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31 अगस्त 2016

गांठ का घरेलू इलाज क्या है

By With 11 टिप्‍पणियां:
शरीर के किसी भी हिस्से में उठने वाली कोई भी गाँठ(Lump)एक असामान्य लक्षण है जिसे गंभीरता से लेना आवश्यक है ये गाँठ पस या टीबी से लेकर कैंसर तक किसी भी बीमारी की सूचक हो सकती हैं गाँठ(Lump)रसौली अथवा ठीक नहीं होने वाला छाला व असामान्य आंतरिक या बाह्य रक्तस्राव कैंसर के लक्षण हो सकते हैं- 

गांठ का घरेलू इलाज क्या है


ये भी ज़रूरी नहीं कि शरीर में उठने वाली हर Lump गाँठ कैंसर ही हो अधिकांशतः कैंसर रहित गठानें किसी उपचार योग्य साधारण बीमारी की वजह से ही होती हैं लेकिन फिर भी इस बारे में सावधानी बरतनी चाहिए-इस प्रकार की किसी भी Lump गाँठ या रसौली(Tumor)की जाँच अत्यंत आवश्यक है ताकि समय रहते निदान और इलाज शुरू हो सके। 

अनदेखा न करें(Do not ignore)-

चूँकि लगभग सारी गाँठ(Lump)या रसौली शुरू से वेदना हीन होती हैं इसलिए अधिकांश व्यक्ति नासमझी या ऑपरेशन के डर से डॉक्टर के पास नहीं जाते है। साधारण Lump गाँठ या रसौली भले ही कैंसर की न हों लेकिन इनका भी इलाज आवश्यक होता है। उपचार के अभाव में ये असाध्य रूप ले लेती हैं और परिणाम स्वरूप उनका उपचार लंबा और जटिल हो जाता है। 

कैंसर की गठानों का तो शुरुआती अवस्था में इलाज होना और भी ज़रूरी होता है। कैंसर का शुरुआती दौर में ही इलाज हो जाए तो मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। आपके शरीर मे कहीं पर भी किसी भी किस्म की Lump गांठ हो। आप ये घरेलू चिकित्सा अवश्य करें-सफल जरूर होती है। कैंसर मे भी लाभदायक है। 

आप ये दो चीज पंसारी या आयुर्वेद दवा की दुकान से ले ले-

1- कचनार की छाल(Bauhinia Bark)- ताज़ी है तो 25-30 ग्राम अगर सूखी छाल है तो 15 ग्राम

2- गोरखमुंडी(Gorkmundi)- एक चम्मच गोरखमुंडी पिसी हुई 

यह दोनों जड़ी बूटी आयुर्वेद दवा बेचने वाले पंसारी से मिल जाती हैं पर यदि  कचनार की छाल ताजी ले तो अधिक लाभदायक है कचनार (Bauhinia purpurea) का पेड़ हर जगह आसानी से मिल जाता है-अब आप इसकी शाखा की छाल ले और तने की न ले फिर उस शाखा(टहनी)की छाल ले जो एक इंच से दो इंच तक मोटी हो बहुत पतली या मोटी टहनी की छाल न ले-

गोरखमुंडी का पौधा आसानी से नहीं मिलता इसलिए इसे जड़ी बूटी बेचने वाले से खरीदे-

How to use-कैसे प्रयोग करे-


अगर कचनार की ताजी छाल 25-30 ग्राम(सुखी छाल 15 ग्राम)को मोटा मोटा कूट ले और एक गिलास पानी मे उबाले-जब 2 मिनट उबल जाए तब इसमे एक चम्मच गोरखमुंडी(मोटी कुटी या पीसी हुई)डाले-अब इसे एक मिनट तक उबलने दे फिर छान ले हल्का गरम रह जाए तब पी ले बस ध्यान दे यह कड़वा है परंतु चमत्कारी है गांठ कैसी ही हो,प्रोस्टेट बढ़ी हुई होजांघ के पास की गांठ हो, काँख की गांठ हो गले के बाहर की गांठ हो,गर्भाशय की गांठ हो,स्त्री पुरुष के स्तनो मे गांठ हो या टॉन्सिल हो,गले मे थायराइड ग्लैण्ड बढ़ गई हो(Goiter)या LIPOMA(फैट की गांठ )हो लाभ जरूर करती है ये कभी भी असफल नहीं होती है-

आप अधिक लाभ के लिए दिन मे दो बार ले-इसे लंबे समय तक लेने से ही लाभ होगा-आप 20-25 दिन तक कोई लाभ नहीं होगा निराश होकर बीच मे न छोड़े-

गाँठ को घोलने में कचनार पेड़ की छाल बहुत अच्छा काम करती है और आयुर्वेद में कांचनार गुग्गुल इसी मक़सद के लिये दी जाती है जबकि ऐलोपैथी में ओप्रेशन के सिवाय कोई और चारा नहीं है-

अन्य प्रयोग-


1- आकड़े के दूध में मिट्टी भिगोकर लेप करने से तथा निर्गुण्डी के 20 से 50 मि.ली. काढ़े में 1 से 5 मि.ली अरण्डी का तेल डालकर पीने से लाभ होता है-

2- गेहूँ के आटे में पापड़खार तथा पानी डालकर पुल्टिस बनाकर लगाने से न पकने वाली गाँठ पककर फूट जाती है तथा दर्द कम हो जाता है-

फोड़े फुन्सी(Pimples) होने पर-


अरण्डी के बीजों की गिरी को पीसकर उसकी पुल्टिस बाँधने से अथवा आम की गुठली या नीम या अनार के पत्तों को पानी में पीसकर लगाने से फोड़े-फुन्सी में लाभ होता है-

घाव(Wound)के लिए-


एक चुटकी कालेजीरे को मक्खन के साथ निगलने से या 1 से 3 ग्राम त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से तथा त्रिफला के पानी से घाव धोने से लाभ होता है-

सुहागे को पीसकर लगाने से रक्त बहना तुरंत बंद होता है तथा घाव शीघ्र भरता है-

फोड़े(Abscesses)से मवाद बहने पर-

अरण्डी के तेल में आम के पत्तों की राख मिलाकर लगाने से लाभ होता है।

थूहर के पत्तों पर अरण्डी का तेल लगाकर गर्म करके फोड़े पर उल्टा लगायें। इससे सब मवाद निकल जायेगा। घाव को भरने के लिए दो-तीन दिन सीधा लगायें।

पीठ का फोड़ा होने पर गेहूँ के आटे में नमक तथा पानी डालकर गर्म करके पुल्टिस बनाकर लगाने से फोड़ा पककर फूट जाता है।

गण्डमाला की गाँठ (Scrofulous knots)-


गले में दूषित हुआ वात, कफ और मेद गले के पीछे की नसों में रहकर क्रम से धीरे-धीरे अपने-अपने लक्षणों से युक्त ऐसी गाँठें उत्पन्न करते हैं जिन्हें गण्डमाला कहा जाता है। मेद और कफ से बगल, कन्धे, गर्दन, गले एवं जाँघों के मूल में छोटे-छोटे बेर जैसी अथवा बड़े बेर जैसी बहुत-सी गाँठें जो बहुत दिनों में धीरे-धीरे पकती हैं उन गाँठों की हारमाला को गंडमाला कहते हैं और ऐसी गाँठें कंठ पर होने से कंठमाला कही जाती है।

क्रौंच के बीज को घिस कर दो तीन बार लेप करने तथा गोरखमुण्डी के पत्तों का आठ-आठ तोला रस रोज पीने से गण्डमाला (कंठमाला) में लाभ होता है। तथा कफवर्धक पदार्थ न खायें।

काँखफोड़ा (Beside Abscess)-


कुचले को पानी में बारीक पीसकर थोड़ा गर्म करके उसका लेप करने से या अरण्डी का तेल लगाने से या गुड़, गुग्गल और राई का चूर्ण समान मात्रा में लेकर, पीसकर, थोड़ा पानी मिलाकर, गर्म करके लगाने से काँखफोड़े में लाभ होता है।

इसे भी देखे- Urticaria-शीतपित्त का Treatment

Upcharऔर प्रयोग-

White Hair सफ़ेद बाल-एक आम-समस्या

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हर किसी को बाल काले ही अच्‍छे लगते हैं लेकिन जब यह बिना बुढापे के ही White Hair-बाल सफेद होने लगें तो दिल घबरा सा जाता है आपको जानना होगा कि ये White Hair-बाल सफेद क्‍यों हो जाते हैं। वो भी तब जब हमारी खेलने खाने की उम्र होती है। हांलाकि बालों का सफेद होना आज कल आम सी बात हो गई है।इसलिये इसके लिये घबराना बिल्‍कुल नहीं चाहिये-

White Hair सफ़ेद बाल


आइये जानते हैं क्यों होते है बाल सफ़ेद-

जब बालों आपके बालों में मिलेनिन पिगमेंटेशन की कमी हो जाती है तब बाल अपना काला रंग खो देते हैं और White Hair-बाल सफेद हो जाते हैं। आज के युग में असमय ही White Hair-बाल सफेद होना एक बड़ी समस्या बन चुकी है।कुछ तो हमारे खान-पान का भी असर है और कुछ कारण प्रयोग किये जाने वाले विभिन्न प्रकार के तेलों का भी असर है केमिकल युक्त शेम्पू भी हमारे बालों पर हानिकारक प्रभाव डालता है कुछ लोग इस प्रकार के डाई और कलर का भी प्रयोग करते है जो केमिकल युक्त होते है जिसका असर बाद में विशेष रूप से पड़ता है ये भी आपके बालों को जड़ से कमजोर बना सकता है बालों के असमय पकने को रोकने के लिए चाय, कॉंफी का सेवन कम करना चाहिए तथा साथ ही एल्कोहल का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए आप अपने खाने में ज्यादा खट्टा, अम्लीय भोज्य-पदार्थ न लें इसे लेने से भी बालों पर असर पड़ता है जादा तेल युक्त भोजन और तीखा भोजन भी बालों से जुड़ी समस्या को और बढ़ा देते हैं। इन सबके अलावा मानसिक तनाव, चिंता, धूम्रपान, दवाओं का लंबे समय तक उपयोग,केमिकल युक्त बालों को कलर करना आदि से बालों के पकने, झड़ने और दोमुंहा होने का सिलसिला और तेज हो जाता है।

