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24 जून 2017

डर के आगे जीत ही नही स्वास्थ भी है

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आपके साथ आज मै अपने एक और केस की चर्चा करती हूँ रोगी का नाम है अंजली बेन पटेल उम्र 58 वर्ष दरअसल अंजली बेन को डर की बीमारी(Phobia's Disease)हो गई थी उन्होंने डॉक्टर्स ओर सैकेटिस्ट को भी दिखाया और उन्होंने इसे अवसाद बताकर दवाइयां भी दी तो कुछ दिन उन्हें आराम भी मिला पर बाद में परिस्थितियां ज्यों की त्यों बनी रही और यह तकलीफ उन्हें चार साल से लगातार परेशान कर रही थी- 

Phobia's Disease

डर की बिमारी(Phobia's Disease)-


उनकी बेटी जो मुझसे इलाज करवा चुकी है अपनी किसी और तकलीफ का और इस समय वो कैनेडा में रहती है उन्होंने अंजली बेन को काफी फोर्स करके मुझसे मिलने को कहा-पिछले साल जब अंजली बेन मुझसे मिलने आई तब उनकी आंखों में निराशा साफ दिख रही थी मेरे पूछने पर उन्होंने बताया की उनको मन में हमेशा डर(Phobia)लगा रहता है ऐसा उनको लगातार लगता है कि कुछ बुरा होने वाला है कुछ बुरी खबर आने वाली है और कही जाना हो तो उनको लगता कि उनकी कार का एक्सीडेंट हो जाएगा तथा वह अकेली बाजार जाने से भी कतराती है तथा हर कार्य बेमन ओर निरुत्साह से करती हैं अकेले रहने से कतराती हैं तथा रात को सोते समय भी उन्हें लगता कि उनको नींद लग गई और घर मे आग लग गई तो..?

वो बार-बार गैस चूल्हे के बटन चेक करती है घर के मुख्यद्वार को अंदर से बार-बार चेक करती हैं कि ठीक से लगा हुआ है कि नही-इन तकलीफों की वजह से वो अकेले रहने से भी कतराती हैं अगर मोबाइल की रिंग बज जाए तो डर जाती की कही कुछ बुरी खबर तो नही है-

इस तरह की तकलीफों ने उनका आत्मविश्वास तोड़ कर रख दिया था वो कही भी अकेले आने जाने के काबिल नही है यही भावना उनके मन मे घर कर गई थी जिससे उन्हें और उनके परिवार को सामाजिक भी काफी परेशानियां हो रही थी-

उनके यह सारे सिम्पटम्स और दूसरे सिम्पटम्स को देखकर फिर मैने उन्हें दो तरह् के बेचफ्लॉवर कॉम्बिनेशन्स दिए और उन्हें तीन महीनों तक इसे लगातार लेने को कहा चार महीनों की चिकित्सा से आज अंजली बेन अपनी बरसो पुरानी तकलीफ से सम्पूर्ण मुक्त है आखरी बार की दवाई लेने वो मेरे पास अकेली ही आई थी-

डर की भावना(Feeling of fear)जो कि नेगेटिव इमोशन्स है अगर यह मन मे बहुत बढ़ जाए तो हमारे शरीर के वाइटल ऑर्गन्स पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है डर का सबसे ज्यादा प्रभाव किडनी पर पड़ता है और किडनी चूंकि हमारे जीवन सत्व को रेग्युलेट करती है तो डर की वजह से हम पूरे शरीर को क्षीण कर देते है इस इमोशन्स का यथा योग्य इलाज जल्दी से जल्दी करना चाहिए ताकि दूसरी गम्भीर समस्याओं से बचा जा सके-

बैच फ्लावर चिकित्सा में इस प्रकार के रोगों का निदान बिना किसी साइड इफेक्ट के है और ये सबसे उत्तम चिकित्सा है अगर आपके समाज या परिवार में इस प्रकार की कोई समस्या है तो आप मुझसे निसंकोच मेरे पते पर सम्पर्क कर सकते है नीचे मेरा पता है-

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सर में खुजली और पपड़ी निकलना

सम्पर्क पता-

Dr.Chetna Kanchan Bhagat

704- Solitaire Heights
New Golden Nest Phase-12
Near MithaLal Jain Banglow
Bhayander(East)
Dist-Thane
Mumbai- 401105(Maharashtra)

Phone Numbers-

08425904420, 08779397519(whatsup&call)

Timing- 11Am To 7 Pm

E-mailbhagatchetna@gmail.com


सम्पर्क करने से पहले-

1-रोगी की परेशानी, उम्र,लिंग,वजन बताए-

2- पैथोलोजिकल रिपोर्ट्स हो तो वह भी बताए-

3- रोगी के मानसिक लक्षण, स्वभाव, पसन्द, नापसन्द,यह सब नोट करके जब भी काल करे तब अवश्य बताए-

4- रोगी की भूख, प्यास,नींद, मल मूत्र नॉर्मल है या नहीं तथा स्त्रियों में माहवारी कम ज्यादा हो तो यह भी बताए-

5- सुबह ब्रश करने से पहले की जीभ की फ़ोटो हमें जीभ बाहर की तरफ निकाल कर भेजे-

आपके द्वारा भेजी गई यह सारी डिटेल्स आपका डायग्नोसिस करने में हमें सहायक होगी-इसलिए फोन और वोट्सएप पर यह फॉरवर्ड करना ही आपको बेहतर होगा अगर आपके पास वॉट्सप की सुविधा ना होतो आप यह सब नोट करके हमे फोन पर भी बता सकते है-दवा आपके पास कोरियर करने की सुविधा भी है-

Upcharऔर प्रयोग-

अल्‍सर का उपचार क्या है

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आम भाषा में अल्‍सर जिसे अक्सर लोग आमाशय का अल्‍सर(Gastric Ulcer)या पेप्टिक अल्‍सर कहते हैं आपके आमाशय या छोटी आँत के ऊपरी हिस्से में फोड़े या घाव जैसे होते हैं अल्‍सर उस समय बनते हैं जब भोजन को पचाने वाला अम्ल आमाशय या आँत की दीवार को क्षति पहुँचाता है-
अल्‍सर का उपचार क्या है

पहले यह माना जाता था कि अल्‍सर तनाव, पोषण या जीवनशैली के कारण होता है किन्तु वैज्ञानिकों को अब यह ज्ञात हुआ है कि ज्यादातर अल्सर एक प्रकार के जीवाणु हेलिकोबैक्टर पायलोरी या एच. पायलोरी द्वारा होता है और यदि अल्सर का उपचार न किया जाये तो ये और भी विकराल रूप धारण कर लेते हैं-अल्सर का शाब्दिक अर्थ है-घाव और यह शरीर के भीतर कहीं भी हो सकता है जैसे- मुंह, आमाशय, आंतों आदि में-

परन्तु अल्सर शब्द का प्रयोग प्राय: आंतों में घाव या फोड़े के लिए किया जाता है यह एक घातक रोग है लेकिन उचित आहार से अल्सर एक-दो सप्ताह में ठीक हो सकता है-

अधिक मात्रा में चाय, कॉफी, शराब, खट्टे व गरम पदार्थ, तीखे तथा जलन पैदा करने वाली चीजें, मसाले वाली वस्तुएं आदि खाने से प्राय: अल्सर हो जाता है इसके अलावा अम्लयुक्त भोजन, अधिक चिन्ता, ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, कार्यभार का दबाव, शीघ्र काम निपटाने का तनाव, बेचैनी आदि से भी अल्सर बन जाता है पेप्टिक अल्सर में आमाशय तथा पक्वाशय में घाव हो जाते हैं तथा धीरे-धीरे ऊतकों को भी हानि पहुंचनी शुरू हो जाती है इसके द्वारा पाचक रसों की क्रिया ठीक प्रकार से नहीं हो पाती है फिर वहां फोड़ा बन जाता है-

लक्षण-

पेट में हर समय जलन होती रहती है खट्टी-खट्टी डकारें आती हैं सिर चकराता है और खाया-पिया वमन के द्वारा निकल जाता है पित्त जल्दी-जल्दी बढ़ता है तथा भोजन में अरुचि हो जाती है हमेशा कब्ज रहता है और जब रोग बढ़ जाता है तो मल के साथ खून आना शुरू हो जाता है पेट की जलन छाती तक बढ़ जाती है तथा शरीर कमजोर हो जाता है और मन बुझा-बुझा सा रहता है रोगी चिड़चिड़ा हो जाता है तथा वह बात-बात पर क्रोध प्रकट करने लगता है-

पेट में किसी प्रकार के जख्म या दर्द का एहसास होना एवं आंतों में जलन की शिकायत होना तथा पेट के ऊपरी भाग में दर्द एवं जलन होना एवं गर्म पेय पीने के बाद असहजता का अनुभव होना आदि भी इसके लक्षण हैं-

अल्सर का घरेलु उपचार-


1- यदि पेट में जांच कराने के बाद घाव का पता चले तो संतरे का रस सुबह-शाम आधा-आधा कप इस्तेमाल करें इससे भी घाव भर जाता है-



