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30 सितंबर 2016

Gomati Chakra-गोमती चक्र एक समाधान अनेक

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जीवन में हमें अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है कुछ परेशानियां स्वयं ही समाप्त हो जाती हैं जबकि कुछ समस्याओं के निदान के लिए विशेष प्रयास करने पड़ते हैं तंत्र शास्त्र के माध्यम से जीवन की कई समस्याओं का निदान किया जा सकता है-गोमती चक्र(Gomati Chakra)एक ऐसा पत्थर है जिसका उपयोग तंत्र क्रियाओं में किया जाता है यह बहुत ही साधारण सा दिखने वाला पत्थर है लेकिन इसका यह बहुत प्रभावशाली है-जो लोग तंत्र या मन्त्र या यंत्र पे विश्वाश  नहीं करते है मेरा उनसे निवेदन है कि हमारी इस प्रकार को इग्नोर कर दे लेकिन बेमलब का कोई कमेन्ट करके अपनी बुद्धिमता का परिचय न दे तो ही उचित होगा आपको पोस्ट लगे अपनाए न और यदि ठीक न लगे तो इग्नोर  करे-

Gomati Chakra-गोमती चक्र एक समाधान अनेक


गोमती चक्र(Gomati Chakra)की उत्पत्ति रहस्य-

गोमती चक्र(Gomati Chakra)की उत्पत्ति भगवान् विष्णु के चक्र से उस समय हुई जब देव दानव दोनों मिल कर समुद्र मन्थन करने लगे-पृथ्वी उसके भयंकर रगड़ एवं गर्जना से उत्तप्त हो गई-रोती बिलखती गाय के रूप में वह भगवान विष्णु की शरण में गयी-भगवान विष्णु ने अपने चक्र से समुद्र में ऐसी भयंकर चक्रवाती गोलाकार तरंग उत्पन्न किया कि मन्दराचल उसी में फँसकर अत्यंत तीव्र गति से पृथ्वी से ऊपर उठकर घूमने लगा-इस चक्र को ही भँवर कहा गया है-इस भँवर में फँसकर बड़े बड़े जलपोत डूब जाते है इस भयंकर वेग से मन्दराचल के निचले सतह से अनेक पत्थर लावा बनकर बाहर छिटकने लगे तथा अनेक मणियाँ, बहुमूल्य धातुएँ तथा अन्य वस्तुएं जैसे शङ्ख आदि भी छिटक कर बाहर गिरने लगे-

कुछ अति कीमती रत्न, पत्थर आदि घर्षण से पिघल तो गए किन्तु ऊपर पानी के सतह पर आते ही ठन्डे पड़ने लगे जो भँवर की अबाध तीव्र गति के कारण गोल रूप लेते चले गये-इनकी संख्या धीरे धीरे इतनी ज्यादा बढ़ गई कि भँवर हल्का पड़ने लगा और अंत में समुद्र मन्थन को रोकना पड़ गया-

वरुण (जल) के निचले सतह-पेंदे और गो रूप धारिणी माता पृथ्वी के ऊपरी सतह के मध्यवर्ती रत्न-धातु आदि “गो मृत्तिका” या “गो मिटटी” या गोमती चक्र(Gomati Chakra)के नाम से जाने गये-रहस्य विज्ञान के प्रवर्तक वरुण देव(जल)के घर्षणमय रासायनिक संयोग के कारण इसके अंदर शक्तिशाली अतिविचित्र शक्तियों का समावेश हो गया और 'गोमाता' पृथ्वी के आशीर्वाद से इसमें धनसंम्पदा आदि प्रदान करने की शक्तियाँ भी समाविष्ट हो गईं-गोमती चक्र(Gomati Chakra)एक अत्यंत शक्तिशाली उग्र रासायनिक प्रभाव वाला जल से उत्पन्न प्राकृतिक पदार्थ है जिसका नियम से और जिसके लिये उपयुक्त है वह प्रयोग करे तो अनेक विघ्न बाधा से निश्चित मुक्ति मिल सकती है-

तंत्र शास्त्र के अंतर्गत तांत्रिक क्रियाओं मे एक ऐसे दिव्य पत्थर का उपयोग किया जाता है जो दिखने में बहुत ही साधारण होता है लेकिन इसका प्रभाव असाधारण होता है  तंत्र शास्त्र के ज्ञाता इस पर अनेक विधि पूजन कर इसे प्राणप्रतिष्ठा से विशेष सिद्धि दायक बना देते हे -

गोमती चक्र(Gomati Chakra)के साधारण तंत्र उपयोग इस प्रकार हैं-

मानसिक शांति ,रोग और भय से मुक्ति,दरिद्रता से मुक्ति,कोर्ट कचेरी के मामलो मे राहत,भुत-प्रेत बाधा शत्रुपीड़ा,संतान प्राप्ति और खास कर धन संचय में-इसकी सिद्धि के विषय में अनेको मत-मतान्तर देखे जाते है कुछ इसे स्वयं सिद्ध बताते है तो कही इसकी सिद्धि के निर्देश मिलते है होली,दीवाली तथा नवरात्र आदि प्रमुख त्योहारों पर गोमती चक्र(Gomati Chakra)की विशेष पूजा की जाती है-ग्रहण या अमावस्या भी महत्त्वपूर्ण और सिद्धि दायक माने जाते है-

अन्य विभिन्न मुहूर्तों के अवसर पर भी इनकी पूजा लाभदायक मानी जाती है जैसे-गुरुपुष्य योग,सर्वसिद्धि योग तथा रविपुष्य योग पर इनकी पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है-खासकर मारण,संमोहन,वशीकरण,स्तम्भन,उच्चाटन जैसे प्रयोग में और व्यापार वृद्धि,अचल-स्थिरलक्ष्मी,शत्रु भय,पीड़ा,देह व्याधि,दुस्वप्न जैसे विषयों में इसका प्रयोग अत्यंत प्रभावी देखा गया है लेकिन अभिमंत्रित करने से गोमती चक्र(Gomati Chakra)का प्रभाव सौ  गुना बढ़ जाता है -

गोमती चक्र(Gomati Chakra)के प्रयोग-

  1. सबसे पहले ये बताना उचित समझता हूँ कि आप जान ले कि गोमती चक्र(Gomati Chakra)क्या है-ये गोमती चक्र कम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर है जो गोमती नदी मे मिलता है-विभिन्न तांत्रिक कार्यो तथा असाध्य रोगों में इसका प्रयोग होता है-
  2. असाध्य रोगों को दुर करने तथा मानसिक शान्ति प्राप्त करने के लिये लगभग 10 गोमती चक्र लेकर रात को पानी में डाल देना चाहिऐ तथा सुबह उस पानी को पी जाना चाहिऐ-इससे पेट संबंध के विभिन्न रोग दुर होते है-
  3. यदि शत्रु बढ़ गए हों तो जितने अक्षर का शत्रु का नाम है उतने गोमती चक्र(Gomati Chakra)लेेकर उस पर शत्रु का नाम लिखकर उन्हें जमीन में गाड़ दें तो शत्रु परास्त हो जाएंगे-
  4. प्रमोशन नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें और सच्चे ह्रदय से प्रार्थना करें-निश्चय ही प्रमोशन के रास्ते खुल जाएंगे-
  5. यदि गोमती चक्र(Gomati Chakra)को लाल सिंदूर के डिब्बी में घर में रखें तो घर में सुख-शांति बनी रहती है-
  6. यदि पति-पत्नी में मतभेद हो तो तीन गोमती चक्र लेकर घर के दक्षिण में "हलूं बलजाद" कहकर फेंद दें-इश्वेर चाहेगा तो धीरे-धीरे ये मतभेद समाप्त हो जाएगा-
  7. गोमती चक्र(Gomati Chakra)को होली के दिन थोड़ा सिंदूर लगाकर शत्रु का नाम उच्चारण करते हुए जलती हुई होली में फेंक दें-आपका शत्रु भी मित्र बन जाएगा-
  8. यदि किसी का स्वास्थ्य अधिक खराब रहता हो अथवा जल्दी-जल्दी अस्वस्थ होता हो-तो चतुर्दशी को 11 अभिमंत्रित गोमती चक्रों को सफेद रेशमी वस्त्र पर रखकर सफेद चन्दन से तिलक करें फिर भगवान् मृत्युंजय से अपने स्वास्थ्य रक्षा का निवेदन करें और यथा शक्ति महामृत्युंजय मंत्र का जप करें तथा पाठ के बाद छह चक्र उठाकर किसी निर्जन स्थान पर जाकर तीन चक्रों को अपने ऊपर से उसारकर अपने पीछे फेंक दें और पीछे देखे बिना वापस आ जायें बाकि बचे तीन चक्रों को किसी शिव मन्दिर में भगवान् शिव का स्मरण करते हुए शिवलिंग पर अर्पित कर दें और प्रणाम करके घर आ जायें-घर आकर चार चक्रों को चांदी के तार में बांधकर अपने पंलग के चारों पायों पर बांध दें तथा शेष बचे एक को ताबीज का रुप देकर गले में धारण करें-
  9. यदि आपके बच्चे अथवा परिवार के किसी सदस्य को जल्दी-जल्दी नजर लगती हो तो आप शुक्ल पक्ष की प्रथमा तिथि को 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र(Gomati Chakra)को घर के पूजा स्थल में मां दुर्गा की तस्वीर के आगे लाल या हरे रेशमी वस्त्र पर स्थान दें -फिर रोली आदि से तिलक करके नियमित रुप से मां दुर्गा को 5 अगरबत्ती अर्पित करें अब मां दुर्गा का कोई भी मंत्र जप करें-जप के बाद अगरबत्ती के भभूत से सभी गोमती चक्रों पर तिलक करें नवमी को तीन चक्र पीड़ित पर से उसारकर दक्षिण दिशा में फेंक दें और एक चक्र को हरे वस्त्र में बांधकर ताबीज का रुप देकर मां दुर्गा की तस्वीर के चरणों से स्पर्श करवाकर पीड़ित के गले में डाल दें- बाकि बचे सभी चक्रों को पीड़ित के पुराने धुले हुए वस्त्र में बांधकर अलमारी में रख दें -
  10. यदि आपको नजर जल्दी लगती हो तो पाँच गोमती चक्र(Gomati Chakra)लेकर किसी सुनसान स्थान पर जायें फिर तीन चक्रों को अपने ऊपर से सात बार उसारकर अपने पीछे फेंक दें तथा पीछे देखे बिना वापस आ जायें - बाकी बचे दो चक्रों को तीव्र प्रवाह के जल में प्रवाहीत कर दें -
  11. यदि आपका बच्चा अधिक डरता हो- तो शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को हनुमान् जी के मन्दिर में जाकर एक अभिमंत्रित गोमती चक्र पर श्री हनुमानजी के दाएं कंधे के सिन्दूर से तिलक करके प्रभु के चरणों में रख दें और एक बार श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें-फिर गोमती चक्र(Gomati Chakra)उठाकर लाल कपड़े में बांधकर बच्चे के गले में डाल दें -
  12. यदि आप कितनी भी मेहनत क्यों न करें परन्तु आर्थिक समृद्धि आपसे दूर रहती हो और आप आर्थिक स्थिति से संतुष्ट न होते हों, तो शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को 21 अभिमंत्रित गोमती चक्र(Gomati Chakra)लेकर घर के पूजा स्थल में मां लक्ष्मी व श्री विष्णु की तस्वीर के समक्ष पीले रेशमी वस्त्र पर स्थान दें फिर रोली से तिलक कर प्रभु से अपने निवास में स्थायी वास करने का निवेदन तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना करके हल्दी की माला से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”मंत्र की तीन माला जप करें-इस प्रकार सवा महीने जप करने के बाद अन्तिम दिन किसी वृद्ध तथा 9 वर्ष से कम आयु की एक बच्ची को भोजन करवाकर दक्षिणा देकर विदा करें -
  13. यदि व्यवसाय में किसी कारण से आपका व्यवसाय लाभदायक स्थिति में नहीं हो तो शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को 3 गोमती चक्र, 3 कौड़ी व 3 हल्दी की गांठ को अभिमंत्रित कर किसी पीले कपड़े में बांधकर धन-स्थान पर रखें -
  14. यदि आपको अचानक आर्थिक हानि होती हो तो किसी भी मास के प्रथम सोमवार को 21 अभिमन्त्रित गोमती चक्रों(Gomati Chakra)को पीले अथवा लाल रेशमी वस्त्र में बांधकर धन रखने के स्थान पर रखकर हल्दी से तिलक करें  फिर मां लक्ष्मी का स्मरण करते हुए उस पोटली को लेकर सारे घर में घूमते हुए घर के बाहर आकर किसी निकट के मन्दिर में रख दें -
  15. यदि आप अधिक आर्थिक समृद्धि के इच्छुक हैं तो अभिमंत्रित गोमती चक्र(Gomati Chakra)और काली हल्दी को पीले कपड़े में बांधकर धन रखने के स्थान पर रखें-
  16. यदि आपके परिवार में खर्च अधिक होता है भले ही वह किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए ही क्यों न हो तो शुक्रवार को 21 अभिमन्त्रित गोमती चक्र लेकर पीले या लाल वस्त्र पर स्थान देकर धूप-दीप से पूजा करें अगले दिन उनमें से चार गोमती चक्र(Gomati Chakra)उठाकर घर के चारों कोनों में एक-एक गाड़ दें- 13 चक्रों को लाल वस्त्र में बांधकर धन रखने के स्थान पर रख दें और शेष किसी मन्दिर में अपनी समस्या निवेदन के साथ प्रभु को अर्पित कर दें -
  17. यदि आपके गुप्त शत्रु अधिक हों अथवा किसी व्यक्ति की काली नज़र आपके व्यवसाय पर लग गई हो तो 21 अभिमंत्रित गोमती चक्र(Gomati Chakra)व तीन लघु नारियल को पूजा के बाद पीले वस्त्र में बांधकर मुख्य द्वारे पर लटका दें-
  18. गोमती चक्रों को यदि चांदी अथवा किसी अन्य धातु की डिब्बी में सिंदूर तथा चावल डालकर रखें तो ये शीघ्र शुभ फल देते हैं- सात गोमती चक्रों को शुक्ल पक्ष के प्रथम अथवा दीपावली पर लाल वस्त्र में अभिमंत्रित कर पोटली बना कर धन स्थान पर रखें -
  19. व्यापार वृद्धि के लिए दो गोमती चक्र लेकर उसे बांधकर ऊपर चौखट पर लटका दें और ग्राहक उसके नीचे से निकले तो निश्चय ही व्यापार में वृद्धि होती है-
  20. धन लाभ के लिए 11 गोमती चक्र अपने पूजा स्थान में रखें- उनके सामने श्री नम: का जप करें- इससे आप जो भी कार्य या व्यवसाय करते हैं उसमें बरकत होगी और आमदनी बढऩे लगेगी-
  21. यदि बार-बार गर्भ गिर रहा हो तो दो गोमती चक्र लाल कपड़े में बांधकर कमर में बांध दें तो गर्भ गिरना बंद हो जाता है-
  22. यदि कोई कचहरी जाते समय घर के बाहर गोमती चक्र रखकर उस पर दाहिना पांव रखकर जाए तो उस दिन कोर्ट-कचहरी में सफलता प्राप्त होती है-
  23. चाँदी में जड़वाकर बच्चे के गले में पहना देने से बच्चे को नजर नहीं लगती तथा बच्चा स्वस्थ बना रहता है -
  24. यदि घर में भूत-प्रेतों का उपद्रव हो तो दो गोमती चक्र लेकर घर के मुखिया के ऊपर से घुमाकर आग में डाल दे तो घर से भूत-प्रेत का उपद्रव समाप्त हो जाता है -
  25. और भी देखे- Dhanteras-धनतेरस पर करे शंख की पूजा 