यदि आप White Hair-बाल सफेद से बचना चाहते हैं तो अपनाइए ये नुस्खे जो बालों के लिए वरदान की तरह काम करते हैं- 

White Hairसफ़ेद बालों के लिए क्या करे-

आंवले को न सिर्फ डाइट में शामिल करें बल्कि मेंहदी में मिलाकर इसके घोल से बालों की कंडिशनिंग करते रहें।आप चाहे तो आंवले को बारीक काट लें और गर्म नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाएं।आमला हो या उसका पाउडर, दोनों ही White Hair-सफ़ेद बालों को काला करने में मददगार होते हैं आमला का रस अगर बादाम के तेल में मिक्‍स कर के बालों में लगाया जाए तो बाल काले होगें।

काली मिर्च के दानों को पानी में उबाल कर उस पानी को बाल धोने के बाद सिर में डालें। लंबे समय तक बालों में इस तरह करने से यह असर दिखाती है।

सफेद हो चुके बालों को अगर आप ब्लैक टी या कॉफी के अर्क से धोएंगें तो आपके White Hair(सफेद बाल) दोबारा से काले होने लगेगें। ऐसा आप दो दिन में एक बार जरूर करें। ये काली चाय को बनाने के लिए पैन में पानी डालें, उसमें 2 चम्‍मच चाय की पत्‍ती डाल कर खौलाएं और जब यह पानी ठंडा हो जाए तो इसे छान कर बालों में लगाएं। इसे लगाने के बाद बालों में शैंपू न लगाएं वरना असर खत्‍म हो जाएगा।

आप अपनी डाइट में कडी पत्‍ता शामिल करें। इसे आप चटनी के रूप में खा सकते हैं। कड़ी पत्ता खाने से बालों का सफेद होना रुक जाएगा। 

दक्षिण भारतीय महिलाए सबसे जादा कड़ी पत्ते का प्रयोग करती है और उनके बाल असमय सफ़ेद नहीं होते है।
बालों में एलोवेरा जेल लगाने से भी बालों का झडऩा और सफेद होना बंद हो जाता है। 

आप एलोवेरा जेल में नींबू का रस बना कर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को बालों में लगाएं।

अन्य प्रयोग-

हिना और दही को बराबर मात्रा में मिलाकर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को बालों में लगाइये- 

हिना और दही के घरेलू उपचार को हफ्ते में एक बार लगाने से ही बाल काले होने लगते हैं-

आप नहाने से कुछ देर पहले अपने बालों में प्याज का पेस्ट लगायें-

प्याज से आपके सफेद बाल काले होने शुरू हो ही जाएंगे, बालों में चमक आएगी-

भृंगराज और अश्वगंधा की जड़ें बालों के लिए वरदान मानी जाती हैं-इनका पेस्ट बना कर नारियल तेल में मिलाकर बालों की जड़ों में एक घंटे के लिए लगाएं-फिर बालों को गुनगुने पानी से अच्छी तरह से धो लें-

प्रतिदिन देशी गाय का दूध बालों में लगाने से बाल कुदरती तौर पर काले होने लगते हैं। ऐसा हफ्ते में एक दिन करें |

गाय का शुद्ध घी से सिर की मालिश करके भी बालों के सफेद होने की समस्या दूर होती है।

बालों को सफेद होने से रोकने के लिये बालों और सिर की त्‍वचा पर अम्‍लान का रस लगाएं।इससे बाल ज्‍यादा उगते हैं और वह शाइनी और कोमल होते हैं।

नहाने से पहले कढ़ी पत्ते को नहाने के पानी में छोड़ दें और एक घंटे के बाद उस पानी से सिर धो लें।या फिर आंवले की तरह कढ़ी पत्ते को भी बारीक काटकर और गर्म नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाएं।

नारियल तेल को कडी पत्‍ता और आमला के साथ गरम करें।इस तेल को लगातार लगाने से बाल मजबूत होगें और उसका पुराना रंग वापस आ जाएगा-

और भी देखे-
Upcharऔर प्रयोग-

20 अगस्त 2016

गिलोय रामबाण इलाज है

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प्रकृति ने आयुर्वेद में बुखार की एक महान और उत्तम प्रकार की जड़ी-बूटी के रूप में हमें Tinospora Kardifolia-गिलोय(Giloy) उपहार स्वरूप प्रदान की है इसकी लता नीम के पेड़ पे चढ़ती हुई आप को दिख जायेगी इसके पत्ते पान के आकार के होते है जिस वृक्ष को यह अपना आधार बनती है-उसके गुण भी इसमें समाहित रहते हैं -इस दृष्टि से नीम पर चढ़ी Giloy श्रेष्ठ औषधि मानी जाती है बहुत से लोग इसे विभिन्न नाम से भी जानते है-अमृता, गुडुची, छिन्नरुहा, चक्रांगी आदि-


रामबाण है गिलोय-RamBaan Hai Giloy-Tinospora Kardifolia

बुखार के लिए रामबाण है गिलोय(Giloy)-


आप गिलोय को अपने घर के गमले में लगा कर रस्सी से उसकी लता को बांध सकते हैं इसके बाद इसके रस का प्रयोग कर सकते हैं- Giloy एक दवाई के रूप में जानी जाती है जिसका रस पीने से शरीर के अनेको प्रकार के कष्ट और बीमारियां दूर हो जाती हैं-

आजकल  तो बाजार में Giloy की गोलियां, सीरप, पाउडर आदि भी मिलना शुरु हो चुके हैं-गिलोय शरीर के दोषों (कफ ,वात और पित्त) को संतुलित करती है और शरीर का कायाकल्प करने की क्षमता रखती है

Tinospora Kardifolia-गिलोय का उल्टी-बेहोशी-कफ-पीलिया-धातू विकार-सिफलिस-एलर्जी सहित अन्य त्वचा विकार-चर्म रोग-झाइयां-झुर्रियां-कमजोरी-गले के संक्रमण-खाँसी-छींक-विषम ज्वर नाशक-टाइफायड-मलेरिया-डेंगू-पेट कृमि-पेट के रोग-सीने में जकड़न-जोडों में दर्द-रक्त विकार-निम्न रक्तचाप-हृदयदौर्बल्य-(टीबी)-लीवर-किडनी-मूत्ररोग-मधुमेह-रक्तशोधक- रोग प्रतिरोधक-गैस-बुढापा रोकने वाली-खांसी मिटाने वाली-भूख बढ़ाने वाली प्राकृतिक औषधि के रूप में खूब प्रयोग होता है-

Giloy-टाइफायड, मलेरिया, डेंगू, एलीफेंटिएसिस, विषम ज्वर, उल्टी, बेहोशी, कफ, पीलिया, तिल्ली बढऩा, सिफलिस, एलर्जी सहित अन्य त्वचा विकार, झाइयां, झुर्रियां, कुष्ठ आदि में गिलोय का सेवन आश्चर्यजनक परिणाम देता है-यह शरीर में इंसुलिन उत्पादन क्षमता बढ़ाती है-गिलोय बीमारियों से लडऩे, उन्हें मिटाने और रोगी में शक्ति के संचरण में यह अपनी विशिष्ट भूमिका निभाती है-

एक नजर इसके प्रयोग पर -

1- बुखार को ठीक करने का गिलोय अद्भुत गुण है पर यह मलेरिया पर अधिक प्रभावी नहीं है लेकिन शरीर की समस्त मेटाबोलिक क्रियाओं को व्यवस्थित करने के साथ सिनकोना चूर्ण या कुनाईनं औषधि के साथ देने पर उसके घातक प्रभावों को रोक कर शीघ्र लाभ देती है -

2- दीर्घायु प्रदान करने वाली अमृत तुल्य गिलोय और गेहूं के ज्वारे के रस के साथ तुलसी के 7 पत्ते तथा नीम के पत्ते खाने से कैंसर जैसे रोग में भी लाभ होता है-गिलोय की जड़ें शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है-यह कैंसर की रोकथाम और उपचार में प्रयोग की जाती है-

3- Giloyऔर पुनर्नवा मिर्गी में लाभप्रद होती है-इसे आवश्यकतानुसार अकेले या अन्य औषधियों के साथ दिया जाता है- अनेक रोगों में इसे पशुओं के रोगों में भी दिया जाता है-

4- गिलोय उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए, शर्करा का स्तर बनाए रखने में मदद करता है- यह शरीर को दिल से संबंधित बीमारियों से बचाए रखता है-

5- गिलोय एक रसायन है-यह रक्तशोधक- ओजवर्धक- ह्रुदयरोग नाशक -शोधनाशक और लीवर टोनिक भी है-यह पीलिया और जीर्ण ज्वर का नाश करती है अग्नि को तीव्र करती है- 

