क्या आपके Toothpaste-टूथपेस्ट में नमक है

5:03 pm Leave a Comment
हम भारतवासी हमेशा से विदेशी प्रोडक्ट के मोहताज बनते रहे है हमारे बुजुर्ग पहले जब Toothpaste की जगह नमक, नीम्बू, कोयले, नीम, बबूल, शीशम या किसी पेड़ की दातुन से अपने दांत साफ़ करते थे तब उनके दांत आज के लोगों की अपेक्षा जादा मजबूत हुआ करते थे आपने सुना होगा किसी-किसी के दांत पूरी आयु होने पर भी सही-सलामत रहा करते थे -



Toothpaste



Toothpaste-टूथपेस्ट बनाने वाली कम्पनी आपसे पूछ रही है-

क्या कभी आपका ध्यान इस बात पर गया ? क्या पहले के लोग बेवकूफ थे ? क्या आज हम विदेशी प्रोडक्ट से अपने दांतों की पूर्ण सुरक्षा ले पा रहे है ? ये सवाल आपको अपने आप से करना है ? आप हर उस चीज के पीछे दौड़ लेते हो जिसका प्रचार प्रसार टी वी विज्ञापन से होता है ? आज Toothpaste-टूथपेस्ट बनाने वाली कम्पनी आपसे ही सवाल कर रही है ? क्या आपके टूथ पेस्ट में चारकोल हैं ? क्या आपके Toothpaste-टूथ पेस्ट में नमक है ?

आखिर बन गए न बेवकूफ जो विदेशी हमको अनपढ़-गंवार कहते थे आज चारकोल ढूढ रहे है ? अब इतने दिनों बाद इन कम्पनियों को समझ आया कि बढ़िया Toothpaste-टूथपेस्ट में नमक चाहिए-मेरा उद्देश्य किसी की आलोचना नहीं है मगर आज के भटके हुए युवा वर्ग का मार्गदर्शन है-युवावर्ग पढ़ा-लिखा होकर भी अपने ऋषियों के बताये मार्ग से भटक गया है-

ये हमारे ऋषियों की परम्परा है-

विदेशी कंपनिया हैं जो अब अपना Toothpaste ये कह कर बेच रही हैं हमारे प्रोडक्ट नमक, नीम, नीम्बू या चारकोल हैं-अरे अब उनको कौन बतलाये कि हमारे पूर्वज तो कब से इस रहस्य को जानते थे मगर तब उन्होंने हमको ये कह कर मुर्ख बनाया कि हम लोग कोयले से नमक से, नीम से, या नीम्बू से दांत को घिसते हैं और अब कोई उनसे ये पूछे कि अब दांत घिसने का ठेका उन कम्पनियों ने लिया है -


मूर्खताओं से बाहर आयें-


  1. सिर्फ हिन्दुस्तान ही है जहाँ ये विदेशी कम्पनियां हमको उल्लू बनाती है और हम पक्छिमी सभ्यता के इतने दीवाने है कि आँख बंद करके इनकी बातों में आ जाते है -
  2. आपने शायद ही कभी सोचा हो कि पहले हमारे यहाँ डॉक्टर वैध्य हकीम की जनसँख्या बहुत कम थी तब लोग स्वस्थ हुआ करते थे आज इनकी संख्या लाखों में है तो करोड़ों लोग किसी न किसी बिमारी के शिकार है-आपने शायद ही कभी इस कारण को जानने का प्रयास किया हो- हाँ -भला आपको समय कहाँ है सोचने का ?
  3. किसी ने सच ही कहा है मुर्ख बनाने की जरुरत नहीं है यहाँ तो बने-बनाये मिल जाते है बस कोई बनाने वाला चाहिए -
  4. हमें याद है आज से 50 साल पहले कानपुर में था इतना बड़ा शहर और नामचीन डेंटिस्ट थे सिर्फ सात-आठ -आज तो डेंटिस्ट ही डेंटिस्ट हैं और देशी से विदेशी कम्पनियो के उत्पादों की भरमार हैं फिर भी ना तो हमारे दांत स्वस्थ हैं ना ही हमारे बच्चो के- तो क्या हम ऊपर से ये लिखवा के लाये हैं कि हम हमेशा से बेवकूफ थे और बेवकूफ ही रहेंगे-
  5. भ्रस्टाचार कमीशन खोरी की जंग-भगवान् कहे जाने डॉक्टर को इतना लग गया है कि आज वो भी विदेशी कम्पनियों के प्रोडक्ट की सलाह देते नजर आते है-क्युकी सबसे जादा कमीशन वही से आता है-
  6. मान लो आप किसी कारण से बीमार हो गए और आप डॉक्टर को दिखाने गए तो उन मेडिकल के पैड पे दवा लिखी जाती है जो सिर्फ वही मिले मेडिकल वाला पर्चा देखते ही समझ जाता है कि डॉक्टर साहब की साझेदारी का पर्चा है और पक्का हो गया कमीशन-ये कमीशन 10 प्रतिशत से शुरू होकर 30 प्रतिशत तक का हो सकता है और ये बड़ी इमानदारी से दिया जाता है आखिर मेडिकल वाले ने दूकान जो खोल रक्खी है उसके बच्चे भी तो है-लेकिन आपको पता है दो रूपये में निर्मित होने वाली दवा आप के पास दस रूपये की पंहुचती है-सारा कमीशन तंत्र है- चाहे दवा का कमीशन हो या जांच का -
  7. विदेशी कम्पनियों के बहुत Toothpaste सेहत के लिए ऐसे घातक है के ये धीरे धीरे आपको मौत के मुह में ले कर जाते है आप अपने साथ अपने नौनिहालों को भी ये स्लो पाइजन दे रहे है ये विदेशी कम्पनियां अपने प्रोडक्ट को अपने ही देशों में नहीं बेच पाती है क्युकि इन के अंदर जो केमिकल है वो घातक है इसलिए वहां की सरकारें इन पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं और ये कंपनिया खुद भी मानती हैं के अगर कोई आदमी या बच्चा ये निगल ले तो तुरंत डॉक्टर को दिखाए क्यों के इससे कैंसर तक हो सकता हैं फिर भी हम इन Toothpaste को अपने बच्चों को दिए जा रहे है-


सोचो समझो जागो -बस यही सन्देश है -बाकी आपकी मर्जी 


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