Vein-नस का चढ़ जाना एक Problem है

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आपने देखा होगा कि कभी-कभी कई लोगों को रात को सोते समय या अचानक ही कभी-कभी नस(Vein)चढ़ जाती है इसकी वजह से लगता है कि बस जान निकल जायेगी और कई लोगों को टांगों और पिंडलियों में मीठा दर्द सा भी महसूस होता है तथा पैरों में दर्द के साथ ही जलन, सुन्न, झनझनाहट(Sensation)या सुई चुभने जैसा एहसास होता है-

Vein-Problem


ये एक आम समस्या बन गयी हैं सभी लोग इसके उपचार को देखते हैं लेकिन कोई भी इसके कारण को नहीं जानना चाहता और वजह ये है कि किसी के भी पास आज वक़्त नहीं है बस गोली लो और अपना काम चलाओ लेकिन भविष्य में इस बीमारी के क्या नुकसान हो सकते हैं आज इस पर आपके लिए थोडा प्रकाश डालते है-

कई लोगों को रात में सोते समय टांगों में एंठन की समस्या होती है नस पर नस चढ़ जाती है और शरीर में कहीं भी या किसी भी मांसपेशी में दर्द (Muscular pain)हो तो उसका इलाज किसी भी थेरेपी में पेन किलर के अलावा और कुछ भी नही है-लेकिन ये पेन किलर कोई स्थाई इलाज नहीं है ये तो बस एक नशे की तरह है जितनी देर इसका असर रहता है उतनी देर आपका ब्रेन इस दर्द को एहसास नहीं करता है और आपको पेन किलर के दुष्प्रभाव के बारे मे भी अच्छी तरहं पता है जिसे आप चाह कर भी इनकार नहीं सकते हैं-

कारण-

  1. नस पर नस चढ़ना तो एक बीमारी है लेकिन कहाँ-कहाँ की नस कब चढ़ जाये कोई नहीं कह सकता कुछ दर्द यहाँ लिख रहा हूँ जो इस तरह हैं-मस्कुलर स्पाजम, मसल नोट के कारण होने वाली सभी दर्दें जैसे कमरदर्द, कंधे की दर्द, गर्दन और कंधे में दर्द, छाती में दर्द, कोहनी में दर्द, बाजू में दर्द, ऊँगली या अंगूठे में दर्द, पूरी टांग में दर्द, घुटने में दर्द, घुटने से नीचे दर्द, घुटने के पीछे दर्द, टांग के अगले हिस्से में दर्द, एडी में दर्द, पंजे में दर्द, नितंब (हिप) में दर्द, दोनो कंधो में दर्द, जबड़े में और कान के आस पास दर्द, आधे सिर में दर्द, पैर के अंगूठे में दर्द आदि सिर से पांव तक शरीर में बहुत सारे दर्द होते हैं-हमारे शरीर में लगभग 650 मांसपेशियां होती हैं जिनमे से 200 के करीब मुस्कुलर स्पासम या मसल नोट से प्रभावित होती हैं-
  2. इन सभी की मुख्य वजेह होती है गलत तरीके से बैठना-उठना या सोफे या बेड पर अर्ध लेटी अवस्था में ज्यादा देर तक रहना,उलटे सोना,दो-दो सिरहाने रख कर सोना,बेड पर बैठ कर ज्यादा देर तक लैपटॉप या मोबाइल का इस्तेमाल करना या ज्यादा सफर करना या जायदा टाइम तक खड़े रहना या जायदा देर तक एक ही अवस्था में बैठे रहना आदि-
  3. पहले लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए और मशीनीकरण के ना होने के कारण शारीरिक मेहनत ज्यादा करते थे-जैसे वाहनों के अभाव में मीलों पैदल चलना,पेड़ों पर चढ़ना, लकड़ियां काटना, उन्हें जलाने योग बनाने के लिए उनके टुकड़े करना(फाड़ना), खेतों में काम करते हुए फावड़ा, खुरपा, दरांती आदि का इस्तेमाल करना जिनसे उनके हाथो व पैरों के नेचुरल रिफ्लेक्स पॉइंट्स अपने आप दबते रहते थे और उनका उपचार स्वयं प्रकृति करती रहती थी-इसलिए वे सदा तंदरुस्त रहते थे-आपके शरीर को स्वस्थ रखने में प्रकृति की सहायता करती थी-शरीर में किसी भी रोग के आने से पहले हमारी रोग प्रतिरोधी क्षमता कमजोर पड़ जाती है-

