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30 जनवरी 2017

त्राटक ध्यान योग क्या है

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त्राटक(Trāṭaka)शब्द 'त्रि' के साथ 'टकी बंधने' की संधि से बना है अर्थात् जब साधक किसी वस्तु पर अपनी दृष्टि और मन को बांधता है तो वह क्रिया त्र्याटक कहलाती है त्र्याटक शब्द ही आगे चलकर त्राटक हो गया इसका शुद्ध शब्द त्र्याटक है जिसकी व्युत्पत्ति है-

Tratak Meditation

              'त्रिवारं आसमन्तात् टंकयति इति त्राटकम्'

त्राटक(Trāṭaka)योग क्या है-


1- हमने अपनी पिछली पोस्ट में बताया था कि किसी वस्तु को जब हम एक बार देखते हैं तो यह देखने की क्रिया एकटक कहलाती है और उसी वस्तु को जब हम कुछ देर तक देखते हैं तो द्वाटक कहलाती है-

2- जब हम किसी वस्तु को निनिर्मेष दृष्टि से निरंतर दीर्घकाल तक देखते रहते हैं तो यह क्रिया त्र्याटक या त्राटक(Trataka)कहलाती है दृष्टि की शक्ति को जाग्रत करने के लिए हठयोग में इस क्रिया का वर्णन किया गया है-

3- त्राटक(Trataka) एकटक देखने की विधि है त्राटक में आप लंबे समय तक या कुछ महीनों के लिए प्रतिदिन एक घंटा ज्योति की लौ को अपलक देखते रहें तो आपकी तीसरी आंख पूरी तरह सक्रिय हो जाती है- त्राटक से आप अधिक प्रकाशपूर्ण अधिक सजग अनुभव करते हैं तथा एक सम्मोहन शक्ति का विकास हो जाता है त्राटक (Trataka)शब्द जिस मूल से आता है उसका अर्थ है-आँसू-इसका अर्थ है ज्योति की लौ को तब तक देखते रहना है जब तक आंखों से आंसू न बहने लगें-यदि त्राटक में आप एकटक देखते रहें बिना पलक झपकाए तो इससे आपकी तीसरी आंख सक्रिय होने लगेगी-क्योंकि जब आप बिना पलक झपकाए एकटक देखते हैं, तो आप एकाग्र(Concentration)हो जाते हैं-

आपका मन(Mind)चंचल है-


1- जैसा कि आप सभी जानते है कि मनुष्य का मन चंचल है वह कभी एक जगह नहीं रहता है आप शरीर से भले एक ही जगह हो लेकिन आपका मन किसी भी छण कही भी जा सकता है-

2- ये प्रक्रिया भी दो तरह से होती है-पहली है जाग्रत अवस्था में आप का मन कहीं भी जा सकता है इस भ्रमण की घटना आपको याद है दूसरी-आप जब सोते है आप का मन तब भी कही न कही विचरण कर आता है लेकिन आपकी नींद खुलने के बाद आपको पूर्णतया याद नहीं रहता है चूँकि मन का स्वभाव है ही भटकना-

3- यदि आप बिलकुल एकटक देख रहे हैं जरा भी बिना हिले-डुले तो आपका मन अवश्य ही मुश्किल में पड़ जाएगा चूँकि मन का स्वभाव है एक विषय से दूसरे विषय पर भटकने का और निरंतर भटकते रहने का तो यदि आप अंधेरे या प्रकाश को या किसी चीज को एकटक देख रहे हैं तो आप बिलकुल एकाग्र(Concentration)हैं इस समय आपके मन का भटकाव रुक जाता है जब तक मन भटकेगा तो आपकी दृष्टि एकाग्र नहीं रह पाएगी-

