Chyavanaprash-च्वयनप्रास क्यों खायें

11:38 pm Leave a Comment
घटती उम्र के साथ-साथ आप की रोग प्रतिकार शक्ति का हास होने लगता है और कारण है आज के जीवन में मिलावट युक्त वस्तुओं एवं खाद्ध-सामग्री का उपयोग करना तब लोग आपको Chyavanaprash-च्वयनप्रास खाने की सलाह देते है और ये सच है कि च्वयनप्रास(Chyavanaprash)हमारी रोग प्रतिकार शक्ति को बढाता है तथा शरीर में एक नई उर्जा(Energy)का संचार देता है-

Chyavanaprash


किसी किसी की धारणा है कि च्यवनप्राश(Chyavanaprash)का सेवन सिर्फ शीत ऋतु में ही करना चाहिए परंतु यह सर्वथा भ्रान्ति वाली मान्यता है जबकि इसका सेवन सब ऋतुओं में किया जा सकता है ग्रीष्म ऋतु में भी यह गरमी नहीं करता है क्योंकि इसका प्रधान द्रव्य आँवला है जो शीतवीर्य होने से पित्तशामक है आँवले को उबालकर उसमें 56 प्रकार की वस्तुओं के अतिरिक्त हिमालय से लायी गयी वज्रबला(सप्तधातुवर्धनी वनस्पति) भी डालकर यह च्यवनप्राश(Chyavanaprash)बनाया जाता है-

आज आपको इस लेख द्वारा च्यवनप्राश(Chyavanaprash)के गुण धर्म और खाने के लाभ के साथ-साथ इसे घर पर यदि कोई निर्माण करना चाहे तो कैसे इसका निर्माण करेगे इस पोस्ट में आपको जानकारी देगें वैसे तो बाजार में आजकल कुछ प्रसिद्ध कम्पनी के प्रोडक्ट को छोड़ कर नकली च्यवनप्राश(Chyavanaprash)की भरमार है-जो मात्रा पेकिंग पर लिखी होती है जरुरी नहीं है कि उतनी मात्रा उस औषिधि की उसमे निहित है जबकि असली च्यवनप्राश(Chyavanaprash)अपना असर मात्र दस दिन में ही आपको बता देता है-

 यदि कोई व्यक्ति चाहता है कि हम घर पर च्वयनप्राश निर्माण करें तो वह व्यक्ति घर पे भी बना सकता है तो आइये जाने कि हमें किन वस्तुओ की आवश्यकता होगी तथा इसे कैसे बनाये-

सामग्री-

  1. एक किलो हरा पक्का आँवला( ये सामग्री एक किलो आंवला लेने पर है)
  2. 100-150 ग्राम घी
  3. शक्कर- 1500 ग्राम
  4. शहद 100 से 150 ग्राम
38 जड़ी-बूटियों का जौकुट(कूटा और छाना हुआ)पाउडर-340 ग्राम ये नीचे दिया जा रहा है यह सामग्री धूप में सुखाकर अलग-अलग मिक्सी या सिलबट्टे से बारीक पीस कर कपड़े से छानकर तैयार कर लें-

  1. वंशलोचन(Vanshlochn)- 15 ग्राम
  2. छोटी पीपल(Small pepper)-12 ग्राम
  3. लौंग(Cloves)-10 ग्राम
  4. तेजपत्र(Tejptr)-6 ग्राम
  5. दालचीनी(Cinnamon)- 6 ग्राम
  6. नागकेशर(Nagkeshr)- 6 ग्राम
  7. इलायची बीज(Cardamom Seed)- 6 ग्राम
  8. केशर(Kesar) -1 ग्राम

