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30 नवंबर 2016

अशोक के पेड(Ashoka Tree)का आयुर्वेदिक उपयोग

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अशोक के वृक्ष(Ashoka Tree)से आप सभी लोग तो परिचित ही हैं अक्सर इस वृक्ष को सजावट के लिए लगाया जाता है ये 25 से 30 फुट ऊंचा यह वृक्ष आम के वृक्ष की तरह सदा हरा−भरा रहता है संस्कृत में इसे हेमपुष्प ताम्र पल्लव आदि नामों से पुकारते हैं यूं तो फारबीएसी जाति का यह वृक्ष देखने में सुदंर होता है साथ ही इसमें दिव्य औषधीय गुण भी होते हैं अभी तक अशोक वृक्ष(Ashoka Tree)की दो किस्में ज्ञात हैं पहले किस्म के अशोक की पत्तियां रामफल के वृक्ष जैसी तथा दूसरे किस्म के अशोक की पत्तियां आम की पत्तियों जैसी परन्तु किनारों पर लहरदार होती हैं-

अशोक के पेड Ashoka Tree

अशोक के लाभ-


1- औषधीय प्रयोग के लिए ज्यादातर इसकी पहली किस्म का ही प्रयोग किया जाता है दवा के रूप में अशोक के वृक्ष(Ashoka Tree)छाल, फूल तथा बीजों आदि का प्रयोग किया जाता है चूंकि बगीचों में सजावट के लिए प्रयुक्त अशोक तथा असली अशोक के गुणों में बहुत अन्तर होता है इसलिए जरूरी है कि औषधि के रूप में असली अशोक का ही प्रयोग किया जाए-असली अशोक वृक्ष(Ashoka Tree)की छाल स्वाद में कड़वी, बाहर से घूसर तथा भीतर से लाल रंग की होती है तथा छूने पर यह खुरदरी लगती है-

2- अशोक का रस कसेला,कड़वा तथा ठंडी प्रकृति का होता है यह रंग निखारने वाला, तृष्णा व ऊष्मा नाशक तथा सूजन दूर करने वाला होता है यह रक्त विकार, पेट के रोग, सभी प्रकार के प्रदर, बुखार, जोड़ों के दर्द तथा गर्भाशय की शिथिलता भी दूर करता है-

3- अशोक के वृक्ष(Ashoka Tree)मुख्य प्रभाव पेट के निचले हिस्सों पर पड़ता है गर्भाशय के अलावा ओवरी पर भी इसका प्रभाव पड़ता है महिलाओं की प्रजनन शक्ति बढ़ाने में यह सहायक होता है अशोक के वृक्ष में कीटोस्टेरॉल पाया जाता है जिसकी क्रिया एस्ट्रोजन हारमोन जैसी होती है-

4- अनेक बीमारियों के निदान के लिए अशोक के विभिन्न भागों का प्रयोग किया जाता है यदि कोई स्त्री स्नान के उपरांत स्वच्छ वस्त्र पहन कर अशोक की आठ नई कलियों का सेवन करे तो उसे मासिक धर्म संबंधी कष्ट कभी नहीं होता। साथ ही इससे बांझपन भी मिटता है साथ ही अशोक के फूल दही के साथ नियमित रूप से सेवन करते रहने से भी गर्भ स्थापित होता है-

5- अशोक की छाल में एस्टि्रन्जेंट(कषाय कारक)और गर्भाशय उत्तेजना नाशक संघटक विद्यमान हैं यह औषधि गर्भाशय संबंधी रोगों में विशेष लाभ करती है फायब्रायड ट्यूमर के कारण होने वाले अतिस्राव में यह विशेष रूप से लाभकारी है-

अशोक वृक्ष(Ashoka Tree)के उपयोग-


1- अशोक की छाल के चूर्ण और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर, गाय के दूध के साथ एक−एक चम्मच दिन में तीन बार कुछ हफ्तों तक लेने से श्वेत प्रदर में बहुत लाभ होता है-
2- रक्त प्रदर के लिए अशोक की छाल के काढ़े का प्रयोग किया जाता है इसे अशोक की छाल को सफेद जीरे, दालचीनी तथा इलायची के बीजों के साथ उबालकर बनाया जा सकता है इसका सेवन भी दिन में तीन बार किया जाना चाहिए-
3- अशोक गर्भाशय संबंधी रोगों में विशेष रूप से लाभकारी है गुर्दे का दर्द, मासिक धर्म के साथ पेट दर्द तथा मूत्र संबंधी रोगों में अशोक की छाल के मदर टिंक्चर का प्रयोग किया जाता है-
4- अशोक के बीज पानी में पीसकर लगभग दो चम्मच मात्रा नियमित रूप से लेने पर मूत्र न आने की शिकायत दूर होती है इससे पथरी के कष्ट में भी आराम मिलता है-
5- अति रज स्राव की अवस्था में छाल का क्वाथ दिया जाता है इसे बनाने के लिए अशोक की एक पाव छाल को लगभग चार लीटर पानी में उबालें और लगभग एक चौथाई पानी के शेष रहने पर उसमें लगभग एक किलो शक्कर डालकर फिर उसे पकाएं-इस शरबत की लगभग दस ग्राम मात्रा को दिन में तीन से चार बार पानी के साथ लेने पर तुरन्त रक्त स्राव रुकता है रक्त स्राव यदि दर्द के साथ हो तो चौथे दिन से शुरू करके रज स्राव बंद न होने तक नियमित रूप से यह क्वाथ दिया जाना चाहिए-
6- 45−50 वर्ष की आयु में स्त्रियों में जब रजोनिवृत्ति का संधिकाल आता है उस समय अशोक के संघटक हारमोन्स का संतुलन बिठाने का जटिल कार्य करते हैं-
7- पान के साथ अशोक के बीजों का एक चम्मच चूर्ण चबाने से सांस फूलने की शिकायत नहीं रहती है-
8- यह एक अच्छा रक्त शोधक भी है दवाई के रूप में प्रयोग करने के लिए अशोक की छाल को पौष या माघ महीने में इकट्ठा कर सूखी व ठंडी हवा में परिरक्षित रखा जाता है-जबकि इसके फूलों को वर्षा ऋतु में और कलियों को शरद ऋतु से पहले इकट्ठा करना चाहिए-इसके सूखे हुए भागों का चूर्ण छह माह से एक वर्ष तक प्रयोग किया जा सकता है-

Upcharऔर प्रयोग-

28 नवंबर 2016

फोड़े-फुंसी-सूजन-कांख का फोड़े का उपचार

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आजकल वातावरण भी फोड़े-फुंसियों(Boils-Pimple) को उत्पन्न करने का कारण बनता है तथा कुछ संक्रामक रोगों के कारण शरीर पर फोड़े-फुंसियां निकल आती हैं फोड़े-फुंसियों के निकलने पर उनमें खुजली-जलन होती है तथा रोगी बेचैनी महसूस करता है-

फोड़े-फुंसी-सूजन-कांख का फोड़े का उपचार

फोड़े-फुंसी(Boils-Pimple)होने का मुख्य कारण-


अधिक मिर्च-मसाले खाने, तेल तथा डालडा घी के अधिक सेवन के कारण भी फुंसियां निकल आती हैं तथा बालों की जड़ों में एक सूक्ष्म कीटाणु का संक्रमण होने से फोड़े-फुंसियां निकल आती हैं इसके अलावा खून की खराबी, आम का अधिक प्रयोग करने, कच्ची अमिया खाने, आम की चेंपी लगने, मच्छर के काटने आदि के कारण भी फुंसियां निकल आती हैं त्वचा के नीचे वाली परत में सूजन या दर्द के बाद पीव भर जाती है वही फुड़िया या फुन्सी होती है-कई बार-पैरों या जांघों में एक बाल के साथ दूसरा बाल निकलने की कोशिश करता है तब बलतोड़ (फोड़ा)बन जाता है तथा बरसात के गंदे पानी के शरीर से देर तक लगने की वजह से भी कभी-कभी फुंसियां उत्पन्न हो जाती हैं-

क्या है फोड़े-फुंसी(Boils-Pimple)की पहचान-


फोड़े-फुन्सी में पहले दर्द होता है इसके बाद जब वे पक जाती हैं तो उनमें कील और पीव पड़ जाती है कुछ फोड़े-फुन्सी नुकीले बन जाते हैं और तब वे फूट जाते हैं उनमें चसक तथा लपकन पड़ती है कुछ फुंसियां बिना पके ही बैठ जाती हैं लेकिन इनके भीतर पानी तथा पीव भरी रहती है इसलिए कुछ दिनों बाद वे पुन: पककर फटती हैं इनमें दर्द तथा जलन भी होती है-

