कलौंजी(Kalounji)के क्या गुण है

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कलौंजी(Kalounji)के क्या गुण है-

हर घर में मसाले के रूप में कलौंजी(Kalounji)का इस्तेमाल होता है पर क्या आपको कलौंजी के गुण पता हैं अगर नहीं पता है तो आज आप इसके गुणों को पढ़ कर हैरान हो जायेगे कि ये कितने काम की चीज है कलौंजी(Kalounji)के बीजों तेल भी बनाया जाता है जो रोगों के लिए बहुत प्रभावशाली होता है इसका तेल न मिलने पर कलौंजी से काम चलाया जा सकता है-

कलौंजी Kalounji

कलौंजी(Kalounji)की उपयोगिता-

कलौंजी(Kalounji)वनस्पति पौधे के बीज है और औषधियों के रूप में बीजों का ही प्रयोग किया जाता है अत: कलौंजी के बीजों को बहुत बारीक पीसकर सिरका, शहद या पानी में मिलाकर उपयोग किया जाता है-

कलौंजी(Kalounji)का तेल कफ को नष्ट करने वाला और रक्तवाहिनी नाड़ियों को साफ करने वाला होता है इसके अलावा यह खून में मौजूद दूषित व अनावश्यक द्रव्य को भी दूर होता है कलौंजी का तेल सुबह खाली पेट और रात को सोते समय लेने से बहुत से रोग समाप्त होते हैं-

गर्भावस्था के समय स्त्री को कलौंजी(Kalounji)के तेल का उपयोग नहीं कराना चाहिए इससे गर्भपात होने की सम्भावना रहती है-

कलौंजी मूत्र लाने वाला, वीर्यपात को ठीक करने वाला और मासिक-धर्म के कष्टों को दूर करने वाला होता है-

कलौंजी(Kalounji) का तेल कैसे बनाया जाता है इसके बारे में भी आपको अवगत कराते है-

कलौंजी का तेल(Kalounji seed oil)बनाने की विधि-

250ग्राम कलौंजी(Kalounji)पीसकर ढाई लीटर पानी में उबालें-उबालते-उबलते जब यह केवल एक लीटर पानी रह जाए तो इसे ठंडा होने दें-कलौंजी को पानी में गर्म करने पर इसका तेल निकलकर पानी के ऊपर तैरने लगता है-इस तेल पर हाथ फेरकर तब तक कटोरी में पोछें जब तक पानी के ऊपर तैरता हुआ तेल खत्म न हो जाए-फिर इस तेल को छानकर शीशी में भर लें और इसका प्रयोग औषधि के रूप में करें-

ध्यान रहे कि अधिक मात्रा में कलौंजी सेवन करने से दर्द, भ्रम, उत्तेजना आदि पैदा हो सकता है-त्वचा, किडनी, आंत, आमाशय और गर्भाशय पर कलौंजी का उत्तेजक प्रभाव पड़ता है-कलौंजी का सेवन करते समय नींबू को न खाएं-

