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31 जनवरी 2017

क्या त्राटक से सिद्धि स्वयं आती है

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प्रबल इच्छाशक्ति से साधना करने पर सिद्धियाँ स्वयमेव आ जाती हैं तप में मन की एकाग्रता को प्राप्त करने की अनेकानेक पद्धतियाँ योग शास्त्र में निहित हैं लेकिन इनमें से त्राटक योग(Tratak Yog)उपासना सर्वोपरि है हठयोग में इस योग को दिव्य साधना से संबोधित करते हैं-

क्या त्राटक से सिद्धि स्वयं आती है

त्राटक(Tratak)के द्वारा मन की एकाग्रता, वाणी का प्रभाव व दृष्टि मात्र से उपासक अपने संकल्प को पूर्ण कर लेता है इससे विचारों का संप्रेषण, दूसरे के मनोभावों को ज्ञात करना, सम्मोहन, आकर्षण, अदृश्य वस्तु को देखना,दूरस्थ दृश्यों को भी जाना जा सकता है-

यह त्राटक योग साधना लगातार तीन महीने तक करने के बाद उसके प्रभावों का अनुभव साधक को मिलने लगता है इस योग(साधना) में उपासक की असीम श्रद्धा, धैर्य के अतिरिक्त उसकी पवित्रता भी आवश्यक है इसे दिव्य साधना कहते हैं त्राटक(Tratak)के द्वारा मन की एकाग्रता,वाणी का प्रभाव व दृष्टि मात्र से संकल्प को पूर्ण कर लेता है-

ये एक हठयोग(Hathayoga)भी है-

जी इसे एक प्रकार का हठयोग भी कहते है-त्राटक योग  के द्वारा मन की एकाग्रता और वाणी के प्रभाव से मनुष्य अपने संकल्प को पा लेता है अगर जो व्यक्ति प्रबल इच्छा शक्ति से साधना करे तो सिद्धियाँ स्वयमेव आ जाती है तथा मनुष्य तन में मन की एकाग्रता को प्राप्त करने की त्राटक योग विध्या सर्वोपरि है-

इसे आप हठयोग(Hatha yoga)भी कह सकते है यदि कोई व्यक्ति लगन और अटूट विश्वास से यह साधना तीन माह तक नियमित करे तो साधक को उसके प्रभाव का अनुभव प्राप्त होने लगता है अनेक प्रकार के विचित्र अनुभव ज्ञात होने लगते है लेकिन इन अनुभव को आप सिवाय गुरु के किसी से शेयर न करें अन्यथा आपका प्राप्त होने वाला पावर क्षीण होने लगता है-

त्राटक योग को करने का सबसे उत्तम समय रात को है जब वातावरण बिलकुल शांत रहता है आप इसका प्रयोग करें तथा आप योग का समय भी निश्चित ही रक्खें तथा इसकी शुरुवात पांच मिनट से शुरू करके उत्तरोत्तर बढ़ाते जाए इसमें श्रद्धा धर्य और पवित्रता की भी आवश्यकता है-

त्राटक(Tratak)योग करने की विधि-


आपको त्राटक योग सिद्धि रात्रि में अथवा किसी अँधेरे वाले स्थान पर करना चाहिए तथा प्रतिदिन लगभग एक निश्चित समय पर शुरुवात पांच मिनट से शुरू करके धीरे-धीरे क्रमश: बढाते हुए बीस मिनट तक करना चाहिए जिस स्थान पर आप त्राटक योग करें वह स्थान शांत एकांत ही रहना चाहिए-

त्राटक योग साधना करते समय किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आए आपको इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए आप शारीरिक शुद्धि के साथ स्वच्छ ढीले कपड़े पहनकर किसी आसन पर बैठ जाइए तथा अपने आसन से लगभग तीन फुट की दूरी पर मोमबत्ती अथवा दीपक को आप अपनी आँखों अथवा चेहरे की ऊँचाई पर रखिए-एक समान दूरी पर दीपक या मोमबत्ती-जो जलती रहे-

जिस समय आप उपासना करे उस समय हवा नहीं लगे व वह दीपक की लों बुझे भी नहीं आप दीपक इस प्रकार रखिए अब आप एकाग्र मन से व स्थिर आँखों से उस ज्योति को एकटक बिना पलक झपकाए देखते रहें-

त्राटक कैसे करें-

जब तक आपकी आँखों में कोई अधिक कठिनाई नहीं हो तब तक आप पलक नहीं गिराएँ आप यह क्रम प्रतिदिन जारी रखें धीरे-धीरे आपको ज्योति का तेज बढ़ता हुआ दिखाई देगा तथा कुछ दिनों उपरांत आपको ज्योति के प्रकाश के अतिरिक्त कुछ नहीं दिखाई देगा तथा उस ज्योति में संकल्पित व्यक्ति व कार्य भी प्रकाशवान होने लगेगा ये भी हो सकता है कि इस आकृति के अनुरूप ही घटनाएँ जीवन में घटित होने लगेंगी तथा इस अवस्था के साथ ही आपकी आँखों में एक विशिष्ट तरह का तेज आ जाएगा जब भी आप किसी पर नजरें डालेंगे तो वह आपके मनोनुकूल कार्य करने लगेगा-

इस सिद्धि का उपयोग सकारात्मक तथा निरापद कार्यों में करने से त्राटक शक्ति की वृद्धि होने लगती है दृष्टिमात्र से अग्नि उत्पन्न करने वाले योगियों में भी त्राटक योग सिद्धि रहती है इस सिद्धि से मन में एकाग्रता, संकल्प शक्ति व कार्य सिद्धि के योग बनते हैं कमजोर नेत्र ज्योति वालों को इस साधना को शनैः-शनैः वृद्धिक्रम में करना चाहिए-

त्राटक(Tratak)ध्यान विधि-


आप अपने कमरे के दरवाजे बंद कर लें एक बड़ा दर्पण अपने सामने रख लें तथा कमरे में अंधेरा होना चाहिए और दर्पण के बगल में आप एक छोटी सी लौ दीपक, मोमबत्ती या लैंप को जला कर रक्खें फिर आप लौ को इस प्रकार रखें कि वह सीधे दर्पण में प्रतिबिंबित न हो बस केवल आपका चेहरा ही दर्पण में प्रतिबिंबित हो अब आप लगातार दर्पण में अपनी स्वयं की आंखों में देखें बस पलक न झपकाएं यह चालीस मिनट का प्रयोग है आप इसे पहले दिन बीस मिनट से शुरू करें और धीरे-धीरे फिर समय को बढायें-

दो या तीन दिन में ही आप अपनी आंखों को बिना पलक झपकाए देखने में समर्थ हो जाएंगे और यदि आंसू आएं तो आप उन्हें आने दें लेकिन दृढ़ रहें कि पलक न झपके और लगातार अपनी आंखों में देखते रहें दृष्टि का कोण न बदलें-बस आंखों में देखते रहें -अपनी ही आंखों में-

द्रश्य का दिखना-

इसके प्रयोग से दो या तीन दिन में ही आप एक बहुत ही विचित्र घटना से अवगत होंगे-आपका चेहरा नया रूप लेने लगेगा-आप घबरा भी सकते हैं-दर्पण में आपका चेहरा बदलने लगेगा-कभी-कभी बिलकुल ही भिन्न चेहरा वहां होगा, जिसे आपने कभी नहीं देखा या जाना है कि वह आपका है-असल में ये सभी चेहरे आपके हैं-अचेतन मन का विस्फोट होना प्रारंभ हो रहा है-ये चेहरे-ये मुखौटे सभी आपके हैं हो सकता है कभी-कभी कोई ऐसा चेहरा भी आ सकता है जो कि आपके पिछले जन्म से संबंधित हो-

एक सप्ताह लगातार चालीस मिनट तक देखते रहने के बाद एक फिल्म की भांति हो जाएगा-बहुत से चेहरे जल्दी-जल्दी आते रहेंगे और तीन सप्ताह के बाद-अब आपको स्मरण भी नहीं रहेगा कि आपका चेहरा कौन सा है-क्योंकि आपने इतने चेहरों को आते-जाते देखा है-अब तीन सप्ताह के बाद-सबसे विचित्र घटना घटेगी आप देखेगें कि अचानक दर्पण में कोई भी चेहरा नहीं है बस दर्पण खाली है और आप सिर्फ शून्य में झांक रहे हैं-

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Upcharऔर प्रयोग-

30 जनवरी 2017

बिंदु त्राटक से आप अपनी एकाग्रता कैसे बढाये

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एकाग्रता(Concentration)बढ़ाने की यह प्राचीन पद्धति है महार्षि पतंजलि ने 5000 वर्ष पूर्व इस पद्धति का विकास किया था कुछ लोग इसे ‘त्राटक’ कहते हैं योगी और संत इसका अभ्यास परा-मनोवैज्ञानिक शक्ति के विकास के लिये भी करते हैं परन्तु मैने दो वर्ष तक इसका अभ्यास किया और पाया कि एकाग्रता बढ़ाने में यह काफी उपयोगी है-

एकाग्रता(Concentration)से आत्मविश्वास पैदा होता है योग्यता बढ़ती है और आपके मस्तिष्क की शक्ति का विकास कई प्रकार से होता है यह विधि आपकी स्मरण शक्ति(Memory)को तीक्ष्ण बनाती है  ये हमारे प्राचीन ऋषियों द्वारा प्रयोग की गई यह बहुत ही उपयोगी एवं महत्त्वपूर्ण पद्धति है अब तो आधुनिक वैज्ञानिक शोधों ने भी यह सिद्ध कर दिया है-

बिंदु त्राटक से आप अपनी एकाग्रता कैसे बढाये

कैसे करे अभ्यास-


सबसे पहले आप उपर दिए चित्र को आप सादे कागज़ से काले घेरे में एक छोटा सा पीला बिंदु बना के दीवाल पे नजरो के बराबर की दुरी पे स्थापित कर दे आसन लगा के बेठे तो नीचे कुछ ऊनी या कुश के आसन का प्रयोग करे ताकि आपकी अर्जित शक्तियां भूमि में प्रवेश न हो-

इसका सबसे उत्तम और अच्छा समय यह है कि इसका अभ्यास सूर्योदय के समय किया जाए किन्तु यदि अन्य समय में भी इसका अभ्यास करें तो कोई हानि नहीं है रात को भी शांति से किसी भी समय कर सकते है बस ध्यान रक्खे इसका शान्त स्थान में बैठकर अभ्यास करें जिससे कोई अन्य व्यक्ति आपको बाधा न पहुँचाए-

पहला चरण-

आप स्थिर चित्त होकर स्क्रीन पर बने पीले बिंदु आरामपूर्वक देखें-

दूसरा  चरण-

जब भी आप बिन्दु को देखें तो हमेशा सोचिये- “मेरे विचार पीत बिन्दु के पीछे जा रहे हैं” इस अभ्यास के मध्य आपकी आँखों में पानी आ सकता है लेकिन आप चिन्ता न करें बस आप आँखों को बन्द करें और आज का अभ्यास स्थगित कर दें यदि पुनः अभ्यास करना चाहें तो आप आँखों को धीरे-से खोलें फिर आप इसे कुछ मिनट के लिये और दोहरा सकते हैं-

अन्त में आप आँखों पर ठंडे पानी के छीटे मारकर इन्हें धो लें बस आप एक बात का ध्यान रखें कि आपका पेट खाली भी न हो और न अधिक भरा भी हो-

यदि आप चश्में का उपयोग करते हैं तो अभ्यास के समय चश्मा न लगाएँ-यदि आप पीत बिन्दु को नहीं देख पाते हैं तो अपनी आँखें बन्द करें एवं भौंहों के मध्य में चित्त एकाग्र करें-इसे अन्त:त्राटक कहते है-कम-से-कम तीन सप्ताह तक इसका अभ्यास करें-परन्तु, यदि आप इससे अधिक लाभ पाना चाहते हैं तो निरन्तर अपनी सुविधानुसार करते रहें-


