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31 जुलाई 2016

अपामार्ग से शरीर की वसा भी घटा सकते है

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जी हाँ चौंकिए मत ये सच है कि अपामार्ग(Chaff tree)यानी कि लटजीरा या चिरचिटा के बीजो के सेवन से शरीर के बढे हुए फैट(Fat)को कम किया जा सकता है ये एक सर्वविदित क्षुपजातीय औषधि है जो चिरचिटा(Chaff tree)नाम से भी जानी जाती है वर्षा के साथ ही यह अंकुरित होती है ऋतु के अंत तक बढ़ती है तथा शीत ऋतु में पुष्प फलों से शोभित होती है इसके पुष्प हरी गुलाबी आभा युक्त तथा बीज चावल सदृश होते हैं जिन्हें ताण्डूल कहते हैं तथा इसे एक वर्ष तक प्रयुक्त किया जा सकता है-

अपामार्ग से शरीर की वसा भी घटा सकते है

अपामार्ग(Chaff tree)के अन्य नाम-


हिन्दी नाम- चिरचिटा, चिचड़ा, ओंगा चिचरी, लटजीरा

मराठी नाम- अघाड़ा, अघेड़ा

बंगाली नाम- अपांग

अंग्रेजी नाम- प्रिकली चाफ फ्लावर(Prikli chaff flower)

अपामार्ग(Chaff tree)के प्रयोग-


1- लटजीरे(Chaff tree)के बीजों को एकत्र करकर मिटटी के बर्तन में भूनकर उसे पीसकर चूर्ण बनाकर लगभग आधा चम्मच इसे खाया जाये तो भूख कम लगती है तथा यह शरीर की वसा को भी कम करता है इस प्रकार यह कम करने में भी मदद करता है इसके कोई दुष्परिणाम भी नहीं है ये आसानी से आयुर्वेद दवा बेचने वाले पंसारी से मिल जाता है इसका पेड़ सड़क के आस-पास देखने को आसानी से मिल जाता है -

2- इसके तने को साफ़ करकर दातुन की तरह उपयोग करें तो दांतों से जो खून बहने की समस्या होती है वह भी धीरे-धीरे इससे समाप्त हो जाती है-

3- सेहुआ रोग जिसमे त्वचा में सफ़ेद चकत्ते पड़ जाते है उसके उपचार के लिए इसका पंचांग बनाकर उसके क्षार बनाकर उसे केले के पत्तों का क्षार और हल्दी मिलाकर सेहुआ पर लगाने से अच्छा लाभ होता है-

4- यदि आपको भस्मक रोग है यानी कि जिसमे खूब खाने के बाद भी भूख नही मिटती और खाने के इच्छा होती ही रहती है उसके निदान के लिए इसके बीजों को खीर में मिलकर देने से लाभ मिलता है-

5- बाहरी प्रयोग के रूप में भी इसका चूर्ण मात्र सूँघने से आधा शीशी का दर्द, बेहोशी, मिर्गी में आराम मिलता है-

6- इसके पत्रों का स्वरस दाँतों के दर्द में लाभ करता है तथा पुराने से पुरानी केविटी को भरने में मदद करता है-

7- कुत्ते के काटे स्थान पर तथा सर्पदंश-वृश्चिक दंश अन्य जहरीले कीड़ों के काटे स्थान पर ताजा स्वरस तुरन्त लगा देने से जहर उतर जाता है यह घरेलू ग्रामीण उपचार के रूप में प्रयुक्त एक सिद्ध प्रयोग है काटे स्थान पर बाद में पत्तों को पीसकर उनकी लुगदी बाँध देते हैं-व्रण दूषित नहीं हो पाता तथा विष के संस्थानिक प्रभाव भी नहीं होते है -

8- बर्र आदि के काटने पर भी अपामार्ग को कूटकर व पीसकर उस लुगदी का लेप करते हैं तो सूजन नहीं आती है-


Upcharऔर प्रयोग-

28 जुलाई 2016

Tea allergy-चाय पीने से एलर्जी

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नगर की एक बडी फेक्ट्री के मेनेजर अपने बेटे के हाथ में हुए फ्रेक्चर की चिकित्सा के लिये मेरे निवास पर आये-सौजन्यवश मैंने उनसे चाय के लिये पूँछा- उन्होंने कहा चाय तो मैं पी ही नहीं सकता हूँ मुझे चाय से ऐलर्जी है और उन्होंने मुझे यह बताया कि मैं फेक्ट्री के काम से देहली मुम्बई आदि बडे नगरों में जाता रहता हूँ तथा ऑल इण्डिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडीकल सांइन्स देहली तथा अपोलो हॉस्पिटल मुम्बई में जाँच करवाने के वाद भी किस चीज की ऐलर्जी है कुछ पता नहीं लग सका-मैंने उनसे पूँछा कि क्या वे कॉफी पी सकते हैं? उन्होंने कहा कि हाँ-मुझे कॉफी से कोई कष्ट नहीं होता है-

Tea allergy


मैंने उनसे पूँछा कि क्या वे ऐनासिन की गोली खा सकते हैं उन्होंने कहा कि खा सकते हैं. मैंने अपने मन में विचार किया कि इन्हैं कैफीन,फिनासिटीन आदि से तो ऐलर्जी है नहीं तो चाय में कुछ अन्य तत्व होना चाहिये-

होम्योपैथी में चाय से जो दवा बनती है उसे थिया(Thea) कहते हैं फिर मेरे थिया का अध्यन करने पर ज्ञात हुआ कि इसमें अन्य तत्वों के अतिरिक्त टेनिन नाम का तत्व भी होता है चाय पीने से उन्हैं पेट में दर्द के अतिरिक्त बहुत अधिक पतलेदस्त होने लगते थे जो कि टेनिन में भी पाये जाते हैं-

टेनिन से ऐलर्जी सुनिश्चित करने के लिये मैं बाजार से टेनिन की पाँच मिलीग्राम की गोली लाया और उनसे कहा कि किसी छुट्टी के दिन जब उन्हैं कहीं बाहर न जाना हो तब वह इस गोली को खायें- गोली ने उनको वही प्रभाव दिखाया जो चाय से होता था- 

जब मैंने उन्हैं बताया कि उन्हैं टेनिन से ऐलर्जी है तो उन्हैं बडा आश्चर्य हुआ कि बिना किसी प्रयोगशाला में जाँच किये बिना मैंने कैसे उनकी ऐलर्जी की सही सही जाँच करली है-

मैं यहाँ आपको टेनिन केवारे में कुछ बताना चाहूँगा- टेनिन वही रसायन है जिससे कच्चे चमडे को पकाया जाता है-पेट में पित्त के हायड्रोक्लोरिक ऐसिड से मिलने पर यह टेनिक ऐसिड में बदल जाता है-इसका दुष्परिणाम यह होता है कि आमाशय की दीवारें पक सी जातीं हैं और पेट चमडे का ऐक थैला बन कर रह जाता है-यही कारण है कि अधिक चाय पीनेबालों की पाचनशक्ति क्षीण हो जाती है और भूख लगना बन्द होजाती है-

चाय यों तो आज राष्ट्रीय पेय का स्थान रखता है परन्तु उसके द्वारा हानि को देखते हुए इसे कम ही पियें और खाली पेट तो कभी भी नहीं पियें- बेड टी लेने वालों को मेरी सलाह है कि कम से कम सुबह खाली पेट चाय लेना बंद कर दे आपको खुद-ब-खुद ही एहसास होगा कि आपकी भूंख भी खुल रही है और एसिडिटी की भी शिकायत नहीं है - 

होम्योपैथी में इसकी प्रतिरोधक दवा है चायना(China)-अर्थात् या तो चाय ना पियें या फिर चायना खायें-

और भी देखे-

संपर्क पता-

KAAYAKALP

Homoeopathic Clinic & Research Centre

23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011

Director & Chief Physician:

Dr.Satish Saxena D.H.B.

Regd.N.o.7407 (M.P.)

Mob :  09977423220(फोन करने का समय - दिन में 12 P.M से शाम 6 P.M)(WHATSUP भी  यही नम्बर है)

Dr. Manish Saxena

Mob : -09826392827(फोन करने का समय-सुबह 10A.M से शाम4 P.M.)(WHATSUP भी  यही नम्बर है )

Clinic-Phone - 0751-2344259 (C)

प्रस्तुति- Upcharऔर प्रयोग-

26 जुलाई 2016

Private Protector निजी रक्षक लंगोट

By With 4 टिप्‍पणियां:
निजी रक्षक लंगोट(Private Protector)पुरुषों द्वारा पहना जाने वाला एक अन्त:वस्त्र है यह लंगोट पुरुष जननांग(male genitalia)को ढककर एवं दबाकर रखने में बहुत ही सहायता करता है भारत में इसका उपयोग पहले बहुत होता था लेकिन बस कुछ ब्रह्मचारी, साधु-सन्त, अखाड़ा लड़ने वाले पहलवान आदि इसका उपयोग करते हैं-ये आपका निजी रक्षक(Private Protector)है-

Private Protector निजी रक्षक लंगोट


ये निजी रक्षक लंगोट(Private Protector)किसी भी रंग का हो सकता है किन्तु लाल लंगोट(Red Nappies) विशेष रूप से लोकप्रिय है-यह पूरी तरह से खुला हुआ त्रिकोणाकार(Triangulate) कपड़े का बना होता है-

पहले के ऋषि-मुनियों ने बहुत सोच समझ कर ये प्रचलन बनाया होगा वो इसकी महत्ता को बखूबी जानते थे जो भी करते थे बहुत सोच-समझ कर ही करते थे-पहले के जमाने के जो लोग थे उनके जीवन में ब्रम्हचर्य की विशेष महत्ता थी इसलिए जनसाधारण लोग भी धारण किया करते थे- 

