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सूर्यकिरण जल से ग्रहदोष निवारण कैसे करें

क्या आप जानते है कि सूर्य किरणों(Sunbeam)द्वारा नवग्रह संतुलन कुंडली स्थित ग्रहों के अशुभ प्रभाव को भी सूर्य किरणों(Sun Rays)के उपचार से दूर किया जा सकता है क्युकि आप जानते ही हैं कि प्रत्येक ग्रह का एक रंग होता है जैसे सूर्य का लाल, चंद्र का सफेद, मंगल का नारंगी, बुध का हरा, गुरु का पीला, शुक्र का हल्का सफेद(आसमानी)और शनि का नीला होता है तो हम आज इस पर चर्चा करते है कि कैसे सूर्यतप्त जल से ग्रहों द्वारा उत्पन्न रोगों का उपचार करते है-

सूर्यकिरण जल से ग्रहदोष निवारण कैसे करें

आप सर्वप्रथम देखें कि शरीर के किस अंग में कष्ट है उस अंग से संबंधित भाव, भाव स्वामी और कारक यदि कमजोर है तो स्वामी ग्रह के रंग के अनुसार उस रंग का पानी लें, पीड़ित अंग की उसी रंग के तेल से मालिश और सूर्यकिरण(Sunbeam)जल से उपचार करें-

सूर्यकिरण जल(Sun Rays Water)ग्रह दोष के लिए-


जैसे यदि मेष लग्न हो, शनि और राहु से लग्न और लग्नेश पीड़ित हों और लग्नेश कमजोर हो तो सर्दी या शीत की समस्या आ सकती है ऐसे में नारंगी रंग की बोतल का पानी लेने और उसी रंग के तेल की मालिश से रोग दूर हो सकता है स्वस्थ बने रहने के लिए लग्नेश के रंग की बोतल के पानी और तेल का उपयोग अधिक करें इसके अति¬रिक्त पंचमेश और नवमेश के रंग का उपयोग भी कर सकते हैं हृदय की समस्या आने पर लाल या नारंगी व चतुर्थेश के रंगों की चीजों का उपयोग करें-इसी प्रकार अन्य रोगों के उपचार में भी सूर्य किरणों(Sunbeam)का उपयोग कर सकते हैं-

सूर्यकिरण जल(Sun Rays Water)से वास्तुदोष दूर करे-


सूर्य किरण(Sunbeam)उपचार से वास्तु दोष दूर करना मकान के वास्तु दोष भी सूर्य किरण के उपयोग से दूर किए जा सकते हैं-उदाहरण-यदि किसी मकान के उत्तरी भाग में बिजली का मीटर, रसोई या टेलीविजन हो तो जिन चीजों का कारक बुध होता है उनसे नुकसान की संभावना रहती है क्योंकि उत्तर बुध की दिशा है-ऐसे में धन का नुकसान हो सकता है और परिवार के युवा सदस्य बीमार हो सकते हैं-इसके अतिरिक्त व्यापार में नुकसान और मानसिक तनाव की संभावना भी रहती है-इस दोष से मुक्ति के लिए उत्तरी कमरे की बाहरी खिड़की में हरे रंग के कांच की पट्टी लगाएं जिससे हरा रंग कमरे में रहे-(हरे बल्ब के प्रकाश का उपयोग भी कर सकते हैं)-

सूर्य किरण(Sunbeam)उपचार से लाभ-


यह प्राकृतिक उपचार है अतः दुष्प्रभाव रहित और प्रभावी है यह उपचार सस्ता, सरल, सहज और सर्व सुलभ है-लेकिन कभी-कभी कुछ विपरीत प्रभाव भी हो सकता है-ऐसे में विधि बदलकर उपचार करें तो लाभ होगा-यह उपचार किसी भी अन्य उपचार के साथ किया जा सकता है-

विशेष-


यदि घर में सूर्य प्रकाश की व्यवस्था न हो तो 200 वाट के बल्ब के प्रकाश में तेल, पानी, दवाई आदि से उपचार कर सकते हैं-

जल कितना लें-


जवान व बुजुर्ग 20 से 50 मि.ली. दिन में 3 से 5 बार-

दो से दस वर्ष के बीच 2 मि.ली. से 10 मि.ली. 

एक सप्ताह से दो वर्ष तक के बच्चे 0.05 मी. ली. से 2 मि. ली. लगाने की दवाई, तेल, ग्लिसरीन आदि पहले से ही घर में तैयार रखना जरुरी है -

आप को इस ज्ञान पे गौर करते हुए एक बार डॉक्टर या वेध्य की दवा को भी सूर्य किरणों से प्रभावित करते हुए प्रयोग करे तो उसकी छमता में दस गुना प्रभाव बढ़ जाता है-

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Upcharऔर प्रयोग-

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