Upcharऔर प्रयोग-

29 सितंबर 2016

लड़कियों में बढ़ती पीसीओएस(PCOS) की समस्या

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समय अनुसार बहुत कुछ परिवर्तन होता है कई सालो पहले पीसीओएस(Polycystic ovary syndrome)सिर्फ 30 से 35 साल से उपर की महिलाओं को हुआ करता था लेकिन अब वक्त बदल गया और आजकल ये बीमारी युवावस्था की किशोरियों में भी होने लगी है-
लड़कियों में बढ़ती पीसीओएस(PCOS) की समस्या

पोलिसिस्‍टिक ओवरी सिंड्रोम(PCOS)क्या है-


1- जब सेक्स हार्मोन में बदलाव होता है तो ये Polycystic ovary syndrome (PCO's ) होता है इसका असर मासिक चक्र पे पड़ता है ओवरी(Overy )में एक छोटा सा Ulcers बन जाता है और अगर इस समस्या पे ध्यान नहीं दिया जाता है ओवरी और प्रजनन छमता पे इसका असर सीधा देखने को मिलता है कभी-कभी तो ये Cancer में परिवर्तित हो जाती  है -

लड़कियों में बढ़ती पीसीओएस(PCOS) की समस्या

2- पुरुष और महिलाओं दोनों में ही सामान रूप Reproductive Hormones बनते है Androjens Hormone पुरुषो में बनता है परन्तु PCO's ग्रस्त महिलाओं की Overy में सामान्य से जादा हारमोन बनते है ये घातक हो जाती है जब ये छोटी-छोटी थैली के आकार रचनाये होती है इनमे एक Liquid substance होता है-जहाँ Overy में ये Cyst बनते है तो इनका आकार बढ़ता जाता है -

3- यही स्थिति Polycystic ovary syndrome कहलाती है तब ये  महिलाए Conceive नहीं कर पाती है इसके कुछ Symptoms भी नजर आते है जैसे-Irregular menstruation (अनियमित माहवारी) ,Having acne(मुंहासे होना),Lack of sexual desire(यौन इच्छा की कमी),चेहरे पर बाल उगना,गर्भधारण में मुश्किल आदि समस्या नजर आती है-छोटी उम्र में PCO's होने के कारण पे भी एक नजर डाले -

4- अधिक मीठा ,जंक फ़ूड ,पीजा और बर्गर ,तैलीय आदि आपके शरीर को नुकसान पहुचाते है इसलिए अपने खाने में महिलाओं को हरी पत्ते-दार सब्जी ,दाले,फल ,सलाद आदि अवस्य खाना चाहिए -

लड़कियों में बढ़ती पीसीओएस(PCOS) की समस्या

5- आप सभी जानते है कि मोटापा हर मर्ज में परेशानी का कारण बनता है-ज्यादा वसा युक्त भोजन, व्यायाम की कमी और जंक फूड का सेवन तेजी से वजन बढ़ाता है अत्यधिक चर्बी से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा में बढ़ोतरी होती है जो ओवरी में सिस्ट बनाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है इसलिए वजन घटाने से इस बीमारी को बहुत हद तक काबू में किया जा सकता है-जो महिलाएं बीमारी होने के बावजूद अपना वजन घटा लेती हैं, उनकी ओवरीज में वापस अंडे बनना शुरू हो जाते हैं-

आपकी लाइफस्‍टाइल-

आप सबसे पहले अपनी दिनचर्या को दुरुस्त करे तभी PCO's को सही कर सकती है क्युकि बनने वाला हार्मोन सही हो गया तो PCO's अपने आप ठीक हो जाता है व्यायाम पे ध्यान दे अपनी डाईट का सही पैमाना बनाए तभी इसमें सुधार होगा-

जो महिलाए या लडकियां आफिस में काम करती है उनको मानसिक तनाव से बचना चाहिए तनाव और काम के बोझ से वो अपने खाने-पीने का ध्यान नहीं रखती है लेट नाईट पार्टी और ड्रिंक ,स्मोकिंग को तो अपनी लाइफ स्टाइल से बाय-बाय कहना ही उचित है -

Upcharऔर प्रयोग-

रसाहार Rsahar को जीवन में शामिल करे

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Rsahar-रसाहार से न केवल आवश्यक शक्तियां ही प्राप्त होती हैं वरन शरीर की रोगों के प्रतिरोध की क्षमता भी कई गुना बढ़ जाती है आज विज्ञान भी इस सत्य को मानने लगा है कि रसाहार(Rsahar)से हम अपने जीवन में आई हुई कमजोरी के साथ रोगों पर भी विजय प्राप्त कर सकते है-

रसाहार Rsahar


रसाहार(Rsahar)के लिये फल,सब्जी या अंकुरित अनाज आदि खाद्यों को बस पूर्णतया ताजा ही काम में लेंना चाहिए तथा सड़े, गले, बासी, काफी देर से कटे हुए खाद्य पदार्थ का नहीं रस न निकालें और रोगाणुओं से मुक्त आहार सामग्री का ही रस निकालें अन्यथा तीव्र संक्रमण हो सकता है-

आप रसाहार(Rsahar)कैसे लें-

पहली बात ये ध्यान रक्खे कि ताजा रस ही काम में लें-निकालकर काफी देर तक रखा हुआ रस न लें-रखे रस में एन्जाइम सक्रियता, थायमिन, रिबोफ्लेविन, एस्कार्बिक एसिड आदि उपयोगी तत्व नष्ट होने लगते हैं तथा वातावरण के कुछ हानिकारक कीटाणु रस में प्रवेश कर रस को प्रदूषित कर देते हैं ऐसा रस पीने से तीव्र प्रतिक्रिया होती है-

दूसरी बात आप रसाहार(Rsahar)बैठकर धीरे धीरे पियें-इसे प्याला या ग्लास में ही लेना चाहिय तथा ग्लास को मुंह की ओर ऐसे झुकायें कि ऊपरी होंठ रस में डूबा रहे-ऐसा करने से वायु पेट में नहीं जातीहै-

रस कैसे निकालें-

ककड़ी,लौकी,गाजर, टमाटर,अनानास, नाशपाती, आलू, सेवादि, का रस निकालने के लिये विभिन्न प्रकार की मशीनें आती हैं-संतरा,मौसम्मी,चकोतरादि नींबू कुल के फलों की अलग तरह की मशीनें आती हैं-बिजली से चलने वाली मशीनों की अपेक्षा हाथ से चलने वाली मशीनों से निकला रसाहार(Rsahar)श्रेष्ठ माना जाता है-

सब्जी को कद्दूकश से कसने के बाद या कूटकर भी रस निकाला जाता है रस निकालने के बाद बचे हुये खुज्झे को फेंके नहीं-इसे बेसन/आटे में मिलाकर रोटी बनाकर काम में लिया जा सकता है यह खुज्झा पेट की सफाई कर कब्ज को दूर करता है-