चूँकि आज के युग में युवा पीढ़ी को उसकी महत्ता का ज्ञान नहीं है इसलिए अब ये सिर्फ फिल्मों की नायिकाओ का अंग-वस्त्र बन गया है जो आज कल की युवा-पीढ़ी को अत्यधिक मनोहारी लगता है -वास्तव में वो फिल्म सुपर हिट भी हो जाती है लेकिन युवा रास्ते पे चलते दीवालों के बैनर पढता फिरता है "मर्दाना ताकत के लिए हमसे मिले"

वैसे भी आज भी लंगोट का कोई जोड़ नहीं है आपको पूरी तरह लंगोट के बारे में बताने से पहले लंगोट शब्द वास्तविक अर्थ स्पष्ट करना अपना कर्तव्य समझता हूँ-लंगोट एक संयुक्त शब्द है जिसका विच्छेद करने पर हमें प्राप्त होता है-

लंगोट = लं+ गोट अर्थात जो लं…..और गोट- दोनों को संभाल सके- वो लंगोट है-

कुछ सालों से इस परिभाषा पर बट्टा लग गया है ऐसा तो बहुत शब्दों के साथ है जिनका मतलब तब कुछ होता था अब और कुछ और हो गया है जैसे कि- 'बलात्कार' -पहले इसका मतलब “जबरदस्ती” के लिए उपयोग किया जाता था और आज इसका तात्पर्य तो आपको पता ही है-

लंगोट के फायदे-

लंगोट एक प्रकार से चड्ढी का काम करता था(मनुष्य आपात काल में जबकि नियंत्रण खोने लगता था तब यह नियंत्रण बनाये रखता था वो भी आपकी इच्छानुसार-अब ये सुविधा चड्ढी में उपलब्ध नहीं है)-इसलिए तब बलात्कार की संख्या में बहुत कमी थी और खुद पे भी एक नियंत्रण रहता था लेकिन आज ये नियंत्रण नहीं रह गया है -

लंगोट दौड़ लगाने ,भागने और व्यायाम करने में इसका कोई सानी नहीं- कोई जानवर दौडाए तो भी सरपट भाग लीजिये-और अगर लंगोट पकड़ कर लटक जाये तो उसके पल्ले सिर्फ लंगोट ही आये-(भागते भूत की लंगोटी ही सही) -व्यायाम में तो लंगोट सबसे बेजोड़ है- कम से कम ये उस चीज पर पूरा नियंत्रण रखता है जो व्यायाम में आपका नियंत्रण बिगाड़ सकती है-

ये जरुरत पड़ने पर किसी का गला घोंटने के काम भी आ सकता था(इससे समाधि भी ली जा सकती थी पेड़ से लटक कर) -(एक व्यंग के रूप में)

कभी-कभी जब जान पे आ पड़े तो सर पर केसरिया कफ़न बांधकर जूझ पड़ने के भी काम आता था-(इसीलिए लाल लंगोट- सिलने का चलन था)

यदि कोई आश्रम बने है तो बांस में बांधकर ध्वज की तरह भी लंगोट का इस्तेमाल किया जा सकता था-

इन सबसे बढ़कर तो ये है कि इसे धुलने में समय और श्रम के साथ संसाधनों की भी न्यूनतम खपत होती थी वर्ना- आप तो जानते है की कपडे धुलना कितना दुष्कर है-

जरुरत पड़ने पर युद्ध में लंगोट के दोनों सिरों पर पत्थर बांध कर हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता था और सामने वाला भाग खड़ा होता था-

अगर आपके पास दो लंगोट है तो एक से जरुरत पड़ने पे कुछ सामान को आप बाँध कर भी इसका उपयोग कर सकते है-लंगोट से जरूरत पड़ने पर कोई लकड़ी का गठ्हर या सामान बंधा जा सकता था-

जरुरत पड़ने पर पेड़ पर चढ़ कर फल तोड़कर उसे आसानी से नीचे पहुँचाया जा सकता था-(खोंचा और झोली की तरह)

लंगोट को पेड़ की दो डालों से बांध कर झूला बनाया जा सकता था-(आनंद दायक)

किसी भक्त की भिक्षा भी लंगोट में ली जा सकती थी या कोई भी कीमती चीज छुपाने के लिए भी इसकी बहुत उपयोगिता थी-

यदि जानवर पाले हो तो उन्हे रात के वक्त लंगोट से खूंटे में बंधा भी जा सकता था-

कही प्यास लगने पर लंगोट से कमंडल या लोटा बंधा कर गहरे से पानी भी खींचा जा सकता था-

बुरा न माने तो ये उनके सिक्स पैक दिखाने सबसे हॉट और सेक्सी ट्रेंड था-

अब तो आजकल गाँव में कुछ जगह लंगोट चढाने की परम्परा आज भी है मुझे जितने प्रयोग सूझ सके हैं लंगोट के -आप तक प्रस्तुत किया यदि मैं ऋषि होता तो शायद और भी जानता लंगोट के बारे में- यदि आप को जादा जानकारी मिले तो जरुर शेयर करे आभारी रहूगां -पोस्ट को आवश्यक समझे या व्यंगात्मक रूप में ले ये आपकी सोच पे निर्भर करता है-

Upcharऔर प्रयोग-

25 जुलाई 2016

Urticaria-शीतपित्त का Treatment

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Urticaria-शीतपित्त को छपाकी या पित्ती उछालना भी कहा जाता है शीतपित्त रोग में Hives(तीव्र खुजली) के साथ उत्पन्न होने वाले दादोड़े समस्त शरीर में विभिन्न आकार में भी हो सकते है रोग की chronic urticaria(तीव्र-अवस्था) में हल्का बुखार तथा वमन भी हो सकती है इसकी उत्पत्ति किसी एलर्जिक प्रतिक्रिया के परिणाम स्वरूप भी मानी जाती है -

Urticaria

Hives-पित्ती होने के लक्षण-

  1. शरीर पर एकाएक चकत्ते से उभर आते है और इन चकत्तों में stress hives(तेज खुजली) होती है और फिर इससे शरीर लाल हो जाता है -
  2. चकत्ते उभरते ही माथा,सिर,कान,नाक,और चेहरे का जादातर हिस्सा कुछ सूज जाता है -
  3. वमन और मितली भी हो सकती है-
  4. चकत्तों के किनारे लाल रंग के होते है-
  5. आमतौर पर ये urticaria(पित्ती)  छाती और पेट पर निकलते है-
  6. Urticaria in children(बच्चो में चकत्तों) के अतिरिक्त ये पीडिकाये और फफोले के रूप में हो सकते है-

Urticaria-आसान Treatment -

  1. शीतपित्त के चकत्ते निकलने पर गर्म जल पिलाकर रोगी को कम्बल ओढ़ाकर सुला दे-इससे पसीना आएगा और रोगी को आराम होगा-
  2. गेरू का लेप करे या फिर सरसों के तेल में गेरू को पीस कर मिला कर उसकी रोगी के शरीर पे मालिस करे तथा कम्बल ओढ़ाकर सुला दे-
  3. चक्रमर्दमूल का चूर्ण घी में मिलाकर दे-
  4. त्रिफला चूर्ण दो ग्राम,पिप्पली आधा ग्राम,दिन में दो बार शहद से दे-
  5. गाय का घी 20 ग्राम,काली मिर्च का चूर्ण 10 ग्राम को आपस में मिला ले रोगी को 1 ग्राम से 3 ग्राम दे -
  6. महागंधक रसायन 250 मिलीग्राम ,गिलोय सत्व 1 ग्राम ,शहद और कच्ची हल्दी के स्वरस से सेवन कराये-

यूनानी योग-

पोदीना 6 ग्राम जल में घोटे और इसमें 10 ग्राम शक्कर मिलाकर दिन में दो बार पिलाए -

एक और अन्य  प्रयोग-

हल्दी 250 ग्राम ,काली मिर्च ,फिटकरी,तथा सोना गेरू 125 मिलीग्राम के अनुसार ,दूर्वा घास का स्वरस 250 मिलीग्राम -इन सभी को लेकर जल की सहायता से अच्छी तरह घोटे -अब तो किलो शक्कर में 5 मिलीलीटर चूने का पानी मिलाकर चाशनी तैयार करे -उपरोक्त सभी सामग्री मिलाकर अच्छी तरह उबाले-फिर छानकर रख ले तथा रोगी को इसमें से 25 मिलीलीटर की मात्रा में दिन में दो बार पिलाए-


Upcharऔर प्रयोग-

Ringworm-दाद-एक्जीमा का Treatment

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वैसे भी Ringworm-दाद एक जिद्दी प्रक्रति का रोग होता है यदि समय पे चिकित्सा न की जाए तो ये स्थाई रहने वाला रोग है ये सभी जगह होता है लेकिन खास कर गुप्त अंगो(PrivatePart)पे होने वाला दाद(Ringworm) अधिक कष्टकारी होता है यदि ये पुराना हो जाए तो आप कितनी भी एंटीफंगल क्रीम(Anti-fungal creams)लगा लो कुछ दिन बाद ये फिर अपने रूप में वापस आ ही जाता है -

