सोरायसिस का उपचार Psoriasis Treatment

8:57 pm Leave a Comment

सोरायसिस का उपचार Psoriasis Treatment-


सोरायसिस(Psoriasis)त्वचा की ऊपरी सतह का एक चर्म रोग है ये वंशानुगत है लेकिन ये और भी कई कारणों से भी हो सकता है आनु्‌वंशिकता के अलावा इसके लिए पर्यावरण भी एक बड़ा कारण माना जाता है यह असाध्य बीमारी कभी भी किसी को भी हो सकती है कई बार Psoriasis इलाज के बाद इसे ठीक हुआ समझ लिया जाता है जबकि यह रह-रहकर सिर उठा लेता है शीत ऋतु में यह बीमारी प्रमुखता से प्रकट होती है-

Psoriasis


सोरयासिस(Psoriasis)एक प्रकार का चर्म रोग है जिसम त्वचा में Cells की तादाद बढने लगती है चमडी मोटी होने लगती है और उस पर खुरंड और पपडीयां उत्पन हो जाती हैं ये पपडीया सफेद चमकीली हो सकती है इस रोग के भयानक रूप में पूरा शरीर मोटा लाल रंग का पपडीदार चमडी से ढक जाता है यह रोग अधिकतर के कोहनी,घुटना और खोपडी पर होता है अच्छी बात ये है की यह रोग छूतहा याने संक्रमक नही है रोगी के संपर्क से अन्य लोगो को कोई खतरा नहीं है-

सोरायसिस चमड़ी की एक ऐसी बीमारी है जिसके ऊपर मोटी परत जम जाती है दरअसल चमड़ी की सतही परत का अधिक बनना ही सोरायसिस है त्वचा पर भारी सोरायसिस की बीमारी सामान्यतः हमारी त्वचा पर लाल रंग की सतह के रूप में उभरकर आती है और स्केल्प(सिर के बालों के पीछे)हाथ-पाँव अथवा हाथ की हथेलियों, पाँव के तलवों, कोहनी, घुटनों और पीठ पर अधिक होती है वैसे एक-दो प्रतिशत जनता में यह रोग पाया जाता है-

चिकित्सा में अभी तक ऐसा परिक्षण नहीं है जिससे सोरयासिस(Psoriasis)रोग का पता लगाया जा सके-खून की जांच से भी इस रोग का पता नही चलता है-

सोरायसिस(Psoriasis)लक्षण-

रोग से ग्रसित(आक्रांत)स्थान की त्वचा चमकविहीन, रुखी-सूखी, फटी हुई और मोटी दिखाई देती है तथा वहाँ खुजली भी चलती है सोरायसिस के क्रॉनिक और गंभीर होने पर 5 से 40 प्रतिशत रोगियों में जोड़ों का दर्द और सूजन जैसे लक्षण भी पाए जाते हैं एवं कुछ रोगियों के नाखून भी प्रभावित हो जाते हैं और उन पर रोग के चिह्न दिखाई देते हैं-

क्यों और किसे होता है सोरायसिस(Psoriasis) -

सोरायसिस क्यों होता है इसका सीधे-सीधे उत्तर देना कठिन है क्योंकि इसके मल्टी फ्लेक्टोरियल(एकाधिक) कारण हैं अभी तक हुई खोज(रिसर्च)के अनुसार सोरायसिस की उत्पत्ति के लिए मुख्यतः जेनेटिक प्री-डिस्पोजिशन और एनवायरमेंटल फेक्टर को जवाबदार माना गया है सोरायसिस वंशानुगत रोगों की श्रेणी में आने वाली बीमारी है एवं 10 प्रतिशत रोगियों में परिवार के किसी सदस्य को यह रोग रहता है-

किसी भी उम्र में नवजात शिशुओं से लेकर वृद्धों को भी हो सकती है यह इंफेक्टिव डिसिज(छूत की बीमारी)भी नहीं है सामान्यतः यह बीमारी 20 से 30 वर्ष की आयु में प्रकट होती है लेकिन कभी-कभी इस बीमारी के लक्षण क्रॉनिक बीमारियों की तरह देरी से उभरकर आते हैं सोरायसिस एक बार ठीक हो जाने के बाद कुछ समय पश्चात पुनः उभर कर आ जाता है और कभी-कभी अधिक उग्रता के साथ प्रकट होता है ग्रीष्मऋतु की अपेक्षा शीतऋतु में इसका प्रकोप अधिक होता है-

सोरायसिस(Psoriasis)होने पर क्या करें-

सोरायसिस होने पर विशेषज्ञ चिकित्सक के बताए अनुसार निर्देशों का पालन करते हुए पर्याप्त उपचार कराएँ ताकि रोग नियंत्रण में रहे-थ्रोट इंफेक्शन से बचें और तनाव रहित रहें क्योंकि थ्रोट इंफेक्शन और स्ट्रेस सीधे-सीधे सोरायसिस को प्रभावित कर रोग के लक्षणों में वृद्धि करता है त्वचा को अधिक खुश्क होने से भी बचाएँ ताकि खुजली उत्पन्न न हो-

