Menstrual Periods-मासिक धर्म का रुक जाना

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Menstrual Periods-मासिक धर्म स्त्री में होने वाली एक स्वाभाविक प्रक्रिया है यदि मासिक धर्म(Menstrual Periods) में अनियमितता होती है तो स्त्री के शरीर में अन्य विकार उत्पन्न हो जाते हैं इसका कारण शरीर के भीतर किसी रोग का होना भी हो सकता है इसके सुचारु रूप से न होने पर स्त्री जीवन भर मातृत्व सुख से वंचित रह जाती है-

Menstrual Periods


कारण-

शरीर में बहुत ज्यादा आलस्य, खून की कमी, मैथुन दोष, माहवारी के समय ठंडी चीजों का सेवन, ठंड लग जाना, पानी में देर तक भीगना, व्यर्थ में इधर-उधर भ्रमण करना, शोक, क्रोध, दुःख, मानसिक उद्वेग, तथा मासिक धर्म(Menstrual Periods) के समय खाने-पीने में असावधानी - इन सभी कारणों से मासिक धर्म रुक जाता है या समय से नहीं होता है-

पहचान-

गर्भाशय के हिस्से में दर्द, भूख न लगना, वमन, कब्ज, स्तनों में दर्द, दूध कम निकलना, दिल धड़कना, सांस लेने में तकलीफ, कान में तरफ-तरह की आवाजें सुनाई पड़ना, नींद न आना, दस्त लगना, पेट में दर्द, शरीर में जगह-जगह सूजन, मानसिक तनाव, हाथ, पैर व कमर में दर्द, स्वरभंग, थकावट, शरीर में दर्द आदि मासिक धर्म रुकने के लक्षण हैं-

करे ये  प्रयोग-

  1. दो चम्मच बथुआ के बीज 1 गिलास पानी में उबालें। आधा पानी बच जाने पर छानकर पीने से रुका हुआ मासिकधर्म(Menstrual Periods) खुलकर साफ आता है-
  2. तीन ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से माहवारी ठीक हो जाती है-
  3. दूब घास का रस एक चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सुबह के समय पीने से रुकी माहवारी(Menstrual Periods) खुल जाती है-
  4. कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर कुछ दिनों तक खाने से मासिक धर्म(Menstrual Periods) खुलकर आने लगता है-
  5. ग्वारपाठे (एलोवेरा ) का रस दो चम्मच की मात्रा में खाली पेट लगभग दो सप्ताह तक सेवन करें-
  6. 10 ग्राम तिल, 2, ग्राम कालीमिर्च, दो नग छोटी पीपल तथा जरा-सी शक्कर-सबका काढ़ा बनाकर पीने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है-
  7. Menstrual Periods रुकने पर 3 ग्राम तुलसी की जड़ का चूर्ण शहद के साथ सेवन करें-
  8. 50 ग्राम सोंठ, 30 ग्राम गुड़, 5 ग्राम बायबिड़ंग तथा 5 ग्राम जौ - सबको मोटा-मोटा कूटकर दो कप पानी में औटाएं- जब पानी आधा कप रह जाए तो काढ़े का सेवन करें| रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाएगा-
  9. बरगद की जटा, मेथी और कलौंजी - सब 3-3 ग्राम की मात्रा में लेकर मोटा-मोटा कूट लें फिर आधा किलो पानी में सब चीजें डालकर काढ़ा बनाएं-जब पानी आधा रह जाए तो छानकर शक्कर डालकर पी जाएं-
  10. प्याज का सूप एक कप बनाएं और उसमें थोड़ा- सा गुड़ घोल लें-इसे पीने से रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाएगा-दिन में तीन बार 2-2 ग्राम थोडा  गरम पानी से सेवन करना चाहिए- इससे मासिक(Menstrual Periods) धर्म खुल जाता है-
  11. ज्वार के भुट्टे को जलाकर इसकी राख को छान लें अब इस राख को 3 ग्राम की मात्रा में पानी से सुबह के समय खाली पेट मासिक-धर्म चालू होने से लगभग एक सप्ताह पहले देना चाहिए- जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए- इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं-
  12. चौलाई की जड़ को छाया में सुखाकर बारीक पीस लें इसे लगभग 5 ग्राम मात्रा में सुबह के समय खाली पेट मासिक-धर्म शुरू होने से लगभग 7 दिनों पहले सेवन करें- जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए- इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं-
  13. असगंध और खाण्ड को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें, फिर इसे 10 ग्राम लेकर पानी से
  14. खाली पेट मासिक धर्म शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले सेवन करें- जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए- इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं-
  15. आधा ग्राम कपूरचूरा में मैदा मिलाकर 4 गोलियां बनाकर रख लें- प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक
  16. गोली का सेवन माहवारी शुरू होने से लगभग 4 दिन पहले स्त्री को सेवन करना चाहिए- मासिक-धर्म शुरू होने के बाद इसका सेवन नहीं करना चाहिए- इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं-
  17. विदारीकन्द का चूर्ण 1 चम्मच और मिश्री 1 चम्मच दोनों को पीसकर एक  चम्मच घी के साथ मिलाकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से मासिक-धर्म में अधिक खून आना बंद होता है- विदारीकन्द के 1 चम्मच चूर्ण को घी और चीनी के साथ मिलाकर चटाने से मासिक-धर्म में अधिक खून आना बंद हो जाता है-
  18. 2-3 महीने तक भी मासिक-धर्म के न होने पर और पेट में भी दर्द रहने पर एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और 2 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम को खाना खाने के बाद सोते समय 30 दिनों तक पियें-इस प्रयोग के दौरान आलू और बैगन नहीं खाना चाहिए-
  19. उलटकंबल की जड़ की छाल का गर्म चिकना रस 2 ग्राम की मात्रा में कुछ समय तक रोज देने से हर तरह के कष्ट से होने वाले मासिक-धर्म में लाभमिलता है-
  20. उलटकंबल की जड़ की छाल को 6 ग्राम लेकर 1 ग्राम कालीमिर्च के साथ पीस कर रख लें- इसे मासिक धर्म से 7 दिनों पहले से और जब तक मासिक-धर्म होता रहता है तब तक पानी के साथ लेने से मासिक-धर्म नियमित होता है- इससे बांझ पन दूर होता है और गर्भाशय को शक्ति प्राप्त होती है-
  21. अनियमित मासिक-धर्म के साथ ही, गर्भाशय, जांघ और कमर में दर्द हो तो उलटकंबल की जड़ का रस 4 ग्राम निकालकर चीनी के साथ सेवन करने से 2 दिन में ही लाभ मिलता है-
  22. उलटकंबल की 50 ग्राम सूखी छाल को जौ कूट यानी पीसकर 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा तैयार करें। यह काढ़ा उचित मात्रा में दिन में 3 बार लेने से कुछ ही दिनों में मासिक-धर्म(Menstrual Periods) नियमित समय पर होने लग जाता है। इसका प्रयोग मासिक धर्म शुरू होने से 7 दिन पहले से मासिक-धर्म आरम्भ होने तक दें-
  23. उलटकंबल की जड़ की छाल का चूर्ण 4 ग्राम और कालीमिर्च के 7 दाने सुबह-शाम पानी के साथ मासिकधर्म के समय 7 दिन तक सेवन करें। 2 से 4 महीनों तक यह प्रयोग करने से गर्भाशय के सभी दोष मिट जाते हैं। यह प्रदर और बन्ध्यत्व की सर्वश्रेष्ठ औषधि है-

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