कब किस रोग के लिए क्या रसाहार(Rsahar)ले-

  1. कब्ज(Constipation)सारे रोगों की जननी है कब्ज होने पर सब्जी तथा फलों को मूल रूप में ही खायें तथा गाजर, पालक,टमाटर, आंवला, लौकी, ककड़ी, 6 घंटे पूर्व भीगा हुआ किशमिश, मुनक्का,अंजीर, गेहूंपौध, करेला, पपीता, संतरा, आलू, नाशपाती, सेव तथा बिल्व का रस लें- 
  2. अजीर्ण अपचन(Indigestion)के लिए भोजन के आधे घंटे पहले आधी चम्मच अदरक का रस लें या अनानास, ककड़ी, संतरा, गाजर, चुकन्दर का रस लेना चाहिए-
  3. उल्टी(Vomiting)मिचली में नींबू, अनार, अनानास, टमाटर ,संतरा, गाजर, चुकन्दर का रस ले सकते है-
  4. एसीडिटी(Acidity)के होने पर पत्ता गोभी+गाजर का रस या ककड़ी, लौकी, सेव, मौसम्मी, तरबूज, पेठे का रस, चित्तीदार केला, आलू, पपीता आदि का भी रस लें-
  5. एक्यूट एसीडीटी(Acute Hyperacidity) होने पर ठंडा दूध या गाजर रस लिया जा सकता है-
  6. बार- बार दस्त(Diarrhea) होने पर बिल्व फल का रस या लौकी, ककड़ी, गाजर का रस या डेढ़ चम्मच ईसबगोल की भुस्सी या छाछ या ईसबगोल की भूसी आदि ले सकते है-
  7. पीलिया(Jaundice)में करेला, संतरा, मौसम्मी, गन्ना, अनानास, चकोतरा का रस,पपीता, कच्ची हल्दी, शहद, मूली के पत्ते, पालक तथा मूली का रस लेना चाहिए-
  8. यदि मधुमेह(Diabetes)की शिकायत है तो जामुन, टमाटर, करेला, बिल्वपत्र, नीम के पत्ते, गाजर पालक टमाटर, पत्ता गोभी का रस लेना लाभदायक है-
  9. पथरी(Stone)होने पर सेव, मूली व पालक, गाजर, इमली, टमाटर का रस लें-फल एवं सब्जियों के नन्हें बीजबिलकुल भी न लें-
  10. गुर्दे के रोग(Kidney disease)में तरबूज, फालसा, करेला, ककड़ी, लौकी, चुकन्दर, गाजर, अनानास, अंगूरादि खट्टे फलों का रस, इमली, टमाटर आदि लें-
  11. किसी भी प्रकार के गले का रोग(Throat diseases)में गर्मपानी या गर्मपानी+एक नींबू शहद या अनानास,गाजर चुकन्दर पालक, अमरूद प्याज लहसुन का रस ले-
  12. खांसी(Cough)में गर्म पानी, एक नींबू रस शहद, गाजर रस, लहसुन, अदरक, प्याज, तुलसी का रस मात्र 50 सी.सी. लें-
  13. अनिद्रा(Insomnia)रोगी को सेव, अमरूद, लौकी, आलू,गाजर पालक, सलाद के पत्ते, प्याज का रस लेना लाभदायक है-
  14. यदि आपको मुंहासे(Acne)जादा है तो गाजर पालक, आलू गाजर चुकन्दर अंगूर, पालक टमाटर, ककड़ी का रस ले-
  15. जिन लोगो को रक्तहीनता(Anemia)की शिकायत होती है उनके लिए पालकादि पत्ते वाली सब्जियों, टमाटर, आंवला, रिजका, चुकन्दर, दूर्वा, पत्ता गोभी, करेला, अंगूर, खुरबानी, भीगा किशमिश, मुन्नका का रस आदि काफी लाभदायक है-
  16. मुंह के छाले(Mouth ulcers)होने पर चौलाई, पत्तागोभी, पालक, टमाटर,ककड़ी व गाजर का रस लें-
  17. उच्च रक्तचाप(High Blood pressure)में प्याज, ककड़ी, टमाटर, संतरा, लौकी, सोयाबीन का दही, गाय की छाछ, गाजर व मौसम्मी का रस फायदेमंद है-
  18. जो लोग अपना वजन वृद्धि(Weight gain)करना चाहते है उनको अनानास, पपीता, केला, दूध, संतरा, आम आदि अधिक कैलोरी वाले मीठे फलों का रस लेना चाहिए-
  19. वजन कम(Weight loss)करने हेतु आपको तरबूज, ककड़ी, लौकी, पालक, पेठा, टमाटर, खीरा आदि कम कैलोरी वाली सब्जियों का रस लेना चाहिए-
Upcharऔर प्रयोग-

आप छुटकारा पायें फटी एडियों से

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बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जिनकी गर्मी हो या सर्दी सालभर उनकी एडिया(Heels)फटी ही रहती हैं ऐसा पाचनशक्ति के कमजोर होने से भी होता है इसलिए जरूरी है कि आप अपने आहार में विटामिन सी युक्त चीजें जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, संतरे, पपीता, ब्रोकली और टमाटर आदि खाएं और रोजाना सुबह हरी घास पर नंगे पांव भी चलने की आदत डालें-

आप छुटकारा पायें फटी एडियों से

ये प्रयोग भी आजमायें-


1- नहाने के बाद या सोने से पहले नाभि में सरसों का तेल लगना चाहिए इसके बाद 20-25 बार नाभि को मलना चाहिए तथा गर्म पानी में पैरों को डालकर भी आप डेड स्किन को हटा सकते हैं- 

2- सोने से पहले ग्लिसरीन,गुलाबजल और जैतून के तेल को बाराबर मात्रा में मिला लें अब इस तेल से तलवों और एडियों(Heels)की मालिश करें-ऎसा रोजाना करने से लाभ होता है-

3- हरी मुलायम घास और नीम के 10 से 12 पत्ते पीसकर तलवों में अच्छी तरह से लगाएं तथा आधे घंटे बाद धो लें-

4- रात में सोने से पहले पैरों को धोकर ऑलिव ऑयल, नारियल तेल या सरसो के तेल से मसाज करें और मसाज के बाद सूती मोजे पहनकर सोए-मसाज-दो दिनों में ही आप फर्क महसूस करने लगेंगें-

5- आप गर्म पानी में नींबू को निचोड़ लें अब इस पानी में पैरों को 10-15 मिनट रखें और फिर प्यूमिक स्टोन से एडियों को साफ करें- प्यूमिक स्टोन आपको बाजार में कास्मेटिक स्टोर से मिल जाएगा-

6- नीम की पत्तियों को पीस कर उसमें हल्दी पाउडर मिलाएं और एडियों पर लगाकर आधे घंटे के लिए छोड़ दें अब इसे गर्म पानी से धोकर हल्का सा तेल या माश्च्राइजर लगाएं और फर्क देखे-

7- गुलाब जल और ग्लीसरिन को बराबर मात्रा में मिलाएं और इसे रोज सोने से पहले पैरों पर लगाएं-एडियां(Heels) नहीं फटेंगी-

8- चावल के आटे में शहद और विनेगर मिलाकर पेस्ट बनाए और अगर एडियां(Heels)अधिक फटी हैं तो इसमें ऑलिव ऑयल भी मिलाए फिर पैरों को दस मिनट तक गर्म पानी में भिगोएं और फिर इस पेस्ट से मसाज करें-इससे त्वचा की मृत कोशिकाएं हटती हैं-

Upcharऔर प्रयोग-

Bermudagrass-दूर्वा घास के बारे में जान कर चौंक जायेगें

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कहा जाता है कि समुद्र-मंथन के समय जब देवतागण अम्रत-कलश को ले कर जा रहे थे तो अम्रत-कलश से छलक कर कुछ बूंद प्रथ्वी के दूर्वाघास(Bermudagrass)पर गिर गई थी इसलिए Bermudagrass-दूर्वा घास अमर हो गई-यदि दूर्वा घास(Bermudagrass)को बारह साल आप उखाड़ के  अलग रख दे और बारह साल बाद भी अगर मिटटी में लगा दे तो भी ये पुनर्जीवित हो  जाती  है जबकि और किसी भी वनस्पति में ऐसा नहीं है दूर्वाघास का वनस्पति नाम Cynodon dactylon है-

Bermudagrass


भगवान् कृष्ण ने भी गीता में कहा है जो भी भक्ति के साथ एक दूर्वाघास(Bermudagrass)की पत्ती एक फूल,एक फल,या पानी के साथ मेरी पूजा करता है में उसे दिल से स्वीकार करता हूँ -

यह दूर्वा घास(Bermudagrass)बारहमासी है और तेजी से बढ़ता है गहरे हरे रंग की होती है इस घास को पूरी तरह उखाड़ लेने के बाद भी वापस जल्दी ही दुबारा उग आती है-इस तरह इसका बार-बार अंकुरित होना-जीवन के उत्थान का एक शक्तिशाली प्रतीक, नवीकरण, पुनर्जन्म और प्रजनन क्षमता को परिलक्षित करता है-

भगवान गणेश और विश्व पालक नारायण की पूजा में-दूर्वा घास तो आवश्यक तौर पर इस्तेमाल किया जाता है- लेकिन जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे हिन्दू सनातन धर्म में किसी भी परंपरा को बनाने से पीछे उसका एक ठोस वैज्ञानिक आधार हुआ करता है-और दूर्वा घास(Bermudagrass)के साथ भी यही है-

पवित्र दूर्वा घास का आध्यात्मिक और औषधीय महत्व यह प्रत्येक और प्राचीन हिंदू धर्म में हर रस्म न केवल आध्यात्मिक महत्व का है लेकिन यह भी बहुत हमारे भौतिक जीवन में महत्व है कि यह भी रहते उदाहरणों में से एक है हिंदू अनुष्ठान में प्राचीन काल से ही दूर्वा घास एक महत्व पूर्ण भूमिका निभाता है दूर्वाघास से बने छल्ले अक्सर या तो होम(हवन)की रस्म शुरू करने से पहले पहने जाते हैं -

प्रसाद के लिए आग और पूजा के लिए दूर्वाघास में किसी भी पूजा कार्य में प्रयोग होना सफाई के प्रभाव को बढ़ा देता है दूर्वा घास(Bermudagrass)भी गणेश मंदिरों में एक भेंट के रूप में प्रयोग किया जाता है विशेषकर भगवान गणेश की पूजा तो बिना दूर्वा घास के हो ही नहीं सकता है-हमारे देश भारत में दूर्वा घास को पवित्र माना जाता है क्योंकि हिन्दूओं के लगभग हर पूजा में दूर्वा घास का इस्तेमाल किया जाता है-

इन सबके अलावा दूर्वा घास का एक अलग ही पहलू है आयुर्वेदिक दवा बनाने में दूर्वा घास(Bermudagrass)का प्रयोग किया जाता है दूर्वा घास कैल्सियम,फॉस्फोरस,फाइबर,पोटाशियम और प्रोटीन का स्रोत है इसके अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी इसका योगदान अतुलनीय है-

दूर्वा घास(Bermudagrass)ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित करने में मदद करती है कई प्रकार के अनुसंधान से यह पता चला है कि दूर्वा घास में ग्लासेमिक (रक्त में शुगर और ग्लूकोज़ होना)गुण होता है यानि इसमें रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को कम करने की क्षमता होती है जिसके कारण इससे संबंधित बीमारियाँ जैसे मधुमेह से लड़ने में कुछ हद तक मदद करती है-

दूर्वाघास(Bermudagrass)शरीर में प्रतिरोधक क्षमता(इम्यून सिस्टेम)को उन्नत करने में भी सहायता करती है इसमें एंटीवायरल और एंटीमाइक्रोबायल (रोगाणुरोधी-बीमारी को रोकने की क्षमता)गुण होने के कारण यह शरीर के किसी भी बीमारी से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है-

दूर्वा घास फ्लेवनाइड का प्रधान स्रोत होता है जिसके कारण यह अल्सर को रोकने में मदद करती है यह सर्दी-खांसी के बीमारी से भी लड़ने में मदद करती है क्योंकि इसके सेवन से बलगम कम होता है-

यह मसूड़ों से रक्त बहने और मुँह से दुर्गंध निकलने की समस्या से भी राहत दिलाती है दूर्वा घास त्वचा संबंधी समस्या से भी राहत दिलाने में सहायता करती है-इसमें एन्टी-इन्फ्लैमटेरी (सूजन और जलन को कम करता है),एन्टीसेप्टिक(रोगाणु को रोकने की क्षमता)गुण होने के कारण त्वचा संबंधी कई समस्याओं जैसे-खुजली, त्वचा पर चकत्ते और एक्जिमा आदि समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करती है-

दूर्वा घास(Bermudagrass)को हल्दी के साथ पीसकर पेस्ट बनाकर त्वचा के ऊपर लगाने से त्वचा संबंधी समस्याओं से कुछ हद तक राहत मिल सकती है कुष्ठ रोग और खुजली जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी सहायता करती है-

दूर्वा घास रक्त को शुद्ध करने में अहम् भूमिका निभाती है यह रक्त की क्षारियता को बनाये रखने में मदद करती है यह लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करती है जिसके कारण हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है जब किसी दुर्घटना के कारण, अत्यधिक मासिक स्राव या नाक से रक्त बहने के कारण रक्त की कमी हो जाती है तो यह उस कमी को पूरा करने में मदद करती है-

दूर्वा घास हृदय के स्वास्थ्य को उन्नत करने में भी मदद करती है क्योंकि यह रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में अहम् भूमिका निभाती है-

दूर्वा घास महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं-विशेषकर यू.टी.आई-यूरेनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (मूत्र मार्ग संक्रमण) के उपचार में प्रभावकारी रूप से काम करती है-

महिलाओं में बवासीर और सफ़ेद योनि स्राव जैसी समस्याएं आम होती हैं,इससे राहत पाने के लिए दही के साथ दूर्वा घास को मिलाकर खा सकते हैं जो माँ बच्चों को दूध पिला रही हैं उनके लिए भी लाभकारी होता है क्योंकि यह प्रोलेक्टिन हॉर्मोन को उन्नत करने में भी मदद करती है तथा साथ ही पी.सी.ओ.एस. यानि पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (सेक्स हॉर्मोन में असंतुलन) के खतरे को कम करने में भी प्राकृतिक रूप से सहायता करती है-