2- पिसे हुए आंवले का दो चम्मच चूर्ण रात को एक कप पानी में भिगो दें तथा सुबह उसमें आधा चम्मच पिसी हुई सोंठ, चौथाई चम्मच जीरा तथा दो चम्मच पिसी हुई मिश्री मिलाकर सेवन करें-

3- अल्सर के रोगियों को दो केले कुचलकर उनमें तुलसी के पत्तों का रस एक चम्मच की मात्रा में मिलाकर खाना चाहिए-

4- यदि अल्सर के कारण पेट में दर्द की शिकायत हो तो एक चम्मच जीरा, एक चुटकी सेंधा नमक तथा दो रत्ती घी में भुनी हुई हींग इन सबको चूर्ण के रूप में सुबह-शाम भोजन के बाद खाएं तथा ऊपर से मट्ठा पिएं-

5- छोटी हरड़ दो, मुनक्का बीज रहित दो तथा अजवायन एक चम्मच-तीनों की चटनी बनाकर दो खुराक करें और इसे सुबह-शाम लें-

6- कच्चे केले की सब्जी बनाकर उसमें एक चुटकी हींग मिलाकर खाएं यह अल्सर में बहुत फायदा करती है-

7- एक चम्मच आंवले के मुरब्बे का रस तथा एक कप अनार का रस आप दोनों को मिलाकर सुबह के समय भोजन से पहले लें-

8- छोटी हरड़ एक, अजवायन एक चम्मच, धनिया दो चम्मच, जीरा एक चम्मच तथा हींग दो रत्ती इन सबका चूर्ण बनाकर दो खुराक करें और भोजन के बाद एक-एक खुराक मट्ठे के साथ लें-

अल्सर होने पर क्या खाएं क्या नहीं-


1- इस रोग में भोजन के बाद आमाशय के ऊपरी हिस्से में दर्द होने लगता है इसलिए रोगी को थोड़ी-सी हींग पानी में घोलकर लेना चाहिए -

2- रोगी को खाली दूध, दही, खोए तथा मैदा की चीजें नहीं खानी चाहिए-

3- यदि दोपहर को केवल उबली हुई सब्जियों जैसे-लौकी, तरोई, परवल, पालक, टिण्डे आदि का सेवन करें तो रोग जल्दी चला जाता है

4- अल्सर में मूली, खीरा, ककड़ी, तरबूज, खट्टी चीजें जैसे- इमली और खटाई नहीं खानी चाहिए-

5- सुबह नाश्ते में हल्की चाय एवं बिस्कुट लेना चाहिए तथा रात को हल्का भोजन करना बहुत लाभदायक होता है और तम्बाकू, कैफीन, अंडा, मांस, मछली, की तकलीफ को बढ़ा देता है इसलिए इनका भी प्रयोग न करें-

इसे भी ध्यान दें-


रात के खाने और सोने के बीच कम-से-कम दो घंटे का अंतर होना चाहिए-

अल्‍सर के रोगी को भरपेट भोजन नहीं करना चाहिए इसकी जगह थोड़ा-थोड़ा भोजन पांच-छ: बार में करें क्योंकि भोजन का पचना पहली शर्त होती है तथा भरपेट भोजन से अल्सर पर दवाब पड़ सकता है और खाया-पिया उल्टी के रूप में निकल सकता है- 

चाय बहुत हल्की पिएं और यदि चाय की जगह पपीते, मौसमी, अंगूर या सेब का रस लें तो लाभकारी होगा भोजन के बाद टहलने का कार्य अवश्य करें- 

पानी उबला हुआ सेवन करें भोजन के बाद अपनी टुण्डी पर सरसों का तेल लगा लें तथा रात को सोने से पूर्व पेट पर सरसों का तेल मलें साथ ही पैर के तलवों पर भी तेल की मालिश करें-

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अल्सर होने पर घरेलू प्रयोग अपनायें- अगली पोस्ट में 

Upcharऔर प्रयोग-

अल्सर होने पर आप अवश्य ही ध्यान दें

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यदि आपको बार-बार या लगातार आमाशय या पेट में दर्द हो तो सबसे पहले आपको अपने चिकित्सक की सलाह भी अवश्य लेंना चाहिए क्योंकि अक्सर यही अल्सर(Ulcer)के प्रथम लक्षण होते हैं अन्य लक्षणों में मितली आना, उल्टी आना, गैस बनना, पेट फूलना, भूख न लगना और वजन में गिरावट शामिल हैं-

अल्सर होने पर आप अवश्य ही ध्यान दें

चिकित्सक अल्सर(Ulcer)की जांच करा सकते है-


यदि आपके मल अथवा उल्टी में रक्त आये या आपके लक्षण और खराब हो जायें या दवाओं को कोई असर न हो रहा हो तो अपने चिकित्सक के पास पुनः जायें वे निम्न में से किसी एक जाँच कराने की राय दे सकते हैं-जीआई सीरीज़-बेरियम नामक एक सफेद तरल पीने के बाद अल्सरों(Ulcer)को देखने के लिये आपका एक्स-रे किया जायेगा एण्डोस्कोपी-उपशामक के उपयोग के उपरान्त चिकित्सक आपके गले और ग्रसनी से होते हुये आमाशय में एक नली डालेंगें जिसके सिरे पर कैमरा होता है इस कैमरे के द्वारा चिकित्सक आपके आहारनाल के अन्दर देख सकते हैं और ऊतक प्रकार का पता लगा सकते हैं एच. पायलोरी के लिये बने प्रतिजैविक देखने के लिये रक्त की जाँच तथा एच. पायलोरी की उपस्थिति के लिये मल की जाँच या तरल यूरिया पीने के बाद साँस की जाँच करा सकते है-

यदि आपकी जाँचों में अल्सर(Ulcer)के उपस्थिति की पुष्टि हो तो अपने चिकित्सक द्वारा दी गई राय का सख्ती से पालन करें वैसे ज्यादातर उपचारों से अल्सर के कारणों को जड़ से समाप्त करने का प्रयास किया जाता है या फिर उसे शल्य चिकित्सा द्वारा हटाया जाता है-

ऐस्परिन और नॉनस्टेरॉइडल एन्टी-इन्फ्लेमेटरी दवायें(एनएसएआइडी)भी अल्सर की कारक हो सकती हैं यदि आपके अल्सर हो तो आपको एनएसएआइडी लेने से बचना चाहिये और यदि आपको एनएसएआइडी लेने की आवश्यकता हो तो अपने चिकित्सक की राय के अनुसार आप अम्ल लघुकारक के साथ एनएसएआइडी ले सकते हैं लेकिन लम्बे समय से बिना उपचार के पनप रहे गम्भीर या प्राणघातक अल्सर के लिये शल्यचिकित्सा अतिआवश्यक हो जाती है-

अल्सर(Ulcer)होने पर क्या आहार लें-


1- आप अत्यधिक रेशेदार ताजे फल और सब्जियों का सेवन करें जिससे कि अल्सर होने की सम्भावना कम की जा सके या उपस्थित अल्सर को ठीक किया जा सके-

2- फ्लैवेनॉइड युक्त भोजन का अधिक मात्रा में सेवन करें सेब, सेलरी, क्रैनबेरी, लहसुन और प्याज, फलों और सब्जियों के रसों के साथ-साथ कुछ प्रकार की चायें फ्लैवेनॉइड के अच्छे स्रोत होते हैं-

3- यदि मसालेदार भोजन करने के बाद आपके अल्सर में दर्द बढ़ जाये तो इनका सेवन समाप्त कर दें हलाँकि कुछ चिकित्सकों का अब यह मानना है कि मसालेदार भोजन से अल्सर नहीं होता है लेकिन कुछ अल्सर वाले लोग यह अवश्य कहते हैं कि मसालेदार भोजन के उपरान्त उनके लक्षण गम्भीर हो जाते हैं-

4- कॉफी और कार्बोनेटेड पेय पदार्थों की संख्या सीमित करें या फिर आप पूर्णतया ही समाप्त कर दें इन सभी पेय पदार्थों का आमाशय की अम्लीयता में तथा अल्सर के लक्षणों को गम्भीर बनाने में सहभागिता होती है- 

5- अपने अल्सर पूर्णतयः ठीक होने तक शराब के सेवन तो बिलकुल भी न करें हाँ उपचार के उपरान्त शराब की थोड़ी मात्रा का सेवन वाजिब हो सकता है किन्तु इसके बारे में अपने चिकित्सक की राय अवश्य लें- 

6- बदहज़मी और सीने में जलन जैसे अल्सर के लक्षणों पर काबू पाने के लिये दवा की दुकानों पर मिलने वाले एन्टाऐसिड का प्रयोग करें-

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Upcharऔर प्रयोग-

प्राकृतिक चिकित्सा के क्या फायदे हैं

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आज हर मनुष्य निरापद चिकित्सा चाहता है आज वो इस बात को समझने लगा है कि अगर शरीर को स्वस्थ और सम्रद्ध जीवन जीना है तो प्राकृतिक चिकित्सा(Natural Treatment)ही लाभदायक है प्राकृतिक चिकित्सा का सबसे बड़ा लाभ यही है कि यह निराप्रद और स्थायी तथा एक सम्पूर्ण चिकित्सा पद्धति है यानि रोग के लक्षणों पर नही किन्तु रोग के उदगम की जड़ पर ही चिकित्सा की जाती है जिससे अविश्वसनीय ओर स्थायी लाभ मिलते है-
Benefits of Natural Treatment

