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स्त्री में बांझपन रोग के लक्षण

नपुंसक उस व्यक्ति को कहते हैं जिस पुरुष के वीर्य या लिंग में कमी होती है तथा वह सन्तान की उत्पत्ति के योग्य नहीं रहता है ठीक इसी तरह वह महिला जिसके गर्भाशय में कुछ कमी हो या उसे मासिक धर्म ठीक समय पर नहीं आता है या वह संतान पैदा करने के लायक नहीं है उस महिला को नास्त्रीक कहा जा सकता है-

स्त्री में बांझपन रोग के लक्षण

बांझ उस स्त्री को कहते हैं जिस स्त्री के गर्भाशय नहीं होता है या उसे मासिक धर्म नहीं आता है लेकिन इसके अलावा कई स्त्रियां ऐसी भी होती है जिन्हे मासिक धर्म होते हुए भी नास्त्रीक कहलाती है कई लोग पूर्ण रुप से नपुंसक नहीं होते परंतु उनमें थोड़े-थोड़े गुण नपुंसक के भी मिलते हैं यदि उनकी अच्छी तरह से चिकित्सा की जाए तो उनमें स्त्रियों को गर्भवती करने की शक्ति पैदा हो जाती है और वे बच्चे पैदा करने का पुरुषत्व प्राप्त कर लेते हैं इसी तरह से अनेक महिला भी ऐसी है जिनका ठीक समय पर इलाज न होने पर बांझपन(Infertility)रोग के लक्षण पैदा हो जाते हैं और वह धीरे-धीरे नस्त्रीक बन जाती है-

बांझपन(Infertility)के प्रकार-


बाँझ स्त्री इक्कीस प्रकार की होती है जिनका विवरण इस प्रकार है-


उदावर्ता- जिस स्त्री की योनि में से झागदार मासिक धर्म बहुत ही दर्द के साथ निकलता हो उदावर्ता बाँझ श्रेणी में आती हैं-

बंध्या- जिस स्त्री को कभी मासिक धर्म नहीं आता हो तथा वह सभी तरह से स्वस्थ रहती हो वह बंध्या स्त्री कहलाती है-

बिप्लुता- जिस स्त्री की योनि में सदा दर्द रहता हो बिलुप्ता बाँझ(Infertility)श्रेणी में आती है-

परिप्लुता- वह स्त्री जिसकी योनि में सहवास के समय बहुत अधिक दर्द होता हो परिप्लुता स्त्री की श्रेणी में आती है-

वातला- जिस स्त्री की योनि बहुत अधिक सख्त, खुर्दरी और दर्द करने वाली हो-

लाहिताक्षरा- जिस स्त्री की योनि से बहुत तेज मासिक स्राव निकलता हो-

प्रसंनी- जिस स्त्री की योनि अपनी जगह से हट जाये-

वामनी- जिस स्त्री की योनि मनुष्य के वीर्य को तेजी के साथ उल्टी की तरह बाहर निकाल देती है-

पुत्रध्नी- जिस स्त्री का गर्भ ठहर जाने के कुछ दिनों बाद खून का आना शुरु हो जाता है तथा गर्भपात हो जाता है-

पित्तला- जिस स्त्री को योनि में मवाद और जलन महसूस होती हो-

अत्यानंदा- जिस स्त्री का मन सदा सेक्स करने को करता हो-

कर्णिका- जिस स्त्री की योनि में अधिक गांठे हो-

अतिचरणा- जो स्त्री सेक्स करते समय पुरुष से पहले ही स्खलित हो जाती हो-

आनंद चरण- जिस स्त्री की योनि से संभोग करते समय बहुत ज्यादा स्राव निकले और वह पुरुष से पहले ही स्खलित हो जाए-

श्लेष्मा- जिस स्त्री की योनि शीतल और चिकनी हो तथा खुजली रहती हो-

षण्ढ- जिस स्त्री के स्तन बहुत छोटे हो तथा मासिक स्राव न होता हो और योनि खुरदरी हो या गर्भाशय ही न हो और अगर हो तो काफी छोटा हो-

अण्डभी- जिस स्त्री की योनि सेक्स करते समय या अधिकतर नीचे पैरों पर बैठते समय तथा अण्डकोषों की तरह निकल आए-

विद्रूता- जिस स्त्री की योनि काफी अधिक खुली हुई हो-

सूचीवक्त्रा- जिस स्त्री की योनि इतनी अधिक सख्त हो कि पुरुष का लिंग अंदर ही न जा सके-

त्रिदोषजा- जिस स्त्री की योनि में सदा तेज दर्द तथा हमेशा खुजली होती रहे-

शीतला- जो स्त्रियां शांत स्वभाव की होती है वह शीतला(नस्त्रिक)स्त्री कहलाती है उन स्त्रियों में पुरुष से मिलने की चाह नहीं होती है जब वो शादी के बाद मजबूर होकर पति को खुश करने के लिए सेक्स में तल्लीन होती है तो उन्हें कोई मजा नहीं आता है बस वह निर्जीव शरीर की तरह पड़ी रहती है वे स्त्रियां बड़ी मुसीबत का कारण बनती है अगर शादी के एक-दो महिनों के बाद भी सेक्स का आनन्द न ले तो उनकी अच्छे चिकित्सक से इलाज कराना चाहिए-

हम अगली पोस्ट में बताने का प्रयास करेगें कि बांझपन(Infertility)वाली या उपरोक्त में से किसी भी एक लक्षण वाली स्त्री को किस प्रकार का घरेलू इलाज या क्या उपचार करना चाहिए-

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