संकट के लिए Bagalamukhi-बगुलामुखी यंत्र

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मनुष्य जीवन में अनेक प्रकार के संकट आते ही रहते है और परेशान व्यक्ति उनसे मुक्त होने का उपाय खोजता रहता है जब आप चारों तरफ से निराश और असहाय हो चुकें हो और आपको कोई मार्ग नहीं सूझ पड़े तो बस एक बार जीवन में माता बगुलामुखी(Bagalamukhi)की साधना अवश्य करें ये इतनी चमत्कारी साधना है कि आज तक जिसने भी की है कभी निराश नहीं हुआ है हमने अपने जीवन काल में सन-1991 से माता Bagalamukhi-बगुलामुखी माला मन्त्र का नित्य ही उपयोग किया है और आज दावे से ये कहने में ख़ुशी है कि ये आपके जीवन के आने वाली समस्याओं का एक मात्र हल है-

संकट के लिए Bagalamukhi-बगुलामुखी यंत्र


माता बगुलामुखी(Bagalamukhi)को कलयुग में बहुत शक्तिशाली देवी के रूप में जाना जाता है जिनकी कृपा से कार्यों में आने वाली विघ्न बाधाएं दूर होतीं हैं आपके संकट टल जाते हैं तथा साहस, पराक्रम आदि की प्राप्ति होती है बगुलामुखी यंत्र का प्रयोग मां बगुलामुखी(Bagalamukhi)का आशिर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है तथा आज भी अनेक जातको की श्री बगुलामुखी यंत्र के विधिवत प्रयोग से विभिन्न प्रकार की मनोकामनाएं सिद्ध हुई हैं-

Bagalamukhi-बगलामुखी साधना भारत की प्राचीनतम दस महाविध्याओ में एक है और कलियुग में इसका प्रभाव पग-पग पे देख सकते है-शत्रुओ पर हावी होने और उनका मान मर्दन करने तथा हारते हुए मुकदमो में भी सफलता पाने हेतु समस्त प्रकार से उन्नति के लिए बगुलामुखी यंत्र को श्रेष्ठ माना जाता है  यह यंत्र जिस हाथ पे बंधा होता है उस पर किया गया तांत्रिक प्रभाव भी निष्फल रहता है -

बगलामुखी मंदिर मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित है यह देश के लोकप्रिय शक्तिपीठों में से एक है दतिया का यह मंदिर 'पीताम्बरा पीठ' के नाम से प्रसिद्ध है मध्य प्रदेश के दतिया शहर में प्रवेश करते ही पीताम्बरा पीठ है यहाँ पहले कभी श्मशान हुआ करता था लेकिन आज विश्वप्रसिद्ध मन्दिर है-

पीताम्बरा पीठ की स्थापना एक सिद्ध संत-जिन्हें लोग स्वामीजी महाराज कहकर पुकारते थे ने 1935 में की थी श्री स्वामी महाराज ने बचपन से ही संन्यास ग्रहण कर लिया था और वे यहाँ एक स्वतंत्र अखण्ड ब्रह्मचारी संत के रूप में निवास करते थे तथा स्वामीजी प्रकांड विद्वान व प्रसिद्ध लेखक थे उन्हेंने संस्कृत, हिन्दी में कई किताबें भी लिखी थीं-गोलकवासी स्वामीजी महाराज ने इस स्थान पर 'बगलामुखी देवी' और धूमावती माई की प्रतिमा स्थापित करवाई थी यहाँ बना वनखंडेश्वर मन्दिर महाभारत कालीन मन्दिरों में अपना विशेष स्थान रखता है-

स्थानीय लोगों की मान्यता है कि मुकदमे आदि के सिलसिले में माँ पीताम्बरा का अनुष्ठान सफलता दिलाने वाला होता है। भारत में बगुलामुखी के तीन ही ऐतिहासिक मंदिर माने गये हैं, जो क्रमश: दतिया (मध्य प्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) और शाजापुर (मध्य प्रदेश) में हैं दतिया स्थित बगुलामुखी मंदिर 'पीताम्बरा पीठ' के नाम से भी प्रसिद्ध है यह मंदिर महाभारत कालीन है-