मात्रा-

यह 1 से 3ग्राम की मात्रा में उपयोग किया जाता है-

इसकी अन्य उपयोगिता-

  1. जली हुई कलौंजी(Kalounji)को हेयर ऑइल में मिलाकर नियमित रूप से सिर पर मालिश करने से गंजापन दूर होकर बाल उग आते हैं-
  2. कलौंजी के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर त्वचा पर मालिश करने से त्वचा के विकार नष्ट होते हैं-
  3. कलौंजी(Kalounji)का तेल एक चौथाई चम्मच की मात्रा में एक कप दूध के साथ कुछ महीने तक प्रतिदिन पीने और रोगग्रस्त अंगों पर कलौंजी के तेल से मालिश करने से लकवा रोग ठीक होता है-
  4. कलौंजी का तेल(Kalounji Oil)कान में डालने से कान की सूजन दूर होती है-इससे बहरापन में भी लाभ होता है-
  5. कलौंजी के बीजों(Kalounji Seeds)को सेंककर और कपड़े में लपेटकर सूंघने से और कलौंजी का तेल और जैतून का तेल बराबर की मात्रा में नाक में टपकाने से सर्दी-जुकाम समाप्त होता है-
  6. 10 ग्राम कलौंजी को पीसकर 3 चम्मच शहद के साथ रात सोते समय कुछ दिन तक नियमित रूप से सेवन करने से पेट के कीडे़ नष्ट हो जाते हैं-
  7. कलौंजी का काढ़ा बनाकर सेवन करने से प्रसव की पीड़ा दूर होती है-
  8. रक्तचाप (ब्लडप्रेशर)में  एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल(Kalounji Oil)मिलाकर दिन में 2 बार पीने से रक्तचाप सामान्य बना रहता है तथा 28 मिलीलीटर जैतुन का तेल और एक चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पूर शरीर पर मालिश आधे घंटे तक धूप में रहने से रक्तचाप में लाभ मिलता है- यह क्रिया हर तीसरे दिन एक महीने तक करना चाहिए-
  9. आधे कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद व आधे चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय लें इससे पोलियों का रोग ठीक होता है-
  10. सिरके में कलौंजी को पीसकर रात को सोते समय पूरे चेहरे पर लगाएं और सुबह पानी से चेहरे को साफ करने से मुंहासे कुछ दिनों में ही ठीक हो जाते हैं-
  11. आधा कप पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल व चौथाई चम्मच जैतून का तेल मिलाकर इतना उबालें कि पानी खत्म हो जाएं और केवल तेल ही रह जाएं- इसके बाद इसे छानकर 2 बूंद नाक में डालें- इससे सर्दी-जुकाम ठीक होता है- यह पुराने जुकाम भी लाभकारी होता है-
  12. एक चम्मच सिरका, आधा चम्मच कलौंजी का तेल  दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय पीने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है-
  13. स्फूर्ति के लिए नांरगी के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सेवन करने से आलस्य और थकान दूर होती है-
  14. कलौंजी को रीठा के पत्तों के साथ काढ़ा बनाकर पीने से गठिया रोग समाप्त होता है-
  15. आंखों की लाली, मोतियाबिन्द, आंखों से पानी का आना, आंखों की रोशनी कम होना आदि- इस तरह के आंखों के रोगों में एक कप गाजर का रस, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में 2बार सेवन करें- इससे आंखों के सभी रोग ठीक होते हैं- आंखों के चारों और तथा पलकों पर कलौंजी का तेल रात को सोते समय लगाएं- इससे आंखों के रोग समाप्त होते हैं- रोगी को अचार, बैंगन, अंडा व मछली नहीं खाना चाहिए-
  16. एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर रात को सोते समय पीने से स्नायुविक व मानसिक तनाव दूर होता है-
  17. Kalounji Oil को गांठो पर लगाने और एक चम्मच कलौंजी का तेल गर्म दूध में डालकर पीने से गांठ नष्ट होती है-
  18. पिसी हुई कलौंजी आधा चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से मलेरिया का बुखार ठीक होता है-
  19. यदि रात को नींद में वीर्य अपने आप निकल जाता हो तो एक कप सेब के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करें- इससे स्वप्नदोष दूर होता है-
  20. प्रतिदिन कलौंजी के तेल की चार बूंद एक चम्मच नारियल तेल में मिलाकर सोते समय सिर में लगाने स्वप्न दोष का रोग ठीक होता है- उपचार करते समय नींबू का सेवन न करें-
  21. चीनी 5 ग्राम, सोनामुखी 4 ग्राम, 1 गिलास हल्का गर्म दूध और आधा चम्मच कलौंजी का तेल- इन सभी को एक साथ मिलाकर रात को सोते समय पीने से कब्ज नष्ट होती है-
  22. एक कप पानी में 50 ग्राम हरा पुदीना उबाल लें और इस पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय सेवन करें- इससे 21 दिनों में खून की कमी दूर होती है- रोगी को खाने में खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए-
  23. किसी भी कारण से पेट दर्द हो एक गिलास नींबू पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीएं- उपचार करते समय रोगी को बेसन की चीजे नहीं खानी चाहिए- या चुटकी भर नमक और आधे चम्मच कलौंजी के तेल को आधा गिलास हल्का गर्म पानी मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक होता है या फिर 1 गिलास मौसमी के रस में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल(Kalounji Seeds Oil)मिलाकर दिन में 2 बार पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है-
  24. आधा चम्मच कलौंजी का तेल और आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर सुबह-शाम पीने से उल्टी बंद होती है-
  25. 3 चम्मच करेले का रस और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय पीने से हार्निया रोग ठीक होता है-
  26. कलौंजी के तेल को ललाट से कानों तक अच्छी तरह मलनें और आधा चम्मच कलौंजी के तेल को 1 चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से सिर दर्द ठीक होता है-
  27. कलौंजी खाने के साथ सिर पर कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर मालिश करें- इससे सिर दर्द में आराम मिलता है और सिर से सम्बंधित अन्य रोगों भी दूर होते हैं-
  28. एक कप गर्म पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से मिर्गी के दौरें ठीक होते हैं- मिर्गी के रोगी को ठंडी चीजे जैसे- अमरूद, केला, सीताफल आदि नहीं देना चाहिए-
