Private Protector निजी रक्षक लंगोट

8:33 pm 4 comments
निजी रक्षक लंगोट(Private Protector)पुरुषों द्वारा पहना जाने वाला एक अन्त:वस्त्र है यह लंगोट पुरुष जननांग(male genitalia)को ढककर एवं दबाकर रखने में बहुत ही सहायता करता है भारत में इसका उपयोग पहले बहुत होता था लेकिन बस कुछ ब्रह्मचारी, साधु-सन्त, अखाड़ा लड़ने वाले पहलवान आदि इसका उपयोग करते हैं-ये आपका निजी रक्षक(Private Protector)है-

Private Protector निजी रक्षक लंगोट


ये निजी रक्षक लंगोट(Private Protector)किसी भी रंग का हो सकता है किन्तु लाल लंगोट(Red Nappies) विशेष रूप से लोकप्रिय है-यह पूरी तरह से खुला हुआ त्रिकोणाकार(Triangulate) कपड़े का बना होता है-

पहले के ऋषि-मुनियों ने बहुत सोच समझ कर ये प्रचलन बनाया होगा वो इसकी महत्ता को बखूबी जानते थे जो भी करते थे बहुत सोच-समझ कर ही करते थे-पहले के जमाने के जो लोग थे उनके जीवन में ब्रम्हचर्य की विशेष महत्ता थी इसलिए जनसाधारण लोग भी धारण किया करते थे- 

चूँकि आज के युग में युवा पीढ़ी को उसकी महत्ता का ज्ञान नहीं है इसलिए अब ये सिर्फ फिल्मों की नायिकाओ का अंग-वस्त्र बन गया है जो आज कल की युवा-पीढ़ी को अत्यधिक मनोहारी लगता है -वास्तव में वो फिल्म सुपर हिट भी हो जाती है लेकिन युवा रास्ते पे चलते दीवालों के बैनर पढता फिरता है "मर्दाना ताकत के लिए हमसे मिले"

वैसे भी आज भी लंगोट का कोई जोड़ नहीं है आपको पूरी तरह लंगोट के बारे में बताने से पहले लंगोट शब्द वास्तविक अर्थ स्पष्ट करना अपना कर्तव्य समझता हूँ-लंगोट एक संयुक्त शब्द है जिसका विच्छेद करने पर हमें प्राप्त होता है-

लंगोट = लं+ गोट अर्थात जो लं…..और गोट- दोनों को संभाल सके- वो लंगोट है-

कुछ सालों से इस परिभाषा पर बट्टा लग गया है ऐसा तो बहुत शब्दों के साथ है जिनका मतलब तब कुछ होता था अब और कुछ और हो गया है जैसे कि- 'बलात्कार' -पहले इसका मतलब “जबरदस्ती” के लिए उपयोग किया जाता था और आज इसका तात्पर्य तो आपको पता ही है-

लंगोट के फायदे-

लंगोट एक प्रकार से चड्ढी का काम करता था(मनुष्य आपात काल में जबकि नियंत्रण खोने लगता था तब यह नियंत्रण बनाये रखता था वो भी आपकी इच्छानुसार-अब ये सुविधा चड्ढी में उपलब्ध नहीं है)-इसलिए तब बलात्कार की संख्या में बहुत कमी थी और खुद पे भी एक नियंत्रण रहता था लेकिन आज ये नियंत्रण नहीं रह गया है -

लंगोट दौड़ लगाने ,भागने और व्यायाम करने में इसका कोई सानी नहीं- कोई जानवर दौडाए तो भी सरपट भाग लीजिये-और अगर लंगोट पकड़ कर लटक जाये तो उसके पल्ले सिर्फ लंगोट ही आये-(भागते भूत की लंगोटी ही सही) -व्यायाम में तो लंगोट सबसे बेजोड़ है- कम से कम ये उस चीज पर पूरा नियंत्रण रखता है जो व्यायाम में आपका नियंत्रण बिगाड़ सकती है-

ये जरुरत पड़ने पर किसी का गला घोंटने के काम भी आ सकता था(इससे समाधि भी ली जा सकती थी पेड़ से लटक कर) -(एक व्यंग के रूप में)

कभी-कभी जब जान पे आ पड़े तो सर पर केसरिया कफ़न बांधकर जूझ पड़ने के भी काम आता था-(इसीलिए लाल लंगोट- सिलने का चलन था)

यदि कोई आश्रम बने है तो बांस में बांधकर ध्वज की तरह भी लंगोट का इस्तेमाल किया जा सकता था-

इन सबसे बढ़कर तो ये है कि इसे धुलने में समय और श्रम के साथ संसाधनों की भी न्यूनतम खपत होती थी वर्ना- आप तो जानते है की कपडे धुलना कितना दुष्कर है-

जरुरत पड़ने पर युद्ध में लंगोट के दोनों सिरों पर पत्थर बांध कर हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता था और सामने वाला भाग खड़ा होता था-

अगर आपके पास दो लंगोट है तो एक से जरुरत पड़ने पे कुछ सामान को आप बाँध कर भी इसका उपयोग कर सकते है-लंगोट से जरूरत पड़ने पर कोई लकड़ी का गठ्हर या सामान बंधा जा सकता था-

जरुरत पड़ने पर पेड़ पर चढ़ कर फल तोड़कर उसे आसानी से नीचे पहुँचाया जा सकता था-(खोंचा और झोली की तरह)

लंगोट को पेड़ की दो डालों से बांध कर झूला बनाया जा सकता था-(आनंद दायक)

किसी भक्त की भिक्षा भी लंगोट में ली जा सकती थी या कोई भी कीमती चीज छुपाने के लिए भी इसकी बहुत उपयोगिता थी-

यदि जानवर पाले हो तो उन्हे रात के वक्त लंगोट से खूंटे में बंधा भी जा सकता था-

कही प्यास लगने पर लंगोट से कमंडल या लोटा बंधा कर गहरे से पानी भी खींचा जा सकता था-

बुरा न माने तो ये उनके सिक्स पैक दिखाने सबसे हॉट और सेक्सी ट्रेंड था-

अब तो आजकल गाँव में कुछ जगह लंगोट चढाने की परम्परा आज भी है मुझे जितने प्रयोग सूझ सके हैं लंगोट के -आप तक प्रस्तुत किया यदि मैं ऋषि होता तो शायद और भी जानता लंगोट के बारे में- यदि आप को जादा जानकारी मिले तो जरुर शेयर करे आभारी रहूगां -पोस्ट को आवश्यक समझे या व्यंगात्मक रूप में ले ये आपकी सोच पे निर्भर करता है-

Upcharऔर प्रयोग-

4 टिप्‍पणियां :

  1. धन्यवाद ! श्रीमान जी ,
    इतनी अच्छी जानकारी के लिए

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  2. उत्तर
    1. आप शादी शुदा है तो दिन में पहने और अगर शादी नहीं हई है तो 24 घंटे पहन सकते है

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