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24 अक्तूबर 2016

गाय के पुराने घी के गुण Gaay Ke Puraane Ghi Ke Gun

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गाय के पुराने घी के गुण Gaay Ke Puraane Ghi Ke Gun-


आज का हमारा युवा-वर्ग हमारे ऋषियों-मुनियों द्वारा बताई गई ज्ञान और उपयोगिता से बहुत दूर होता गया है लेकिन आज भी बड़े-बड़े वैज्ञानिक उन्ही चीजो की खोज आज करके भी उसी प्रमाणिकता को प्राप्त करते है जो हमारे पूर्वजो ने की थी क्या आपको पता है कि गाय के घी(Cow Ghee)में कितनी गुणवत्ता है शायद ये बहुत कम लोगो को जानकारी है तो आइये जानते है गाय के देशी घी का महत्व हमारे जीवन में क्या है-

Gaay Ke Puraane Ghi Ke Gun


क्या आप जानते है-

  1. यज्ञ में देशी गाय के घी(Cow Ghee)की आहुतियां देने से पर्यावरण शुध्द होता है गाय के घी में चावल मिलाकर यज्ञ में आहुतियां देने से इथिलीन आक्साइड और फाममोल्डिहाइड नामक यौगिक गैस के रूप में उत्पन्न होते हैं इससे प्राण वायु शुध्द होती है ये दोनों यौगिक जीवाणरोधक होते हैं-
  2. प्रातः सूर्योदय के समय एवं सायंकाल सूर्यास्त के समय गाय का घी(Cow Ghee)और चावल मिलाकर दो-दो आहूतियां मंत्र के साथ देने पर आसपास का वातावरण कीटाणु रहित(Disinsected)हो जाता है-
  3. गाय के  घी से आहुतियां देने पर यह देखा गया है कि जितनी दूर तक यज्ञ के धुएं का प्रभाव फैलता है उतनी ही दूर तक वायुमंडल में किसी प्रकार के कीटाणु नहीं रहते है और वह क्षेत्र पूरी तरह से कीटाणुओं से मुक्त हो जाता है-
  4. कृत्रिम वर्षा कराने के लिए वैज्ञानिक, प्रोपलीन आक्साइड गैस का प्रयोग करते हैं-गाय के घी से आहुति देने पर यह गैस प्राप्त होती है प्राचीन काल में भू-जल का उपयोग कृषि में सिंचाई के लिए नहीं किया जाता था-यज्ञ होते रहने से समय-समय पर वर्षा होती रहती थी-
  5. शरीर में पहुंचे रेडियोधर्मी विकिरणों का दुष्प्रभाव नष्ट करने की गाय के घी में असीम क्षमता हैं
  6. अग्नि में गाय का घी कि आहुति देने से उसका धुआँ जहाँ तक फैलता है वहाँ तक का सारा वातावरण प्रदूषण और आण्विक विकरणों से मुक्त हो जाता हैं और सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि एक चम्मच गौघृत को अग्नि में डालने से एक टन प्राणवायु (ऑक्सीजन) बनती हैं जो अन्य किसी भी उपाय से संभव नहीं हैं -

गाय के घी(Cow Ghee)से लाभ-

  1. हमारे बुजुर्ग कहा करते थे पुराना घी गुणी होता है जी हाँ ये सच है जितना ही गाय का घी पुराना हो उतना ही गुणी हो जाता है पुराना घी तीक्ष्ण, खट्टा, तीखा, उष्ण, श्रवण शक्ति को बढ़ाने वाला घाव को मिटाने वाला, योनि रोग, मस्तक रोग, नेत्र रोग, कर्ण रोग, मूच्छा, ज्वर, श्वांस, खांसी, संग्रहणी, उन्माद, कृमि, विष आदि दोषों को नष्ट करता है दस वर्ष पुराने घी को कोंच, ग्यारह वर्ष पुराने घी को महाघृत कहते हैं-
  2. स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए प्रतिदिन रात्रि को सोते समय दो बूंद देशी गाय का गुनगुना घी दोनों नाक के छेदों में डालें-यह घी रात भर मस्तिष्क को प्राणवायु पहुंचाता रहता है और विद्युत तरंगों से मस्तिष्क को चार्ज करता रहता है इससे मस्तिष्क की शक्ति बहुत बढ़ जाती है यदि यह क्रिया प्रातः, अपराह्न और रात को सोते समय  कई माह तक की जाती रहे तो श्वास के प्रवाह में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं और अनेक पुराने रोग ठीक हो जाते हैं-
  3. नाक में दो बूंद गाय का घी डालने से शुष्कता, सूजन, रक्तस्राव, सर्दी, सायनस संक्रमण, नासिका गिल्टी आदि ठीक हो जाते हैं और वायु मार्ग खुल जाने से श्वास की बाधा दूर हो जाती है तथा नाक में घी डालने के साथ-साथ दो बूंद घी नाभि में डालें और फिर अंगुली से दोनों ओर थोड़ी देर घुमाएं-गाय का घी अपने हाथ से पांव के तलवों पर मालिश करें, इससे बहुत अच्छी नींद आती है शांति और आनन्द प्राप्त होता है-बस एक माह कर के देखे-
  4. देसी गाय के घी को रसायन कहा गया है जो जवानी को कायम रखते हुए आपके बुढ़ापे को दूर रखता है तथा काली गाय का घी नियमित खाने से बूढ़ा व्यक्ति भी जवान जैसा हो जाता है-
  5. गाय के घी में स्वर्ण छार पाए जाते हैं जिसमे अदभुत औषधिय गुण होते है जो की गाय के घी के इलावा अन्य घी में नहीं मिलते है गाय के घी से बेहतर कोई दूसरी चीज नहीं है-
  6. गाय के घी में वैक्सीन एसिड, ब्यूट्रिक एसिड, बीटा-कैरोटीन जैसे माइक्रोन्यूट्रीस मौजूद होते हैं जिस के सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है गाय के घी से उत्पन्न शरीर के माइक्रोन्यूट्रीस में कैंसर युक्त तत्वों से लड़ने की क्षमता होती है-
  7. यदि आप गाय के 10 ग्राम घी से हवन अनुष्ठान (यज्ञ) करते हैं तो इसके परिणाम स्वरूप वातावरण में लगभग 1 टन ताजा ऑक्सीजन का उत्पादन कर सकते हैं-यही कारण है कि मंदिरों में गाय के घी का दीपक जलाने कि तथा धार्मिक समारोह में यज्ञ करने कि प्रथा प्रचलित है इससे वातावरण में फैले परमाणु विकिरणों को हटाने की अदभुत क्षमता होती है और नकारात्मक उर्जा भी समाप्त होती है-