Upcharऔर प्रयोग-

त्राटक ध्यान योग क्या है

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त्राटक(Trāṭaka)शब्द 'त्रि' के साथ 'टकी बंधने' की संधि से बना है अर्थात् जब साधक किसी वस्तु पर अपनी दृष्टि और मन को बांधता है तो वह क्रिया त्र्याटक कहलाती है त्र्याटक शब्द ही आगे चलकर त्राटक हो गया इसका शुद्ध शब्द त्र्याटक है जिसकी व्युत्पत्ति है-

Tratak Meditation

              'त्रिवारं आसमन्तात् टंकयति इति त्राटकम्'

त्राटक(Trāṭaka)योग क्या है-


1- हमने अपनी पिछली पोस्ट में बताया था कि किसी वस्तु को जब हम एक बार देखते हैं तो यह देखने की क्रिया एकटक कहलाती है और उसी वस्तु को जब हम कुछ देर तक देखते हैं तो द्वाटक कहलाती है-

2- जब हम किसी वस्तु को निनिर्मेष दृष्टि से निरंतर दीर्घकाल तक देखते रहते हैं तो यह क्रिया त्र्याटक या त्राटक(Trataka)कहलाती है दृष्टि की शक्ति को जाग्रत करने के लिए हठयोग में इस क्रिया का वर्णन किया गया है-

3- त्राटक(Trataka) एकटक देखने की विधि है त्राटक में आप लंबे समय तक या कुछ महीनों के लिए प्रतिदिन एक घंटा ज्योति की लौ को अपलक देखते रहें तो आपकी तीसरी आंख पूरी तरह सक्रिय हो जाती है- त्राटक से आप अधिक प्रकाशपूर्ण अधिक सजग अनुभव करते हैं तथा एक सम्मोहन शक्ति का विकास हो जाता है त्राटक (Trataka)शब्द जिस मूल से आता है उसका अर्थ है-आँसू-इसका अर्थ है ज्योति की लौ को तब तक देखते रहना है जब तक आंखों से आंसू न बहने लगें-यदि त्राटक में आप एकटक देखते रहें बिना पलक झपकाए तो इससे आपकी तीसरी आंख सक्रिय होने लगेगी-क्योंकि जब आप बिना पलक झपकाए एकटक देखते हैं, तो आप एकाग्र(Concentration)हो जाते हैं-

आपका मन(Mind)चंचल है-


1- जैसा कि आप सभी जानते है कि मनुष्य का मन चंचल है वह कभी एक जगह नहीं रहता है आप शरीर से भले एक ही जगह हो लेकिन आपका मन किसी भी छण कही भी जा सकता है-

2- ये प्रक्रिया भी दो तरह से होती है-पहली है जाग्रत अवस्था में आप का मन कहीं भी जा सकता है इस भ्रमण की घटना आपको याद है दूसरी-आप जब सोते है आप का मन तब भी कही न कही विचरण कर आता है लेकिन आपकी नींद खुलने के बाद आपको पूर्णतया याद नहीं रहता है चूँकि मन का स्वभाव है ही भटकना-

3- यदि आप बिलकुल एकटक देख रहे हैं जरा भी बिना हिले-डुले तो आपका मन अवश्य ही मुश्किल में पड़ जाएगा चूँकि मन का स्वभाव है एक विषय से दूसरे विषय पर भटकने का और निरंतर भटकते रहने का तो यदि आप अंधेरे या प्रकाश को या किसी चीज को एकटक देख रहे हैं तो आप बिलकुल एकाग्र(Concentration)हैं इस समय आपके मन का भटकाव रुक जाता है जब तक मन भटकेगा तो आपकी दृष्टि एकाग्र नहीं रह पाएगी-

4- जब तक आप मूल विषय से भटकते रहेंगे और जब मन कहीं और चला जाएगा तो आप भूल जाएंगे आप ये स्मरण नहीं रख पाएंगे कि आप क्या देख रहे थे भौतिक रूप से विषय वहीं होगा लेकिन आपके लिए वह विलीन हो चुका होगा क्योंकि आप वहां नहीं हैं और आप विचारों में भटक गए हैं-

5- आइये आपको एक उदहारण देता हूँ जब कालेज के विद्यार्थी किसी पाठ को रटते है तो कई बार उनका मन कुछ और सोचता रहता है यहाँ आप की सिर्फ नजर और जुबान चल रही थी जबकि मन कही और भटक रहा था इसका परिणाम ये होता है कि जब परीक्षा भवन में लिखने का समय आता है तो-चूँकि मन चंचल था इसलिए आपका रटा सब्जेक्ट(subject)आपसे विलुप्त हो जाता है-लेकिन एकाग्रता से याद किया गया विषय जल्दी नहीं भूलता बल्कि अमिट हो जाता है-

मन रुकना ही नहीं चाहता है-


1- वास्तविक रूप से त्राटक(Trāṭaka)का अर्थ है अपनी चेतना को बिलकुल भी भटकने नही देना है और जब आप मन को भटकने नहीं देते तो शुरू में वह संघर्ष करता है बल्कि कड़ा संघर्ष करता है लेकिन यदि आप एकटक देखने का अभ्यास करते ही रहे तो धीरे-धीरे आपका मन संघर्ष करना छोड़ देता है और फिर आपका मन कुछ क्षणों के लिए वह ठहर जाता है जब मन ठहर जाता है तो वहां अ-मन है क्योंकि मन का अस्तित्व केवल गति में ही बना रह सकता है-

2- आपकी ये विचार-प्रक्रिया केवल गति में ही बनी रह सकती है जब विचार शून्य तो गति स्थिर हो जाती है-जब कोई गति नहीं होती तो विचार-प्रक्रिया खो जाती है फिर आप सोच-विचार नहीं कर सकते है क्योंकि विचार का मतलब ही है गति-एक विचार से दूसरे विचार की ओर गति चूँकि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है यदि आप निरंतर एक ही चीज को एकटक देखते रहें और पूर्ण सजगता और होश से-क्योंकि आप मृतवत आंखों से भी एकटक देख सकते हैं-तब आप विचार करते रह सकते हैं-केवल आंखें, मृत आंखें, देखती हुई नहीं-मुर्दे जैसी आंखों से भी आप देख सकते हैं लेकिन तब आपका मन चलता रहेगा-इस तरह से देखने से कुछ भी नहीं होगा-

3- आप पूर्ण अस्तित्व से आंखों के द्वारा एकाग्र हो जी हाँ त्राटक का अर्थ है-केवल आपकी आंखें ही नहीं बल्कि आपका पूरा अस्तित्व आंखों के द्वारा एकाग्र होना है चाहे कुछ भी विषय हो यह आपकी पसंद पर निर्भर करता है यदि आपको प्रकाश अच्छा लगता है तो ठीक है लेकिन यदि आपको अंधेरा अच्छा लगता है तो भी ठीक है हमारा कहने का तात्पर्य है कि विषय कुछ भी हो लेकिन गहराई में यह बात गौण है असली बात तो है मन को एक जगह रोकने का यानी उसे "एकाग्र" करने का है जिससे कि भीतरी गतियां और भीतरी कुलबुलाहट रुक सके और भीतरी कंपन रुक सके आप ये समझ लें कि बस देख रहे हैं-निष्कंप-

4- आपने इस योग विद्या को बस कुछ समय या कुछ माह कर लिया तो सच मानिए कि आपका जीवन पूरी तरह से बदल जाएगा-वह एक ध्यान बन जाएगा-जो लोग ध्यान-साधना करते है उनके लिए किसी भी साधना की सफलता प्राप्त कर लेना आसान सा हो जाता है आप जीवन में उत्तरोत्तर उन्नति और सफलता की ओर प्रस्थान करने लगते है-

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मन की सम्मोहन तरंग शक्ति क्या है

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क्या आपने कभी अपने जीवन में अनुभव किया है कि आप खाली बैठे वक्त में किसी के बारे में गहराई से या तन्मयता(Thinkdeeply)से सोचते है और तभी अचानक आपके मोबाइल पर घंटी बज उठती है और आप जिसके बारे में ध्यान कर रहे थे उसी का फोन आ जाता है आप इसे सिर्फ एक संयोग समझ लेते है-आप कहेगे जी हाँ- लेकिन इसका भी एक विज्ञान है आइये आखिर क्या है आपके शरीर से प्रवाहित होने वाली तरंगों(Waves)का राज-

मन की सम्मोहन तरंग शक्ति क्या है

प्रत्येक मानव प्राणी के अन्दर से हर समय सम्मोहन की तरंगें(Waves of hypnosis) प्रवाहित होती रहती है और ये तरंगें नेत्र और हाथ की उंगुलियों से अदृश्य रूप में निकलकर ब्रह्माण्ड की इथर तरंगों में मिलते हुए विश्व व्यापक बनी रहती है हमारे मुंख द्वारा उच्चारित भी प्रत्येक शब्द इस ब्रह्माण्ड(Universe)में स्थापित रहता है रेडियो,टी वी ,मोबाइल ध्वनी तरंग भी इसी का उदाहरण है आवश्यकता है सही माध्यम की जिनसे इन तरंगों को यथावत सुना जा सके-

ठीक इसी प्रकार मन से निकली हुई तरंग है जैसे ही आप किसी के बारे में गहन-तन्मयता से विचार और सोच को प्रकट करते है भले ही वो कितनी ही दूर स्थित हो आपकी मन तरंग ब्रम्हांड में संचरित होती हुई उस व्यक्ति के विचार और मन को आंदोलित करती है और उसे भी लगता है कि आप शायद उसे याद कर रहे है और अचानक मोबाइल से वो आपका हाल लेने को उत्सुक हो जाता है -बस आवश्यकता है गहन सोच और लगन की-

सम्मोहन भी एक विज्ञान है इसके द्वारा सही प्रयोग करके आप काफी लाभ ले सकते है बहुत सी बीमारियों मन स्थिति मनोरोग का निदान भी किया जा सकता है वास्तविक रूप से कहा जाए तो सम्मोहन ज्ञान एक ऐसी कला भी है जिसका जानकार व्यक्ति आपके अंदर के छिपे हुए तथ्य को भी जान सकता है आपका पूर्व जन्म भी देख सकता है चूँकि इस विध्या के दुरूपयोग की संभावना को देखते हुए जानकार व्यक्ति भी इसे किसी को देने में आना-कानी करता है आज के युग में लोगों में इर्ष्या की भावना बलवती है और किसी का अहित करने में भी संकोच नहीं करते है अत:गुप्त रूप से लोगों के लिए इस विध्या का प्रचार-प्रसार नहीं किया गया है -सिर्फ श्रेष्ठ लोगों को ही जानकार व्यक्ति इस विध्या को प्रदान करता है -

आपका शरीर भी शुद्ध विज्ञान है  आप इसे तरंग विज्ञान या एयर साइंस भी कह सकते हैं आपने मित्र को सोंचते हुए इच्छा बनाया चूँकि आपकी इच्छा में प्रबलता थी यह इच्छा तरंग ब्रह्माण्ड के तरंग के जरिए मित्र की तरंगों से जा टकराई और तब मित्र न चाहते हुए भी आपको फोन कर डालता है  इससे स्पष्ट हो रहा है कि किसी भी व्यक्ति को कहीं भी और कभी भी इच्छानुसार अपने विचार को भेजा जा सकता है-

प्राचीन समय में भारतीय ऋषि मुनि ऐसे कार्य आसानी से संपन्न कर लेते थे-इसे टेलीपैथी ज्ञान भी कहते हैं- इसमें किसी प्रकार का कोई चमत्कार नहीं है-हमने देखा है कई बार लोग सम्मोहन के अधकचरे ज्ञान के चलते अपनी आँखें तक ख़राब कर लेते हैं-वास्तविक सम्मोहन ज्ञान की जानकारी और गुरु निर्देशन से उच्चता को प्राप्त किया जा सकता है-

सूर्य त्राटक करने के चक्कर में कई लोगों ने अपनी आँखे तक खराब कर ली है इसका सही अभ्यास गुरु के निर्देशन में किया जाए तभी उचित होता है बिना बिना सही ज्ञान अथवा बिना मार्गदर्शक सूर्य त्राटक करना उचित विचार नहीं है-त्राटक का अर्थ है- किसी एक बिंदु पर एक टक लगातार देखते रहना सूर्य त्राटक उगते सूर्य की लालिमा से ही  आरम्भ करना उचित है-धीरे-धीरे अभ्यास को बढ़ाते रहने से सफलता मिलती जाती है यदि अपने शरीर के साधारण तरंगों को असाधारण बना लेते हैं तो आप दुनिया के किसी भी स्त्री पुरुष को सेकेंडों में सम्मोहित कर सकते हैं. वैसे भी सम्मोहन शास्त्र कोई जादू या तंत्र मंत्र नहीं बल्कि यह शुद्ध तौर पर शरीर और मन का विज्ञान है-