6- वातरक्त और आमवात के लिये तो यह महा विनाशक है-गिलोय की बेल गले में लपेटने से भी पीलिया में लाभ होता है गिलोय के काढ़े में शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है-गिलोय के पत्तों को पीसकर एक गिलास मट्ठा में मिलाकर सुबह सुबह पीने से पीलिया ठीक हो जाता है-

7- गिलोय के 6 इंच तने को लेकर कुचल कर उसमे 4 या 5 पत्तियां तुलसी की मिला ले तथा इसको एक गिलास पानी में मिला कर उबालकर इसका काढा बनाकर पीजिये और इसके साथ ही तीन चम्मच एलोवेरा का गूदा पानी में मिला कर नियमित रूप से सेवन करते रहने से जिन्दगी भर आपको कोई भी बीमारी नहीं आती है और यदि इसमें पपीता के 3-4 पत्तो का रस मिला कर लेने दिन में तीन चार लेने से रोगी को प्लेटलेट की मात्रा में तेजी से इजाफा होता है प्लेटलेट बढ़ाने का इस से बढ़िया कोई इलाज नहीं है-

8- Giloy-चिकन गुनियां डेंगू स्वायन फ्लू और बर्ड फ्लू में रामबाण होता है-

9- गिलोय का चूर्ण शहद के साथ खाने से कफ और सोंठ के साथ आमवात से सम्बंधित बीमारीयां (गठिया) रोग ठीक होता है-गैस-जोडों का दर्द-शरीर का टूटना-असमय बुढापा-वात असंतुलित होने का लक्षण हैं तो गिलोय का एक चम्मच चूर्ण को घी के साथ लेने से वात संतुलित होता है-

10- गिलोय(Giloy) और अश्वगंधा को दूध में पकाकर नियमित खिलाने से स्त्रियों को बाँझपन से मुक्ति मिलती हैं-

11- क्षय (टी .बी)रोग में गिलोय सत्व-इलायची तथा वंशलोचन को शहद के साथ लेने से लाभ होता है-गिलोय सत्व को कुचल कर बारीक पीस कर पानी में घोल ले और छान कर किसी बर्तन में धूप में रख दे जब सारा पानी उड़ जाए तो नीचे सफ़ेद पर्दार्थ प्राप्त होगा यही गिलोय सत्व है -

12- प्रतिदिन सुबह-शाम गिलोय का रस घी में मिलाकर या शहद गुड़ या मिश्री के साथ गिलोय का रस मिलकर सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर होती है-

13- गिलोय रस में खाण्ड डालकर पीने से पित्त का बुखार ठीक होता है और(Giloy)गिलोय का रस शहद में मिलाकर सेवन करने से पित्त का बढ़ना रुकता है-तथा कब्ज दूर होती है-

14- फटी त्वचा के लिए गिलोय का तेल दूध में मिलाकर गर्म करके ठंडा करें- इस तेल को फटी त्वचा पर लगाए वातरक्त दोष दूर होकर त्वचा कोमल और साफ होती है-

15- गिलोय को पानी में घिसकर और गुनगुना करके दोनों कानो में दिन में सिर्फ दो बार डालने से कान का मैल निकल जाता है और गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके इस रस को कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है-

16- मट्ठे के साथ गिलोय का एक चम्मच चूर्ण सुबह शाम लेने से बवासीर में लाभ होता है-

17- मुंहासे-फोड़े-फुंसियां और झाइयो पर गिलोय के फलों को पीसकर लगाये मुंहासे-फोड़े-फुंसियां और झाइयां दूर हो जाती है-
Upcharऔर प्रयोग-

17 अगस्त 2016

Beauty-खूबसूरती को निखारे

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प्रकृति में इतने किस्म के तत्‍व पाए जाते हैं जो हमारी हर बीमारी को हर सकते हैं आजकल बाजारों में कई तरह की दवाइयां और तरह-तरह के उत्‍पाद आने लगे हैं कि लोगों ने आयुर्वेद को बिल्‍कुल नकार दिया है आयुर्वेद हमारी त्‍वचा के लिए भी बहुत अच्‍छा माना जाता है यह न तो महगां होता है और न ही इसको इस्‍तमाल करने में कोई नुकसान पहुंचता है आइये आप के लिए प्रस्तुत लेख है-

Beauty


पहले जमाने की महिलाएं खुद को खूबसूरत बनाने के लिए आयुर्वेद का ही सहारा लेती थीं इसलिए हमने भी सोंचा कि क्‍यों न हम भी आपके लिए आयुर्वेद के कुछ ऐसे उपचार बताएं जिससे आप अपनी खूबसूरती को सदा के लिए कैद कर लें जाने कुछ प्रयोग-

झुर्रियों(Wrinkles) के लिए-

अगर आपको चेहरे पर पड़ी झुर्रियों को हटाना है तो अंरडी यानी की कैस्‍टर ऑयल को अपने चेहरे पर लगाएं, इससे त्‍वचा बिल्‍कुल मुलायम हो जाएगी और झुर्रियां भी कम हो जाएगीं-

साफ त्‍वचा(Clear Skin)-

त्‍वचा पर अगर दाग-धब्‍बे हैं तो चेहरे को क्रीम वाले दूध से रुई को डुबो कर चेहरे और पोर्स को साफ करें इससे चेहरा साफ तो होगा ही साथ में पोर्स भी खुलेगें-

नेचुरल मॉस्‍चोराइजर(Natural Moisturizer)-

अगर आपकी त्‍वचा साधारण है तो खुद से ही नेचुरल मास्‍चोराइजर बनाइये- इसको बनाने के लिए एक कटोरे में 4 चम्‍मच दही और कुछ बूंदे नींबू और संतरे की मिला कर अपने चेहरे पर मास्‍क के रुप में प्रयोग करें- इसको लगाने के बाद 15 मिनट के अंदर इस मास्‍क को रुई के दा्रा साफ कर लें-

स्किन कंडीसनर(Skin Conditioner)-

इसको बनाने के लिए दो चम्‍मच क्रीम लें और उसमें शहद मिला लें- इस मिश्रण को अपने चेहरे पर पांच मिनट तक के लिए लगाएं और फिर गीले कपड़े या रुई से पोंछ लें-

टोनर(Toner)-

अगर आप कच्‍चा आलू ले कर अपने चेहरे पर लगाएगीं तो यह आपकी त्‍वचा को टोन करेगा और पिंगमेंटेशन की समस्‍या को भी दूर करेगा-

चेहरे पर बाल(Hair on Face)-

इसको हटाने के लिए आपको एक पेस्‍ट बनाना पड़ेगा जिसमें तिल का तेल, हल्‍दी पाउडर और आंटे का सही मिश्रण मिला हो-

READ MORE-  सूर्य की किरणों से झुलसी त्वचा(Sunburn) के लिए


Upcharऔर प्रयोग-

15 अगस्त 2016

Heart disease-हार्ट रोग से बचे Tips अपनाए

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Heart-दिल की सेहत के लिए आयुर्वेद में अनेक उपाय बताए गए हैं इनमें कुछ उपाय तो ऐसे हैं जिन्हें बड़ी आसानी अपनाकर आप अपने Heart-दिल को मजबूत बना सकते हैं आइए जानें उन खास बातों के बारे में जिन्हें अपनाकर आप भी अपने दिल-Heartको तंदुरुस्त रख सकते हैं और खुशहाल जीवन जी सकते हैं-

Heart disease-हार्ट रोग से बचे Tips अपनाए


आयुर्वेद में कहा गया है कि सूर्योदय से पहले उठने वाले को Heart Disease(हृदय रोग) नहीं होता अगर आप सुबह में 10-15 मिनट सन बाथ करते हैं तो शरीर के अंदर मौजूद कोलेस्ट्रॉल विटामिन डी में बदल जाता है सुबह में जब तक लालिमा होती है तब तक सूर्य की किरणें तीखी नहीं होती और ये हृदय(Heart)के लिए बेहद लाभकारी होती हैं इन किरणों से हमारी हड्डियां भी मजबूत होती हैं-

खासकर दिल(Heart)की सेहत के लिए नियमित रूप से हल्दी का सेवन बहुत जरूरी है आयुर्वेद में कहा गया है कि लगभग 500 मिलीग्राम हल्दी रोज खाना चाहिए- हल्दी हमारे शरीर में खून का थक्का नहीं बनने देती क्योंकि यह खून को पतला करने का काम करती है हल्दी में हल और दी है यानी समाधान देने वाली- जो हर समस्या का समाधान दे उसे हल्दी कहा गया है- इससे हमें अनेक लाभ हैं- एलोपैथिक में Heart patient(हृदय रोगी) को डिस्प्रिन देते हैं क्योंकि यह खून को पतला करती है-

गाय का दूध पीने वाले को Heart disease(हृदय रोग) नहीं होता- गाय के दूध में कैलशियम, मैगनिशियम और गोल्ड जैसे बहुत सारे सूक्ष्म पोषक पदार्थ होते हैं- इसी कारण गाय का दूध हल्का पीला होता है- गोल्ड हृदय को ताकत देने वाला होता है- आयुर्वेद में गाय के दूध को हल्का, सुपाच्य, Heart (हृदय) को बल देने वाला और बुद्धिवर्धक माना गया है- गाय के दूध और मां के दूध में काफी समानताएं हैं-