फोड़े फुंसी के लिए घरेलू उपचार (Boils-Pimple)-


1- फोड़े और फुन्सी को ठीक करने के लिए आप 1 से 3 ग्राम त्रिफला का चुर्ण(Triphala Powder)भी खा सकते हैं और इस चुर्ण को पानी में घोलकर फोड़े और फुंसी को धो भी सकते हैं दोनों ही प्रकार से त्रिफला के चुर्ण का प्रयोग करने से फोड़े और फुंसी जल्दी ठीक हो जाते हैं-

2- यदि किसी व्यक्ति को फुंसियाँ हो गई हैं तो इन्हें ठीक करने के लिए कुछ अरंडी के बीज(Castor Seeds)लें और उनकी गिरी को पीस लें अब आप इसकी पुल्टिस बना लें और इसे फोड़े या फुंसी पर बांध लें इस प्रयोग से फोड़ा या फुंसी जल्दी ही ठीक हो जायेंगें-

3- यदि आपकी फोड़ा या फुंसी पक गई हैं और उसमें से निरंतर खून बह रहा हैं तो आप अधिक रक्त बहने से रोकने के लिए सुहागा(Borax)लें और उसे बारीक पीस लें-इसके बाद इसका लेप फोड़े या फुंसी पर करें-इसे लगाने के साथ ही खून बहना बंद हो जाएगा तथा घाव भी जल्द ही भर जाएगा-

4- फोड़े और फुंसी होने पर आम के फल की गुठली(Mango’s Seed)लें और अनार और नीम के पेड़ की कुछ पत्तियां लें और उन्हें पीस लें इन तीनों को अच्छी तरह से पिसने के बाद इसे फोड़े और फुंसी पर लगा लें-आपको लाभ काफी राहत मिलेगी-

5- फोड़े और फुंसियों से छुटकारा पाने के लिए थोडा कालाजीरा(Black Cumin)लें और उसके साथ थोडा सा मक्खन लें-अब इन दोनों को एक साथ खा लें-

कांख की गांठ (Armpit Lumps)-


1- कांख के नीचे या आस-पास अगर गांठ निकल जाएँ तो इसे ठीक करने के लिए आप कुचला लें और उसे पानी के साथ पीस लें-पिसने के बाद इसे थोडा गर्म कर लें और इसका लेप फोड़े या फुंसी पर लगायें-फोड़ा ठीक होने के बाद भी कुछ दिन लेप का प्रयोग अवश्य करते रहे जिससे दुबारा निकलने की संभावना नहीं रहती है-कुचला आसानी से पंसारी से मिल जाता है-

2- इसके अलावा आप कांख के फोड़े या फुंसी को ठीक करने के लिए अरंडी का तेल लें, गुड़ लें, गुग्गल तथा कुछ राई के दाने लें और इन्हें एक साथ पीस लें फिर पिसने के बाद इस मिश्रण में थोडा सा पानी मिला लें और इसे थोडा गर्म कर लें तथा अब इस मिश्रण को  आप फोड़े पर लगा लें-फोड़ा जल्द ही बिल्कुल ठीक हो जाएगा-

कंठमाला(Scrofula) की गांठों का उपचार-


1- जब गले में दूषित वात, पित्त और मेद गले की पीछे की नसों में एक साथ इकट्ठे हो जाते हैं और धीरे-धीरे ये फैलने लग जाते हैं जिसके कारण गले में छोटी-छोटी गांठे उत्पन्न हो जाती हैं-उन्हें गण्डमाला या कंठमाला कहते हैं गण्डमाला के कारण निकली हुई ये गांठे गर्दन में निकलना शुरू होती हैं और धीरे-धीरे कंधे तथा जांघों में हो जाती हैं-ये गांठे देखने में बहुत ही छोटी होती हैं और फिर धीरे-धीरे ये पक जाती हैं अगर आपके भी गले में कंठमाला का रोग हो गया हैं तो इसे ठीक करने के लिए आप नीचे दिया गया उपाय आजमा सकते हैं-

2- कंठमाला की गांठों को ठीक करने के लिए क्रौंच के बीज(Heron Seeds)लें और उन्हें घीस लें और  इसके बाद इसका लेप गांठों पर करें आप जल्द गांठों से राहत पाने के लिए आप इस लेप को लगाने के साथ-साथ अरंडी के पेड़ की पत्तियों के लगभग 80 ग्राम रस का भी सेवन कर सकते हैं-

3- कंठ माला की गांठों से जल्द मुक्ति पाने के लिए कफ बढाने वाले पदार्थों का सेवन बिल्कुल सेवन न करें-

फोड़े से पस या मवाद बहने(Flowing Pus) के लिए उपचार-


1- फोड़ा या फुंसी जब पक जाए और उसमें से पस या मवाद बहने लगे तथा इसके साथ ही पीड़ा भी हो तो थोडा अरंडी का तेल(Castor Oil)लें और आम के पत्तों की राख लें और अब इन दोनों को एक साथ मिलाकर आप अपनी फुंसी पर लगा लें-जल्द ही फोड़ा ठीक हो जाएगा-

2- फुंसियों को ठीक करने के लिए थूहर का पत्ता(Euphorbia Leaves)लें और उस पर अरंडी का तेल(Castor Oil)लगा लें अब इसके बाद इस पत्ते को हल्का सेंक लें फिर इस पत्ते को उल्टा कर लें और इसे फोड़े पर बांध दें-इस पत्ते को बांधने से फोड़े से सारा मवाद बाहर निकल जाएगा और जल्द ही फोड़ा या फुंसी ठीक हो जायेगा-

पीठ पर फोड़ा(Boil On Back)होने पर-


यदि किसी व्यक्ति की पीठ पर फोड़ा हो जाये तो कोई भी व्यक्ति इसे ठीक करने के लिए वह गेहूं के आटे(Wheat flour)का प्रयोग कर सकता हैं अप इसके लिए थोडा सा आटा लें और उसमें थोडा नमक और पानी डाल लें और अब आप इस आटे की पुल्टिस बना लें और इसे पीठ के फोड़े पर लगा लें चार या पांच दिन लगातार लगाने से फोड़ा ठीक हो जाएगा-

सूजन(Swelling)होने पर करे उपचार-


1- शरीर में सूजन आ जाने पर अनानास का एक पूरा फल प्रतिदिन खाने से आठ दस दिनों में ही सूजन कम होने लगती है तथा पन्द्रह बीस दिनों में पूर्ण लाभ हो जाता है-

2- अगर घाव में सूजन हो तो रेंड (एरण्ड) के पत्ते का तेल लगाकर गर्मकर बांध दें आपकी सूजन खत्म हो जायेगी-

3- हरी मकोय के अर्क में अमलतास के गूदे को पीसकर सूजन वाली जगह पर लेप करने से सूजन कम हो जाती है-

4- ग्वारपाठे के टुकड़े को एक ओर से छीलकर उस पर थोड़ी सी पिसी हुई हल्दी छिड़के तथा आग पर गरम करके सूजन वाले स्थान पर बांध दें तो सूजन कम हो जाती है इसे तीन चार बार बांधना चाहिए-

अण्डकोषों की सूजन(Andkoshon Inflammation)-


तम्बाकू के हरे पत्तों को भी आग पर सेंककर बांधने से अण्डकोषों की सूजन दूर हो जाती है यदि हरा पत्ता न मिल सके-तो आप सूखे पत्ते पर पानी छिड़ककर उसे मुलायम कर लें-तत्पश्चात उस पर तिल का तेल चुपड़कर आग पर गर्म करें और अण्डकोशों पर बांध दें-


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Upcharऔर प्रयोग-

उत्तेजना कम है तो इन चीजों से दूर रहें Stimulation Less then Stay Away from these Things

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उत्तेजना कम है तो इन चीजों से दूर रहें Stimulation Less then Stay Away from these Things-

लोग आज फटाफट के बाजार में उपलब्ध चीजों के आदी होते जा रहे है लेकिन क्या आप जानते है कि कौन सी चीजें है जो आपकी उत्तेजना(Excitement)को प्राकृतिक रूप से नष्ट करते हैं और ये पदार्थ पुरुषों को कमजोर बना सकते हैं इसलिए खाने की ऐसी चीजों को पहचान कर आज ही अपनी खाने की लिस्ट से बाहर कर दें जो आपकी उत्तेजना(Excitement)को कम कर सकती है आइए जानते हैं ऐसी ही चीजों के बारे में-

fast food

क्या-क्या नुकसान दायक है-


  1. चिप्स आपकी Stimulation-उत्तेजना के साथ-साथ आप के शरीर की कोशिकाओं और उतकों को भी नुकसान पहुंचाती है चूँकि चिप्स पुराने तेल में तले होने के साथ-साथ उच्च तापमान(High Temperature)पर निर्मित किए जाते हैं इसीलिए इन्हें खाना आपकी सेहत(Health)के लिए लाभदायक नहीं होता है-
  2. कॉर्न फ्लेक्स(Corn flakes)पुरुषों के लिए नुकसानदायक होता है इसके अधिक सेवन से सेक्स लाइफ(Sex Life)पर बुरा प्रभाव पड़ता है और ये आपकी सेक्स Stimulation को भी कम करता है-
  3. पनीर(cheese)में बहुत अधिक फैट होता है और अधिक वसा पुरुषों को नुकसान पहुंचा सकते हैं इन उत्पादों के ज्यादा सेवन से शरीर में जहरीले(Toxic)पदार्थ बनते हैं साथ ही, ईस्ट्रोजेन, प्रोजेस्ट्रोन और टेस्टोस्ट्रोन जैसे हार्मोन्स(Hormones)के निर्माण में भी रूकावट आती है-नियमित रूप से न खाएं-