दूर्वा घास(Bermudagrass)पेट संबंधी समस्या में भी अहम् भूमिका निभाती है अनियोजित जीवनशैली के कारण हजम की समस्या भी आम बन गई है लेकिन दूर्वा घास के लगातार सेवन से पेट की बीमारी का खतरा कुछ हद तक कम होने के साथ हजम शक्ति को भी उन्नत करती है कब्ज़ से राहत दिलाने में भी मदद करती है।यह प्राकृतिक रूप से शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करती है और एसिडटी से भी राहत दिलाती है-

दूर्वा घास पौष्टिकता से भरपूर होने के कारण शरीर को सक्रिय और ऊर्जायुक्त बनाये रखने में बहुत सहायता करती है यह अनिद्रा रोग, थकान, तनाव जैसे रोगों में प्राकृतिक उपचार के रूप में प्रभावकारी साबित हुआ है इसके नियमित सेवन से शरीर और मन में नया जीवन लौट आता है-

Upcharऔर प्रयोग-

चिरचिटा-अपामार्ग हर बीमारी भगायें

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अपामार्ग(Chaff Tree)का पौधा भारत के सभी सूखे क्षेत्रों में उत्पन्न होता है यह गांवों में अधिक मिलता है खेतों के आसपास घास के साथ आमतौर पाया जाता है इसे बोलचाल की भाषा में आंधीझाड़ा या चिरचिटा(Chaff Tree)भी कहते हैं-अपामार्ग की ऊंचाई लगभग 60 से 120 सेमी होती है आमतौर पर लाल और सफेद दो प्रकार के अपामार्ग देखने को मिलते हैं-सफेद अपामार्ग के डंठल व पत्ते हरे रंग के, भूरे और सफेद रंग के दाग युक्त होते हैं इसके अलावा फल चपटे होते हैं जबकि लाल अपामार्ग(RedChaff Tree)का डंठल लाल रंग का और पत्तों पर लाल-लाल रंग के दाग होते हैं-

चिरचिटा-अपामार्ग हर बीमारी भगायें

इस पर बीज नुकीले कांटे के समान लगते है इसके फल चपटे और कुछ गोल होते हैं दोनों प्रकार के अपामार्ग के गुणों में समानता होती है फिर भी सफेद अपामार्ग(White chaff tree) श्रेष्ठ माना जाता है इनके पत्ते गोलाई लिए हुए 1 से 5 इंच लंबे होते हैं चौड़ाई आधे इंच से ढाई इंच तक होती है- पुष्प मंजरी की लंबाई लगभग एक फुट होती है, जिस पर फूल लगते हैं, फल शीतकाल में लगते हैं और गर्मी में पककर सूख जाते हैं इनमें से चावल के दानों के समान बीज निकलते हैं इसका पौधा वर्षा ऋतु में पैदा होकर गर्मी में सूख जाता है-

आपमार्ग(Chaff Tree)के प्रयोग-


गुर्दे की पथरी(Kidney stone)-

लगभग 1 से 3 ग्राम चिरचिटा के पंचांग का क्षार बकरी के दूध के साथ दिन में दो बार लेते हैं इससे गुर्दे की पथरी(Kidney stone) गलकर नष्ट हो जाती है-

खूनी बवासीर(Emerods)-

चिरचिटा की 25 ग्राम जड़ों को चावल के पानी में पीसकर बकरी के दूध के साथ दिन में तीन बार लेने से खूनी बवासीर(Emerods)ठीक हो जाती है-

कुष्ठ(Leprosy)-

चिरचिटा के पंचांग का काढ़ा लगभग 14 से 28 मिलीलीटर दिन में तीन बार प्रतिदिन सेवन करने से कुष्ठ(Leprosy)रोग कुछ दिनों में ठीक हो जाता है-

हैजा(Cholera)-

चिरचिटा की जड़ों को 3 से 6 ग्राम तक की मात्रा में बारीक पीसकर दिन में तीन बार देने से हैजा(Cholera) में लाभ मिलता है-

शारीरिक दर्द(Physical pain)-

चिरचिटा की लगभग 1 से 3 ग्राम पंचांग का क्षार नींबू के रस में या शहद के साथ दिन में तीन बार देने से शारीरिक दर्द(Physical pain) में लाभ मिलता है-

तृतीयक बुखार(Typhoid fever)-

चिरचिटा(अपामार्ग या ओंगा)की जड़ को लाल रंग के 7 धागों में रविवार के दिन लपेटकर रोगी चिरचिटा की कमर में बांध देने से तिजारी बुखार(Typhoid fever) चला जाता है-

खांसी(Cough)-

चिरचिटा को जलाकर, छानकर उसमें उसके बराबर वजन की चीनी मिलाकर 1 चुटकी दवा मां के दूध के साथ रोगी को देने से खांसी बंद हो जाती है-

आंवयुक्त दस्त(Dysentery diarrhea)-

अजाझाड़े (चिरचिटा) के कोमल के पत्तों को मिश्री के साथ मिलाकर अच्छी तरह पीसकर मक्खन के साथ धीमी आग पर रखे जब यह गाढ़ा हो जाये तब इसको खाने से ऑवयुक्त दस्त में लाभ मिलता है-

बवासीर(Hemorrhoids)-

250 ग्राम चिरचिड़ा का रस, 50 ग्राम लहसुन का रस, 50 ग्राम प्याज का रस और 125 ग्राम सरसों का तेल इन सबको मिलाकर आग पर पकायें और पके हुए रस में 6 ग्राम मैनसिल को पीसकर डालें और 20 ग्राम मोम डालकर महीन मलहम (पेस्ट) बनायें अब इस मलहम को मस्सों पर लगाकर पान या धतूरे का पत्ता ऊपर से चिपकाने से बवासीर के मस्से सूखकर ठीक हो जाते हैं-

चिरचिटा के पत्तों के रस में 5-6 काली मिर्च पीसकर पानी के साथ पीने से बवासीर में आराम मिलता है-

गुर्दे के रोग(Kidney disease)-

5 ग्राम से 10 ग्राम चिरचिटा की जड़ का काढ़ा 1 से 50 ग्राम सुबह-शाम मुलेठी, गोखरू और पाठा के साथ खाने से गुर्दे की पथरी खत्म हो जाती है इसकी क्षार अगर भेड़ के पेशाब के साथ खायें तो गुर्दे की पथरी में ज्यादा लाभ होता है-

पक्षाघात-लकवा(Paralysis)-

एक ग्राम कालीमिर्च के साथ चिरचिटा की जड़ को दूध में पीसकर नाक में टपकाने से लकवा या पक्षाघात ठीक हो जाता है-

जलोदर(Dropsy)-

अजाझाड़े (चिरचिटा) का चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथाई भाग की मात्रा में लेकर पीने से जलोदर (पेट में पानी भरना) की सूजन कम होकर समाप्त हो जाती है-

शीतपित्त(Urticaria)-

अपामार्ग(चिरचिटा) के पत्तों के रस में कपूर और चन्दन का तेल मिलाकर शरीर पर मालिश करने से शीतपित्त की खुजली और जलन खत्म होती है-

घाव-व्रण(Wound)-

फोड़े की सूजन व दर्द कम करने के लिए चिरचिटा, सज्जीखार अथवा जवाखार का लेप बनाकर फोड़े पर लगाने से फोड़ा फूट जाता है जिससे दर्द व जलन में रोगी को आराम मिलता है-

उपदंश-सिफलिस(Syphilis)-

चिरचिटा की धूनी देने से उपदंश के घाव मिट जाते हैं-10 ग्राम चिरचिटा की जड़ के रस को सफेद जीरे के 8 ग्राम चूर्ण के साथ मिलाकर पीने से उपदंश में बहुत लाभ होता है-इसके साथ रोगी को मक्खन भी साथ में खिलाना चाहिए-

नाखून की खुजली(Nail itch)-

चिरचिटा के पत्तों को पीसकर रोजाना 2 से 3 बार लेप करने से नाखूनों की खुजली दूर हो जाती है-

नासूर(Ulcer)-

नासूर दूर करने के लिए चिरचिटे की पत्तियों को पानी में पीसकर रूई में लगाकर नासूर में भर दें- इससे नासूर मिट जाता है-

शरीर में सूजन(Swelling)-

लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में चिरचिटा खार, सज्जी खार और जवाखार को लेकर पानी में पीसकर सूजन वाली गांठ पर लेप की तरह से लगाने से सूजन दूर हो जाती है-

बच्चों के रोगों में लाभकारी(Children disease)-

अगर बच्चे की आंख में माता (दाने) निकल आये तो दूध में चिरमिटी को घिसकर आंख में काजल की तरह लगाएं-

बिच्छू का जहर(Poison Scorpion)-  

जिस बच्चे या औरत-आदमी के बिच्छू ने डंक मारा हो, उसे चिरचिटे की जड़ का स्पर्श करायें अथवा 2 बार दिखायें- इससे जहर उतर जाता है-

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Upcharऔर प्रयोग-

Cholesterolकोलेस्ट्रोल-रक्तचाप-मधुमेह

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आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि आज दुनियांभर में ब्लडप्रेशर 2.3 MM मरकरी की कमी दर्ज हुई है जबकि इसके विपरीत भारत में 2.4 MM मरकरी की वृधि हुई है ये विश्व स्वास्थ संगठन की रिपोर्ट है ये चिन्ता की बात है हमारे देश में 14 करोड़ से जादा स्त्री-पुरुष इस घातक रोग से ग्रसित है इसके पीछे मुख्य कारण हमारा बिगड़ता खान-पान है उच्च रक्तचाप की वजह Mental stress(मानसिक तनाव)हो सकता है क्युकि आधुनिक परिवेश में जादा से जादा धन कमाने की दौड़ में संतोष रूपी धन तो खोता ही जा रहा है यही असंतुष्टि हमारे मानसिक तनाव का आधार है और ब्लड-प्रेशर(Blood pressure)के बढ़ने का भी-

Cholesterolकोलेस्ट्रोल-रक्तचाप-मधुमेह


मानसिक तनाव(Mental stress)के कारण मनुष्य अनेक व्याधियों से भी घिरता जा रहा है उन्ही में से एक है (High blood pressure)उच्चरक्तचाप-अब ये ज्वलंत समस्या के रूप में हमारे सामने है-रक्त संवहन करने वाली धमनी में बाधा के कारण तथा अन्य कई कारणों से मानसिक तनाव ,मोटापा,गुर्दे की खराबी,शरीर के अंदर नमक का संचय,ह्रदय की विकृति,अहितकर आहार-विहार के कारण होते है-उच्च रक्तचाप में बैचेनी ,धडकनों का तेज होना,जलन,चीटियों से चलने का आभास होना आदि मुख्य लक्षण है-

