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29 जून 2016

गंजापन का उपचार-Baldness Treatment

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हमारे भोजन में कतिपय ऐसे मिनरल्स पाये जाते हैं जिनका गंजापन(Baldness)विरोधी प्रभाव होता है सबसे महत्वपूर्ण तत्व जो गंजापन दूर कर सकते हैं वे हैं- जिंक, कापर ,लोह तत्व और सिलिका-जिंक में गंजापन नष्ट करने वाले तत्व पाये जाते हैं केले, अंजीर,बेंगन ,आलू और स्ट्राबेरी में जिंक की संतोषप्रद मात्रा होती है-

गंजापन का उपचार-Baldness Treatment


कॉपर या ताँबा हमारे इम्युन-सिस्टम(Immune-System)को को मजबूत करते हुए बालों की सुरक्षा करता है रक्त में हीमोग्लोबिन(Hemoglobin)की वृद्धि के लिये कॉपर सहायता करता है-

दालें,सोयाबीन और वाल नट आदि में कॉपर तत्व पाया जाता है लौह तत्व बालों की सुरक्षा और पोषण के लिये बहुत ही आवश्यक है मटर,गाजर, चिकोरी, ककडी,और पालक में पर्याप्त आयरन होता है तो अपने भोजन में इन्हें अवस्य ही शामिल करें-

सिलिका तत्व चावल और आम में मौजूद रहता है अनुवांसिकता के आधार पे होने वाला Baldness-गंजापन भी एक पर्याप्त कारण है -

गंजेपन(Baldness)का उपचार-

उड़द की दाल को उबाल कर पीस लें- रात को सोते समय इस पिट्ठी का लेप सिर पर कुछ दिनों तक करते रहने से गंजापन(Baldness)समाप्त हो जाता है-

मेथी को पूरी रात भिगो दें और सुबह उसे गाढ़ी दही में मिला कर अपने बालों और जड़ो में लगाएं- बीस मिनट बाद बालों को धो लें इससे रूसी और सिर की त्वचा में जो भी समस्या होगी वह दूर हो जाएगी-मेथी में निकोटिनिक एसिड और प्रोटीन पाया जाता है जो बालों की जड़ो को प्रोषण पहुंचाता है और बालों की ग्रोथ को भी बढ़ाता है- इसके प्रयोग से सूखे और डैमेज बाल भी ठीक हो जाते हैं-

हरे धनिए का लेप जिस स्थान पर बाल उड़ गए हैं वहां लगाने से बाल उगने लगते हैं-

थोड़ी सी मुलैठी को दूध में पीसकर, फिर उसमें चुटकी भर केसर डाल कर उसका पेस्ट बनाकर सोते समय सिर में लगाने से गंजेपन की समस्या दूर होती है-

केले का गूदा निकालकर उसे नीँबू के रस में मिलाकर सिर पर लगाने से बालों के उडने की समस्या में लाभ होता है-

अनार की पती पीसकर पर लगाने से गंजेपन का निवारण होता है-

प्याज काटकर दो भाग करें-आधे प्याज को सिर पर 5 मिनिट रोज रगडें, बाल आने लगेंगे-

जो  लोग  काफी समय से  गंजे है उनके लिए कोई भी दवा काम नहीं करेगी जिनकी अभी शुरुवात है वो लाभ ले  सकते है-

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Upcharऔर प्रयोग-

25 जून 2016

श्वास रोग के लिए एक तांत्रिक उपाय

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Tantric Measures for Breathing Problems

Tantric Measures for Breathing Problems-श्वास रोग के लिए तांत्रिक उपाय-

सभी के जीवन में कभी न कभी कुछ न कुछ बीमारियाँ आती है आज आपको अस्थमा और श्वास(Asthma and respiratory) से सम्बंधित रोग का एक तांत्रिक उपाय बता रहे है इसे करने से काफी कुछ आराम मिल जाता है आपकी अगर दवा भी चल रही है तब भी आप इसे साथ -साथ कर सकते है इसका किसी भी प्रकार का गलत प्रभाव नहीं है न ही किसी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट(Non side effects) है लेकिन श्रद्धा और विश्वास की आवश्यकता जरुरी है-

1- किसी भी महीने के पहले सोमवार को आप विधि-विधानपूर्वक चमेली की जड़(Jasmine root) को अभिमंत्रित करके घर लाये तथा सफेद रेशमी धागे में बांधकर गले में धारण करें और प्रत्येक सोमवार(Every Monday) को बार-बार आइने(Mirror) में अपना चेहरा देंखे- इससे सांस की सभी बीमारियां दूर हो जाएंगी-

2- यदि सांस की नली में सूजन(Respiratory inflammation) है और सांस लेने में तकलीफ है तथा फेफड़ों में सूजन(Inflammation in the lungs) के कारण कफ जमने अथवा खांसी से मुक्ति पाने के लिए किसी शुभ समय में केसर(saffron) की स्याही और तुलसी की कलम द्वारा भोजपत्र पर चंद्र यंत्र(Chandra instrument) का निर्माण करवाकर गले में धारण करें आपके श्वास संबंधी सभी रोग दूर हो जाएंगे-शुभ मुहूर्त किसी विद्वान् से पता कर सकते है-

3- किसी भी माह में शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से लगातार तीन सोमवार तक एक सफेद रूमाल में मिश्री एवं चांदी का एक चौकोर टुकड़ा बांधकर बहते जल में प्रवाहित करें तथा शिवजी को चावल के आटे का दीपक कपूर मिश्रित घी के साथ अर्पित करें- आपको श्वास रोग में आराम मिलेगा-

4- रविवार को एक बर्तन में जल भरकर उसमें चांदी की अंगूठी डालकर सोमवार को खाली पेट उस जल का सेवन करें- ये उपाय करने से दमा रोग में काफी आराम मिलेगा-

Upcharऔर प्रयोग-

19 जून 2016

शरीर का कंपन या पार्किन्सन रोग क्या है

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Body Vibration (Parkinson's disease)

यह एक दिमाग का रोग है जो लम्बे समय दिमाग में पल रहा होता है ये रोग किसी व्यक्ति को अचानक नहीं होता है इस रोग का प्रभाव धीरे-धीरे होता है और पता भी नहीं पडता कि कब लक्षण शुरू हुए- अनेक सप्ताहों व महीनों के बाद जब लक्षणों की तीव्रता बढ जाती है तब अहसास होता है कि कुछ गडबड है जब यह रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो रोगी व्यक्ति के हाथ तथा पैर कंपकंपाने लगते हैं कभी-कभी इस रोग के लक्षण कम होकर खत्म हो जाते हैं इस रोग से पीड़ित बहुत से रोगियों में हाथ तथा पैरों के कंप-कंपाने के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं लेकिन वह लिखने का कार्य करता है तब उसके हाथ लिखने का कार्य करने में असमर्थ हो जाते हैं-

यदि रोगी व्यक्ति लिखने का कार्य करता भी है तो उसके द्वारा लिखे अक्षर टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं रोगी व्यक्ति को हाथ से कोई पदार्थ पकड़ने तथा उठाने में दिक्कत महसूस होती है इस रोग से पीड़ित रोगी के जबड़े, जीभ तथा आंखे कभी-कभी कंपकंपाने लगती है-

बहुत सारे मरीज़ों में पार्किन्‍सोनिज्‍म रोग की शुरुआत कम्पन से होती है-कम्पन अर्थात् धूजनी या धूजन या ट्रेमर या कांपना- कम्पन अंग में  हाथ की एक कलाई या अधिक अंगुलियों का, हाथ की कलाई का, बांह का- पहले कम रहता है फिर यदाकदा होता है- रुक रुक कर होता है- बाद में अधिक देर तक रहने लगता है व अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है- प्रायः एक ही ओर (दायें या बायें) रहता है, परन्तु अनेक मरीज़ों में, बाद में दोनों ओर होने लगता है-

आराम की अवस्था में जब हाथ टेबल पर या घुटने पर, ज़मीन या कुर्सी पर टिका हुआ हो तब यह कम्पन दिखाई पडता है- बारिक सधे हुए काम करने में दिक्कत आने लगती है, जैसे कि लिखना, बटन लगाना, दाढी बनाना, मूंछ के बाल काटना, सुई में धागा पिरोना- कुछ समय बाद में, उसी ओर का पांव प्रभावित होता है-

कम्पन या उससे अधिक महत्त्वपूर्ण, भारीपन या धीमापन के कारण चलते समय वह पैर घिसटता है, धीरे उठता है, देर से उठता है, कम उठता है- धीमापन, समस्त गतिविधियों में व्याप्त हो जाता है- चाल धीमी - काम धीमा- शरीर की माँसपेशियों की ताकत कम नहीं होती है, लकवा नहीं होता- परन्तु सुघडता व स्फूर्ति से काम करने की क्षमता कम होती जाती है -

जब यह रोग धीरे-धीरे बढ़ता है तो रोगी की विभिन्न मांसपेशियों में कठोरता तथा कड़ापन आने लगता है- शरीर अकड़ जाता है, हाथ पैरों में जकडन होती है-मरीज़ को भारीपन का अहसास हो सकता है- जब से मरीज़ के हाथ पैरों को मोड कर व सीधा कर के देखते हैं बहुत प्रतिरोध मिलता है- मरीज़ जानबूझ कर नहीं कर रहा होता- जकडन वाला प्रतिरोध अपने आप बना रहता है-

