क्या आपका बच्चा(Child)जादा गुस्सा करता है

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वैसे तो हर माता-पिता  की चाहत होती है कि वे अपने बच्चों(Child)को बेहतरीन परवरिश दें और हर माता-पिता ये कोशिश भी करते हैं फिर भी ज्यादातर Parents बच्चों के Behaviour और Performance से खुश नहीं होते है उन्हें अक्सर शिकायत करते सुना जा सकता है कि बच्चे ने ऐसा कर दिया बच्चे ने वैसा कर दिया लेकिन इसके लिए काफी हद तक पैरंट्स ही जिम्मेदार होते हैं क्योंकि अक्सर किस हालात में क्या कदम उठाना है यह वे स्वयं तय ही नहीं कर पाते है कि किस स्थिति में पैरंट्स(Parents)को क्या करना चाहिए-

strongly anger child


जब भी आपका Child स्कूल जाने या पढ़ाई करने से बचे तो आप क्या करते हैं अधिकतर माता-पिता अपने बच्चे पर गुस्सा ही करते हैं कोई-कोई मां कहती हैं कि तुमसे बात नहीं करूंगी और पापा कहते हैं कि बाहर खाने खिलाने नहीं ले जाऊंगा तथा खिलौना खरीदकर नहीं दूंगा-यही बच्चा(Child)जब थोड़ा बड़ा होता है तो पैरंट्स उससे कहते हैं कि कंप्यूटर वापस कर और मोबाइल वापस कर-तुम बेकार लड़के हो या तुम बेवकूफ हो-अपने भाई-बहन को देखो-वह पढ़ने में कितना अच्छा है और तुम बुद्धू तथा कभी-कभार थप्पड़ भी मार देते हैं-

पहले आप इसकी वजह(Reason)जाने-

आखिर हमें क्या करना चाहिए-

सबसे पहले हम वजह जानने की कोशिश करें कि वह पढ़ने से क्यों बच रहा है इसकी कई वजहें हो सकती हैं जैसे कि हो सकता है उसका आईक्यू लेवल(IQ Level)कम हो सकता है या फिर कोई टीचर नापसंद हो सकता है वह उस वक्त नहीं बाद में पढ़ना चाहता हो आदि कई कारण हो सकते है-  

Child(बच्चा)स्कूल जाने लगे तो उसके साथ बैठकर Discus करें कि कितने दिन स्कूल जाना है और कितनी देर पढ़ना है आदि-इससे बच्चे को clear रहेगा कि उसे स्कूल जाना है कोई बहाना नहीं चलेगा और उसे यह भी बताएं कि स्कूल में दोस्त मिलेंगे जो उनके साथ खेलेंगे-

अगर बच्चा स्कूल से उदास लौटता है तो प्यार से पूछें कि क्या बात है- क्या टीचर ने डांटा या साथियों से लड़ाई हुई है अगर बच्चा बताए कि फलां टीचर या बच्चा परेशान करता है तो उससे कहें कि हम स्कूल जाकर बात करेंगे और लापरवाही न करें बल्कि आप स्कूल जाकर बात करें भी लेकिन सीधे आप टीचर को दोष कभी न दें-जो बच्चे हाइपरऐक्टिव(Hyper Active)होते हैं उन्हें अक्सर टीचर शैतान मानकर Ignore करने लगती हैं-ऐसे में टीचर से रिक्वेस्ट करें कि बच्चे को Activities में शामिल करें और उसे मॉनिटर(Monitor)जैसी जिम्मेदारी दें-इससे वही बच्चा जिम्मेदार बनता है-

आप क्या करें-

जिस वक्त वह नहीं पढ़ना चाहता है उस वक्त आप बच्चे को बिलकुल भी मजबूर न करें वरना वह बच्चा(Child)जिद्दी हो जाएगा और पढ़ाई से बचने लगेगा कुछ देर रुक कर फिर थोड़ी देर बाद पढ़ने को कहें-