हरड़ को आयुर्वेद में पथ्य कहा जाता है इसे मां के समान बताया गया है जो हमारे शरीर की तमाम गड़बड़ियों को ठीक करती है मां की तरह ही यह शरीर की सारी गंदगी साफ कर देती है Echocardiogram के साधन नहीं हैं तो यह पहचानना मुश्किल होता है कि हार्ट अटैक है या गैसाइटिस क्योंकि दोनों में समान परेशानी दिखती है लेकिन हरड़ के नियमित सेवन से शरीर के अंदर की गंदगी साफ होती रहती है और हम बीमारियों से दूर रहते हैं-

Upcharऔर प्रयोग-

Concentration-एकाग्रता कैसे बढ़ाये

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वैसे तो हस्त मुद्राए कई प्रकार की होती है और सबके अलग-अलग Benefits है लेकिन यौगिक द्रष्टि से योग मुद्रा को भी एक ख़ास महत्व मिला है हालांकि तंत्र-शास्त्र में इसका अलग-महत्व है लेकिन योनी मुद्रा प्राण-वायु के लिए उत्तम मानी गई है और यह बड़ी चमत्कारिक मुद्रा है ये Yonimudra Yoga(योनि हस्त-मुद्रा योग) के निरंतर अभ्यास के साथ मूलबंध क्रिया भी की जाती है योनिमुद्रा(Yonimudraa) को तीन तरह से किया जाता है ध्यान के लिए अलग है और सामान्य मुद्रा अलग है लेकिन यहां Concentration-एकाग्रता के लिए योनिमुद्रा के बारे में बात करेगें-

Concentration-एकाग्रता

How to Concentrate(कैसे ध्यान केंद्रित करें)-

पहले किसी भी Sukhaasn(सुखासन) की स्थिति में बैठ जाएं फिर दोनों हाथों की अंगुलियों का उपयोग करते हुए सबसे पहले दोनों कनिष्ठा अंगुलियों को आपस में मिलाएं और दोनों अंगूठे के प्रथम पोर को कनिष्ठा के अंतिम पोर से स्पर्श करें इसके पश्चात् फिर कनिष्ठा अंगुलियों के नीचे दोनों मध्यमा अंगुलियों को रखते हुए उनके प्रथम पोर को आपस में मिलाएं- मध्यमा अंगुलियों के नीचे अनामिका अंगुलियों को एक-दूसरे के विपरीत रखें और उनके दोनों नाखुनों को तर्जनी अंगुली के प्रथम पोर से दबाएं-

Mudras for Health(स्वास्थ्य के लिए मुद्राएं)-



  1. योनि मुद्रा(Yonimudraa)बनाकर और पूर्व मूलबंध की स्थिति में सम्यक् भाव से स्थित होकर प्राण-अपान को मिलाने की प्रबल भावना के साथ मूलाधार स्थान पर यौगिक संयम करने से कई प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हो जाती हैं-
  2. अंगूठा शरीर के भीतर की अग्नि को कंट्रोल करता है और तर्जनी अंगुली से वायु तत्व कंट्रोल में होता है तथा मध्‍यमा और अनामिका शरीर के पृथ्वी तत्व को कंट्रोल करती है.कनिष्ठा अंगुली से जल तत्व कंट्रोल में रहता है-
  3. इसके निरंतर अभ्यास से जहां सभी तत्वों को लाभ मिलता है वहीं Yonimudraa इंद्रियों पर नियंत्रण रखने की शक्ति बढ़ती है. इससे मन को एकाग्रता(Concentration)करने की योग्यता का विकास भी होता है-
  4. यह शरीर कीNegative Energy(नकारात्मक ऊर्जा) को समाप्त कर Affirmative(सकारात्मक) का विकास करती है. इससे हाथों की मांसपेशियों पर अच्छा खासा दबाव बनता है जिसके कारण मस्तिष्क, हृदय और फेंफड़े स्वस्थ बनते हैं.धीरे-धीरे आपका मन भी पूर्णरूप से Concentration-एकाग्रता की ओर बढ़ता है-
  5. और भी देखे-

14 अगस्त 2016

Impotence-नपुंसकता के लक्षण क्या है

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वैसे तो पुरुषों में Infertility(बांझपन)या Impotence(नपुंसकता) के लक्षण ढूंढ़ना बहुत मुश्किल होता है आमतौर पर नपुंसकता का कारण शरीर में उपलब्ध Hormone(हार्मोंस)में गड़बड़ी या इनकी कमी के कारण होती है हार्मोंस में बदलाव के कारण भी पुरुषों में यह समस्या हो सकती है कई बार जो पुरूष हुष्ट-पुष्ट है किसी दुर्घटनावश वह नंपुसक भी हो सकता है इसीलिए Impotence(नपुंसकता) के लक्षणों को जानना बेहद मुश्किल होता है लेकिन फिर भी कुछ सामान्य सी बातों को जानकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि पुरूष नंपुसक है या नहीं-आइए जानें पुरूषों में Symptoms of impotence को-

Impotence


ऐसे पुरुष में नपुंसक होने के लक्षण मौजूद होते हैं, जो संभोग के समय में सही तरीके से यौन क्रियाएं नही कर पाता या फिर बहुत जल्दी Discharge(डिस्चार्ज)हो जाता है दरअसल नपुंसकता का संबंध सीधे तौर पर ज्ञानेन्द्रियों से होता है, ऐसे में पुरुष कई बार इस बारे में जागरूक नहीं हो पाते तो कई बार संकोचवश डॉक्टर से इस बारे में परामर्श नहीं ले पातें है जिससे ये रोग बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है नपुंसक व्यक्ति की महिला साथी कभी पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हो पाती-

कुछ लोग नपुंसक नहीं भी होते लेकिन घबराहट और मन में डर या किसी मानसिक बीमारी आदि के कारण वे उत्तेजित नहीं   हो पाते है भविष्य में यही डर और घबराहट ऐसे पुरुषों को नपुंसक बना देता हैं और घबराहट के कारण यह अपनी पार्टनर से दूर-दूर रहने लगते हैं-

Symptoms of Infertility in Men(पुरूषों में बांझपन के लक्षण)-

  1. जो पुरुष संभोग के दौरान सही तरीके से यौन क्रियाएं नहीं कर पाता या फिर बहुत जल्दी डिस्चार्ज हो जाता है तो उसमें कमी होती है यह नपुसंकता(Impotence)का लक्षण भी है- नपुंसकता होने पर पुरुष के लिंग में कठोरता या तो आती नहीं और अगर आती है तो बहुत ही जल्दी शांत हो जाती है संभोग के दौरान अचानक लिंग में कठोरता का कम होना ये प्रमुख लक्षण है-
  2. दरअसल Impotence-नपुंसकता का संबंध सीधेतौर पर ज्ञानेन्द्रियों से होता है कुछ लोग तो संकोचवश या जागरुकता के अभाव में इस बारे में सही जानकारी नही ले पाते हैं-
  3. हालांकि नंपुसकता अधिक उम्र के व्यक्तियों में ज्यादा पाई जाती है जिससे पुरुष महिलाओं के पास जाने से भी घबराने लगते हैं उम्र बढ़ने के साथ ही यौन इच्छा में कमी होने लगती है जो पुरुष सेक्स क्रिया करने में रूचि नहीं रखते और जिनमें उत्तेजना नहीं होती वे पूर्ण नपुंसक होते हैं- जबकि जो पुरुष एक बार तो उत्तेजित होते हैं लेकिन घबराहट या किसी अन्य कारण से अक्‍सर जल्दी शांत हो जाते हैं उन्हें आंशिक नपुंसक कहा जाता है-
  4. संभोग करने के दौरान या करने से पहले घबराहट होना- क्योंकि ऐसे लोगों में विश्वास की कमी होती है और उनके अंदर डर सा बना रहता है- संभोग के दौरान जल्दी डिस्चार्ज हो जाना- संभोग के दौरान अचानक लिंग में कठोरता का कम होना- Impotence(नपुंसकता) के कारण पुरुष का लिंग सामान्य से छोटा हो जाता है जिससे पुरुष ठीक तरह से संभोग करने में असमर्थ होता है- नपुंसक लोगों में आत्मभविश्वास की कमी होना- अक्सर ऐसे लोग भीड़ से घबराते हैं और महिलाओं से बात करने में दिक्कत होती है-
  5. नपुंसक व्यक्ति के अंडकोष छोटे हो जाते हैं- नपुंसकता(Impotence)के कारण व्यक्ति थकान महसूस करता है- आत्म विश्वास की कमी होना- लोगों से बातचीत के दौरान घबराना- भीड़ में घबराना या महिलाओं से बात करने में झिझकना-
  6. नपुंसक व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है जिससे सही तरह से संभोग ना करने के कारण पीडि़त व्यक्ति बीमार रहने लगता है- बांझपन के कारण व्यक्ति के प्रजनन अंग कमजो़र हो जाते हैं- भागदौड़ भरी जिंदगी ने लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बना दिया है- फास्ट फूड का ज्यादा प्रयोग और खान-पान में पोषक तत्वों की कमी इसका प्रमुख कारण है -
  7. जो लोग युवावस्था में कालेज लाइफ में दोस्तों के साथ पोर्न फिल्म का आनंद लेते हुए अपने वीर्य का अधिक मात्रा में छरण करते है आगे चल कर उनमे भी ये देखने को मिलती है क्युकी जादा हस्त-मैथुन से उनकी नशे कमजोर हो जाती है-

