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हिस्टीरिया का उपचार क्या है

पिछली पोस्ट में हमने हिस्टीरिया(Hysteria)के लक्षण के बारे में बताया था शुरू में आपको रोगी के अंदर अगर जांच में इस तरह के लक्षण देखने को मिले तो आप सबसे पहले रोगी को होश में लाने के लिए उसे लिटा देना चाहिए तथा साथ ही कमरे की खिड़कियां-दरवाजे खोल कर रखना चाहिए ताकि स्वच्छ और खुली हवा आ सके-

हिस्टीरिया का उपचार क्या है

रोगी को कुछ तरल पेय जैसे-शर्बत-फलों का रस या मीठा दूध आदि पिलाएं तथा रोगी को हल्का-फुल्का वातावरण, हास्यपूर्ण और सुखमय माहौल प्रदान करें या फिर पांच-दस दौरों के समय उसकी देखभाल, संभाल, परवाह, न करें-तो रोग स्वतः ठीक हो जाएगा-

यदि होश आने में देरी हो रही हो तो आप हिस्टीरिया रोगी को ठंडे पानी के छींटे या सिर पर ठंडे पानी की धार तब तक डालें जब तक हिस्टीरिया रोगी होश में न आ जाए फिर होश में आने पर रोगी को आप सांत्वना दें वैसे भी ये स्थिति कुछ समय के लिए ही होती है पर अगर समय रहते इलाज ना किया जाए तो ये कंपन, लकवा जैसे रोग में बदल सकते हैं इसलिए इस रोग का इलाज करवाने के बाद रोगी को दिमागी डॉक्टर की देखरेख में पूरा इलाज करवाना चाहिए-

हिस्टीरिया(Hysteria)का उपचार-

1- किसी स्त्री में हिस्टीरिया(Hysteria)रोग के लक्षण नज़र आते ही उसे तुरन्त किसी मनोचिकित्सक से इस रोग का इलाज कराना चाहिए-हिस्टीरिया के रोगी को गुस्से में या किसी और कारण से मारना नहीं चाहिए क्योंकि इससे उसे और ज़्यादा मानसिक और शारीरिक कष्ट हो सकते हैं तथा एक बात का ख़ासतौर पर ध्यान रखना चाहिए कि हिस्टीरिया रोगी अपने आपको किसी तरह का नुकसान ना पहुंचा पाए-

2- इस रोग के रोगी की सबसे अच्छी चिकित्सा उसकी इच्छाओं को पूरा करना तथा उसे संतुष्टि देना है इसके अलावा रोगी को शांत वातावरण में घूमना चाहिए-रोगी के सामने ऐसी कोई बात न करनी चाहिए जिससें उसे कोई चिन्ता सतायें-

3- इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को जब दौरा पड़ता है तो उसके शरीर के सारे कपड़े ढीले कर देने चाहिए तथा उसे खुली जगह पर लिटाना चाहिए और उसके हाथ और तलवों को मसलना चाहिए-

4- जब इस रोग से पीड़ित रोगी बेहोश हो जाए तो उसके अंगूठे के नाखून में अपने नाखून को चुभोकर उसकी बेहोशी को दूर करना चाहिए और फिर उसके चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मारनी चाहिए-इससे रोगी स्त्री को होश आ जाता है और उसका बेहोशीपन दूर हो जाता है जब रोगी स्त्री बेहोश हो जाती है तो हींग तथा प्याज को काटकर सुंघाने से लाभ मिलता है-

5- बेहोश होने वाली स्त्री को होश में लाने के लिए सबसे पहले रोगी की नाक में नमक मिला हुआ पानी डाल दें इससे बेहोशी रोग ठीक हो जाएगा लेकिन यह उपाय शीघ्र ही और कुछ ही समय के लिए है इसका अच्छी तरह से इलाज तो अपने डाक्टर या अपने वैद्य से ही कराना चाहिए-

6- इस रोग से पीड़ित स्त्री का इलाज करने के लिए कुछ दिनों तक उसे फल तथा बिना पका हुए भोजन खिलाना चाहिए-हिस्टीरिया(Hysteria)रोग से पीड़ित रोगी के लिए जामुन का सेवन बहुत ही लाभदायक होता है इसलिए रोगी स्त्री को प्रतिदिन जामुन खिलाना चाहिए-

7- यदि इस रोग से पीड़ित स्त्री प्रतिदिन एक चम्मच शहद को सुबह-दोपहर-शाम चाटे तो उसका यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है-