आप उसके पास बैठें और उसकी पढ़ाई में खुद अपने आप को शामिल करें और उससे पूछें कि आज क्लास में क्या-क्या हुआ है बच्चा थोड़ा बड़ा है तो आप उससे कह सकते हैं कि तुम मुझे यह चीज सिखाओ क्योंकि यह तुम्हें अच्छी तरह आता है इससे वह खुश होकर सिखाएगा और साथ ही साथ खुद भी सीखेगा-

छोटे बच्चों को किस्से-कहानियों के रूप में काफी कुछ सिखा सकते हैं और उसे बातों-बातों और खेल-खेल में सिखाएं जैसे किचन में आलू गिनवाएं,बिंदी से डिजाइन बनवाएं आदि-आदि यानि कि पढ़ाई को थोड़ा दिलचस्प तरीके से आप पेश करें-

हर बच्चे की पसंद और नापसंद होती है उसकी पसंद के सब्जेक्ट पर ज्यादा फोकस करें और कभी-कभी उसके फ्रेंड्स को घर बुलाकर उनको साथ पढ़ने बैठाएं-इससे पढ़ाई में उसका मन जादा लगेगा-

बच्चे(Child)के साथ क्या न करें-

बच्चा अगर उलटा बोले या गालीगलौच करे तो फिर अक्सर पैरंट्स बुरी तरह रिएक्ट करते हैं और बच्चे को उलटा-सीधा बोलने लगते हैं या फिर उस पर चिल्लाते हैं कि फिर से बोलकर दिखा और कई माताएं तो रोने लगती हैं या फिर बातचीत बंद कर देती हैं या फिर ताने मार देती कि मैं तो बुरी हूं और अब क्यों आए हो मेरे पास...? 

यदि बच्चा आप पर चीखे-चिल्लाए तो भी आप उस पर चिल्लाएं नहीं आप उस वक्त छोड़ दें लेकिन खुद को पूरी तरह नॉर्मल भी न दिखाएं-वरना वह सोचेगा कि वह कुछ भी करेगा तो आप पर कोई फर्क नहीं पड़ता है आप बाद में जब उसका गुस्सा शांत हो जाए तो बैठकर बात करें कि इस तरह बात करना आपको बुरा लगा और इससे उसके दोस्त, टीचर सभी उसे बुरा बच्चा मानेंगे यह कह कर उसे टाल दें आप इसे लेकर बार-बार बच्चे को कुरेदे नहीं अगर बार-बार बोलेंगे तो उसकी Ego हर्ट होगी-हां, कहानी के जरिए बता सकते हैं कि एक बच्चा था जो गंदी बातें करता था-सबने उससे दोस्ती खत्म कर ली आदि-आदि-

आप अपने बच्चे के सामने गाली या खराब भाषा का इस्तेमाल न करें क्युकि वह जो सुनेगा आपसे वही सीखेगा बल्कि उसे बताएं कि ऐसी भाषा तो गलत लोग बोलते हैं उनका Background और Work Culture बिल्कुल अलग है और तुम्हारा बिल्कुल अलग है-  

पांच-छह साल से बड़ा बच्चा जान-बूझकर पैरंट्स की मानहानि करने और खुद को Powerful दिखाने के लिए बोलता है कि आप अच्छे नहीं हैं और पैरंट्स भी बहुत आसानी से हर्ट हो जाते हैं बल्कि आप इसके बजाय कह सकते हैं कि तुम इतने अनलकी हो कि तुम्हारी मां गंदी है इससे उसका पावरफुल वाला अहसास खत्म होगा-

आपका बच्चा यदि चोरी करे या किसी की चीजें उठा लाए तो पैरंट्स बच्चे को पीटने या डांटने लगते हैं और भाई बहनों के आगे उसे जलील करते हैं कि अपनी चीजें संभालकर रखना क्योंकि यह चोर है तथा कई बार कहते हैं कि तुम हमारे बच्चे नहीं हो सकते हो और अगर कोई दूसरा ऐसी शिकायत लाता है तो वे मानने को तैयार नहीं होते कि हमारा बच्चा ऐसा कर सकता है बल्कि वे पर्दा डालने की कोशिश करने लगते हैं