सोरायसिस(Psoriasis)लिए उपचार-

सोरायसिस के उपचार में बाह्य प्रयोग के लिए एंटिसोरियेटिक क्रीम-लोशन तथा ऑइंटमेंट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है-रोग की तीव्रता न होने पर साधारणतः मॉइस्चराइजिंग क्रीम इत्यादि से ही रोग नियंत्रण में रहता है लेकिन जब बाह्योपचार से लाभ न हो तो मुँह से ली जाने वाली एंटीसोरिक और सिमटोमेटिक औषधियों का प्रयोग आवश्यक हो जाता है आजकल अल्ट्रावायलेट लाइट से उपचार की विधि भी अत्यधिक उपयोगी और लाभदायक हो रही है-

कुछ रोगी बताते है की गर्मी के मौसम में और धूप से उनको राहत मिलती है लेकिन एलोपेथिक चिकित्सा मे यह रोग लाईलाज माना गया है उनके मतानुसार यह रोग सारे जीवन भुगतना पडता है लेकिन कुछ कुदरती चीजे है जो इस रोग को काबू में रखती हैं और रोगी को सुकून मिलता है-

आइये जाने सोरायसिस(Psoriasis)उपचार में क्या अपनायें-


  1. दस नग बादाम का पावडर बना ले फिर आप इसे पानी में उबाले और यह दवा सोरयासिस रोग की जगह पर लगाये तथा रात भर इसे लगी रहने के बाद सुबह मे पानी से धो ले कुछ समय लगातार करने से यह उपचार बहुत अच्छे परिणाम दर्शाता है-
  2. एक चम्मच चंदन का पावडर ले फिर इसे आधा लीटर गरम पानी में उबाले जब पकने के बाद तीसरा हिस्सा रह जाए तब इसे उतार ले अब आप इसमें थोडा गुलाब जल और शक्कर मिला दे-यह दवा दिन में तीन बार पिए ये बहुत ही एक कारगर उपचार है-
  3. पत्ता गोभी भी सोरयासिस में एक अच्छा प्रभाव दिखाती है आप उपर का पत्ता ले और इसे पानी से धोले फिर हथेली से दबाकर सपाट कर ले अब इसे थोडा सा गरम करके प्रभावित हिस्से पर रखकर उपर सूती कपडा लपेट दे-यह उपचार लम्बे समय तक दिन में दो बार करने से जबरदस्त फ़ायदा होता है साथ ही पत्तागोभी का सूप सुबह शाम पीने से सोरयासिस में लाभ होते देखा गया है यह प्रयोग भी करने योग्य है-
  4. निम्बू के रस में थोडा पानी मिलाकर रोग स्थान पर लगाने से सुकून मलता है तथा निम्बू का रस तीन घंट के अंतर से दिन में पांच-छ बार पीते रहने से छाल रोग ठीक होने लगता है-
  5. सोरायसिस(Psoriasis)रोग में शिकाकाई को पानी मे उबालकर रोग के धब्बो पर लगाने से ये रोग नियंत्रित होता है-
  6. सोरायसिस(Psoriasis)में केले के पत्तो को आप प्रभावित जगह पर रखे और ऊपर से कपडा लपेटे-इससे भी आपको काफी फ़ायदा होगा-
  7. कुछ चिकित्सक जडी-बूटी की दवाई में Steroids मिलाकर ईलाज करते है जससे रोग शीघ्रता से ठीक होता प्रतीत होता है-लेकिन ईलाज बंद करने पर रोग पुन: भयानक रूप में प्रकट हो जाता है-
  8. इस रोग को ठीक करने के लिए जीवन शैली में भी बदलाव करना जरूरी है सर्दियों में 3 लीटर और गर्मियों में 5 से 6 लीटर पानी पीने की आदत बना ले-इससे वर्जतीय पदार्थ शरीर से बाहर निकलेगे-
  9. सोरयासिस चिकित्सा का एक नियम यह है कि रोगी को दस से पंद्रह दिन तक सिर्फ फ़लाहार पर रखना चाहिये तथा उसके बाद दूध और फ़ल का रस चालू करना चाहये-
  10. रोगी के कब्ज़ निवारण के लिये गुन गुने पानी का एनीमा देना चाहिये-इससे रोग की तीव्रता घट जाती है तथा अपरस वाले भाग को नमक मले पानी से धोना चाहये फिर उस भाग पर जेतुन का तेल लगाना चाहिए और खाने में नमक बिलकुल ही वर्जित है और पीडित भाग को नमक मिले पानी से धोना चाहये-
  11. धुम्रपान करना और अधिक शराब पीना तो विशेष रूप से हानिकारक है ज्यादा मिर्च मसालेदार चीज़े भी न खाएं-

