10 अक्तूबर 2016

नजर लगना क्या है क्या है वैज्ञानिक आधार

What is Scientific Basis Evil eye


हमारे भारतीय समाज में नजर लगना (Evil Eye) और लगाना एक आम बात है लगभग प्रत्येक परिवार में नजर दोष निवारण के उपाय किए जाते हैं लेकिन इस बदलते युग और परिवेश में लोग इसे नहीं मानते है और जो लोग नहीं मानते है उनसे मेरा कोई तर्क नहीं है वो सभी लोग हमारी इस पोस्ट को इग्नोर कर सकते है-

नजर लगना क्या है क्या है वैज्ञानिक आधार

जहाँ तक घरेलू महिलाओं का मानना है कि बच्चों को नजर अधिक लगती है यदि बच्चा यदि दूध पीना बंद कर दे तो भी यही कहा जाता है कि भला चंगा था और अचानक नजर (Evil Eye) लग गई और माँ परेशान होकर अनेकानेक उपाय को करने के लिए तत्पर हो जाती है- 

क्या ये नजर बच्चों को ही लगती है-


शायद ऐसा नहीं है यदि ऐसा ही हो तो फिर लोग ऐसा क्यों कहते हैं कि मेरे काम धंधे को नजर (Evil Eye) लग गई है नया कपड़ा, जेवर आदि कट-फट जाएं तो भी यही कहा जाता है कि किसी की नजर ल्रग गई-

लोग अक्सर पूछते हैं कि नजर लगती कैसे है.? इसके लक्षण क्या हैं.? नजर लगने पर उससे मुक्ति के क्या उपाय किए जाएं ?

लोगों की इसी जिज्ञासा को ध्यान में रखकर यहां नजर के लक्षण, कारण और निवारण के उपाय का विवरण प्रस्तुत कर रहा हूँ लेकिन जिन लोगो को इस प्रथा को नकारना है उन लोगो से इस मुद्दे पे कोई मेरी सीधी बहस नहीं क्युकि एक कहावत है-

            "जिन के पाँव न पडी बिवाई ,वो क्या जाने पीर पराई "

चलिए अब कुछ नजर (Evil Eye) के लक्षण से आपको परिचित कराता चलूं तो समझने में शायद जादा ही आपको आसानी होगी-नजर से प्रभावित लोगों का कुछ भी करने को मन नहीं करता है वे बेचैन और बुझे-बुझे-से रहते है तथा बीमार नहीं होने के बावजूद भी शिथिल रहते हैं-उनकी मानसिक स्थिति अजीब-सी रहती है उनके मन में अजीब-अजीब से विचार आते रहते हैं और वे खाने के प्रति अनिच्छा जाहिर करते हैं-

नजर लगना क्या है क्या है वैज्ञानिक आधार

बच्चे प्रतिक्रिया व्यक्त न कर पाने के कारण रोने लगते हैं कामकाजी लोग काम करना भूल जाते हैं और अनर्गल बातें सोचने लगते हैं-इस स्थिति से बचाव के लिए वे चिकित्सा भीं करवाना नहीं चाहते तथा विद्यार्थियों का मन पढ़ाई से उचट जाता है-नौकरीपेशा लोग सुनते कुछ हैं और करते कुछ और हैं-

नजर (Evil Eye) किसे लगती है-


नजर सभी प्राणियों, मानव निर्मित सभी चीजों आदि को लग सकती है नजर देवी देवताओं को भी लगती है हमारे शास्त्रों में उल्लेख है कि भगवान शिव और पार्वती के विवाह के समय सुनयना ने शिव की नजर उतारी थी-

कब लगती है नजर-


कोई व्यक्ति जब अपने सामने के किसी व्यक्ति अथवा उसकी किसी वस्तु को ईर्ष्या वश देखे और फिर देखता ही रह जाए-तो उसकी नजर उस व्यक्ति अथवा उसकी वस्तु को तुरत लग जाती है ऐसी नजर उतारने हेतु विशेष प्रयत्न करना पड़ता है अन्यथा नुकसान की संभावना प्रबल हो जाती है-

नजर किस की लग सकती है-


किसी व्यक्ति विशेष को अपनी ही नजर लग सकती है ऐसा तब होता है जब वह स्वयं ही अपने बारे में अच्छे या बुरे विचार व्यक्त करता है अथवा बार-बार दर्पण देखता है उससे ईर्ष्या करने वालों, उससे प्रेम करने वालों और उसके साथ काम करने वालों की नजर भी उसे लग सकती है और यहां तक की किसी अनजान व्यक्ति, किसी जानवर या किसी पक्षी की नजर भी उसे लग सकती है-

बुरी नजर की पहचान क्या है-


नजर से प्रभावित व्यक्ति की निचली पलक, जिस पर हल्के रोएंदार बाल होते हैं वह फूल सी जाती है वास्तव में यही नजर की सही पहचान है किंतु-इसकी सही पहचान कोई पारखी ही कर सकता है-

नजर दोष का वैज्ञानिक आधार (Scientific Basis) क्या है-


नजर लगने पर कभी-कभी हमारे रोमकूप बंद हो जाते हैं ऐसे में हमारा शरीर किसी भी बाहरी क्रिया को ग्रहण करने में स्वयं को असमर्थ पाता है उसे हवा, सर्दी और गर्मी की अनुभूति नहीं हो पाती है रोमकूपों के बंद होने के फलस्वरूप व्यक्ति के शरीर का भीतरी तापमान भीतर में ही समाहित रहता है और बाहरी वातावरण का उस पर प्रभाव नहीं पड़ता है जिससे उसके शरीर में पांच तत्वों का संतुलन बिगड़ने लगता है और शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है यही आयरन रोमकूपों से न निकलने के कारण आंखों से निकलने की चेष्टा करता है जिसके फलस्वरूप आंखें की निचली पलक फूल या सूज जाती है और तब बंद रोमकूपों को खोलने के लिए अनेकानेक विधियों से उतारा किया जाता है-

संसार की प्रत्येक वस्तु में आकर्षण शक्ति होती है अर्थात प्रत्येक वस्तु वातावरण से स्वयं कुछ न कुछ ग्रहण करती है आमतौर पर नजर उतारने के लिए उन्हीं वस्तुओं का उपयोग किया जाता है जिनकी ग्रहण करने की क्षमता तीव्र होती है-

आप इसे इस प्रकार भी आसानी से समझ सकते है कि किसी पात्र में सरसों का तेल भरकर उसे खुला छोड़ दें तो आप पाएंगें कि वातावरण के साफ व स्वच्छ होने के बावजूद उस तेल पर अनेकानेक छोटे-छोटे कण चिपक जाते हैं ये कण तेल की आकर्षण शक्ति से प्रभावित होकर चिपकते हैं-

तेल की तरह ही नीबू, लाल मिर्च, कपूर, फिटकरी, मोर के पंख, बूंदी के लड्डू तथा ऐसी अन्य अनेकानेक वस्तुओं की अपनी-अपनी आकर्षण शक्ति होती है जिनका प्रयोग नजर उतारने में किया जाता है इस तरह उक्त तथ्य से स्पष्ट हो जाता है कि नजर का अपना वैज्ञानिक आधार है-


प्रस्तुती- Satyan Srivastava

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