हमारे शरीर को ऊर्जा या शक्ति भोजन से, आराम यानि नींद से और श्वासोश्वास से मिलती है हर पल हमारी त्वचा के करोड़ो रोम छिन्द्र ब्रह्मांड से कॉस्मिक एनर्जी का शोषण करते रहते है यानि हमारा शरीर अपने आप मे ही एक ऊर्जा पिंड ही है और जब इस ऊर्जा के मार्ग में कुछ व्यधान आते है चाहे वो शारीरिक हो या मानसिक तब शरीर को क्षति पहुंचती है और रोगों का उदभव होता है-

जब हम उन रोगों की चिकित्सा के लिए प्राकृतिक तरीके यानि की आयुर्वेद, यूनानी, होमियोपैथी, बेचफ्लॉवर, एक्यूप्रेशर और सुजोक जैसी चिकित्साए अपनाते है तब हम स्वयं से जुड़ते है चिकित्सा के दौरान अगर हम गौर करे तो हमारा शरीर ही हमसे एक कनेक्शन बनाता है अगर चिकित्सा के दौरान यदि हम गहरे निरीक्षण करे तो हम शरीर मे होने वाले बदलावों को भी आप महसूस कर सकते है और धीरे-धीरे स्वयम के शरीर पर अपना कंट्रोल रख सकते है-

प्राकृतिक चिकित्सा(Natural Treatment)के दौरान पथ्य अपथ्य से ना केवल स्वास्थ सुधरता है बल्कि हमारी इच्छा शक्ति भी मजबूत बनती है और इसी इच्छा शक्ति की मदद से हम शारीरिक और मानसिक दोनों तकलीफों का सामना कर सकते है-

चिकित्सा के दौरान की परिचर्या से हमे अपने शरीर को जानने का मौका मिलता है और स्वास्थ्य की असली कीमत पता चलती है जब बीमारी से शरीर ही कमजोर नही होता किन्तु मन भी उदास, थका हुआ और निरुत्साही बनता है पर जब हम प्राकृतिक चिकित्सा(Natural Treatment)के तरीके आजमाते है तब शरीर और मन दोनों में स्फूर्ति महसूस होती है और साथ ही साथ में हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ता है-

प्राकृतिक चिकित्सा(Natural Treatment)से हमे रोजाना दवाइया नही खानी पड़ती है और ना ही हमे गोलियों का गुलाम बनना पड़ता है बल्कि गड़बड़ सी जीवन शैली को सुधार कर आहार को औषिधि बनाकर बेहद सरल ढंग से स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते है और सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि रोगी स्वयं स्वस्थ हो कर दूसरो को भी प्रेरित कर सकता है-

इस तरह हम रोगों का इलाज ही नही किन्तु प्रीवेंशन भी कर सकते है इस तरह प्राकृतिक चिकित्सा(Natural Treatment)हमारे शरीर और मन को जोड़ती है तथा मन की नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदल देती है और निश्चित ही हमे साइड इफेक्ट्स से बचाकर हमारी ऊर्जा और धन के व्यय को रोकती है और हमे स्वस्थ तन और मन प्रदान करती है-

हमारा स्वास्थ अनमोल है हम लाखो रुपये खर्च करके भी स्वास्थ्य को खरीद नही सकते स्वस्थ जीवन एक साधना है हमे बस अपने शरीर के प्रति थोड़ा जागृत ओर कन्सर्न होने की जरूरत है ताकि समय रहते समस्याओं से निपटा जा सके और रोगों की जड़ मजबूत होने से पहले उसे नेस्तानाबूद किया जा सके और रोगों को असाध्य होने से रोका जा सके और सच मानिए तो यही असली चिकित्सा है-

प्रस्तुती-

Dr. Chetna Kanchan Bhagat

Whatsup & call No- 8779397519

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23 जून 2017

योग का एक संक्षिप्त इतिहास

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हम आज योग दिवस के बारे में चर्चा करते है 21 तारीख को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस(International Yoga Day)था तो हमारे कुछ पाठक ने हमें प्रेरित किया कि हम योग के बारे में भी विधिवत सम्पूर्ण जानकारी दें तो हमें भी लगा कि योग का हमारे स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण स्थान है योग(Yoga)का वर्णन वेदों में और उपनिषदों में और फिर गीता में भी मिलता है हमारा प्रयास आप तक योग की जानकारी को सम्पूर्ण क्रम से और व्यवस्थित रूप आप तक पंहुचाएं-


योग का एक संक्षिप्त इतिहास

प्रस्तुत लेख योग और स्वास्थ्य(Yoga and Health)के बारे में लेख प्रारम्भ करने से पहले आपको योग का इतिहास(History of Yoga)आपको बताना आवश्यक समझता हूँ आइये जाने क्या है योग का इतिहास-


योग का संक्षिप्त इतिहास(History of Yoga)-


योग का उपदेश सर्वप्रथम हिरण्यगर्भ ब्रह्मा ने सनकादिकों को उसके पश्चात विवस्वान(सूर्य)को दिया था बाद में यह दो शखाओं में विभक्त हो गया-एक ब्रह्मयोग और दूसरा कर्मयोग 

ब्रह्मयोग की परम्परा सनक, सनन्दन, सनातन, कपिल, आसुर‍ि, वोढु और पच्चंशिख नारद-शुकादिकों ने शुरू की थी यह ब्रह्मयोग लोगों के बीच में ज्ञान, अध्यात्म और सांख्‍य योग नाम से प्रसिद्ध हुआ-दूसरी कर्मयोग की परम्परा विवस्वान की है-विवस्वान ने मनु को, मनु ने इक्ष्वाकु को, इक्ष्वाकु ने राजर्षियों एवं प्रजाओं को योग का उपदेश दिया था उक्त सभी बातों का वेद और पुराणों में उल्लेख मिलता है वेद को संसार की प्रथम पुस्तक माना जाता है जिसकी उत्पत्ति काल लगभग 10000 वर्ष पूर्व का माना जाता है और पुरातत्ववेत्ताओं अनुसार योग की उत्पत्ति 5000 ई.पू. में हुई थी-आगे गुरु-शिष्य परम्परा के द्वारा योग का ज्ञान परम्परागत तौर पर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मिलता रहा है-

भारतीय योग जानकारों के अनुसार योग की उत्पत्ति भारत में लगभग 5000 वर्ष से भी अधिक समय पहले हुई थी योग की सबसे आश्चर्यजनक खोज 1920 के शुरुआत में हुई उस समय पुरातत्व वैज्ञानिकों ने 'सिंधु सरस्वती सभ्यता' को खोजा था जिसमें प्राचीन हिंदू धर्म और योग की परंपरा होने के सबूत मिलते हैं-


योग ग्रंथ योग सूत्र-


वेद, उपनिषद्, भगवद गीता, हठ योग प्रदीपिका, योग दर्शन, शिव संहिता और विभिन्न तंत्र ग्रंथों में योग विद्या का उल्लेख मिलता है इन सभी को आधार बनाकर पतंजलि ने योग सूत्र लिखा-योग पर लिखा गया सर्वप्रथम सुव्यव्यवस्थित ग्रंथ है "योगसूत्र "

योगसूत्र को पांतजलि ने 200 ई.पूर्व लिखा था इस ग्रंथ पर अब तक हजारों भाष्य लिखे गए हैं लेकिन कुछ खास भाष्यों का यहां उल्लेख लिखते हैं-

व्यास भाष्य-


व्यास भाष्य का रचना काल 200-400 ईसा पूर्व का माना जाता है महर्षि पतंजलि का ग्रंथ योग सूत्र योग की सभी विद्याओं का ठीक-ठीक संग्रह माना जाता है इसी रचना पर व्यासजी के 'व्यास भाष्य' को योग सूत्र पर लिखा प्रथम प्रामाणिक भाष्य माना जाता है व्यास द्वारा महर्षि पतंजलि के योग सूत्र पर दी गई विस्तृत लेकिन सुव्यवस्थित व्याख्या है-

तत्त्ववैशारदी-


पतंजलि योगसूत्र के व्यास भाष्य के प्रामाणिक व्याख्याकार के रूप में वाचस्पति मिश्र का 'तत्त्ववैशारदी' प्रमुख ग्रंथ माना जाता है वाचस्पति मिश्र ने योगसूत्र एवं व्यास भाष्य दोनों पर ही अपनी व्याख्या दी है तत्त्ववैशारदी का रचना काल 841 ईसा पश्चात माना जाता है-

योगवार्तिक-


विज्ञानभिक्षु का समय विद्वानों के द्वारा 16वीं शताब्दी के मध्य में माना जाता है योगसूत्र पर महत्वपूर्ण व्याख्या विज्ञानभिक्षु की प्राप्त होती है जिसका नाम ‘योगवार्तिक’ है।