  4. सोयाबीन में फोटोईस्ट्रोजेन होते हैं जो पुरूष सेक्स हॉर्मोन से Competition करते हैं इससे पुरूषों में प्रजनन, स्तन विकास और बालों के गिरने जैसी समस्याएं हो सकती हैं-
  5. ज्यादा कॉफी पीना पुरुषों के लिए नुकसानदायक हो सकता है इसके अधिक सेवन से शरीर में तनाव उत्पन्न करने वाला हॉर्मोन कॉर्टिसॉल बनने लगता है कैफीन की अधिक मात्रा से हार्मोन असन्तुलन और तनाव हो सकता है-
  6. सोडा और सुगंधित पेय पदार्थों के सेवन से वजन और मूड में भारी उतार-चढ़ाव हो सकता है इन पेय पदार्थों से मोटापा,दांतों में छेद,डायबिटीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं साथ ही पुरुषों की Excitement पर भी इसका नेगेटिव प्रभाव पड़ता है-
  7. वे पुरुष जो बहुत अधिक पैकिंग फूड का सेवन करते हैं उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए क्योंकि इनकी कोटिंग में कुछ खास किस्म का मेटल इस्तेमाल किया जाता है जो पुरुषों की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जा सकता है-
  8. खराब क्वालिटी के तेल में बने पदार्थ फ्री रैडिकल उत्पन्न करते हैं जो कि पुरुषों के शरीर के लिए नुकसान दायक होते हैं-
  9. मिंट भले ही सांस की बदबू दूर करने का सबसे बेहतरीन उपाय है लेकिन काम वासना पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है मिंट में मेंथोल होता है जिससे Stimulation  में कमी होती है- 
  10. शराब पीने के बाद आप अच्छा महसूस कर सकते हैं लेकिन इससे नींद आती है और आप अपने वातावरण के प्रति कम संवेदनशील हो जाते हैं शराब से ऐसी रासायनिक क्रिया आरम्भ हो जाती है जो टेस्टोस्ट्रोन के उत्पादन को कम करती है ऐसा होना पुरुषों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है-
  11. जंकफूड की हाइड्रोजन युक्त वसा टेस्टोस्ट्रोन स्तर को कम करती है और पुरुषों में निम्न गुणवत्ता वाले और असमान्य शुक्राणु उत्पन्न करती है-
  12. REED MORE-  नपुंसकता-स्वप्नदोष की दवा Impotence Wetdreams-Medicine-Part-1
Upcharऔर प्रयोग-

27 नवंबर 2016

एक दिन में कितनी चीनी लेना चाहिये

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जी हाँ -छह चम्मच से ज्यादा चीनी(Sugar)मीठे जहर का काम कर सकती है अगर लोग मधुमेह, दांतों की सड़न और मोटापे की बीमारी का शिकार होने से बचना चाहते हैं तो उन्हें दिन भर में छह चम्मच से कम चीनी(Sugar)ही लेनी चाहिए इसमें फलों में मौजूद चीनी को भी शामिल किया गया है-

एक दिन में कितनी चीनी लेना चाहिये

छह चम्मच चीनी(Sugar) का मतलब है करीब 25 ग्राम चीनी और ध्यान देने लायक बात यह है कि अगर आप शहद ले रहे हैं या फिर फलों का रस पी रहे हैं तो उसमें मौजूद मीठे की मात्रा को गिनना भी जरूरी है इसे फ्री शुगर कहा जाता है फ्री शुगर में मोनोसैक्राइड और डायसैक्राइड मौजूद होते हैं पैक्ड फूड में भी इन्हें मिलाया जाता है जैम और टोमैटो केचप जैसी चीजों में भी इनका इस्तेमाल होता है-

फिगर अच्छी रखने के लिए लोग खाने पीने पर काबू करते हैं कई बार तो चीनी को अपने आहार से पूरी तरह निकाल ही देते हैं कोल्ड ड्रिंक पीने का मन हुआ तो डाइट कोक ले ली

डाइट कोक या पेप्सी लाइट जैसे कोल्ड ड्रिंक अक्सर विवादों में घिरे रहे हैं कंपनियां इनमें 0 कैलोरी होने का दावा भी करती हैं मिठास के लिए इनमें चीनी की जगह कई तरह के रसायनों का इस्तेमाल होता है अब तक माना जाता रहा है कि भले ही इनमें चीनी ना हो, लेकिन ये रसायन हारमोन पर कुछ इस तरह से असर डालते हैं कि भूख बढ़ने लगते है और मीठा खाने का मन होने लगते है यानी कुल मिला कर व्यक्ति का वजन बढ़ ही जाता है-


Upcharऔर प्रयोग-

26 नवंबर 2016

किशमिश के स्वास्थ लाभ क्या हैं

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किशमिश(Raisins)को सभी लोग जानते है हर घर में सभी लोग किसी न किसी रूप में प्रयोग करते है लेकिन क्या आपको पता है कि किशमिश एक औषिधि भी है इसे किन-किन रोगों के लिए प्रयोग में लिया जा सकता है और इसके क्या लाभ है आइये जाने इसके क्या लाभ है-

किशमिश के स्वास्थ लाभ क्या हैं

धातु-क्षीणता(Semen impairment) में लाभकर-

दो माह तक नियमित रूप से सुबह के समय नाश्ते में यदि 25 ग्राम किशमिश का उपयोग किया जाता है तो यकीन माने धातुक्षीणता(Semen impairment) की बीमारी समाप्त हो जाती है-

अंडकोष(testicles) का फूल जाना -

बहुत से लोगो को अंडकोष में पानी भरने की शिकायत रहती है तथा अंडकोष फूल जाता है तो आप कुछ दिन तक किशमिश का सेवन शुरू कर दे आपको लाभ मिल जाएगा-

पीलिया(jaundice) में इसके लाभ-

पीलिया की बिमारी यकृत(लीवर) की कमजोरी और शरीर में खून की कमी(Anemic) के कारण होती है लेकिन किशमिश में लौह तत्व या आयरन बहुत अधिक मात्रा में मौजूद रहता है जो खून को बढाने में आपकी मदद करता है यकृत की कमजोरी के कारण पीलिया के रोगी अक्सर कब्ज(Constipation) से ग्रस्त रहते है किन्तु किशमिश की प्रकृति दस्तावर(Cathartic)एवं कब्जनाशक(Constipation destructor)है इन्ही कारणों से पीलिया के रोगियों के लिए किशमिश का सेवन बहुत ही लाभकारी है -

मुंह की दुर्गन्ध(Mouth deodorant) से छुटकारा-

कफ-विकृति ,अजीर्ण,अपच आदि कारणों से यदि मुख से दुर्गन्ध आती हो,तो कुछ दिनों तक नित्य किशमिश को मुंह में चबा-चबाकर खाने से मुख की दुर्गन्ध दूर हो जाती है-

सावधानियां(Precautions)-

किशमिश में कार्बोहाइड्रेट(Carbohydrates) की मात्रा बहुत अधिक(77.3%) होती है इसलिए डायबिटीज के रोगियों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए किशमिश दस्तावर होती है इसलिए अतिसार रोगियों को किशमिश के सेवन से बचना चाहिए इसकी तासीर भी गर्म होती है इसलिए उन बच्चो के लिए भी किशमिश का सेवन हानिकारक है जो ग्रीष्म और वर्षा ऋतु में फोड़े-फुन्सी के शिकार हो जाते है-


Upcharऔर प्रयोग-

25 नवंबर 2016

युवाओं में होने वाला एक आम डर

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आजकल देखा जा रहा है कि अधिकतर युवाओं में महिलाओं की अपेक्षा शारीरिक संबंधों के प्रति उनकी रुचि कहीं अधिक होती है और इसमें भी कोई दो राय भी नहीं है कि प्रेम या विवाहित संबंधों में भी किसी पुरुष की दिलचस्पी शारीरिक संबंधों के प्रति ही ज्यादा रहती है पुरुषों के विषय में ऐसा माना जाता है कि वह इस मामले में बहुत ज्यादा सक्रिय रहते हैं-