Ringworm


पुराना दाद या उस जैसा कोई इन्फ़ेक्सन है निम्न बातों का ध्यान रखें -

  1. सबसे पहले सामान्य नहाने वाली साबुन, शैम्पु, आदि केमिकल का प्रयोग बन्द कर दे - नहाने के लिये केवल ग्लिसरीन सोप का प्रयोग कर सकते है  या फिर नीम सोप का इस्तेमाल करे -
  2. यदि आप कोई एटीफ़ंगल क्रीम(Anti-fungal creams) लगा रहे है तो आप उसे लगातार लगाएं-ऐसा मत करे कि बस एक या दो दिन लगाया और कुछ ठीक होने पर फ़िर छोड दिया इससे दाद और भी जिद्दी हो जाता है -
  3. आप नहाने के बाद नारियल का तैल लगाएं-
  4. पहनने वाले कपडे अच्छी तरह धुले हुए और सुखे हुए होने चाहिये .कहने का अभिप्राय यह है कि उनमे डिटर्जण्ट का मामुली सा अंश भी नही रहना चाहिये-ये मामुली सी बाते आपको विभिन्न त्वचा विकारों से बचा सकती है -
  5. चर्म रोग बेहद गंभीर रोग है जिसमें त्वचा में दाद के काले निशान पड़ जाते हैं- इसे एक्जिमा(Eczema) भी कहा जाता है- इस रोग में त्वचा पर खुजली, दर्द और जलन होती रहती है- 
  6. आखिर क्यों होता है चर्म रोग ये भी जानना जरूरी है- ताकि समय रहते इस रोग से बचा जा सके-

Reason Of Ringworm-दाद के कारण-

  1. रसायनिक चीजों का ज्यादा प्रयोग करना जैसे साबुन, चूना, सोड़ा और डिटर्जेट का अधिक इस्तेमाल करना-
  2. पेट में कब्ज का अधिक समय तक होने से भी Ringworm होता है-
  3. रक्त विकार होने की वजह से भी Ringworm होता है-
  4. महिलाओं में मासिकधर्म की परेशानी की वजह से भी उन्हें दाद(Ringworm) हो सकता है-
  5. किसी दाद(Eczema) पीड़ित इसान के कपड़े पहनने से भी यह रोग हो सकता है-

Ringworm-दाद रोग के लक्षण-

एक्जिमा रोग में त्वचा पर छोटे-छोटे दाने निकलने लगते हैं और फिर ये लाल रंग में बदलने लगते हैं और इनमें खुजली होती रहती है और खुजलाने से जलन होती है फिर ये दाग के रूप में त्वचा में फैलने लगता है यदि सारे शरीर में दाद(Ringworm) होता है उससे रोगी को बुखार भी आने लगता है-

एक्जीमा(Eczema) के उपचार-

  1. समुद्र के पानी से प्रतिदिन नहाने से एक्जिमा(Eczema) ठीक हो जाता है-
  2. नमक का सेवन कम कर दें और हो सके तो कुछ समय तक नमक का सेवन बंद ही कर दें तथा नीम के पत्तों को पानी में उबाल कर उससे रोज स्नान करें-
  3. साफ सुथरे कपड़े पहना करें और खट्टे, चटपटे, और मीठी चीजों का इस्तेमाल न करें- क्योंकि ये रोग को और बढ़ाते हैं-
  4. यदि Eczema गीले किस्म का है तो इस पर पानी का प्रयोग न करें-

जिद्दी दाद(Eczema) के लिये कुछ आयुर्वेदिक योग-

पकने वाले दाद(Eczema) के लिए-

आप त्रिफ़ला को तवे पर एक जला ले ( त्रिफ़ला को तवे पर रख कर उस पर कटोरी उलटी कर के रख दे ताकि धुवां त्रिफ़ला की भस्म मे ही रम जाए) फ़िर उसमे कुछ फ़िटकरी मिला कर और वनस्पतिक घी, कुछ देसी घी, सरसो का तैल, और कुछ पानी , सबकी समान मात्रा होनी चाहिये , इन सब को मिलाकर इनको खरल मे अच्छी तरह मर्दन(घोंटे) करे और मलहम बना ले बस आपकी क्रीम तैयार , पकने वाले और स्राव युक्त दादों पर इसे लगाए -

जिद्दी और रुखे Eczema-दाद के लिये-

पलाश के बीज
मुर्दाशंख
सफ़ेदा
कबीला
मैनशिल
माजुफ़ल ( सभी सामान आयुर्वेदिक जड़ी बूटी बेचने वाले पंसारी से ले)

उपरोक्त सभी वस्तुए सामान मात्रा में ले फिर करन्ज के पत्तों का रस और निम्बु का रस, इनसे भावना देकर सारा दिन मर्दन करें - अब बस औषधि तैयार है - इन सब की गोली बनाकर सुखा ले और गुलाब जल के साथ घीस कर प्रभावित स्थान पर लगा ले -

एक और प्रयोग-

  1. बाजार से 50 ग्राम गंधक ले आए- ये आपको जड़ी बूटी बेचने वाले से मिल जाएगी- शुद्ध गंधक लेने की जरूरत नहीं है- इसे बारीक पीस ले और लगभग 6-9 इंच चौड़ा और 12-18 इंच लंबा सूती कपड़े का टुकड़ा ले- यह पुराने बानियान का भी ले सकते है- इस टुकड़े पर गंधक फैला दे- फिर इसका इस तरह रोल/रस्सी बनाए की गंधक बाहर न निकले- फिर इसे सूती धागे से इस तरह बांध दे कि लटकाने पर भी कपड़े कि रस्सी से गंधक बाहर न निकले- अब इसे एक 2 फुट लंबी लकड़ी कि छड़ी से बांध दे- उसके बाद उस गंधक वाले कपड़े की रस्सी पर इतना सरसो के तेल लगाए कि यह और अधिक तेल न सोख सके-
  2. अब उस कपड़े रस्सी के नीचे बड़ी कटोरी रख कर उस कपड़े की रस्सी को आग लगाए- इस प्रकार जलाने से जो तेल नीचे बर्तन मे टपके उसे सफाई से एक काँच की बोतल मे रखे- यदि जले हुए कपड़े का कोई टुकड़ा बर्तन मे गिर जाए तो तेल को छान लें-
  3. खुले घाव पर यह तेल न लगाए- यह केवल बाहरी प्रयोग के लिए हैं- आंखो मे यह तेल न जाने पाए-
  4. जब यह रस्सी जलती है तो धुआँ निकलता है उससे स्वयं को बचाए-

अन्य प्रयोग दाद के लिए-

दाद को किसी कठोर कपड़े से या बर्तन साफ करने के स्क्रबर से दाद(Eczema) को खुजाए- उस पर यह तेल लगा कर पीपल या केले के पत्ते का टुकड़ा रख कर पट्टी बांध दे-

खुजली के लिए (सुखी या गीली )-

खुजली पर यह तेल लगाए- उसके बाद उस अंग पर भाप से सेक करे बिना भाप के यह धीमे लाभ करता है- यदि पूरे शरीर पर खुजली हो तो तेल लगा कर धूप मे बैठे- एक घंटे बाद गरम पानी से नहाए-

कुछ अन्य आयुर्वेदिक टिप्स-

  1. दाद पर अनार के पत्तों को पीसकर लगाने से लाभ होता है-
  2. दाद को खुजला कर दिन में चार बार नींबू का रस लगाने से दाद(Eczema) ठीक हो जाते हैं-
  3. केले के गुदे में नींबू का रस लगाने से Eczema-दाद ठीक हो जाता है-
  4. चर्म रोग में रोज बथुआ उबालकर निचोड़कर इसका रस पीएं और सब्जी खाएं-
  5. गाजर का बुरादा बारीक टुकड़े कर लें- इसमें सेंधा नमक डालकर सेंके और फिर गर्म-गर्म दाद(Eczema) पर डाल दें-
  6. कच्चे आलू का रस पीएं इससे Eczema-दाद ठीक हो जाते हैं-
  7. नींबू के रस में सूखे सिंघाड़े को घिस कर लगाएं- पहले तो कुछ जलन होगी फिर ठंडक मिल जाएगी, कुछ दिन बाद इसे लगाने से दाद ठीक हो जाता है-
  8. हल्दी तीन बार दिन में एक बार रात को सोते समय हल्दी का लेप करते रहने से दाद(Eczema) ठीक हो जाता है-
  9. दाद होने पर गर्म पानी में अजवाइन पीसकर लेप करें- एक सप्ताह में ठीक हो जाएगा-
  10. अजवाइन को पानी में मिलाकर दाद धोएं-
  11. दाद(Eczema) में नीम के पत्तों का 12 ग्राम रोज पीना चाहिए-
  12. Eczema-दाद होने पर गुलकंद और दूध पीने से फायदा होगा-
  13. नीम के पत्ती को दही के साथ पीसकर लगाने से Eczema-दाद जड़ से साफ हो जाते है-
  14. गेंदे के फूल में एंटी बैक्टीरियल के साथ एंटी वायरल तत्व होते हैं जो चर्म रोग में लाभ देता है- गेंदे की पत्तियों को पानी में अच्छे से उबाल लें और दिन में तीन बार Eczema से प्रभावित जगह पर लगाएं-
  15. इसे भी देखे-  HairPlucking-बालतोड़ कोई रोग नहीं

Upcharऔर प्रयोग-

24 जुलाई 2016

Urad-उरद के लड्डू से सेक्स कमजोरी को दूर करें

By With 6 टिप्‍पणियां:
नासमझी की वजह से कुछ युवा बचपन में कुछ ऐसी गन्दी आदतों(Bad Habits)के शिकार हो जाते है जिसका पछतावा उनको आगे चल-कर भुगतना पड़ता है यदि इन्ही गलत आदतों के कारण यदि आप अपने शरीर को कमजोर(Weak)बना चुके है तो चिंता न करें 'Upcharऔर प्रयोग ' आपको इसका समाधान बता रहा है बिलकुल साधारण और उत्तम तथा अदभुत प्रयोग है करें और आप लाभ ले-

Urad laddu

आप जानते ही है पहले राजा-महराजा लोग इस प्रकार के योग अपने वैद्यों से बनवा कर उपयोग किया करते थे और अपनी सभी रानियों को संतुष्ट रखते थे-ये योग आपके जीवन में एक नया संचार देगा -बस आवश्यकता है आपको इसे बनाने की तो आइये जानते है इसे बनाने के लिए आप क्या करें-

साधारण सी लगने वाली उरद की दाल(Urad dal)से आप सभी लोग परिचित ही होगें ये आपके जीवन में किस तरह परिवर्तन लाता है बस आपको कुछ अवधि के लिए नीचे बताये गए अनुसार प्रयोग करना है और आप कह उठेगें -वाह ..!