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Upcharऔर प्रयोग-

मन को स्थिर करने का तरीका क्या है

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सच कहा जाये तो ये मन(Mind)बड़ा ही चंचल है वह कभी भी एक जगह स्थिर नहीं रहता है और इसकी गति का कोई आंकलन नहीं किया जा सकता है ये एक चंचल जिद्दी बच्चे की तरह है जितना रोकते हैं उतना ही उधर भागता है और ज़िद्दी बच्चे की तरह जो एक बार ज़िद पकड़ ले तो जब तक पूरी न हो जाए ये मन मानता नहीं है वह रोता है और चिल्लाता है फिर कभी गुस्सा भी करता है या फिर रुठ जाता है-

मन को स्थिर करने का तरीका क्या है

वैसे तो इस मन(Mind)को काबू करना बड़ा ही मुश्किल है लेकिन इस मन को स्थिर करने का एक तरीका है त्राटक-जी हाँ नि:संदेह मन(Mind)को सिर्फ त्राटक से ही एक जगह स्थिर किया जा सकता है अब आप पूछेगें कि त्राटक क्या है?तो आइये आपको त्राटक के बारे में थोडी जानकारी से आपको अवगत कराते है-

त्राटक(Trāṭaka)क्या है-


1- जब हम किसी भी वस्तु को जब हम एक बार देखते हैं तो यह देखने की क्रिया एकटक कहलाती है और जब उसी वस्तु को जब हम कुछ देर तक देखते हैं तो ये क्रिया द्वाटक कहलाती है किन्तु जब हम किसी वस्तु को निनिर्मेष दृष्टि से निरंतर दीर्घकाल तक देखते रहते हैं तो फिर यह क्रिया त्र्याटक या त्राटक कहलाती है-

2- यदि आप लंबे समय तक या कुछ महीनों के लिए आप प्रतिदिन एक घंटा ज्योति की लौ को अपलक देखते रहें तो आपकी तीसरी आंख पूरी तरह सक्रिय हो जाती है तब आप अधिक प्रकाशपूर्ण, अधिक सजग अनुभव करते हैं मगर इस क्रिया की की शुरुवात धीरे-धीरे करने का अभ्यास किया जाता है-

3- जी हाँ एकटक देखने की विधि दरअसल में किसी विषय से संबंधित नहीं है बस इसका संबंध देखने मात्र से ही है क्योंकि जब आप बिना पलक झपकाए एकटक देखते हैं तो आप" एकाग्र"  हो जाते है और आपका मन स्थिर हो जाता है यही कला मन को स्थिर करने की है योगी लोग भी अपनी मस्तिष्क के केंद्रबिंदु पे इसी का अभ्यास करते हुए एकाग्र साधना में लीन हो जाते है-

4- चूँकि मन का स्वभाव ही है भटकना और यदि आप बिलकुल एकटक देख रहे हैं जरा भी बिना हिले-डुले तो फिर आपका मन अवश्य ही बड़ा मुश्किल में पड़ जाएगा क्युकि मन का स्वभाव है एक विषय से दूसरे विषय पर भटकने का और निरंतर भटकते रहने का-यदि आप अंधेरे को, प्रकाश को या किसी भी चीज को एकटक देख रहे हैं तथा आप बिलकुल "एकाग्र" हैं तो आपके मन का यही भटकाव रुक जाता है लेकिन बस ये एक निरंतर अभ्यास की क्रिया है-

5- यदि आपका मन भटकेगा तो आपकी दृष्टि "एकाग्र"  नहीं रह पाएगी और आप मूल विषय को चूकते रहेंगे यानी जब आपका मन कहीं और चला जाएगा तो आप भूल जाएंगे, आप स्मरण नहीं रख पाएंगे कि आप क्या देख रहे थे आपका भौतिक रूप से विषय वहीं होगा लेकिन आपके लिए वह विलीन हो चुका होगा क्योंकि आप वहां नहीं हैं आप तो विचारों में भटक गए हैं-

6- अब तो आप समझ ही चुके होगे कि त्राटक का अर्थ है अपनी चेतना को भटकने न देना और जब आप मन को भटकने नहीं देते तो शुरू में वह बड़ा ही संघर्ष करता है मतलब आपका मन ही आपसे कड़ा संघर्ष करता है लेकिन यदि आप एकटक देखने का अभ्यास करते ही रहे तो धीरे-धीरे आपका यही मन संघर्ष करना छोड़ देता है शुरू-शुरू में कुछ क्षणों के लिए वह ठहर जाता है और जब मन ठहर जाता है तो फिर वहां अ-मन है क्योंकि मन का अस्तित्व केवल गति में ही बना रह सकता है विचार-प्रक्रिया केवल गति में ही बनी रह सकती है और जब कोई गति नहीं होती है तो विचार-प्रक्रिया खो जाती है आप सोच-विचार नहीं कर सकते है क्योंकि विचार का मतलब ही है गति-एक विचार से दूसरे विचार की ओर गति-यह एक निरंतर प्रक्रिया है-

7- क्या आप जानते है कि मन के अन्दर छुपी होती है अलौकिक दिव्य और चमत्कारिक शक्तियाँ-जी हाँ-आपको आश्चर्य होने की आवश्यकता नहीं है ये सच है कि हमारा शरीर ही अक्षय उर्जा और शक्तियों का भण्डार है असीम शक्तियों का स्वामी है लेकिन हम इसके बारे में सही रूप से नहीं जानते है और इधर-उधर भटकते रहते है जब किसी व्यक्ति को किसी पुण्य कर्म से सद्गुरु का सानिध्य प्राप्त हो जाता है तो वही गुरु आपके अंदर सुप्तावस्था में सोई हुई कुंडली को जाग्रत करके आपको अपने अंदर समाहित शक्तियों से साक्षात्कार करा देता है-

8- जब ये बाह्यमन जब सुप्तावस्था में होता है तब अंर्तमन सक्रिय होने लगता है और इसी अवस्था को ध्यान कहा जाता है-मन को बेलगाम घोड़े की संज्ञा दी गई है क्योंकि मन कभी एक जगह स्थिर  नही रहता तथा शरीर की समस्त इद्रियों को अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश करता है और मन में हर समय नई -नई इच्छओं को उत्पन्न करता है-यदि मन को किसी तरह अपने वश में कर एकाग्रचित कर लिया जाय तब मनुष्य की आत्मोन्नति  होने लगती है तथा समस्त प्रकार के विषय विकारों से उपर उठने लगता है और अंर्तमन में छुपे हुये उर्जा के भंडार को जागृत कर अलौकिक सिद्धियों का स्वामी बन सकता है-


Upcharऔर प्रयोग-

29 जनवरी 2017

क्रोध आपकी बुद्धि को खा जाता है

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सभी जानते है कि क्रोध(Anger)करना खराब है लेकिन फिर भी क्रोध से बेवजह खुद को और अपने साथी को क्या आप परेशान करते है अगर आपको कभी गुस्सा आ भी जाए तो नीचे लिखे कुछ साधारण उपायों से आप अपने गुस्से को काबू में रखने का प्रयास करे-

क्रोध आपकी बुद्धि को खा जाता है

क्रोध(Anger)कम करने का उपाय-


1- मान लीजिये कि अगर आपको किसी व्यक्ति के बात करने का तरीका ठीक नहीं लगता है लेकिन आपको उसके हाव-भाव अच्छे लगते है तो आप अपने गुस्से को शांत करने के लिए ध्यान लगाए-

2- अमूमन देखा जाता है कि जब कोई व्यक्ति गुस्सा होता है तो उसके आस-पास का माहौल भी प्रभावित होता है तो ऐसे में अगर आपको गुस्सा आ रहा हो तो एकांत मे चले जाइए और उस समस्या के बारे में एक बार सोचिए कि क्या आप जिस बात या जिस पर गुस्सा कर रहे हैं क्या वह जायज है? अगर हां तो फिर आप उसका निवारण तलासिये ये भी तो हो सकता है कि आपकी एक पहल ही आपके गुस्से को हमेशा के लिए छूमंतर कर सकती है-

3- आप अगर किसी समाधान के लिए क्रोध कर रहे है तो फिर ऐसा गुस्सा किस काम का जिसके कारण गुस्सा समाधान की जगह खुद एक समस्या बन जाए इससे तो यही बेहतर है कि आप गुस्से को शांत करने के लिए थोड़ी देर बोलना बंद कर दें तथा और अन्य लोगों को भी ऐसे में सामने वाले का खुले दिल से स्वागत करना चाहिए और उसके प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए-

4- आपने आप से खुद में ही अंतर्निहित हो जाना भी गुस्से से निजात दिला देता है और धीरे-धीरे आपको गुस्से में भी शांत रहने की आदत बन जाती है इसका फायदा भी है कि आप को डिस्प्रेशन जैसी बिमारी नहीं होती है और आपका ब्लड प्रेशर भी नहीं बढ़ता है तथा हार्ट अटेक की  संभावना भी कम हो जाती है-

5- जिन लोगों को गुस्सा ज्यादा आता हो वो अपने पास एक आईना रखें और गुस्सा आते ही स्वयं को आईने में देखें तो सच माने कि आपका क्रोध अपने आप कम होने लगेगा लेकिन ये भी ध्यान रक्खे कि खुद ही को गुस्सा आये तो आईना देखना कभी गलती से आप औरों को दिखाओगे तो हो सकता है कि आप मुसीबत में न पड़ जायें-

6- चलो आपको हम एक और एक मूल-मन्त्र बताते हैं मान लो किसी के ऊपर आपको गुस्सा या क्रोध आ रहा है तो तुरंत ही आप उस व्यक्ति के अन्दर की अच्छाई के बारे में सोचना शुरू कर दे बस सिर्फ पांच से दस मिनट में ही आपका गुस्सा गायब हो जाएगा और आप खुद को शांत महसूस करने लगेगे-

7- वैसे तो हर घर में पति-पत्नी में नोक-झोंक चलती रहती है लेकिन कुछ पति ऐसे भी होते हैं जो बात-बात पर गुस्सा हो जाते हैं और कभी-कभी यह स्थिति और भी बिगड़ जाती हैं जब पति का स्वभाव गुस्सैल होता है यदि आपके पति का स्वभाव भी गुस्सैल हैं और भी बात-बात पर गुस्सा हो जाते हैं तो फिर आप नीचे लिखा उपाय करें-

पति का क्रोध(Anger)दूर करे-


जब आपके पति गहरी नींद में सोए हों तब एक नारियल, सात गोमती चक्र और थोड़ा का गुड़ लेकर इन सभी सामग्री को आप एक पीले कपड़े में बांध लें तथा अब इस पोटली को अपने पति के ऊपर सात बार ऊबार कर बहते हुए जल में बहा दें तथा इसके अलावा प्रतिदिन सूर्य को अध्र्य दें और अपनी मनोकामना कहें आप देखेगी कि कुछ ही समय में आपके पति का गुस्सा छू-मंतर हो जाएगा-


Upcharऔर प्रयोग-

शीशम वृक्ष का उपयोग क्या है

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शहर या गाँव में सड़क के किनारे आपको आसानी से शीशम का पेड़(Rosewood Tree)देखने को मिल जाएगा लेकिन अगर आप इसके गुणों से अनजान है तो चलिए आज आपको इसके गुणों और उपयोग से भी आपको अवगत कराते हैं कि ये किस काम आती है और ये जानकर आपको हैरानी भी होगी कि आप इसके प्रयोग से कई बीमारियों से निजात पा सकते है-

शीशम वृक्ष का उपयोग क्या है

शीशम(Rosewood)का क्या है उपयोग-


1- नीम के पत्ते,शीशम के पत्ते और सदाबहार के पत्ते तीनो को आपस मिला कर लेने से डायबिटीज की बीमारी से होने वाली शिथिलता भी दूर हो जाती है-

