाओं में भी विभिन्न प्रकार के शंखों(Shankh)का प्रयोग किया जाता है-
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Shankh-शंख की उत्पत्ति कैसे हुई 

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