मान्यता है कि आचार्य द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा चिरंजीवी होने के कारण आज भी इस मंदिर में पूजा अर्चना करने आते हैं-इस मंदिर के परिसर में भगवान आशुतोष भी वनखंडेश्वर लिंग के रूप में विराजमान हैं बगुलामुखी का यह मंदिर देश के लोकप्रिय शक्तिपीठों में से एक है कहा जाता है कि कभी इस स्थान पर श्मशान हुआ करता था लेकिन आज एक विश्वप्रसिद्ध मन्दिर है स्थानीय  लोगों की मान्यता है कि मुकदमे आदि के सिलसिले में माँ पीताम्बरा का अनुष्ठान सफलता दिलाने वाला होता है इसी  मंदिर के प्रांगण में ही 'माँ धूमावती देवी' का मन्दिर है जो भारत में भगवती धूमावती का सिर्फ एक मात्र मन्दिर है-

पीताम्बरा देवी की मूर्ति के हाथों में मुदगर,पाश,वज्र एवं शत्रुजिव्हा है यह शत्रुओं की जीभ को कीलित कर देती हैं मुकदमे आदि में इनका अनुष्ठान सफलता प्राप्त करने वाला माना जाता है तथा इनकी आराधना करने से साधक को विजय प्राप्त होती है और शुत्र पूरी तरह पराजित हो जाते हैं यहाँ के पंडित तो यहाँ तक कहते हैं कि, जो राज्य आतंकवाद व नक्सलवाद से प्रभावित हैं वह माँ पीताम्बरा की साधना व अनुष्ठान कराएँ तो उन्हें इस समस्या से निजात मिल सकती है-

शत्रुओं का नाश करे बगुलामुखी(Bagalamukhi)यंत्र-

आज लोग अपनी विफलता से दुखी नहीं, बल्कि पड़ोसी की सफलता से दुखी हैं ऐसे में उन लोगों को सफलता देने के लिए माताओं में माता बगलामुखी (वाल्गामुखी) मानव कल्याण के लिये कलियुग में प्रत्यक्ष फल प्रदान करती रही हैं आज ये माता, जो दुष्टों का संहार करती हैं अशुभ समय का निवारण कर नई चेतना का संचार करती हैं ऐसी माता के बारे में मैं अपनी अल्प बुद्धि से आपकी प्रसन्नता के लिए इनकी सेवा आराधना पर कुछ कहने का साहस कर रहा हूं मुझे आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि मैं माता वाल्गामुखी (बगलामुखी) की जो बातें आपसे कह रहा हूं अगर आप उसका तनिक भी अनुसरण करते हैं तो माता आप पर कृपा जरूर करेंगी-

श्री बगुलामुखी यंत्र के प्रयोग का परामर्श नये कार्यों को शुरु करने के लिए तथा उनमें सफलता प्राप्त करने के लिए, कार्यों में आने वाली विघ्न बाधाओं को दूर करने के लिए, पराक्रम, साहस तथा युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए, न्यायालय आदि में चल रहे मुकद्दमों में अनुकूल निर्णय प्राप्त करने के लिए,चुनाव आदि में विजय प्राप्त करने के लिए, श्री बगुलामुखी कृपा तथा अन्य बहुत सी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए देते हैं तथा इस यंत्र को विधिवत स्थापित करने वाले तथा इसकी विधिवत पूजा करने वाले जातक अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक लाभ के अवसर प्राप्त करने में सफल होते हैं-

श्री बगुलामुखी यंत्र को स्थापित करने से प्राप्त होने वाले लाभ उस जातक को पूर्ण रूप से तभी प्राप्त हो सकते हैं जब उसके द्वारा स्थापित किया जाने वाला श्री बगुलामुखी यंत्र शुद्धिकरण,प्राण प्रतिष्ठा तथा ऊर्जा संग्रह की प्रक्रियाओं के माध्यम से विधिवत बनाया गया हो तथा विधिवत न बनाए गए श्री बगुलामुखी यंत्र को स्थापित करना कोई विशेष लाभ प्रदान नहीं होता-

किसी भी श्री बगुलामुखी यंत्र की वास्तविक शक्ति इस यंत्र को श्री बगुलामुखी मंत्रों द्वारा प्रदान की गई शक्ति के अनुपात में ही होती है तथा इस प्रकार जितने अधिक मंत्रों की बगुलामुखी के साथ किसी श्री बगुलामुखी यंत्र को ऊर्जा प्रदान की गई हो उतना ही वह श्री बगुलामुखी यंत्र शक्तिशाली होगा-किसी भी श्री बगुलामुखी यंत्र को लाभ प्रदान करने के लिए कम से कम 11,000 श्री बगुलामुखी मंत्रों की सहायता से ऊर्जा प्रदान की जानी चाहिए, तथा बिना ऊर्जा के संग्रह वाला श्री बगुलामुखी यंत्र धातु के एक टुकड़े के समान ही होता है जिसे 60 रूपये के मूल्य में प्राप्त किया जा सकता है-

यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि श्री बगुलामुखी यंत्र को विधिवत बनाने की प्रक्रिया में इस यंत्र को ऊर्जा प्रदान करने वाला चरण सबसे अधिक महत्वपूर्ण है तथा यदि ऊर्जा संग्रहित करने की इस प्रक्रिया को यदि विधिवत तथा उचित प्रकार से न किया जाए तो कोई विशेष फल प्रदान करने में सक्षम नही होगा-

किसी भी श्री बगुलामुखी यंत्र के भली प्रकार से कार्य करने तथा जातक को लाभ प्रदान करने के लिए इस यंत्र को विधिवत बनाया जाना अति आवश्यक है किन्तु एक ऐसे श्री बगुलामुखी यंत्र की,जिसे किसी व्यक्ति विशेष के लिए संकल्पित करके अकेले ही यंत्र को ऊर्जा प्रदान की गई हो,किसी ऐसे श्री बगुलामुखी यंत्र के साथ बिल्कुल भी तुलना नहीं की जा सकती है जिसे सैंकड़ों अन्य श्री बगुलामुखी यंत्रों के साथ बिना किसी विशेष संकल्प के उर्जा प्रदान करने की चेष्टा की गई हो क्योंकि इनमें से प्रथम श्रेणी का श्री बगुलामुखी यंत्र विधिवत बनाया गया तथा उत्तम फल प्रदान करने में सक्षम है जबकि दूसरे यंत्र को उचित विधि से नहीं बनाया गया है ऊर्जा प्रदान करने के अतिरिक्त प्रत्येक श्री बगुलामुखी यंत्र को विशिष्ट विधियों के माध्यम से शुद्धिकरण, किसी व्यक्ति विशेष को ही अपने शुभ फल प्रदान करने की क्षमता प्रदान करने वाली प्रक्रिया से किया जाता है तथा अंत में जिससे यह यंत्र अपने फल देने में सक्षम हो जाता है-

इसलिए अपने लिए श्री बगुलामुखी यंत्र स्थापित करने से पहले सदा यह सुनिश्चित करें कि आपके द्वारा स्थापित किया जाने वाला श्री बगुलामुखी यंत्र उपरोक्त सभी प्रक्रियों में से निकलने के बाद विधिवत केवल आपके लिए ही बनाया गया है-विधिवत बनाया गया श्री बगुलामुखी यंत्र प्राप्त करने के पश्चात आपको इसे अपने ज्योतिषि के परामर्श के अनुसार अपने घर में पूजा के स्थान अथवा अपने बटुए अथवा अपने गले में स्थापित करना होता है उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए श्री बगुलामुखी यंत्र को मंगलवार वाले दिन स्थापित करना चाहिए तथा घर में स्थापित करने की स्थिति में इसे पूजा के स्थान में स्थापित करना चाहिए-

श्री बगुलामुखी यंत्र की स्थापना के दिन नहाने के पश्चात अपने यंत्र को सामने रखकर 11 या 21 बार श्री बगुलामुखी मंत्र का जाप करें तथा तत्पश्चात अपने श्री बगुलामुखी यंत्र पर थोड़े से गंगाजल अथवा कच्चे दूध के छींटे दें, मां बगुलामुखी से इस यंत्र के माध्यम से अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना करें, तथा तत्पश्चात इस यंत्र को इसके लिए निश्चित किये गये स्थान पर स्थापित कर दें। तथा इस यंत्र से निरंतर शुभ फल प्राप्त करते रहने के लिए आपको इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी है। प्रतिदिन स्नान करने के पश्चात अपने श्री बगुलामुखी यंत्र की स्थापना वाले स्थान पर जाएं तथा इस यंत्र को नमन करके 11 या 21 श्री बगुलामुखी मंत्रों के उच्चारण के पश्चात अपने इच्छित फल को इस यंत्र से मांगें-

यदि आपने अपने श्री बगुलामुखी यंत्र को अपने बटुए अथवा गले में धारण किया है तो स्नान के बाद इसे अपने हाथ में लें तथा उपरोक्त विधि से इसका पूजन करें तथा अपना इच्छित फल इससे मांगें-अपने पास स्थापित किए गये श्री बगुलामुखी यंत्र की नियमित रूप से पूजा करने से आपके और आपके श्री बगुलामुखी यंत्र के मध्य एक बगुलामुखी का शक्तिशाली संबंध स्थापित हो जाता है जिसके कारण यह यंत्र आपको अधिक से अधिक लाभ प्रदान करता है-

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