रक्तचाप नाशक कुछ परीक्षित एवं अनुभूत नुस्खे जाने-


  1. सूर्योदय से पहले आठ अंजुल जल पीना चाहिए और प्रतिदिन टहलने अवश्य जाना हितकर है-
  2. प्याज का रस और शुद्ध शहद बराबर मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार 10-10 ग्राम सेवन करे -प्याज का रस कोलेस्ट्रोल(Cholesterol) को कम करता है तथा दिल के दौरे को भी रोकता है स्नायुतंत्र(nerve fibers) को बल प्रदान करता है-
  3. तरबूज के बीज और खसखस बराबर की मात्रा में पीसकर रख ले -इसमें से 3-3 ग्राम की मात्रा प्रात:काल खाली पेट सेवन करे इससे कोलेस्ट्रोल पिघलता है और उच्च-रक्तचाप नियंत्रित रहता है -
  4. मेथी दाना का चूर्ण बनाए और इसे 3-3 ग्राम की मात्रा सुबह खाली पेट 15 दिन ले आपको काफी लाभ मिलेगा-
  5. रक्तचाप सामान्य रहे इसके लिए जब भी आप खाना खाए खाने के बाद कच्चे लहसुन की एक या दो फांक को टुकड़े करके मुनक्का में लपेट कर खा ले इस प्रयोग से आपका रक्तचाप सामान्य ही रहेगा-
  6. अगर आप थोडा सा आलस छोड़ कर बराबर मात्रा में गेहूं और चना(Wheat and Chana) लेकर पिसवाये और बिना चोकर निकाले ही इस आंटे का सेवन करेगे तो फिर आपका ब्लड-प्रेशर सामान्य रहेगा और कब्ज से भी मुक्ति मिलेगी-पहले लोग जो मोटा अनाज खाते थे आज के लोग उनको पागल समझने की भूल कर रहे है वो आज की अपेक्षा आप लोगो से जादा स्वस्थ हुआ करते थे -अभी कुछ नहीं बिगड़ा है बाजार में थैली में बिकने वाले आटे का पिंड छोड़ दे और खुद के स्वास्थ के लिए पिसवा कर ही आंटे का सेवन शुरू कर दे -आपका पता है कब्ज कई रोगों को जन्म देता है-
  7. बाजार से असली सात पीस पांच मुखी रुद्राक्ष(Rudraksh)ले आये असली रुद्राक्ष पानी में डूब जाता है -आप इन रुद्राक्ष को रात को एक गिलास जल में डालकर रख दे और सुबह -सुबह इन रुद्राक्ष के दानो को निकालकर जल को पी ले और दूसरे दिन के लिए फिर इन्ही रुद्राक्ष को जल में डालकर रख दे -नियमित करते रहे आपका ब्लड-प्रेशर सामान्य रहेगा-
  8. नीम के दो पत्ते और चार-पांच तुलसी के पत्ते सुबह लिया करे-नाश्ता में खाली पेट पपीता एक माह खा ले रक्त चाप सामान्य हो जाएगा-
  9. आइये आपको तीन चीजो को एक साथ सामान्य रखने के लिए एक नुस्खा बताते है आपके ही घर में है -और बहुत ही सस्ती चीज है लेकिन आप उसे नियमित करे-दस से पन्द्रह ग्राम मेथी दाना रोज रात को थोड़े पानी में भिगों दे और सुबह दाना निकाल कर सिर्फ पानी को पी ले इसे आप लगातार आठ दिन करके देख ले -आपका रक्तचाप -कोलेस्ट्रोल-मोटापा-मधुमेह तीनो ही सामान्य पे आ जाएगा-
  10. एक चम्मच मिश्री और दस ग्राम किशमिश को 250 ग्राम दूध में उबाल कर लेना लाभदायक है गर्मियों में दूध की जगह पानी में डालकर ले-
  11. बादाम रोगन असली की चार-पांच बूंद रात को सोते समय नाक में डाले ये परीक्षित नुस्खा है आपका रक्त चाप सामान्य रहेगा और सिर दर्द आदि सभी नाक के रोग भी ठीक हो जायेगे-तथा दिमाग में भी ताजगी रहेगी
  12. जो लोग जादा नंगे पाँव रहते है या चलते है उनको उच्च रक्त नहीं होता है आजमा कर देख ले -उच्च-रक्तचाप रोगी को गाजर का रस फायदे मंद है -
  13. चलो गरीबों का भी एक नुस्खा बता देता हूँ जिनके पास अमीरी नुस्खे प्रयोग करने के भी पैसे नहीं है वो निराश न हो -गेहूं की बासी रोटी प्रात:काल दूध में भिगो कर खा ले उच्च-रक्तचाप सामान्य रहेगा-और डॉक्टर की फीस नहीं लगेगी-
  14. सर्दी का मौसम है तो प्रतिदिन एक कली लहसुन को छील कर खाया करे रक्तचाप सामान्य रहेगा-
  15. आंवला का स्वरस बाजार से लायें एक से दो चम्मच नित्य ले यह ह्रदय के आसपास की चर्बी हटाकर रक्त-चाप सामान्य करता है-
Upcharऔर प्रयोग-

Diabetes(मधुमेह) रोग से राहत मिलती है-

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सदाबहार ( सदाफूली ) की तीन -चार कोमल पत्तियाँ चबाकर रस चूसने से Diabetes(मधुमेह) रोग से राहत मिलती है Catharanthus Roseus सदाबहार (सदाफूली) के पौधे के चार पत्तों को साफ़ धोकर सुबह खाली पेट चबाएं और ऊपर से दो घूंट पानी पी लें इससे मधुमेह ,मिटता है  यह प्रयोग कम से कम तीन महीने तक करना चाहिए -

Diabetes(मधुमेह) रोग से राहत मिलती है-

आधे कप गरम पानी में सदाबहार(सदाफूली)के तीन ताज़े गुलाबी फूल 05 मिनिट तक भिगोकर रखें -उसके बाद फूल निकाल दें और यह पानी सुबह ख़ाली पेट पियें - यह प्रयोग 08 से 10 दिन तक करें - अपनी शुगर की जाँच कराएँ यदि कम आती है तो एक सप्ताह बाद यह प्रयोग पुनः दोहराएँ -

मधुमेह को नियंत्रण करने के कुछ आसन से घरेलू उपाय-


  1. तुलसी के पत्तों में ऐन्टीआक्सिडन्ट और ज़रूरी तेल होते हैं जो इनसुलिन के लिये सहायक होते है - इसलिए शुगर लेवल को कम करने के लिए दो से तीन तुलसी के पत्ते को प्रतिदिन खाली पेट लें, या एक टेबलस्पून तुलसी के पत्ते का जूस लें-
  2. 10 मिग्रा आंवले के जूस को 2 ग्राम हल्दी के पावडर में मिला लीजिए इस घोल को दिन में दो बार लीजिए- इससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है।
  3. काले जामुन डायबिटीज के मरीजों के लिए अचूक औषधि मानी जाती है मधुमेह के रोगियों को काले नमक के साथ जामुन खाना चाहिए- इससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है-
  4. लगभग एक महीने के लिए अपने रोज़ के आहार में एक ग्राम दालचीनी का इस्तेमाल करें-
  5. इसे भी देखे-   Diabetes-मधुमेह एक माह में Removed

Blood Disorders-रक्त विकार एक घातक रोग है

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जी हाँ-खून की खराबी यानि कि रक्त विकार(Blood Disorders)भी एक घातक रोग है और यदि समय रहते इसका उपचार न किया जाए तो फिर कष्टदायी चर्म रोग घेर लेते हैं इनसे व्यक्ति के मन में हीन भावना उत्पन्न हो जाती है Blood Disorders से छुटकारा पाने के लिए सबसे पहले मिर्च, चाय, अचार, तेल, खटाई आदि का प्रयोग बंद कर देना चाहिए-तभी कोई उपचार कारगर सिद्ध होता है-

Blood Disorders-रक्त विकार एक घातक रोग है


समय से भोजन न करने,मिर्च-मसालों का अधिक प्रयोग,प्रकृति के विरुद्ध भोजन जैसे-मछली-दूध,केला-करेला, दही-नीबू,दही-शहद,शहद-नीबू आदि का सेवन, नाड़ी की दुर्बलता, कब्ज, अजीर्ण आदि कारणों से खून में खराबी(Blood Disorders) पैदा हो जाती है-

खून खराब(Blood Disorders)होने पर तरह-तरह के चर्म रोग हो जाते हैं-त्वचा के ददोरे,फोड़े-फुन्सी, दाद-खाज, खुजली आदि अनेक रोग बन जाते हैं-त्वचा में खुजली होती है और चकत्ते पड़ जाते हैं तथा खून नीला-सा दिखाई देने लगता है और पेट साफ नहीं रहता है खांसी एवं वायु रोग का प्रकोप भी हो जाता है-

खून की खराबी(Blood Disorders)में करे ये उपाय-

  1. सोते समय रात को गरम पानी के साथ दो हरड़ का चूर्ण लें तथा दिन में दो बार एक-एक चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी से लें-
  2. नीम की छाल,उसवा और कुटकी-इन तीनों का चूर्ण 3-3 ग्राम दिन में दो बार शहद के साथ चाटें-
  3. चोपचीनी, मंजीठ और गिलोय का चूर्ण 3-3 ग्राम फांककर ऊपर से एक गिलास दूध पी लें-
  4. सौंफ,गावजबां,गुलाब के फूल तथा मुलहठी इन सब की 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर दो कप पानी डालकर आग पर रख दें जब पानी जलकर आधा रह जाए तो छानकर उसमें मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें इससे पेट साफ हो जाएगा और साफ खून बनने की क्रिया शुरू हो जाएगी-
  5. लौकी की सब्जी बगैर नमक के उबली हुई खाने से भी खून की खराबी(Blood Disorders) दूर होती है-
  6. 10 ग्राम गुलकंद का सेवन दूध के साथ करें-
  7. नीम की छाल को पानी में घिस लें फिर उसमें कपूर मिलाकर शरीर के रोगग्रस्त भाग पर लगाएं-शरीर पर गोमूत्र मलकर थोड़ी देर तक यों ही बैठे रहें और फिर स्नान कर लें-गोमूत्र त्वचा रोगों के लिए बहुत लाभकारी है-
  8. खून की खराबी(Blood Disorders)दूर करने के लिए सरसों के तेल में लाल मिर्च को पीसकर डालें फिर यथास्थान लगाएं-
  9. अंजीर के पत्तों को पीसकर घी में मिला लें-स्नान से पूर्व शरीर पर इसकी मालिश करें-
  10. चर्म रोग वाले स्थान को दिन में तीन-चार बार फिटकिरी के पानी से धोना चाहिए-
  11. कच्चे पपीते का रस दो चम्मच सुबह के समय सेवन करें-
  12. Blood Disorders में करेले का रस एक-एक चम्मच सुबह-शाम सेवन करें तथा शरीर पर मूंगफली के तेल की मालिश करें-
  13. पानी में लहसुन का रस दो चम्मच की मात्रा में मिलाकर पिएं-
  14. मुनक्का रक्त को शुद्ध करके बढ़ाने वाला है-
  15. नारियल पानी से रक्त शुद्ध होता है-
  16. परवल के पत्तों को ओटा मधु मिलाकर पिलाने से रक्त शुद्ध होता है-
  17. वद्र्धमान पिप्पली के प्रयोग से रक्त शुद्ध होकर शरीर का मल बढ़ता है-
  18. सूखे पौदीने को पीस के फंकी लेने से रुधिर का जमना बन्द हो जाता है-
  19. भांगरे के पत्ते बलवद्र्धक और रक्तशोधन है-
  20. बकरी के कच्चे दूध में आठवां भाग मधु मिला के पिलाने से रुधिर शुद्ध हो जाता है जिन दिनों में यह प्रयोग किया जाए उन दिनों में उस रोगी को सांभर  नमक और लालमिर्च के बदले में सैन्धा नमक और कालीमिर्च देनी चाहिए-
  21. पिस्ते के तेल का सेवन करने से रक्त में जो किसी तत्व की न्यूनता होती है वह मिट जाती है-
  22. गोरखमुण्डी के पुष्पों के प्रयोग से रक्त शुद्ध होता है-
  23. सफेद मुसली रक्त शोधक, मूत्र और पुरुषार्थवद्र्धक है-
  24. रत्नजोत के पत्तों के रस में मधु मिला के पिलाने से रक्त शुद्ध होता है-
  25. एरण्ड के पत्तों को रार्इ तेल से चुपड़ अगिन पर तपा के बांधने से शरीर में  जमा हुआ रक्त बिखर जाता है-
  26. लज्जालू (छुर्इमुर्इ) सूजन रोकती है और रक्त को शुद्ध करती है-
  27. बादाम की जड़ का क्वाथ पीने से रक्त शुद्ध होता है-
  28. बिदारीकंद रक्त को शुद्ध करने वाली और दूध बढ़ाने वाली है-
  29. शरफोंका के पंचाग के क्वाथ में मधु मिलाकर पिलाने से रक्त शुद्ध होता है  तथा फोड़े-फुनिसयां ठीक होते हैं-
  30. सफेद जीरा और अनन्तमूल का क्वाथ पिलाने से रक्त शुद्ध हो जाता है-
  31. बच्चों का रुधिर शुद्ध करके निर्बलता मिटाने के लिए अन्नतमूल को दूध और  शक्कर के साथ औटा के पिलाना चाहिए-
  32. सेब खाने से शरीर पुष्ट तथा रुधिर शुद्ध होता है-
  33. वासापत्र, त्रिफला, खदिरत्वक नीम की अन्तरछाल, पटोल पत्र और गिलोय  को बराबर भाग में लेकर यवकुट कर क्वाथ बना उसमें मधु या मिश्री मिलाकर  पिएं-
  34. शतावरी मूल, चक्रमर्द मूल और बलामूल को समान मात्रा में लेकर इनका क्वाथ बनाकर (32 गुने जल में अष्टमांश शेष जल) इसमें मिश्री और इलायची मिलाकर पिलावें-
  35. शतावरी स्वरस में दुगुनी शक्कर मिलाकर शर्बत बनाएं फिर उसमें केसर,जायफल,जावित्री और छोटी इलायची चूर्ण मिलाकर (शर्बत 40 मि.ली., चूर्ण 50 मि.ग्रा.) 42 दिनों तक पीने से रक्त विकृति जन्यविष मूत्र द्वारा बाहर  निकल जाता है और रक्तशुद्धि हो जाती है शर्बत में दूध या पानी भी मिलाया जा सकता है-
  36. शालपर्णी की जड़ और पत्तों का काढ़ा कालीमिर्च के साथ रक्त विकार शामक  है-
  37. श्वेत सरिता, कृष्ण सरिता, माषपर्णी, मुग्दपर्णी, इलायची, लवंग, कचूर इनका  क्वाथ बनाकर इस क्वाथ में अमलतास के गूदे का चूर्ण मिलाकर सेवन करने   से प्राय: सभी प्रकार के रक्त विकार मिटते हैं-
  38. सरिवा(अनन्त मूल), सुगन्धबाला, नागरमोथा, सौंठ, कुटकी सम मात्रा में चूर्ण  करके 2-3 ग्राम पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है-
  39. जटामांसी को घोट छानकर मधु मिलाकर पीने से रक्त शुद्ध होता है-
  40. गाय के गोबर को निचोड़कर उसके पानी से शरीर की मालिश करें-
  41. परवल पाचक,गरम,स्वादिष्ट,ह्वदय के लिए हितकर,वीर्यवर्धक,जठराग्निवर्धक,पौष्टिक,विकृत कफ को बाहर निकालने वाला और त्रिदोष नाशक है तथा यह सर्दी, खाँसी, बुखार, कृमि, रक्तदोष, जीर्ण ज्वर, पित्त के ज्वर और रक्ताल्पता को दूर करता है परवल दो प्रकार के होते हैं-मीठे और कड़वे-सब्जी के लिए सदैव मीठे, कोमल बीजवाले और सफेद गूदेवाले परवल का उपयोग किया जाता है जो परवल ऊपर से पीले तथा कड़क हो जाते हैं वे अच्छे नहीं माने जाते है रक्त-विकार में परवल का अधिक उपयोग करे-
  42. इसे भी देखे- 
  43. Nasal-Skin Allergy-नाक-त्वचा की एलर्जी का Treatment
Upcharऔर प्रयोग-