  29. एक कप दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन 2 बार सुबह खाली पेट और रात को सोते समय 1 सप्ताह तक लेने से पीलिया रोग समाप्त होता है- पीलिया से पीड़ित रोगी को खाने में मसालेदार व खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए-
  30. एक गिलास अंगूर के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 3 बार पीने से कैंसर का रोग ठीक होता है- इससे आंतों का कैंसर, ब्लड कैंसर व गले का कैंसर आदि में भी लाभ मिलता है- इस रोग में रोगी को औषधि देने के साथ ही एक किलो जौ के आटे में 2 किलो गेहूं का आटा मिलाकर इसकी रोटी, दलिया बनाकर रोगी को देना चाहिए- इस रोग में आलू, अरबी और बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए- कैंसर के रोगी को कलौंजी डालकर हलवा बनाकर खाना चाहिए-
  31. कलौंजी का तेल और लौंग का तेल 1-1 बूंद मिलाकर दांत व मसूढ़ों पर लगाने से दर्द ठीक होता है आग में सेंधानमक जलाकर बारीक पीस लें और इसमें 2-4 बूंदे कलौंजी का तेल डालकर दांत साफ करें- इससे साफ व स्वस्थ रहते हैं-
  32. दांतों में कीड़े लगना व खोखलापन के लिए रात को सोते समय कलौंजी के तेल में रुई को भिगोकर खोखले दांतों में रखने से कीड़े नष्ट होते हैं-
  33. रात में सोने से पहले आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है-
  34. कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से मासिकधर्म शुरू होता है इससे गर्भपात होने की संभावना नहीं रहती है-
  35. कलौंजी और गाजर के बीज समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और यह 3 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करें- इससे गर्भपात हो जाता है-
  36. 50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें और इस पानी से बालों को धोएं- इससे बाल लम्बे व घने होते हैं-
  37. बेरी-बेरी रोग में  कलौंजी को पीसकर हाथ-पैरों की सूजन पर लगाने से सूजन मिटती है-
  38. जिन माताओं बहनों को मासिकधर्म कष्ट से आता है उनके लिए  कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मासिकस्राव का कष्ट दूर होता है और बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है-
  39. कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में शहद मिलाकर चाटने से ऋतुस्राव की पीड़ा नष्ट होती है-
  40. मासिकधर्म की अनियमितता में लगभग आधा से डेढ़ ग्राम की मात्रा में कलौंजी के चूर्ण(Kalounji Powder)का सेवन करने से मासिकधर्म नियमित समय पर आने लगता है-
  41. 50 ग्राम कलौंजी को सिरके में रात को भिगो दें और सूबह पीसकर शहद में मिलाकर 4-5 ग्राम की मात्रा सेवन करें इससे भूख का अधिक लगना कम होता है-
  42. कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन 2-3 बार सेवन करने से मासिकस्राव शुरू होता है गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं कराना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात हो सकता है-
  43. यदि मासिकस्राव बंद हो गया हो और पेट में दर्द रहता हो तो एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम पीना चाहिए- इससे बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है-
  44. स्त्रियों के चेहरे व हाथ-पैरों की सूजन: कलौंजी पीसकर लेप करने से हाथ पैरों की सूजन दूर होती है-
  45. कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर पीने से नपुंसकता दूर होती है-
  46. कलौंजी आधे से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से स्तनों का आकार बढ़ता है और स्तन सुडौल बनता है-
  47. कलौंजी को आधे से 1 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से स्तनों में दुध बढ़ता है-
  48. 50 ग्राम कलौंजी के बीजों को पीस लें और इसमें 10 ग्राम बिल्व के पत्तों का रस व 10 ग्राम हल्दी मिलाकर लेप बना लें- यह लेप खाज-खुजली में प्रतिदिन लगाने से रोग ठीक होता है-
  49. नाड़ी का छूटना के लिए आधे से 1 ग्राम कालौंजी को पीसकर रोगी को देने से शरीर का ठंडापन दूर होता है और नाड़ी की गति भी तेज होती है- इस रोग में आधे से 1ग्राम कालौंजी हर 6घंटे पर लें और ठीक होने पर इसका प्रयोग बंद कर दें- ध्यान रखें कि इस दवा का प्रयोग गर्भावस्था में नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे गर्भ नष्ट हो सकता है-
  50. एक ग्राम पिसी कलौंजी शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी आनी बंद हो जाती है तथा कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में मठ्ठे के साथ प्रतिदिन 3-4 बार सेवन से हिचकी दूर होती है या फिर  कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम मक्खन के साथ खाने से हिचकी दूर होती है और यदि आप काले उड़द चिलम में रखकर तम्बाकू के साथ पीने से हिचकी में लाभ होता है-
  51. कलौंजी को पीसकर लेप करने से नाड़ी की जलन व सूजन दूर होती है-
  52. लगभग 2 ग्राम की मात्रा में कलौंजी को पीसकर 2 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है-
  53. कलौंजी और सूखे चने को एक साथ अच्छी तरह मसलकर किसी कपड़े में बांधकर सूंघने से छींके आनी बंद हो जाती है-
  54. कलौंजी के बीजों को गर्म करके पीस लें और कपड़े में बांधकर सूंघें- इससे सिर का दर्द दूर होता है- कलौंजी और काला जीरा बराबर मात्रा में लेकर पानी में पीस लें और माथे पर लेप करें- इससे सर्दी के कारण होने वाला सिर का दर्द दूर होता है-
  55. कलौंजी को लगभग एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम प्रसूता स्त्री को देने से स्तनों में दूध बनता है-
  56. कलौंजी, जीरा और अजवाइन को बराबर मात्रा में पीसकर एक चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद लेने से पेट का गैस नष्ट होता है-
  57. 250 मिलीलीटर दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से पेशाब की जलन दूर होती है-
  58. एक चुटकी नमक, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच घी मिलाकर छाती और गले पर मालिश करें और साथ ही आधा चम्मच कलौंजी का तेल 2 चम्मच शहद के साथ मिलाकर सेवन करें- इससे दमा रोग में आराम मिलता है-