अब आप इन जड़ी बूटी को और कूट पीस के छान ले-

  1. बेल छाल(Bell bark)
  2. अग्निमंथ(Agnimnth) (अछाल)
  3. श्योनाक(Shyonak)
  4. गंभारी छाल(Ganbhari bark)
  5. पाढल छाल(Padal bark)
  6. शालपर्णी(Shalparni)
  7. पृष्ठिपर्णी(Prishtiparni)
  8. मुग्दपर्णी(Mugdparni)
  9. माषपर्णी(Teramnus labialis)
  10. गोखरु पंचाँग(Gukhuru)
  11. छोटी कटैली(Little Ktali)
  12. बड़ी कटैली(Big Ktali)
  13. बला(BalaRoot) मूल
  14. पिप्पली(Pippali) मूल
  15. काकड़ा सिंगी(Kakda Singi)
  16. भुई आँवला(Bhui Amla)
  17. मुनक्का(Raisins)
  18. पुष्कर मूल(Pushkar Root)
  19. अगर(Agar)
  20. बड़ी हरण(Big abduction)
  21. लाल चंदन(Red sandalwood)
  22. नील कमल(Neelkamal)
  23. विदारी कंद(Vidari Kand)
  24. अडूसा मूल(Adusa Root)
  25. काकोली(Kaakoli)
  26. छीर काकोली(Chiir Kaakoli)
  27. ऋद्धि(Riddhi)
  28. सिद्धि(Siddhi)
  29. जीवन(Jiivan)मूल
  30. ऋषभक(Risbhk)
  31. मेदा(Meda)
  32. महामेदा(Mahameda)
  33. कचूर(Kcur)
  34. नागरमोथा(Nagarmotha)
  35. पुनर्नवा(Punarnava)
  36. बड़ी इलायची(Black Cardamom)
  37. गिलोय(Tinospora)
  38. काकनासा(Kaknasa)

नोट-

इन सभी 38 वनौषधियों में से प्रत्येक की प्रति किलो आँवले पर(7-7 ग्राम सात-सात ग्राम)लेकर जौ कूट कर के बराबर बारीक कूट-पीस लें और अगर ये जड़ी-बूटियाँ उपलब्ध न हों तो 40 ग्राम अश्वगंधा, 40 ग्राम शतावर, 40 ग्राम प्रज्ञापेय चूर्ण लेकर च्यवनप्राश की जड़ी बूटियों की जगह इनका क्वाथ बनाकर भी पौष्टिक प्राश बनाया जा सकता है और इतना ही नहीं यदि अगर क्रमांक-25 काकोली से लेकर क्रमांक-32 महामेदा तक की जड़ी -बूटियाँ उपलब्ध न हों-तो भी उनकी जगह अश्वगंधा, शतावर, विदारीकंद, बाराही कंद ,सफेद चन्दन, वसाका, अकरकरा, ब्राह्मी , बिल्व, छोटी हर्र(हरीतकी),कमल केशर,जटामानसी,बेल,कचूर,नागरमोथा,लोंग,पुश्करमूल, काकडसिंघी, दशमूल, जीवन्ती, पुनर्नवा, अंजीर , तुलसी के पत्ते, मीठा नीम, संठ, मुलेठी, (6 ग्राम) प्रत्येक ले लें-

च्यवनप्राश(Chyavanaprash)बनाने की विधि-

च्यवनप्राश(Chyavanaprash)बनाने के लिए सभी जड़ी-बूटियों के जौकूट पाउडर को एक किलो पानी में 24 घंटे पहले भिगो दें फिर एक किलो ताजे हरे आँवलों को एक लीटर पानी में डालकर प्रेशर कूकर में उबाल लें और जब तीन बार सीटी आ जाये तो कुकर को उतार कर 15 मिनट तक ठंडा होने दें-

अब आप उबले हुए आँवलों की गुठली निकालकर अलग करें इसके पश्चात् गूदे को स्टील की चलनी या कद्दूकस के चिकने वाले हिस्से या सूती कपड़े या आटा छानने कर छलनी में घिसे जिससे अनावश्यक रेशे अलग हो जाते हैं सिर्फ मुख्य उद्देश्य यहाँ पल्प यानी गूदे से रेशे अलग करना है-अगर रेशे न निकल सकें-तो गुठली निकाले हुए आँवले के गूदे को मिक्सी में डालकर पेस्ट बना लें-