आप भीगी उरद(Urad)दाल से बनाए ये लड्डू बनाये-


आवश्यक सामग्री-


उरद(Urad)दाल - 400 ग्राम
घी - 400 ग्राम
बूरा या पिसी मिश्री  - 300 - 400 ग्राम
काजू, किशमिश, बादाम - 100 ग्राम(सभी मिला कर वजन )
पिस्ते - एक टेबल स्पून (लगभग दस ग्राम )
छोटी इलाइची - 10 नग

बनाने की विधि-


सबसे पहले उरद(Urad)दाल को साफ कीजिये फिर धोइये और 3-4 घंटे के लिये पीने के पानी में भिगो दीजिये तथा Urad-उरद दाल से अतिरिक्त पानी निकालिये और दाल को हल्का मोटा पीस लीजिये और अब कढ़ाई में आधा घी डालिये और दाल को लगातार चमचे से चलाते हुये भूनिये-फिर बचा हुआ घी पिघला कर रखिये और चमचे से थोड़ा थोड़ा डाल कर उरद(Urad)दाल को चमचे से चलाते हुये लगातार ब्राउन होने तक भून लीजिये-और काजू, बादाम को छोटा छोटा काट लीजिये, किशमिश को डंठल तोड़ कर साफ कर लीजिये तथा पिस्ते को बारीक कतर लीजिये और इलाइची छील कर कूट लीजिये-फिर भुनी हुई दाल में बूरा, मेवा और इलाइची डाल कर अच्छी तरह मिला लीजिये अब लड्डू(Laddu)बनाने के लिये मिश्रण तैयार है-

मिश्रण को थोड़ा थोड़ा हाथ में लीजिये और दबा दबा कर अपने मन पसन्द आकार के लड्डू बना कर थाली में रखिये-सारे मिश्रण से लड्डू बना कर थाली में रख लीजिये-उरद दाल के लड्डू तैयार हैं अब आप इन सभी लड्डू को एअर टाइट कन्टेनर में भर कर रख लीजिये और एक महिने से भी ज्यादा दिनों तक लड्डू कन्टेनर से निकाल कर खाइये-

मात्रा-


एक लड्डू सुबह-सुबह खा कर एक गिलास दूध का सेवन करने से कमजोरी जाती रहती है और इससे आपको नामर्दी नपुंसकता ,स्वप्नदोष जेसी बीमारियों में लाभ मिलता है -

दूसरी विधि शाही उरद(Urad)के लड्डू बनाने की-


सामग्री-


उड़द की दाल- 300 ग्राम
देशी चना (कच्चा)- 300 ग्राम
देशी गाय का घी- 500 ग्राम
बादाम की गिरी- 250 ग्राम
शतावरी- 100 ग्राम
अश्वगन्धा- 150ग्राम
अजवायन- 100 ग्राम
विदारी कन्द- 150ग्राम
काजू व पिस्ता- 150 ग्राम
किशमिश- 100 ग्राम
देशी शक्कर- 1 किलो ग्राम
छोटी इलायची- 15 नग
गोंद- 100 ग्राम

बनाने की विधि-


सबसे पहले आप गोंद को घी में भुन कर बाहर निकाल ले फिर उरद दाल व चने को साफ कीजिये धोइये और तीन-चार घंटे के लिये पीने के पानी में भिगो दीजिये फूल जाने पर आप दाल व चने से अतिरिक्त पानी निकालिये और उनको हल्का मोटा पीस लीजिये -अब कढ़ाई में आधा घी डालिये और दाल को व अजवाइन को लगातार चमचे से चलाते हुये भूनिये तथा बचा हुआ घी पिघला कर रखिये और चमचे से थोड़ा थोड़ा डाल कर दाल को चमचे से चलाते हुये लगातार ब्राउन होने तक भून लीजिये और अब काजू, बादाम को छोटा छोटा काट लीजिये तथा किशमिश को साफ कर लीजिये- पिस्ते को बारीक कतर लीजिये- इलाइची छील कर कूट लीजिये-फिर भुनी हुई दाल में सारी वस्तुएं व बूरा,मेवा,गोंद और इलाइची डाल कर अच्छी तरह मिला लीजिये लड्डू बनाने के लिये मिश्रण तैयार हो गया है-

अब आप मिश्रण को थोड़ा-थोड़ा हाथ में लीजिये और दबा-दबा कर अपने मन पसन्द आकार के लड्डू बना कर थाली में रखिये- सारे मिश्रण से लड्डू बना कर एक-एक लड्डू रोज सुबह शाम गाय के दूध के साथ लीजिये- इसके सेवन करने से कमजोरी जाती रहती है इससे नामर्दी नपुंसकता ,स्वप्नदोष जेसी बीमारियों में लाभ मिलता है-

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Upcharऔर प्रयोग-

23 जुलाई 2016

Testicles-अण्डकोष में पानी भरना

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Hydrocele-हाइड्रोसील रोग किसी भी व्यक्ति के यौन अंगो में विजातीय द्रव्यों के इकट्ठा होने के कारण होता है या फिर अधिक भारी वजन,अधिक पैदल चलने,या अत्यधिक संभोगक्रिया के कारण भी अंडकोष(Testicles) में पानी भर जाने से होता है-गलत तरीके से खान-पान की आदतें तथा समय पर खाना न खाने के कारण यह रोग व्यक्ति को हो जाता है-

Testicles


रोग जो दवा से दबाए गए हो या फिर संभोग उत्तेजना(Sexual stimulation) को एक दम से रोक देने के कारण भी यह रोग हो जाता है-मल-मूत्र के वेग को रोकने के कारण भी यह रोग हो सकता है-इस रोग में रोगी के अण्डकोषों में पानी भर जाता है जिसके कारण उसके अण्डकोष में सूजन(swelling) आ जाती हैं जब यह रोग किसी व्यक्ति को होता है तो उसके केवल एक ही तरफ के अण्डकोष में पानी भरता है इस रोग का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से किया जा सकता है-

लक्षण(Symptoms)-

प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति के अण्डकोषों में दर्द होने लगता है रोगी के अण्डकोष(Testicles) का एक भाग सूज जाता है और कभी-कभी तो ये इतने बढ़ जाते है कि व्यक्ति को चलने फिरने में दिक्कत होने लगती है यदि रोगी व्यक्ति के अंडकोष में सूजन के साथ तेज दर्द होने लगता है तो समझना चाहिए कि रोगी व्यक्ति को हाइड्रोसील(Hydrocele) अण्डकोषों में पानी भर जाने का रोग हो गया है- जब यह रोग धीरे-धीरे बढ़ता है तो इसके कारण जननेन्द्रिय की सारी नसें कमजोर और ढीली पड़ जाती हैं जिसके कारण रोगी व्यक्ति को उल्टी तथा मितली भी होने लगती है और कब्ज भी रहने लगती है-

प्राकृतिक चिकित्सा उपचार(Naturopathy treatment)-


  1. इस रोग को ठीक करने के लिए पीले रंग की बोतल का सूर्यतप्त जल(Surytpt water) 25 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन 4 बार सेवन करना चाहिए तथा इस जल का सेवन करने से पहले रोगी व्यक्ति को एक घण्टे तक लाल प्रकाश और उसके बाद कम से कम 2 घण्टे तक नीला प्रकाश अण्डकोष पर डालना चाहिए- जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है-
  2. इस रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को कम से कम 2 सप्ताह तक प्रतिदिन संतरे का रस या अनार का रस पीना चाहिए- रोगी को कच्चे सलाद में नींबू डालकर सेवन करना चाहिए और उपवास रखना चाहिए-
  3. रोगी व्यक्ति को कटिस्नान, मेहनस्नान, सूखा घर्षण, गर्म एवं नमक स्नान (नमक मिले पानी से स्नान) करना चाहिए- इससे यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है-
  4. इस रोग से पीड़ित रोगी को खुली हवा में व्यायाम करना चाहिए तथा इसके साथ सूर्य स्नान(Sun Shower) भी करना चाहिए-इस प्रकार से रोगी का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से करने से रोग बहुत जल्दी ही ठीक हो जाता है-


घरेलू उपाय(Home Remedies)-


पांच ग्राम काली मिर्च(Black pepper) और दस ग्राम जीरे का चूर्ण(cumin powder) आपस में मिलाके एक पेस्ट बनाए और इस पेस्ट को गर्म करे फिर इस पेस्ट में आप इतना गर्म पानी मिलाये कि एक पतला घोल बन जाए अब इस घोल को बढे हुए अंडकोषों(Testicles) पर लेप करके सो जाए इस प्रकार तीन-चार दिनों तक करने से फायदा दिखेगा जब तक पूर्ण आराम न हो करे-

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Ibro-आई ब्रो घनी करने के टिप्स

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सभी महिलाओं और लडकियों की वो सुंदर दिखे सभी जानते है महिलाओं या लडकियों को अपनी तारीफ़ पसंद होती है सभी चाहती है वो हिरोइन से कम न दिखे लेकिन सबसे आकर्षण चेहरे में ही होता है और उसपे अगर आपकी Ibro-आई ब्रो घनी नहीं और बेतरतीब है तो आपकी सुन्दरता में कमी हो जाती है-

Ibro-आई ब्रो


आई ब्रो(Ibro)के गंजेपन की वजह से युवा वर्ग में रिश्ता न होने की समस्या भी बढ़ रही हैअगर आपकी भी आई ब्रो(Ibro)हल्की है और आप उसे घना बनाना चाहती हैं तो इन प्राकृतिक चीजों का प्रयोग कीजिये और देखिये कि क्या सच-मुच फायदा हुआ-