  59. 250 ग्राम कलौंजी पीसकर 125 ग्राम शहद में मिला लें और फिर इसमें आधा कप पानी और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन 2 बार खाली पेट सेवन करें- इस तरह 21 दिन तक पीने से पथरी गलकर निकल जाती है-
  60. यदि चोट या मोच आने के कारण शरीर के किसी भी स्थान पर सूजन आ गई हो तो उसे दूर करने के लिए कलौंजी को पानी में पीसकर लगाएं- इससे सूजन दूर होती है और दर्द ठीक होता है- कलौंजी को पीसकर हाथ पैरों पर लेप करने से हाथ-पैरों की सूजन दूर होती है-
  61. दही में कलौंजी को पीसकर बने लेप को पीड़ित अंग पर लगाने से स्नायु की पीड़ा समाप्त होती है-
  62. 20 ग्राम कलौंजी को अच्छी तरह से पकाकर किसी कपड़े में बांधकर नाक से सूंघने से बंद नाक खुल जाती है और जुकाम ठीक होता है-
  63. जैतून के तेल में कलौंजी का बारीक चूर्ण मिलाकर कपड़े में छानकर बूंद-बूंद करके नाक में डालने से बार-बार जुकाम में छींक आनी बंद हो जाती हैं और जुकाम ठीक होता है- कलौंजी को सूंघने से जुकाम में आराम मिलता है-
  64. कलौंजी की भस्म को मस्सों पर नियमित रूप से लगाने से बवासीर का रोग समाप्त होता है-
  65. वात रोग में कलौंजी के तेल से रोगग्रस्त अंगों पर मालिश करने से वात की बीमारी दूर होती है-
  66. यदि बार-बार छींके आती हो तो कलौंजी के बीजों को पीसकर सूंघें-
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