ध्यान देने योग्य विशेष बातें-


  1. अगर घी 125 ग्राम लीया जाए तो च्यवनप्राश उत्तम क्वालिटी का बनता है-
  2. बिना रेशे निकले हुए च्यवनप्राश को तीन माह में उपयोग कर लेना चाहिये-
  3. विशिष्ट प्रकार का च्यवनप्राश बनाने के लिए उक्त विधि से तैयार किये हुए ढाई किलो च्यवनप्राश में निम्नलिखित वस्तुएँ मिलाई जा सकती हैं-
केशर-3 ग्राम, मकरध्वज-4 ग्राम,चाँदी वर्क-10 पत्ते,शुक्ति भस्म-12 ग्राम, प्रवालभस्म-12 ग्राम, अभ्रक भस्म- 15 ग्राम, शृंग भस्म-15 ग्राम-वैसे इन सभी भस्मों,केशर एवं मकरध्वज को आयु एवं आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार कम भी किया जा सकता है-

अब इस पेस्ट को ऊपर बताये हुए अनुपात के हिसाब से देशी घी में मंद आँच पर तब तक तले जब तक आँवले की पिट्ठी, घी लगभग पूरी तरह न छोड़ दे-इस तरह से तैयार की हुई पिट्ठी को कई महीनों तक शीशे या स्टील के बर्तन में सुरक्षित रखा और आवश्यकतानुसार प्रयुक्त किया जा सकता है-

आँवला उबालने के पश्चात् नीचे बर्तन में जो पानी शेष बच रहता है उसे सुरक्षित रख लेना चाहिये और इसी पानी में च्यवनप्राश की जड़ी-बूटियों के जौकुट पाउडर को जो 24 घंटे पहले एक लीटर पानी में भिगाया गया था में मिलाकर मंद आँच पर दो घंटे तक उबालना चाहिये-आँच-लौ जितनी धीमी रहेगी- क्वाथ भी उतना ही बढ़िया बनेगा-

क्वाथ को ठंडा होने पर छान लें और इस छने पानी को लगभग 10-12 घंटे तक एक जगह पर स्थिर रूप से रखा रहने दें जिससे कीट(गंदला पदार्थ)नीचे बैठ जायेगा-छने पानी के साथ कीट चले जाने पर बनने वाले च्यवनप्राश में कड़वाहट आ जाती है-अब इसे सावधानीपूर्वक दूसरे बर्तन में उड़ेल लें जिससे कीट अलग हो जायेगा और जल अलग हो जाएगा-

अब अलग किये हुए औषधीय जल में 1500 ग्राम(डेढ़ किलो)शक्कर डालकर थोड़ी देर तक उबालें तथा इसी बीच गरम दूध के हलके छींटे मारते रहें जिससे मैल ऊपर आ जाता है अब इस मैल को अलग कर दे तथा पिट्ठी को प्रारम्भ से ही ढक कर रखें-अब इसे चाशनी में डाल दें एवं एवं बर्तन को चूल्हें से उतारकर पिट्ठी को चाशनी में खूब घोटे या पिट्ठी को अलग बर्तन में लेकर उसमें तीन तार वाली चाशनी डालकर पेस्ट- सा बना लें-फिर पेस्ट को चाशनी में डालकर एक रस कर लें-