8- सर्वप्रथम एरंड तेल में भुनी हुई छोटी काली हरड़ का चूर्ण 5 ग्राम प्रतिदिन लगातार दे कर उसका उदर शोधन तथा वायु का शमन करें फिर सरसों, हींग, बालवच, करजबीज, देवदाख मंजीज, त्रिफला, श्वेत अपराजिता मालकंगुनी, दालचीनी, त्रिकटु, प्रियंगु शिरीष के बीज, हल्दी और दारु हल्दी इन सभी को बराबर-बराबर ले कर गाय या बकरी के मूत्र में पीस कर आप गोलियां बना कर छाया में सुखा लें तथा इसका उपयोग पीने, खाने, या लेप में किया जाता है-इसके सेवन से हिस्टीरिया रोग शांत होता है-

9- लहसुन को छील लें अब चार गुना पानी और चार गुना दूध में मिला कर इसे धीमी आग पर पकाएं तथा  आधा दूध रह जाने पर छान कर रोगी को थोड़ा-थोड़ा पिलाते रहें-

10- काले मुँह वाले लंगूर की लीद इकट्ठी करके उसे छाया में सुखाकर उसका पाउडर बना लें और जब रोगी को हिस्टीरिया का दौरा पड़े तब उसके मुँह से झाग-फेन आदि ठीक से साफ करके चवन्नी भर(2.5ग्राम) पाउडर में आठ से दस ग्राम तक अदरक का रस मिलाकर उसके गले में उतार दें दूसरे दिन ठीक उसी समय रोगी को दौरा पड़े या न पड़े लेकिन यही उपचार फिर से करें बस ऐसा निरंतर पाँच दिन तक करने से हिस्टीरिया में लाभ होता है-

11- ब्रह्मी,जटामांसी,शंखपुष्पी,असगंध और बच को समान मात्रा में पीस कर चूर्ण बना कर रख लें तथा एक छोटा चम्मच दिन में दो बार दूध के साथ सेवन करायें तथा इसके साथ ही सारिस्वतारिष्ट दो चम्मच दिन में दो बार पानी मिला कर सेवन करें-

12- ब्राह्मी वटी और अमर सुंदरी वटी की एक-एक गोली मिला कर सुबह तथा रात में सोते समय दूध के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है रोगी को बालवच चूर्ण को शहद मिला कर लगातार सवा माह तक सेवन कराएं और भोजन में केवल दूध एवं छाछ का सेवन करे तो उसका हिस्टीरिया शांत हो जाता है और अगर रोगी कुंवारी लड़की है तो उसकी जल्द से जल्द शादी करवा देनी चाहिए तो यह रोग अपने आप दूर हो जाएगा-

13- केसर, कज्जली, बहेड़ा, कस्तूरी, छोटी इलायची, जायफल और लौंग को बराबर मात्रा में मिलाकर सात दिन तक सौंफ के काढ़े में मिलाकर और घोटकर तैयार कर लें-इसके बाद इस मिश्रण को तैयार करके इलायची के दाने के बराबर की गोलियां बना लें और चार-चार ग्राम मूसली सफेद तथा सौंफ के काढ़े से सुबह और शाम सेवन करना चाहिए अगर मासिकस्राव के समय में कोई कमी हो तो सबसे पहले ऊपर बताई गई दवा से इलाज करें-

14- यह रोग कई बार रक्त की कमी के हो जाने के कारण से भी जाता है हिस्टीरिया रोग के होने पर रोगी स्त्री को लगभग एक ग्राम के चौथाई भाग के बराबर लोह भस्म को एक चम्मच के बराबर शहद में मिलाकर सुबह और शाम के समय में चटा दें और फिर ऊपर से 10-12 ग्राम मक्खन तथा मलाई के साथ खिला दें तथा इसके साथ दाल, रोटी, दूध, मलाई, घी का इस्तेमाल कर सकते है-

15- हिस्टीरिया रोग अक्सर ज़्यादा पेशाब करने से ही कम हो जाता है इसलिए इस रोग की स्त्री को बार-बार पेशाब कराने की कोशिश कराते रहना चाहिए-

16- इस रोग से पीड़ित रोगी को सकारात्मक सोच रखनी चाहिए तभी यह रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है इस रोग को ठीक करने के लिए स्त्रियों को योगनिद्रा का अभ्यास करना चाहिए-

17- हिस्टीरिया रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकार के आसन है जिनको प्रतिदिन करने से यह रोग कुछ दिनों में ही ठीक हो जाता है ये आसन इस प्रकार हैं- ताड़ासन, गर्भासन, उत्तानपादासन गोरक्षासन, कोनासन, भुंगगासन, शवासन, पद्मासन, सिंहासन तथा वज्रासन आदि-

18- यदि हिस्टीरिया की जगह किसी को मिर्गी के दौरे आते हों तो रोगी को 250 ग्राम बकरी के दूध में 50 ग्राम मेंहदी के पत्तों का रस मिलाकर नित्य प्रात: दो सप्ताह तक पीने से दौरे बंद हो जाते हैं-जरूर आजमाएं-

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