मन्त्र द्वारा Evil eye-नजर उतारना

10:53 pm Leave a Comment
जिन लोगो का Evil eye-नजर लगने की शिकायत होती है लोग नजर(Evil eye)झाड़ने वालों के पास जाते है और कभी-कभी तो आपको उनके नाज-नखरे भी उठाने पड़ते है आप आज इस ज्ञान को खुद भी जान सकते है बस आपको इसे सूर्य-ग्रहण काल,दिवाली,होली आदि में एक बार जाग्रत करना होता है और फिर नजर(Evil eye)उतारने का मन्त्र पूरे साल भर काम करता है ठीक एक साल बाद इसे पुन:जाग्रत करना होता है तो फिर इंतज़ार क्यों आप भी एक बार प्रयास करे और अपना व लोगों का भला करके यश के भागीदार बने-

Evil eye


नजर उतारें मन्त्र द्वारा-

मन्त्र-

“नमो सत्य आदेश। गुरु का ओम नमो नजर, जहाँ पर-पीर न जानी। बोले छल सो अमृत-बानी। कहे नजर कहाँ से आई ? यहाँ की ठोर ताहि कौन बताई ? कौन जाति तेरी ? कहाँ ठाम ? किसकी बेटी ? कहा तेरा नाम ? कहां से उड़ी, कहां को जाई ? अब ही बस कर ले, तेरी माया तेरी जाए। सुना चित लाए, जैसी होय सुनाऊँ आय। तेलिन-तमोलिन, चूड़ी-चमारी, कायस्थनी, खत-रानी, कुम्हारी, महतरानी, राजा की रानी। जाको दोष, ताही के सिर पड़े। जाहर पीर नजर की रक्षा करे। मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति। फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा।”

विधि-

उपरोक्त मन्त्र को पढ़ते हुए मोर-पंख से व्यक्ति को सिर से पैर तक झाड़ दें-इस मन्त्र को एक सौ आठ बार किसी भी सिद्ध मुहूर्त (दिवाली या होली या सूर्य-ग्रहण )में एक बार सिद्ध कर ले फिर सिर्फ सात बार झाडा करने से भी नजर उतर जाती है-

एक और प्रयोग-

मन्त्र-

“वन गुरु इद्यास करु। सात समुद्र सुखे जाती। चाक बाँधूँ, चाकोली बाँधूँ, दृष्ट बाँधूँ। “देवदत्त”नाम बाँधूँ तर बाल बिरामनाची आनिङ्गा।”

विधि-

पहले मन्त्र को सूर्य-ग्रहण या चन्द्र-ग्रहण में सिद्ध करें-फिर प्रयोग हेतु उक्त मन्त्र के यन्त्र को पीपल के पत्ते पर किसी कलम से लिखें “देवदत्त” के स्थान पर नजर लगे हुए व्यक्ति का नाम लिखें-यन्त्र को हाथ में लेकर उक्त मन्त्र 11 बार जपे-अगर-बत्ती का धुवाँ करे और यन्त्र को काले डोरे से बाँधकर रोगी को दे-रोगी मंगलवार या शुक्रवार को पूर्वाभिमुख होकर ताबीज को गले में धारण करें-आप पर किसी के नजर का असर नहीं होगा-

जैन मन्त्र का प्रयोग-

“ॐ नमो भगवते श्री पार्श्वनाथाय, ह्रीं धरणेन्द्र-पद्मावती सहिताय। आत्म-चक्षु, प्रेत-चक्षु, पिशाच-चक्षु-सर्व नाशाय, सर्व-ज्वर-नाशाय, त्रायस त्रायस, ह्रीं नाथाय स्वाहा।”

विधि-

उक्त जैन मन्त्र को सात बार पढ़कर व्यक्ति को जल पिला दें-उसकी नजर उतर जायेगी इस मन्त्र का अदभुद प्रभाव है -