यहाँ यह बात ध्यान रखने योग्य है कि अधिक देर तक भुनी हुई पिट्ठी रखी रहने से उसकी ऊपरी सतह पर काले रंग की कड़ी पपड़ी-सी जम जाती है उसे फेंकना नहीं चाहिये वरन् उसे अलग कर मसल कर पिट्ठी के समान चिकना बनाकर पिट्ठी में ही मिला लेना चाहिए-जब उक्त चाशनीयुक्त पिट्ठी एकरस हो जाये तब कुनकुनी स्थिति(हल्का गरम)में ही क्रमांक-6 से 12 की लिखी औषिधि का पाउडर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में डालकर घुटाई करते रहें-जब लगभग ठंडा हो जाये तब शहद डालकर पूरी तरह मिला लें-अब 24 घंटे तक ठंडा होने के लिए छोड़ दें अब 1 किलो आँवले से लगभग ढाई किलो च्यवनप्राश तैयार है-

अगर ज्यादा आँवले का च्यवनप्राश बनाना है -जैसे तीन किलो आँवले का बनाना है तो सामग्री में 3 से गुणा कर जितनी बैठे-उतनी सामग्री लेनी है-परन्तु चाशनी तीन तार की ही होगी-

च्यवनप्राश ज्यादा गाढ़ा या पतला (नरम) करना है तो चाशनी को क्रमशः थोड़ी गाढ़ी या पहली कर दें अगर अधिक कड़ा सख्त हो गया है तो 20 चम्मच (100 मि.ली.) पानी में 3 चम्मच घी मिलाकर उबालें और जब पानी खौलने लगे तो गाढ़ा च्यवनप्राश उसमें डाल दें-एकरस होते ही उतार कर ठण्डा कर लें-

च्यवनप्राश में मिलाने से पूर्व केशर एवं मकरध्वज को अलग-अलग महीन घोट लिया जाता है तत्पश्चात् इन दोनों को भस्मों में मिलाकर पुनः घुटाई की जाती है फिर 50 ग्राम शहद में सभी को अच्छी तरह मिला लिया जाता है इसके बाद इसे च्यवनप्राश में थोड़ा-थोड़ा डालते हुए मिलाते हैं अच्छी तरह एकरस हो जाने पर एक दिन के लिये इसे बर्तन में खुला छोड़ देते हैं और फिर स्वच्छ डिब्बे में बंद करके रख देते हैं-

सूखा च्यवनप्राश(Chyavanaprash)बनाने की विधि-

पहले जड़ी-बूटियों का क्वाथ एवं शक्कर लेकर उबाले और जब चार तार की चाशनी बन जाये तब कड़ाही को पूरी तरह ठण्डी करें या एक दिन तक रहने दें फिर चाशनी ठण्डी होने पर बूरा बना लें या एक साथ भी बूरा बना सकते हैं और जब बूरा की स्थिति आ जाये तब पिट्ठी एवं पिसा हुआ सूखा पाउडर डालकर अच्छी तरह से मिलाते हुए दुबारा बूरा बना लें इसमें शहद नहीं डाला जाता है संक्षेप में जड़ी बूटी क्वाथ+शक्कर+पिट्ठी+क्रमांक-8 से 12 तक औषधियों का पाउडर-

इस तरह से तैयार दोनों ही प्रकार के च्यवनप्राश(Chyavanaprash)में से किसी एक का सुबह-शाम एक-एक चम्मच दूध के साथ सेवन करते रहने पर व्यक्ति सदैव स्वस्थ बना रहता है-विटामिन-सी की अधिकता के कारण जीवनी-शक्ति स्फूर्ति व प्रसन्नता बढ़ती है और वृद्धावस्था में भी नौजवानों जैसी स्फूर्ति, सक्रियता एवं मस्ती बनी रहती है-

आयुर्वेद शास्त्रों में इसे भूख को बढ़ाने वाला, खाँसी-श्वाँस वात, पित्त रोगनाशक, शुक्र दोष हरने वाला, बुद्धि व स्मरण-शक्तिवर्धक प्रसन्नता, वर्ण एवं कान्तिवर्द्धक बताया गया है-