Upcharऔर प्रयोग-

13 अगस्त 2016

Breast-स्तन का आकार कम करें

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स्त्री के सौंदर्य को बनाये रखना हो या शिशु को जीवन पान कराना, उनके Breast-स्तन की विशेष भूमिका होती है क्योंकि स्तन यदि ढीले, कमजोर या अधिक बड़े हों-तो उसकी शरीरिक सुंदरता कम होती है और वहीं यदि स्तन आकर्षक, पुष्ट और प्राकृतिक रूप से सुडौल हों तो वह नारी की सौंदर्यता को और अधिक निखार देते हैं तथा स्वास्थ्य की दृष्टी से भी बहुत बड़े स्तन ठीक नहीं होते और इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि आप जरूरत से बड़े Breast-स्तनों का आकार कैसे कम कर सकती हैं-


स्तन का आकार कम करे-Reduce Breast Size

आप सुंदर कपड़े और शर्ट पहनना चाहती हैं पर आपके Breast Size(ब्रेस्ट आकार) सही ना होने के कारण आपको ऐसा करने में तकलीफ होती है तथा कई बार जरूरत से ज्यादा बड़े ब्रेस्ट होने से महिलाओं को कपड़े सही फिट नहीं आते हैं ऐसे में Breast-ब्रेस्ट को लिफ्ट देकर इस समस्या से निजात पाई जा सकती है-

शर्मिंदगी के कारण ज्यादातर महिलाएं इस बारे में बात नहीं करतीं है जिस कारण कई बार स्तन कैंसर, पीठ दर्द, त्वचा पर चकते और एलर्जी जैसी समस्याओं के होने का खतरा भी बढ़ जाता है यूं तो आजकल ब्रेस्ट के साइज में किसी तरह का बदलाव करने के लिए Breast-ब्रेस्ट सर्जरी भी काफी चलन में हैं लेकिन ब्रेस्ट वसा ऊतकों से बने होता हैं इसलिए आप अपने ब्रेस्ट के आकार को कम करने के लिए सर्जरी के बजाय वजन घटाने के कार्यक्रमों या एक्ससाइज का सहारा भी ले सकती हैं अगर आपके Breast-ब्रेस्ट छोटे है तो आप अपने जीवन शैली में कुछ परिवर्तन करके इनका आकार सही कर सकती हैं-

Woman's Breast(नारी और स्तन)-

नारी वक्ष की दो अहम कार्य होते हैं- पहला शिशु का पोषण (दुग्धपान) तथा दूसरा यौनाकर्षण- नारी स्तनों की यौनाकर्षण वाली भूमिका ही ज्यादा महत्वपूर्ण होती है-छोटे स्तन की महिलाओं के प्रति पुरुषों की रूचि भी कम होती है-

Due to large breasts(बड़े स्तनों के कारण)-

बड़े स्तन होने के कई कारण हो सकते हैं-मोटापे की वजह से भी ऐसा होता है या फिर यह समस्या वंशानुगत भी हो सकती है- कभी-कभी शरीर में एस्‍ट्रोजन का लेवल हाई हो जाने के कारण भी ऐसी समस्‍या आ जाती है लेकिन ब्रेस्‍ट साइज को कम करने के लिये कुछ सिंपल एक्‍सर्साइज, योग किये  जा सकते हैं या फिर कुछ नुस्खे भी अपनाए जा सकते हैं-

Excercise(स्तनों का आकार कम करने के लिए एक्सरसाइज)-

स्तन बहुत से फैटी टिशू से मिलकर बना होता है, जिनको कम करके आप अपने स्तनों को कम कर सकती हैं इसके लिए सही कसरत करना बहुत जरूरी होता है शरीर की वसा को घटा कर आप अपने स्तनों को आराम से कम कर सकती हैं- आपको दौड़ने, साइकलिंग, सीढि़यां चढ़ने और स्‍विमिंग करने जैसी कैलोरी बर्न करने वाली एक्‍सर्साइज करनी चाहिए- इसके लिए आपको नियमित रूप से पुश-अप एक्‍सर्साइज, स्‍विमिंग, जौगिंग तथा चेस्‍ट फ्लाइ जैसे व्यायाम करने होंगे-लेकिन ध्यान रहे जब भी आप व्यायाम करें तो स्पोर्ट्स ब्रा जरूर पहने क्योंकि हम जैसे-जैसे मूवमेंट करते हैं स्तन भी वैसे ही मूवमेंट करते हैं इसलिए बिना सही सपोर्ट के व्यायाम करने से स्तनों में दर्द हो सकता है साथ ही इसके लिगामेंट को भी नुकसान पहुंच सकता है और त्वचा ढीली पड़ सकती है-

Take the help of yoga(योग की मदद लें)-

अपने बेस्ट के आकार को कम करने के लिए आप योग का सहारा ले सकती हैं इसके लिए नियमित रूप से अर्द्ध चक्रासन मुद्रा बेहद मददगार साबित होती है-

अर्द्ध Ckrasn(चक्रासन) कैसे करें-

स्तन का आकार कम करे-Reduce Breast Size

सीधे खड़े होकर अपने हाथों को एक साथ ऊपर की तरफ फैला दें फिर अपने हथेलियों की मुटठी बांध ले और अपनी हथेलियों को एक साथ शामिल करके अपनी कलाई को मजबूत करें अब अपने शरीर को ऊपर की ओर खींचे, अपने कंधों को सुनिश्चित करके अपने कान को छूए-गहरी सांस ले अपने शरीर को कूल्हों के सहारे ऊपरी की ओर पुश करें तथा साथ ही अपने घुटनों को मोड़े- यहं आसन एक या दो मिनट के लिए करें-

Aerobics Cardio(कार्डियो- एरोबिक्स) करें-


  1. आपको अपने ब्रेस्ट के आकार को कम करने के लिए अपने शरीर से अतिरिक्त वसा कम करनी होगी अच्छी तरह के आकार और छोटे ब्रेस्ट के लिए एरोबिक्स करें तथा बहुत भारी वजन न उठाएं- ये आपके मांसपेशियों के भारीपन को कम नहीं करता- बल्कि मांसपेशियों को टोन करता है- यदि आप जिम नहीं जाना चाहतीं तो घर पर ही आसान से कार्डियो एक्ससाइज कर सकती हैं-
  2. अगर आप सोचते हैं कि छाती से संबंधित व्यायाम सिर्फ पुरुषों के लिए होते हैं- तो आप गलत हैं पुश-अप्स और बेंच प्रेसेस के जरिए पेक्टरल (छाती से संबंधित) मसल्स के लिए व्यायाम करने से आपके स्तन के उभार और आकार में सुधार आएगा- अगर आप उभार भरे स्तन के लिए फर्मिंग क्रीम और डेकोलेटेग का इस्तेमाल करते हैं, तो इन व्यायामों के जरिए आप नेचुरल लुक हासिल कर सकते हैं-
  3. जॉगिंग करें, ब्रेस्ट के आकार को कम करने के लिए यह एक अच्छा उपाय है साथ ही घूमना भी एक अच्छा तरीका होगा- 30 मिनट या एक दिन में 20 मिनट जॉगिंग या तेज चलना भी आपके ब्रेस्ट से अतिरिक्त वसा को कम करने में मदद करता है साथ ही 25 मिनट तक एरोबिक्स करना भी ब्रेस्ट के आकार को कम करने में मददगार साबित हो सकता है-स्तनों का बढा आकार कम करने के लिए आपको व्यायाम के साछ अपने खान-पान पर भी ध्यान देना होगा- बहुत अधिक फैटी फूड खाने से व भोजन में अनियनिता के कारण भी स्तनों का आकार बढ़ सकता है-
  4. आप व्यायाम करें तो स्पोर्ट्स ब्रा जरूर पहने- हम जैसे-जैसे मूवमेंट करते हैं- हमारा स्तन भी वैसे ही मूवमेंट करता है- इसलिए बिना सही सपोर्ट के व्यायाम करने से स्तन में दर्द हो सकता है साथ ही इसके लिगामेंट को नुकसान पहुंच सकता है और त्वचा ढीली पड़ सकती है इन बातों को लेकर उन महिलाओं को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है, जिनके स्तन का आकार बड़ा है- इस बात को सुनिश्चित करें कि आप का स्तन व्यायाम के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो-
  5. महिलाएं नियमित रूप से संसक्रीन का इस्तेमाल नहीं करती हैं- छाती के संवेदनशील त्वचा पर सन लॉसन नहीं लगाने से न सिर्फ सनबर्न और स्किन कैंसर का खतरा बढ़ता है, बल्कि इससे स्किन पर समय से पहले बुढ़ापा भी दिखने लगता है- झुर्रीदार क्लीवेज से बचने और चिकना व चुस्त डेकोलेटेग के लिए जरूरी है कि जब भी आप धूप में निकलें तो कम से कम एसपीएफ 15 संसक्रीन जरूर लगाएं-
  6. अगर आप अपने स्तन में तुरंत सुधार लाना चाहते हैं तो आप अपने पोस्‍चर को ठीक करें- जब चलते समय आपका कंधा झुका हुआ होगा तो छाती का मसल्स लचीलापन खो देगा साथ ही समय के साथ-साथ त्वचा भी ढीली पड़ने लगेगी- वहीं बिल्कुल सीधा चलने से आपका स्तन बड़ा और आकर्षक दिखेगा- इस बात पर ध्यान दें कि पूरे दिन आप किस तरह खड़े होते हैं और बैठते हैं-
  7. और भी देखे-

Upcharऔर प्रयोग-

मधुमेह के रोगी को अलसी केसे खाना है

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मधुमेह के रोगी को अलसी केसे खाना है-Diabetic Patient How to Take Flax Seed