मेरा अनुभूत सिद्ध मन्त्र-

 “टोना-टोना कहाँ चले? चले बड़ जंगल। बड़े जंगल का करने ? बड़े रुख का पेड़ काटे। बड़े रुख का पेड़ काट के का करबो ? छप्पन छुरी बनाइब। छप्पन छुरी बना के का करबो ? अगवार काटब, पिछवार काटब, नौहर काटब, सासूर काटब, काट-कूट के पंग बहाइबै, तब राजा बली कहाईब।”

विधि-

ये शाबरी मन्त्र दीपावली’ या ‘ग्रहण’-काल में एक दीपक के सम्मुख उक्त मन्त्र का 21 बार जप करे-फिर आवश्यकता पड़ने पर भभूत से झाड़े-तो नजर-टोना दूर होता है-

डाइन या नजर झाड़ने का शाबरी मन्त्र-

“उदना देवी, सुदना गेल। सुदना देवी कहाँ गेल ? केकरे गेल ? सवा सौ लाख विधिया गुन, सिखे गेल। से गुन सिख के का कैले ? भूत के पेट पान कतल कर दैले। मारु लाती, फाटे छाती और फाटे डाइन के छाती। डाइन के गुन हमसे खुले। हमसे न खुले, तो हमरे गुरु से खुले। दुहाई ईश्वर-महादेव, गौरा-पार्वती, नैना-जोगिनी, कामरु-कामाख्या की।”

विधि-

किसी को नजर लग गई हो या किसी डाइन ने कुछ कर दिया हो, उस समय वह किसी को पहचानता नहीं है-उस समय उसकी हालत पागल-जैसी हो जाती है-ऐसे समय उक्त मन्त्र को नौ बार हाथ में ‘जल’ लेकर पढ़े-फिर उस जल से छिंटा मारे तथा रोगी को पिलाए-रोगी ठीक हो जाएगा-यह स्वयं-सिद्ध मन्त्र है केवल माँ पर विश्वास की आवश्यकता है-

नजर झारने का हनुमान शाबरी मन्त्र-

“हनुमान चलै, अवधेसरिका वृज-वण्डल धूम मचाई। टोना-टमर, डीठि-मूठि सबको खैचि बलाय। दोहाई छत्तीस कोटि देवता की, दोहाई लोना चमारिन की।”

पीर मन्त्र-

“वजर-बन्द वजर-बन्द टोना-टमार, डीठि-नजर। दोहाई पीर करीम, दोहाई पीर असरफ की, दोहाई पीर अताफ की, दोहाई पीर पनारु की नीयक मैद।”

विधि-

उपरोक्त दोनों मन्त्र में से किसी भी एक का प्रयोग करके 11 बार झारे, तो बालकों को लगी नजर या टोना का दोष दूर होता है-

नजर-टोना झारने का मन्त्र-

“आकाश बाँधो, पाताल बाँधो, बाँधो आपन काया। तीन डेग की पृथ्वी बाँधो, गुरु जी की दाया। जितना गुनिया गुन भेजे, उतना गुनिया गुन बांधे। टोना टोनमत जादू। दोहाई कौरु कमच्छा के, नोनाऊ चमाइन की। दोहाई ईश्वर गौरा-पार्वती की, ॐ ह्रीं फट् स्वाहा।”

विधि-

नमक अभिमन्त्रित कर खिला दे-पशुओं के लिए विशेष फल-दायक है-

नजर उतारने का मन्त्र-

“ओम नमो आदेश गुरु का। गिरह-बाज नटनी का जाया, चलती बेर कबूतर खाया, पीवे दारु, खाय जो मांस, रोग-दोष को लावे फाँस। कहाँ-कहाँ से लावेगा? गुदगुद में सुद्रावेगा, बोटी-बोटी में से लावेगा, चाम-चाम में से लावेगा, नौ नाड़ी बहत्तर कोठा में से लावेगा, मार-मार बन्दी कर लावेगा। न लावेगा, तो अपनी माता की सेज पर पग रखेगा। मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति, फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा।”

विधि-

छोटे बच्चों और सुन्दर स्त्रियों को नजर लग जाती है उक्त मन्त्र पढ़कर मोर-पंख से झाड़ दें,तो नजर दोष दूर हो जाता है-


Upcharऔर प्रयोग-

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