28 सितंबर 2016

Lakshmi-लक्ष्मी और Annapurna-अन्नपूर्णा को कैसे प्रसन्न रक्खें

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परम्परागत परम्पराए और नियम जो हमारे ऋषि-मुनियों ने हमारे लिए बताई है वो आज भी कई घरो में उनका नियम पूर्वक पालन होता है और ये परम्पराये हमारे जीवन में आज भी उतनी ही फलदाई है लेकिन आज के इस दौर में आपा-धापी में हम इनको भूलते जा रहे है और अधिक लक्ष्मी(Lakshmi)अर्जित करने के बाद भी परेशानियों से घिरे है-

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पहले घर में एक आँगन या चौपाल हुआ करता था जहाँ रोज शाम को घर के बूढ़े-बुजुर्ग बैठा करते थे और हमें अपनी पुरानी परम्पराओं से हमें अवगत कराते थे लेकिन आज पारिवारिक विघटन के कारण हम उनसे दूर होते जा रहे है और उनके द्वारा बताये सन्मार्ग और परम्पराओं से विहीन हो रहे है-

पैसा आप अर्जित कर तो लेते है लेकिन क्या आप उसका पूर्ण लाभ और संतुष्टता ले पा रहे है आता तो खूब है लेकिन जाने का रास्ता पहले बना के आता है अगर आप चाहते है कि माता लक्ष्मी(Lakshmi)की कृपा और अन्नपूर्णा(Annapurna)की कृपा आप पे सदैव बनी रहे तो करे ये उपाय-

क्या करे-

आप देर रात जागते है इसलिए सुबह आपकी नींद नहीं खुलती है जबकि ये बीमारियों के साथ-साथ आपको आलसी भी बना देती है प्रात:काल की मधुर वेला की चलने वाली पवन से आप दूर हो रहे है जो स्वास्थ के लिए अनिवार्य है और आपकी उम्र दिनों-दिन घटती जा रही है इसलिए सुबह उठने की आदत डाले कुछ देर टहले और हो सके तो घर में भजन या देवी-देवताओं का भजन इत्यादि सुने न कि टी वी पे ऊंटपटांग गाने सुने कानो से सुना हुआ मन्त्र या भजन आपकी प्रवर्ती को निर्मल बनाता है बुरे विचारों से मुक्ति होती है-वैसे आप किसी की बात सुनते ही कहाँ है करते जो अपने मन की है-

सुबह उठते से सबसे पहले अपनी हथेलियों का दर्शन करना चाहिए-बिस्तर से नीचे भूमि पर पैर रखने से पहले धरती माता से पैर लगाने के लिए क्षमा मांगनी चाहिए-ये शास्त्रोक्त विधान है धरती हमारी माँ है जो हमारा सब कुछ वहन करते हुए भी सभी कुछ प्रदान करती है-लेकिन पढ़े लिखे ग्यानी पुरुषों के लिए शायद ये ज्ञान एक अंधविश्वास ही समझ आएगा-

सुबह-सुबह घर की महिलाए जब भी सूर्य उदय से पहले झाड़ू लगाए तो ध्यान रक्खे कि झाड़ू को कभी भी पैर नहीं लगाना चाहिए हमेशा झाड़ू लगाने के बाद झाड़ू को छिपा के रक्खे और झाड़ू को कभी भी खड़ा न रक्खे और न ही झाड़ू के ऊपर से निकले-झाड़ू के बारे में जो लोग इन बातो का पालन नहीं करते है माँ लक्ष्मी(Lakshmi)की कृपा उनसे दूर होती है-

झाड़ू को लक्ष्मी(Lakshmi)का रूप माना जाता है-जब यह घर की गंदगी, धूल-मिट्टी साफ करती है तो इसका मतलब यही है कि देवी महालक्ष्मी हमारे घर से दरिद्रता को बाहर निकाल देती है-जिस प्रकार धन को छुपाकर रखते हैं उसी प्रकार झाड़ू को भी घर में आने जाने वालों की नज़रों से दूर रखें-वास्तु विज्ञान के अनुसार जो लोग झाड़ू के लिए एक नियत स्थान बनाने की बजाय कहीं भी रख देते हैं-उनके घर में धन का आगमन प्रभावित होता है-इससे आय और व्यय में असंतुलन बना रहता है-आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है- झाड़ू को आप कभी भी भूल कर न जलाए वर्ना माँ लक्ष्मी(Lakshmi)की कृपा आप से रूठ जायेगी-हम जानते है इस ज्ञान को भी आजकल के संस्कारी युवक अंधविश्वास ही कहेगे-

झाड़ू लगाने के बाद जो महिलाए घर में पोछा लगाती है उनको पानी में सेंधा नमक मिला लेना चाहिए फिर आप पोछा लगाए ये एंटी-बैक्टिरियल के साथ-साथ आपके घर की सभी नकारात्मक उर्जा को समाप्त कर देता है और सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ोतरी होती है-

प्रतिदिन घर के पुरुष या महिलाओं को सुबह-सुबह आठ बजे से पहले पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंख करके नित्य की पूजा संपन्न कर लेनी चाहिए-भूमि पर बैठ कर पूजन नहीं करे जब भी पूजन करे अपने नीचे आसन अवस्य बिछाए-क्युकि हमारे शरीर की उर्जा भूमि में प्रवेश न करे-ध्यान से हमें जो उर्जा प्राप्त होती है वो भूमि में समाहित हो जाती है-आसन यदि कुश का हो तो उत्तम है कुश का आसन कभी भी अपवित्र नहीं होता -

आप पूजन करते समय साथ में जल का एक कलश भर कर रक्खे-कलश का भी विधिवत पूजन करें-देवी-देवताओं की प्रतिमा के साथ ही कलश पूजन करने पर आपको श्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है-

पूजन करते समय ध्यान रखें कि आरती या दीपक या अगरबत्ती-माचिस की तीली-मोमबत्ती आदि अग्नि से संबंधित चीजें मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाना चाहिए-ये अग्नि देवता का अपमान है -जब भी पूजा करे पूजा में प्रयुक्त होने वाली धूप या हवन सामग्री या अगरबत्ती आदि को दक्षिण-पूर्व दिशा में ही रक्खे-घर के मुख्य-द्वार पर सीधे हाथ से स्वास्तिक अवस्य बनाए-स्वास्तिक बुरी नजर से बचाने के साथ-साथ श्री गणेश और साथ सभी देवताओं की कृपा बनी रहती है -

पढ़े-लिखे लोगो ने बहुत सी चीजो को मानने से इनकार किया है लेकिन तर्क और वितर्क से कुछ बातो को नकारा नहीं जा सकता है-लोग घरो में जूते-चप्पल को अव्यवस्थित रूप से इधर उधर रखते है जबकि हमेशा उनको व्यवस्थित ढंग से ही रखना चाहिए वहां अशांति का वास होता है दक्षिण में आंध्र-तेलंगाना के लोग जूते-चप्पल को कमरे से बाहर भी व्यवस्थित रूप से रखते है इसका वैज्ञानिक कारण भी है कि बाहर की धूल-मिटटी और वैक्टीरिया आदि बाहर ही रखना चाहिए और नकारात्मक उर्जा का प्रवेश भी नहीं होता है-

फैशन के दौर में लोग बेड पे खाने लगे है जो लोग नहीं जानते उनको बताना चाहता हूँ कि शैया को शवासन माना गया है इसलिए चारपाई या बिस्तर पे खाना अन्नपूर्णा(Annapurna)का अपमान है आगे चल कर आपको मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है बुरे स्वप्न या नींद में कमी हो सकती है=

भोजन भूमि पे जब भी करेगे आपका मन-प्रसन्न रहेगा आप सिर्फ एक माह करके देखे क्या आनंद मिलेगा और कितनी आत्मिक शान्ति-रोग-मुक्ति भी-भोजन को एक पट्टे के उपर रख के भोजन करे इससे अन्नपूर्णा(Annapurna)का सम्मान होता है और घर में बरकत भी होगी-यदि आपके स्टेट्स सिम्बल में कोई परेशानी न हो-

घर की महिलाए जब भी सुबह-शाम रोटी बनाएं तो पहली रोटी गाय के लिए निकालना चाहिए और अंतिम रोटी कुत्ते के लिए निकालें-जिन घरों में हर रोज यह काम किया जाता है-वहां देवी-देवताओं के साथ ही पितर देवता की भी कृपा बनी रहती है-

एक बात का विशेष ध्यान रक्खे कि आपके घर में अगर कही भी किसी भी कोने में मकड़ी के जले गंदगी या धूल-मिटटी है तो कृपा करके तुरंत ही हटाये वर्ना घर की समृद्धि नहीं रहेगी और आपको पूर्ण सुख नहीं प्राप्त होता है -

हर रोज सुबह-सुबह सूर्य की किरणें घर में आती है तो यह बहुत ही शुभ होता है ऐसा होने पर घर के कई वास्तु दोष दूर होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है-

यदि आप अपने जीवन में छोटी-छोटी बातो का ख्याल रखते है तो निश्चित रूप से माँ लक्ष्मी(Lakshmi))एवं माँ अन्नपूर्णा(Annapurna) का वास आपके घर में होगा और सुख-शान्ति का आगमन होगा -रोगों से मुक्ति होगी-
इसे भी देखे-

