19 फ़रवरी 2018

आप अपने घर में पूजा कैसे करें

How do you Worship in your House-


हम सभी हिन्दुओं के घर में पूजन के लिए छोटे-छोटे पूजा मंदिर बने होते है जहां सभी लोग भगवान की नियमित पूजा (Worship) करते है लेकिन हममे में से अधिकांश लोग अज्ञानतावश पूजन सम्बन्धी छोटे-छोटे नियमों का पालन नहीं करते है जिससे की हमे पूजन का सम्पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है आज हम आपको घर में पूजन सम्बन्धी कुछ ऐसे ही नियम बताएँगे जिनका पालन करने से हमे पूजा का श्रेष्ठ फल शीघ्र प्राप्त होगा-

आप अपने घर में पूजा कैसे करें

कैसे करे आप घर की पूजा (HomeWorship) -


1- शास्त्रों के अनुसार बताया गया है कि यदि हम मंदिर में शिवलिंग रखना चाहते हैं तो शिवलिंग हमारे अंगूठे के आकार से बड़ा नहीं होना चाहिए क्युकि शिवलिंग बहुत संवेदनशील होता है और इसी वजह से घर के मंदिर में छोटा सा शिवलिंग रखना शुभ होता है तथा अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी छोटे आकार की ही रखनी चाहिए क्युकि अधिक बड़ी मूर्तियां बड़े मंदिरों के लिए श्रेष्ठ रहती हैं लेकिन घर के छोटे मंदिर के लिए छोटे-छोटे आकार की प्रतिमाएं श्रेष्ठ मानी गई हैं-

2- घर में पूजा करने वाले व्यक्ति का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होगा तो बहुत शुभ रहता है इसके लिए पूजा स्थल का द्वार पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए-यदि यह किसी कारण से संभव ना हो तो पूजा करते समय व्यक्ति का मुंह पूर्व दिशा में होगा तब भी श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं-

3- घर में मंदिर ऐसे स्थान पर बनाया जाना चाहिए जहां दिन-भर में कभी भी कुछ देर के लिए सूर्य की रोशनी अवश्य पहुंचती हो-जिन घरों में सूर्य की रोशनी और ताजी हवा आती रहती है उन घरों के कई दोष स्वतः ही शांत हो जाते हैं-सूर्य की रोशनी से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ोतरी होती है-


आप अपने घर में पूजा कैसे करें

4- यदि घर में मंदिर है तो हर रोज सुबह और शाम पूजन अवश्य करना चाहिए-पूजन के समय घंटी अवश्य बजाएं और साथ ही एक बार पूरे घर में घूमकर भी घंटी बजानी चाहिए-ऐसा करने पर घंटी की आवाज से नकारात्मकता नष्ट होती है और सकारात्मकता बढ़ती है-

5- पूजा में बासी फूल,पत्ते कभी भी अर्पित नहीं करना चाहिए तथा स्वच्छ और ताजे जल का ही उपयोग करें-इस संबंध में यह बात ध्यान रखने योग्य है कि तुलसी के पत्ते और गंगाजल कभी बासी नहीं माने जाते हैं अत: इनका उपयोग कभी भी किया जा सकता है बाकी शेष सामग्री ताजी ही उपयोग करनी चाहिए-यदि कोई फूल सूंघा हुआ है या खराब है तो वह भगवान को अर्पित न करें-

6- घर में जिस स्थान पर मंदिर है वहां चमड़े से बनी चीजें,जूते-चप्पल नहीं ले जाना चाहिए-मंदिर में मृतकों और पूर्वजों के चित्र भी नहीं लगाना चाहिए-पूर्वजों के चित्र लगाने के लिए दक्षिण दिशा क्षेत्र रहती है-घर में दक्षिण दिशा की दीवार पर मृतकों के चित्र लगाए जा सकते हैं लेकिन मंदिर में नहीं रखना चाहिए-पूजा कक्ष में पूजा से संबंधित सामग्री ही रखना चाहिए-अन्य कोई वस्तु रखने से बचना चाहिए-

7- घर के मंदिर के आसपास शौचालय होना भी अशुभ रहता है अत: ऐसे स्थान पर पूजन कक्ष बनाएं जहां आसपास शौचालय न हो-यदि किसी छोटे कमरे में पूजा स्थल बनाया गया है तो वहां कुछ स्थान खुला होना चाहिए-जहां आसानी से बैठा जा सके-खास कर बेड रूम में न हो तो अच्छा है अगर किसी कारण से बनाये तो रात को सोते समय पर्दे से मंदिर को अवश्य ही ढक दे-


8- रोज रात को सोने से पहले मंदिर को पर्दे से ढंक देना चाहिए-जिस प्रकार हम सोते समय किसी प्रकार का व्यवधान पसंद नहीं करते हैं ठीक उसी भाव से मंदिर पर भी पर्दा ढंक देना चाहिए-जिससे भगवान के विश्राम में बाधा उत्पन्न ना हो-

9- वर्षभर में जब भी श्रेष्ठ मुहूर्त आते हैं तब पूरे घर में गौमूत्र का छिड़काव करना चाहिए-गौमूत्र के छिड़काव से पवित्रता बनी रहती है और वातावरण सकारात्मक हो जाता है-शास्त्रों के अनुसार गौमूत्र बहुत चमत्कारी होता है और इस उपाय घर पर दैवीय शक्तियों की विशेष कृपा होती है ये नकारात्मक उर्जा को और वाइरस को खत्म करता है-

10- खंडित मूर्तियां हो तो उसे पूजा के स्थल (Places of worship) से हटा देना चाहिए और किसी पवित्र बहती नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए-खंडित मूर्तियों की पूजा अशुभ मानी गई है इस संबंध में यह बात ध्यान रखने योग्य है कि सिर्फ शिवलिंग कभी भी-किसी भी अवस्था में खंडित नहीं माना जाता है-

11- सदैव दाएं हाथ की अनामिका एवं अंगूठे की सहायता से फूल अर्पित करने चाहिए और चढ़े हुए फूल को अंगूठे और तर्जनी की सहायता से उतारना चाहिए तथा एक बात का ध्यान रक्खें कि फूल की कलियों को चढ़ाना मना है किंतु यह नियम कमल के फूल पर लागू नहीं है-

12- तुलसी के बिना ईश्वर की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है और तुलसी की मंजरी सब फूलों से बढ़कर मानी जाती है-मंगल, शुक्र, रवि, अमावस्या, पूर्णिमा, द्वादशी और रात्रि और संध्या काल में तुलसी दल नहीं तोड़ना चाहिए-तुलसी तोड़ते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि उसमें पत्तियों का रहना भी आवश्यक है आप कभी भी पूरे की सभी पत्तियां तोड़ कर पेड़ को पत्ती विहीन न करे-

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