व्यक्ति को चलने-फिरने में बहुत दिक्कत होती है-खडे होते समय व चलते समय मरीज़ सीधा तन कर नहीं रहता- थोडा सा आगे की ओर झुक जाता है- घुटने व कुहनी भी थोडे मुडे रहते हैं- क़दम छोटे होते हैं- पांव ज़मीन में घिसटते हुए आवाज़ करते हैं- क़दम कम उठते हैं गिरने की प्रवृत्ति बन जाती है- ढलान वाली जगह पर छोटे क़दम जल्दी-जल्दी उठते हैं व कभी-कभी रोकते नहीं बनता - चलते समय भुजाएं स्थिर रहती हैं, आगे पीछे झूलती नहीं - बैठे से उठने में देर लगती है, दिक्कत होती है - चलते -चलते रुकने व मुडने में परेशानी होती है शारीरिक बैलेंस बिगड़ जाता है।-जब रोगी की चाल अनियंत्रित तथा अनियमित हो जाती है तो चलते-चलते रोगी व्यक्ति कभी-कभी गिर जाता है- चेहरे का दृश्य बदल जाता है- आंखों का झपकना कम हो जाता है-

पार्किन्‍सन रोग के लक्षण-

आंखें चौडी खुली रहती हैं- व्‍यक्ति मानों सतत घूर रहा हो या टकटकी लगाए हो - चेहरा भावशून्य प्रतीत होता है बातचीत करते समय चेहरे पर खिलने वाले तरह-तरह के भाव व मुद्राएं (जैसे कि मुस्कुराना, हंसना, क्रोध, दुःख, भय आदि ) प्रकट नहीं होते या कम नज़र आते हैं-

खाना खाने में तकलीफें होती है- भोजन निगलना धीमा हो जाता है- गले में अटकता है- कम्पन के कारण गिलास या कप छलकते हैं- हाथों से कौर टपकता है- मुंह से पानी-लार अधिक निकलने लगता है- चबाना धीमा हो जाता है- ठसका लगता है, खांसी आती है-

आवाज़ धीमी हो जाती है तथा कंपकंपाती, लड़खड़ाती, हकलाती तथा अस्पष्ट हो जाती है, सोचने-समझने की ताकत कम हो जाती है और रोगी व्यक्ति चुपचाप बैठना पसन्द करता है- नींद में कमी, वजन में कमी, कब्जियत, जल्दी सांस भर आना, पेशाब करने में रुकावट, चक्कर आना, खडे होने पर अंधेरा आना, सेक्स में कमज़ोरी, पसीना अधिक आता है-

उपरोक्‍त वर्णित अनेक लक्षणों में से कुछ, प्रायः वृद्धावस्था में बिना पार्किन्‍सोनिज्‍म के भी देखे जा सकते हैं कभी-कभी यह भेद करना मुश्किल हो जाता है कि बूढे व्यक्तियों में होने वाले कम्पन, धीमापन, चलने की दिक्कत डगमगापन आदि पार्किन्‍सोनिज्‍म के कारण हैं-

पार्किन्सन रोग समूची दुनिया में, समस्त नस्लों व जातियों में, स्त्री पुरुषों दोनों को होता है- लेकिन पुरुषों में इसका असर थोड़ा ज़्यादा देखा गया है- यह मुख्यतया अधेड उम्र व वृद्धावस्था का रोग है- 50 की उम्र पार करने के बाद वैसे तो यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले हर सौ व्यक्तियों में से एक को यह होता है- विकसित देशो में वृद्धों का प्रतिशत अधिक होने से वहां इसके मामले अधिक देखने को मिलते हैं- इस रोग को मिटाया नहीं जा सकता है- वह अनेक वर्षों तक बना रहता है, बढता रहता है- इसलिये जैसे जैसे समाज में वृद्ध लोगों की संख्या बढती है वैसे-वैसे इसके रोगियों की संख्या भी अधिक मिलती है- वर्तमान में विश्व के 60 लाख से ज़्यादा लोग इसकी चपेट में हैं- अकेले अमेरिका में ही इससे दस लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हैं, लोगों की औसत उम्र बढ़ने (लाइफ एक्सपेक्टेंसी) के साथ-साथ भारत में भी इसके शिकारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है-

यह बीमारी 50 वर्ष की उम्र के बाद होती है- इससे मरीज़ की शारीरिक गतिविधियां धीमी हो जाती हैं और दिमाग भी सही ढंग से काम करना बंद कर देता है- यह मस्तिष्क के एक छोटे से गहरे केन्द्रीय भाग में स्थित सेल्स के डैमेज होने की वजह से होती है लेकिन आखिर ये सेल्स डैमेज क्यों होती हैं, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है- ब्रेन के एक ख़ास हिस्से बैसल गैंग्लिया में स्ट्रायटोनायग्रल नामक सेल्स (स्‍ट्राएटम की कोशिकाओं) होते हैं- सब्सटेंशिया निग्रा (शाब्दिक अर्थ काला पदार्थ) की न्यूरान कोशिकाओं की संख्या कम होने लगती है- वे क्षय होती है- उनकी जल्दी मृत्यु होने लगती है- आकार छोटा हो जाता है- स्‍ट्राएटम तथा सब्सटेंशिया निग्रा (काला पदार्थ) नामक हिस्सों में स्थित इन न्यूरान कोशिकाओं द्वारा रिसने वाले रासायनिक पदार्थों (न्‍यूरोट्रांसमिटर) का आपसी सन्तुलन बिगड जाता है-

इन सेल्स से निकलने वाला डोपामिन नामक केमिकल शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए न्यूरोट्रांसमीटर का काम करता है- उनके द्वारा रिसने वाला महत्त्वपूर्ण रसायन न्‍यूरोट्रांसमिटर 'डोपामीन' कम बनता है तथा एसीटिल कोलीन की मात्रा तुलनात्मक रूप से बढ जाती है-इससे इंसान का शारीरिक गतिविधियों पर से कंट्रोल हट जाता है- स्ट्रायनोटायग्रल के मरने का क्या कारण है, इससे अभी भी पर्दा नहीं उठ पाया है-

कुछ स्टडीज से यह पता लगा है कि पार्किन्सन से पीड़ित लगभग दस प्रतिशत मरीज़ों के परिवार में पहले भी इस तरह की समस्या देखी गई थी अर्थात यह वंशानुगत हो सकती है-

पार्किन्‍सन रोग का मस्तिष्क-

पार्किन्सन रोग व्यक्ति को अधिक सोच-विचार का कार्य करने तथा नकारात्मक सोच ओर मानसिक तनाव के कारण होता है-

किसी प्रकार से दिमाग पर चोट लग जाने से भी पार्किन्सन रोग हो सकता है- इससे मस्तिष्क के ब्रेन पोस्टर कंट्रोल करने वाले हिस्से में डैमेज हो जाता है-

कुछ प्रकार की औषधियाँ जो मानसिक रोगों में प्रयुक्‍त होती हैं- अधिक नींद लाने वाली दवाइयों का सेवन तथा एन्टी डिप्रेसिव दवाइयों का सेवन करने से भी पार्किन्सन रोग हो जाता है-

अधिक धूम्रपान करने, तम्बाकू का सेवन करने, फास्ट-फूड का सेवन करने, शराब, प्रदूषण तथा नशीली दवाईयों का सेवन करने के कारण भी पार्किन्सन रोग हो जाता है-

शरीर में विटामिन `ई´ की कमी हो जाने के कारण भी पार्किन्सन रोग हो जाता है-

तरह -तरह के इन्फेक्शन -मस्तिष्क में वायरस के इन्फेक्शन (एन्सेफेलाइटिस)-

मस्तिष्क तक ख़ून पहुंचाने वाले नलियों का अवरुद्ध होना -

मैंगनीज की विषाक्तता-

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बचाव और पर्मानेंट इलाज न सही, लेकिन सामान्य जीवन जीने के लिए दवाएं ज़रूर उपलब्ध हो चुकी हैं- ऐसे में डॉक्टर की सलाह और परिवार के सहयोग से मरीज़ की समस्या को कुछ हद तक कम किया जा सकता है- इस बीमारी को जड़ से खत्म करने वाला इलाज अभी उपलब्ध नहीं है-लिहाज़ा, इस बीमारी के पेशेंट को जीवनभर दवाई खानी पड़ सकती है- हालांकि दवाओं से रोकथाम हो जाती है- लेकिन बीमारी के असर को कम करने के लिए कई तरह की दवाएं उपलब्ध हैं, जो डोपामिन के स्त्राव को बढ़ाने में मदद करती हैं- लेकिन ये काफ़ी महंगी होती हैं- इनके साइड इफेक्ट्स भी बहुत ज़्यादा देखे जाते हैं, इसलिए विशेषज्ञ की देखरेख में ही ये दवाएं दी जाती हैं- सही तरीक़े से दवाई लेने से मरीज़ 30 साल जक जीवित रह सकता है- 

पार्किसन के मरीज़ों को दवाइयों का सेवन सही तरीक़े से करना चाहिए- इसके साथ ही इस बीमारी के लिए डीप ब्रेन स्टिम्युलेशन सर्जरी भी होने लगी है- दिल्ली में यह सुविधा केवल सिर्फ़ एम्स व आर्मी हॉस्पिटल में उपलब्ध है- यहां भी सर्जरी का खर्च लगभग पांच लाख रुपए आता है- मरीज़ों को संभल कर चलना चाहिए क्योंकि वे अचानक लड़खड़ाकर गिर सकते हैं, जिससे पैर हाथ पर चोटें आ सकती है- साथ ही उन्हें शारीरिक श्रम करने पर भी सावधानियां बरतनी चाहिए- बीमारी को जड़ से खत्म करने संबंधित दवाओं पर विश्व के जाने माने न्यूरोलाजिस्ट लगातार रिसर्च कर रहे हैं-