च्यवनप्राश एक उत्तम आयुर्वेदिक औषध एवं पौष्टिक खाद्य हैजिसका प्रमुख घटक आँवला है यह जठराग्निवर्धक और बलवर्धक है इसका सेवन अवश्य करना चाहिए-

च्वयनप्रास(Chyavanaprash)से लाभ-

  1. बालक, वृद्ध, क्षत-क्षीण, स्त्री-संभोग से क्षीण, शोषरोगी, हृदय के रोगी और क्षीण स्वरवाले को च्वयनप्रास(Chyavanaprash)सेवन से काफी लाभ होता है-
  2. च्वयनप्रास(Chyavanaprash)के सेवन से खाँसी, श्वास, वातरक्त, छाती की जकड़न, वातरोग, पित्तरोग, शुक्रदोष, मूत्ररोग आदि नष्ट हो जाते हैं- 
  3. च्वयनप्रास(Chyavanaprash)स्मरणशक्ति और बुद्धिवर्धक तथा कांति, वर्ण और प्रसन्नता देनेवाला है-
  4. देखे- Memory-स्मरण शक्ति कैसे बढायें
  5. च्वयनप्रास(Chyavanaprash) सेवन से वृद्धत्व की कमजोरी नहीं रहती है- 
  6. यह फेफड़ों को मजबूत करता है तथा दिल को ताकत देता है और पुरानी खाँसी और दमें में बहुत फायदा करता है तथा दस्त साफ आता है- 
  7. च्वयनप्रास(Chyavanaprash) अम्लपित्त में यह बड़ा फायदेमंद है- 
  8. च्वयनप्रास(Chyavanaprash)वीर्यविकार और स्वप्नदोष नष्ट करता है- इसके अतिरक्त यह क्षयरोग और हृदयरोगनाशक तथा भूख बढ़ाने वाला है- 
  9. अब अगर संक्षिप्त में कहा जाय तो पूरे शरीर की कार्यविधि को च्वयनप्रास(Chyavanaprash)सुधार देने वाला है-

मात्रा-

  1. बड़ों को नाश्ते के साथ 15 से 20 ग्राम सुबह शाम 
  2. बच्चों के लिए 5 से 10 ग्राम 
  3. च्यवनप्राश सेवन करने से 2 घंटे पूर्व तथा 2 घंटे बाद तक दूध का सेवन न करें-
वैसे उपरोक्त विधि कठिन है लेकिन आप की जानकारी हेतु लिखी गई है च्यवनप्राश केवल बीमारो की ही दवा नहीं है बल्कि स्वस्थ मनुष्यों के लिए भी उत्तम खाद्य है आँवले में वीर्य की परिपक्वता कार्तिक पूर्णिमा के बाद आती है लेकिन कुछ बाजारू औषध निर्माणशालाएँ(फार्मेसियाँ)धन कमाने व च्यवनप्राश की माँग पूरी करने के लिए हरे आँवले की अनुपलब्धता में आँवला चूर्ण से ही च्यवनप्राश(Chyavanaprash)बनाती हैं और कहीं-कहीं तो स्वाद के लिए इसमें शकरकंद का भी प्रयोग किया जाता है-धन कमाने के लिए स्वार्थी लोगों द्वारा कैसे-कैसे तरीके अपनाये जाते हैं जबकि ताजे आँवलों से और कार्तिक पूनम के बाद ही वीर्यवान च्यवनप्राश बनता है जो फार्मेसियाँ कार्तिक पूनम से पहले ही च्यवनप्राश बनाकर बेचते हैं और लाखों रूपये विज्ञापन में खर्च करते हैं वे करोड़ों रूपये कमाने के सपने साकार करने में ही लगे रहते हैं ऐसे लोगों का लक्ष्य केवल पैसा कमाना होता है उनका मानव के स्वास्थ्य के साथ कोई सम्बन्ध ही नहीं होता है-

देखे-  Food-भोजन की इक्छा न होने पर करे ये इलाज 

Upcharऔर प्रयोग-

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