गाय के घी(Cow Ghee)का रोग पर उपयोग-

  1. गाय के घी से बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है-
  2. गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बहार निकल कर चेतना वापस लोट आती है-गाय का घी नाक में डालने से पागलपन दूर होता है गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है-
  3. आयुर्वेद विशेषज्ञो के अनुसार अनिद्रा का रोगी शाम को दोनों नथुनो में गाय के घी की दो-दो बूंद डाले और रात को नाभि और पैर के तलुओ में गौघृत लगाकर लेट जाय तो उसे प्रगाढ़ निद्रा आ जायेगी-
  4. नाक में घी डालने से नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तारो ताजा हो जाता है- गाय का घी नाक में डालने से लकवा का रोग में भी उपचार होता है-
  5. गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत कम हो जाती है-
  6. आपको यदि अगर अधिक कमजोरी लगे तो एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री डालकर पी लें-
  7. गाय का घी नाक में डालने से बाल झडना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते है-
  8. गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है याददाश्त तेज होती है इसलिए पहले के लोगो में उर्जा और ज्ञान का अभाव नहीं था मुंह-जबानी पूरा ग्रन्थ रट लिया करते थे -
  9. हिचकी के न रुकने पर खाली गाय का आधा चम्मच घी खाए-हिचकी स्वयं रुक जाएगी-
  10. गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना ओपरेशन के ही ठीक हो जाता है-
  11. हथेली और पांव के तलवो में जलन होने पर गाय के घी की मालिश करने से जलन में आराम आयेगा-
  12. गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है इसके सेवन से स्तन तथा आंत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है-
  13. गाय के पुराने घी से बच्चों को छाती और पीठ पर मालिश करने से कफ की शिकायत दूर हो जाती है-
  14. हाथ पाव मे जलन होने पर गाय के घी को तलवो में मालिश करें जलन ढीक होता है-
  15. बीस से पच्चीस ग्राम घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग व गांझे का नशा कम हो जाता है-
  16. सांप के काटने पर 100 -150 ग्राम घी पिलायें उपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें जिससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष कम हो जायेगा-
  17. फफोलो पर गाय का देसी घी लगाने से आराम मिलता है।गाय के घी की झाती पर मालिस करने से बच्चो के बलगम को बहार निकालने मे सहायक होता है-
  18. दो बूंद देसी गाय का घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ढीक होता है सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो गाय के घी की पैरों के तलवे पर मालिश करे, सर दर्द ठीक हो जायेगा-
  19. जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाइ खाने की मनाही है तो गाय का घी खाएं, हर्दय मज़बूत होता है-
  20. संभोग के बाद कमजोरी आने पर एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच देसी गाय का घी मिलाकर पी लें इससे थकान बिल्कुल कम हो जाएगी-

  21. एक बात याद रहे कि गाय के घी के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है तथा वजन भी नही बढ़ता है बल्कि ये वजन को संतुलित करता है यानी कि कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है और मोटे व्यक्ति का मोटापा(वजन)कम होता है इसमें ये दोनों ही गुण है-
  22. एक चम्मच गाय का शुद्ध घी में एक चम्मच बूरा और 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है-
  23. गाय का घी एक अच्छा(LDL)कोलेसट्रॉल है उच्च कोलेस्ट्रॉल के रोगियों को गाय का घी ही खाना चाहिए तथा यह एक बहुत अच्छा टॉनिक भी है-अगर आप गाय के घी की कुछ बूँदें दिन में तीन बार,नाक में प्रयोग करेंगे तो यह त्रिदोष (वात पित्त और कफ) को संतुलित करता है-
  24. गाय के घी को ठन्डे जल में फेंट ले और फिर घी को पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करे और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें-इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे जिसे त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक मलहम कि तरह से इस्तेमाल कर सकते है यह सोरायसिस के लिए भी कारगर है-
  25. घी और छिलका सहित पिसा हुआ काला चना और पिसी शक्कर(बूरा)तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड्डू बाँध लें-प्रातः खाली पेट एक लड्डू खूब चबा-चबाकर खाते हुए एक गिलास मीठा कुनकुना दूध घूँट-घूँट करके पीने से स्त्रियों के प्रदर रोग में आराम होता है तथा पुरुषों का शरीर मोटा ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है -
  26. तो क्या फिर अभी भी सोच रहे है आप आज से ही गाय का शुध घी घर लाये कुछ खाए और कुछ पुराना होने को रख दे ये सोच कर कि कभी न कभी आपको इसकी जरुरत पड़ सकती है- 
  27. REED MORE-
  28. कब्ज का घरेलू उपचार 
Upchar और प्रयोग-

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