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हिस्टीरिया रोग के कुछ तथ्य यह है

हिस्टीरिया(Hysteria)के रोगी को दिमाग के डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए लेकिन बहुत से लोग हिस्टीरिया के दौरे को भूत-प्रेत का मामला मानते हैं पर इसके पीछे भी दिमागी कारण है अक्सर दोनों में होने वाले लक्षण एक ही जैसे होते हैं इसलिए लोग इसे उपरी हवा का प्रकोप समझ कर तांत्रिक की शरण लेते है-तान्त्रिको के द्वारा जो चिकित्सा की जाती है वो भी कुछ समय के लिए ही होती है पर भूत-प्रेत वाली स्थिति को भी हम हिस्टीरिया रोग के मामले मे केवल अंधविश्वास या झूठ नहीं मान सकते है रोगी इन लक्षणों को देखकर कहीं से किसी के दिए गए सुझाव को अपना लेता है-

हिस्टीरिया रोग के कुछ तथ्य यह है


हिस्टीरिया रोग(Hysteria Disease)का दौरा उस समय नहीं होता है जब रोगी बिलकुल अकेला होता है और देखने में हिस्टीरिया रोगी बेहोश मालूम होता है लेकिन यह वास्तव में सच नहीं है जबकि रोगी को होश रहता है और यह भी देखने में आता है कि रोग अधिकतर कुंवारी लड़कियों को होता है और विवाहिताओं में केवल उन्हें होता है जो यौनतः अतृप्त होती हैं-

ज्यादातर सुंदर युवतियां भी इस रोग की शिकार होती हैं जिनके शरीर पर कोई दाग या खरोंच नहीं पड़ता है उनके नितंब और वक्ष अविकसित होते हैं रोग का वेग अस्थायी और कम समय का होता है इसका दौरा अधिकतर बेकार और निरुद्देश्य जीवन बीताने वालों को भी होता है लेकिन कुछ मामलों में कार्यव्यस्त जीवन बिताने वालों को भी होता है दौरे के समय सहानुभूति दिखलाने तथा प्यार करने और दुलारने से रोगी को प्रसन्नता मिलती है दौरे के उपरांत रोगी शर्म महसूस करता है रोगी की इच्छा शक्ति दुर्बल होती है और प्रेरित होने पर ही वह सक्रिय बन पाता है-

कुछ लोग सोचते हैं कि स्त्रियों के मन में यौन भावना को दबाने के कारण हिस्टीरिया रोग(Hysteria Disease)हो जाता है पर ये बिल्कुल ग़लत है माना ये एक दबाव हो सकता है पर बहुत सारे दबावों में से सिर्फ एक है केवल यौन भावना को दबा देना हिस्टीरियां के रोगियों के लिए सही बात नहीं होगी या फिर इसकी वजह से उन्हे ग़लत समझ लिया जाएगा जिससे उनको मानसिक तौर पर काफ़ी परेशानी सहनी पड़ती है जिसके कारण उनका रोग और भी बढ़ सकता है-

हिस्टीरिया रोग में रोगी के मन मे कोई दबी हुई इच्छा रह सकती है जिसे ना तो रोगी किसी को बता सकता है और ना ही मन मे दबा सकता है जैसे कि अगर बच्चें को अपने मां-बाप से कोई शिकायत है तो ना तो वो अपने मां-बाप से बोलकर बात ना मनवा सकते हैं और ना ही उनसे कुछ कह सकते हैं पर वो इस बात के दबाव मे आकर हिस्टीरिया रोग के शिकार हो जाते हैं-

ऐसे ही एक पति-पत्नी की आपस मे बनती नहीं है तो पत्नी ना तो अपने पति को समाज के मारे छोड़ सकती है और ना ही उसे कुछ कह सकती है इसी कारण वो मन ही मन मे कुढ़ते हुए हिस्टीरिया रोग की शिकार हो सकती है जहां बीमारी के बहाने उसका बैचेन मन एक ओर तो उसके पति से बदला लेने लगता है दूसरी ओर खुद ही उसके मन को राहत मिलने लगती है बैचेन मन की ये दबी हुई इच्छा उसको पूरी तरह यौन सन्तुष्टि ना मिलने के कारण भी हो सकती है और इसे लेकर मन की अपराधी भावना भी कि उसे ये इच्छा सताती ही क्यों है वह तो यह चाहती ही नहीं है ये भी हो सकती है-

भविष्य मे कुछ बनना या काबिल व्यक्ति को ऊंचा उठने की लालसा भी जब पूरी नहीं हो पाती है तो आर्थिक सामाजिक स्थितियां या कर्त्तव्य की कोई आवाज़ उन्हे रोकती है और ऐसे व्यक्ति मानसिक रूप से इस बाधा या अभाव को स्वीकार भी नहीं कर पाते तो अवचेतन मन को मौक़ा मिलता है किसी दूसरे रास्ते से इस दबी इच्छा या भावना को निकालने का तो वो भी इसका शिकार हो जाते है-

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