प्राकृतिक चिकित्सा से इलाज-

पार्किन्सन रोग को ठीक करने के लिए 4-5 दिनों तक पानी में नीबू का रस मिलाकर पीना चाहिए- इसके अलावा इस रोग में नारियल का पानी पीना भी बहुत लाभदायक होता है-

इस रोग में रोगी व्यक्ति को फलों तथा सब्जियों का रस पीना भी बहुत लाभदायक होता है- रोगी व्यक्ति को लगभग 10 दिनों तक बिना पका हुआ भोजन करना चाहिए-

सोयाबीन को दूध में मिलाकर, तिलों को दूध में मिलाकर या बकरी के दूध का अधिक सेवन करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है-

रोगी व्यक्ति को हरी पत्तेदार सब्जियों का सलाद में बहुत अधिक प्रयोग करना चाहिए-

रोगी व्यक्ति को जिन पदार्थो में विटामिन `ई´ की मात्रा अधिक हो भोजन के रूप में उन पदार्थों का अधिक सेवन करना चाहिए-

रोगी व्यक्ति को कॉफी, चाय, नशीली चीज़ें, नमक, चीनी, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए-

प्रतिदिन कुछ हल्के व्यायाम करने से यह रोग जल्दी ठीक हो जाता है-

पार्किन्सन रोग से पीड़ित रोगी को अपने विचारों को हमेशा सकरात्मक रखने चाहिए तथा खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए-

प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा से प्रतिदिन उपचार करे तो पार्किन्सन रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है-

जिन व्यक्तियों के शरीर में विटामिन 'डी' बड़ी मात्रा में मौजूद है, उनमें पार्किंसन बीमारी होने का ख़तरा कम होता है- सूरज की किरणें विटामिन 'डी' का बड़ा स्रोत हैं- बहुत ही कम ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनमें विटामिन 'डी' पाया जाता है- यदि शरीर में विटामिन 'डी' की मात्रा कम होती है तो उससे हड्डियों में कमोजरी, कैंसर, दिल की बीमारियों और डायबिटीज हो सकती है, लेकिन अब विटामिन 'डी' की कमी पार्किंसन की वजह भी बन सकती है-

आमतौर पर लोग अपनी थकान दूर करने के लिए चाय और कॉफ़ी पीते हैं-लेकिन क्या आप जानते है कि कॉफ़ी की ये चुस्कियां पार्किनसन जैसी गंभीर बीमारी के लिए वरदान साबित हो सकती हैं- क्योंकि लिस्बन यूनिवर्सिटी के अतंर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने ये दावा किया है कि कॉफ़ी में मौजूद कैफ़ीन से पार्किनसन होने का ख़तरा कम हो जाता है- कॉफ़ी पीने वालों में से 26 लोगों पर किए गए शोध के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि कॉफी पीने से पार्किसन का ख़तरा कम हो जाता है- रोज़ाना दो से तीन कप कॉफ़ी पीने से पार्किनसन होने की संभावना 14 फ़ीसदी कम हो जाती है- हालांकि अब तक इस बात का साफ़ तौर पर पता नहीं चल पाया है कि पार्किनसन से लड़ने में कैफ़ीन ही कारागार साबित हो रही है या कॉफ़ी में मौजूद दूसरे तत्व- फ़िलहाल इस मामले में शोध जारी है, वहीं कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि भारी मात्रा में चाय कॉफ़ी पीना सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है-

बहुत सारे मरीजों में पार्किन्‍सोनिज्‍म रोग की शुरुआत कम्पन से होती है - कम्पन अर्थात् धूजनी या धूजन या ट्रेमर या कांपना -

Upcharऔर प्रयोग-

16 जून 2016

नशे की लत उपचार

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आज समाज में हमारी युवा पीढ़ी दिनों-दिन Intoxication-नशे की ओर अग्रसर होती जा रही है और दुर्भाग्य से पिछले पांच से दस  सालों में यह बुराई बुरी तरह बढती जा रही है कुछ लोग अपनी मर्जी से नशा(Intoxication)करते हैं लेकिन कुछ शोकिया होते हैं जो बाद में अपने आप को नशे(Intoxication) की आग में झोंक देते हैं परन्तु कुछ कुसंगति के कारण इस लत का शिकार हो जाते हैं-

Intoxication


आजकल के कालेज लाइफ में ये रोग हमारी युवा पीढ़ी(Youth)को इस प्रकार लग गया है कि अनेको घर के बच्चे बर्बादी की कगार पे पहुँच गए है और घर वालो को तब पता चलता है जब वो पूरी तरह लिप्त हो जाते है इससे जादा गंभीर परिणाम यहाँ तक देखने को मिला है कि नशे(Intoxication)की लत पूरी करने के लिए राहजनी ,चोरी इत्यादि करने लगते है कालेज में लड़कियां भी खुद को स्मार्ट(Smart)बताने के लिए भी नशे(Intoxication)का सहारा ले रही है-जिसके गंभीर परिणाम शादी के बाद गर्भवती होने पे बच्चे पे भी पड़ते है-

हर कोई इस बुरी लत से अपने बच्चों और अन्य सदस्यों को बचाना चाहेगा-खुद नशे(Intoxication)की लत के शिकार कुछ लोग यही चाहते हैं की किसी तरह से इस लत से छुटकारा मिल जाए परन्तु उनका इस पर कोई वश नहीं-नशा(Intoxication)व्यक्ति की रगों में पहुँच कर व्यक्ति को अपना गुलाम बना लेता है व्यक्ति मानसिक रूप से पंगु हो जाता है -

यदि हर माँ बाप को यह जब यह ज्ञान हो जाये कि उनका बच्चा  नशा कर रह है तो शायद कुछ जिंदगियां बचा सकें मेरा अभिप्राय केवल इंतना है कि घरवालों को इसकी खबर ही नही लग पाती कि कब और कैसे उनके परिवार का सदस्य नशा करने लग गया है- नशे की लत को छुड़ाने के लिय सरकार ने नशा मुक्ति केन्द्र(De-addiction center)खोल रखे हैं -पता चलते ही वहां से मदद लेनी चाहिए-

यथासंभव यह प्रयास करना चाहिये जो कि नशा मुक्ति के लिए सीधा और सरल रास्ता है-मेरा यह लेख उन लोगो के लिए है जो नशा(Intoxication)छोड़ना चाहते है लेकिन छोड़ नही पाते नशे का संबंध मन मस्तिष्क से है-

शराब पीना और विशेषरूप से धूम्रपान के साथ शराब पीना बहुत ही खतरनाक है इससे अनेकों रोग जैसे कैंसर,महिलाओं में स्तन कैंसर, आदि रोग होते है-ऐसे बुरे व्यसन(आदत)एक मानसिक बीमारी है और इसे को छुडाने के लिए मानसिक बीमारी जैसे इलाज की आवश्यकता होती है-वात होने पर लोग चिंता और घबराहट को दबाने के लिए धूम्रपान का सहारा लेते है-पित्त बढने से शरीर के अन्दर गर्मी लेने की इच्छा होती है और धूम्रपान की इच्छा होती है तथा कफ बढने से शरीर के अन्दर डाली गयी तम्बाकू की शक्ति बढती है -

लेकिन आप इसका इलाज आयुर्वेद के माध्यम से कर सकते है और इसे बनाने के लिए18-20 जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है-सभी औषधियों को निश्चित मात्रा में मिलाकर यह दवा तैयार की जाती है इस दवा का कोई बुरा प्रभाव नहीं है यदि इसे शरीर के वजन और स्वास्थ्य अनुसार दवा की मात्रा तयकर लिया जाता है-इस दवा का प्रयोग किसी का शराब का नशा छुड़ाने, धूम्रपान का नशा छुड़ाने, और अन्य का नशा छुड़ाने (जैसे गुटका, तम्बाकू)में प्रयोग किया जा सकता है-

जड़ी बूटियों का विवरण और मात्रा निम्न है-

गुलबनफशा - 2 ग्राम
निशोध - 4 ग्राम
विदारीकन्द (कुटज) – 15 ग्राम
गिलोय – 4 ग्राम
नागकेसर - 3 ग्राम
कुटकी - 2 ग्राम
कालमेघ - 1 ग्राम
भ्रिगराज – 6 ग्राम
कसनी - 6 ग्राम
ब्राम्ही – 6 ग्राम
भुईआमला - 4 ग्राम
आमला - 11 ग्राम
काली हर्र  - 11 ग्राम
लौंग - 1 ग्राम
अर्जुन - 6 ग्राम
नीम – 7 ग्राम
पुनर्नवा - 11 ग्राम

कैसे प्रयोग करे-

उपर दी गयी सभी जड़ी -बूटियों को कूट और पीसकर पाऊडर बना लें -एक चम्मच दवा पाऊडर को एक दिन में दो बार खाना खाने के बाद पानी के साथ ले -इस दवा को खाने में मिलाकर भी दिया जा सकता है -जैसे -जैसे नशे की लत कम होने लगे इस दवा की मात्रा धीरे-धीरे कम कर दे -इस दवा का असर फ़ौरन पता चलने लगता है और लगभग दो माह में पूरी तरह से नशे की लत खत्म हो जाती है लेकिन दवा को कम मात्रा में और 2-3 दिन के अंतर के लगभग 6 माह दे जिससे नशे की लत जड़ से खत्म हो जाए-