2- यदि त्वचा का ढीलापन है तो आप शीशम(Rosewood)के पत्तों को पत्थर पे पीसे और लगाए त्वचा का ढीलापन जाता रहेगा-

3- कोई जहरीला कीड़ा काट ले और उसके काटने से यदि सूजन हो जाती है तो शीशम और नीम के पत्ते को पानी में उबाल कर उस पानी में नमक मिला कर सिकाई करे सूजन जाती रहेगी-

4- यदि शरीर में कही भी कोई गाँठ है तो इस शीशम के पत्तों को पीसकर लगाएं गाँठ धीरे-धीरे ख़त्म होगी अगर आप बिना पीसे सिर्फ पत्तों को तेल लगाकर उपर से गर्म करके पत्तों को बाँध ले तब भी गाँठ समाप्त हो जाती है-

5- गर्मी में जिन लोगों को अधिक प्यास की शिकायत होती है तो इसके पांच पत्तों को पीस ले और मिश्री मिला कर पिए ये आपको ठंडक देगी और बार-बार प्यास लगने की समस्या कम हो जायेगी तथा पसीने से आने वाली बदबू से भी आपको निजात मिल जायेगी-

6- शीशम के पत्ते और मिश्री मिला शर्बत जिसको अधिक माहवारी आती है या पीरियड में दर्द की शिकायत है और रुक-रुक कर पेशाब आता है या फिर सफ़ेद पानी आता है उसके लिए भी ये शर्बत बहुत ही फायदेमंद है-

7- जिन माताओं-बहनों को कम दूध आता है शीशम के पत्ते पीस कर स्तन पे लगाएं इससे दूध पर्याप्त मात्रा में आने लगेगा-पशुओं में भी थनैला रोग में भी इसके पत्तों को लुगदी की तरह पीस कर लगाने से थनैला रोग जाता रहता है-

8- जिन लोगों की आँखों में लाली है या दर्द रहता है या फिर जलन होती है आप इसके पत्तों को पीस कर लुगदी बनाए और इस लुगदी को टिक्की की तरह बना कर आँख की पलकों पर रात को सोते समय बाँध ले सुबह आँखों की लाली जाती रहेगी-

9- यदि किसी को कैंसर की शिकायत है तो उसकी जो भी दवाएं कैंसर की चल रही हैं उसे चलने दें और साथ में शीशम के पेड के पत्तों का जूस भी दस से पंद्रह दिनों तक लें लें फिर उसके बाद शीशम के पत्ते को चबाना हर रोज शुरू करें फिर देखते देखते ही आपको कैंसर के मरीज के अंदर शानदार बदलाव आने दिखने लगेगें  और यह बीमारी खत्म हो जाती है-

10- दाद,खाज या त्वचा सम्बंधित किसी भी बिमारी में आप इसकी लकड़ी का तेल बना कर लगाए तथा नियमित मालिस करे इससे त्वचा सम्बंधित सभी रोग ठीक हो जाते है -

तेल कैसे बनायें-


तेल बनाने के लिए आप किसी भी पुराने वृक्ष की लकड़ी लाये और उसे कूट ले फिर जितनी लकड़ी हो उससे चार गुना पानी लेकर धीमी आंच पे पकाए जब पानी एक चौथाई रह जाए तब उस बचे पानी के बराबर सरसों का तेल मिलाये और फिर धीमी आंच पे पकाए जब मात्र तेल रह जाए इसे किसी कांच की शीशी में भर कर रख ले -


Upcharऔर प्रयोग-

28 जनवरी 2017

फोनी बवासीर भी एक बीमारी है

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पिछले अट्ठारह से बीस सालो में एक नई बीमारी का इजाफा हुआ है और हम तो सोचने पे मजबूर हो गए हैं कही आप भी तो वही नहीं सोच रहे जो मै सोच रहा हूँ आखिर हमारे देश का युवा वर्ग फोनी बवासीर से ग्रसित होता जा रहा है ये नए प्रकार की बीमारी आज कल आई है-

फोनी बवासीर भी एक बीमारी है

क्या है फोनी बवासीर-


सबसे बड़ी बात ये है अभी तक किसी का ध्यान ही नहीं गया है कि इस बीमारी की दवा इजाद की जाए और आज ये स्थिति है कि अधिकाँश युवा, बुजुर्ग, महिलाए, लड़कियां इस रोग ग्रसित है और अब तो ये इस कदर फैलती जा रही है कि एक दूसरे को देख-देख कर इसमें दिनों दिन इजाफा ही हो रहा है-

कल की ही बात है हमने अपने ही दूर के रिश्तेदार के घर गया तो देखा उनका दो साल का बेटा खाना ही नहीं खा रहा था हमने पूछा क्या बात है इसकी तबियत ठीक नहीं है क्या ? तो जवाब मिला नहीं अंकल जी-इसकी मोबाइल पे गाने की वीडियो देख के खाना खाने की आदत हो गई है अब मै तो सन्नाटे में रह गया-

हालांकि पिछले विगत वर्षो में भी जीवन था और उस समय भी जिंदगियां चला करती थी-मै कभी-कभी में सोचने पे मजबूर हो जाता हूँ कि आखिर हमारे देश का युवा वर्ग कहाँ जा रहा है क्या है उसका भविष्य ...क्या आप जानते है कि हमारे देश में क्या हो रहा है ?

आज हर युवक-युवती हाथ में मोबाइल लिए नेट की दुनिया से जुड गया है ये एक अच्छी बात है मगर हम ज्ञान-विज्ञान की जगह पतन की ओर बढते दिखाई दे रहे है-

फेसबुक की दुनियां में लोगो का प्रवेश अब सिर्फ लोगो ने मस्ती का एक साधन बना लिया है हर व्यक्ति ऐसा नहीं है मगर नब्बे प्रतिशत आज-कल यही हो रहा है-आये दिन देखने को यही मिलता है कि फेसबुक पर कोई लड़का यदि लड़की की आईडी से पोस्ट डालता है और पोस्ट में लिखता है कि लाईक करो अपना मोबाईल नम्बर दुँगी तो ऐसे बाज की तरह टुट पड़ते हैं अरे भाई अपना दिमाग चलावो क्या ये संभव है की कोई अपना नम्बर दे और पूरे  दिन आप से बात करे-शायद ये संभव ही नहीं है मगर ये बेचारे लगे है शायद कही से कोई जिन्न आके इनको किसी लड़की की मनमोहक आवाज का जादू सुना दे-

अब तो मुझे आपको बताने जैसी कोई बात नहीं है आप ही सोचो आप हो क्या.? और आपकी क्या औकात है.? 

अरे आप ख्वाबो की दुनियां से बाहर आइये और हकीकत से रूबरू हो जाए आप मानसिक रोगी न बने आपका सुंदर शरीर इश्वेर ने बनाया है तथा इसको पूरा और सम्पूर्ण जीवन जीने का आधार बनाया है इसे चंद काल्पनिक सपनो के लिए आप तो बिलकुल भी जाया न करे-

हमारे देश भारत मे 70% युवा है आधे से ज्यादा को हस्तमैथुन करने से ही फुर्सत नही है-इस तरह के पेज आप लाइक करना बंद करिये जिनमें गन्दी कहानी या जिसमे फैमली सेक्स को बड़ावा दिया जाता है ज्यादातर ये सीमा पार से चलाये जाते है ताकी आप पूरे दिन अपने दिमाग मे यही भरो और यही करो जो आज कल युवा वर्ग करते भी हैं आप लोग ऐसा करने से किसी को क्या फायदा है जबकि परिणाम ये है कि बाद में नामर्दी की दवा खोजते दिखाई देते है-दिन भर में सबसे जादा मेरे इनबॉक्स में मुझसे इसकी ही जानकारी मांगी जाती है लेकिन ये कुकर्म करने से पहले कोई भी ये नहीं पूछता कि गुरु जी इसके लाभ-हानि क्या है-

              "अब पछताए होत क्या ,जब चिड़िया चुग गई खेत "

आप खुद के दिमाक में क्यों अश्लीलता भरते जा रहे हो और कामोत्तेजना के वशीभूत होकर अपने शरीर के अमूल्य रत्न(वीर्य)को बर्बाद करके दवा खोजने के प्रयास में रत है-वैसे भी जिसका पतन आप कर रहे है ये आपकी अमानत है जो शरीर में रहने पे आपको बलवान बनाती है और जिसके पास ये नहीं रहता है उसकी मदद पडोसी ही करते है-

जब किसी भी देश को बर्बाद करना हो तो वहा के युवा को नशे की लत लगा दो और सेक्स भी इसी के अन्तरगत आता है और यही लत भी हमारे देश के युवाओं को नपुंसक बना रही है और यही हमारे दुश्मन देशो में फैले आतंक के आकाओं का में मकसद है जादातर अश्लील पेज दुश्मन देशों द्वारा ही चलाये जा रहे है-

कुछ दलाल भी है युवा लड़के-वो लड़के एक लड़की बन के ग्राहक तलासते है अपनी फोटो लड़की की लगाते है और ये 15 से 25 साल के बच्चे है-जिनको ये पता नही कि वो ये क्या कर रहे है-कमेन्ट करके नए युवा को सेक्स के प्रति उन्मुक्त करते है लेकिन आप उनकी ओर ध्यान न दे खुद को संभाले ये आपके मित्र नहीं यमदूत है जो आपको सेक्स के प्रति आकर्षित करके आपका ही जीवन बर्बाद कर रहे है आप येसे लोगो से सावधान हो जाए-

आज के युवाओं ने  दिमाग मे ठूंस- ठूंस के सेक्स भर लिया है लोगो ने इस तरह की आइडी आपको उल्लू बनाती है और आप बन भी रहे है  जब भी कोई मित्र रेकुएस्ट भेजे या मित्र बनाये इन बातो का विशेष ख्याल रखे सामने वाली की प्रोफाइल में पूरा सर्च करे उसकी पसंद किस प्रकार की है वो अपने टाइम लाइन पे किस तरह की पोस्ट शेयर कर रहा है उसके मित्र सूची में केसे लोग है अगर आपको लगे की आप गलती करने जा रहे है तो ऐसे लोगो को परमानेंट ब्लाक कर दे ताकि भूल के भी वो उस आई डी से रेकुएस्ट नहीं कर सकता है न ही आपको देख सकेगा -

यदि हस्तमैथुन करने से फुर्सत मिल जाये तो एक बार सोचना कि आपकी जिँदगी यही तक सीमित है तो पूरी आप उम्र करोगे क्या ?

इन फेक आई डी से बचो जरा से आनंद से आप अनेक बीमारियों से घिर रहे हो-लोग दवा खोज रहे है आखिर क्या है ये सब समझो आप इश्वेर ने आपको सुंदर शरीर दिया है उसे यूँ ही क्यों बर्बाद कर रहे हो किसी का नहीं सिर्फ आप अपना नुकसान कर रहे है -

मेरे पास दिन भर सिर्फ 80 प्रतिशत इस बात की जानकारी मांगी जाती है-मेरा वीर्य पतला हो गया है ..? मेरा स्टेमिना खतम है क्या करूँ ..? मेरी बीबी संतुष्ट नहीं हो पा रही है उपाय बताये ...? अनेकानेक प्रश्न आते है ..!