क्या करें-

रात को सोने से पहले रूई को दूध में भिगो कर अपनी Ibro-आइब्रो पर उसके आस पास की जगहों पर लगाएं- इससे दूध से मिले प्रोटीन और विटामिन से बालों की जडों को पोषण मिलेगा और वह फिर से ग्रो करने लगेंगी-

नहाने से पहले या फिर रात को सोने से पहले मेथी को पीस लीजिये और उसे अपनी आई ब्रो(Ibro) पर लगा लीजिये आप इसे पेस्ट में बादम का तेल भी मिला कर लगा सकती हैं इससे आपकी त्वचा को नमी प्राप्त होगी-

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16 जुलाई 2016

Suicide-आत्महत्या

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आज कल देखा गया है कि लोग डिप्रेशन(Depression)से जादा घिर गए है और जब यही डिप्रेशन जरुरत से जादा हो जाता है तो इन्शान निराश होकर आत्महत्या(Suicide)जैसा घातक कदम उठाने में भी नहीं हिचकता है इस संख्या का दिनों-दिन काफी इजाफा हुआ है समस्याओं से घिरा व्यक्ति सोचने समझने की शक्ति खोता जा रहा है वास्तव में जीवन से निराश लोग ही इस ओर प्रेरित होते है-

Suicide

इसके मुख्यत:कुछ विशेष कारण है अधिकतर लोग प्रेम-प्रसंग में असफल होने पे या फिर घर-परिवार से परेशान होकर बेरोजगारी या इम्तहान ,बिमारी आदि से परेशान होकर ये कदम उठाने को प्रेरित हो उठते है -

इसके अलावा भी अन्य कारण हो सकते है कुछ लोगों को संसार से विरक्ति सी होने लगती है कभी-कभी कुछ लोग तनाव से बाहर निकल आते है लेकिन जो लोग तनाव से नहीं निकल पाते है तो आत्महत्या(Suicide) जैसा कदम उठा लेते है -

होम्योपैथी उन कारणों को दूर तो नहीं कर पाती है लेकिन होम्योपैथी से उस व्यक्ति को निराशा से बाहर निकाल कर आत्महत्या जैसे विचारों को अवस्य दूर कर सकती है इससे उसका जीवन बच सकता है 

लक्षणों के आधार पर आप इस प्रकार किसी भी व्यक्ति की जान बचा कर पुण्य के भागीदार बन सकते है यदि कोई जीवन से निराश है और मरना चाहता है तो आप 'Aurum-Mate' की कुछ खुराकें दे उसकी आत्महत्या की इक्षा समाप्त हो जायेगी -यदि कोई जहर खा कर मरने का प्रयास करता है या फिर इक्षा जाहिर करता है आप उसे 'China' दे सकते है यदि कोई फांसी लगा के मरने को उत्सुक दिखे तो आप 'Natrum Sulf ' दे सकते है -

कुछ लोग खुद को गोली मार देने की धमकी या फिर ऐसा प्रयास करने को उत्सुक दीखते है आप उन्हें 'Anakardiam' दें पानी में डूब कर जान देने की इक्षा जाहिर करने या प्रयास करने वाले डिप्रेशन(Depression) से ग्रसित व्यक्ति को 'Antim Crude' का प्रयोग कराये और ऊचाई से छलांग लगाने की या मरने की इक्षा वाले व्यक्ति को आप 'Arjetikm nitricum' दे सकते है-

इस प्रकार कुछ अन्य रोगों के लिए भी लक्षणों के आधार पर होम्योपैथी दवा द्वारा किसी की भी जान बचा सकते है आप कठिन और असाध्य रोगों के लिए हमसे सम्पर्क कर सकते है रोगी को दवा घर बैठे कोरियर द्वारा भी भेजी जा सकती है हमारा सम्पर्क पता है-

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संपर्क पता-

KAAYAKALP

Homoeopathic Clinic & Research Centre

23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011

Director & Chief Physician:

Dr.Satish Saxena D.H.B.

Regd.N.o.7407 (M.P.)

Mob :  09977423220(फोन करने का समय - दिन में 12 P.M से शाम 6 P.M)(WHATSUP भी  यही नम्बर है)

Dr. Manish Saxena

Mob : -09826392827(फोन करने का समय-सुबह 10A.M से शाम4 P.M.)(WHATSUP भी  यही नम्बर है )

Clinic-Phone - 0751-2344259 (C)

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15 जुलाई 2016

आप अपने Luck-भाग्य के निर्णायक स्वयं है

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बहुत से लोगों को हमने ये कहते सुना है मेरा भाग्य(luck)ही खोटा है या परमात्मा की मर्जी नहीं है या फिर किस्मत को कोसते रहते है -क्या आप कभी भी ये नहीं सोचते है कि आप का luck-भाग्य अच्छा नहीं होता तो आपको ये मनुष्य जन्म न मिलकर भेड़,बकरी,पक्षी आदि की योनी प्राप्त भी हो सकती थी -जन्म देने वाला परमात्मा आपको जन्म देकर ये नहीं कहता है कि बस आप भाग्य(luck)के उपर निर्भर होकर बैठ जाए परमात्मा कभी भी ये नहीं कहता है कि हम तुम्हारा भाग्य बिगाड़ेगें या बनायेगे-ये तो स्वयं ही आप बनाते और बिगाड़ते हो-

Your Luck Is Turning Itself

परमात्मा के लिए तो बस आप सिर्फ दिखावा मात्र ही करते हो-समर्पण करने वाली वस्तु तो आप उसे कभी भी नहीं देना चाहते हो या समझ लो कभी अंतरात्मा से इक्षा ही नहीं की है लेकिन फिर भी दोष अपना न देते हुए सारा दोष भाग्य या परमात्मा पे ही मढ़ देते हो-क्युकी अपनी असफलता का श्रेय दूसरों पे डाल देना आपकी आदत में शुमार है-

आप बंद करिये ज्योतिषियों और तांत्रिको के पीछे भागना-ये लोग अपना खुद का भाग्य ही नहीं बदल सके तो आपका भाग्य कैसे बदल सकते है ये तो उनका खुद का व्यापार फलता-फूलता है यदि वो आपको शांति-धन प्रदान कर सकते तो फिर खुद क्यों दूकान सजा कर बैठे होते- ये तो केवल आपके भीतर भाग्य, भविष्य, ऊपरी हवा, ग्रहों एवं ईश्वर की नाराजगी का भय पैदा कर आपको पंगु और लाचार बनाते हैं-

अरे इनको अपनी ही कुंडली नहीं मालूम है-जो खुद अपने और अपने परिवार का भविष्य नहीं जानते-उन भटके, लालची, अंधे लोगों के हाथ आप अपने जीवन की लगाम क्यों सौप देते हो ? 

कोई शनि, मंगल, कोई ग्रह इस संसार में आपका भाग्य बनाने या बिगाड़ने के लिये नही घूमता है आप खुद ही अपने भय या विश्वास पैदा कर खुद ही उसके जाल में जकड़ कर लाभ या हानि उठाते हैं-

ईश्वर ने क्या माँगा था उसने तो आपको दिया ही है -हवा,पानी,ताप,प्रकृति की सभी चीजे -वो जिनका कोई मूल्य भी नहीं लेता है ये तो आप ही हो जो मक्कार और धूर्त लोगों को लुटाने के लिए बैठे है फिर दोष कहाँ से परमात्मा का है-

जीवन मिलना भाग्य की बात है और मृत्यु का समय निश्चित है लेकिन आप मृत्यु के बाद भी लोगों के दिलों में जीवित रहे ये आपके कर्म की बात है-

खड़े-खड़े भाग्य के दरवाजे पे सिर मत पटको आप-कर्मो का तूफ़ान खड़ा कर दो सारे दरवाजे अपने आप खुल जाते है- ये जरुरी नहीं कि आप रोज मंदिर जाए आपके कर्म ऐसे हो कि आप जहाँ जाए वहीं मंदिर बन जाए-

सोचो समझो और अच्छा लगे तो ग्रहण करो -कर्म करो एक न एक दिन भाग्य जिसे आप मानते हो आपके दरवाजे पे खुद खड़ा होगा ...!


जरा आप सोचो कि परमात्मा को क्यों आपके भाग्य में रूचि है ये तो आपकी खुद की सोच,मान्यताये,आपके कर्म ही है जो प्रतिपल आपके भाग्य का निर्माण करते है -मान लो आप करोडपति हो या निर्धन हो तो भला परमात्मा को क्या फर्क पड़ता है -आप उपहार स्वरूप यदि परमात्मा को कुछ भेंट भी करो तो भी वो तुम्हारे ही पास है और न भी करो तो भी तुम्हारे पास है आप केवल समाज में अपने नाम के लिए ही करते हो -


खुद समाज में रह कर इर्ष्या ,द्वेष्य,दूसरों के प्रति आप रखते हो तो कर्म फल भी वैसा ही मिलेगा-तो फिर रोना क्यों रोते हो-आप ही कर्म से खुद को बनाते या बिगाड़ते हो-आपके जीवन या भाग्य का कोई यहाँ निर्णायक नहीं है किसी को आपके जीवन की बर्बादी या विकास में रूचि नहीं है-इस संसार में सब कुछ कर्म-फल  नियम के अनुसार हीं घटित होता है-

तोड़ दो अपनी पुरानी मान्यताओं को, भाग्यवादिता को, बंद करिए आप परमात्मा से सारे दिन मांगना- तुम सागर से चम्मच भरो या बाल्टी- क्या परमात्मा आपको रोक रहा है