ये दवा विज्ञापन वाले बना कर टी वी में आपको ही उलटे सीधे और मनमाने दामो पे बेचते है जबकि आप इसे घर पे ही बना सकते है -

एक और नशा मुक्ति उपाय-

लेख- राजीव दीक्षित द्वारा

एक आयुर्वेदिक ओषधि है जिसको आप सब अच्छे से जानते है और पहचानते हैं हमारे राजीव भाई ने उसका बहुत इस्तेमाल किया है लोगो का नशा छुड्वने के लिए और उस ओषधि का नाम है अदरक  और ये आसानी से सबके घर मे होती है  इस अदरक के टुकड़े कर लो छोटे छोटे और उस मे नींबू निचोड़ दो थोड़ा सा काला नमक मिला लो और इसको धूप मे सूखा लो  सुखाने के बाद जब इसका पूरा पानी खतम हो जाए तो इन अदरक के टुकड़ो को अपनी जेब मे रख लो जब भी दिल करे गुटका खाना है तंबाकू खाना है बीड़ी सिगरेट पीनी है  तो आप एक अदरक का टुकड़ा निकालो मुंह मे रखो और चूसना शुरू कर दो  और यह अदरक ऐसे भी अदभुत चीज है आप इसे दाँत से काटो मत और सवेरे से शाम तक मुंह मे रखो तो शाम तक आपके मुंह मे सुरक्षित रहता है  इसको चूसते रहो आपको गुटका खाने की तलब ही नहीं उठेगी  तंबाकू सिगरेट लेने की इच्छा ही नहीं होगी शराब पीने का मन ही नहीं करेगा -जैसे ही इसका रस लाड़ मे घुलना शुरू हो जाएगा आप देखना इसका चमत्कारी असर होगा आपको फिर गुटका -#तंबाकू शराब -बीड़ी सिगरेट आदि की इच्छा ही नहीं होगी- 

आप इसे सुबह से शाम तक चूसते रहो और आप ने ये 10 -15 -20 दिन लगातार कर लिया  तो हमेशा के लिए नशा आपका छूट जाएगा -

मेरा अनुभव-

पहले मुझे भी गुटखा खाने की आदत जाने कैसे पड़ गई थी तब जब ये आदत गंभीर रूप लेने लगी तो ये प्रयोग अदरक का किया- छुड़ाने के लिए हमने पांच साल पहले इसका उपयोग किया था मै पूरा दिन गुटका खाता था और कभी -कभी रात को भी खा के सोता था एक समय ये भी आया जब मुझे खाना खाने में तकलीफ होने लगी-

आप यकीन करे परिक्षण के लिए ये प्रयोग हमने स्वयं पे आजमाया और सिर्फ तीन दिन में ही मुझे गुटके से नफरत होने लगी लेकिन हमने इसे एक माह जारी रखा और तब से आज तक कभी भी मेरा मन नहीं हुआ है -

अदरक मैं ऐसे क्या चीज है यह अदरक मे एक ऐसे चीज है जिसे हम रसायनशास्त्र(केमिस्ट्री)मे कहते है इसे सल्फर-

अदरक मे सल्फर बहुत अधिक मात्रा मे है और जब हम अदरक को चूसते है जो हमारी लार के साथ मिल कर अंदर जाने लगता है तो ये सल्फर जब खून मे मिलने लगता है तो यह अंदर ऐसे हारमोनस को सक्रिय कर देता है-जो हमारे नशा करने की इच्छा को खत्म कर देता है और विज्ञान की जो रिसर्च है सारी दुनिया मे वो यह मानती है की कोई आदमी नशा तब करता है जब उसके शरीर मे सल्फर की कमी होती हैतो उसको बार बार तलब लगती है बीड़ी सिगरेट तंबाकू आदि की-तो सल्फर की मात्रा आप पूरी कर दो बाहर से ये तलब खत्म हो जाएगी -इसका राजीव भाई ने हजारो लोगो पर परीक्षण किया और बहुत ही सुखद प्रणाम सामने आए है-बिना किसी खर्चे के शराब छूट जाती है बीड़ी सिगरेट शराब गुटका आदि छूट जाता है-तो आप इसका प्रयोग करे -

अब आप ये सब नहीं कर सकते है तो होमिओपेथी की भी दवा है लीजिए अब  इसके उपयोग का एक दूसरे उपयोग का तरीका भी जाने-

अदरक के रूप मे सल्फर भगवान ने बहुत अधिक मात्रा मे दिया है और सस्ता भी है इसी सल्फर को आप होमिओपेथी की दुकान से भी प्राप्त कर सकते हैं-आप कोई भी होमिओपेथी की दुकान मे चले जाओ और विक्रेता को बोलो मुझे सल्फर नाम की दवा  दे दो-वो दे देगा आपको शीशी मे भरी हुई दवा दे देगा और सल्फर नाम की दवा होमिओपेथी मे पानी के रूप मे आती है प्रवाही के रूप मे आती है जिसको हम  घोल(Dilution)भी कहते है अँग्रेजी मे -

यह पानी जैसे आएगी देखने मे ऐसे ही लगेगा जैसे यह पानी है ये 5 मिली लीटर दवा की शीशी बीस या तीस रूपये की आती है और उस दवा का एक बूंद जीभ पर डाल लो सवेरे सवेरे खाली पेट फिर अगले दिन और एक बूंद डाल लो -ये 3 खुराक लेते ही 50 से 60 % लोग की दारू छूट जाती है  और जो ज्यादा पियक्कड  है जिनकी सुबह दारू से शुरू होती है और शाम दारू पर खतम होती है  वो लोग हफ्ते मे दो दो बार लेते रहे तो एक दो महीने तक करे बड़े बड़े पियक्कड की दारू छूट जाएगी -बस हो सकता है कि दो या तीन महीने का समय लगे - यही सल्फर अदरक मे होता  है और इसका अर्क ही होमिओपेथी की दुकान मे भी उपलब्ध है आप आसानी से खरीद सकते है लेकिन जब आप होमिओपेथी की दुकान पर खरीदने जाओगे तो वो आपको पुछेगा कितनी ताकत (पोटेंसी)की दवा दूँ आप उसको कहे 200 potency की दवा देदो या आप सल्फर 200 कह कर भी मांग सकते है.लेकिन जो बहुत ही पियकर है उनके लिए आप 1000 Potency की दवा ले- अगर समाज सेवा करनी है तो आप 200 मिली लीटर का बोतल खरीद लो एक 150 से रुपए मे मिलेगी और आप उससे 10000 लोगो की शराब छुड़वा सकते हैं-लेकिन साथ मे आप मन को मजबूत बनाने के लिए रोज सुबह बायीं नाक से सांस ले  और अपनी इच्छा शक्ति मजबूत करे-

बहुत ज्यादा चाय और काफी पीने वालों के शरीर मे आर्सेनिक(ARSENIC)तत्व की कमी होती है,उसके लिए आप ARSENIC- 200 का प्रयोग करे-चाय और काफी भी छुट जायेगी -

गुटका,तंबाकू,सिगरेट,बीड़ी पीने वालों के शरीर मे फास्फोरस(PHOSPHORUS)तत्व की कमी होती है उसके लिए आप PHOSPHORUS 200 का प्रयोग करे ये गुटका,तंबाकू,सिगरेट,बीड़ी इत्यादि छुडा देगा -

शराब पीने वाले मे सबसे ज्यादा सल्फर (SULPHUR)तत्व की कमी होती है उसके लिए आप SULPHUR 200 का प्रयोग करे ये शराब को छुडा देता है लेकिन हो सके तो आप बाज़ार में मिलने वाली अदरक से ही शुरुवात करे आप को इससे ही पूरा लाभ मिल जाएगा-

Upcharऔर प्रयोग-

15 जून 2016

Krishna-Arjuna Dialogue Geetika-कृष्ण-अर्जुन संवाद गीतिका

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Krishna-Arjuna Dialogue Geetika

महाभारत युद्ध में जब अर्जुन को मोह हो जाता है और वो अपने पितामह और अपने बंधू-बंधुओं के समक्ष युद्ध करने से इनकार कर देता है तो भगवान् श्री कृष्ण अपना विराट-स्वरूप अर्जुन को दिखाते है और कहते है अर्जुन तुम किसी का वध नहीं कर रहे हो ये तो हमारे अंदर समाते जा रहे है मेरा अवतार धर्म स्थापना के लिए हुआ है तुम तो निमित्त मात्र हो तब अर्जुन का मोह भंग होता है-ये सुंदर पंक्तियाँ हमने कही पढ़ी थी और हमें बहुत पसंद आई -शायद आपको भी पसंद आये -आप इसे शांत भाव से लय में पढ़े आनंद आएगा-इसमें श्रीकृष्ण और अर्जुन - दोनों के संवाद निहित हैं -

"कायरपने से हो गया सब नष्ट सत्य स्वभाव है 
मोहित हुई मति ने भुलाया धर्म का भी भाव है 
आया शरण मैं आपकी हूँ शिष्य , शिक्षा दीजिए
निश्चित कहो, कल्याणकारी कर्म क्या, मेरे लिए? "