भोजवृत्ति-



भोज के राज्य का समय 1075-1110 विक्रम संवत माना जाता है धरेश्वर भोज के नाम से प्रसिद्ध व्यक्ति ने योग सूत्र पर जो 'भोजवृत्ति' नामक ग्रंथ लिखा है वह भोजवृत्ति योगविद्वजनों के बीच समादरणीय एवं प्रसिद्ध माना जाता है कुछ इतिहासकार इसे 16वीं सदी का ग्रंथ मानते हैं-

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क्या है योग हिन्दू धर्म दर्शन- अगली पोस्ट में

Upcharऔर प्रयोग-

तैलपूर्ण उपचार क्या है

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समय के साथ हर चीज बदलती है इसी नियम का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि आजकल की आधुनिक जीवन शैली जो आधुनिक कम और नुकसानदेह ज्यादा मालूम पड़ती है आज कल बदलते पर्यावरण और मिलावटी खानपान से जहाँ शरीर के पोषण मिलने में बाधा रूप बन रहा है वही जीवन की मूलभूत जीवन शैली में आए इस फेरबदल ने हमे प्राकृतिक स्वास्थ से भी दूर कर दिया है-

तैलपूर्ण उपचार क्या है

आजकल की फास्ट लाइफ की वजह से ना तो लोगो को उचित ओर हितकर आराम मिल रहा है और ना ही शरीर को उचित व्यायाम मिल पा रहा है मिलावट ने जहां हमारी रसोई से असली घी गायब कर दिया है वही असली तैल जो कि विटामिन डी के उत्तम स्त्रोत थे उसकी जगह आज रिफाइंड आयल ने ले ली है-

चूँकि रिफाइंड आयल की लागत कम और मुनाफा ज्यादा है तथा इसकी शेल्फ लाइफ भी असली तेलों के मुकाबले कई ज्यादा है यानी छपी हुई एक्सपायरी डेट में अगर तेल ना भी बिके तो कम्पनिया इसे रिपैकिंग करके बेचती रहती है इसीलिए इन तेलों के इतने विज्ञापन चलाए जाते है और लोगो की सेहत से खिलवाड़ करके एक मोटा मुनाफा ऐंठा जाता है बेचने वालों को अपने मुनाफे से मतलब है जनता भी अपनी आँखों पर पट्टी बाँध कर इसे उपयोग करती जा रही है-

अब यह तो हुई भोजन में लेने वाली तेलों की बात पर अब बढ़ते फैशन में बालों में तेल लगाने का चलन भी कम हो गया है और बाजारू हेयरॉइल्स में पैराफिन आयल याने पेट्रोलियम तेल का उपयोग मुनाफा कमाने के चक्कर मे हो रहा है इससे भी बालों और  सिर की त्वचा को पोषण नही मिलता है जिससे शरीर में वायु कुपित होकर हेयर फॉलिकल्स को वीक करता है जिससे बाल झड़ना, टूटना और रूसी की समस्या भी अब आम बात हो गई है-

फास्ट लाइफ और बिजी शेड्यूल के चलते स्नेहनम या अभ्यंगम या तेल मालिश जैसी स्वास्थ उपयोगी आदते तो विलुप्त हो रही है जिससे त्वचा में नमी नही रहती और आपकी त्वचा सूखी हो जाती है तथा अपना लचीलापन ओर चमक खो देती है और ऊपर से बाजार में उपलब्ध ये कॉस्मेटिक्स क्रीम और लोशन असर से ज्यादा नुकसान ही करते है और परिणाम स्वरूप शरीर मे नमी ओर लुब्रिकेशन की कमी हो जाती है जिससे युवा उम्र में ही हड्डियों में स्टीफनेस, कटकट सी आवाज आना, पीठ दर्द, कमर दर्द, घुटने का दर्द, सर्वाइकल, एड़ी दुखना, हड्डियों के दर्द, रूखी त्वचा, त्वचा में खुजली, बालो में रूसी या बालो का झड़ना जैसी आम समस्या हो जाती है-

तैलपूर्ण उपचार-


आज जो हम आपको एक उपाय बता रहे है वो ना सिर्फ प्रीवेंटिव है बल्कि क्योर याने इलाज भी है इसके लिए आपको सिर्फ छुट्टी  के दिन हफ्ते में एक बार सिर्फ 30 मिनिट का एक प्रयोग करना है-

सामग्री-


गाय का देशी घी
तिल या सरसो का शुद्ध तेल

सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाए अब(एक सहायक व्यक्ति से)पैरों की उंगलियों के नाखूनों में तिल या सरसो के हल्के गर्म तेल की एक एक बूंद डाले यह आपको दसो उंगलियों के नाखून में करना है इसके बाद नाभि में तिल का तेल उतना डालें जिससे नाभि भर जाए फिर दोनों कानो में तिल तेल की 5-6 बूंद डाले-

अब गाय का घी को हल्का गर्म करके पिघला ले नाक के दोनों नथुनों में 2-2 बूंद घी डाले तथा आंखों में भी एक एक बूंद घी डाले तथा मुँह में एक चमच घी डाले लेकिन आप इसे पिये नही बस मुंह में रख कर आंखे बंद करके लेटे रहे तथा सामान्य श्वासों श्वास लेते रहे बीस से तीस मिनिट यूँ ही लेटे रहे और फिर मुंह का घी फेंक दे और आप स्नान कर ले-

यह तैल पुरण प्रयोग शरीर की कुदरति चिकनाई ओर नमी की पूर्ति करता है इससे आपके दांत मजबूत होते है मसूड़े मजबूत होते है मुह से छालों में आराम मिलता है तथा कफ आधिक्य के रोगों में भी तथा सर दर्द, आंखे दर्द, खर्राटे, असमय बाल सफेद होना, गंजा होना, नाखूनों का टूटना तथा मस्तिष्क के विकारों मे भी यह विधि काफी लाभदायक है यह उपाय हर सप्ताह करने से मालिश के फायदे मिलते है और असमय आने वाले बुढापे को टाला जा सकता है-

प्रस्तुती-

Dr.Chetna Kanchan Bhagat

Whatsup No- 8779397519

Upcharऔर प्रयोग-

22 जून 2017

बैच फ़्लावर चिकित्सा और 38 दवाओं से रोग निदान

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कई पाठक का सवाल था कि बैच फ्लावर चिकित्सा क्या है जबकि वास्तविकता है कि होम्योपैथिक पाठयक्रम मे बैच फ़्लावर चिकित्सा के बारे में नही पढाया जाता है कई होम्योपैथी डॉक्टर का यह प्रश्न भी स्वभाविक और उत्सुकता का है इस संबध में कई होम्योपैथिक चिकित्सकॊ ने बैच फ़्लावर दवाओं के  प्रयोग की विधि मात्रा और रीपीटीशन पर प्रश्न भी किये हैं आइये आपको कुछ जानकारी से अवगत कराती हूँ-

बैच फ़्लावर चिकित्सा और 38 दवाओं से रोग निदान

डा0 इडवर्ड बैच इन बैच  फ़्लावर दवाओं के जनक माने जाते हैं जबकि डां0 बैच की मेडिकल  यात्रा एक ऐलोपैथिक चिकित्सक से हुई थी और डाँ0 बैच ने यूनिवर्सिटी कालेज हास्पिटल, लंदन से मेडिकल की कई सारी डिग्रियाँ प्राप्त कीं थी ये आपात चिकित्साधिकारी रहे इसके बाद जीवाणु विज्ञानी भी रहे-

डा0 इडवर्ड बैच ने इसके बाद होम्योपैथिक का अध्ययन और प्रैकिटिस शुरु की थी लेकिन होम्योपैथिक पद्दति में उनका मन औषधि सेलेकशन मे आ रही कठिनाईयों के कारण उन्हें रास नही आया तब प्रकृति प्रेमी डा0 बैच का ध्यान वापस प्रकृति मे विद्धमान साधनों पर गया उनके मस्तिष्क में एक बात कुलबुला उठी कि कैसे जंगलों और पहाडॊं पर रहने वाले लोग बिना दवाई के स्वस्थ रहते हैं-

डा0 इडवर्ड बैच इस बात को जानते थे कि जंगली पक्षी या जानवर कैसे फ़ूलॊ और जडी बूटियों से ही अपने आप को स्वस्थ कर लेते हैं तथा प्रकृति मे अलग-अलग पौधे भी प्राकृतिक घटनाओं के बावजूद भी अपने आप को सुरक्षित रखते हैं और फ़लते फ़ूलते हैं डा0 इडवर्ड बैच ने छ: साल मे जंगलॊ और पहाडॊं पर घूमते हुये उन्होनें अनेक पुष्प  इक्कठ्ठे किये और उन पुष्पों  से 38 दवाइयाँ बनाई जिनको आज “ बैच फ़्लावर रेमेडिज “ के नाम से जाना जाता है-

डा0 इडवर्ड बैच के अनुसंधान एंव विभिन्न रोगियों के इलाज के दौरान वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि सभी बीमारीयों की जड में हमारी ही नकारात्मक सोच होती है यदि इन नकारत्मक सोच को यदि सकारत्मक सोच मे बदल दिया जाय तो मनुष्य शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रुप से सुखी जीवन जी सकता है डा0 इडवर्ड बैच ने अपनी रिसर्च के आधार पर मानव मात्र मे 38 नकारात्मक सोचों को को सात भागों में वर्गीकृत किया गया है-  