भाई जीवन के जीने की कला को आनंद से जीना सीखो-आपका अपना शरीर आपके लिए बहुमूल्य है ...आप अपनी बेवकूफी का परिचय न दे बल्कि समझदारी से अश्लीलता से दूर हो जायेगे तो जीवन संवर जाएगा शिक्षा ले लेकिन दुरूपयोग के लिए नहीं सिर्फ और सिर्फ अपनी होने वाली पत्नी को संतुस्ट करने के लिए-

नेट से आप ज्ञान ले के अज्ञानता की ओर प्रेरित न हो कुछ प्राप्त करे सफलता के लिए न कि जीवन को चंद दिन जीने के लिए -

बॉय फ्रेंड और गर्ल फ्रेंड बनाने का नया प्रचलन आ गया है ये सिर्फ आपकी जेब हलकी करने का एक सुंदर मार्ग है क्युकि समझदार लड़कियां एक नहीं चार-चार लडको को बॉय फ्रेंड इसलिए बनाती है ताकि उनकी फैशन की आवश्यकता पूर्ण होती रहे और कुछ बेवकूफ लड़के उन पर लुटाते रहते है-तो आप समय, धन , कलुषित मानसिकता से निकले यही सन्मार्ग का ज्ञान है वर्ना आप कर तो रहे है आप भला क्यों मानेगे-हम जैसे लोगो की बात-

स्लिप्ड डिस्क से आप कैसे बचे

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स्लिप्ड डिस्क(Slipd disc)कोई बीमारी नहीं है ये शरीर की मशीनरी में तकनीकी खराबी है वास्तव में डिस्क स्लिप नहीं होती है बल्कि स्पाइनल कॉर्ड  से कुछ बाहर को आ जाती है चूँकि डिस्क का बाहरी हिस्सा एक मजबूत  झिल्ली से बना होता है और बीच में तरल जैलीनुमा पदार्थ होता है डिस्क में मौजूद जैली या कुशन जैसा हिस्सा कनेक्टिव टिश्यूज  के सर्कल से बाहर की ओर निकल आता है और आगे बढा हुआ हिस्सा स्पाइन कॉर्ड पर दबाव बनाता है-

स्लिप्ड डिस्क से आप कैसे बचे

बढती उम्र के साथ-साथ यह तरल पदार्थ सूखने लगता है या फिर अचानक झटके या दबाव से झिल्ली फट जाती है या कमजोर  हो जाती है तो जैलीनुमा पदार्थ निकल कर नसों पर दबाव बनाने लगता है जिसकी वजह से पैरों में दर्द या सुन्न होने की समस्या होती है भारत में 20 प्रतिशत से ज्यादा लोग स्लिप्ड डिस्क से जूझ रहे हैं-

गलत पोजीशन भी इसका आम कारण है लेट कर या झुक कर पढना या काम करना तथा जादा देर कंप्यूटर के आगे बैठे रहना भी इसका कारण है अनियमित दिनचर्या, अचानक झुकने, वजन  उठाने, झटका लगने, गलत तरीके से उठने-बैठने की वजह से दर्द हो सकता है-

सुस्त जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियां कम होने, व्यायाम या पैदल न चलने से भी मसल्स  कमजोर  हो जाती हैं अत्यधिक थकान से भी स्पाइन पर जोर  पडता है और एक सीमा के बाद समस्या शुरू हो जाती है-अत्यधिक शारीरिक श्रम, गिरने, फिसलने, दुर्घटना में चोट लगने, देर तक ड्राइविंग करने से भी डिस्क पर प्रभाव पड सकता है-उम्र बढने के साथ-साथ हड्डियां कमजोर  होने लगती हैं और इससे डिस्क पर जोर पडने लगता है-

स्लिप्ड डिस्क(Slipd disc)होने के खास कारण-


जॉइंट्स के डिजेनरेशन के कारण-कमर की हड्डियों या रीढ की हड्डी में जन्मजात विकृति या संक्रमण-पैरों में कोई जन्मजात खराबी  या बाद में कोई विकार पैदा होना है-

स्लिप डिस्क(Slipd disc)का किस उम्र में है खतरा-


1- आमतौर पर 30  से 50  वर्ष की आयु में कमर के निचले हिस्से में स्लिप्ड  डिस्क की समस्या हो सकती है-

2- 40 से 60 वर्ष की आयु तक गर्दन के पास सर्वाइकल वर्टिब्रा में समस्या होती है-

3- अब 20-25 वर्ष के युवाओं में भी स्लिप डिस्क के लक्षण तेजी से देखे जा रहे हैं-देर तक बैठ कर कार्य करने के अलावा स्पीड में बाइक चलाने या सीट बेल्ट बांधे बिना ड्राइविंग करने से भी यह समस्या बढ रही है चूँकि अचानक ब्रेक लगाने से शरीर को झटका लगता है और डिस्क को चोट लग सकती है-

सामान्य लक्षण-


1-  नसों पर दबाव के कारण कमर दर्द, पैरों में दर्द या पैरों, एडी या पैर की अंगुलियों का सुन्न होना-

2-  पैर के अंगूठे  या पंजे में कमजोरी-

3-  स्पाइनल  कॉर्ड  के बीच में दबाव पडने से कई बार हिप या थाईज के आसपास सुन्न महसूस करना-

4-  समस्या बढने पर यूरिन-स्टूल  पास करने में परेशानी-

5-  रीढ के निचले हिस्से में असहनीय दर्द-

6- चलने-फिरने, झुकने या सामान्य काम करने में भी दर्द का अनुभव-झुकने या खांसने पर शरीर में करंट सा अनुभव होना-

उपचार-


1- दर्द की निरंतरता, एक्स-रे या एमआरआइ, लक्षणों और शारीरिक जांच के माध्यम से डॉक्टर को पता चलता है कि कमर या पीठ दर्द का सही कारण क्या है और क्या यह स्लिप्ड डिस्क है-

2- जांच के दौरान स्पॉन्डलाइटिस, डिजेनरेशन, ट्यूमर, मेटास्टेज जैसे लक्षण भी पता लग सकते हैं और कई बार एक्स-रे से सही कारणों का पता नहीं चल पाता है-सीटी स्कैन, एमआरआइ  या माइलोग्राफी(स्पाइनल कॉर्ड कैनाल  में एक इंजेक्शन के जरिये)से सही-सही स्थिति का पता लगाया जा सकता है इससे पता लग सकता है कि यह किस तरह का दर्द है यह डॉक्टर ही बता सकता है कि मरीज  को किस जांच की आवश्यकता है-

3- जरूरी है कि जांच 100  फीसदी सही हो- आमतौर पर डॉक्टर्स एमआरआइ दो बार कराते हैं ताकि जांच रिपोर्ट सही आ सके-कई बार स्लिप्ड  डिस्क के लक्षण साफ-साफ नहीं उभरते और कुछ अन्य बीमारियों के लक्षण भी ऐसे ही हो सकते हैं इसलिए आप बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी इलाज शुरू न कराएं-

4- स्लिप्ड डिस्क के ज्यादातर  मरीजों  को आराम करने और फिजियोथेरेपी से राहत मिल जाती है इसमें दो से तीन हफ्ते तक पूरा आराम करना चाहिए तथा दर्द कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह पर दर्द-निवारक दवाएं, मांसपेशियों को आराम पहुंचाने वाली दवाएं या कभी-कभी स्टेरॉयड्स  भी दिए जाते हैं-

5- फिजियोथेरेपी  भी दर्द कम होने के बाद ही कराई जाती है तथा अधिकतर मामलों में सर्जरी के बिना भी समस्या हल हो जाती है संक्षेप में इलाज की प्रक्रिया इस तरह है-दर्द-निवारक दवाओं के माध्यम से रोगी को आराम देना तथा कम से कम दो से तीन हफ्ते का बेड रेस्ट देना और दर्द कम होने के बाद फिजियोथेरेपी  या कीरोप्रैक्टिक  ट्रीटमेंट देना तथा कुछ मामलों में स्टेरॉयड्स  के जरिये आराम पहुंचाने की कोशिश की जाती है यदि परंपरागत तरीकों से आराम न पहुंचे तो सर्जरी ही एकमात्र विकल्प है-

6- लेकिन सर्जरी होगी या नहीं-यह निर्णय पूरी तरह विशेषज्ञ का होता है ऑर्थोपेडिक्स  और न्यूरो  विभाग के विशेषज्ञ जांच के बाद सर्जरी का निर्णय लेते हैं और यह निर्णय तब लिया जाता है जब स्पाइनल  कॉर्ड  पर दबाव बढने लगे और मरीज का दर्द इतना बढ जाए कि उसे चलने, खडे होने, बैठने या अन्य सामान्य कार्य करने में असह्य परेशानी का सामना करने पडे तब ऐसी स्थिति को इमरजेंसी माना जाता है और ऐसे में पेशेंट को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत होती है क्योंकि इसके बाद जरा सी भी देरी पक्षाघात का कारण बन सकती है-

स्लिप्ड डिस्क(Slipd disc)रोगी को सलाह-


जांच और एमआरआइ रिपोर्ट सही हो तो स्लिप्ड डिस्क की सर्जरी आमतौर पर सफल रहती है हालांकि कभी-कभी अपवाद भी संभव है अगर समस्या एल 4 (स्पाइनल कॉर्ड  के निचले हिस्से में मौजूद)में हो और सर्जन एल 5 खोल दे तो डिस्क मिलेगी ही नहीं फिर लिहाजा सर्जरी विफल होगी-हालांकि ऐसा आमतौर पर नहीं होता है लेकिन कुछ गलतियां कभी-कभार हो सकती हैं-

सर्जरी के बाद रोगी को कम से कम 15-20  दिन तक बेड रेस्ट करना पडता है इसके बाद कमर की कुछ एक्सरसाइजेज कराई जाती हैं और ध्यान रहे कि इसे किसी कुशल फिजियोथेरेपिस्ट  द्वारा ही कराएं-शुरुआत में हलकी एक्सरसाइज होती हैं धीरे-धीरे इनकी संख्या बढाई जाती है मरीज को हार्ड बेड पर सोना चाहिए, मांसपेशियों को पूरा आराम मिलने तक आगे झुक कर कोई काम करने से बचना चाहिए तथा सर्जरी के बाद भी आपकी जीवनशैली सही रहे यह बहुत जरूरी है आपका वजन नियंत्रित रहे तथा आगे झुक कर काम न करें और भारी वजन न उठाएं, लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठने से बचें और कमर पर आघात या झटके से बचें-

अपनी जीवनशैली बदलें-


1.  नियमित तीन से छह किलोमीटर प्रतिदिन पैदल चलें हर व्यक्ति के लिए यह सर्वोत्तम व्यायाम है-

2.  आप देर तक स्टूल या कुर्सी पर झुक कर न बैठें और अगर डेस्क जॉब करते हैं तो ध्यान रखें कि कुर्सी आरामदेह हो और इसमें कमर को पूरा सपोर्ट मिले-

3.  शारीरिक श्रम मांसपेशियों को मजबूत बनाता है लेकिन इतना भी परिश्रम न करें कि शरीर को आघात पहुंचे-

4.  आप बहुत देर तक न तो एक ही पोजीशन में खडे रहें और न एक स्थिति में बैठे रहें-

5.  आप किसी भी सामान को उठाने या रखने में जल्दबाजी  न करें-पानी से भरी बाल्टी उठाने, आलमारियां-मेज  खिसकाने, भारी सूटकेस उठाते समय सावधानी बरतें आप ये सारे कार्य इत्मीनान से करें और हडबडी न बरतें-

6.  अगर आपको भारी सामान उठाना पडे तो उसे उठाने के बजाय धकेल कर दूसरे स्थान पर ले जाने की कोशिश करें-

7.  हाई हील्स और फ्लैट चप्पलों से बचें-हाई हील्स से कमर पर दबाव पडता है तथा साथ ही पूरी तरह फ्लैट चप्पलें भी पैरों के आर्च को नुकसान पहुंचाती हैं जिससे शरीर का संतुलन बिगड सकता है-

8.  आप सीढियां चढते-उतरते समय विशेष सावधानी रखें-

9.  जब भी बैठे कुर्सी पर सही पोजीशन में बैठें तथा कभी एक पैर पर दूसरा पैर चढा कर न बैठें-

10.  जमीन  से कोई सामान उठाना हो तो झुकें नहीं बल्कि किसी छोटे स्टूल पर बैठें या घुटनों के बल नीचे बैठें और सामान उठाएं-

11. आप अपने वजन नियंत्रित रखें क्युकि वजन  बढने और खासतौर  पर पेट के आसपास चर्बी बढने से रीढ की हड्डी पर सीधा प्रभाव पडता है-

12.  अत्यधिक मुलायम और सख्त  गद्दे पर न सोएं-स्प्रिंगदार गद्दों या ढीले निवाड  वाले पलंग पर सोने से भी बचें-

13.  पीठ के बल सोते हैं तो कमर के नीचे एक टॉवल  फोल्ड  करके रखें इससे आपकी रीढ को सपोर्ट मिलेगा-