"नि:शौच्य का कर शौच कहता, बात प्रज्ञावाद की 
जीते मरे की विज्ञजन, चिंता नहीं करते कभी 
मेरा लगाता ध्यान , कहता ॐ अक्षर ब्रह्म ही 
तन त्याग जाता जीव जो , पाता परम गति है वही 
जो जन मुझे भजते सदैव , अनन्य भावापन्न हो 
उनका स्वयं मैं ही चलाता , योगक्षेम प्रसन्न हो "

"भगवन ! पुरातन पुरुष हो तुम , विश्व के आधार हो 
हो आदि दैव, तथैव उत्तम धाम अपरम्पार हो 
ज्ञाता तुम्ही हो जानने के योग्य भी भगवन्त हो 
संसार में व्यापे हुए हो , देव! देव अनंत हो 
तुम वायु , यम, पावक, वरुण एवं तुम्ही राकेश हो 
ब्रह्मा तथा उनके पिता भी आप ही अखिलेश हो 
हे देव देव प्रणाम देव प्रणाम सहसों बार हो 
फिर फिर प्रणाम प्रणाम नाथ प्रणाम बारम्बार हो 
सानन्द सन्मुख और पीछे से प्रणाम सुरेश हो 
हरि बार बार प्रणाम चारों ओर से सर्वेश हो 
हे वीर्य , शौर्य अनन्त बलधारी , अतुल बलवंत हो 
व्यापे हुए सब में , इसी से सर्व, हे भगवंत हो 
तुमको समझ अपना सखा , जाने बिना महिमा महा 
यादव सखा हे कृष्ण ! प्यार ,प्रमाद या हठ से कहा
हे हरि हंसाने के लिए आहार और विहार में 
सोते अकेले जागते सबमें किसी व्यवहार में 
सबकी क्षमा मैं मांगता , जो कुछ हुआ अपराध हो 
संसार में तुम अतुल , अपरम्पार और अगाध हो 
सारे चराचर के पिता हो, आप जग आधार हो 
हरि ! आप गुरुओं के गुरू . अति पूज्य अपरम्पार हो 
त्रेलौक्य में तुमसा प्रभु ! कोई कहीं भी है नहीं 
अनुपम , अतुल्य, प्रभाव बढकर , कौन फिर होगा कहीं ?
इस हेतु वंदन योग्य ईश! शरीर चरणों में किये 
मैं आपको करता प्रणाम , प्रसन्न करने के लिए 
ज्यों तात सुत के , प्रिय प्रिया के मित्र , सहचर अर्थ हैं 
अपराध मेरा आप त्यों ही, सहन हेतु समर्थ हैं"

"तज धर्म सारे एक मेरी ही शरण को प्राप्त हो 
मैं मुक्त पापों से करुँगा, तू न चिंता व्याप्त हो 
हे पार्थ! मन की कामना जब छोड़ता है जन सभी 
हो आप आपे में मगन , दृढप्रज्ञ होता है तभी 
सुख में न चाह, न खेद जो दु:ख में , कभी अनुभव करे 
थिर बुद्धि वह मुनि;   राग एवं क्रोध, भय से जो परे
शुभ या अशुभ , जो भी मिले , उसमें न हर्ष , न शोक हो 
नि:संदेह जो सर्वत्र है , थिर बुद्धि ही उसको कहो 
हे पार्थ ! ज्यों कछुआ समेटे अंग चारों छोर से 
थिर बुद्धि मन,  यों इन्द्रियां सिमटें विषय की ओर से 
होते विषय सब दूर हैं , आहार जब जन त्यागता 
रस किन्तु रहता , ब्रह्म को कर प्राप्त , वह भी भागता 
कौन्तेय ! करते यत्न, इन्द्रियदमन हित, विद्वान हैं 
मन किन्तु , बल से खींच लेती , इन्द्रियां बलवान हैं . 
उन इन्द्रियों को मार बैठे योगयुत मत्पर हुआ 
आधीन जिसके इन्द्रियां ; दृढप्रज्ञ वह नित नर हुआ 
चिंतन विषय का संग , विषयों में बढ़ाता है तभी 
फिर संग से हो कामना , फिर कामना से क्रोध भी 
फिर क्रोध से है मोह , सुधि को मोह करता भ्रष्ट है 
यह सुधि गए फिर बुद्धि विनशे, बुद्धि विनशे नष्ट है 
पाकर प्रसाद , पवित्र जन के दु:ख कट जाते सभी 
जब चित्त, नित्य प्रसन्न रहता , बुद्धि दृढ होती तभी 
सब ओर से परिपूर्ण जलनिधि में सलिल, जैसे सदा 
आकर समाता ;  किन्तु अविचल, सिन्धु रहता सर्वदा 
इस भांति ही जिसमें विषय जाकर समा जाते सभी 
वह शान्ति पाता है; न पाता काम , कामी जन कभी
अभ्यास पथ से ज्ञान उत्तम , ज्ञान से गुरु ध्यान है 
गुरु ध्यान से फल त्याग करता , त्याग शान्ति प्रदान है 
दृष्टा व अनुमन्ता सदा भक्ता प्रभोक्ता शिव महा 
इस देह में परमात्मा उस पर पुरुष को है कहाँ?"

"तुम परम ब्रह्म, पवित्र एवं परम धाम, अनूप हो
 हो आदि देव अनंत, अविनाशी, अनन्त स्वरूप हो." 


"हरि सम जग कछु वस्तु नहीं , प्रेम पन्थ सम पन्थ !
सद्गुरु सम सज्जन नहीं , गीता सम नहीं ग्रन्थ  !! "

लेखक-अज्ञात 

13 जून 2016

महिलाओं की Excitement-उत्तेजना के लिए

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शादीशुदा स्त्री और पुरुष का संसर्ग(Contact)आदिकाल से है आज भी पढ़े-लिखे लोग भी इस पर खुल कर बात करने से संकोच करते है और यही संकोच मानसिक कुंठा(Mental frustration)बन जाती है जिस तरह से हर मामले में आप खुल कर आपस में बात करते है इस समस्या के निदान के लिए भी पति-पत्नी को खुल कर बात करनी चाहिए-

Excitement


पति अपनी पत्नी से जो चाहता है यदि वो संतुष्टि नहीं प्राप्त होती है तो वह गलत संसाधनों की ओर बढ़ जाता है और फिर गृहस्थ जीवन में एक कडवाहट सी घुल जाती है इसलिए यदि स्त्री में सेक्स उत्तेजना(Excitement) कम है तो भी खुल कर बताये और उपयुक्त इलाज करे-

यदि आप अपने जीवन साथी की सेक्स संबंधो में रुझान कम रखती है और उनको पूर्ण संतुष्ट नहीं कर सकती तो आपकी शादी-शुदा जिन्दगी में समस्याएं पैदा होती है कहीं-कहीं ये तलाक का कारण भी बन जाती है  वास्तव में यदि आप अपना वैवाहिक जीवन सुखी बनना चाह रही है तो आपको कुछ प्रयोग अवश्य आजमाना चाहिए-गर्भवस्था रोकने वाली दवाएं भी आपकी कामोत्तेजना(Arousal)पे विपरीत प्रभाव पैदा करती है इसके साइड इफेक्ट(side effect)से बचना चाहिए-

आप का रुझान कामेच्छा के प्रति कम है तो आप कुछ प्रयोग अपनाए-

  1. आपके किचन में पाया जाने वाला अजवाइन(celery)आपके लिए कामेच्छा को बढाने में विशेष सहायक है इसमें एंड्रोस्टेरोन(Androsterone)होता है इसलिए यौन संबंध(Sex)के लिए अच्छा है- यह एक बिना गंध वाला हार्मोन(Hormone)है जो कि सेक्स उत्तेजना(Sex Stimulation)के लिए वास्तव में बहुत प्रभावशाली है-
  2. प्रतिदिन एक-दो सेब(Apple)का सेवन करे इसमें फ्लोरीजिन(Phlorizin)पाया जाता है फ्लोरीजिन का असर बहुत हद तक स्त्री सेक्स हॉरमोन ‘एस्ट्राडियोल’ से मिलता जुलता है इसलिए स्त्री को एक से दो सेब प्रतिदिन सेवन करना ही सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए खाना चाहिए-
  3. फ्लोरीजिन रेड वाइन और चाकलेट(Red wine and chocolate)में भी पाया जाता है ये योनी(vagina)की तरफ जाने वाले खून की गति को बढ़ा देता है खून की गति तेज होने से कामोत्तेजना(Excitement)बढ़ जाती है-
  4. एवोकैडो(Avocado)एक फल है जिसमे फोलिक एसिड(Folic acid)एक पोषक तत्व है जो कि महिलाओं के लिए बहुत जरुरी है चूँकि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले शारीरिक गठन में कमजोर होती हैं इसलिए यह उन्हें ताकत और ऊर्जा प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है- इसमें पोटैशियम और विटामिन B6 की अधिकता भी होती है- इसके सेवन से आपकी कामोत्तेजना में निरंतर वृधि होती है-

Upcharऔर प्रयोग-

12 जून 2016

Women disease and biochemic medications-महिलाओं के रोग और बायोकैमिक दवाएं

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बायोकैमिक चिकित्सा पध्दति हानि रहित व लवण चिकित्सा पध्दति है इस पध्दति में मात्र 12 लवणीय दवाएं है, जो शरीर के लिए आवश्यक है इन दवाओं की और विशेषता यह है कि ये अधिक मात्रा में दे देने या सभी 12 दवाएं एक साथ दे देने पर भी शरीर को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचती यहां हम आपकी जानकारी के लिए सभी 12 दवाओं का महिलाओं से संबंधित विभिन्न रोगों से जुड़ा महत्व बता रहे हैं-