Upcharऔर प्रयोग-

27 सितंबर 2016

Urinary Disorders-मूत्रविकार-जलन Urine-पेशाब रुक जाना

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मूत्र विकार(Urinary Disorders)के अंतर्गत कई रोग आते हैं जिनमें मूत्र(Urine)की जलन, मूत्र रुक जाना, मूत्र रुक-रुककर आना, मूत्रकृच्छ और बहुमूत्र प्रमुख हैं और यह सभी रोग बड़े कष्टदायी होते हैं यदि इनका यथाशीघ्र उपचार न किया जाए तो घातक परिणाम भुगतने पड़ते हैं यदि मूत्राशय में पेशाब(Urine)इकट्ठा होने के बाद किसी रुकावट की वजह से बाहर न निकले तो उसे मूत्रावरोध(Urinary Disorders)कहते हैं-

Urinary Disorders


स्त्रियों में किसी बाहरी चीज के कारण तथा पुरुषों में सूजाक, गरमी आदि से मूत्राशय एवं मूत्र मार्ग पर दबाव पड़ता है जिससे पेशाब(Urine)रुक जाता है तथा वृद्ध पुरुषों की पौरुष ग्रंथि(Prostate Gland)बढ़ जाती है जिसके कारण उनका पेशाब(Urine)रुक जाता है-मूत्रकृच्छ में पेशाब करते समय दर्द होता है जब मूत्राशय में दर्द उत्पन्न होता है तो Urine रुक जाता है और इसी प्रकार हिस्टीरिया (स्त्री रोग), चिन्ता, सिर में चोट लग जाना, आमाशय का विकार, खराब पीना, आतशक, कब्ज, पौष्टिक भोजन की कमी आदि के कारण भी बार-बार पेशाब आता है-

पेशाब की कमी या न निकलने से मूत्राशय फूल जाता है और रोगी को बड़ी बेचैनी होती है तब पेशाब बड़े कष्ट के साथ बूंद-बूंद करके निकलता है-कब्ज, मन्दाग्नि, अधिक प्यास, पेशाब अधिक आने, मूत्र पीला होने आदि के कारण रोगी को नींद नहीं आती है और वह दिन- प्रतिदिन कमजोर होता जाता है तथा कमर, जांघों तथा पिंडलियों में दर्द होता है-

करे ये प्रयोग-

  1. मक्के के भुट्टे(कच्ची मक्का)को पानी उबाल लें फिर लगभग एक गिलास पानी छानकर उसमें मिश्री मिलाकर पी जाएं इससे पेशाब(Urine)की जलन जाती रहती है-
  2. पेशाब की जलन(Dysuria)दूर करने के लिए रात में तरबूज को ओस में रखें तथा सुबह उसका रस निकालकर मिश्री मिलाकर पी जाएं-
  3. एक गिलास पानी में 25 ग्राम जौ उबालें और फिर उसे ठंडा करके केवल पानी को घूंट-घूंट पिएं-
  4. लगभग चार चम्मच ईसबगोल की भूसी पानी में भिगो दें फिर उसमें बूरा डालकर पी जाएं इससे पेशाब की जलन शान्त हो जाएगी-
  5. चार चम्मच फालसे के रस में काला नमक डालकर पिएं आपकी पेशाब की जलन(Dysuria) जाती रहेगी-
  6. पेशाब की जलन(Dysuria) के लिए एक कप चावल का मांड़ लेकर उसमें चीनी मिलाकर पिएं-
  7. थोड़ा-सा बथुआ पानी में उबालें फिर उसमें काला नमक, भुना जीरा, कालीमिर्च तथा जरा-सी शक्कर डालकर सेवन करें-
  8. 50 ग्राम प्याज के छोटे-छोटे टुकड़े काटें फिर एक गिलास पानी में वह प्याज उबालकर छान लें अब उसमें थोड़ी-सी चीनी डालकर सेवन करें यह मूत्र रोगी के लिए बड़ा अच्छा नुस्खा है-
  9. पेशाब की जलन(Dysuria) में एक कप अनार का शरबत सुबह नाश्ते के बाद सेवन करें-
  10. यदि पेशाब में जलन हो और खुलकर पेशाब न आए या बूंद-बूंद पेशाब हो तो पालक के एक कप रस में आधा कप नारियल का पानी मिलाकर पी जाएं-
  11. पीपल के वृक्ष की पांच कोंपलों को पानी में उबालें| जब पानी आधा रह जाए तो उसे छानकर शक्कर डालकर पी जाएं-
  12. पेशाब की जलन(Dysuria) में हरे आंवले के रस को पानी में मिलाकर पिएं आप स्वाद के लिए जरा-सी शक्कर या शहद डाल लें-
  13. कलमी शोरा दो चम्मच तथा बड़ी इलायची के दानों का चूर्ण एक चम्मच-दोनों को मिलाकर सेवन करें-
  14. Urine-पेशाब की जलन के लिए बेल के पत्तों को पानी में पीस लें तथा इसमें जरा-सी कालीमिर्च तथा दो चम्मच शहद मिलाएं और फिर घूंट-घूंट पी जाएं-
  15. प्रतिदिन सुबह एक कप गाजर के रस में नीबू निचोड़कर पिएं ये Urine-पेशाब की जलन के लिए लाभदायक है-
  16. गन्ने के ताजे रस में नीबू तथा सेंधा नमक मिलाकर पीने से मूत्र की जलन दूर होती है और मूत्र खुलकर आता है-
  17. Urine-पेशाब की जलन के लिए एक कप ककड़ी के रस में शक्कर मिलाकर सेवन करें-
  18. यदि पेशाब करते समय दर्द होता हो तो दूध में सोंठ और मिश्री मिलाकर सेवन करें-
  19. गुर्दे की खराबी के कारण यदि पेशाब बंद हो गया हो तो एक चम्मच मूली के रस में जरा सा सेंधा नमक मिलाकर पी जाएं-
  20. अगर पेशाब में रक्त आता हो तो कुलफा के साग के पत्तों का रस चार-चार चम्मच की मात्रा में दिनभर में तीन बार पिएं-
  21. यदि पेशाब में रक्त आने की शिकायत हो तो एक चम्मच दूब के रस में जरा- सी नागकेसर मिलाकर सेवन करें-
  22.  6 माशा जवाखार में गुड़ मिलाकर सेवन करें ये भी Urine-पेशाब की जलन के लिए फायदेमंद है-
  23. नीबू के बीजों को पीसकर नाभि पर लेप करने से रुका हुआ पेशाब शीघ्र आने लगता है-
  24. केले के तने का रस चार चम्मच पीने से पेशाब आ जाता है इस मात्रा से जादा न ले-
  25. Urine-पेशाब की जलन के लिए सुबह-शाम एक-एक चम्मच काले तिल चबाकर खाना चाहिए-
  26. आधा चम्मच अजवायन दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ सेवन करें-
  27. आंवले के एक चम्मच रस में एक चुटकी हल्दी तथा आधा चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें-
  28. अनन्नास की फांकों पर पीपल का चूर्ण डालकर खाएं-
  29. Urine-पेशाब की जलन के लिए मसूर की दाल सुबह पकवाकर खाली पेट पिएं-
  30. सेब खाने से बार-बार पेशाब आना कम हो जाता है-
  31. काले तिल में गुड़ मिलाकर खाने से बहुमूत्र रोग ठीक हो जाता है-
  32. दो चम्मच पालक के रस में काला नमक डालकर सेवन करें| रात को दूध में छुहारा डालकर पिएं-
  33. 1 ग्राम जावित्री तथा 5 ग्राम मिश्री को गाय के दूध के साथ लें-
  34. भुने हुए चने खाने से बार-बार पेशाब जाने की आदत रुक जाती है-
  35. 3 ग्राम खसखस के दाने थोड़े से गुड़ में मिलाकर खा जाएं-
  36. पके हुए केले को आंवले के रस के साथ सेवन करें आप पहले केला खाएं फिर ऊपर से रस पी लें-
  37. सुबह-शाम 5-5 ग्राम पिसी हल्दी को दूध के साथ लेने से बहुमूत्रता की व्याधि खत्म हो जाती है-

परहेज क्या करे-

  1. उचित समय पर पचने वाला हल्का भोजन करें और सब्जियों में लौकी, तरोई, टिण्डा, परवल, गाजर, टमाटर, पालक, मेथी, बथुआ, चौलाई, कुलफा आदि का सेवन करें-
  2. दालों में मूंग व चने की दाल खाएं-
  3. फलों में सेब, पपीता, केला, नारंगी, संतरा, ककड़ी, खरबूजा, तरबूज, चीकू आदि का प्रयोग करें-
  4. अरहर, मलका, मसूर, मोठ, लोबिया, काबुली चने आदि का सेवन न करें-
  5. गुड़, लाल मिर्च, मिठाई, तेल, खटाई, अचार, मसाले, मैथुन तथा अधिक व्यायाम से परहेज करें-
  6. और भी देखे-

Upcharऔर प्रयोग-

26 सितंबर 2016

Cannabis-भांग सिर्फ नशा ही नहीं Benifits भी है

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भारत में भांग(Cannabis)नशे और औषिधि  के रूप में प्राचीनकाल से प्रयुक्त होती आ रही है वैसे तो हिन्दुओ में एक मान्यता भी है कि भांग का पौधा "अमृत" से पैदा हुआ है तथा इसका सेवन भगवान् शिव किया करते है इसलिए इसे 'शिव-बूटी' का भी नाम दे दिया गया है अब तो अनेक शोधकर्ताओं ने भी इस पे शोध किया है और निष्कर्ष रूप में ये पाया गया है कि लम्बे अवधि तक भी इसका प्रयोग करने के उपरान्त भी इसका शरीर और मस्तिष्क पर विशेष विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है भांग(Cannabis)से ही गांजा और चरस बनती है लेकिन ये दोनों ही चीज जादा नुकसानदायक है आयुर्वेद इसे कई रोगों में प्रमाणिक औषिधि मानता है-

Cannabis-भांग सिर्फ नशा ही नहीं Benifits भी है


आइये अब जानते है आयुर्वेद में इसके क्या प्रयोग है-

1- भांग के पत्ते को जल के साथ चटनी की तरह पीसकर फिर साफ़ सूती कपडे में बाँध कर इसका रस निचोड़ ले इस रस को थोडा सा आंच पर गर्म करके कान में टपका दे इस प्रयोग से कान का दर्द(ear ache) मिट जाता है साथ ही यदि कान में कीड़े पड़ गए हो तब वे भी मर जाते है -

2- भांग के चूर्ण(Cannabis powder)को साफ़ सूती कपडे में बाँध कर एक छोटी सी पोटली बनाए और इसमें एक धागा बांधे इस पोटली को योनी(vagina)में तीन घन्टे तक रहने दे बाद में धागे की सहायता से वापस निकाल ले इस प्रयोग को कुछ दिन करने से ढीली योनी(loose vagina)भी तंग हो जाती है-

3- भांग को जल के साथ पीसे और पेस्ट बनाकर इसे अपने बालो पे एक घंटे लगा रहने दे सिर में जितने भी जुएँ और लीखें है खत्म हो जाती है -

4- एरण्ड के तेल(Castor oil)में भांग को पीसकर शिश्न(Penis)पर लेप करने से उसकी ताकत में इजाफा होता है -

5- भांग की मात्रा 10 ग्राम ले और अलसी की मात्रा 30 ग्राम दोनों को साथ पीस कर पुल्टिस बना कर बवासीर के मस्सों पर रख कर कुछ दिन बांधे बहुत फायदा होता है-भांग को आप जल में पीस कर गुनगुना-गुनगुना पुल्टिस बवासीर(Piles)पर बाँधने से दर्द भी मिट जाता है-

6- भांग,सेंधा नमक 1-1 ग्राम तथा सौंफ और जीरा 2-2 ग्राम लेकर चूर्ण बनाकर छाछ के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से भूंख न लगना या खाया-पिया न पचना तथा दस्त लगना आदि रोग मिट जाता है -

7- खरल में भांग की पत्तियों को बकरी के दूध के साथ पीसकर पैरों के तलवे पर लेप करने से जल्दी ही नींद आने लगती है उन्माद रोगी को सुलाने में ये प्रयोग बेहतर है-

8- भांग का महीन चूर्ण कपडे में छानकर घाव में भर देने से सूजन और दर्द दूर होकर घाव(Injury) जल्दी भर जाता है इसमें टिटनेस(Tetanus)होने का खतरा भी नहीं रहता है तथा घाव में कीड़े पड़ जाने पर भी यह प्रयोग अच्छा रहता है -