आप बच्चे को चोरी करने पर सजा जरूर दें लेकिन सजा मार-पीट के रूप में नहीं बल्कि बच्चे को पसंदीदा प्रोग्राम नहीं देखने देना-उसे आउटिंग पर नहीं ले जाना या फिर खेलने नहीं देना जैसी सजा दे सकते हैं या जो चीज उसे जादा पसंद है उसे कुछ देर के लिए उससे दूर कर दें-

कुछ चीजों पर आप छुप कर नजर रक्खें-

आप बच्चे(Child)का बैग रेग्युलर चेक करें लेकिन ऐसा उसके सामने कभी न करें-

उसमें कोई भी नई चीज नजर आए तो पूछें कि कहां से आई है और यदि बच्चा झूठ बोले तो प्यार से पूछें-उसकी बेइज्जती न करें और न ही उसके साथ मारपीट करें बल्कि चीज लौटाने को कहें लेकिन पूरी क्लास के सामने माफी न मंगवाएं और अगर बच्चा अगर पांच साल से बड़ा है तब तो बिल्कुल भी नहीं-वह क्लास के सामने बोल सकता है कि यह चीज मुझे मिल गई थी-हाँ उसे अकेले में सख्ती से जरूर समझाएं कि उसने गलत किया है ये चोरी की आदत बहुत बुरी बात है और अगली बार ऐसा नहीं होना चाहिए- क्युकि कभी भी बच्चे को झूठी पनाह नहीं देनी चाहिए-

अगर कोई कहता है कि आपके बच्चे ने चोरी की है तो यह न कहें कि वह ऐसा नहीं कर सकता है इससे उसे शह मिलती है बल्कि ये कहें कि हम अकेले में पूछेंगे और सबके सामने न पूछें लेकिन अकेले में आप पूरी इंक्वायरी करें और बच्चे को मोरल एजुकेशन दें तथा उसे बताएं कि आप कोई चीज उठाकर लाएंगे तो आप टेंशन में रहेंगे कि कोई देख न ले-इस टेंशन से बचने का अच्छा तरीका है कि चोरी न की जाए-

पैरंट्स की जिम्मेदारी है कि वे बच्चे को जरूरत की सारी चीजें उपलब्ध कराएं-इससे उसका झुकाव चोरी की ओर नहीं होगा-यदि आपका बच्चा झूठ बोले तो अक्सर मारपीट पर उतारू हो जाते हैं तथा खुद को कोसने लगते हैं कि हमारी तो किस्मत ही खराब है उन्हें लगता है कि बच्चे ने बहुत बड़ा पाप कर दिया है उसके दोस्तों को फोन करके पूछते हैं कि सच क्या है-जब दूसरा कोई शिकायत करता है तो बिना सच जाने बच्चे की ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं कि हमारा बच्चा ऐसा नहीं कर सकता है वे दूसरों के सामने अपनी ईगो को हर्ट नहीं होने देना चाहते है-

तब क्या करना चाहिए-

जब आपका बच्चा झूठ बोले तो ओवर-रिएक्ट न करें और सबसे सामने न डांटें और न ही उसे सही-गलत का पाठ पढ़ाएं आप इसके बजाय उसे उदाहरण देकर उस काम के नेगेटिव पक्ष बताएं तथा उदाहरण में खुद को सामने रखें जैसे-मैं जब छोटा था तो क्लास बंक करता था और घर में झूठ बोलता था लेकिन बाद में मैं पढ़ाई में पीछे रह गया या बाद में ढेर सारा काम करना पड़ता था तथा साथ ही, झूठ बोलने की टेंशन अलग होती थी-इस तरह से बात करने से वह खुद को कठघरे में खड़ा महसूस नहीं करेगा-

उसे समझाएं कि खुद में सच सुनने की हिम्मत पैदा करें और हालात का सामना करें तथा घर में ऐसा माहौल रखें कि बच्चा बड़ी से बड़ी गलती के बारे में बताने से डरे नहीं-बच्चा झूठ तभी बोलता है जब उसे मालूम होता है कि सच कोई सुनेगा नहीं-उसके भरोसा दिलाएं कि उसकी गलती माफ हो सकती है-

देखे-  आप अपने बच्चो को मनमानी से कैसे रोकें

Upcharऔर प्रयोग-

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