Women disease and biochemic medications

कल्केरिया फ्लोर(Calcarea फ्लोर)-

यह दवा गर्म अवस्था में गर्भाशय की संकुचन स्थिति ठीक करती है तथा गर्भाशय को मजबूती प्रदान करती है तथा मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव को सही स्थिति प्रदान करती है-

कल्केरिया फॉस (Calcarea Foss )-

यह प्रसव कमजोरी, मासिक धर्म, स्तन पीड़ा, कमर दर्द, श्वेत प्रदर को ठीक करती है- इससे कैल्शियम की कमी को भी दूर किया जा सकता है-

कल्केरिया सल्फ (Calcarea Slf)-

योनि में खुजली, स्तनों में दर्द, मासिक धर्म की अनियमित स्थिति को ठीक करने के लिए यह दवा उत्तम है-

फेरम फॉस(Ferrum Foss)-

यह लवण मासिक धर्म विकृति, शुष्क योनि आदि रोगों में बहुत लाभप्रद है-

काली म्यूर(Kali mur)-

यह एक तरह से कीटाणुनाशक है- गर्भाशय के घाव, प्रसूति ज्वर में तो बहुत फायदेमंद है-

काली सल्फ (Kali Slf)-

मासिक धर्म में देरी अथवा अनियमितता सूजाक में बहुत फायदेमंद है-

मैग्नीशिया फॉस(Magnesia Foss)-

मासिक धर्म के प्रारंभ के समय के कष्ट में डिम्ब ग्रंथियों के दर्द में यह दवा देनी चाहिए-

नेट्रम म्यूर(Natrum mur)-

बांझपन, योनि में जलन, योनि की भीतरी जलन, मैथुन क्रिया के प्रति उदासीनता या उत्तेजना की कमी अथवा स्तनों में दूध की कमी हो तो इस साल्ट का सेवन करना चाहिए-

नेट्रम फॉस(Natrum Foss)-

तिथि से पूर्व मासिक धर्म आना, बदबूदार श्वेत प्रदर, योनि से बदबू आए अथवा बांझपन की स्थिति हो तो इस दवा का सेवन लाभप्रद रहता है-

नेट्रम सल्फ(Natrum Slf)-

मासिक धर्म के दिनों में अपच, पेट दर्द, योनि के छिलने से उत्पन्न पीड़ा हो तो इस दवा का सेवन करें-

काली फॉस(Kali Foss)-

मासिक धर्म में काम इच्छा, शरीर में पीड़ा, अत्यधिक रक्तस्राव हो तो काली फॉस का सेवन करें-

साइलीशिया (Silicea)-

दुर्गन्धयुक्त मासिक धर्म, स्तन के घाव, स्तनों में गांठ होने या कड़े हो जाने पर, योनि के घाव, मासिक धर्म के दिनों में कब्ज हो तो यह लवण दे सकते हैं-

जहर करेगा स्वर संबंधी विकारों का उपचार-

सर्वाधिक असरदार और प्राकृतिक विष माने जाने वाले बोटलिनम या बोटॉक्स का प्रयोग अब तक आंख की एठी हुई मांसपेशियों को ढीला करने और चेहरे की झुर्रिया व झाईयां दूर करने के लिए उसकी मांसपेशियां शिथिल करने में ही किया जाता रहा है किन्तु अब गले की सर्जरी में आवाज गंवा चुके मरीजों की आवाज वापस लाने में भी बोटाक्स नामक यह अत्यन्त तीव्र विष प्रभावी दवा का काम कर रहा है- गले के कैंसर या ऐसे ही अन्य मुख व कंठ विकारों में प्राय: रोगियों का स्वरयंत्र निकाल दिया जाता है और उन्हें अपने कंठ की मांसपेशियां स्वत: ही नियंत्रित करनी पड़ती है जबकि आमतौर पर स्वरयंत्र ही हवा के जरिये आवाज का नियंत्रण करता है- ऐसे में आपरेशन के बाद सामान्य रूप से अपनी प्राकृतिक आवाज पुन: पाना बहुत मुश्किल होता है- कंठ की मांस-पेशियों का नियंत्रण स्वयं करते हुए कई बार वे एेंठने लगती हैं और आवाज ठीक से नहीं आ पाती-

टैक्सास विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार स्वरयंत्र के अभाव में कंठ की मांसपेशियों पर बोटाक्स विष का प्रयोग उन्हें शिथिल कर देता है, जिससे उनमें ऐठन नहीं हो पाती और आवाज लगातार ठीक से आती रहती है। वैज्ञानिक दल ने करीब 23 रोगियों पर बोटाक्स का प्रयोग किया, जिनमें से 15 रोगियों की आवाज में फर्क पहले ही इंजेक्शन में आ गया जबकि दूसरा एंजेक्शन देने पर चार अन्य रोगियों की आवाज वापस आ गयी और शेष चार में से एक रोगी की आवाज तीसरा इंजेक्शन देने पर वापस आ गयी। इस महत्वपूर्ण शोध से उत्साहित टैक्सास विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का मानना है कि स्वर संबंधी विकारों के उपचार में बोटाक्स विष बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है-

इसे भी देखे-

Treatment Of Prostate Gland-प्रोस्टेट ग्लैंड का होम्योपैथी उपचार 

Upcharऔर प्रयोग-

11 जून 2016

Prostate Gland-प्रोस्टेट ग्लैंड का उपचार

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पिछली पोस्ट में हमने प्रोस्टेट ग्लैंड के लक्षण और उसकी देशी नुस्खे के बारे में बताया था इस पोस्ट में आपको Prostate Gland(प्रोस्टेट ग्लैंड)के होम्योपैथी दवाओं की जानकारी दे रहे है वैसे तो हो सके तो किसी योग्य और अनुभवी होम्योपैथी डॉक्टर से सलाह ले कर अगर प्रयोग करे तो बहुत उपयुक्त होगा क्युकि डॉक्टर आपके सभी लक्षणों के आधार पर ही मेडिसिन का चुनाव करता है-

Prostate Gland


इस समस्या के उपचार में अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर- मैं प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि के लिए कुछ सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक औषधियों की एक सूची दे रहा हूँ-ये दवाये होम्योपैथिक मटेरिया मेडिका में दिए गए दर्ज लक्षणों के आधार पर इस्तेमाल किया गया है होम्योपैथिक Repertories में इन दवाओं और होम्योपैथिक मटेरिया Medicas का उल्लेख है डॉ हैनिमैन तथा डॉ हेरिंग- डॉ केंट और डॉ एलन की तरह होम्योपैथी के दिग्गजों द्वारा होम्योपैथिक प्रस्तुत किये गए है-

Baryta Carb- कुछ उम्र दराज लोगो के लिए Baryta Carb प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि के लिए सबसे अच्छा होम्योपैथिक औषधियों में से एक है जिन लोगो को लगता है कि पेशाब लगी है लेकिन होता बूंद-बूंद है तथा पेशाब में जलन सी महसूस होती है उसका मन बैचेन रहता है कामेक्षा की कमी महसूस होती है पैर में अधिक पसीना आता है ठण्ड अधिक महसूस करता हो जादा ठण्ड सहन नहीं होती है ऐसे रोगी को Baryta Carb का उपयोग करना उत्तम है -


डिजिटालिस(Digitalis)- प्रोस्टेट ग्रंथि के लिए सबसे अच्छा होम्योपैथिक औषधि है जिन मामलो में मूत्र की रुकावट के साथ ह्रदय रोग की शिकायत है उस स्थिति में प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि के लिए सबसे अच्छा होम्योपैथिक औषधियों में से एक है कमजोर नाडी रुक-रुक कर चलना या धीमी गति में भी लाभदायक  है-यह भी प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि से उत्पन्न होने वाली मूत्र वाहिनी अवरोधक की एक अच्छी दवा है-

Staphysagria- dysuria के साथ वृद्धि प्रोस्टेट ग्रंथि के लिए सबसे अच्छा होम्योपैथिक दवाओं में से एक है जब पेशाब रुक-रुक कर होती है और आपके मूत्राशय पे आपको दबाव की अनुभूति होती है आपको जब लगता है अभी पेशाब पूरी तरह मूत्राशय थैली से खाली नहीं हुआ है मूत्रमार्ग में जलन हो रही है लेकिन वास्तव में वहां एक एक बूंद भी पेशाब नहीं है तब आपको सतपिसगृा का प्रयोग लाभदायक है -

Conium(कोनियम)- ये भी प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि के लिए सबसे अच्छा होम्योपैथिक दवाओं में से एक है ये ग्रन्थियो पे चोट सम्बंधित या सख्त ग्रन्थियों की कठोरता के लिए उपयुक्त है जब आपको लगता है कि ग्रन्थियां पत्थर की तरह कठोर है और पेशाब में कठिनाई हो रही है आपका मूत्र शुरू होता है और बंद हो जाता है और फिर शुरू होता है पेशाब ख़त्म होना के महसूस होता रहता है -

Prostate Gland


Sabal serrulata- होम्योपैथिक चिकित्सा Sabal serrulata बीपीएच के लिए एक उत्कृष्ट और विशिष्ट उपचार है ये प्रोस्टेट बीपीएच से प्रोस्टेट कैंसर को लेकर समस्याओं के लिए अनुपम औषिधि है -यौन इच्छा का कम होना दर्दनाक इरेक्शन तथा जनन अंग को छूने पर ठंडा महसूस हो वर्षण में सूजन के लिए प्रयोग किया जा सकता है-


संपर्क पता-

KAAYAKALP

Homoeopathic Clinic & Research Centre

23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011

Director & Chief Physician:

Dr.Satish Saxena D.H.B.