युवाओं में होने वाला एक आम डर

लेकिन क्या आप जानते हैं खुद को सक्षम(Capable) समझने वाले पुरुष भी सेक्स से जुड़ी कुछ बातों को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं कुछ बातें हैं जो उनके अंदर भी आम डर(Common Fear)पैदा कर देती हैं कि कहीं ऐसा हो गया या ऐसा ना हुआ तो अब वो बातें क्या हैं जो हम आपको बताते हैं-

युवा सोचते है कि अगर मैं अपने पार्टनर(wife)को संतुष्ट ना कर पाया तो जी हाँ-ये पुरुषों में व्याप्त सबसे कॉमन या आम डर(Common Fear)है कि कहीं उन्होंने अपनी पार्टनर को असंतुष्ट(Dissatisfied)छोड़ दिया तो क्या होगा-शारीरिक संबंधों के मामले में उन्हें अंदर ही अंदर यह बात सताती रहती है कि अगर वह अपने पार्टनर को चरम सुख दे पाने में असफल हुए तो वह एक अच्छे सेक्स पार्टनर नहीं रह जाएंगे और निश्चित तौर पर इस भावना का असर उनकी इगो पर पड़ता है-

सामान्य डर का समांधान-

पहला कारण ये है कि-मेरा मानना है कि पुरुषों को इस बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए क्युकि वे जितना सोचेंगे उतना परेशान होंगे इसीलिए बिना किसी परेशानी के उन्हें बस अपने साथी को प्यार करना चाहिए-

दूसरा एक कारण पर्फेक्ट सेक्स ना कर पाना ये सोचना भी है कि आप मानें या ना मानें लेकिन सेक्स में महारथ हासिल करने के लिए ज्यादातर पुरुष पोर्न फिल्मों की साइटों का सहारा लेते हैं वह जो कुछ देखते हैं वही सब दोहराने की कोशिश करते हैं और अगर वो एक्ट वो ना कर पाए तो उन्हें कमतर होने का अहसास होता है-

सेक्स के दौरान अकसर पुरुष अपनी तुलना पोर्न एक्टर से करते हैं लेकिन कभी कुछ चीजें भावनाओं और प्रेम से प्रेरित होकर भी सोचनी चाहिए-न कि पोर्न एक्टर बनने का प्रयास करे

पोर्न फिल्मो में जो होता है वो ड्रग को लेकर बनाई गई फिल्मे है जो बिजनेस के लिए होती है आप अगर उनके बाद के जीवन को देखे तो अंतिम समय उनका दुर्भाग्य-पूर्ण होता है-आप उनको देख कर अपना जीवन खराब न करे-

एक तीसरा डर युवाओं में ये भी धारणा कर रहा है कि उसके सेक्स के बाद अगर वो उसे प्रेगनेन्ट नहीं कर सका तो उसका पार्टनर क्या सोचेगा या वो पितृत्व ना ग्रहण कर पाया तो -समाज, परिवार और अपने पत्नी की नजरों में वह अक्षम साबित नहीं होना चाहते इसीलिए वह इस चिंता में भी रहते हैं-

अगर किसी वजह से महिला गर्भधारण नहीं कर पा रही है तो कुछ टेस्ट करवाकर समस्या का समाधान पाया जा सकता है इतना ही नहीं कभी-कभार गलत खानपान और जीवनशैली की वजह से भी स्पर्म प्रभावित होते हैं डॉक्टरी सलाह द्वारा इन सभी परेशानियों से छुटकारा पाया जा सकता है-

आपकी जादा मानसिक चिंता भी आपके स्पर्म को प्रभावित करती है इसलिए स्वास्थ्य जीवन जीने के लिए -उत्तम आहार और उत्तम आयुर्वेद हर्बल यौगिक दवा का सहारा ले -एलोपेथी की घातक दवाये आपको छणिक लाभ दे सकती है लेकिन उसके साइड इफेक्ट बहुत है -

चौथा एक आम डर जो अंदर ही अंदर युवाओं को खाता है -उनको लगता है कि बचपन और युवा-वस्था में किया गया मस्टरबेशन (Masturbation) उनकी विवाह के बाद की लाइफ को प्रभावित करेगा जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है -अगर वर्तमान समय में उन्हें सेक्सुअल प्रॉब्लम का सामना करना पड़ रहा है तो वह इसके लिए पूर्व में किए गए मस्टरबेशन को जिम्मेदार मानते हैं-

मस्टरबेशन से पुरुष की सेक्स लाइफ पर कोई असर नहीं पड़ता-इसीलिए मस्टरबेशन की चिंता छोड़ पुरुषों को अपनी सेक्सुअल लाइफ एंजॉय करनी चाहिए-बस इतना ध्यान रक्खे कि अधिकतम सीमा किसी भी चीज की अहितकारी है -
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Upchar और प्रयोग-

दोषपूर्ण-रक्त साफ़ करने का उपचार Defective Blood Clearing Treatment

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दोषपूर्ण-रक्त साफ़ करने का उपचार Defective Blood Clearing Treatment-


क्‍या आप हमेशा थकान महसूस करते है क्‍या आपको अक्‍सर फोडा फुंसी और दानों की शिकायत रहती है या पेट में गड़बड़ी रहती है क्‍या आपका वजन कम नहीं होता तो इसका साफ मतलब है कि आपके रक्‍त को साफ़(Blood Clearing) की आवश्‍यकता है-

Blood Cells


आजकल दुनिया भर की पद्धतियों में वर्षो से रक्‍त साफ करने के प्रयास होते आ रहे है जबकि इनमें आयुर्वेदिक और चाइनीज दवा प्रणाली भी शामिल है-

रक्‍त की सफाई प्रणाली कैसे काम करती है- 

रक्‍त की शुद्धता का अर्थ होता है कि उसमें स्थित अशुद्धि को दूर करना-रक्‍त में कई प्रकार के गंदे तत्‍व मिल जाते है जिससे शरीर की प्रणाली पर नकारात्‍मक असर पड़ता है तब इन पद्धतियों के माध्‍यम से रक्‍त को साफ(Blood Clearing) करने के अलावा उनमें पोषक तत्‍वों को शामिल करने का भी प्रयास किया जाता है ताकि मानव शरीर स्‍वस्‍थवर्धक हो-

रक्‍त की सफाई(Blood Clearing) का अर्थ रक्‍त से अशुद्धियों को दूर करना होता है इसे लिवर में स्थित खून के जरिए साफ करने का प्रयास किया जाता है तथा दवाईयां दी जाती है जो पेट में पहुंचकर पेट के खून को साफ करती है और खून सर्कुलेशन के जरिए पूरी बॉडी में पहुंच जाता है और एक समय के बार पूरी बॉडी का खून साफ हो जाता है अगर किसी कारण से शरीर का रक्‍त साफ नहीं होता है तो प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है-

रक्‍त की शुद्धता के बाद आप निम्न खाद्य पदार्था का सेवन अवश्‍य करें ताकि आपके शरीर का रक्‍त हमेशा शुद्ध बना रहें-

सही जीवनशैली भी अपनाएं-


  1. फाइबर युक्‍त भोजन खाएं, जिसमें ब्राउन राइस, सब्जियों और ताजे फलों को शामिल करें-
  2. चुकंदर, गाजर, शलजम, मूली, वंदगोभी, ब्रोकली, स्‍पीरयूलिना, क्‍लोरिल्‍ला और समुद्री शैवाल आदि को खाएं चूँकि इनमें गजब की रक्‍त साफ(Blood Clearing)करने की क्षमता होती है-
  3. कुछ जड़े भी रक्‍त को शुद्ध(Blood Clearing) करने में सहायक होती है इसके अलावा हर्ब और ग्रीन टी भी रक्‍त को प्‍यूरीफाई करने में सहायक होती है-
  4. आप जादा से जादा विटामिन सी का सेवन करें इससे शरीर में ग्‍लूथाथियोन की मात्रा बढ़ती है और लीवर के रक्‍त की शुद्धता बढ़ती है-
  5. आप हर दिन में कम से कम दो लीटर पानी अवश्‍य पिएं-
  6. गहरी सांस लें ताकि आपके फेफड़ों में अच्‍छे से ऑक्‍सीजन पहुंचे और रक्‍त का संचार सही से हो तथा हमेशा सकारात्‍मक भावनाएं रखें-
  7. हर दिन कम से कम 5 मिनट के लिए गर्म पानी में स्‍नान करें और इसके बाद 30 सेकेंड के लिए ठंडे पानी से नहाएं-ऐसा कम से कम तीन बार करें तथा इसके बाद आराम करें और 30 मिनट के लिए सो जाएं-
  8. आप अपने शरीर में पसीने को आने दें या कोई ऐसा काम करें ताकि आपकी बॉडी से पसीना निकले-
  9. आप अपनी बॉडी से डेड स्‍कीन को निकाल दें-पैरों को पैडीक्‍योर और हाथों को मैनीक्‍योर करें-इससे छिद्र खुल जाते है और रक्‍त में संचार अच्‍छे से होता है-
  10. सौंफ रक्त को साफ करने वाली एवं चर्मरोग नाशक है-
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Upcharऔर प्रयोग-