4- जब तक आप मूल विषय से भटकते रहेंगे और जब मन कहीं और चला जाएगा तो आप भूल जाएंगे आप ये स्मरण नहीं रख पाएंगे कि आप क्या देख रहे थे भौतिक रूप से विषय वहीं होगा लेकिन आपके लिए वह विलीन हो चुका होगा क्योंकि आप वहां नहीं हैं और आप विचारों में भटक गए हैं-

5- आइये आपको एक उदहारण देता हूँ जब कालेज के विद्यार्थी किसी पाठ को रटते है तो कई बार उनका मन कुछ और सोचता रहता है यहाँ आप की सिर्फ नजर और जुबान चल रही थी जबकि मन कही और भटक रहा था इसका परिणाम ये होता है कि जब परीक्षा भवन में लिखने का समय आता है तो-चूँकि मन चंचल था इसलिए आपका रटा सब्जेक्ट(subject)आपसे विलुप्त हो जाता है-लेकिन एकाग्रता से याद किया गया विषय जल्दी नहीं भूलता बल्कि अमिट हो जाता है-

मन रुकना ही नहीं चाहता है-


1- वास्तविक रूप से त्राटक(Trāṭaka)का अर्थ है अपनी चेतना को बिलकुल भी भटकने नही देना है और जब आप मन को भटकने नहीं देते तो शुरू में वह संघर्ष करता है बल्कि कड़ा संघर्ष करता है लेकिन यदि आप एकटक देखने का अभ्यास करते ही रहे तो धीरे-धीरे आपका मन संघर्ष करना छोड़ देता है और फिर आपका मन कुछ क्षणों के लिए वह ठहर जाता है जब मन ठहर जाता है तो वहां अ-मन है क्योंकि मन का अस्तित्व केवल गति में ही बना रह सकता है-

2- आपकी ये विचार-प्रक्रिया केवल गति में ही बनी रह सकती है जब विचार शून्य तो गति स्थिर हो जाती है-जब कोई गति नहीं होती तो विचार-प्रक्रिया खो जाती है फिर आप सोच-विचार नहीं कर सकते है क्योंकि विचार का मतलब ही है गति-एक विचार से दूसरे विचार की ओर गति चूँकि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है यदि आप निरंतर एक ही चीज को एकटक देखते रहें और पूर्ण सजगता और होश से-क्योंकि आप मृतवत आंखों से भी एकटक देख सकते हैं-तब आप विचार करते रह सकते हैं-केवल आंखें, मृत आंखें, देखती हुई नहीं-मुर्दे जैसी आंखों से भी आप देख सकते हैं लेकिन तब आपका मन चलता रहेगा-इस तरह से देखने से कुछ भी नहीं होगा-

3- आप पूर्ण अस्तित्व से आंखों के द्वारा एकाग्र हो जी हाँ त्राटक का अर्थ है-केवल आपकी आंखें ही नहीं बल्कि आपका पूरा अस्तित्व आंखों के द्वारा एकाग्र होना है चाहे कुछ भी विषय हो यह आपकी पसंद पर निर्भर करता है यदि आपको प्रकाश अच्छा लगता है तो ठीक है लेकिन यदि आपको अंधेरा अच्छा लगता है तो भी ठीक है हमारा कहने का तात्पर्य है कि विषय कुछ भी हो लेकिन गहराई में यह बात गौण है असली बात तो है मन को एक जगह रोकने का यानी उसे "एकाग्र" करने का है जिससे कि भीतरी गतियां और भीतरी कुलबुलाहट रुक सके और भीतरी कंपन रुक सके आप ये समझ लें कि बस देख रहे हैं-निष्कंप-

4- आपने इस योग विद्या को बस कुछ समय या कुछ माह कर लिया तो सच मानिए कि आपका जीवन पूरी तरह से बदल जाएगा-वह एक ध्यान बन जाएगा-जो लोग ध्यान-साधना करते है उनके लिए किसी भी साधना की सफलता प्राप्त कर लेना आसान सा हो जाता है आप जीवन में उत्तरोत्तर उन्नति और सफलता की ओर प्रस्थान करने लगते है-

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