Regd.N.o.7407 (M.P.)

Mob :  09977423220(फोन करने का समय - दिन में 12 P.M से शाम 6 P.M)(WHATSUP भी  यही नम्बर है)

Dr. Manish Saxena

Mob : -09826392827(फोन करने का समय-सुबह 10A.M से शाम4 P.M.)(WHATSUP भी  यही नम्बर है )

Clinic-Phone - 0751-2344259 (C)

प्रस्तुति- Upcharऔर प्रयोग-

10 जून 2016

अंजीर Fig कितना गुणकारी है

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अंजीर(Fig) नाशपाती के आकार का एक छोटा फल होता है इसमें कोई विशेष सुगंध नहीं होती है लेकिन ये  रसीला और गूदेदार होता है रंग में यह हल्का पीला या गहरा सुनहरा या गहरा बैंगनी हो सकता है छिलके के रंग का स्वाद पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता पर इसका स्वाद इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कहाँ उगाया गया है और यह कितना पका है इसे पूरा का पूरा छिलका बीज और गूदे सहित खाया जा सकता है अंजीर(Fig) कैलशियम व रेशों व विटामिन ए, बी, सी से भरपूर होता है-अंजीर में कैल्शियम बहुत होता है, जो हड्डियों को मजबूत करने में सहायक होता है-

So Is Good Figs

एक अंजीर में लगभग 30 कैलरी होती हैं एक सूखे अंजीर में कैलोरी 49, प्रोटीन 0.579 ग्राम, कार्ब 12.42 ग्राम, फाइबर 2.32 ग्राम, कुल फैट 0.222 ग्राम, सैचुरेटेड फैट 0.0445  ग्राम, पॉलीअनसैचुरेटेड फैट 0.106, मोनोसैचुरेटेड फैट 0.049 ग्राम, सोडियम 2 मिग्रा और विटामिन ए, बी, सी युक्त होता है-

अंजीर के गुण-

यदि खून की खराबी(Blood disorders) है तो सूखे अंजीर(dried figs) को दूध और मिश्री के साथ लगातार हफ्ते भर सेवन करने से आपको लाभ होता है आपको अगर कब्ज है तो अंजीर खाने से कब्ज दूर हो जाती है माजून अंजीर 10 ग्राम को सोने से पहले लेने से कब्ज़(Constipation) में लाभ होता है-तथा गैस और एसीडिटी(Gas and hyperacidity) से भी राहत मिलती है-

साधारण कब्ज में गरम दूध में सूखे अंजीर उबाल कर सेवन से सुबह दस्त साफ होता है- इससे कफ(cough) बाहर आ जाता है- सूखे अंजीर को उबाल कर बारीक पीस कर गले की सुजन या गांठ पर बांधी जाए तो लाभ पहुंचता है- ताजे अंजीर खा कर साथ दूध का सेवन करना शक्तिवर्धक(Energizer) होता है- डायबिटीज(Diabetes) के रोगी को अंजीर से लाभ पहुंचता है-

अंजीर खाकर ऊपर से दूध पीना अत्यंत शक्तिवर्धक एवं वीर्यवर्धक(Viryvrdhk) होता है खून की खराबी में सूखे अंजीर को दूध एवं मिश्री के साथ लगातार एक सप्ताह सेवन करने से खून के विकार नष्ट हो जाते हैं-


यदि रक्त विकार है तो 10 मुनक्के और 5 अंजीर 200 मिलीलीटर दूध में उबालकर खा लें फिर ऊपर से उसी दूध का सेवन करें इससे रक्तविकार(Haemopathy) दूर हो जाता है-

अस्थमा(Asthma)की बीमारी में प्रात:काल सूखे अंजीर का सेवन लाभकारी है अस्थमा की बीमारी में रोज सुबह सूखे अंजीर का प्रयोग लाभ देता है तथा अंजीर कफ को जमने से भी रोकता है-

कम पोटैशियम और अधिक सोडियम लेवल के कारण हाइपरटेंशन की समस्या पैदा हो जाती है चूँकि अंजीर में पोटैशियम ज्यादा होता है और सोडियम कम होता है इसलिए यह हाइपरटेंशन(Hypertension) की समस्या होने से बचाता है-

दो अंजीर को बीच से आधा काटकर एक ग्लास पानी में रात भर के लिए भिगो दें सुबह उसका पानी पीने से अंजीर खाने से रक्त संचार बढ़ता है-

तीन से चार पके अंजीर दूध में उबालकर रात्रि में सोने से पूर्व खाएं और ऊपर से उसी दूध का सेवन करें- इससे कब्ज और बवासीर में लाभ होता है-खाना खाते समय अंजीर के साथ शहद का प्रयोग करने से कब्ज की शिकायत नहीं रहती है-

प्रतिदिन थोड़े-थोड़े अंजीर खाने से पुरानी कब्जियत में मल साफ और नियमित आता है- 2 से 4 सूखे अंजीर सुबह-शाम दूध में गर्म करके खाने से कफ की मात्रा घटती है इससे कफ बाहर आ जाता है तथा रोगी को शीघ्र ही आराम भी मिलता है तथा शरीर में नई शक्ति आती है और दमा (अस्थमा) रोग मिटता है-

यदि मुंह में छाले हो गए है तो अंजीर का रस मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है-

अंजीर का रस 2 चम्मच शहद के साथ प्रतिदिन सेवन करने से दोनों प्रकार के प्रदर रोग नष्ट हो जाते हैं-

अंजीर के पौधे से दूध निकालकर उस दूध में रुई भिगोकर सड़ने वाले दांतों के नीचे रखने से दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं तथा दांतों का दर्द मिट जाता है-

पके हुए अंजीर को बराबर की मात्रा में सौंफ के साथ चबा-चबाकर सेवन करें- इसका सेवन 40 दिनों तक नियमित करने से शारीरिक दुर्बलता दूर हो जाती है-

कच्चे अंजीर का दूध समस्त त्वचा सम्बंधी रोगों में लगाना लाभदायक होता है अंजीर का दूध लगाने से खुजली युक्त फुंसी और दाद मिट जाते हैं बादाम और छुहारे के साथ अंजीर को खाने से दाद, दिनाय (खुजली युक्त फुंसी) और चमड़ी के सारे रोग ठीक हो जाते है-

अंजीर के पेड़ की छाल को पानी के साथ पीस लें फिर उसमें 4 गुना घी डालकर गर्म करें अब इसे हरताल की भस्म के साथ सेवन करने से श्वेत कुष्ठ मिट जाता है-

अंजीर के कच्चे फलों से दूध निकालकर सफेद दागों पर लगातार 4 महीने तक लगाने से यह दाग मिट जाते हैं-

पका हुआ अंजीर लेकर फिर छीलकर उसके आमने-सामने दो चीरे लगाएं- इन चीरों में शक्कर भरकर रात को ओस में रख दें- इस प्रकार के अंजीर को 15 दिनों तक रोज सुबह खाने से शरीर की गर्मी निकल जाती है और रक्तवृद्धि होती है-

अंजीर और गोरख इमली (जंगल जलेबी) 5-5 ग्राम एकत्रकर प्रतिदिन सुबह को सेवन करने से हृदयावरोध  तथा श्वासरोग का कष्ट दूर होता है-

सूखे अंजीर के टुकड़े और छिली हुई बादाम गर्म पानी में उबालें फिर इसे सुखाकर इसमें दानेदार शक्कर, पिसी इलायची, केसर, चिरौंजी, पिस्ता और बादाम बराबर मात्रा में मिलाकर 8दिन तक गाय के घी में पड़ा रहने दें और बाद में रोजाना सुबह 20 ग्राम तक सेवन करें- छोटे बालकों की शक्तिक्षीण के लिए यह औषधि बड़ी हितकारी है-

जिन बच्चों का लीवर बढ़ जाता है उनको 4-5 अंजीर, गन्ने के रस के सिरके में गलने के लिए डाल दें और फिर 4-5 दिन बाद उनको निकालकर 1 अंजीर सुबह-शाम बच्चे को देने से यकृत रोग की बीमारी से आराम मिलता है-

Upcharऔर प्रयोग-

Dreams-सपने और इलाज

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वैसे तो हर व्यक्ति सपने(Dreams) देखता है कोई सोते हुए और कोई-कोई तो जागती आँखों से भी सपने देखता है और जागती आँखों के सपने के लिए एक ही इलाज है कर्म करना -अब आते है सोते हुए सपने देखने वालों की बात पर -सपनों का एक रहस्यमयी संसार(Mysterious world)है और अलग-अलग तरीके से विद्वानों ने इसकी व्याख्या भी की है ज्योतिष में सपनो की व्याख्या बिलकुल ही अलग ढंग से की गई है बस इसकी एक ही खासियत है इसे देखने वाला ही अनुभव करता है इसे आप किसी के साथ नहीं देख सकते है इसे देखने वाला व्यक्ति स्वयं भोगी होता है-

