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25 सितंबर 2016

Women-स्त्रियों की Durability-सहनशीलता

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Women-महिलाओं को ईश्वर ने पुरुषों की अपेक्षा सहन-शक्ति(durability)कई गुना जादा दी है महिलाओं की तुलना में पुरुष की सहनशक्ति न के बराबर ही है-पुरुष सिर्फ अपनी एक ही शक्ति का हिसाब लगता रहता है वो शक्ति है मसल्स(Muscles)की -

Women-स्त्रियों की Durability-सहनशीलता


लड़कियां पहले बोलना शुरू करती हैं और बुद्धिमत्ता(Intelligence)लड़कियों में पहले प्रकट होती है- लड़कियां ज्यादा तेज होती हैं- विश्वविद्यालयों में भी प्रतिस्पर्धा(Competition)में लड़कियां आगे होती हैं-लड़के तो बस दोस्तों में ही अपना समय गवातें है लेकिन लड़कियां घर के काम में भागीदारी करती हुई भी लड़कों से आगे निकल जाती है-

स्त्रियां(Women)काफी समय तक युवा(Young)रहती हैं अगर उन्हें  बच्चे पैदा न करना पड़ें तो-जबकि पुरुष जल्दी बूढ़े हो जाते हैं स्त्रियां देर तक युवा और ताजी रहती हैं-

स्त्रियों की सहनशीलता(durability)भी बड़ी शक्ति है यही कारण है स्त्री जीवन के दुखों को बर्दास्त कर जाती है नौ माह के कष्ट को भी स्त्री की सहनशीलता ही कहा जा सकता है-इसलिए हमारे विद्वानों ने स्त्री(Women)को महानता की मूर्ति भी कहा है-

जब भी स्त्री आक्रामक होती है वह आकर्षक नहीं होती है-यदि कोई स्त्री(Women)आपके पीछे पड़ जाए और प्रेम का निवेदन करने लगे तो आप घबरा जाओगे आप भागोगे- क्योंकि आप सोचेगें कि क्यों ये स्त्री पुरुष जैसा व्यवहार कर रही है मर्यादित क्यों नहीं है-

स्त्री का मर्यादित होना ही उसका माधुर्य(Pleasantness)है वह सिर्फ प्रतीक्षा करती है-वह आपको उकसाती है लेकिन स्वयं आक्रमण नहीं करती-वह आपको बुलाती है लेकिन चिल्लाती नहीं-उसका बुलाना भी बड़ा मौन है- स्त्री आपको सब तरफ से घेर लेती है जबकि वास्तविकता ये है कि इसका आपको पता भी नहीं चलता है स्त्री की मायायुक्त जंजीरें बहुत सूक्ष्म हैं वे आपको दिखाई भी नहीं पड़तीं है-क्युकि वह प्रेम के बड़े पतले धागों से बनी है यही प्रेम रूपी सूक्ष्म धागों से आपको सब तरफ से बांध लेती है और उसका ये बंधन आपको कहीं दिखाई भी नहीं पड़ता है-

स्त्री(Women)अपने को नीचे रखती है-लोग गलत सोचते हैं कि पुरुषों ने स्त्रियों को दासी बना लिया-जी नहीं-स्त्री का दासी(female slave)बनना भी एक कला है- ये शायद आपको पता नहीं- उसकी यह कला बड़ी महत्वपूर्ण है- दासी बने रहने से फायदे ही है जबकि नुकसान नहीं है-वह दासी रहकर भी आपसे हर काम आपसे करवा लेती है इसलिए स्वयं ही दासी बनती है - कोई पुरुष किसी स्त्री को दासी नहीं बनाता है- स्त्री यदि स्वयं पे आ जाए आप उससे कुछ भी नहीं करवा सकते हो -बिना बल प्रयोग के-

दुनिया के किसी भी कोने में जब भी कोई स्त्री किसी पुरुष के प्रेम में पड़ती है-तत्क्षण अपने को दासी बना लेती है-क्योंकि दासी होना ही गहरी मालकियत है-स्त्री जीवन के इस राज को समझती है-

स्त्री(Women)अपने को नीचे रखती है-चरणों में रखती है और आपने देखा है कि जब भी कोई स्त्री स्वयं को आपके चरणों में रख देती है लेकिन आपको पता भी नहीं चलता है कि कब आपके सिर पर ताज की तरह बैठ जाती है-

वो रखती खुद को आपके चरणों में है पर पहुंच जाती है बहुत गहरे-बहुत ऊपर-आप चौबीस घंटे उसी का चिंतन करने लगते हो-छोड़ देती है अपने को आपके चरणों में और आपकी ही छाया बन जाती है आपको पता भी नहीं चलता कि छाया को आप चलाते हो या फिर आप ही अपनी छाया के इशारे पे चलने लगते हो-

स्त्री कभी यह भी नहीं कहती सीधा कि यह करो-लेकिन वह जो चाहती है करवा लेती है वह कभी नहीं कहती कि यह ऐसा ही हो-लेकिन वह जैसा चाहती है वैसा करवा लेती है-यही उसकी शक्ति बड़ी है और उसकी शक्ति राज क्या है? क्योंकि वह दासी है-उसमे सहनशक्ति(durability)है-इसी शक्ति में बड़े से बड़े शक्तिशाली पुरुष स्त्री के प्रेम में पड़ जाते हैं और एकदम अशक्त हो जाते हैं-


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