Dust Allergy-धूल से एलर्जी करे Treatment

सांस लेते ही हवा में उपस्थित अनगिनत बारीक कण हमारे श्वसन संस्थान के सम्पर्क में आते है और कुछ फेफड़ों में भी पहुंच जाते हैं एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में यह बारीक धूल के कण(Dust) छनकर बाहर हो जाते हैं और इस तरह वो बीमारी से बच जाते हैं प्रतिरोधक शक्ति(Deterrence) श्वसन संस्था की सतह पर हमेशा सक्रिय रहती है, जिससे जीवाणु संक्रमण(bacterial infection) नहीं हो पाता है परन्तु विषाणु संक्रमण(viral infections) से बीमारी हो सकती है जिनमें इन्फ्लूएंजा बायरस(influenza virus) खतरनाक हो सकता है-

Dust Allergy


हवा में मौजूद एलरजेन या रासायनिक तत्व श्वसन संस्था के रोग पैदा कर सकते हैं नाक, गले में या फिर फेफड़ों में सूजन पैदा होना- फेफड़ों का दाह-दमा या ब्रोन्काइटिस जैसे रोग प्रकट होते हैं-आंधी-तूफ़ान में रहने से भी श्वसन रोग(Respiratory Diseases) पैदा हो जाते है जिससे दमा रोग भयंकर रूप में भी Allergy-एलर्जी तथा फेफड़ों का दाह लम्बे समय में फेफड़ों को नष्ट कर देता है-