डायबिटीज-Diabetesके रोगियों के लिए अलसी-Linseedएक आदर्श और अमृत तुल्य भोजन है क्योंकि यह जीरो कार्ब भोजन है अलसी ब्लड शुगर नियंत्रित रखती है तथा डायबिटीज के शरीर पर होने वाले दुष्प्रभावों को कम करती हैं चिकित्सक डायबिटीज के रोगी को कम शर्करा और ज्यादा फाइबर-Fiberलेने की सलाह देते हैं चूँकि अलसी के बीज-flax seedsमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है इसलिए शुगर के रोगी को अलसी के बीज लाभदायक-flax seeds benefits है-

  1. डायबिटीज-Diabetes या मधुमेह एक चयापचय विकृति या रोग है जिसमें ब्लड शुगर की मात्रा बहुत बढ़ जाती है क्योंकि शरीर में ब्लड शुगरको नियंत्रित करने वाले इंसुलिन हार्मोनInsulin का बनना कम हो जाता है या आप ये समझ ले कि इंसुलिन अपने कार्य को ठीक से नहीं कर पाता है-
  2. मोटापे से परेशान लोगों के लिए भी अलसी सर्वोत्तम आहार है अलसी सेवन से लंबे समय तक पेट भरा हुआ रहता है और देर तक भूख नहीं लगती है यह बी. एम. आर. केा बढ़ाती है तथा शरीर की चर्बी कम करती है और हम ज्यादा कैलोरी खर्च करते हैं अतः मोटापे के रोगी के लिये अलसी एक उत्तम आहार है-
  3. कुल मिलाकर आप ये समझ सकते है कि अलसी ऊर्जा का सर्वोत्तम स्रोत है स्नायु कोशिकाओं में थकान नहीं आने देती है ये ऑक्सीजन और अन्य पोषक तत्वों की उपयोगिता में वृद्धि करती है-देह को सुन्दर मांसल गोरा बनाती है-

डायबिटीज में अलसी कैसे खायें-

संतुलित भोजन में अलसी का समावेश आसान, सस्ता और दूरदर्शी कदम है, लेकिन इसके परिणाम बड़े चमत्कारी मिलते हैं यदि आप ज्यादा फाइबर लेने के आदी नहीं हैं तो अलसी को कम मात्रा से शुरू करें और फिर धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं-

अलसी का सेवन करने से पहले इसे पीसना जरूरी है आप इसे मिक्सर के ड्राई ग्राइंडर में दरदरा पीसें तथा इसे दही, दूध, सब्जी, दलिया, सलाद आदि के साथ भी लिया जा सकता है पानी भी ज्यादा पीयें- डायबिटीज के रोगी को पूरा फायदा लेने के लिए रोजाना 30 से 60 ग्राम अलसी खाना चाहिये-

अलसी की रोटी-

डायबिटीज के रोगी को रोज सुबह 20 ग्राम और शाम को 20 ग्राम अलसी का सेवन करना चाहिये-अलसी को पीस कर आटे में मिला कर रोटी बना कर खाना चाहिये- यही खाने का सबसे अच्छा तरीका है-

अलसी का तेल-

अलसी के तेल-linseed oil को भी दही या पनीर में मिला कर लिया जा सकता है यह भी याद रखें कि अलसी के तेल में सिर्फ फैट्स होते हैं फाइबर, प्रोटीन, लिगनेन, विटामिन और खनिज तत्व हमें सिर्फ बीज द्वारा ही प्राप्त होते हैं-पहले के लोग यदि जानकारी ले तो पता होगा सरसों और अलसी का तेल जादा इस्तेमाल करने के कारण स्वस्थ रहा करते थे -आज उसकी जगह रिफाइंड ने ले लिया है -रिफाइंड अब आपको भी रिफाइंड करने में लगा है-सोचे समझे और विवेक का इस्तेमाल करे कि आप के लिए उपयुक्त क्या है-

हम आपको दूसरी पोस्ट में बतायेगे कि अलसी कैंसररोधी  प्रधान आहार भी है-

11 अगस्त 2016

Wound Care Products in Ayurved-आयुर्वेद में घाव देखभाल का उत्पाद

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Wound Care Products in Ayurved-आयुर्वेद में घाव देखभाल का उत्पाद

Wound Care Products in Ayurved-आयुर्वेद में घाव देखभाल का उत्पाद

Satyanasi is a name that sounds very strange to hear. These names is such that any hearing will not detect this plant in your home. Satyanasi plant waste is automatically created on the ground. But people do like to exterminate it. in ancient times, people of India used were in the tantrik village people ghost removal. Any ghost or apparition of a woman affected by beating had the same plant. So the plant will maintain its probably kept people.

Satyanasi related kind of trust and confidence in the country's Atlantic-India algaalag Campi is present in different forms are closely. Ordinary people consider it ominous but same clever trader earn profit from it.

Mustard oil adulteration and about drips it causes disease, is also read from time totime you know not in mustard oil adulteration. Mustard oil before removing these adulteration occurs. Satyanasi seed and mustard bijo complete equality. So satyanasiseed and mustard seed is, after all, a smart businessman remove its oil.

Here you go what is the benefit of that satyanasi. Its scientific name is mexican arjimon. This ancient Indian aid at Mexico plant author get its medicinal properties in its description of the Sanskrit name is svarnakshiri. These svarnakshiri name satyanasi name is not at all like the scares. While it has the feel of a vegetable to be established from heaven.

Ayurvedic treatise bhavaprakash nighantu such beautiful names to this vegetation has been speaking svarnakshiri. its various languages in the name.

Sanskrit-svarnakshiri
Hindi-sistani, bhadbhand, Chok
Marathi-kantedhotra
Gujarati-darudi
Bengali-Chok, shiyalkanta
Telugu-ettore
Tamil-kudiyotti
Kannada-datturi
Malayalam-ponnummattam
English-Mexican poppy
Latin-arjimon mexican

The plant is full of thorns and about 2-3 feet high and loose and took the edge of ponds and trenches in winter the plant is found. This flower is yellow and five-seven petals. Seeds mustard seed and number are played. Its leaves and flowers of yellowleaves. So it means that golden color svarnakshiri milk with vegetable says.

The root-seed-milk and oil is in use. This key is created from the name of Yoga svarnakshiri oil. This oil satyanasi Almanac (whole plant) is made from the oil of this feature is that it can fill out any type of wound is fine.

Make Vrankuthar Oil-

Creation Method-

You do this by carefully avoiding thorns plant it uprooted root wash it in water, including get clean can crushed ... this juice off. again as fourth best him pure juice mix mustard oil and cook more on recession when juice water and oil cooled off by fire survivors are it and fill in the vial. That's vrankuthar oil. If you are 200 g crushed juice is extracted. The 50 gram pure mustard oil and when the puck and take the survivors back to keep oil 50 g. You take it in a glass bottle.

Used Method -

To any type of wound wash water wipe. Then repeat the oil on the wounds clean cotton wool. If wounds are bigger or very old wound on the cotton Strip tied note. This will be fixed by a few days to heal the wounds. these guarantee of wound medicine. If old canker is there medication as effective.

पोस्ट-लिंक-Wound-Itching-Herpes,SkinDisease,

Upcharऔर प्रयोग -

10 अगस्त 2016

Health Insurance क्या है ? क्या फायदे हैं Health Plan लेने के

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Health Insurance In India

Health Insurance क्या है ? क्या फायदे हैं Health Plan लेने के-

अधिकतर लोग Health Insurance का चुनाव इंश्योरेंस एडवाइजर की सलाह पर करते हैं और ऐसे में वे सही जानकारी से महरूम रह जाते हैं India  में ज्यादातर लोगों के पास Health Insurance नहीं है जिनके पास है भी, उनमे से भी बहुत अधिक लोगो  को इसकी सही समझ नहीं होती कि उनके लिए कौन सा Health Plan ठीक है क्यूंकि ज्यादातर लोग Insurance Agent की बातो पर भरोसा करके स्वास्थ्य बीमा खरीद लेते हैं और जिससे बाद में पछताना पड़ता है  तो आएये जानते है की स्वास्थ्य बीमा क्या है और इसके क्या क्या फायदे हैं -

कस्टमर Health Insurance खरीदने में कहां गलती करते हैं-

जी हाँ मैं कस्टमर की गलती के विषय में नहीं बल्कि उनके अपेक्षाओं के बारे में बताना चाहूंगा- ये तीन महत्वपूर्ण बिंदु पर प्रकाश डाल रहा हूं- ज्यादातर उपभोक्ताओं को यह गलतफहमी रहती है कि हेल्थ इंश्योरेंस, हॉस्पिटल में होने वाले खर्च के बराबर होता है- यदि कंपनी की ओर से ग्रुप इंश्योरेंस कराई जाती है तो भी वह समझते हैं कि हेल्थकेयर के लिए सोचने की जरूरत नहीं है इस तरह की गलती अममून बहुतायत उपभोक्ताओं के साथ देखने को मिलती है-

Health Care का कास्ट कुछ सालों के अंदर कई गुणा बढ़ गया है हालांकि हेेल्थ इंश्योरेंस बहुत जरूरी है इसी को देखते हुए आपको सही व्यक्ति से सही जानकारी लेनी आवश्यक है कि उनके लिए कौन सा Health Insurance जरूरी है-

यदि आप दूसरी मुख्य बात पर नजर डालें तो लोगों को सही पालिसी की समझ नहीं होती है  कई ऐसी पालिसी होती है जो बीमारी को देखते हुए भुगतान करती है कस्टमर को पालिसी लेने से पहले उससे जुड़ी जानकारियां जुटानी चाहिए या एडवाइजर से जानकारी लेनी चाहिए-