सोरायसिस(Psoriasis)का यूनानी प्रयोग-

सोरायसिस के इलाज के लिए शरबत मुरक्कब मुसफ्फी खून शरबत उन्नाब, इत्रिफल शाहतरा, रोगन नीम, माजून फलासफा जैसी दवाएं पाउडर, चटनी, तेल व काढ़े के रूप मेे देते हैं यह इलाज रोग के आधार पर 4-6 माह तक चलता है-

सोरायसिस(Psoriasis)के लिए परहेज भी जरूरी-

इस पद्धति से इलाज के दौरान मरीज को अचार, बैंगन, आलू और बादी करने वाली चीजों से परहेज करना होता है तथा साथ ही बैलेंस डाइट के साथ ओमेगा थ्री फैटी एसिड युक्तखाद्य पदार्थ जैसे बादाम,अखरोट,अलसी के बीज,राजमा और जैतून का तेल प्रयोग करें-

आजकल कुछ चिकित्सक इस रोग क उपचार मरहम/आयन्टमेन्ट आदि लगा-लगा कर रहे है जबकि यह बीमारी केवल खाने-पीने की दवाओं द्वारा ही जड़ से समूल नष्ट की जा सकती है-चर्म रोग होने पर उसे ऊपरी उपचार द्वारा दबाना अन्य कई प्रकार की बीमारियों को नियंत्रण देना है-इससे रक्तचाप व मानसिक बीमारियां व अन्य घातक बीमारियां स्वत: ही पैदा होने लगती हैं-प्रभावित चर्म स्थान पर मरह्म व अन्य दवाओं के उपयोग से बीमारी समाप्त न होकर शरीर के अन्दरूनी अंगों को हानि पहुंचाती है-

इस बीमारी का सही प्रकार से उपचार करने से पूर्व रोग की जड़ को दूर करना आवश्यक होता है पहले ह रोगी की शारीरिक मानसिक प्रकृति को जानकार खाने व पीने की औषधियां देते हैं-अनन्तः रोगी की प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाकर बीमारी को जड़ से दूर किया जाता है-उपचार से पहले या उपचार के दौरान यदि रोगों को ज्यादा परेशानी होती है तो तात्कालिक उपचार के लिए अन्य प्रकार की औषधियां दी जाती हैं-

इस बीमारी में दवाओं का सेवन लम्बे समय तक करना आवश्यक होता है-दवाओं का सेवन नियमपूर्वक न करना भी बीमारी को आगे बढ़ाने में पूर्ण सहायक होता है इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को खाने-पीने में शुध्द शाकाहारी भोजन, हरी सब्जियां, फल आदि का प्रयोग करना अति आवश्यक है-

नियमित रूप से ताजा पानी अधिकाधिक पीते रहना चाहिये जिससे कि पाचन क्रिया सुलभ बनी रहे तथा नहाने-धोने के लिए बाजार साबुनों का प्रयोग पूर्णतः बन्द करके चिकित्सा प्रणाली में कार्य करने वाले साबुनों का उपयोग हितकर होता है-

वर्तमान में सोरायसिस नामक यह रोग-धीरे-धीरे संक्रमण की तरह देश में फैल रहा है-इसके लिए रहन-सहन शुध्द वातावरण होना अति आवश्यक है-

इसके अलावा इसके अन्य कई प्रकार हैं जो कि कम ही मरीजों मैं पाये जाते हैं जैसे-

Guttate Psoriasis- इसमें 4-5 मिलिमिटर के गोल निशान बनते है ये अक्सर बच्चों मैं गले के संक्रमण के बाद होते हैं और पूरे शरीर पर गोल गोल निशान बनते है जो कि अधिकतर ठीक हो जाते हैं पर कई बार ये क्रोनिक प्लाक सोरायसिस मैं परिवर्तित हो सकते हैं-

Erythrodermic Psorisis- जब सोरायसिस शरीर के 80 प्रतिशत हिस्से तक फैल जाता है तो इसे Erythrodermic Psorisis कहते हैं,यह एक प्रकार का गंभीरतम प्रकार है जिसका तुरंत किसी विशेषज्ञ से उपचार की आवश्यता होती है अन्यथा जीवन के लिए खतरा हो सकता है-

Pustular Psoriasis- यह भी गंभीर प्रकार का सोरायसिस है जिसमें पूरे शरीर पर छाले बन जाते हैं जिनमें Pus भरा होता है-