24 नवंबर 2016

बवासीर के मस्से कैसे नष्ट करे

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बवासीर के मस्से कैसे नष्ट करे How to Destroy Hemorrhoids Moles-


आम भाषा में बवासीर(Hemorrhoids)को दो नाम दिये गए है-बादी बवासीर और खूनी बवासीर- बादी बवासीर में गुदा में सुजन- दर्द व मस्सों का फूलना आदि लक्षण होते हैं कभी-कभी मल की रगड़ खाने से एकाध बूंद खून की भी आ जाती है लेकिन खूनी बवासीर में बाहर कुछ भी दिखाई नहीं देता लेकिन पाखाना जाते समय बहुत वेदना होती है और खून भी बहुत गिरता है जिसके कारण रकाल्पता होकर रोगी कमजोरी महसूस करता है-

How to Destroy Hemorrhoids Moles


Hemorrhoids(बवासीर)अर्श के लक्षण उपस्थित प्रकार पर निर्भर करते हैं आंतरिक अर्श में आम तौर पर दर्द-रहित गुदा रक्तस्राव होता है-

Hemorrhoids रोग निदान के पश्चात प्रारंभिक अवस्था में कुछ घरेलू उपायों द्वारा रोग की तकलीफों पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है सबसे पहले कब्ज को दूर कर मल त्याग को सामान्य और नियमित करना आवश्यक है इसके लिये तरल पदार्थों, हरी सब्जियों एवं फलों का बहुतायात में सेवन करें और  तली हुई चीजें, मिर्च-मसालों युक्त गरिष्ठ भोजन न करें तथा रात में सोते समय एक गिलास पानी में इसबगोल की भूसी के दो चम्मच डालकर पीने से भी लाभ होता है- 

बवासीर(Hemorrhoids) होने पर गुदा के भीतर रात के सोने से पहले और सुबह मल त्याग के पूर्व दवायुक्त बत्ती या क्रीम का प्रवेश भी मल निकास को सुगम करता है- गुदा के बाहर लटके और सूजे हुए मस्सों पर ग्लिसरीन और मैग्नेशियम सल्फेट के मिश्रण का लेप लगाकर पट्टी बांधने से भी लाभ होता है मलत्याग के पश्चात गुदा के आसपास की अच्छी तरह सफाई और गर्म पानी का सेंक करना भी फायदेमंद होता है यदि उपरोक्त उपायों के पश्चात भी रक्त स्राव होता है तो चिकित्सक से सलाह लें-

बवासीर(Hemorrhoids) होने पर घरेलू उपाय-

  1. थूहर के दूध में हल्दी का बारीक चूर्ण मिलाकर उसमें सूत का धागा भिगोकर छाया में सुखा लें इस धागे से मस्सों को बांधें- मस्से को धागे से बांधने पर चार-पांच दिन तक खून निकलता है तथा बाद में मस्से सूख कर गिर जाते हैं ध्यान रहे- इसका प्रयोग कमजोर रोगी पर न करें-
  2. नीम के कोमल पत्तियों को घी में भूनकर उसमें थोड़े-से कपूर डालकर टिकिया बना लें अब टिकियों को गुदा के द्वार पर बांधने से मस्से नष्ट होते हैं नियमित जब तक आराम न हो बाधते रहे-
  3. पंद्रह ग्राम काले तिल पिसकर 10-15 ग्राम मख्खन के साथ मिलाकर सुबह सुबह खा लो-कैसा भी बवासीर(Hemorrhoids) हो मिट जाता है-
  4. नीलाथोथा(Copper Sulphate) बीस ग्राम और अफीम चालीस ग्राम लेकर इसे महीन कूट लें इस चूर्ण को चालीस ग्राम सरसों के तेल में मिलाकर पकायें-प्रतिदिन सुबह-शाम उस मिश्रण (पेस्ट) को रूई से मस्सों पर लगाने से मस्से 8 से 10 दिनों में ही सूखकर गिर जाते हैं-

  5. कालीमिर्च और स्याहजीरा (काला जीरा) को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनायें यह चूर्ण लगभग एक  ग्राम का चौथा भाग से लगभग आधा ग्राम की मात्रा में शहद के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से बवासीर ठीक होता है तथा बवासीर के मस्से भी ठीक होते हैं-
  6. कालीमिर्च 3 ग्राम+पीपल 5 ग्राम+सौंठ 10 ग्राम तथा जिमीकन्द 20 ग्राम को सूखाकर महीन चूर्ण बना लें उस चूर्ण में 200 ग्राम गुड़ डालकर अच्छी तरह मिला लें इससे बेर के बराबर गोलियां बनाकर 1-1 गोली दूध या जल के साथ प्रतिदिन दो बार पीने से खूनी तथा बादी दोनों बवासीर ठीक होती है-
  7. लौकी या तुलसी के पत्तों को जल के साथ पीसकर अर्श(बवासीर)के मस्से पर दिन में दो से तीन बार लगाने से पीड़ा व जलन कम होती है तथा मस्से भी नष्ट होते है-
  8. मूली के रस में नीम की निबौली की गिरी पीसकर कपूर मिलाकर बवासीर के मस्सों पर लेप करने से मस्से सूख जाते हैं-
  9. सूखे आंवलों का चूर्ण 20 ग्राम लेकर 250 मिलीलीटर पानी में मिलाकर मिट्टी के बर्तन में रातभर भिगोकर रखें दूसरे दिन सुबह उसे हाथों से मलकर छान लें तथा छने हुए पानी में 5 ग्राम चिरचिटा(लटजीरा)की जड़ का चूर्ण और 50 ग्राम मिश्री मिलाकर पीयें- इसको पीने से बवासीर कुछ दिनों में ही ठीक हो जाते हैं और मस्से सूखकर गिर जाते हैं-
  10. करेले के बीजों को सूखाकर इसका महीन पाउडर बनाकर इसे कपड़े से छान लें अब इसके पाउडर में थोड़ी-सी शहद तथा सिरका मिलाकर मलहम बना लें तथा इस मलहम को लगातार 20 दिन तक मस्सों पर लगाने से मस्से सूख जाते हैं तथा बवासीर (अर्श) रोग ठीक हो जाता है-
  11. चाय की पत्तियों को पीसकर मलहम बना लें और इसे गर्म करके मस्सों पर लगायें-इस मलहम को लगाने से भी मस्से सूखकर गिरने लगते हैं-
  12. बवासीर के मस्सों को दूर करने के लिए 2 प्याज को भूमल (धीमी आग या राख की आग) में सेंककर छिलका उताकर लुगदी बनाकर मस्सों पर बांधने से मस्से तुरन्त नष्ट हो जाते हैं-
  13. मेंहदीं के पत्तों को जल के साथ पीसकर गुदाद्वार पर लगाकर लंगोट बांधे- इससे मस्से सूख कर गिर जाते हैं-
  14. बैंगन को जला लें अब इनकी राख शहद में मिलाकर मरहम बना लें तथा इसे मस्सों पर लगायें- मस्से सूखकर गिर जायेंगें-
  15. सांप की केंचुली को जलाकर उसे सरसों के तेल में मिलायें- इस तेल को गुदा पर लगाने से मस्से कटकर गिर जाते हैं-
  16. कपूर को आठ गुना अरण्डी के गर्म तेल में मिलाकर मलहम बनाकर रखें- पैखाने के बाद मस्सों को धोकर और पौंछकर मस्सों पर मलहम को लगायें- इसको लगाने से दर्द, जलन, चुभन आदि में आराम रहता है तथा मस्से सूखकर गिर जाते हैं-
  17. भूनी फिटकरी और नीलाथोथा 10-10 ग्राम को पीसकर 80 ग्राम गाय के घी में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम मस्सों पर लगायें- इससे मस्से सूखकर गिर जाते हैं-
  18. बवासीर के मस्सों पर करीब एक महीने तक लगातार पपीते का दूध लगाने से मस्से सूख जाते हैं-
  19. चुकन्दर खाने व रस पीते रहने से बवासीर के मस्से समाप्त हो जाते हैं-
  20. जिनको बवासीर है और शौच वाली जगह से जिनको खून आता है वे लोग दो नींबू का रस निकालकर छान लें और एनिमा के साधन से शौच वाली जगह से एनिमा द्वारा नींबू का रस लें और दस मिनट सिकोड़ कर सोये रहें - इतने में वो नींबू गर्मी खींच लेगा और शौच होगा इसे हफ्ते में तीन-चार बार करें-कैसा भी बवासीर हो आराम होगा-
  21. REED MORE-
  22. Fistula Treatment-फिस्टुला या #भगंदर (Fistula) का इलाज