1- डर
2- अनिश्चिता
3- वर्तमान मे अरुचि और भूत भविष्य में खोये रहना 
4- अकेलापन 
5- परिस्थतियों एव, दूसरे के विचारों से अत्याधिक प्रभावित होना 
6- उदासी  
7- अवसाद और निराशा

बैच फ़्लावर पद्दति से इलाज करते समय चिकित्सक को फ़्लावर दवाओं की मानसिक थीम को रोगी मे ढूँढना पडता है आगे हम डा0 इडवर्ड बैच द्वारा आविष्कृत फ्लावर रेमिडिज बता रहे है जिनके गुण इस प्रकार है-

1-एग्रीमोनी(Agrimony)- 

मानसिक संताप(तकलीफ)या दूसरों से अपनी पीड़ा छिपाना अर्थात् जब रोगी अपनी पीड़ा दूसरों से छिपाकर अपने को हँसमुख एवं खुश दिखाने का प्रयत्न करता हो तो ऐसी मानसिकता वाले व्यक्ति के लिए यह औषधि उपयुक्त होती है-

2- आस्पेन(Aspen)- 

भय जिसके कारणों की ओर-छोर का पता न हो लेकिन फिर भी रोगी हमेशा भयभीत रहता हो ऐसे रोगी के लिए इस दवा का प्रयोग किया जाता है-

3- बीच(Beach)- 

असहिष्णुता, हमेशा हर जगह व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने के लिए परेशान रहना लेकिन रोगी जब दूसरों की कठिनाइयों का अनुभव न कर और उनकी अच्छाइयों को न देखकर केवल गलतियों की ओर दृष्टि रखता हो तो यह दवा उसके लिए उपयोगी होगी-

4- सेन्टौरी(Centaury)- 

कमजोर इच्छा शक्ति होना तथा ही तुरन्त दूसरों के प्रभाव में आ जाना जैसे लक्षण होते है जो लोग शांत और डरपोक हैं तथा जल्दी ही दूसरों से प्रभावित हो जाते हैं दूसरे शब्दों में जो सदा बेगारी करने में लगे रहते हैं ये उनके लिए लाभदायक दवा है-

5- सिराटो(Cerato)- 

यह उन लोगों की दवा है जिनके पास बुद्धि है और अन्तर्बोध है तथा जिनके अपने निश्चित विचार हैं लेकिन फिर भी उन्हें अपनी क्षमता पर संदेह बना रहता है और प्राय: वे मूर्खतापूर्ण काम करते रहते हैं प्राय: एक से, दूसरे से, तीसरे से राय और मशविरा माँगते रहते हैं ऐसी मानसिकता वाले लोगों पर यह दवा बहुत अच्छा काम करती है-

6- चेरी प्लम(Cherry Plum)- 

मानसिक नियंत्रण खोने का भय या घोर निराशा तथा स्नाययिक विकार के कारण घोर निराशा और उससे बचने के लिए आत्महत्या करने की चाह/प्रवृत्ति रखने वाले व्यक्तियों के लिए यह काफी उपयोगी औषधि है-

7- चेस्टनट बड(Chestnut Bud)- 

एक ही गलती बार-बार करना तथा ध्यान का अभाव या अपनी पिछली गलती से कुछ भी न सीखना-जिन लोगों में यह प्रवृत्ति हो उन्हें इस दवा से लाभ होगा-

8- चिकोरी(Chicory)- 

आत्मानुरक्ति, स्वार्थी, अपने प्रति सहानुभूति की चाह, लोगों को अपने प्रति ध्यान आकृष्ट करने की प्रवृत्ति, दूसरों का ध्यान आकृष्ट करने तथा सहानुभूति पाने के लिए बीमारी का बहाना करना आदि लक्षण होने पर चिकोरी की आवश्यकता है-

9- क्लेमाटिस(Clematis)- 

उदासीनता, दिवास्वप्न देखना, असावधान तथा जिन लोगों की ऐसी मानसिकता हो ऐसे रोगियों के लिए क्लेमाटिस उपयुक्त औषधि है-

10- क्रैब एपल(Crab Apple)- 

अपने प्रति घृणा,उदासी और निराशा हो तो यह औषधि हमारे मन या शरीर का उन रोगों से मुक्त करती है जिनके कारण हम अपने आप से घृणा करते हैं या उस अंग को काट देना चाहते हैं, जिसके कारण हमें शारीरिक या मानसिक पीड़ा होती हो यानि दूसरे शब्दों में रोगी जब दाँत के दर्द से पीड़ित होता है तो वह डॉक्टर से उस दाँत को निकाल देने के लिए कहता है और यदि फोड़े से पीड़ित है तो जल्दी आपरेशन कराकर उस फोड़े से मुक्त होना चाहता है या यदि उसे कोई चर्मरोग हो गया है जिससे वह लोगों के बीच में अपने को हीन समझता है तथा उसे लोगों से छिपाता है तो 'क्रैब एपल' के प्रयोग से उसे रोग से छुटकारा मिल सकता है-

11- एल्म(Elm)- 

प्राय: अपर्याप्तता का भाव, उदासी और थकान हो तो यह औषधि उनके लिए है जो अपने उत्तरदायित्व और कार्य के बोझ से अपने को प्राय: दबा हुआ महसूस करते हैं और अपेक्षित परिणाम न मिलने से उदास हो जाते हैं तथा थकान का अनुभव करते हैं-अत: यह दवा उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो काफी सक्षम हैं और ऊॅंचे पदों पर कार्यरत हैं जैसे उद्योगपति, मंत्री, चिकित्सक, अध्यापक, नर्स आदि-

12- जेन्शियन(Gentian)- 

उदासी, निराशा, हतोत्साह, अनिश्चितता का होना-यह उन लोगों के रोग में लाभदयक है जो कठिनाइयाँ आने पर और मनोनुकूल परिणाम न होने पर जल्दी ही साहस खो दते हैं इसके कारण उनमें उदासी और निराशा घर कर जाती है-

13- गॉर्स(Gorse)- 

एक निराशा से पीड़ित होना-जो लोग अपने रोग का इलाज कराते-कराते थक गए हों और रोग से मुक्त होने की आशा छोड़ चुके हों वे इस औषधि से रोग मुक्त हो सकते हैं-

14- हीदर(Heather)- 

आत्म-केन्द्रित होना, सदा अपनी चिन्ता करना तो यह औषधि एग्रीमीनो के बिल्कुल विपरीत है-एग्रीमोनी का रोगी अपने कष्ट की चर्चा बिल्कुल नहीं करता है जबकि हीदर का रोगी हमेशा दूसरों से अपना ही रोना रोता रहता है फिर चाहे बीमारी हो या पारिवारिक कष्ट हो या और कोई परेशानी-डाक्टर के पास अपनी बीमारी की छोटी-छोटी बातों को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर विस्तार से वर्णन करता है-

15- होल्ली(Holly)- 

घृणा, ईष्या, शक जिन लोगों के स्वभाव में ये प्रवृत्ति पायी जाती हैं तो होल्ली उनके लिए अमृत है यह उनके केवल रोग को ही नहीं बल्कि उनके मन से घृणा, इर्ष्या और शक को भी दूर करती है-

16- हनीसकुल(Honeysuckle)- 

सदा बीते यादों में खोए रहना तथा इस औषधि के विषय में डाँ. एडवर्ड बाक का निष्कर्ष जानिये आप उन्हीं के शब्दों में-'' यह औषधि पिछले पश्चातापों और दुखों को मन से मिटाकर,बीते जीवन के प्रभाव, चाहतें और इच्छाओं को समाप्त कर हमें वर्तमान में लाने के लिए हैं ''

17- हार्नबीम(Hornbeam)- 

मानसिक एवं शारीरिक थकान-यह थकान मानसिक अधिक और वास्तविक(शारीरिक)कम होती है अर्थात शारीरिक थकान मानसिक थकान के कारण महसूस होती है ऐसी स्थिति में हार्नबीम मानसिक और शारीरिक शक्ति प्रदान करती हैं-


18- इम्पेशेंस(Impatiens)- 

अधीरता,चिड़चिड़ापन, चरम मानसिक तनाव होना-ये लोग बहुत ही बुद्धिमान, तत्काल निर्णय लेने वाले, जल्दी-जल्दी काम करने वाले होते हैं यदि आप अपनी बात धीरे-धीरे कह रहे हों तो आपके वाक्य को वे खुद पूरा कर देते हैं तथा कोई चीज देने में जरा भी विलम्ब हो तो वे उसे आपके हाथ से झपट लेते हैं अर्थात् जरा भी विलम्ब उनके लिए बर्दाश्त से बाहर हो जाता है और उनमें चरम मानसिक तनाव पैदा करता है ऐसे लोगों की औषधि हैं  'इम्पेशेंस'

19-लार्च(Larch)- 

आत्मविश्वास का अभाव, असफलता से आशंकित, उदासी, हीन भावना तथा अपने आप पर और अपनी क्षमता पर विश्वास के अभाव के कारण वे कुछ भी करने का प्रयास नहीं करते है इससे उनमें हीन भावना का जन्म होता है और सदा उदास बने रहते हैं ऐसी मानसिकता वाले रोगियों के लिए लार्च बहुत ही उपयोगी है-