Allergy(एलर्जी)क्या है-


  1. कोई भी ऐसे पदार्थ- जिनके कणों से एलर्जी(Allergy) शुरू होने लगे-एलरजेन्स हजारों प्रकार के हो सकते हैं परागकण से अंडों के प्रोटीन तक सभी एलरजेन का काम करते हैं कोई भी रसायन Allergy की क्रिया पैदा कर सकता है-
  2. इनमें घर की धूल, पौधे या धास के परागकण, आहार के प्रोटीन, अंडे, फल्लीदाना भी आते हैं बिल्ली या कुत्ते के बाल, धूल, डैड्रफ, लार भी उनके बालों में लगी रहती है- यह सब एलर्जी(Allergy) पैदा करने में सक्षम है सामान्य एलर्जी इम्युनोग्लोब्यूलिन ‘इ’(Immunoglobulin E) से संबंधित है-हे-फीवर(hay fever)भी इसी टाइप की एलर्जी है-
  3. कुछ आहार से सर्दी की बीमारी 20 मिनट में, 4-6 घंटों में या 24-48 घंटों में भी आ सकती है- इसमें ठंड लगना, सिरदर्द, कान दुःखना भी हो सकती है- एलर्जी से चर्मरोग में एग्जिमा होता है जिसमें चमड़ी खुजलाती है और लाल रंग की हो जाती है चमड़ी की परतें निकलती हैं इसमें अत्यधिक खुजलाहट होती है-
  4. चेहरे पर, कान के पीछे, कोहनी पर, घुटने के पीछे एग्जिमा Asthma से होता है Eczema शरीर की प्रतिकार शक्ति से भी संबंधित हो सकता है- वायु प्रदूषण से उपजे एलरजेन या रासायनिक तत्व से श्वसन रोग, फेफड़ों का दाह, नाक में सूजन, फेफड़ों की सूजन से दमा की शिकायत हो जाती है-
  5. वायु प्रदूषण में कण अस्थमा(Asthma) के कारण बन सकते हैं-Asthma (दमा) एलर्जी से होता है- एलर्जी हवा से या आहार में बदलाव से कम कर सकते हैं- वसंत ऋतु या गर्मी में परागकण दमा की शिकायत लाते हैं- 
  6. घर के भीतर हवा में उपस्थित एलरजेन साल भर दमा के लक्षण पैदा करते हैं- धूल के जंतु ठंड के दिनों में एलर्जी से दमा पैदा करने में सक्षम होते हैं- धूम्रपान सदैव दमा वाले रोगी की समस्या रहती है- बाहरी वायु प्रदूषण भी एक बढ़ती हुई समस्या है-
  7. बाहर या घर में भी रासायनिक प्रदूषण से बचाव जरूरी है- पालतू जानवरों से भी एलर्जी रोकना जरूरी है कागज, कपड़े, खिलौने भी वायु प्रदूषण से एलरजेन और रसायन कमरे मेें लाते हैं- अतः इन्हें अपने शयन कक्ष से दूर रखने के प्रयत्न करना भी जरूरी है- गर्म पानी और साबुन से बेहतर सफाई होती है अतः इनका अक्सर उपयोग करें- 
  8. फल, अनाज, लकड़ी की धूल भी एलरजेन या विषैले पदार्थ पैदा करती है जिससे श्वसन रोग संभव है- सांस के द्वारा धूल के कण में फंगस या उनके बीज फेफड़ों में पहुंच जाते हैं जिनमें एस्परजिलस, पेनीसिलम म्युकर प्रमुख हैं- ये सब दमा, निमोनिया तथा फेफड़ों में फंगल रोग पैदा करने में सक्षम है-
  9. डस्टमाईट धूल के बारीक जंतु बिस्तर, कारपेट, टेबल, कुर्सी, पुराने कपड़ों में या खिलौना में रहते हैं- ये मानव चमड़ी पर आ सकते हैं जब ये सांस में आते हैं तब दमा या एग्जिमा पैदा कर सकते हैं वायु प्रदूषण में ओजोन एलरजेन के साथ में दमा बढ़ा देते हैं-इसलिए घर के भीतर की हवा को स्वच्छ रखना अनिवार्य है- 
  10. कपड़े से धूल साफ नहीं होती- धूल को वैक्यूम क्लीनर से ही साफ कर सकते हैं-बिस्तर के नीच की जगह में धूल जमा हो जाती है- कपड़े से तो धूल फैलती है- वैक्यूम क्लीनर के नोजल पर कपड़ा बांधकर छोटी चीजों की धूल साफ करें- तकिया या बिस्तर को एलरजेन से बचाव करने वाले कवर से ढकें और हर दिन उन्हें वैक्यूम क्लीनर से साफ करें-
  11. बिस्तर की चादर को नियमित धोना, वह भी गर्म पानी से, बहुत जरूरी है- हर मौसम में अपने कारपेट और फर्श की सफाई अवश्य करें- भीतरी हवा की सफाई और प्रदूषित तत्व कम करने के लिए एयर प्यूरीफायर का उपयोग कर सकते हैं- धूल से बचाव के लिए बिस्तर व तकिये को ढककर रखें- पॉलिस्टर फिल पिलो का उपयोग करें तो ही होगा-कारपेट का उपयोग न करें- यदि कारपेट हाें तो हफ्ते में 1-2 बार उसे वैक्यूम क्लीनर से साफ करें- यदि बड़े परदे लगाते हों तो उन्हें समय-समय पर धुलवा दें- ब्लेंकेट गर्म पानी में धुलवाएं-
  12. जिस व्यक्ति को धूल से एलर्जी हो उसे घर की सफाई नहीं करनी चाहिए और खासकर वसंत ऋतु में-यदि एलर्जी वाला व्यक्ति ही साफ-सफाई करे तो मुंह पर मास्क अवश्य ही पहने या फिर सफाई के समय बाहर ही रहें जब तक की कमरे की धूल खत्म न हो जाए- 
  13. गीले कपड़ों से धूल साफ करना सही होगा- एलरजेन का वायु में स्तर दिसम्बर महीने में कुछ ज्यादा हो सकता है- एलर्जी प्रतिकार शक्ति के द्वारा संचालित होती है- इनमें से फीवर, एग्जिमा, अस्थमा, एनाफाइलेक्सीस, भीतरी कान का बहना, जोड़ों का दर्द, सोरायसिस, लम्बी अवधि की थकान, विभाग की एलर्जी, हर समय बीमार होना सामान्य है-
  14. बच्चों में नाक बहना, कान बहना, सर्दी-खांसी, दमा, सिरदर्द, पैरों का दर्द, टांसिल्स, एग्जिमा, डिप्रेशन तथा आहार से एलर्जी सामान्य है- इनसे बचाव करना आवश्यक है- याद रखें, साधारण धुल भी खतरनाक हो सकती है- एलर्जी शॉट्स थैरेपी में इम्यूनोथैरेपी मुख्य है जिससे एलर्जी कम होने लगती है- लक्षण घट सकते हैं- 
  15. बच्चों में दमा या नाक का बहना ठीक हो सकता है-सही डाक्टर से ही एलर्जी इलाज सुरक्षित होता है और वहां पर इमर्जेंसी केयर यूनिट भी हो- यह इलाज 3-5 साल तक लेना पड़ सकता है- हृदय रोग में यह इलाज वर्जित है एड्स की बीमारी में भी यह इलाज न करवाएं- धूल से बचाव ही धूल की एलर्जी से बचाता है-
  16. इसे भी देखे- Lump गांठ का Treatment-घरेलू इलाज

Upcharऔर प्रयोग-
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1 comments:

Its a good information and precaution given should be followed.


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