Upcharऔर प्रयोग-

22 नवंबर 2016

गुड़ के स्वास्थ्य लाभ क्या हैं

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सर्दियाँ शुरू हो गई है तो इस समय कुछ खान-पान में भी बदलाव की आवश्यकता होती है सर्दियों में गुड(Jaggery)का सेवन आपको स्वाद के साथ-साथ सेहत की दृष्टि से भी फायदेमंद है इससे आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है तथा एनीमिया से बचाव करता हैJaggery(गुड़)खाना बड़े-बुजुर्गो और गर्भस्थ महिलाओं के लिए भी बेहतर होता है ये गुड़ आपके छोटे-छोटे बच्चों को भी फायदा देता है गुड़ बच्चों के पाचन तंत्र को भी प्रभावित नहीं करती है लेकिन बच्चों को थोड़ा-थोड़ा ही गुड(Jaggery)का सेवन कराना ही उचित होता है-

Health Benefits of Jaggery


आइये जानते है गुड़(Jaggery)के स्वास्थ-लाभ-

1- अगर आप कब्ज की समस्या से परेशान हैं तो रात में खाना खाने के बाद एक टुकड़ा गुड़(Jaggery)खाने से कब्ज की समस्या दूर हो जाएगी क्युकि गुड़ पाचनक्रिया ठीक रखता है तथा इससे खून भी साफ होता है और आपका मेटाबॉलिज्म भी ठीक रहता है इसलिए आप रोजाना एक ग्लास पानी या दूध के साथ थोड़ा सा गुड़ अवश्य लें ये आपके पेट को ठंडक देता है-गुड़ खाने के बाद शरीर में पाचनक्रिया के लिए जरुरी क्षार पैदा होता है-

2- गुड़ के साथ थोड़ा सा जीरा मिलाकर सेवन करने से अग्निमान्ध्य-शीत और वात रोगों में काफी लाभ मिलता है-

3- गुड़ मिनरल, कैल्शियम और फॉस्फोरस का भी एक अच्छा स्रोत होता है ये पोषक तत्व बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाये रखने के लिए जरूरी होते है तथा साथ ही इससे कोशिकाओं का अच्छा निर्माण होता है आप के बच्चों के आहार में गुड को शामिल करने से उनकी हड्डिया मजबूत बनी रहती है आप अपने बच्चों को एक ग्लास दूध में लगभग बीस ग्राम गुड़ डालकर खिला सकते है-

4- गुड़ को आंवलों के तीन-चार ग्राम चूर्ण के साथ सेवन करने से आपके शरीर में वीर्य की वृद्धि होती है तथा थकान,रक्तपित्त(खूनी पित्त),जलन, दर्द और मूत्रकृच्छ(पेशाब करने में कष्ट या जलन होना) आदि रोग भी नष्ट होते हैं-
5- चूँकि गुड़ की तासीर गर्म होती है इसलिए जुकाम और कफ में भी यह फायदेमंद है इसमें एंटी-एलर्जिक तत्व होते हैं तथा इसमें मौजूद फास्फोरस कफ को संतुलित करने में भी सहायक माना जाता है सर्दी के दिनों में गुड़, अदरक और तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिलानें से ठंड लगने की आशंका कम हो जाती है-

गन्ने और गुड़ से होने वाले उपचार Treetment from Sugarcane and Jaggery

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भारतवर्ष में जब से गन्ने(Sugarcane)का उत्पादन प्रारम्भ हुआ था तभी से इसका उपयोग गुड़(Jaggery)उत्पादन के निमित्त किया जाता रहा है वर्तमान में हमारे देश में लगभग 80 लाख टन गुड़ विभिन्न रूपों में प्रतिवर्ष उत्पादित किया जाता है गुड़ को स्वास्थ्य के लिए अमृत जबकि चीनी को सफेद जहर माना गया है आइये आज आपको गन्ने और गुड़ का रोगों के लिए होने वाले उपचार से आपको अवगत कराते है-

Treetment from Sugarcane and Jaggery


गन्ने(Sugarcane)के रस के फायदे-

  1. ईख की पांच से दस ग्राम जड़ को पीसकर कांजी के साथ सेवन करने से स्त्री का दूध बढ़ता है-
  2. गन्ने का रस और अनार का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से रक्तातिसार(खूनी दस्त)में लाभ होता है-
  3. गन्ने को गर्म राख में सेंककर चूसने से स्वरभंग यानि गला बैठने के रोग में लाभ होता है-
  4. गन्ने के रस की नस्य(नाक में डालने)देने से नकसीर में लाभ होता है-
  5. दो से चार ग्राम हरड़ का चूर्ण खाकर ऊपर से गन्ने का रस पीने से गलगण्ड के रोग में लाभ प्राप्त होता है-
  6. गन्ने को चूसते रहने से पथरी चूर-चूर होकर निकल जाती है गन्ने का रस भी लाभदायक है-
  7. गन्ने का रस पीने से पित्तज प्रदर भी मिट जाता है-

गुड़(Jaggery)से होने वाले उपचार-

  1. चरक संहिता और आयुर्वेदाचार्य बागभट्ट ने भी लोगों को खाना खाने के बाद रोजाना थोड़ा सा गुड़ खाने की सलाह दी है यदि आप भोजन के बाद थोडा सा गुड खा ले तो सारा भोजन अच्छे से और जल्दी पच जाएगा-निरोग और दीर्घायु के लिए भोजन के बाद नियमित रुप से 20 ग्राम गुड़ का सेवन किया जाना चाहिए-चीनी की चाय की जगह गुड़ की चाय अधिक स्वास्थ्यकर मानी जाती है-
  2. आयुर्वेद में किये गये शोध के अनुसार गुड़ के मुकाबले चीनी को पचाने में पांच गुणा ज्यादा ऊर्जा खर्च होती है यदि गुड़ को पचाने मे 100 कैलोरी ऊर्जा लगती है तो चीनी को पचाने में 500 कैलोरी खर्च होती है-
  3. गुड़ में कैल्शियम के साथ फास्फोरस भी होता है जो हड्डियों को मजबूत करने में सहायक माना जाता है जबकि वहीं चीनी हड्डियों के लिए नुकसानदायक होती है क्योंकि चीनी इतने अधिक तापमान पर बनाई जाती है कि गन्ने के रस में मौजूद फास्फोरस भस्म हो जाता है जबकि ये फास्फोरस कफ को संतुलित करने में भी सहायक माना जाता है-
  4. गुड़ गन्ने से तैयार एक शुद्ध,अपरिष्कृत पूरी चीनी है यह खनिज और विटामिन है जो मूल रूप से गन्ने के रस में ही मौजूद हैं यह प्राकृतिक होता है पर इसके लिए ज़रूरी है की देशी गुड लिया जाए जिसके रंग साफ़ करने में सोडा या अन्य केमिकल का प्रयोग न हुआ हो-
  5. गुड़ सुक्रोज और ग्लूकोज जो शरीर के स्वस्थ संचालन के लिए आवश्यक खनिज और विटामिन का एक अच्छा स्रोत है तथा गुड़ मैग्नीशियम का भी अच्छा स्रोत है जिससे मांसपेशियों, नसों और रक्त वाहिकाओं को थकान से राहत मिलती है-गुड़ सोडियम की कम मात्रा के साथ-साथ पोटेशियम का भी एक अच्छा स्रोत है इससे रक्तचाप को नियंत्रित बनाए रखने में मदद मिलती है-
  6. गुड़ रक्तहीनता से पीड़ित लोगों के लिए बहुत अच्छा है क्योंकि यह लोहे का एक अच्छा स्रोत है यह शरीर में हीमोग्लोबिन स्तर को बढाने में मदद करता है यह रक्त की शुद्धि में भी मदद करता है तथा पित्त की आमवाती वेदनाओं और विकारों को रोकने के साथ-साथ गुड़ पीलिया के इलाज में भी मदद करता है-
  7. गुड़ गले और फेफड़ों के संक्रमण के इलाज में फायदेमंद होता है यह व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने में सहायक होता है तथा गुड़ एक उच्चस्तरीय वायु प्रदूषण में रहने वाले लोगों को इससे लड़ने में मदद करता है-
  8. गुड़ जितना पुराना हो उतना अधिक गुणों से युक्त होता है कोई भी आसव, आरिष्ट बिना गुड़ के नहीं बनाए जाते हैं गुड़ में पाया जाने वाला क्षारीय गुण रक्त की अम्लता को दूर करता है-गुड़ हृदय के लिये हितकारक, त्रिदोष नाशक, मल-मूत्र के रोगों को नष्ट करने वाला, खुजली और प्रमेह नाशक, थकान दूर करने वाला एवं पाचन शक्ति को बढ़ाने वाला है-
  9. प्राचीनकाल से ही हमारे यहाँ गुड़ का हर मांगलिक कार्य में उपयोग होता है बिना गुड़ के मांगलिक कार्य अधूरा माना जाता है शुभ कार्य के प्रारंभ में गुड़ को शगुन माना गया है किसी भी शुभ कार्य के लिये प्रस्थान के समय गुड़ को मूंह में डालकर जाने से सफलता प्राप्त होती है-
  10. प्रसव के पश्चात स्त्रियों को गुड़ देना प्राचीन काल से चला आ रहा है शिशु जन्म के बाद गर्भाशय की पूर्ण रूप से सफाई न होने पर अनेक विकार होने की संभावना बनी रहती है अत: शिशु के जन्म के तीन दिन तक प्रसूता को गुड़ के पानी के साथ सौंठ दी जाती है-
  11. गुड़ और काले तिल के लड्डू बच्चों को देने से बच्चों का बिस्तर में पेशाब करना दूर हो जाता है और यदि छोटा बच्चा यदि गलती से तम्बाकू खा ले तो विशाक्तता से बचने के लिये गुड़ अथवा गन्ने का रस बच्चे को पिलायें-