बीमा कंपनियां पैसे बनाने के लिए मार्केट में काम कर रही है वे अपने लाभ को अधिक करने के लिए प्रीमियम अधिक लेना चाहते हैं प्रीमियम की गणना कस्टमर द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित होती है कंपनियां प्रीमियम की गणनना परिवार के इतिहास, तम्बाकू सेवन आदि को देखते हुए तय करती हैं सही जानकारी देकर आप कम प्रीमियम भुगतान करके भी हेल्थ इंश्योरेंस ले सकते हैं-

पालिसी लेने पहला फैसला महत्वपूर्ण है-

यह हर किसी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है कि वह बीमार होने का इंतजार किए बिना, अपनी जरूरत को देखते हुए हेल्थ पालिसी लेनी चाहिए-जब आप युवा होते हैं तो आपका प्रीमियम कम होता है- उम्र बढऩे के साथ प्रीमियम बढ़ता जाता है- इसलिए प्रीमियम का चुनाव करने के लिए शुरुआती फैसला काफी महत्वपूर्ण होता है अन्यथा पालिसी पर क्लेम का लाभ कम ही मिलता है और आश्चर्य अधिक होता है- आप किसी भी इंश्योंरेस कंपीनी के पास ऐसे इंश्योरेंस लिजिए जिसका प्रीमियम कम हो और सम इंश्योरर्ड ज्यादा हो- इसके साथ ही कोशिश करनी चाहिए कि आपको उसी इंश्योरेंस कंपनी से ज्यादा लाभ मिल सके, जैसे कि अधिक विस्तृत कवर बीमारियों पर और ज्यादा नो-क्लेम बोनस-आपकी बीमारी में जो खर्च हुआ उसके मुकाबले इंश्योरेंस कंपनी पैसा कम देती है जानते है ऐसा क्यों होता है :-

ऐसा उस केस में होता है, जब बिल अमाउंट बीमा पालिसी में दिए हुए एश्योर्ड रकम से अधिक हो जाता है ऐसी हालत में पालिसी-धारक को ही पैसा देना होता है दूसरी स्थिति तब आती है जब खर्च की गई रकम बहुत ही कम होती है और उसे क्लेम नहीं किया जा सकता- इसके अलावा भी कई अन्य कारण हो सकते हैं, जो बेईमानी की ओर इशारा करते हैं-इलाज का खर्च बहुत ही बढ़ गया है एक आदमी इस बढ़ी हुई महंगाई में हेल्थ इंश्योरेंस कैसे ले.?

यही एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें इंसान गलती नहीं कर सकता है तो वह हेल्थ केयर है आपको पता होना चाहिए की कुछ सालों के अंदर ही हेल्थ कास्ट किस तेजी से बढ़ गया है- हेल्थ इंश्योरेंस आपको इसमें मदद करता है-

वर्तमान में हेल्थ इंश्योरेंस का दायरा काफी बढ़ गया है जो कि 5-10 साल पहले नहीं हुआ करता था- मान ले कि एक फैमिली मेंबर का हास्पिटल का बिल 10 लाख आया और इंश्योरेंस कावर मात्र तीन लाख रुपए का था- हेल्थ इंश्योरेंस वास्तव में एक धन संरक्षण उपकरण है- यदि बीमा की रकम कम है तो यह आपके परिवार को कई साल पीछे कर देता है-

कम खर्च में पूरे परिवार का बीमा कैसे लिया जाए-

हेल्थ इंश्योरेंस में दो प्रकार से बीमा किया जाता है पहला व्यक्तिगत बीमा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति का बीमा होता है और दूसरा पूरे परिवार का बीमा, जिसमें परिवार के सदस्यों की कोई सीमा नहीं होती- यदि आप व्यक्तिगत बीमा कराते हैं और आपके परिवार में 4 लोग हैं और सभी की पालिसी 3 लाख रुपए है तो 12 लाख रुपए की पालिसी आपके पूरे परिवार की हुई- इस बीमा में व्यक्तिगत बीमा कवर 3 लाख रुपया हुआ, जबकि दूसरे केश में सदस्यों की कोई संख्या नहीं है। दूसरे हालात में प्रीमियम परिवार के सबसे बड़े सदस्य को देखते हुए तय किया जाता है ज्यादातर मामलों में फैमिली फ्लोटर अच्छा होता है न्यूक्लियर फैमिली के मुकाबले, जब परिवार के सबसे बड़े सदस्य की आयु 30 से 40 साल हो-बड़े परिवार व्यक्तिगत पालिसी के मुकाबले फ्लोटर पालिसी अच्छी मानी जाती है-

बीमा पालिसी मुख्य रुप से निवेश के लिए इस्तेमाल होती है इस स्थिति को कैसे सही किया जाए?

हमारे देश के अंदर ज्यादातर लोगों के पास बीमा पालिसी नहीं है और जिनके पास है भी उनका सम एश्योर्ड बहुत ही कम है- जिससे उनके परिवार का गुजर-बसर नहीं चल सकता है- बीमा की रकम कम होने से वे न तो अपने घर का लोन दे सकते हैं न ही कुछ और कर सकते है- इंश्योरेंस सेक्टर में काम कर रही कंपनियों को चाहिए कि वे लोगों को जागरुक करें और सम एश्योर्ड अमाउंट को बढ़ाएं- निवेश के जरिए बचत करना अच्छी बात है, पर इससे आपके परिवार की जरूरत भी पूरी होनी चाहिए-

यदि उपभोक्ता के पास हेल्थ कवर है तो अस्पतालों में ज्यादा चार्ज किया जाता है और उपभोक्ता को अगले साल अधिक प्रीमियम का भुगतान करना होता है-

आपसी  ताल-मेल से बीमा कंपनियों और हास्पिटल्स को साथ बैठकर इस मामले को सुलझाना चाहिए और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए- उपभोक्ताओं से बिल्कुल सही प्रीमियम लेना चाहिए- किसी की बीमारी से फायदा उठाना बहुत ही बुरी बात है- किसी व्यक्ति से सिर्फ इसलिए ज्यादा चार्ज लेना क्योंकि उसके पास हेल्थ कवर है, बहुत घटिया परंपरा है, इस अवश्य रोक लगनी चाहिए-

अंत में ये कहना है कि उपभोक्ता को अपनी जरूरत को देखते हुए सही पालिसी लेनी चाहिए- इसके लिए आप थोड़ा समय लें और सही तरह से समझने के बाद ही पालिसी का चुनाव करें- इसमें नई कार या फोन खरीदने जैसा रोमांच नहीं हो सकता है, पर इसका महत्व व इसकी कीमत बहुत बड़ी है-

आपका चुनाव और  सही निर्णय आपके जीवन के लिए सही फलीभूत होगा अत:सोचे समझे और फिर पालिसी ले-

Upcharऔर प्रयोग-

9 अगस्त 2016

Typhoid-टायफायड क्या है

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मोतीझरा यानि टाइफाइड(Typhoid)एक खतरनाक बुखार है और इस बुखार का कारण साल्मोनेला टाइफी(Salmonella typhi) नामक बैक्टीरिया का संक्रमण होता है इस बीमारी में तेज बुखार आता है जो कई दिनों तक बना रहता है यह बुखार कम-ज्यादा होता रहता है लेकिन कभी सामान्य नहीं होता-यह बैक्टीरिया(Bacteria) छोटी आंत में स्थापित हो जाता है लेकिन कभी-कभी यह पित्ताशय(Gallbladder) में भी स्थापित रहता है यह वहीं अपनी संख्या बढ़ाकर विष फैलाता है और रक्त में मिलकर इस बीमारी का कारण बनता है-


टायफायड क्या है- What is Typhoid

टायफायड(Typhoid)क्या है-


1- मोतीझरा(Typhoid) का इन्फेक्शन होने के एक सप्ताह बाद रोग के लक्षण नजर आने लगते हैं कई बार दो-दो माह बाद तक इसके लक्षण दिखते हैं यह सब संक्रमण की शक्ति पर निर्भर करता है-

2- साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया(Salmonella typhi bacteria)केवल मानव में छोटी आंत में पाए जाते हैं ये मल के साथ निकल जाते हैं जब मक्खियाँ मल पर बैठती हैं तो बैक्टीरिया इनके पाँव में चिपक जाते हैं और जब यही मक्खियाँ खाद्य पदार्थों पर बैठती हैं तो वहाँ ये बैक्टीरिया छूट जाते हैं इस खाद्य पदार्थ को खाने वाला व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में आ जाता है इसलिए कभी भी बाजार में बिकने वाली खुली हुई खाने की वस्तु से बचना चाहिए-

3- Typhoid की बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति जब खुले में मल त्याग करता है तो ये बैक्टीरिया वहाँ से पानी में मिल सकते हैं और मक्खियों द्वारा इन्हें खाद्य पदार्थों पर छोड़ा जा सकता है और ये स्वस्थ व्यक्ति को रोग का शिकार बना देते हैं-शौच के बाद संक्रमित व्यक्ति द्वारा हाथ ठीक से न धोना और भोजन बनाना या भोजन को छूना भी रोग फैला सकता है-

4- कई व्यक्ति ऐसे होते हैं जिनके पेट में ये बैक्टीरिया होते हैं और उन्हें हानि नहीं पहुँचाते बल्कि बैक्टीरिया फैलाकर दूसरों को रोग का शिकार बनाते हैं ये लोग अनजाने में ही बैक्टीरिया के वाहक बन जाते हैं-

5- Typhoid की शुरुआत सिर दर्द, बेचैनी तथा तेज बुखार के साथ होती है साथ ही तेज सूखी खाँसी होती है और कुछ को नाक से खून भी निकलता है-