20- मिम्युलस (Mimulus)- 

यह औषधि 'आस्पेन' के बिल्कुल विपरीत है आस्पेन से भय के मूल का पता नहीं होता है जबकि मिम्युलस के भय का मूल ज्ञात रहता है मिम्युलस के भय का रूप उतना भयानक नहीं होता है जितना 'रॉक रोज' का-

21- मस्टर्ड (Mustard)- 

अज्ञात कारण से घोर उदासी होना तथा एक ऐसी उदासी, ऐसी निराशा व्यक्ति को घेर ले जिसका कोई स्पष्ट कारण न दिखाई पड़ता हो तो इस औषधि से रोगी को लाभ होगा- डाँ. बाक कहते हैं कि यह उदासी को दूर भगाती है और जीवन में खुशी लाती है-

22- ओक (Oak)- 

उदासी, निराशा, लेकिन प्रयत्न करते रहना-यह दवा 'गॉर्स' के विपरीत है 'गॉर्स' का रोगी निराश होकर अपने रोगों का इलाज बंद कर देता लेकिन ओक का रोगी अपने रोग के इलाज से निराश होने के बावजूद एक के बाद दूसरे, तीसरे चिकित्सक से इलाज कराता रहता है-

23- ओलिव (Olive)- 

पूरी थकान, चरम मानसिक और शारीरिक थकान होना यह उन लोगों की औषधि है जो लम्बे समय से चिन्ता और विषम परिस्थिति के शिकार रहे हैं या लम्बी और गम्भीर बीमारी जिनके जीवनी शक्ति को चूस ली है 'ओलिव' ऐसे रोगियों के लिए है-

24- पाइन (Pine)- 

प्राय: अपने पर दोषारोपण करना, आत्म-भर्त्सना करना, अपने को अपराधी/दोषी मानना इस औषधि की प्रकृति है जिन लोगों में ये प्रवृत्तियाँ पायी जायें उन्हें पाइन से अवश्य लाभ होगा-

25- रेड चेस्टनट (Red Chestnut)- 

सदा दूसरों के लिए चिन्तित एवं भयभीत रहना इसके लक्षण है इसके सम्बन्ध में डाँ. बाक लिखते हैं कि रेड चेस्टनट का भय दूसरों के लिए विशेषकर अपने प्रियजन के लिए होता है जब कोई अपना प्रियजन कहीं बाहर जाता है या उसकी खबर नहीं मिलती तो व्यक्ति भयभीत रहता है कि कहीं उसे कुछ हो न जाए तो ऐसी स्थिति में रेड चेस्टनट का प्रयोग किया जाता है-

26- राक रोज (Rock Rose)- 

आतंक, संत्रास, चरम सीमा पर भय होना-राक रोज का सेवन तब करना चाहिए जब कोई एक दम आतंकित हो जाए भले ही उसका स्वास्थ्य अच्छा हो या जब किसी दुर्घटनाग्रस्त होने से आतंक हो तो यह दवा प्रयोग की जाती है दुर्घटना में बाल-बाल बचने के बाद भी उसका आतंक व्यक्ति पर छाया हो रोगी के साथ दुर्घटना के कारण यदि आस-पास के लोगों में भी आतंक या भय छाया हो तो उन्हें भी यह दवा देनी चाहिए इससे वे इस आतंक से पूर्णतया मुक्त हो जाएंगे-

27- राक वाटर (Rock Water)- 

फ्लावर औषधियों की सूची में यही एक ऐसी औषधि है जो किसी फूल से नहीं बल्कि रॉक से निकलने वाले पानी से बनी है तथा यह 'बीच' के ठीक विपरीत है-बीच का रोगी दूसरों को अनुशासित करना चाहता है जब कि 'राक रोज' का रोगी हमेशा अपने को अनुशासित करता है-अपने उसूलों और आदर्शों के लिए समर्पित रहता है ऐसे व्यक्तियों की बीमारी में यह औषधि उपयोगी है-

28- स्क्लेरान्थस (Scleranthus)- 

अनिश्चितता, अनिर्णय, हिचक, द्विविधा, असंतुलन होना-दो चीजों में चुनाव करना कठिन हो जाता है अत: निर्णय लेने में काफी समय लग जाता है जिससे कई मौके उनके हाथ से निकल जाते हैं परिवर्तनशील मानसिक अवस्था के कारण ध्यान केन्द्रित करना कठिन होता है और कभी खुशी तो कभी उदासी, कभी उत्साहित तो कभी हतोत्साहित, कभी निराशा और कभी आशा, कभी हँसना, कभी रोना-द्वैत भाव के आदर्श जकड़न की औषधि है स्क्लेरान्थस-यह औषधि जेंशियन और मिम्युलस के साथ दी जाए तो अधिक उपयोगी सिद्ध होती है-

29- स्टार आफ बेथलहम (Star of Bethlehem)- 

मानसिक  या  शारीरिक  सदमे  का दुष्परिणाम होना-डाँ. बॉक इसे 'दुख और दर्द का बेथलहम शामक और आरामदायक' कहते हैं सदमा चाहे दुर्घटना के कारण हो या अचानक दुखद समाचार से या भय अथवा महानिराशा से स्टार आफ बेथलहम सदमे से मुक्त कर देगा-

30- स्वीट चेस्टनेट (Sweet Chestnut)- 

चरम मानसिक वेदना और निराशा होना-इस औषधि के विषय में डाँ. बाक लिखते हैं - 'यह उनके लिए हैं जो भयंकर, घोर मानसिक निराशा में डूबे हों, उन्हें लगता है कि आत्मा स्वयं ही निराशा को झेल रही है घोर निराशा, जब लगे कि वे सहन शक्ति की चरमसीमा पर पहुँच गये हैं ' लेकिन ये इच्छा शक्ति के धनी और बहादुर होते हैं ये चेरी प्लम के रोगियों की तरह आत्म हत्या नहीं करते है इनकी निराशा गॉर्स से भी गहरी होती है इनकी मानसिक अवस्था एग्रीमोनी से काफी अधिक गंभीर होती है-

31- वरवेन (Vervain)- 

घोर परिश्रम, तनाव, बहुत अधिक उमंग- बरबेन औषधि उनके लिए है जो घोर परिश्रम करते हैं तथा हमेशा काम के तनाव में रहते हैं तथा काम करने के लिए सदा उत्साहित रहते हैं जो अपनी इच्छाशक्ति से अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक काम करते हैं उनके रोगों में यह दवा रामबाण है-

32- वाइन (Vine)- 

वाइन के लोग काफी महत्वाकांक्षी होते हैं उन्हें शक्ति चाहिए, प्राधिकार चाहिए और इसे पाने के लिए बेरहमी/निष्ठुरता की किसी भी समा तक जा सकते हैं उन्हें अपने आप पर विश्वास रहता है, उन्हें लगता है कि हर चीज वे दूसरों से अच्छा जानते हैं दूसरों को वे नीची नजर से देखते हैं और हमेशा पावर के लिए चाह, दूसरों पर अपनी इच्छा थोपना, दूसरों से हमेशा आज्ञाकारिता की अपेक्षा और माँग- संक्षेप में वे तानाशाह होते हैं ऐसे लोगों को बीमारी में वाइन की आवश्यकता पड़ती है-

33- वालनट (Walnut)- 

बालनट को इसके खोजी डाँ. एडवर्ड बाक के शब्दों में यहाँ रखती हूँ "बालनट जीवन में आगे बढ़ते चरण की औषधि है, जैसे बच्चों के दाँत निकलने के समय की परेशानियाँ, यौवन के आरम्भ के समय की कठिनाइयाँ, जीवन में परिवर्तन के समय मानसिक कठिनाइयाँ आदि"जीवन में लिए जाने वाले महत्वपूर्ण निर्णयों के समय, जैसे - धर्म परिवर्तन, पेशा परिवर्तन या एक देश छोड़कर दूसरे देश में रहने का निर्णय-यह औषधि उनके लिए है जिन्होंने अपने जीवन में महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है यह पुरानी परम्पराओं से मानसिक संबंधो को तोड़ती है पुरानी सीमाओं और प्रतिबन्धों को छोड़ने में और नये तरीके से जीने में सहायता करती है इसलिए यह किसी पुरानी बीमारी या वंशानुक्रम की बीमारी के इलाज में इस औषधि की सहायता लेना आवश्यक होता है इसके अतिरिक्त जो नशीले पदार्थों के आदी हो चुके हैं उन्हें भी उनसे मुक्ति दिलाने में यह दवा सहायक होती है-