14.  कभी भी अधिक मोटा तकिया सिर के नीचे न रखें सिर्फ साधारण और सिर को हलकी सी ऊंचाई देता तकिया ही बेहतर होता है-

15.  मॉल्स  में शॉपिंग  के दौरान या किसी इवेंट  या आयोजन में अधिक देर तक एक ही स्थिति में न खडे रहें और आप बीच-बीच में अपनी स्थिति बदलें-अगर देर तक खडे होकर काम करना पडे तो एक पैर को दूसरे पैर से छह इंच ऊपर किसी छोटे स्टूल पर रखना चाहिए-

16.  कभी भी अचानक झटके के साथ न उठें-बैठें-

17.  देर तक ड्राइविंग करनी हो तो गर्दन और पीठ के लिए कुशन रखें-ड्राइविंग सीट को कुछ आगे की ओर रखें, ताकि आपकी पीठ सीधी रहे-

18.  आप दायें-बायें या पीछे देखने के लिए गर्दन को ज्यादा घुमाने के बजाय शरीर को घुमाएं-

19.  आप कभी भी पेट के बल या उलटे होकर न सोएं-

20.  आप कमर झुका कर काम न करें-अपनी पीठ को हमेशा सीधा रखें-

बैठे रहने से बढती है समस्या-


बैठने का तरीका पीठ के निचले हिस्से में दर्द के लिए काफी हद तक जिम्मेदार होता है-जो लोग औसतन 10 घंटे लगातार ऑफिस में बैठ कर काम करते हैं इनमें से आधे लोग ऐसे भी हैं जो लंच ब्रेक में भी सीट नहीं छोड पाते है ऐसे लोगों को कमर दर्द अधिक घेरता है और दो तिहाई लोग घर में भी इतने लंबे समय तक बैठ कर काम करते हैं-


Upcharऔर प्रयोग-

27 जनवरी 2017

श्वेतार्क गणपति का महत्व क्या है

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आपने अपने आस-पास आक का पौधा देखा ही होगा ये सभी जगह देखने को मिल जाता है लेकिन सफ़ेद फूल वाला आक(श्वेतार्क)या मदार या आंकड़ा का पौधा एक ऐसी वनस्पति है जो कम देखने में आती है जबकि नीली आभा वाले फूलो वाला आक का पौधा तो सर्वत्र ही दीखता है ऐसा माना जाता है की 25 वर्ष पुराने आक के पौधे की जडो में गणपति की आकृति स्वयमेव बन जाती है और जहाँ ऐसा पौधा होता है वहा सांप भी अक्सर होता है-

श्वेतार्क गणपति का महत्व क्या है

श्वेतार्क की जडो का तंत्र जगत में बहुत महत्व है और इसी सफ़ेद फूल वाले पौधे में निर्मित होता है ये श्वेतार्क गणपति(Svetark Ganapati)-

आज आपको एक अपनी घटना से अवगत कराता हूँ ये बात है सन 1991की जब हम इलाहाबाद में रसूलाबाद में रहा करते थे उस समय मुझे जड़ी बूटी प्राप्त करने की विशेष लालसा रहा करती थी सुबह -सुबह गंगा स्नान के बाद आस पास उग रहे पौधो का अन्वेषण किया करता था तभी मुझे किसी के द्वारा ज्ञात हुआ कि फाफामऊ पुल के उस पार तीन किलोमीटर एक गाँव में बीस साल पुराने पांच सफ़ेद आक(श्वेतार्क)के पेड़ है बस फिर क्या था निकल गया उसकी खोज में और वहां जाकर हमने गाँव के उस प्रतिष्ठित परिवार से बात की कि बिना पौधे को नुकसान पंहुचाये अगर हम इसकी तीन इंच जड़ ले ले तो आपको कोई एतराज तो नहीं है-बड़ी मान मनौवल के बाद वे राजी हुए-उन्हें राजी कर और दुबारा आने का वादा ले कर मै वहां से वापस आ गया-

चूँकि शुभ मुहूर्त देखकर मुझे उसकी जड़ को लाना था इसलिए शुभ-मुहूर्त में एक दिन पहले जाकर शाम को पौधे की पूजा अर्चना की और निमंत्रण दे कर आ गया कि "हे अदभुत वनस्पति देवता कल मै आपको लेने आऊंगा" और दूसरे दिन पौधे के आस पास तीन फीट गहरा गड्डा करके एक सुंदर सी जड़ का टुकड़ा लिया और उन सज्जन को धन्यवाद दे कर वापस आ कर एक कारपेंटर से उसमे गणेश की एक प्रतिमा निर्मित करवाई तथा विधि विधान से उसे पूजा स्थल पर स्थापित किया वो प्रतिमा हमारे पास बदकिस्मती से एक साल ही रही अचानक ही गंगा जी की बाढ़ आई और नदी के पास कमरा होने के कारण मेरी बहुत सी कीमती चीजो के साथ श्वेतार्क गणपति को भी अपने साथ बहा कर ले गई आप इसे मेरी बदकिस्मती ही कह सकते हैं-

लेकिन आप यकीन माने मुझे आज तक इस बात की बहुत ग्लानि है जब तक श्वेतार्क गणपति की प्रतिमा हमारे घर में स्थापित रही उसका प्रभाव ये था कि किसी भी माह मुझे आर्थिक तंगी महसूस नहीं हुई धन का आवगमन कहाँ से होता था ये भी पता नहीं चलता था और घर में जैसे साक्षात अन्नपूर्णा का वास था मानसिक शान्ति पूर्ण रूप से थी-

जिसके भी घर में श्वेतार्क गणपति की इस प्रतिमा की स्थापना होगी सच माने उसके घर में धन-वैभव की कभी कमी नहीं होती और सुख-शान्ति का निवास होता है मुझे आज तक इस बात का अफ़सोस है कि प्रतिष्ठापित प्रतिमा जल विलय हो गई मुझे शायद उतने ही दिन श्वेतार्क गणपति की आराधना का फल मिलना था और फिर अचानक ही वहां से मेरा तबादला हो गया-

श्वेतार्क महिमा(Svetark glory)-


शास्त्रों में श्वेतार्क के बारे में कहा गया है "जहां कहीं भी यह पौधा अपने आप उग आता है उसके आस-पास पुराना धन गड़ा होता है" जिस घर में श्वेतार्क की जड़ रहेगी वहां से दरिद्रता स्वयं पलायन कर जाएगी-इस प्रकार मदार का यह पौधा मनुष्य के लिए देव कृपा,रक्षक एवं समृद्धिदाता भी है-

सफेद मदार की जड़ में गणेशजी का वास होता है कभी-कभी इसकी जड़ गणशेजी की आकृति ले लेती है इसलिए सफेद मदार की जड़ कहीं से भी प्राप्त करें और उसकी श्रीगणेश की प्रतिमा बनवा लें-उस पर लाल सिंदूर का लेप करके उसे लाल वस्त्र पर स्थापित करें-यदि जड़ गणेशाकार नहीं है तो किसी कारीगर से आकृति बनवाई जा सकती है शास्त्रों में मदार की जड़ की स्तुति इस मंत्र से करने का विघान है-

           चतुर्भुज रक्ततनुंत्रिनेत्रं पाशाकुशौ मोदरक पात्र दन्तो।
           करैर्दधयानं सरसीरूहस्थं गणाधिनाभंराशि चूडामीडे।।

गणेशोपासना में साधक लाल वस्त्र, लाल आसान, लाल पुष्प, लाल चंदन, मूंगा अथवा रूद्राक्ष की माला का प्रयोग करें-नेवैद्य में गुड़ व मूंग के लड्डू अर्पित करें- "ऊँ वक्रतुण्डाय हुम्" मंत्र का जप करें- श्रद्धा और भावना से की गई श्वेतार्क की पूजा का प्रभाव थोड़े बहुत समय बाद आप स्वयं प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने लगेंगे-

श्वेतार्क गणपति एक बहुत प्रभावी मूर्ति होती है जिसकी आराधना साधना से सर्व-मनोकामना सिद्धि-अर्थ लाभ,कर्ज मुक्ति,सुख-शान्ति प्राप्ति ,आकर्षण प्रयोग,वैवाहिक बाधाओं,उपरी बाधाओं का शमन ,वशीकरण ,शत्रु पर विजय प्राप्त होती है-यद्यपि यह तांत्रिक पूजा है यदि श्वेतार्क की स्वयमेव मूर्ति मिल जाए तो अति उत्तम है अन्यथा रवि-पुष्य योग में पूर्ण विधि-विधान से श्वेतार्क को आमंत्रित कर रविवार को घर लाकर तथा गणपति की मूर्ति बना विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कर अथवा प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति किसी साधक से प्राप्त कर साधना/उपासना की जाए तो उपर्युक्त लाभ शीघ्र प्राप्त होते है यह एक तीब्र प्रभावी प्रयोग है श्वेतार्क गणपति साधना भिन्न प्रकार से भिन्न उद्देश्यों के लिए की जा सकती है तथा इसमें मंत्र भी भिन्न प्रयोग किये जाते है-

श्वेतार्क गणपति के विभिन्न प्रयोग-


सर्वमनोकामना की पूर्ति हेतु श्वेतार्क गणपति का पूजन बुधवार के दिन प्राराम्भ करे तथा पीले रंग के आसन पर पीली धोती पहनकर पूर्व दिशा की और मुह्कर बैठे-एक हजार मंत्र प्रतिदिन के हिसाब से 21 दिन में 21 हजार मंत्र जप मंत्र सिद्ध चैतन्य मूंगे की माला से करे और पूजन में लाल चन्दन ,कनेर के पुष्प ,केशर,गुड ,अगरबत्ती ,शुद्ध घृत के दीपक का प्रयोग करे-

मन्त्र-   

                        "ऊँ वक्रतुण्डाय हुम्"

1- घर में विवाह कार्य ,सुख-शान्ति के लिए श्वेतार्क गणपति प्रयोग बुधवार को लाल वस्त्र ,लाल आसन का प्रयोग करके प्रारम्भ करे ,इक्यावन दिन में इक्यावन हजार जप मंत्र का करे ,मुह पूर्व हो ,माला मूगे की हो,साधना समाप्ति पर कुवारी कन्या को भोजन कराकर वस्त्रादि भेट करे-

2- आकर्षण प्रयोग हेतु रात्री के समय पश्चिम दिशा को,लाल वस्त्र- आसन के साथ हकीक माला से शनिवार के दिन से प्रारंभ कर पांच दिन में पांच हजार जप मंत्र का करे -पूजा में तेल का दीपक ,लाल फूल,गुड आदि का प्रयोग करे -उपरोक्त प्रयोग किसी के भी आकर्षण हेतु किया जा सकता है-

3- सर्व स्त्री आकर्षण हेतु श्वेतार्क गणपति प्रयोग,पूर्व मुख ,पीले आसन पर पीला वस्त्र पहनकर किया जाता है तथा पूजन में लाल चन्दन ,कनेर के पुष्प ,अगरबत्ती,शुद्ध घृत का दीपक का प्रयोग होता है तथा मूगे की माला से इक्यावन दिन में इक्यावन हजार जप मंत्र का किया जाता है जिसे बुधवार से प्रारंभ किया जाता है-

4- स्थायी रूप से विदेश में प्रवास करके विवाह करने अथवा अविवाहित कन्या का प्रवासी भारतीय से विवाह करके विदेश में बसने हेतु अथवा विदेश जाने में आ रही रूकावटो को दूर करने हेतु श्वेतार्क गणपति का प्रयोग शुक्ल पक्ष के बुधवार से प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में प्रारम्भ करे-पूर्व दिशा की और लाल ऊनी कम्बल ,पीली धोती के प्रयोग के साथ मंत्र सिद्ध चैतन्य मूंगे की माला से 21 दिन में सवा लाख जप मंत्र का करे तथा पूजन में लाल कनेर पुष्प ,घी का दीपक ,अगरबत्ती ,केशर ,बेसन के लड्डू ,लाल वस्त्र ,लकड़ी की चौकी ,का प्रयोग करे तथा बाइसवे दिन हवंन कर पांच कुवारी कन्याओं को भोजन कराकर वस्त्र-दक्षिणा दे विदा करे इसके उपरान्त मूगे की माला आप अपने गले में धारण करे -