मांसपेशियों पर नियंत्रण का नुकसान(Loss of muscle control)-

किसी बड़े रोग के आने से कम से कम दो-तीन साल पहले हमारी अंत: स्त्रावी ग्रंथियों(endocrine glands)की कार्यप्रणाली सुस्त व् अव्यवस्थित हो जाती है कुछ ग्रंथियां अपना काम कम करने लग जाती हैं और कुछ ग्रंथियां ज्यादा जिसके कारण धीरे-धीरे शरीर में रोग पनपने लगते हैं-जिनका हमे या तो पता ही नहीं चलता या फिर हम उन्हें कमजोरी, काम का बोझ, उम्र का तकाजा(बुढ़ापा),खाने में विटामिन्स-प्रोटीन्स की कमी, थकान, व्यायाम की कमी आदि समझकर टाल देते हैं या फिर दवाइयां खाते रहते हैं-जिनसे ग्रंथियां(endocrine glands) कभी ठीक नहीं होती बल्कि उनकी(malfunctioning)अव्यवस्थित कार्यप्रणाली चलती रहती है जिस का नतीजा कम से कम दो-तीन साल या कभी-कभी इससे भी ज्यादा समय के बाद अचानक सामने आता है किसी बड़े रोग के रुप में-वह कोई भी रोग हो सकता है जैसे-शुगर उच्च-रक्तचाप(high blood pressure)थायराइड (hypothyroidism or hyperthyroidism),दिल की बीमारी, चर्म रोग, किडनी संबंधी रोग, नाड़ी तंत्र संबंधी रोग या कोई और हजारों हैं-


मुस्कुलर स्पासम(Muskulr Spasm)या नस पर नस चढ़ना-

हमारे शरीर में जहां जहां पर भी रक्त जा रहा है ठीक उसके बराबर वहां वहां पर बिजली भी जा रही है जिसे बायो इलेक्ट्रिसिटी कहते हैं रक्त जो है वह धमनियों और शिराओं(arteries and veins)में चलता है और करंट जो है वह तंत्रिकाओं(nerves)में चलता है शरीर के किसी भी हिस्से में अगर रक्त नहीं पहुंच रहा हो तो वह हिस्सा सुन्न हो जाता है या मांसपेशियों पर नियंत्रण नहीं रहता(loss of muscle control)और उस स्थान पर हाथ लगाने पर ठंडा महसूस होता है और शरीर के जिस हिस्से में बायो इलेक्ट्रिसिटी(bio-electricity)नहीं पहुंच रही हैं वहां पर उस हिस्से में दर्द हो जाता है और वहां हाथ लगाने पर गर्म महसूस होता है इस दर्द का साइंटिफिक कारण होता है कार्बोनिक एसिड(h2co3 carbonic acid)जो बायोइलेक्ट्रिसिटी की कमी के कारण उस मांसपेशी में प्रकृतिक तौर पर हो रही सव्चालित क्रिया से उत्पन्न होता है उस प्रभावित मसल में जितनी ज्यादा बायोइलेक्ट्रिसिटी की कमी होती है उतना अधिक कार्बोनिक एसिड उत्पन्न होता है और उतना ही अधिक दर्द भी होता है जैसे ही उस मांसपेशी में बायोइलेक्ट्रिसिटी जाने लगती है वहां से कार्बन घुलकर रक्त मे मिल जाता है और दर्द ठीक हो जाता है रक्त मे घुले कार्बोनिक एसिड को शरीर की रक्त शोधक प्रणाली पसीने और पेशाब के द्वारा बाहर निकाल देती है-

अगली पोस्ट में आपको मांसपेशियों पर नियंत्रण का नुकसान और उनके उपचार के बारे में आपको अवगत करायेगें जिससे स्त्रावी ग्रंथियां व्यवस्थित(सुचारु)तरीके से काम करने लग जाती हैं या ये कहे की  मांसपेशियों पर नियंत्रण का नुकसान(loss of muscle control)कम हो जाता है और रोग प्रतिरोधी क्षमता इम्युनिटी मजबूत हो जाती है तो किसी प्रकार के रोग शरीर में आने की कोई संभावना ही नहीं रहती है यही कारण है लगभग दो पीढ़ियां पहले आजकल पाए जाने वाले लोगों को रोग नहीं होते थे इसीलिए आजकल कुछ रोगों को(lifestyle diseases)रहन सहन के रोग माना जाता है-

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