34- वाटर वायलेट(Water Violet)- 

अंहकार और एकाकीपन होना-वाटर वायलेट के रोगी सज्जन और बहुत ही सक्षम होते हैं उनमें आंतरिक शान्ति होती है इसलिए वे बड़े खुश होते हैं यदि उन पर सब कुछ छोड़ दिया जाये-वे स्वावलम्बी होते हैं और अपने रास्ते पर चलते हैं दूसरों के मामलों में न तो वे दखल देते हैं और न ही दूसरों का अपने मामले में दखल चाहते हैं वे अपने दुख और परीक्षा की घड़ियाँ खुद ही चुपचाप झेलते हैं जब बीमार होते हैं तो अकेले रहना पसंद करते हैं और नहीं चाहते कि उन्हें कोई परेशान करे वे बड़े ही प्रतिभाशाली और चतुर होते हैं तथा कठिन घड़ी में भी उनकी शांति भंग नहीं होती है इससे उनमें अहंकार उत्पन्न होता है और वे स्वयं को दूसरों से बहुत बड़ा समझने लगते हैं दूसरों का तिरस्कार करने लगते हैं उन्हें झुकाने लगते हैं ऐसी अवस्था में उन्हें मानसिक और शारीरिक तनाव की बीमारियाँ होती हैं अतएव ऐसे लोगों के लिए वाटर वायलट है-

35- व्हाइट चेस्टनट(White Chestnut)-

अनावश्यक दुराग्रहपूर्ण विचार, मानसिक तक-वितर्क और वार्तालाप-वे अपने आप से तक-वितर्क करते रहते हैं-डाँ. बाक कहते हैं -ग्रामोफोन के रिकार्ड की तरह विचारों की सूई सदा घूमती रहती है ऐसे लोगों की औषधि हैं - "व्हाइट चेस्टनेट"

36- वाइल्ड ओट(Wild Oat)- 

अनिश्चितता, निराशा, असन्तोष होना-यह उन लोगों की दवा है जो बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं लेकिन यह निर्णय नहीं कर पाते कि वे उसका उपयोग कैसे करें या कौन सा पेशा अपनाएँ-इस तरह जीवन में निर्णय लेने में काफी विलम्ब हो जाता है जिससे उनमें निराशा और असन्तोष घर कर जाता है यही उनकी बीमारियों का कारण बनता है ऐसी स्थिति में यह औषधि काफी गुणकारी है-

37- वाइल्ड रोज(Wild Rose)-

जो लोग अपनी बीमारियों, अनुकूल काम अथवा नीरस जीवन से तंग आकर उन्हें त्याग देते हैं यद्यपि वे कोई शिकायत नहीं करते है किन्तु वे स्वस्थ होने के लिए अथवा दूसरा काम खोजने का प्रयत्न नहीं करते अथवा छोटी-छोटी खुशियों का आनन्द नहीं लेते और उदास रहते हैं ऐसे लोगों की बीमारियों का इलाज वाइल्ड रोज है-

38- विल्लो(Willo)-

कुढ़न, कड़वाहट होना-जो हर चीज के लिए हमेशा दूसरों पर दोषारोपण करते हैं तथा अपने अन्दर कुढ़न और कड़वाहट भरे रहते हैं उनके लिए यह औषधि अमृत हैं-

उपरोक्त सभी 
औषधि का वर्णन करने के साथ आपको ये भी बताना चाहती हूँ कि रोगी के अंदर एक से अधिक लक्षण होने पर अन्य दवाओं का कम्बीनेशन बना कर रोगी का इलाज करने से अप्रत्यासित परिणाम देखने को मिलते है और रोगी जल्द ही स्वास्थ लाभ ले सकता है-

प्रस्तुती- 

Dr. Chetna Kanchan Bhagat

Whatsup No- 8779397519

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दवाई और चिकित्सा का भ्रामक जाल क्या है

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आजकल हर व्यक्ति अपने जीवन में जल्दी में है और सबसे बड़ी बात ये है कि स्वास्थ्य के प्रति भी उतनी ही जल्दी में है बस भागदौड़ भरी जिंदगी और भीड़ का हिस्सा बनने में लोग बीमार बनते जा रहे है और सबसे बड़ा दुर्भाग्य कहें तो उन्हें स्वास्थ के बारे में सही ढंग की जानकारी देने वाला कोई भी नही है-

दवाई और चिकित्सा का भ्रामक जाल क्या है

दवाई और चिकित्सा(Medicine and Treatment)का भ्रामक जाल-


1- सबसे मजे की बात तो यह है कि रोगी की तरह अब तो चिकित्सक भी जल्दी में रहते है जल्दी में रोगी की समस्या सुनकर बिना कोई सवाल-जवाब किये पैथोलोजिकल टेस्ट और फिर बाद में दवाई लिख के दे देते है न ही रोगी को इसके साइड इफेक्ट्स बताते है और ना ही यह बताते है कि यह चिकित्सा सिर्फ कंट्रोल मेथड है ना कि कम्प्लीट क्योर है-

2- एक विशेष समस्या है कि जब रोगी समय ,पैसे और स्वास्थ्य गवांकर हमारे पास आते है और जब हम उनको उचित और योग्य सलाह देते है तब उनको सलाह भी हजम नही होती है उनको लगता है कि जब मै इतनी आधुनिक दवा से ठीक ना हुआ तो यह पान-फल-फूलो से क्या ठीक होऊंगा-

3- अब बात आती है धैर्य की तो कोई भी नैसर्गिक चिकित्सा पद्धति को कम से कम 90 दिन लगते है शरीर को डिटॉक्सीफाय करके पूरी तरह से रिपेयर करने की आवश्यकता है किन्तु उनके पास इतना भी समय नही होता कि वो अपनी स्वास्थ समस्याए बिना किसी साइड इफेक्ट्स के कम्प्लीट खत्म करे-उनको तो बस लक्षणों को तुरन्त दबाने वाली गोली चाहिए बाकी भले ही रोग अंदर ओर फ़ैल कर अपनी जड़ें मजबूत करता रहे-

4- आप आखिर क्यों नहीं समझते है कि रोगों के लक्षणों को दबाकर उसको शरीर मे स्थाई बनने का मौका हम देते जा रहे है और इसी मूर्खता या क्रूरता के चलते आजकल किडनी, केंसर, लिवर , ह्रदय ओर स्त्रियों के रोगों के रोगियों की लंबी कतारें आज हम अस्पताल में देख सकते है-

5- आप एसिडिटी की दवाई लेने जाओ और डॉक्टर रोज की गोली की लत लगा देते है पर यह नही बताते की इससे आंतों की बुरी अवस्था होती है इससे आपको अल्सर भी हो सकता है आप PCOD की दवाई लो PCOD तो वेसे ही रहता है और 6 महिनी में थायरॉड सम्बंधित बीमारी आपको अलग से शुरू हो जाती है-

6- शुगर के लिए ली जाने वाली गोली आपकी लिवर ओर किडनी पर अन्याय ही करती है पर हमें रोग होना या ना होना सिर्फ रिपोर्ट पर ही आधारित है ऐसा आप लोगों को बताया जाता है अरे भाई शुगर कंट्रोल हो गई पर पेशंट को थकावट लगती है उसका क्या ? उसकी किडनी लिवर धीरे-धीरे अपनी कार्यक्षमता गवा रहे है उसका जवाब कोई भी चिकित्सक आपको नही दे पाएगा-क्योंकि वो भी तो आप ही कि तरह जल्दी में है ना...!

7- याद रहे इस जगत में धैर्य ओर सकारत्मकता का कोई सबटिट्यूट नही है ईश्वर ने हमे हमें एक अनमोल शरीर दिया है जहाँ तक मेरे अनुभव में लोग बीमारी से कम पर इलाज के साइड इफेक्ट्स से ज्यादा परेशान होते हुए देखा है जबकि स्वास्थ परिचर्या कोई व्यापार नही है कि आपने कंसल्टेशन फीस दे दी दवा की कीमत चुका दी और बदले में स्वास्थ खरीद लिया-

8- जब बड़े बड़े अस्पताल के प्रवेश द्वार पर लिखा होता है कि We only treat the disease...He cures...तब पेशंट को कुछ असामान्य नही लगता पर जब एक निसर्ग उपचारक यह बात कहता है कि हम कोशिश कर रहे है बाकी स्वास्थ देना परमात्मा के वश में है तब लोग उन पर और् उनकी काबिलियत पर तुरन्त शक करते है और अनेकों सवाल मै ठीक होऊंगा की नही ऐसा संशय मन मे पालते है-

9- इसका कोई साइड इफेक्ट्स तो नही यह सवाल बार-बार निसरगोपचारक को पूछा जाता है जबकि यह सवाल यदि किसी एलोपैथिक चिकित्सक से पूछा होता तो शायद आपको साइड इफेक्ट्स की लंबी लिस्ट मिल जाती और आप उन साइड इफेक्ट्स के कुचक्र से अवश्य ही बच जाते-

10- क्या आप जानते है कि एलोपैथी में आपका जुखाम तक ठीक करने की सामर्थ तक नहीं है दवा लेने के बाद डॉक्टर आपको ये कहता है तीन दिन लगेगें जबकि रोगी बिना दवा लिए ही अपनी सेल्फ हीलिंग सिस्टम या खान-पान को ही थोडा कंट्रोल कर ले तो जुखाम वैसे भी तीन दिन में ठीक हो ही जाता है लेकिन लोगों को बस तुरंत आराम के चक्कर में एलोपैथी का भूत जो सवार है उसके लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता है पहले हमारी दादी-नानी घर के नुस्खे से ही ये छोटे मोटे रोग को चुटकियों में भगा देती थी तब उनके पास कोई डिग्री आदि भी नहीं होती थी-