Dreams


आइये जाने सपने कैसे-कैसे होते है और हम इनका होम्योपैथी द्वारा क्या इलाज कर सकते है-

कुछ सपने आपकी वास्तविक जिन्दगी(Real life)से जुड़े होते है और कुछ सपने आपके वास्तविक जीवन से अलग होते है -हम अपने जीवन में रोजमर्रा के काम करते है आपने अनुभव किया होगा कुछ काम अधूरे भी रह जाते है और हम मानसिक रूप से गहराई से उसके बारे में सोचते है फिर जब आप सोते है तो आप को उस अधूरे कार्य से सम्बंधित सपने दिखाई देते है-

कुछ सपने येसे भी होते है जिनका आपकी वास्तविक जिन्दगी(Real life) से कुछ भी लेना देना नहीं होता है बस ये अचानक ही दीखते है जिनके बारे में आपने कभी सोचा तक नहीं होगा- ये सपने अपूर्ण इक्षाओं किसी भय आदि पे आधारित भी हो सकते है और अचानक नींद खुलने पर इनका दूर तक कोई वास्ता नहीं होता है-

इस प्रकार के भयानक सपने को देखकर कुछ लोग भयाक्रान्त हो जाते है और कभी कभी कुछ लोग डिप्रेशन(depression) का शिकार भी हो जाते है -उनको लगता है कि कुछ न कुछ अनहोनी होने वाली है -आइये आपको आज होम्योपैथी द्वारा कुछ इस प्रकार के सपनो के लिए इलाज से अवगत कराते है जिनके उपयोग से डिप्रेशन और भय से बचा जा सकता है-

चूँकि होम्योपैथी चिकित्सा लक्षण(Symptoms) के आधार पर आधारित है इस लिए अलग-अलग स्वप्न के लक्षणों को जानकर ही आधरित दवा का इस्तेमाल किया जाता है इनमे से कुछ आपको हम यहाँ बता रहे है मन शरीर से जुड़ा है और स्वप्न आपका सुप्तावस्था का मन देखता है इसलिए रोगी के स्वप्न(Dreams) के अनुसार प्रयोग करे-

  1. स्वप्न में कुत्ते-बिल्ली दिखे तो 'ओपियम'', आर्निका 30' शक्ति दिन में दो से चार बार दे-
  2. स्वप्न में भूत-प्रेत- लाश दिखे तो 'थूजा', 'औरम मेट' दिया जा सकता है -
  3. स्वप्न में आग और पानी आदि दिखे तो आप 'नेट्रम म्यूर 30' दे सकते है -
  4. स्वप्न में ऐसा लगे जैसे कोई आपका गला घोंट रहा हो तो आप 'सेबेडिला और स्पयिजेलिया' ले सकते है-
  5. स्वप्न में यदि आप लड़ाई देखे तो आप 'आर्सेनिकम एल्बम' ले सकते है-
  6. स्वप्न में यदि पानी पीते खुद को देखे तो ये लक्षण 'ड्रोसेरा' के है आप ले सकते है-
  7. स्वप्न में स्वयं की मौत देखे तो आप 'चिनिअम आर्स30' दिन में चार बार ले-
  8. स्वप्न में यदि आप खुद को ऊचाई से गिरने को देखे तो आपको 'एडोनिसवर' लेना चाहिए-
  9. स्वप्न से जाग कर सोने पर दुबारा वही स्वप्न देखे तो आपको 'सोरिनम' लेना चाहिए-
  10. स्वप्न में आप भूकम्प देखे तो आपको 'लेक फेल' लेना चाहिए-
  11. सारी रात ही आप स्वप्न देखते है तो 'पयरोजिनम' का उपयोग हितकारी है-

ये हमारा एक छोटा सा प्रयास था आपको बताने का कि होम्योपैथी में स्वप्न(Dreams) के लिए भी लक्षणों पर आधारित इलाज है वैसे तो होम्योपैथी(Homeopathy) का एक विस्तृत संसार है-


संपर्क पता-

KAAYAKALP

Homoeopathic Clinic & Research Centre

23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011

Director & Chief Physician:

Dr.Satish Saxena D.H.B.

Regd.N.o.7407 (M.P.)

Mob :  09977423220(फोन करने का समय - दिन में 12 P.M से शाम 6 P.M)(WHATSUP भी  यही नम्बर है)

Dr. Manish Saxena

Mob : -09826392827(फोन करने का समय-सुबह 10A.M से शाम4 P.M.)(WHATSUP भी  यही नम्बर है )

Clinic-Phone - 0751-2344259 (C)

प्रस्तुति- Upcharऔर प्रयोग-

9 जून 2016

Hair-बालों के लिए Fenugreek-मेथी की गुणवत्ता क्या है

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आज कल बाल(Hair)झड़ने की समस्‍या(Hair loss problem) बिल्‍कुल आम हो गई है और देखा गया है कि इसकी ज्‍यादा शिकार महिलाएं हो रही हैं पुरुषो में भी ये कम नहीं है आज कल के खान-पान का प्रभाव और मिलावटी तेल(Adulterated oil)तथा इंजेक्शन लगी सब्जियां-पावडर पालिस के फल -जंक फ़ूड - रेडी टू ईट,और उपयुक्त विटामिन का न मिल पाना -विशेष रूप से भी इसका प्रभाव भी है-

Fenugreek-मेथी


आजकल तो वैसे भी बाल झड़ना(hair fall) एक आम बात हो चुकी है अब चूँकि सभी तरह का खान-पान बदलने के साथ-साथ हर व्यक्ति मानसिक रूप से भी अस्वस्थ है इसलिए अब उम्र होने से पहले ही बालों का झड़ना अधिकतर आम बात है लेकिन यदि आप अभी से भी अगर ध्यान देना शुरू करते है तो काफी हद तक आप अपने बालों को झड़ने से बचा सकते है -

मेथी(Fenugreek)या फिर मेथी की पत्तियां आपकी इस समस्‍या का समाधान कर सकती हैं चूँकि मैथी में ऐसे कई गुण होते हैं जो सिर की त्‍वचा में नमी पैदा करते है और रुसी(dandruff) तथा Hair-बाल झड़ने की समस्‍या को दूर करने के साथ नये बाल उगने में भी सहायता करते है-

आइए जानते है कि कैसे मेथी के प्रयोग से हम बालों(Hair) की समस्या से निजात पा सकते है-

आप कभी-कभी अपने पास उपस्थित तमाम प्रकार की चीजों के होते हुए भी उसके गुणों से अनजान रहने के कारण उसका उपयोग किस प्रकार किया जाता है आपको पता नहीं होता है उसी में एक है मेथी(Fenugreek)-

इस प्राकृतिक जड़ी-बूटी में कुछ औषधीय गुण हैं जो गंजेपन की समस्‍याएं- बाल(Hair)झड़ने और पतले बालों की समस्‍या को दूर करने में सक्षम हैं- मेथी(Fenugreek) को उपयोग करने का सबसे बेहतर तरीका है- कि इसके दानों को गरम पानी में उबाल लें और फिर इसको पीस कर पेस्‍ट तैयार करें और बालों की जड़ों में लगाएं-इससे देखते ही देखते कुछ ही दिनों में आपके बाल झड़ने की समस्या खत्म हो जायेगी और साथ ही नये बाल भी उगने लगेंगे-लेकिन बाल भी एक समय तक ही उग सकते है आप सोचे कि साठ साल के व्यक्ति को फिर से जवान कर देगी तो ये आपका भ्रम मात्र है -

मेथी(Fenugreek)कैसे काम करती है-

मेथी में निकोटिनिक एसिड(nicotinic acid) और प्रोटीन(Protein)पाया जाता है जो बालों की जड़ो को प्रोषण पहुंचाता है और बालों की ग्रोथ को भी बढ़ाता है इसके प्रयोग से सूखे और डैमेज बाल भी ठीक हो जाते हैं-

Fenugreek-कैसे प्रयोग करें-

पहला उपाय है कि- आप मेथी को रात भर गरम नारियल तेल(Coconut oil) में भिगो कर रख दें और सुबह इसी तेल से अपने सिर पर 5-10 मिनट तक मसाज(Massage)करें और गरम पानी से सिर धो लें-

एक दूसरा उपाय है कि -मेथी को पूरी रात भिगो दें और पेस्ट बना ले फिर सुबह उसे गाढ़ी दही(Thick yogurt) में मिला कर अपने बालों और जड़ो में लगाएं- उसके बाद बालों को धो लें इससे रुसी और सिर की त्‍वचा में जो भी समस्‍या होगी वह दूर हो जाएगी-

Fenugreek से Conditioning(कंडीशनिग)-

मेथी(Fenugreek)या फिर इसकी पत्तियों को गुडहल के फूल(Gudhl flowers)के साथ मिला कर लगाने से बालों में कंडीशनिग होगी और सिर को ठंडक का एहसास होगा-

सबसें अच्छा तरीका ये भी है मेथी की पत्तियों को भोजन के रूप में अधिक से अधिक खाया जाये इससे आपको बाल स्वस्थ्य रखने के लिए जरूरी तत्व मिल जायेंगे और ऐसे में आपके बाल ना तो झड़ेंगे और ना ही टूटेंगे-

वैसे भी मेथी सुगमता से मिलने वाली चीज है ऐसे में क्यों ना हम अधिक से अधिक मेथी का प्रयोग करें और खुद को और अपने बालों को सेहतमय बनाये रखें-


Upcharऔर प्रयोग-