हमारी त्वचा पर जिस प्रकार से हमारे बाल बढते है तथा जिस तरह नाखून बढते हैं वैसे ही यह निरंतर बनती रहती है और उतरती रहती है और हमारे शरीर की संपूर्ण त्वचा एक महिने में पूरी बदल जाती है पर जहां सोरायसिस होता है वहां यह त्वचा केवल चार दिन में बदल जाती है-

साधारणतया सोरायसिस सामान्य मॉश्चराइजर्स या इमॉलिएंट्स जैसे वैसलीन ,ग्लिसरीन.या अन्य क्रीम्स से भी नियंत्रत हो सकता है सिर पर जब ये होता है तो विशेष प्रकार के टार शैंपू को काम में लिया जाता हैं सिर के लिए सैलिसाइलिक एसिड लोशन और शरीर पर हो तो सैलिसाइलिक एसिड क्रीम विशेष उपयोगी होती है इसके अलावा कोलटार(क्रीम,लोशन,शैम्पू)आदि दवाइयां विशेष उपयोगी होती हैं-

फोटोथैरेपी(Photo-therapy)-


  1. जिसमें सूर्य की किरणों मैं पायी जाने वाली अल्ट्रा वायलेट-A और अल्ट्रा वायलेट-B किरणों से से उपचार किया जाता है.PUVA थैरेपी जिसमें Psoralenes +अल्ट्रा वायलेट A थैरेपी सामान्य रूप से काम लिया जाने वाला उपचार है-
  2. इसके अलावा कैल्सिट्रायोल और कैल्सिपौट्रियोल नामक औषधियों का भी बहुत अच्छा प्रभाव होता है पर ये इतनी महंगी हैं कि सामान्य आदमी की पहुंच से बाहर होती हैं-
  3. इसके अलावा जब बीमारी ज्यादा गंभीर हो तब मीथोट्रीक्सैट और साईक्लोस्पोरिन नामक दवाईयां भी काम ली जाती हैं पर ये सब किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की देखरेख मैं ही लेनी चाहिये-
  4. इस रोग का रोगी यदि विशेषज्ञ से मिलता रहे तो ज्यादा परेशान नहीं होता है विशेषज्ञ के बगैर उपचार लेना भारी पङ सकता है क्यों कि अक्सर लोग लंबी बीमारी होने की वजह से नीम हकीमों के और गारंटी से ठीक कर देने वालों के चक्कर मैं पङ जाते हैं और सामान्य रूप से ये भी देखा गया है कि Erythrodermic psorisis या Pustular psoriasis गंभीरतम प्रकार है सोरायसिस के वे इस देशी या गारंटी वाले इलाज की वजह से ही होते है क्यों कि इस प्रकार के उपचार मैं ज्यादा तर स्टीरॉइड्स का उपयोग किया जा सकता है जिनसे अधिकतर चमङी की बीमारियों मैं थोङा बहुत फायदा जरूर होता है पर सोरायसिस मैं ये विष का काम करती है और थोङी सी बीमारी भी पूरे शरीर मैं फैल जाती है-
  5. READ MORE-
Upcharऔर प्रयोग-

0 comments :

एक टिप्पणी भेजें

TAGS

आस्था-ध्यान-ज्योतिष-धर्म (38) हर्बल-फल-सब्जियां (24) अदभुत-प्रयोग (22) जानकारी (22) स्वास्थ्य-सौन्दर्य-टिप्स (21) स्त्री-पुरुष रोग (19) पूजा-ध्यान(Worship-meditation) (17) मेरी बात (17) होम्योपैथी-उपचार (15) घरेलू-प्रयोग-टिप्स (14) चर्मरोग-एलर्जी (12) मुंह-दांतों की देखभाल (12) चाइल्ड-केयर (11) दर्द-सायटिका-जोड़ों का दर्द (11) बालों की समस्या (11) टाइफाइड-बुखार-खांसी (9) पुरुष-रोग (8) ब्लडप्रेशर (8) मोटापा-कोलेस्ट्रोल (8) मधुमेह (7) थायराइड (6) गांठ-फोड़ा (5) जडी बूटी सम्बन्धी (5) पेशाब में जलन(Dysuria) (5) हीमोग्लोबिन-प्लेटलेट (5) अलौकिक सत्य (4) पेट दर्द-डायरिया-हैजा-विशुचिका (4) यूरिक एसिड-गठिया (4) सूर्यकिरण जल चिकित्सा (4) स्त्री-रोग (4) आँख के रोग-अनिंद्रा (3) पीलिया-लीवर-पथरी-रोग (3) फिस्टुला-भगंदर-बवासीर (3) अनिंद्रा-तनाव (2) गर्भावस्था-आहार (2) कान-नाक-गले का रोग (1) टान्सिल (1) ल्यूकोडर्मा-श्वेत कुष्ठ-सफ़ेद दाग (1) हाइड्रोसिल (1)
-->