फेंक दीजिए अपनी सारी नगों से भरी हुई अंगूठियाँ- ये घरों में लटके हुए तंत्र मंत्र और यंत्र, जो आपकी लाचारगी, कमजोरीयों, आपके डर और आत्मविश्वास की कमी को दर्शाते हैं- जो यह साबित करते हैं कि आपका स्वयं और परमात्मा पर बिल्कुल श्रधा नहीं है- बंद कीजिए परमात्मा को रिझाना, उसकी चापलूसी करना, वह तो हर फूल को पूर्णरूप से खिलने के लिए पैदा करता है- अमीरी परमात्मा की देन है, गरीबी आपका अपना चुनाव है जो आपकी अपनी अज्ञानता है-

हमने हस्त रेखा पर रिसर्च की और तीन वर्ष की रिसर्च के बाद ही मुझे ये पता चला की ये रेखाएँ तो सिर्फ मानसिक सोच के साथ बदलती रहती हैं तो फिर भविष्य का निर्धारण कैसे करें- फिर ज्योतिष का अध्यन किया- तो उसमे मैंने देखा की अच्छे-बुरे कर्म को करके भविष्य को बनाया और बिगाड़ा जा सकता हैं- इससे भी संतुष्ट नही हुआ फिर दर्शन- शास्त्र का अध्ययन किया इसमें पाया कि हमारे जीवन में जो कुछ भी अच्छा बुरा हो रहा हैं वो तो हमारे भावों का ही परिणाम हैं-

आप दान करने का कर्म करते हो तो उसके पीछे आपका विश्वास रूपी भाव जुड़ता हैं- स्टोन पहनते हो तो उसके पीछे भी भाव जुड़ता है की इसके पहनने से ये फल मिलेगा- तो जब सब-कुछ आपके मन के विश्वास से घटित हो रहा हैं तो ये आडम्बर क्यों अपना रहे है हम लोग- 

मूर्ती में कोई परमात्मा नही बसता बल्कि परमात्मा तो आपके विश्वास में बसता हैं- मूर्ती तो मात्र आधार बनती हैं-वास्तविक परमात्मा तो आपके अंदर ही है जो आप बाहर भटक-भटक कर ढूढ़ रहे हो - ईश्वर ने एक दिन 24 घंटे का बना कर आपको सौंप दिया ये सोच कर कि कुछ चंद मिनट उसे भी दोगे लेकिन मनुष्य की यही प्रवर्ती है मिलने के बाद अपने में से किसी को कुछ नहीं देना चाहता है सारा समय सिर्फ अपने लिए उपयोग करता है और परमात्मा को ढूंढ़ता फिरता है अघोरी,तांत्रिक,मान्त्रिक,ढोगियों के पास -

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Hiccoughs-हिचकियों का दौरा

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यह मरीज एक वृद्ध महिला थी जो दमा रोग से पीडित तो थी उन्हें हिचकियों का दौरा भी पड गया था घरेलू, आयुर्वैदिक तथा ऐलोपैथिक की हिचकी रोकने के लिये सभी अकडन विरोधी(Antispasmodic)दवाइयाँ असफल सिद्ध हो जाने के कारण होम्योपैथिक चिकित्सा के लिये मेरे पास लाया गया था मेरे द्वारा दी गईं दवाइयाँ मैग्नीषिया, कॉस्टीकम, आर्सेनीकम एल्वम आदि तथा जिन्सैंग के मूल अर्क से भी कोई लाभ नहीं हुआ और रोगी की हालत यह थी कि साँस लेने में भी कठिनाई हो रही थी-

Hiccoughs

तब मेरे मन में विचार आया कि मानसिक लक्षणों का भी परीक्षण किया जाय क्योंकि मैंने भी सुन रखा था कि किसी प्रियजन के द्वारा याद किये जाने पर अथवा किसी तीव्र इच्छा के दमन करने पर हिचकियाॉँ(Hiccoughs) आने लगतीं हैं -मेरे पूँछने पर किसी से मिलने या कहीं जाने की बात तो नहीं समझ में आई परन्तु उनकी इच्छा पूँछने पर उन्हौंने बताया कि खूब अच्छा हींग का वघार लगा कर बेसन की कढी और चावल खाने की उनकी बहुत इच्छा है यह उन्हौंने अपनी बहू को भी बताया था परन्तु साँस की बीमारी के कारण यह सब देने की उसकी हिम्मत नहीं हुई- धर्मसंकट में तो मैं भी पड गया परन्तु सोचा कि हींग का एन्टीडोट दे कर माता जी को कढी-चावल खिलाया जाय यदि कोई कष्ट होता है तो उसे दवाइयों से ठीक कर लिया जायेगा-
                   
मैंने उनकी बहू से कहा कि माताजी के लिये जैसा वे कह रहीं हैं वैसी कढी- चावल बनाइये और मैं माताजी को अपने सामने ये खिलाना चाहता था इस लिये मैंने बहू से कहा कि मैंनें भी बहुत दिनों से कढी-चावल नहीं खाया है इसलिये मैं भी माताजी के साथ ही भोजन करूँगा-

मैंनें माताजी को "Assfoetida 1000" की दो खुराकें आधे आधे घंटे से खिला दीं थी और फिर दो घंटे बाद उन्हें कढी-चावल खिलाया-खाना खाने के वाद उन्हें परेशानी तो कोई नहीं हुई लेकिन हिचकियाँ(Hiccoughs) आधे घंटे बाद ही एक दम बन्द हो गईं और फिर उन्हें जीवन में यह कष्ट दुवारा कभी नहीं हुआ-

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9 जुलाई 2016

How To Stay Healthy-कैसे स्वस्थ रहना है

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How To Stay Healthy

How To Stay Healthy-कैसे स्वस्थ रहना है-

स्वस्थ रहना हर व्यक्ति चाहता है कुछ बातों को अपने जीवन में अपनाए स्वास्थ के साथ मानसिक संतुष्टि भी आपको प्राप्त होगी-वैसे मुफ्त की सलाह की कोई वैल्यू तो नहीं होती मगर क्या करे -हमारा भी दिल नहीं मानता है इसलिए हम जितनी भी पोस्ट लिखते है हमेशा ये सोच कर लिखते है -ये जरुरी नहीं मेरे लिखे पोस्ट को पढ़ कर सभी लोग मेरी बात मान ले- मगर यदि हमारी पोस्ट को पढ़ कर सिर्फ दो लोग ही अनुकरण करने लगते है तो समझता हूँ कि मेरी पोस्ट सार्थक है-

वैसे मेरे दिए प्रयोग से काफी लोगो को लाभ हुआ है लेकिन ये भी सच है कि कुछ लोगों को लाभ नहीं भी हुआ है तो इसका मतलब ये नहीं है -कि नुस्खे गलत है कुछ ऐसे कारण भी होते है जैसे -खान-पान और मौसम का भी फर्क होता है या फिर औषिधि निर्माण सही और शुद्धता से न किया गया हो-

आइये जानते है क्या करे और क्या न करे-

ईश्वर ने बिना टैक्स के जल वायु सूर्य रोशिनी आपको उपहार स्वरुप प्रदान की है जिसका लाभ आप नहीं लेते है तो दोष किसका? आप हर रात तांबे के लोटे में जल को ढक कर रक्खे और सुबह सूर्योदय से पूर्व ही टहलने जाए और ताज़ी हवा अवस्य ले ये सुबह की हवा भी किसी विटामिन से कम नहीं होती है फिर लौट कर तांबे के लोटे का रात का रक्खा हुआ जल सेवन करे- न कि आप बेड टी ले - पेट साफ़ होगा कब्ज नहीं होगा पेट संबधी रोगों से बचे रहेगे-बस आप एक माह कर के देखे और परिवर्तन महसूस करे-

आप जब भी खाना खाए जल्द बाजी में नहीं खाए भगवान् ने आपको दांत इसलिए दिए है कि भोजन को खूब चबा-चबा कर ग्रहण करे -लार ग्रन्थियों के रस से आपका भोजन का पाचन शीघ्र होगा और आपकी आंत को जादा मेहनत नहीं करनी होगी -तथा लाभ-एसिडिटी ,गैस ,अफारा,आँतों का प्रदाह आदि  नहीं  होगा-

यदि आप नियमित छ: दिन संतुलित भोजन करते है तो हफ्ते में एक दिन मनमानी वस्तुएं खा  सकते है और अगर आप मनमानी ढंग से भोजन  के आदी है तो फिर हफ्ते  में एक दिन उपवास करे -मतलब अपनी मशीन को रेस्ट अवस्य ही एक दिन दे-आप स्वस्थ रहेगे-

कभी भी चेहरा व आँखे गर्म पानी से न धोएं न ही गर्म जल से गुदा या स्नान करना भी हानिकारक है हमेशा ताजे और ठन्डे जल का प्रयोग करे-

जब भी रात या दिन को सोयें पैर दक्षिण दिशा की तरफ न करे इससे दिल और दिमाक पर चुम्बकत्व प्रभाव पड़ता है बुरे स्वप्न आते है और शरीर का आयरन दिमाक और तलवे की तरफ चला जाता है सो के उठने पर दर्द की शिकायत भी होती है -

रोग की अवस्था में या बिमारी के प्रभाव से तुरंत मुक्त होने के बाद या फिर भोजन के तुरंत बाद या प्रात:काल और सूर्यास्त की बेला में विषय-भोग न करे ये बहुत ही हानिकारक है -

किसी से कोई भी बात गुप्त रखना है तो फिर कितना ही अभिन्न व्यक्ति दोस्त ,पत्नी, प्रेमिका हो किसी भी कीमत पे शेयर न करे -आज जो आपका प्रिय व्यक्ति है ये आज के जमाने में जरुरी नहीं वो आपका प्रिय ही रहेगा जब भी सम्बन्ध ख़त्म होगे -आपकी गुप्त बात फैलाने में वही व्यक्ति आगे होगा और फिर आपको जलालत होगी-

किसी को कटु वचन न कहे किसी का अपमान न करे अच्छे-और बुरा वक्त सभी का होता है उस समय का अपमान या कटु वचन आपको किसी भी परिस्थिति में दुःख भी दे सकता है-