5- कर्ज मुक्ति हेतु श्वेतार्क गणपति का प्रयोग बुधवार को लाल वस्त्रादि-वस्तुओ के साथ शुरू करे और 21 दिन में सवा लाख जप मंत्र का करे मूंगे अथवा रुद्राक्ष अथवा स्फटिक की मंत्र सिद्ध चैतन्य माला से करे साधना के बाद माला अपने गले में धारण करे तथा पूजन में लाल वस्तुओ का प्रयोग करे और दीपक घी का जलाए-

6- श्वेतार्क गणपति की साधना में एक बात ध्यान देने की है की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद मूर्ति चैतन्य हो जाती है और उसे हर हाल में प्रतिदिन पूजा देनी होती है साधना समाप्ति पर यदि रोज पूजा देते रहेगे तो चतुर्दिक विकास होता है यदि किसी कारण से आप पूजा न दे सके या कोई भी सदस्य घर का पूजा न कर सके तो मूर्ति का विसर्जन कर दे-

उपरोक्त प्रयोगों में मंत्र भिन्न-भिन्न प्रयोग होते है-जिन्हें न देने का कारण सिर्फ इनके दुरुपयोग से इनको बचाना है-यह प्रयोग तंत्र के अंतर्गत आते है अतः सावधानी आवश्यक है इसलिए मन्त्र यहाँ नहीं लिखे गए है क्युकि तंत्र के मन्त्र अचूक होते है और आज वैमनस्य के कारण लोग हित की जगह दूसरों का अहित कर देते है सिर्फ जो पात्रता के योग्य होते है ये मन्त्र गुरु की देखरेख में ही शिष्य को दिया जाता है-वैसे सभी मन्त्र शंकर भगवान् द्वारा कीलित अवस्था में है जिनका उत्कीलन गुरु द्वारा शिष्य से करवा कर मन्त्र को प्रभावी बनाया जाता है पुस्तक में दिए गए मन्त्र चैतन्य अवस्था में नहीं होते है इसलिए उसका कोई प्रभाव नहीं होता है जबकि मन्त्र शक्ति आज भी पूर्वकाल की तरह ही गुण सम्पन्न है-


Upcharऔर प्रयोग-

धनतेरस पर आप करे शंख की पूजा

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धनत्रयोदशी(Dhanteras)के दिन शंख पूजा की जाए तो दरिद्रता निवारण, आर्थिक उन्नति, व्यापारिक वृद्धि और भौतिक सुख की प्राप्ति के लिए तंत्र के अनुसार यह सबसे सरल और एक विशेष प्रयोग है वैसे तो शंख की किसी भी शुभ मूहूर्त में पूजा की जा सकती है लेकिन धनत्रयोदशी पर शंख का बड़ा महत्व है इस दिन दक्षिणावर्ती शंख की पूजा का एक विशेष महत्व है दक्षिणावर्ती शंख जिसके घर में रहता है और धनतेरस को इसकी पूजा अर्चना करके स्थापित किया जाता है तथा नियमित पूजा की जाती है तो उसके घर में चिर-स्थाई लक्ष्मी रहती है-

धनतेरस पर आप करे शंख की पूजा

दक्षिणावर्ती शंख(Dkshinavarti Shankh)पूजा मन्त्र-


                           " ऊं श्रीं क्लीं ब्लूं सुदक्षिणावर्त शंखाय नम: "

सर्वप्रथम उपरोक्त मंत्र का पाठ कर लाल कपड़े पर चांदी या सोने के पत्र पर शंख को रख दें तथा आधार(पत्र)पर रखने के पूर्व चावल और गुलाब के फूल रखे और यदि आधार(भोजपत्र)न हो तो चावल और गुलाब पुष्पों(लाल रंग)के ऊपर ही शंख स्थापित कर दें इसके तत्पश्चात निम्न मंत्र का 108 बार जप करें-

मन्त्र -                

                "ॐ श्रीं"

लाभ-


1- रात्री 10 से 12 बजे के बीच उपरोक्त मन्त्र का सवा माह पूजन करने से चिर-स्थाई लक्ष्मी प्राप्ति होती है-

2- यदि रात्री 12 बजे से 3 बजे के बीच इसी मन्त्र का सवा माह पूजन करने से यश कीर्ति प्राप्ति वृद्धि होती है

3- ब्रम्ह-मुहूर्त 3 से 6 बजे के बीच इसी मन्त्र का सवा माह पूजन करने से संतान प्राप्ति होती है-

4- पूजा के पश्चात शंख को लाल रंग के वस्त्र मं लपेटकर तिजोरी में रख दो तो खुशहाली आती है-

5- शंख को लाल वस्त्र से ढककर व्यापारिक संस्थान में रख दें तो दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि और लाभ होता है-


Upcharऔर प्रयोग-

दक्षिणावर्ती शंख की घर में स्थापना करे

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दक्षिणावर्ती शंख(Dkshinavarti Shankh)का हिंदु पूजा पद्धती में महत्वपूर्ण स्थान है दक्षिणावर्ती शंख देवी लक्ष्मी के स्वरुप को दर्शाता है दक्षिणावर्ती शंख ऎश्वर्य एवं समृद्धि का प्रतीक है इस शंख का पूजन एवं ध्यान व्यक्ति को धन संपदा से संपन्न बनाता है और व्यवसाय में सफलता दिलाता है इसमें जल भर कर सूर्य को जल चढाने से नेत्र संबंधि रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है तथा रात्रि में इस शंख में जल भर कर सुबह इसके जल को संपूर्ण घर में छिड़कने से सुख शंति बनी रहती है तथा कोई भी बाधा परेशान नहीं करती-

दक्षिणावर्ती शंख की घर में स्थापना करे


शंख(Shankh)बहुत प्रकार के होते हैं परंतु प्रचलन में मुख्य रूप से दो प्रकार के शंख हैं इसमें प्रथम वामवर्ती शंख और दूसरा दक्षिणावर्ती शंख महत्वपूर्ण होते हैं वामवर्ती शंख(Vamavarti shankh)बांयी ओर को खुला होता है तथा दक्षिणावर्ती शंख(Dkshinavarti Shankh)दायीं ओर खुला होता है तंत्र शास्त्र में वामवर्ती शंख की अपेक्षा दक्षिणावर्ती शंख को विशेष महत्त्व दिया जाता है दक्षिणावर्ती शंख का मुख बंद होता है इसलिए यह शंख बजाया नहीं जाता केवल पूजा कार्य में ही इसका उपयोग होता है इस शंख के कई लाभ देखे जा सकते हैं-

दक्षिणावर्ती शंख(Dkshinavarti Shankh)को शुभ फलदायी कहा गया है यह बहुत पवित्र, विष्णु-प्रिय और लक्ष्मी सहोदर माना जाता है मान्यता अनुसार यदि घर में दक्षिणावर्ती शंख रहता है तो श्री-समृद्धि सदैव बनी रहती है और इस शंख को घर पर रखने से दुस्वप्नों से मुक्ति मिलती है इस शंख को व्यापार स्थल पर रखने से व्यापार में वृद्धि होती है तथा ये पारिवारिक वातावरण शांत बनता है-

दक्षिणावर्ती शंख(Dkshinavarti Shankh)को स्थापित करने से पूर्व इसका शुद्धिकरण करना चाहिए आपको इसे बुधवार एवं बृहस्पतिवार के दिन किसी शुभ- मुहूत्त में इसे पंचामृत, दूध, गंगाजल से स्नान कराकर धूप-दीप से पूजा करके चांदी के आसन पर लाल कपडे़ के ऊपर प्रतिष्ठित करना चाहिए तथा इस शंख का खुला भाग आकाश की ओर तथा मुख वाला भाग अपनी और रखना चाहिए और अक्षत एवं रोली द्वारा इस शंख को भरना चाहिए तथा शंख पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर इसे चंदन, पुष्प, धूप दीप से पंचोपचार पूजा करके ही करके स्थापित करना चाहिए-

स्थापना पश्चात दक्षिणावर्ती शंख का नियमित पूजन एवं दर्शन करना चाहिए तथा  अतिशीघ्र फल प्राप्ति के लिए स्फटिक या कमलगट्टे की माला द्वारा निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए यह दक्षिणावर्ती शंख दरिद्रता से मुक्ति, यश और कीर्ति वृद्धि, संतान प्राप्ति तथा शत्रु भय से मुक्ति प्रदान करता है-

ऊँ ह्रीं श्रीं नम: श्रीधरकरस्थाय पयोनिधिजातायं लक्ष्मीसहोदराय फलप्रदाय फलप्रदाय श्री दक्षिणावर्त्त शंखाय श्रीं ह्रीं नम:।”

उद्योग-व्यवसाय स्थल हेतु -


अनेक चमत्कारी गुणों के कारण दक्षिणावर्ती शंख का अपना विशेष महत्व है यह दुर्लभ तथा सर्वाधिक मूल्यवान होता है असली दक्षिणावर्ती शंख को प्राण प्रतिष्ठित कर के उद्योग-व्यवसाय स्थल, कार्यालय, दुकान अथवा घर में स्थापित कर उसकी पूजा करने से दुख-दारिद्र्य से मुक्ति मिलती है और घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होता है इस शंख की स्थापना करते समय निम्नलिखित श्लोक करना चाहिए-

दक्षिणावर्तेशंखाय यस्य सद्मनितिष्ठति।
मंगलानि प्रकुर्वंते तस्य लक्ष्मीः स्वयं स्थिरा।
चंदनागुरुकर्पूरैः पूजयेद यो गृहेडन्वहम्।
स सौभाग्य कृष्णसमो धनदोपमः।।

तांत्रिक प्रयोगों में भी दक्षिणावर्ती शंख का उपयोग किया जाता है तंत्र शास्त्र के अनुसार दक्षिणावर्ती शंख में विधि पूर्वक जल रखने से कई प्रकार की बाधाएं शांत हो जाती है तथा सकारात्मक उर्जा का प्रवाह बनता है और नकारात्मक उर्जा दूर हो जाती है इसमें शुद्ध जल भरकर, व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थान पर छिड़कने से  तंत्र-मंत्र इत्यादि का प्रभाव समाप्त हो जाता है भाग्य में वृद्धि होती है किसी भी प्रकार के टोने-टोटके इस दक्षिणावर्ती शंख(Dkshinavarti Shankh)के उपयोग द्वारा निष्फल हो जाते हैं दक्षिणावर्ती शंख को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है इसलिए यह जहां भी स्थापित होता है वहां धन संबंधी समस्याएं भी समाप्त होती हैं-

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शंख दे आपको सुख और रोग से मुक्ति

Upcharऔर प्रयोग-

24 जनवरी 2017

शंख के क्या-क्या फायदे होते है

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शंख(Shankh)का महत्त्व धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी है वैज्ञानिकों का मानना है कि शंख ध्वनि के प्रभाव में सूर्य की किरणें बाधक होती हैं अतः प्रातः व सायंकाल में जब सूर्य की किरणें निस्तेज होती हैं तभी शंख-ध्वनि करने का विधान है इससे आसपास का वातावरण तथा पर्यावरण शुद्ध रहता है और आयुर्वेद के अनुसार शंखोदक भस्म से पेट की बीमारियाँ, पीलिया, कास प्लीहा यकृत, पथरी आदि रोग भी शंख(Shankh)के प्रयोग से ठीक होते हैं-


शंख के क्या-क्या फायदे होते है

तंत्र शास्त्र के अनुसार सीधे हाथ की तरफ खुलने वाले शंख(Shankh)को यदि पूर्ण विधि-विधान के साथ करके इस शंख को लाल कपड़े में लपेटकर अपने घर में अलग-अलग स्थान पर रखने से विभिन्न परेशानियों का हल हो सकता है दक्षिणावर्ती शंख(Dkshinavarti Shankh)को तिज़ोरी मे रखा जाए तो घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है इसलिए घर में शंख रखा जाना शुभ माना जाता है-