  12. आपके बढ़ते हुए बच्चों के लिये यह एक अत्यन्त उत्तम खाद्य है यदि बच्चों को उचित मात्रा में दूध न भी मिले तो उन्हें कुछ मात्रा में गुड़ देना चाहिये जो आपके बच्चे दांत के क्षय या कैल्शियम-हीनता आदि दूसरी बीमारियों से पीड़ित हो तो उनको हमेशा चीनी की जगह पर्याप्त गुड़ देना चाहिये-
  13. दमा के मरीजों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद है-गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा परेशान नहीं करता है चूँकि इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं गुड़ एवं सरसों का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से श्वास एवं दमा में लाभ होता है-
  14. REED MORE-
Upcharऔर प्रयोग-

17 नवंबर 2016

कंप्यूटर के प्रयोग में आँखों की देखभाल भी जरुरी है

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आजकल आफिस और घर में लगभग बहुत से लोगों का अधिकतर काफी समय कंप्यूटर(Computer)और लैपटॉप पर बीतता है इसलिए दिन भर लगातार कंप्यूटर और लैपटॉप(Laptops)पर समय बीताने के कारण आंखो(Eyes)को भी काफी नुकसान पहुंचाता है इस नुकसान की पूर्ति करने के लिए कुछ आहार और आंखों के लिए जरूरी चीजों पर भी आपको ध्यान देना चाहिए क्यूंकि हमारे शरीर में हमारी इन आँखों का बहुत महत्व है-

कंप्यूटर के प्रयोग में आँखों की देखभाल भी जरुरी है

आइये जानते है कि हम कंप्यूटर और लैपटॉप का प्रयोग करते हुए अपनी आंखों की देखभाल(Eye Care)कैसे करें आंखों की रोशनी को बढ़ाने और उसे बरकरार रखने के लिए जानिए कुछ प्रयोग-

आँखों की देखभाल(Eye Care)के लिए क्या करें-

1- यदि आपकी आंखों की रोशनी बिल्‍कुल ठीक है और आपको पढ़ने में भी किसी प्रकार की कोई समस्‍या भी नहीं होती है तो फिर भी साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच अवश्‍य करवानी चाहिए यह आंखों को स्‍वस्‍थ रखने का सबसे बेहतर तरीका है इससे आंखों में होने वाली समस्‍या से भी निजात मिल जाती है और समय पर उसका इलाज भी हो जाता है-

2- आप अपनी दोनों हथेलियों को आपस में रगड़ें और जब हथेलियां गर्म हो जाएं तो उन्‍हे हल्‍के से आंखों पर रख लें ऐसा करने से आंखों का तनाव काफी हद तक दूर हो जाता है तथा इसके अलावा, आंखों के तनाव को दूर करने का एक और आसान तरीका है आप अपनी आंखों को बंद रखे और किसी सुंदर सी जगह होने की कल्‍पना करें इससे भी आपकी आंखों को काफी आराम मिलता है-

3- शुद्ध जल भी आपकी सभी समस्‍याओं का निदान करता है कुछ समय बाद आप अपनी आंखों को धोते रहें इससे आंखों में डिहाईड्रेशन नहीं होगा और वह स्‍वस्‍थ रहेगी जब आप काम खत्म कर ले तो आप आंखों पर पानी की छींटे जरूर मारे-

4- अपनी पलकों को लगातार झपकना एक सामान्‍य प्रक्रिया है जो आपकी आंखों को तरो-ताजा रखता है और आपकी आंखों को तनाव मुक्‍त रखता है कम्‍प्‍यूटर का इस्‍तेमाल करने वाले लोग अपनी आंखों की पलकों को कम झपकाते है ऐसे लोगों को हर सेकेंड कम से कम तीन से चार बार अपनी आंखों को अवश्य ही झपकाना चाहिए इससे आपकी आँखों को राहत मिलती है-

5- अगर आप कम्‍प्‍यूटर और मोबाइल का इस्‍तेमाल ज्‍यादा करते है तो फिर उसकी ब्राइटनेस को कम रखें इससे आपकी आंखों को ज्‍यादा जोर नहीं लगाना पडेगा और स्‍क्रीन की तीव्र रोशनी से आंखों को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचेगा-

6- यदि आप मांसाहारी है तो हफ्ते में कम से कम तीन बार मछली का सेवन करें इसके सेवन से आंखों में ड्राई-आई सिंड्रोम की समस्‍या दूर हो जाएगी और यदि आप शाकाहारी है तो पालक का सेवन करें यह पोषक तत्‍वों से भरपूर होती है जिससे आंखों की रोशनी बढ़ती है अपने आहार में अंडे को भी शामिल करें क्योंकि इससे ल्‍यूटिन और जियाक्‍साथिन मिलता है जो आंखों की रोशनी को बढ़ाता है-

7- आप पूरी नींद लें इससे आंखों की रोशनी अच्‍छी रहती है आपको सिरदर्द नहीं होगा आंखों से धुंधला दिखने की शिकायत नहीं होगी तथा साथ ही आंखों की मांसपेशियों को आराम भी मिलेगा-

8- किसी भी ऐ.सी. हवा से बचना चाहिए जिससे आंखों की नमी चली जाती हो जैसे-एसी की सीधी हवा भी आपकी अपनी आखों पे न पड़े इसलिए आप अपने घर, ऑफिस या गाड़ी में एसी के पैनल को हमेशा नीचे रखें ताकि आपकी आंखों पर सीधी हवा न लगे क्युकि शुष्‍क हवा लगने से अंधापन या कार्निया में बीमारी हो सकती है-

9- आप जब भी कहीं भी बाहर धूप में निकलें तो पहले सनग्‍लास जरूर पहन लें इससे आपकी आंखें पराबैंगनी किरणों से बची रहेगी और उन्‍हे कोई नुकसान भी नहीं होगा इसलिए आप जब भी सनग्‍लास खरीदने बाजार में जाएं तो यह भी सुनिश्चित कर लें कि वह पूर्णत: यूवी प्रोटेक्‍शन देने में सक्षम है या नहीं साधारण कांच के बने सनग्लास आपकी आँखों के लिए और भी जादा नुकसान दायक साबित हो सकते है-


Upcharऔर प्रयोग-

16 नवंबर 2016

फिस्टुला या भगंदर का घरेलू इलाज

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भगंदर (Fistula) एक जटिल समस्या है और इसका इलाज और इसे जड़ से समाप्त करना चिकित्सकों के लिए कड़ी चुनौती साबित होती है इस रोग में गुदा मार्ग के बाहर एक या एक से अधिक पिंडिकाएं उत्पन्न हो जाती है इससे स्राव आता रहता है-

Neem


गुदा के भीतरी भाग में वेदनायुक्त पिंडिकाओ से बनने नासूर को भगंदर कहते है नाड़ीव्रण का ही एक प्रकार है  क्योंकि गुदा के चारों ओर का भाग अधिक पोला होता है  अतः पिंडिका के पककर फूटने पर मवाद पोलो स्थान की धातुओं की तरफ चला जाता है जिसका फिर ठीक प्रकार से निर्हरण नहीं हो पाता है इसमें रोगी को अत्यंत पीड़ा होती है और वह उठने बैठने एवं चलने फिरने में भी बहुत कष्ट महसूस करता है  ठीक प्रकार से उपचार न होने पर यह नासूर बढ़कर दूसरी तरफ भी अपना मुख बना लेता है  तब इसकी स्थिति दो मुखी नली के समान हो जाती है और कभी कभी तो इसका दूसरा मुख नितंब या जांघ तक पहुंचकर खुलता है  ऐसी स्थिति में भगंदर के नासूर से रक्त, लसिका और दुर्गन्धयुक्त मल रिसता है-

क्या है भगंदर-


भगंदर रोग में व्रण बहुत गहरे हो जाते हैं कई कार व्रण के अधिक गहरे हो जाने से मल भी उनसे लगता रहता है-ऐसे में कोष्ठबद्धता(Constipation)हो जाने पर रोगी को अधिक पीड़ा होती है भगंदर से हर समय रक्तमिश्रित पीब-स्त्राव होने से कपड़े खराब होते है- रोगी को चलने-फिरने में भी बहुत कठिनाई होती है भगंदर रोग से सूक्ष्म कीटाणु भी उत्पन्न होते है-