11- आज जितना हम अग्रेजी दवाओं के सम्पर्क में आते गए है परिणाम स्वरूप एक रोग के ठीक करने के चक्कर में अन्य दूसरे रोगों को बिन बुलाये मेहमान की तरह अपने अंदर समाते जा रहे है ये अज्ञानता और समयाभाव का ही परिणाम है-

12- एक विशेष बात का उल्लेख भी करना आवश्यक है कि एलोपैथी चिकित्सक के पास जाने पर रोगी सिर्फ अपना रोग ही बता सकता है सवाल जवाब नहीं करता है बस चिकित्सक ने पैड पर दवा लिखी और मेडिकल में जाके पेमेंट करके दवा ले आये वहां रोगी ये सवाल नहीं करता है-

13- याद रहे शरीर मे रोग होना 99% हमारे गलत जीवन शैली का नतीजा है तो उसे ठीक करने में हमारे आचार, विचार, आहार सब मे बदलाव की जरूरत अवश्य होती है सच मानिये तो रोगों की चिकित्सा करना भी एक साधना ही है जिसमे चिकित्सक और रोगी दोनों की तन और मन की भूमिका बेहद महत्व पूर्ण है-

प्रस्तुती- 

Dr.Chetna Kanchan Bhagat

Whatsup- 8779397519

Upcharऔर प्रयोग-

21 जून 2017

जीवन की समस्या का अमोध उपाय

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जीवन में समस्यायें सभी को है किसी को कम समस्या है किसी को जादा समस्या(Problem)है कोई भी व्यक्ति पूर्ण रूप से सुखी नहीं है और जब आपके पास कोई भी उपाय शेष नहीं रह गया है और चारो तरफ अन्धकार है आपकी कोई भी सहायता नहीं कर पा रहा है तो यदि आपको हम पर पूर्ण विश्वास है तो आप विश्वास के साथ बताये गए प्रयोग को कर लें और समस्याओं(Problems)से मुक्ति पायें-

जीवन की समस्या का अमोध उपाय

ये प्रयोग करने से पहले इस बात को समझ लेना अति आवश्यक है कि आपको एक मजबूत संकल्प ही बनाना होगा बस ये सोच कर बिलकुल न करें कि आपको इसे सिर्फ आजमाना है वैसे तो इसका विधान और साधना प्रक्रिया बहुत कठिन है लेकिन आज हम आपको एक साधारण और नित्य की जाने वाली साधना से आपको अवगत करा रहे है तथा इसके जीवन में क्या-क्या लाभ होंगे इससे भी आपको अवगत करायेगें ये बहुत ही विशिष्ठ साधना है अत:थोड़ी सावधानी की आवश्यकता भी अवश्य होगी जिसका आप ध्यान रक्खें-

आज के युग में समय न होने के कारण विस्तृत साधना करना हर व्यक्ति के लिए सम्भब नहीं है लेकिन यदि आप गृहस्थ जीवन जी रहे है और समस्याएं आप का पीछा कर रही है जो खत्म होने का नाम नहीं ले रही है तो फिर आप इसका प्रयोग अवश्य करें- 

इस प्रयोग से यदि आपके व्यापार पर किसी की बुरी नजर लग गई है या आपका व्यापार नहीं चल रहा अथवा आपकी पत्नी रूठ गई है या फिर पति किसी और स्त्री के जाल में फंस गया है या किसी दुश्मन ने आपको अनायास ही परेशान करना शुरू कर दिया है अथवा आपको आपके घर में आपसी विवाद या कलह होता नजर आ रहा है या आप नौकरी में किसी बॉस से परेशानी में पड़ गए है वो आपको सताता है या आपके आफिस में कोई कर्मचारी बेवजह आपकी चुगली करके आपकी नौकरी पर डांका डालना चाहता है या आपके घर में किसी अद्रश्य शक्तियों का प्रवेश हो गया है या फिर किसी और प्रकार की समस्या है तो इसे अवश्य आजमायें-

यदि इस बगुलामुखी(Bagalamukhi)मंत्र को कोई भी पत्नी या पति अर्थात जो भी पीड़ित है दुःखी है विधानपूर्वक स्नान करके, शुद्ध पीले वस्त्र धारण कर, रात्रि 9 बजे के पश्चात्, दक्षिण दिशा में बैठ कर 108 बार पाठ करे तो निश्चित ही पारिवारिक शत्रुता, झगड़े, वैमनस्य समाप्त हो जाते हैं यह मेरा अनुभव रहा है कि कोई पत्नी, या पति अपने जीवन साथी से दुःखी हो या उसकी आदतों से परेशान हो, घर में नित्य झगड़े होते हों उसके समाधान के लिए यह प्रयोग विश्वास के साथ नियम से कर लें-

एक बात का विशेष ध्यान रखना होगा अनायास ही आप इसका प्रयोग किसी से नाजायज प्रेम या वशीकरण आदि के लिए करेगें तो आपको निश्चित रूप से हानि की सम्भावना है बस इस साधना का उद्देश्य सात्विक और परोकार अथवा गृहस्थ जीवन के सुख के लिए करना ही उपयुक्त है पराई स्त्री,महिला या अनायास किसी को दंड देने पर आपको माँ भगवती बगुलामुखी की प्रताड़ना भी झेलनी पड़ सकती है इसलिए सावधान करना मेरा नैतिक कर्तव्य है आगे आप खुद समझदार हैं-

कैसे करे आप इस प्रयोग को-


सर्वप्रथम पीत(पीला)वस्त्र बिछा कर उस पर पीले चावल की ढेरी बनावें और सामने पीतांबरा देवी(बगुलामुखी) का चित्र रख कर या जिन लोगों के पास देवी का चित्र उपलब्ध नहीं है तो आप चावल की ढेरी को पीतांबरा देवी मान कर उसकी विधिवत पंचमोपचार(धूप दीप फूल फल नैवेध्य) से पूजा करें इसमें आप पीले पुष्प, पीले चावल आदि का उपयोग करें तथा घी, या तेल का दीपक जला कर सर्वप्रथम गुरु पूजा, फिर पीतांबरा देवी की पूजा करें-

इसके पश्चात् आप संकल्प करें कि मैं अपनी अमुक समस्या(आपकी जो भी समस्या हो)के समाधान हेतु(समस्याः पारिवारिक कष्ट, पति, या पत्नी के अत्याचार से दुःखी हों आदि)बगुलामुखी(Bagalamukhi)मंत्र का 108 बार जप कर रहा हूँ या कर रही हूँ और माता मुझे शीघ्रातिशीघ्र इस समस्या से मुक्ति दिलावें-

इसके पश्चात गंगाजल से छिड़काव कर(स्वयं पर)यह मंत्र पढें-

"अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थाङ्गतोऽपिवा, य: स्मरेत, पुण्डरी काक्षं स बाह्य अभ्यांतर: शुचि:।"

उसके बाद इस मंत्र से दाहिने हाथ से आचमन करें-

ऊं केशवाय नम:
ऊं नारायणाय नम:
ऊं माधवाय नम:

अन्त में

ऊं हृषीकेशाय नम: "(कह के हाथ धो लेना चाहिये)

अब माता का ध्यान करें, याद रहे सारी पूजा में हल्दी और पीला पुष्प अनिवार्य रूप से होना चाहिए-हाथ में पीले पुष्प लेकर उपरोक्त ध्यान का शुद्ध उच्चारण करते हुए माता का ध्यान करे-

बगुलामुखी(Bagalamukhi)देवी का ध्यान मन्त्र-


मध्ये सुधाब्धि मणि मण्डप रत्न वेद्यां,
सिंहासनो परिगतां परिपीत वर्णाम,
पीताम्बरा भरण माल्य विभूषिताड्गीं
देवीं भजामि धृत मुद्गर वैरिजिह्वाम
जिह्वाग्र मादाय करेण देवीं,
वामेन शत्रून परिपीडयन्तीम,
गदाभिघातेन च दक्षिणेन,
पीताम्बराढ्यां द्विभुजां नमामि॥

अब आप यह मंत्र जाप करें मंत्र इस प्रकार है-

"ऊं ह्लीं बगलामुखि! सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय स्तम्भय जिह्वां कीलय कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ऊंस्वाहा। "

आप इस मंत्र का जाप पीली हल्दी की गांठ की माला से करें जप के समय माला को ढक कर ही जप करें तथा जब के बाद भी माला को किसी कपड़े के अंदर ढक कर ही रक्खें जप के समय तर्जनी ऊँगली को माला से दूर ही रक्खें लेकिन आपको कम से कम पांच बातें पूजा में अवश्य ध्यान रखनी है-

1. ब्रह्मचर्य
2. शुद्घ और स्वच्छ आसन
3. गणेश नमस्कार और घी का दीपक
4. ध्यान और शुद्ध मंत्र का उच्चारण
5. पीले वस्त्र पहनना और पीली हल्दी की माला से जाप करना

यदि किसी को कोई समस्या आये या कोई बात समझ में नहीं आ रही है तो आप मुझसे भी पूछ सकते है-

Whatsup No-7905277017

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