6- मोतीझरा(Typhoid) में बुखार 103 डिग्री से 106 डिग्री तक हो सकता है और यह बिना उतरे दो-तीन सप्ताह तक रहता है इसमें तेज ठंड लगती है और मरीज काँपता रहता है-

7- इसके अलावा पेट दर्द, पेट फूलना, भूख न लगना, कब्ज बना रहना, छाती व पेट पर हलके रंग के दाने निकलते हैं जो दो-तीन दिन तक रहते हैं कई रोगियों में हार्ट बीट मंद हो जाती है-

8- एक सप्ताह बाद पानी समान दस्त शुरू होते हैं कुछ केस में दस्त में खून भी आता है इससे रोगी कमजोर हो जाता है व उसके यकृत व प्लीहा का आकार बढ़ जाता है-

9- इसके बाद तीसरे सप्ताह से बुखार कम होने लगता है व बाद में पूरी तरह उतर जाता है समय पर इलाज न लेने से यह रोग आठ सप्ताह तक रह सकता है और जानलेवा होता है-

10- उपरोक्त लक्षणों में से कोई भी मिलता हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए और अपने मल-मूत्र की जाँच अवश्य ही करानी चाहिए-मल-मूत्र की जाँच इसलिए कि मोतीझरा(Typhoid) के लक्षण अन्य सामान्य रोग का भ्रम पैदा करने वाले होते हैं- रोगी भ्रम की अवस्था में रहता है, इलाज में गेप देता है और रोग तीव्र हो जाता है-

11- इस रोग का वैक्सीन आज उपलब्ध है यह बचपन में ही बच्चे को लगा दिया जाता है- बच्चे को 6 से 8 सप्ताह के अंतर से दो डोज लगाए जाते हैं- इसके बाद बच्चा तीन वर्ष का होने पर फिर एक बार टीका लगाना जरूरी होता है-

12- आजकल तो वर्तमान में मुँह से ली जाने वाली दवाएँ भी उपलब्ध हैं, इन्हें ओरल वैक्सीन(Oral vaccine) कहते हैं-उपचार में एंटीबायोटिक दवा(Antibiotic medicine) का इस्तेमाल किया जाता है- पेट दर्द, बुखार तथा जो-जो तकलीफ हो उनकी दवा दी जाती है-

13- रोगी को दवा बगैर नागा दी जाए- उसे अलग कमरे में रखा जाए- रोगी की तथा उसके कमरे की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें- हाथ हर बार साबुन से धोएँ-

14- मोतीझरा(Typhoid) ठीक होने के दो सप्ताह बाद यह फिर से हो सकता है इसकी समय पर चिकित्सा न करने पर यह बढ़ता है और आंतों में छेद हो सकते हैं- आंतों से खून जा सकता है- जिससे पेरिटोनाइटिस रोग(Peritonitis disease) हो सकता है-

15- मोतीझरा के साथ पीलिया हो सकता है न्योमोनिया(Nyomonia) हो सकता है मेनिन्जाइटिस,औस्टियोमाइलाइटिस तथा बहरापन(Deafness) भी हो सकता है-

टॅायफाइड़(Typhoid)कभी नहीं होगा दुबारा-


सामग्री-


मुन्नका - दो नग
बड़ी इलायची - दो नग
छोटी पीपल - दो नग
लौंग - चार नग
काली मिर्च - पांच नग
काकड़ा सिंगी - तीन  मासा
नागरमोथा - तीन  मासा
खुबकला - तीन  मासा
सोंठ - तीन  मासा
तुलसी के पत्ते - पांच पीस
बतासे(शक्कर) - पांच पीस
मुलहटी - तीन  मासा

उपरोक्त सभी सामग्री को एक साथ कूटकर एक पाव पानी में बिना ढके उबालें और जब पानी एक चौथाई रहे जाए तो बाकि बचे पानी को छानकर पी जाए इस तरह काढ़े को तीन रात को सोने से पहले प्रयोग करें-बच्चोँ के लिए मात्रा को आधी या चौथाई रखें-तीन रात काढ़े पीने से मोतीझारा ठीक हो जाता है और बुखार उतर जाता है तब कलोरोफैनिकोल सिरप 10 दिन तक 2 चम्मच रोजाना पीने से दोबारा टॅायफायड़ कभी नहीं होगा-

ये मोतीझरा में होने वाले बुखार में उपयोगी पारंपरिक उपचार की विधि  है-

पहली विधि-

10 मी.ली तुलसी की पत्तियों का रस, 10 मी.ली. अदरक का रस, 5 कालीमिर्च के दाने इन सभी को 1 चम्मच शहद के साथ Typhoid से पीड़ित रोगी को पिलाए और चादर ओढाकर सुला दें- इससे मोतीझरा के बुखार में लाभ मिलता है-

दूसरी विधि-

10 मी.ली तुलसी की पत्तियों का रस, 10 ग्राम दालचीनी, 10 ग्राम जावित्री को 1 लीटर पानी में उबालें और जब ¼ पानी शेष बचे तो इसे मोतीझरा के रोगी को थोड़े-थोड़े अंतराल में पिलाएं इससे Typhoid में लाभ मिलता है-


Upcharऔर प्रयोग-

8 अगस्त 2016

हिमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए-Increase Hemoglobin

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हिमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए-Increase Hemoglobin-

आप जानते ही है कि हमारे शरीर के लिए हिमोग्लोबिन(Hemoglobin) का सही अनुपात होना बहुत ही जरुरी है इसकी कमी से शरीर में रेड ब्लड सेल्स(Red Blood Cells)की संख्या कम हो जाती है और लोगों को एनीमिया(Anemia)की शिकायत हो जाती है हिमोग्लोबिन की कमी को हम कुछ आहार के द्वारा भी दूर कर सकते है आइये जानते है हम कैसे इस कमी को पूरा करे-

हिमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए-Increase Hemoglobin

वैसे तो हमारे शरीर के भोजन में अनेक प्रकार के पोषक तत्व(Nutrients) होते है जो हमारे शरीर का विकास करते है और उसे स्वस्थ भी रखते है लेकिन हिमोग्लोबिन(Hemoglobin) का महत्व सबसे जादा इस लिए है ये शरीर में रेड ब्लड सेल्स के निर्मार्ण में योगदान करता है-

क्या सेवन करे जो हिमोग्लोबिन बढाने में सहायक हो-


  1. पालक में आयरन(Iron)की काफी मात्रा होती है जो हमारे शरीर में हिमोग्लोबिन(Hemoglobin) की कमी को ठीक करता है इसलिए आप पालक को उबाल कर रायता बना कर या सब्जी के रूप में सेवन करे-
  2. तिल भी हमारे शरीर में हिमोग्लोबिन(Hemoglobin)की मात्रा को बढाता है तिल का उपयोग रक्ताल्पता(Anemia) की बिमारी को ठीक करता है आप तिल का उपयोग तिल और गुड(Sesame and jaggery) को मिला कर लड्डू के रूप में उपयोग कर सकते है-
  3. गुड में अधिक खनिज-लवण(mineral salts) पाया जाता है ये भी हमारे शरीर में हिमोग्लोबिन बढाने में सहायक है मगर इसका उपयोग अत्यधिक मात्रा में न करे -ख़ास कर शुगर(diabetes) के मरीज तो बिलकुल ही न करे-
  4. अंगूर में भी भरपूर मात्रा में आयरन(Iron) पाया जाता है जो कि शरीर में हिमोग्लोबिन बनाता है और हिमोग्लोबिन(Hemoglobin) सम्बंधित सभी बीमारियों को ठीक करता है -बस आजकल बिकने वाले अंगूर को धो कर ही खाए उसमे पावडर का छिडकाव किया जाता है-
  5. चुकंदर(Beet) से हमें उच्च क्वालिटी का लौह तत्व(Iron) प्राप्त होता है ये लाल रक्त कणों की सक्रियता के लिए बेहद प्रभाव-शाली है जिन महिलाओं में खून की कमी है उनके लिए चुकंदर रामबाण के सामान है आप चुकंदर के साथ-साथ चुकंदर की हरी पत्तियों का भी सेवन करे इन पत्तियों में चुकंदर से भी तीन गुना आयरन मौजूद होता है-

  6. तुलसी भी रक्त की कमी को दूर करने के लिए रामबाण है इसके नियमित सेवन से हिमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जाती है -तुलसी को निगले इसे दांतों से चबाये नहीं इसमें पारे की मात्रा भी होती है इसलिए सिर्फ चार पत्तियां ही काफी है हिमोग्लोबिन(Hemoglobin)अपने स्तर पे आने पर इसे बंद कर दे-
  7. अमरुद जितना पका होगा उतना ही हिमोग्लोबिन बढाने में फायदे मंद होगा जो लोग पका हुआ अमरुद खाते रहते है उनके शरीर में हिमोग्लोबिन की कमी नहीं होती है-
  8. हमारी हरी सब्जियां भी हिमोग्लोबिन(Hemoglobin) बढाने वाली होती है इस लिए हरी सब्जियों को अपने आहार में अवश्य ही शामिल करे-
  9. सेब आपके लिए रक्ताल्पता को समाप्त करने में लाभकारी है प्रतिदिन एक सेब आप अवश्य सेवन करे -क्युकि सेब खाने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है-
  10. आम मौसम का फल है इसे आम के मौसम में अवस्य सेवन करना चाहिए ये एनीमिया के लिए अधिक लाभकारी है-
Upcharऔर प्रयोग-