भगंदर(fistula) से पीड़ित रोगी न बिस्तर पर पीठ के बल लेट सकता है और न कुर्सी पर बैठकर कोई काम कर सकता है तथा सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में भी रोगी को बहुत पीड़ा होती है-

शौच के बाद स्वच्छ जल से मल-द्वार के आस-पास स्वच्छ नहीं करने से भी गंदगी के कारण व्रण की विकृति होती है अधिक समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने वाले इस रोग से अधिक पीड़ित होते है साइकिल पर लम्बी दूरी तक यात्रा करने वाले-साइकिल पर अधिक सामान ढोने वाले- ऊंट, घोड़े की अधिक सवारी करने वाले भंगदर रोग से पीड़ित होते है-

आज लोगों का खान-पान पूरी तरह पश्चिमी सभ्यता पर आधारित हो गया है लोग तेल, मिर्च, मसाला, तली, भूनी चीजें, फास्ट फूड, अनियमित भोजन का अधिक सेवन करते हैं- खाने में हरी सब्जियां, सलाद, पौष्टिक आहार का सेवन कम कर रहे हैं- व्यायाम, परिश्रम आदि से लोग दूर भाग रहे हैं जिसके कारण लोग मोटापे का शिकार हो रहे हैं- उपरोक्त निदान अनियमित आहार-विहार सेवन के कारण लोग एक जटिल बीमारी भगंदर का शिकार हो रहे हैं-

कारण -


गुदामार्ग के अस्वच्छता रहना या  लगातार लम्बे समय तक कब्ज बने रहना -अत्यधिक साइकिल या घोड़े की सवारी करना या बहुत अधिक समय तक कठोर या ठंडे गीले स्थान पर बैठना-

गुदामैथुन की प्रवृत्ति - मलद्वार पास उपस्थित कृमियों के उपद्रव के कारण - गुदा में खुजली होने पर उसे नाखून आदि से खुरच देने के कारण बने घाव के फलस्वरूप -

गुदा में आघात लगने या कट - फट जाने पर - गुदा मार्ग पर फोड़ा-फुंसी हों जाने पर - गुदा मार्ग से किसी नुकीले वस्तु के प्रवेश कराने के उपरांत बने घाव से -

आयुर्वेदानुसार जब किसी भी कारण से वात और कफ प्रकुपित हो जाता है तो इस रोग के उत्पत्ति होती है-

भगंदर को दो प्रकार माने गए है (two types of fistula )-

अपूर्ण भगंदर -

जब नासूर का केवल एक सिरा ही खुला होता है और दूसरा बंद होता है जब नासूर का मुख मलाशय पर खुलता है तो इसे अंतर्मुख भगंदर एवं मुख वाहर की त्वचा पर खुले उसे बाहिमुख भगंदर कहते है -

पूर्ण भगंदर-

जब  नासूर का दूसरा सिरा भी दूसरी तरफ जाकर खुल जाता है तो उसे पूर्ण भगंदर कहते है-

लक्षण (Symptoms )-

  1. भगंदर होने से पूर्व गुदा में छोटी छोटी फुंसिया का बार बार होना जिन्हें पिंडिकायें कहते है  कुछ समय पश्चात ये फुंसियां ठीक न होकर लाल रंग की हो जाती है और फूटकर व्रण का निर्माण करती है  गुदा प्रवेश में खुजली व पीड़ा जो कि मल त्याग के समय बढ़ जाती है-
  2. गुदा से रक्त एवं मवाद आने लगता है व्रण में बहुत तेज़ दर्द होता है जिससे रोगी को उठने बैठने, चलने फिरने में कष्ट होता है  ठीक से चिकित्सा न होने पर फुंसियां मुनक्के एवं छुआरे जितने बड़ी होकर रोगी के अत्यधिक कष्ट देती है-

  3. कमर के पास सुई चुभने जैसा दर्द, जलन, खुजली व वेदना के अनुभूती होती है  यदि भगंदर वातिक है तो तीव्र वेदना, पिंडिका के फूटने पर रक्त वर्ण का फेनयुक्त स्राव व अनेक मुख वाले वृणों से मल एवं मूत्र निकलता है-
  4. पैत्तिक भगंदर में पिंडिका शीघ्रता से पकती है और उसमे से दुर्गन्ध, ऊष्ण स्राव होने लगता है पिंडिका का आकार ऊंट की गर्दन के समान होता है-
  5. कफज भगंदर में गुदामार्ग में खुजली के साथ लगातार गाढ़ा स्राव होता है इसमें सफेद कठिन पिंडिका होती है | इस प्रकार के भगंदर में पीड़ा कम होती है-
  6. यदि अन्दर सन्निपारज प्रकृति का है तो पिंडिका का रंग विविध प्रकार होता है  इस प्रकार का भगंदर पीड़ादायक एवं स्रावयुक्त होता है  इसकी आकृति गाय के थान के समान होती है -
  7. आगंतुज भगंदर शल्यकर्म के दौरान क्षत उत्पन्न होने से बनता है  कालांतर में इससमे कृमि पड़ जाते है, जो कि गुदामार्ग के विदीर्ण करके नाड़ी में अनेक मुख बना देते है जिनसे पूय, मूत्र, पुरिष आदि का क्षरण होता है-
  8. भगंदर से बचाव के लिए गुदामार्ग को स्वच्छ रखना चाहिए- पेट में यदि कृमि हो तो उनको बाहर निकालने के लिए औषधि लेनी चाहिए, अन्यथा वे गुदामार्ग को क्षतिग्रस्त कर सकते है-
  9. आयुर्वेद में भगंदर के लिए अग्निकर्म, शस्त्रकर्म, क्षारकर्म एवं औषधि चिकित्सा का विधान है-

घरेलू उपचार (Home remedies )-

  1. 25 ग्राम अनार के ताजे, कोमल पत्ते 300 ग्राम पानी में देर तक उबालें और जब आधा जल शेष रह जाए तो उस जल को छानकर भगंदर को धोने से बहुत लाभ होता है-
  2. नीम के पत्तों को जल में उबालकर, छानकर भगंदर को दिन में दो बार अवष्य साफ करेंतथा नीम की पत्तियों को पीसकर भगंदर पर लेप करने से बहुत लाभ होता है-
  3. काली मिर्च और खदिर (लाजवंती) को जल के छींटे मारकर पीसकर भगंदर पर लेप करें-
  4. लहसुन को पीसकर, घी में भूनकर भंगदर पर बांधने से जीवाणु नष्ट होते हैं-
  5. आक के दूध में रुई भिगोकर सुखाकर रखें इस रुई को सरसों के तेल के साथ भिगोकर काजल बनाएं काजल मिट्टी के पात्र पर बनाएं तथा इस काजल को भगंदर पर लगाने से बहुत लाभ होता है या आक का दूध और हल्दी मिलाकर उसको पीसकर शुष्क होने पर बत्ती बना लें इस बत्ती को भगंदर के व्रण पर लगाने से बहुत लाभ होता है-
  6. चमेली के पत्ते, गिलोय, सोंठ और सेंधा नमक को कूट-पीसकर तक्र (मट्ठा) मिलाकर भंगदर पर लेप करें-
  7. त्रिफला क्वाथ से नियमित भगंदर के व्रण को धोकर बिल्ली अथवा कुत्ते की हड्डी के महीन चूर्ण का लेप कर देने से भगंदर ठीक हो जाता है -
  8. रोगी को किशोर गूगल, कांचनार गूगल एवं आरोग्यवर्द्धिनी वटी की दो दो गोली दिन में तीन बार गर्म पानी के साथ करने पर उत्तम लाभ होता है नियमित दो माह तक इसका प्रयोग करने से भगंदर ठीक हो जाता है -
  9. भगंदर के रोगी को भोजन के बाद विंडगारिष्ट, अभयारिस्ट एवं खादिरारिष्ट 20-20 मिली. की मात्रा में सामान जल मिलाकर सेवन करना चाहिए-

परहेज (Avoiding )-

  1. घी, तेल से बने पकवानों का सेवन न करें-उष्ण मिर्च-मसाले व अम्लीय रसों से निर्मित खाद्य पदार्थो का सेवन न करें- ऊंट, घोडे, व स्कूटर, साईकिल पर लम्बी यात्रा न करें-
  2. अधिक समय कुर्सी पर बैठकर काम न करें-दूषित जल से स्नान न करें-
  3. भंगदर रोग के चलते समलेंगिक सहवास से अलग रहे-
  4. बाजार  के चटपटे-स्वादिष्ट छोले-भठूरे-समोसे-कचौड़ी-चाट-पकौड़ी आदि का सेवन न करें-

Upcharऔर प्रयोग-