9- एक ग्राम भांग को घी में भून ले फिर दस ग्राम शहद या गुड में मिलाकर देने से नींद अच्छी आती है वृद्ध लोगो को रात देर से नींद न आने की शिकायत के लिए ये नुस्खा उत्तम है-

10- अपचन(Indigestion)की स्थिति में हो रहे पेट दर्द(Abdominal Pain)से राहत के लिए भांग और काली मिर्च के चूर्ण को गुड में मिलाकर खिला दे लाभ मिलेगा-

11- जिस रोगी को दस्त(Diarrhea)हो रहे हो उसे भांग के चूर्ण को शहद या सौंफ के अर्क के साथ खिलाना चाहिए-

12- भांग और बीजबंद(बलाबीज) 100-100  ग्राम ,पोस्तदाना 50 ग्राम और काली मिर्च 25 ग्राम लेकर महीन चूर्ण बना ले इस चूर्ण में से 3-3 ग्राम चूर्ण को मिश्री मिले गर्म दूध के साथ नित्य सेवन करने से शीघ्रपतन(Premature Ejaculation)रोग दूर हो जाता है -

13- भांग के पत्तो के स्वरस में शहद मिला कर लेने से खांसी(Cough)में आराम मिलता है-

14- आधा ग्राम भांग,एक ग्राम काली मिर्च,दस ग्राम बादाम गिरी और 25 ग्राम मिश्री को 250 मिलीलीटर पानी में घोटकर छानकर पीने से परिश्रम करने से आई थकावट(Weariness)दूर हो जाती है-

15- जुकाम की एक अचूक दवा है -भांग के पत्तो को पीस कर बरगद या फिर पीपल के पत्तो में लपेटकर धागे से बाँध दे अब इस पर एक अंगुल मोटा मिटटी का लेप चढ़ा दे और इसे कंडे की आग में दबा दे जब मिटटी का रंग लाल हो जाए तो उसे ठण्डा कर ले तत्पश्चात भांग को उसमे से निकालकर चूर्ण कर ले और उसमे सेंधा नमक तथा तेल मिलाकर एक ग्राम की मात्रा सेवन करे-इस प्रयोग से कैसा भी जुकाम(Common Cold)हो मिट जाता है-

Upcharऔर प्रयोग-

Cannabis-भांग का Industrial उपयोग

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भांग(Cannabis)का जिक्र करते ही आपके दिमाक में नशे का चित्र आ जाता है लेकिन क्या नशे जैसी चीज भी उपयोगी होगी ये जान कर आपको आश्चर्य होगा-जी हाँ भांग(Cannabis)यानी गांजा(Hemp)का भी औद्योगिक उत्पादन में योगदान है आइये जानते है कि औद्योगिक उत्पादन(Industrial Production)में Cannabis प्रयोग कैसे किया जा रहा है-

Cannabis-भांग का Industrial उपयोग


क्या आपको पता है कि भांग(Cannabis)से आप ईन्धन भी बना सकते हैं भांग(Cannabis)पौधे के जड़ और बीज में मौजूद तेल से बायोडीजल बनाया जा सकता है-जी हां- बायोफ्युल-दुर्भाग्य से Cannabis-भांग पौधा इतना कुख्यात है कि इस योजना पर कोई भी देश या प्रशासन ठीक से अमल नहीं कर रहा-

क्या आपको पता है कि भांग(Cannabis)से कपड़ो(Fabric)का निर्माण किया जा रहा है तो अब है न चौकने की बारी-लेकिन ये सच है इस कला का विकास आठ हजार साल पहले चीनियों द्वारा किया गया था ये बहुत ही उम्दा किस्म के और टिकाऊ भी है आज कल तो चीन इससे बने कपड़ो(Hemp textiles)का उपयोग फैशन के लिए शुरू किया गया है सिर्फ इतना ही नहीं भांग के पौधो से जीन्स और जूते भी तैयार हो रहे है -

कागज के उत्पादन(Hemp Paper)में भी इसका योगदान कम करके नहीं आँका जा सकता है दुनियां में हो रहे उत्पादन में इसका हिस्सा 0.05 प्रतिशत भांग के पौधे से हो रहा है इसके बने कागज की खासियत ये है कि रिन्यूबल होता है हाँ ये बात अवस्य है कि भांग के पौधे से कागज बनाने का खर्च और लकड़ी से जादा है मगर ये पर्यावरण के भी अनुकूल है -

Cannabis(भांग)एक कैल्सियम और आयरन का स्त्रोत भी है भांग का एक तिहाई वजन जड़ अथवा बीज में मौजूद तेल में होता है इस तेल  में फैटी एसिड की मौजूदगी इसे गुणकारी बना देती है इसमें करीब 25 फीसदी से अधिक प्रोटीन होता है तथा इसमें अखरोट से कहीं ज्यादा ओमेगा-3 की मौजूदगी होती है यही वजह है कि इस तेल को पूरक आहार माना गया है- भांग का इस्तेमाल लोग आइस टी या बीयर में भी करते हैं- खास बात यह है कि भांग के पौधे से दूध भी प्राप्त होता है-

प्लास्टिक उत्पादन(plastic products)में भांग के पौधों का इस्तेमाल धड़ल्ले से होता है-40 के दशक में कार निर्माता कम्पनी फोर्ड ने भांग के पौधे से बनी प्लास्टिक से एक प्रोटोटाइप कार बनाने में सफलता हासिल की थी-हालांकि इस कार को कभी बाजार के लिए नहीं बनाया गया था-हाल के दिनों में इन पौधों का इस्तेमाल सीडी और डीवीडी केस और अन्य तरह के उत्पाद बनाने के लिए भी हो रहा है-

कपड़ा, खाद्य पदार्थ या कागज ही नहीं, भांग के पौधे से बिल्डिंग मैटेरियल भी बनाए जाते हैं-नीदरलैन्ड और आयरलैन्ड में कम्पनियां इन पौधों से building materials(बिल्डिंग मैटेरियल) जैसे फाइबर बोर्ड, प्रेस बोर्ड और हेम्पक्रीट जैसे प्रोडक्ट्स का उत्पादन करती हैं- इनकी खासियत यह है कि ये मजबूत, टिकाऊ और हल्के होते हैं तथा ये पर्यावरण की दृष्टि से भी सुरक्षित हैं और कंक्रीट का स्थान ले सकने में सक्षम हैं-

मिट्टी में मौजूद Toxic chemicals(जहरीले रसायन)की सफाई के लिए भी भांग का इस्तेमाल होता है-नब्बे के दशक में युक्रेन के चेर्नोबिल में हुए परमाणु हादसे के बाद इलाके में मिट्टी की सफाई के लिए भांग का इस्तेमाल किया गया था दुर्घटना से प्रभावित पूरे इलाके में भांग के पौधे रोपे गए और इस तरह यहां की मिट्टी की सफाई हो सकी थी-

Upcharऔर प्रयोग-

Cannabis-भांग के Amazing-अदभुत प्रयोग

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भांग(Cannabis)यानी विजया का उल्लेख अथवर्वेद तथा कौशिक सूत्र में भी मिलता है कत्यायन ऋषि ने भी इसका उल्लेख किया है इससे ज्ञात होता है Cannabis)-भांग के बारे में प्राचीन काल में भी जानकारी थी भांग के पौधे पर फूल और फल शरद ऋतु में लगती है पौधे पे लगने वाले नये पत्ते और फूल तथा फलो से युक्त कोमल शाखाओं को भांग(Cannabis))कहा जाता है-

Cannabis-भांग के Amazing-अदभुत प्रयोग


भांग(Cannabis))के मादा पौधों के पुष्पित शिखर जब मंजरी से भर जाते है तब उन्हें तोडकर सुखा लेते है यह गांजा(Hemp)होता है यह तम्बाखू की तरह पिया जाता है नशेबाज लोग तम्बाखू के साथ मिलाकर चिलम में रखकर गांजे का दम लगाते है गांजे(Hemp)में विशेषता यह होती है कि मसलने पर इसका नशीला प्रभाव बढ़ता है भांग(Cannabis)के पौधे के वायु में रहने वाले सभी भागों में उत्पन्न होने वाले एक रेजिन निस्यंद को जिसमे विषैले तेल की अधिक मात्रा होती है ,'चरस' कहलाता है-अब इसके परिचय के बाद हम आपको कुछ आयुर्वेदिक(Ayurvedic)प्रयोग बता रहे है जो कि लाभदायक प्रयोग है-

आयु वर्धक प्रयोग-

भांग के पंचांग का चूर्ण-340 ग्राम 
मिश्री-280 ग्राम 
घी-70 ग्राम 
शहद-140 ग्राम 

भांग(Cannabis)और मिश्री के चूर्ण को आपस में मिला कर घी और शहद में मिलाकर रख दे और नित्य प्रति दिन अपने बल के अनुसार इसकी मात्रा को दूध के साथ 120 दिन तक सेवन करे इसके प्रयोग से व्यक्ति दीर्घायु प्राप्त करता है वृधावस्था के लिए विशेष लाभकारी  योग है-

बाजीकरण(स्तम्भन) शक्ति प्रयोग-

शुद्ध भांग -640 ग्राम 
शक्कर-320 ग्राम
गाय का घी-250ग्राम 
शहद-120ग्राम 

शुद्ध  की गई भांग को कूट-पीस कर चूर्ण बनाए और उसमे बाकी सभी चीजो को मिला दे अब ये माजून तैयार है आप इसमें से 10 ग्राम की मात्रा सम्भोग से आधे घंटे पहले दूध से ले ये आपकी स्तम्भन शक्ति को बढाता है-

कमजोरी मिटाने का योग-

शुद्ध भांग -30 ग्राम 
असगंध -30 ग्राम 
बिदारीकंद-30 ग्राम 
ईसबगोल की भूसी -30 ग्राम 
मिश्री - 30 ग्राम 

उपरोक्त सभी सामग्री को महीन कूट-पीस ले गर्मी के सीजन में इस चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में लेकर आंवले के मुरब्बे के साथ अथवा घी-शक्कर व काली मिर्च के चूर्ण के साथ लेकर गर्म दूध से सेवन करे-सर्दी में इसे शहद व मक्खन के साथ लेकर दूध पी ले इस प्रयोग को करने के दिनों में दूध-भात या हलवा का सेवन करना चाहिए इस प्रयोग को करने से दुर्बल स्त्री-पुरुष भी हष्ट-पुष्ट हो जाते है-

मानसिक रोग के लिए-

भांग(Cannabis)और काली मिर्च एक-एक ग्राम,जटामासी और सूखी ब्राह्मी दो-दो ग्राम तथा सर्पगंधा एक ग्राम -इन सबको एक साथ पीसकर मिश्री मिले दूध में मिलाकर सेवन करने से ज्ञान सम्बन्धी मानसिक रोग दूर होते है तथा अच्छी नींद आती है-

भांग(Cannabis)को कैसे शुद्ध करे-

औषिधि प्रयोग के लिए भांग को शोधन अवस्य कर लेना चाहिए ताकि इसके सभी दोष समाप्त हो जाए-

1- भांग(Cannabis)के सूखे पत्तो को जल में भिगोकर निचोड़कर धूप में सुखाकर गाय के घी में धीमी आंच पर अच्छी तरह भूनकर नीचे उतार ले इस प्रकार भांग के पत्ते शुद्ध हो जाते है -

2- भांग(Cannabis)को सूती कपडे में बांधकर जल में तब तक धोते रहे जब तक हरा रंग आता रहे जब हरा रंग आना बंद हो जाए तब कपड़े से जल निचोड़कर भांग को बाहर निकालकर छाया में सुखा कर रख ले इस प्रकार सूखी हुई भांग शुद्ध होती है-

भांग(Cannabis)के बारे में दी गई जानकारी सिर्फ औषिधि उपयोग के लिए है जो लोग नशे के लिए इसका इस्तेमाल करते है उनके लिए कहना चाहूँगा इसके मादक गुण आपके जीवन के लिए अहितकर है नशा कैसा भी हो खराब होता है हम किसी भी प्रकार के नशे का समर्थन नहीं करते है सिर्फ उपरोक्त प्रयोग आपके काम के प्रयोग हेतु लिखे है -
Upcharऔर प्रयोग-