आनंद जीवन में सभी के साथ शेयर करे और दुःख किसी को न बांटे वो तो आपके काटने से ही कटेगा -बेवजह दुःख किसी को देना उचित नहीं है -

अगर आप अपनी यौन शक्ति जीवन के अंत समय तक प्रदीप्त रखना चाहते है तो कामुक चिंतन से दूर रहे और सहवास हफ्ते में एक दिन ही उचित है दो बार तक चलेगा इसके बाद रोज -रोज करना आपको जल्द ही बुढापे की ओर अग्रसर ही करेगा -

दांत स्वस्थ रखना है तो सुबह मंजन करे मसूड़ों की मालिस के साथ और रात को ब्रश करके ही सोयें दिन भर के कीटाणु रात ब्रश के बाद समाप्त होगे -

कब्ज से बचे- साठ प्रतिशत रोग की जड़ कब्ज ही है - नकली सामान लेने से बचे चमक वाली चीज हो सकता है मिलावटी हो जो आपके सेहत के लिए नुकसान दायक हो- 




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8 जुलाई 2016

Depression-मानसिक अवसाद

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मानसिक अवसाद(Depression)से ग्रस्त रोगी बे-सिर पैर की बातें करता है और वो अजीबो गरीब और असामान्य व्यवहार करता हो या जो बहुत चुप हो गया हो और औरों से मिलना जुलना और बात करना छोड़ दे ऐसे भी कई लक्षण होते है जो मानसिक रोगी के ब्यक्ति में नजर आते है-

Depression

ये केस भी वक्षस्थल के सिकुड़ने वाली महिला की माँ का है उसे भी क्षय रोग हुआ था जिसे ऐलोपैथिक दवाइयों के प्रयोग से ठीक हो गया ये मान लिया गया था क्यों कि न बुखार था न खांसी, फेफडे साफ़ तथा बलगम कीटाणु रहित पाया गया था-

कुछ समय तो सब कुछ ठीक चला किन्तु 5-6 महिने बाद मरीज की मानसिक दशा(Mentality)बिगड़ने लगी थी उसने एक कमरे से सारा सामान,फरनीचर आदि बाहर निकाल दिया तथा केवल एक छोटी सी चाय की मेज़ फर्श पर रख कर उस पर दोनों हाथों पर सिर को रख कर रात दिन बैठी रोती रहती थी-

यह पूँछने पर कि क्या किसी ने कुछ कहा है या कुछ लेना हैं या कुछ देना है- कुछ खाना है या कहीं जाना-जाना है आदि सभी प्रश्नों का एक ही उत्तर होता, नहीं, नहीं, नहीं- 

रोग की हिस्ट्री में क्षय रोग अतिरिक्त कुछ समय पहिले एक बहिन की मृत्यु के अलावा और कोइ खास बात सामने नहीं आई थी - 'ट्रयुवरक्युलीनम 1000' व 'नेट्रम म्यूर30' और 'काली फाँस 30' ने लगभग एक माह में उनको सामान्य जीवन जीने लायक बना दिया था-

मानसिक रोगी के लिए होम्योपैथी उपचार बहुत ही उचित और लाभकारी है किसी भी योग्य चिकित्सक से मानसिक रोगी का इलाज करना चाहिए-

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Blood donation-रक्तदान क्यों करे

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हमारे देश आज भी काफी लोग ऐसे है जिन्होंने सिर्फ इस गलत फहमी के कारण कभी रक्त दान नहीं किया होगा कि खून देने से कमजोरी आती है लेकिन हमारे देश में बहुत से लोग ऐसे भी है जो वर्ष में एक नहीं दो बार से जादा भी अपना रक्तदान(Blood donation)करते है जरा सोचे ईश्वर ने आपको एक ऐसी नियामित दी है जिससे आप लोगों का जीवन बचा कर उन्हें नई जिन्दगी दे सकते है और इसमें आपका कोई नुकसान भी नहीं होगा बल्कि ये सोचकर शुकून ही मिलेगा कि आपके दान से किसी की जिन्दगी बच सकती है-

Blood donation


जब किसी का एक्सीडेंट या कोई ऐसी बिमारी जिसमे जान बचाना मुसकिल होता है आपके रक्त दान से जीवन प्राप्त हो ऐसा दान सभी दान से उत्तम महादान कहलाता है -

हमारे देश में जितने रक्त की वार्षिक आवश्यकता है उसकी तुलना में हमारे देश रक्तदाताओं की संख्या काफी कम है-वैसे देखा गया है कोई बात समझाने से लोग ये समझ लेते है कि ये बात उन पे थोपी जा रही है इसलिए हमारे देश में ये नियम बना दिया गया है कि अगर किसी को रक्त चढाने की आवश्यकता है तो उसके निकट या सम्बन्धी को पहले रक्तदान करना होगा फिर आपको बैंक से रक्त मिलेगा-

क्युकि अगर हम सभी जागरूक होते और समझते कि इसका महत्व क्या है तो हमारे देश में ब्लड आपको बैंक से आसानी से मिल जाता है लेकिन इस जागरूकता के लिए कोई कानून नहीं सिर्फ आपको अपनी अंतरात्मा की आवाज ही प्रेरित कर सकती है -

यदि हर व्यक्ति वर्ष में सिर्फ एक बार अपनी स्वेक्षा से रक्त दान कर दे तो न जाने कितनी जिंदगियां बचाई जा सकती है भगवान् आपको नहीं कहने आयेगे ये तो आपके आत्मा की आवाज है जो -जब जागरूक होगी तो कोई न कोई जिन्दगी हंस रही होगी- 

रक्त दान से आपको स्वयं के लिए भी कई लाभ है जिनसे आप अभी तक अनजान है आपको दूसरी पोस्ट में बताने का प्रयास करेगे-

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Blood Donation-ब्लड डोनेशन से लाभ

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बहुत से लोगों के मन में ये दुविधा रहती है कि ब्लड डोनेट करने से हमारे शरीर में कमजोरी आएगी जबकि ये बात कोई -कोई ही जानता है कि ब्लड डोनेशन(Blood Donation) करने के क्या लाभ है फिर क्यों आप नहीं सोचते है कि खुद के लाभ को लेते हुए आप दूसरों की जान बचाने में भी सहभागी बने ये आपके लिए दुनियां का सबसे बड़ा पुण्य कार्य भी है -

Blood Donation


Blood Donation-रक्तदान करने से न केवल किसी व्यक्ति का जीवन बचता है, बल्कि रक्तदाता में नई कोश‍िकओं का सृजन करता है-

Blood Donation-रक्तदान-कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और रक्तचाप को नियंत्रित करता है-इससे ज्यादा कैलोरी और वसा को बर्न होता है और पूरे शरीर को फिट रखता है-

रक्तदान(Blood Donation) आयरन का स्तर नियंत्रित करता है जिससे रक्त को गाढ़ा बनाता है और उसमें फ्री रेडिकल डैमेज बढ़ता है-

देश में हर साल 250 सीसी की चार करोड़ यूनिट ब्लड की आवश्यकता पड़ती है और सिर्फ पांच लाख यूनिट ब्लड ही उपलब्ध हो पाता है फिर जरा सोचे कि कितने लोग इस ब्लड से वंचित रह जाते है आप किसी के जीवन को बचाने में सहभागी बने क्युकि ब्लड का उत्पादन नहीं किया जा सकता है और न ही इसका कोई विकल्प आज तक है -ब्लड की कमी का एकमात्र कारण जागरूकता का अभाव है-

हमारे शरीर में कुल वजन का 7% हिस्सा खून होता है-Blood Donation सुरक्षित व स्वस्थ परंपरा है इसमें जितना खून लिया जाता है वह 21 दिन में शरीर फिर से बना लेता है ब्लड का वॉल्यूम तो शरीर 24 से 72 घंटे में ही पूरा बन जाता है-

ब्लड डोनेशन(Blood Donation) से हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है डॉक्टर्स का मानना है कि डोनेशन से खून पतला होता है- जो कि हृदय के लिए बहुत ही अच्छा होता है तथा एक नई रिसर्च के मुताबिक नियमित ब्लड डोनेट करने से कैंसर व दूसरी बीमारियों के होने का खतरा भी कम हो जाता है क्योंकि यह शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है-

ब्लड डोनेट करने के बाद बोनमैरो नए रेड सेल्स बनाता है- इससे शरीर को नए ब्लड सेल्स मिलने के अलावा तंदुरुस्ती भी मिलती है-18 साल से अधिक उम्र के स्त्री-पुरुष जिनका वजन 50 किलोग्राम या अधिक हो एक वर्ष में तीन-चार बार ब्लड डोनेट कर सकते हैं-

ब्लड डोनेट करने योग्य लोगों में से अगर मात्र 3 प्रतिशत भी खून दें तो देश में ब्लड की कमी दूर हो सकती है ऐसा करने से असमय होने वाली मौतों को रोका जा सकता है-रक्तदान नहीं करने वाले भी ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करके खुद भी स्वस्थ रहे तथा कई लोगों की जान बचा सके-

ब्लड डोनेट से पहले-

  1. ब्लड डोनेट करने वाले शख्स को रक्तदान के 24 से 48 घंटे पहले ड्रिंक नहीं करनी चाहिए-
  2. ब्लड डोनेट करने से पहले व कुछ घंटे बाद तक धूम्रपान से परहेज करना चाहिए-
  3. ब्लड डोनेट करने से पहले पूछे जाने वाले सभी प्रश्नों के सही व स्पष्ट जवाब देना चाहिए-
  4. ब्लड देने से पहले मिनी ब्लड टेस्ट होता है जिसमें हीमोग्लोबिन टेस्ट,ब्लड प्रेशर व वजन लिया जाता है ब्लड डोनेट करने के बाद इसमें हेपेटाइटिस बी व सी, एचआईवी, सिफलिस व मलेरिया आदि की जांच की जाती है इन बीमारियों के लक्षण पाए जाने पर डोनर का ब्लड न लेकर उसे तुरंत सूचित किया जाता है-यानी कि हर बार आपका चेकअप भी होता रहता है-
  5. Blood Donation करने के बाद आप पहले की तरह ही कामकाज कर सकते हैं इससे शरीर में किसी भी तरह की कमी नहीं होती है-
  6. और भी देखे-
Upcharऔर प्रयोग-