लक्ष्मी के हाथ में जो शंख होता है वो दक्षिणावर्ती(Dkshinavarti)अर्थात सीधे हाथ की तरफ खुलने वाले होते हैं वामावर्ती शंख को जहां विष्णु का स्वरुप माना जाता है और दक्षिणावर्ती शंख(Dkshinavarti Shankh)को लक्ष्मी का स्वरुप माना जाता है दक्षिणावृत्त शंख घर में होने पर लक्ष्मी का घर में वास रहता है-

वर्तमान समय में वास्तु-दोष के निवारण के लिए जिन चीज़ों का प्रयोग किया जाता है उनमें से यदि शंख आदि का उपयोग किया जाए तो कई प्रकार के लाभ हो सकते हैं यह न केवल वास्तु-दोषों को दूर करता है बल्कि आरोग्य वृद्धि, आयुष्य प्राप्ति, लक्ष्मी प्राप्ति, पुत्र प्राप्ति, पितृ-दोष शांति, विवाह में विलंब जैसे अनेक दोषों का निराकरण एवं निवारण भी करता है-

शंख(Shankh)के क्या-क्या फायदे-

1- मान्यता है कि छोटे-छोटे बच्चों के शरीर पर छोटे-छोटे शंख बाँधने तथा शंख में जल भरकर अभिमंत्रित करके पिलाने से वाणी-दोष नहीं रहता है तथा बच्चा स्वस्थ रहता है और पुराणों में उल्लेख मिलता है कि मूक एवं श्वास रोगी हमेशा शंख बजायें तो बोलने की शक्ति पा सकते हैं-

2- शंख के जल से शालीग्राम को स्नान कराएं और फिर उस जल को यदि गर्भवती स्त्री को पिलाया जाए तो पैदा होने वाला शिशु पूरी तरह स्वस्थ होता है साथ ही बच्चा कभी मूक या हकला नहीं होता है यदि कोई बोलने में असमर्थ है या उसे हकलेपन का दोष है तो शंख बजाने से ये दोष दूर होते हैं शंख बजाने से कई तरह के फेफड़ों के रोग दूर होते हैं जैसे दमा, कास प्लीहा यकृत और इन्फ्लून्जा आदि रोगों में शंख ध्वनि फायदा पहुंचाती है-

3- रूक-रूक कर बोलने व हकलाने वाले यदि नित्य शंख के जल का पान करें तो उन्हें आश्चर्यजनक लाभ मिलेगा दरअसल ये मूकता व हकलापन दूर करने के लिए शंख-जल एक महौषधि है-

4- शंखों में भी विशेष शंख जिसे दक्षिणावर्ती शंख(Dkshinavarti Shankh)कहते हैं इस शंख में दूध भरकर शालीग्राम का अभिषेक करें फिर इस दूध को निरूसंतान महिला को पिलाएं इससे उसे शीघ्र ही संतान का सुख मिलता है-

5- बर्लिन यूनिवर्सिटी ने भी शंख(Shankh)ध्वनि का अनुसंधान करके यह सिद्ध किया कि इसकी ध्वनि कीटाणुओं को नष्ट करने कि उत्तम औषधि है-

6- पूजा-पाठ में शंख बजाने से शरीर और आसपास का वातावरण शुद्घ होता है और सतोगुण की वृद्घि होती है जो मनुष्य के विकास में सहायक होता है जहां तक शंख की आवाज जाती है इसे सुनकर लोगों के मन में सकारात्मक विचार पैदा होते हैं और वे पूजा-अर्चना के लिए प्रेरित होते हैं ऐसी मान्यता है कि शंख की पूजा से हमारी कामनाएं पूरी होती हैं-

7- चूंकि माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु, दोनों ही अपने हाथों में शंख को धारण करते हैं लिहाजा शंख को बेहद शुभ माना जाता है साथ ही ऐसी मान्यता है कि जिस घर(Shankh)में शंख होता है वहां लक्ष्मी का वास होता है और दिनों दिन उन्नति होती है-

8- शंख बजाने से फेफड़े का व्यायाम होता है और स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है खासतौर पर श्वास के रोगी के लिए यह बेहद असरदार माना गया है आयुर्वेद के अनुसार शंख बजाने से दमा, यकृत और इन्फ़्लुएन्ज़ा जैसी बीमारियां भी दूर होती हैं-

9- पूजा के समय शंख में जल भरकर देवस्थान में रखने और उस जल से पूजन सामग्री धोने और घर के आस-पास छिड़कने से वातावरण शुद्ध रहता है क्योकि शंख के जल में कीटाणुओं को नष्ट करने की अद्भूत शक्ति होती है साथ ही शंख में रखा पानी पीना स्वास्थ्य और हमारी हड्डियों, दांतों के लिए बहुत लाभदायक है शंख में गंधक, फास्फोरस और कैल्शियम जैसे उपयोगी पदार्थ मौजूद होते हैं इससे इसमें मौजूद जल सुवासित और रोगाणु रहित हो जाता है इसीलिए शास्त्रों में इसे महाऔषधि माना जाता है-

10- शंख में जल रखने और इसे छिड़कने से वातावरण शुद्ध होता है शंख में कैल्श‍ियम और फॉस्फोरस के गुण मौजूद होते हैं लिहाजा शंख में रखे पानी के सेवन से हड्डियां मजबूत होती हैं आप प्रयोग के लिए कुछ दिन के लिए शंख(Shankh)को घर में लाये और उपरोक्त नियम-अनुसार लाभ प्राप्त करे-

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दक्षिणावर्ती शंख की घर में स्थापना करे 

Upcharऔर प्रयोग-

शंख कितने प्रकार के होते है

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शंख(Shankh)कई प्रकार के होते हैं और सभी प्रकारों की विशेषता एवं पूजन-पद्धति भिन्न-भिन्न है उच्च श्रेणी के श्रेष्ठ शंख कैलाश मानसरोवर, मालद्वीप, लक्षद्वीप, कोरामंडल द्वीप समूह, श्रीलंका एवं भारत में पाये जाते हैं शंख की आकृति(उदर)के आधार पर ही इसके प्रकार माने जाते हैं-


शंख कितने प्रकार के होते है

शंख तीन प्रकार के होते हैं-


दक्षिणावृत्ति शंख
मध्यावृत्ति शंख
वामावृत्ति शंख

जो शंख(Shankh)दाहिने हाथ से पकड़ा जाता है वह दक्षिणावर्ती शंख कहलाता है और जिस शंख का मुँह बीच में खुलता है वह मध्यावर्ती शंख होता है तथा जो शंख बायें हाथ से पकड़ा जाता है वह वामावर्ती शंख कहलाता है-

शंख का उदर दक्षिण दिशा की ओर हो तो दक्षिणावर्ती और जिसका उदर बायीं ओर खुलता हो तो वह वामावर्ती शंख है मध्यावर्ती एवं दक्षिणावर्ती शंख(Shankh)सहज रूप से उपलब्ध नहीं होते हैं-इनकी दुर्लभता एवं चमत्कारिक गुणों के कारण ये अधिक मूल्यवान होते हैं- 

इनके अलावा लक्ष्मी शंख,गोमुखी शंख,कामधेनु शंख,विष्णु शंख,देव शंख,चक्र शंख,पौंड्र शंख,सुघोष शंख,गरुड़ शंख,मणिपुष्पक शंख,राक्षस शंख,शनि शंख,राहु शंख,केतु शंख,शेषनाग शंख,कच्छप शंख(Shankh)आदि प्रकार के भी होते हैं वैसे हिन्दुओं के 33 करोड़ देवता हैं और सबके अपने-अपने शंख हैं देवासुर संग्राम में अनेक तरह के शंख निकले है इनमे कई सिर्फ़ पूजन के लिए होते है-

समुद्र मंथन के समय देव-दानव संघर्ष के दौरान समुद्र से 14 अनमोल रत्नों की प्राप्ति हुई थी जिनमें आठवें रत्न के रूप में शंखों(Shankh)का जन्म हुआ-

गणेश शंख(Ganesh shankh)-

शंख कितने प्रकार के होते है



सर्वप्रथम पूजित देव गणेश के आकर के गणेश शंख का प्रादुर्भाव हुआ जिसे गणेश शंख(Ganesh shankh)कहा जाता है आप इसे प्रकृति का चमत्कार कहें या गणेश जी की कृपा की इसकी आकृति और शक्ति हू-ब-हू गणेश जी जैसी है गणेश शंख प्रकृति का मनुष्य के लिए अनूठा उपहार है तथा निश्चित रूप से वो व्यक्ति परम सौभाग्यशाली होते हैं जिनके पास या घर में गणेश शंख का पूजन दर्शन होता है भगवान गणेश सर्वप्रथम पूजित देवता हैं इनके अनेक स्वरूपों में यथा-विघ्न नाशक गणेश,दरिद्रतानाशक गणेश,कर्ज़ मुक्तिदाता गणेश, लक्ष्मी विनायक गणेश,बाधा विनाशक गणेश,शत्रुहर्ता गणेश,वास्तु विनायक गणेश,मंगल कार्य गणेश आदि-आदि अनेकों नाम और स्वरुप गणेश जी के जन सामान्य में व्याप्त हैं गणेश जी की कृपा से सभी प्रकार की विघ्न- बाधा और दरिद्रता दूर होती है-

दक्षिणावर्ती शंख का उपयोग केवल और केवल लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किया जाता है वही श्री गणेश शंख का पूजन जीवन के सभी क्षेत्रों की उन्नति और विघ्न बाधा की शांति हेतु किया जाता है इसकी पूजा से सकल मनोरथ सिद्ध होते है गणेश शंख(Ganesh shankh)आसानी से नहीं मिलने के कारण दुर्लभ होता है तथा सौभाग्य उदय होने पर ही इसकी प्राप्ति होती है-

आर्थिक, व्यापारिक और पारिवारिक समस्याओं से मुक्ति पाने का श्रेष्ठ उपाय श्री गणेश शंख है अपमान जनक कर्ज़ बाधा इसकी स्थापना से दूर हो जाती है इस शंख की आकृति भगवान गणपति के सामान है तथा शंख में निहित सूंड का रंग अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य युक्त है प्रकृति के रहस्य की अनोखी झलक गणेश शंख के दर्शन से मिलती है-

विधिवत सिद्ध और प्राण प्रतिष्ठित गणेश शंख की स्थापना चमत्कारिक अनुभूति होती ही है किसी भी बुधवार को प्रातः स्नान आदि से निवृत्ति होकर विधिवत प्राण प्रतिष्ठित श्री गणेश शंख को अपने घर या व्यापार स्थल के पूजा घर में रख कर धूप- दीप पुष्प से संक्षिप्त पूजन करके रखें ये अपने आप में चैतन्य शंख है इसकी स्थापना मात्र से ही गणेश कृपा की अनुभूति होने लगती है इसके सम्मुख नित्य धूप-दीप जलना ही पर्याप्त है किसी जटिल विधि-विधान से पूजा करने की जरुरत नहीं है बस एक बार किसी योग्य विद्धवान से आप इसकी स्थापना करा ले -

महालक्ष्मी शंख(Mahalakshmi shankh)-


शंख कितने प्रकार के होते है

इसका आकार श्री यंत्र क़ी भांति होता है तथा इसे प्राक्रतिक श्री यंत्र भी माना जाता है जिस घर में इसकी पूजा विधि विधान से होती है वहाँ स्वयं लक्ष्मी जी का वाश होता है इसकी आवाज़ सुरीली होती है विद्या क़ी देवी सरस्वती भी यही शंख धारण करती है वे स्वयं वीणावादनी इसी शंख कि पूजा करती है माना जाता है कि इसकी पूजा वा इसके जल को पीने से मंद बुद्धि व्‍यक्ति भी ज्ञानी हो जाता है-

दक्षिणावर्ती शंख(Dkshinavarti shankh)-

शंख कितने प्रकार के होते है

स्वयं भगवान विष्णु अपने दाहिने हाथ में दक्षिणावर्ती शंख(Dkshinavarti shankh)धारण करते है पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय यह शंख निकला था जिसे स्वयं भगवान विष्णु जी ने धारण किया था लेकिन यह ऐसा शंख है जिसे बजाया नहीं जाता है लेकिन इसे सर्वाधिक शुभ माना जाता है-

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