7 जुलाई 2016

प्लेटलेट काउंट(Platelet Count) कैसे बढायें

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प्लेटलेट काउंट(Platelet Count) कैसे बढायें-

एक वयस्क व्यक्ति के शरीर के भार में लगभग आठ प्रतिशत भार मानव-रक्त का होता है तथा  एक स्वस्थ मनुष्य का सामान्य Platelet Count एक Microlitre रक्त में लगभग 1,50,000 से 4,50,000 तक रहता है आइये सबसे पहले समझे रक्त के प्रमुख क्या कार्य है-

Platelet Count

रक्त(blood)आक्सीजन एवं पोषक तत्वों को फेफड़ो एवं शरीर के अन्य अंगों तक पहुंचाने का कार्य करती है तथा अवशिष्ट एवं जहरीले पदार्थों को निकालने में भी सहायक है तथा यह शरीर के तापमान को भी नियंत्रित करता है तथा प्लेटलेट का सबसे महत्वपूर्ण कारक है शरीर को विभिन्न रोगों के आक्रमण से बचाने का प्लेटलेट(Platelets) का महत्वपूर्ण स्थान है जिसमे मुख्य है-रक्तर्स्राव के दौरान Vascular spasm,Platelet Plug formation एवं रक्त के थक्के जमाने में-

प्लेटलेट काउंट कम होने के कारण-

1- Spleen में प्लेटलेट की उपस्थिति जो कि कैंसर अथवा गंभीर लीवर बीमारियों के कारण होती है -

2- प्लेटलेट के निर्माण में कमी निम्न कारणों से भी होती है -

ल्यू केमीया
कुछ प्रकार की रक्ताल्पता
वायरल इन्फेक्शन
कीमोथेरेपी के दौरान दी जाने वाली दवाएं
अत्यधिक शराब का सेवन
विषैले रासायनिक पदार्थों से सम्पर्क
B12 जैसे विटामिनों की कमी 

3- प्लेटलेट का सामान्य से अधिक गति से टूटना जो कि निम्न कारणों से होता है-

ऑटो इम्यून बीमारियों के कारण
कुछ दवाइयों के प्रतिक्रिया स्वरूप
रक्त में बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण 

4- गर्भवस्था एवं निम्न स्वास्थ समस्याओं के कारण शरीर में ये लक्षण परिलक्षित होने से लगते है जैसे-अत्यधिक लम्बे समय तक रक्तस्राव ,नाक अथवा मसूड़े से अचानक रक्त बहने लगना,मूत्र अथवा मल में रक्त का जाना ,स्त्रियों को मासिक स्राव के दौरान अस्वाभाविक रूप से जादा रक्तस्राव -

5- जिन लोगों का प्लेटलेट काउंट सामान्य से कम होता है प्राय: वे लोग बहुत अधिक थकान एवं सारे समय कमजोरी की शिकायत करते पाए जाते है -

6- हम अपने जीवन शैली में कुछ परिवर्तन करके तथा कुछ खाने-पीने की वस्तुओं को रोजमर्रा के जीवन में शामिल करके प्लेटलेट स्तर(Platelet Count) को अत्यंत शीघ्रता से बढ़ा सकते है आइये देखते है वो क्या है जिसको हम अपने जीवन में लाये और प्लेटलेट काउंट को बढ़ाने में सहयोग करे-

पपीता(Papaya)- 

पपीता(papaya)एवं पपीते की पत्तियों से प्लेटलेट स्तर(Platelet Count) को कुछ ही दिनों में बढाया जा सकता है तथा पपीते की पत्तियों का रस Dengue बुखार के मरीजों का प्लेटलेट स्तर बढ़ा सकता है -पका पपीता भी खाया जा सकता है अथवा पपीते का रस एक गिलास थोड़े से नीम्बू का रस डालकर दिन में दो या तीन बार भी ले सकते है-पपीते के पत्तों का रस पीसकर निकाला जा सकता है इस कडवे रस का दो चम्मच रस दिन में दो बार पिया जा सकता है ये आपके प्लेटलेट काउंट को तेजी से बढाता है-

गेहूं के ज्वारे(Wheatgrass)-

गेहूं के ज्वारे भी प्लेटलेट काउंट बढ़ाने में लाभकारी सिद्ध हुए है Wheatgrass सिर्फ प्लेटलेट काउंट(Platelet Count) ही नहीं हिमोग्लोबिन(Hemoglobin) लाल रक्त के कण और सफ़ेद रक्त कण को भी बढाता है यह इसलिए होता है कि Wheatgrass में उच्च मात्रा Chlorophyll होता है जिसकी संरचना मानव रक्त के हिमोग्लोबिन जैसी होती है-

कद्दू(Pumpkin)-

कद्दू भी प्लेटलेट काउंट बढाने में सहायक है क्युकि कद्दू विटामिन A से भरपूर होता है जो कि प्लेटलेट काउंट(Platelet Count) के विकास में सहायता करता है इसके अतिरिक्त यह Cells में उत्पन्न होने वाले प्रोटीन को भी सही मात्रा में नियंत्रित करता है जो कि प्लेटलेट काउंट को बढाने के लिए महत्वपूर्ण है-

पालक(Spinach)-

पालक विटामिन K का एक उत्तम स्त्रोत है जो लो प्लेटलेट काउंट के उपचार में सहायक होता है विटामिन K रक्त का सही थक्का बनाने में मददगार होता है और इस प्रकार ये अत्यधिक रक्तस्राव को नियंत्रित भी करता है पालक को आप नियमित भोजन में किसी भी रूप में ले सकते है-

आँवला(Gooseberry)-

आयुर्वेदिक उपचार में आँवले का उपयोग प्लेटलेट काउंट को बढाने में बहुत होता है इसमें पाया जाने वाला Vitamin C प्लेटलेट उत्पादन के साथ-साथ रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी बढाता है आप खाली पेट दो या तीन आंवला ले सकते है या आंवले का रस शहद के दो तीन बार ले सकते है आप भोजन में मुरब्बे का प्रयोग से भी ये लाभ ले सकते है-

विटामिन सी(Vitamin C)-

प्लेटलेट काउंट बढ़ाने के लिए विटामिन सी जो कि एस्कार्बिक एसिड (Ascorbic Acid) भी कहलाता है इसे बढ़ाना होता है विटामिन सी की उच्च मात्रा Antioxident क्षमता के कारण उच्च मात्रा में देने से प्लेटलेट का क्षरण बहुत ही कम किया जा सकता है आप इसे डॉक्टर की सलाह से ले सकते है-

लहसुन(Garlic)-

रक्त शुद्धिकरण के लिए लहसुन का प्रयोग उत्तम है क्युकि ये स्वाभाविक रूप से एंटीबायोटिक(Antibiotic) है ये रक्त में वसा(Fat) की मात्रा को भी कम करता है -

नोट-

उपरोक्त  सभी का उपयोग करे लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन अवश्य करे -


Upcharऔर प्रयोग-

5 जुलाई 2016

उँगलियों में सूजन(अंगुली वेष्टक)क्या है

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घर में काम करते वक्त सुई से कुछ सीने-पिरोने पर या फिर चाक़ू छुरी से कुछ काटने पर गलती से कट जाने पर वहां शोथ(Swelling)की विकृति होती है और शोथ(Swelling)पकने के बाद वहां से पस(Pus)निकलने लगता है या फिर किसी विषैले जीव-जंतु के काट लेने व डंक मारने पर भी उक्त भाग में शोथ होने पर पस बनने लगता है उँगलियों के बीच उत्पन्न सडन की विकृति को अंगुली बेस्टक भी कहते है-

उँगलियों में सूजन(अंगुली वेष्टक)क्या है


वर्षा ऋतु में गंदे जल से,कीचड़ के कारण पांवो की उँगलियों के बीच अंगुली वेष्टक की विकृति बहुत देखी जाती है नाख़ून के मूल में चोट लग जाने पर शोथ(Swelling)के कारण अंगुली वेष्टक हो जाता है इसमें बहुत दर्द होता है रोगी रात को भी सो नहीं पाता है और एलोपैथी में चिकित्सक सिर्फ आपरेशन की ही सलाह देते है-लेकिन आयुर्वेद में इसका इलाज है-

अंगुली वेष्टक की आयुर्वेद चिकित्सा-


1- गंधक रसायन एक या दो ग्राम की मात्रा में मंजिष्ठा क्वाथ के साथ सुबह-शाम सेवन करने से उँगलियों का शोथ नष्ट होता है -

2- रस माणिक्य 60-150 मिलीग्राम त्रिफला चूर्ण व मधु मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से अंगुली वेष्टक की विकृति का निवारण होता है -

3- यशद भस्म 125 ग्राम मात्रा में एक बार सुबह,एक बार शाम को मधु मिलाकर चाटने से अँगुलियों के शोथ में काफी लाभ होता है-

4- अमृतादि गुग्गल की एक या दो गोली सुबह-शाम जल से सेवन करने से अंगुली वेष्टक नष्ट हो जाता है-

5- दशांग लेप या स्वर्ण क्षीरी लेप करने से लाभ होता है-

6- जत्यादि तेल लगाने से भी बहुत लाभ होता है-

7- टंकणामृत मलहम अंगुली वेष्टक का निवारण करता है-

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