31 जनवरी 2017

क्या त्राटक से सिद्धि स्वयं आती है

प्रबल इच्छाशक्ति से साधना करने पर सिद्धियाँ स्वयमेव आ जाती हैं तप में मन की एकाग्रता को प्राप्त करने की अनेकानेक पद्धतियाँ योग शास्त्र में निहित हैं लेकिन इनमें से त्राटक योग(Tratak Yog)उपासना सर्वोपरि है हठयोग में इस योग को दिव्य साधना से संबोधित करते हैं-

क्या त्राटक से सिद्धि स्वयं आती है

त्राटक(Tratak)के द्वारा मन की एकाग्रता, वाणी का प्रभाव व दृष्टि मात्र से उपासक अपने संकल्प को पूर्ण कर लेता है इससे विचारों का संप्रेषण, दूसरे के मनोभावों को ज्ञात करना, सम्मोहन, आकर्षण, अदृश्य वस्तु को देखना,दूरस्थ दृश्यों को भी जाना जा सकता है-

यह त्राटक योग साधना लगातार तीन महीने तक करने के बाद उसके प्रभावों का अनुभव साधक को मिलने लगता है इस योग(साधना) में उपासक की असीम श्रद्धा, धैर्य के अतिरिक्त उसकी पवित्रता भी आवश्यक है इसे दिव्य साधना कहते हैं त्राटक(Tratak)के द्वारा मन की एकाग्रता,वाणी का प्रभाव व दृष्टि मात्र से संकल्प को पूर्ण कर लेता है-

ये एक हठयोग(Hathayoga)भी है-

जी इसे एक प्रकार का हठयोग भी कहते है-त्राटक योग  के द्वारा मन की एकाग्रता और वाणी के प्रभाव से मनुष्य अपने संकल्प को पा लेता है अगर जो व्यक्ति प्रबल इच्छा शक्ति से साधना करे तो सिद्धियाँ स्वयमेव आ जाती है तथा मनुष्य तन में मन की एकाग्रता को प्राप्त करने की त्राटक योग विध्या सर्वोपरि है-

इसे आप हठयोग(Hatha yoga)भी कह सकते है यदि कोई व्यक्ति लगन और अटूट विश्वास से यह साधना तीन माह तक नियमित करे तो साधक को उसके प्रभाव का अनुभव प्राप्त होने लगता है अनेक प्रकार के विचित्र अनुभव ज्ञात होने लगते है लेकिन इन अनुभव को आप सिवाय गुरु के किसी से शेयर न करें अन्यथा आपका प्राप्त होने वाला पावर क्षीण होने लगता है-

त्राटक योग को करने का सबसे उत्तम समय रात को है जब वातावरण बिलकुल शांत रहता है आप इसका प्रयोग करें तथा आप योग का समय भी निश्चित ही रक्खें तथा इसकी शुरुवात पांच मिनट से शुरू करके उत्तरोत्तर बढ़ाते जाए इसमें श्रद्धा धर्य और पवित्रता की भी आवश्यकता है-

त्राटक(Tratak)योग करने की विधि-


आपको त्राटक योग सिद्धि रात्रि में अथवा किसी अँधेरे वाले स्थान पर करना चाहिए तथा प्रतिदिन लगभग एक निश्चित समय पर शुरुवात पांच मिनट से शुरू करके धीरे-धीरे क्रमश: बढाते हुए बीस मिनट तक करना चाहिए जिस स्थान पर आप त्राटक योग करें वह स्थान शांत एकांत ही रहना चाहिए-

त्राटक योग साधना करते समय किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आए आपको इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए आप शारीरिक शुद्धि के साथ स्वच्छ ढीले कपड़े पहनकर किसी आसन पर बैठ जाइए तथा अपने आसन से लगभग तीन फुट की दूरी पर मोमबत्ती अथवा दीपक को आप अपनी आँखों अथवा चेहरे की ऊँचाई पर रखिए-एक समान दूरी पर दीपक या मोमबत्ती-जो जलती रहे-

जिस समय आप उपासना करे उस समय हवा नहीं लगे व वह दीपक की लों बुझे भी नहीं आप दीपक इस प्रकार रखिए अब आप एकाग्र मन से व स्थिर आँखों से उस ज्योति को एकटक बिना पलक झपकाए देखते रहें-

त्राटक कैसे करें-

जब तक आपकी आँखों में कोई अधिक कठिनाई नहीं हो तब तक आप पलक नहीं गिराएँ आप यह क्रम प्रतिदिन जारी रखें धीरे-धीरे आपको ज्योति का तेज बढ़ता हुआ दिखाई देगा तथा कुछ दिनों उपरांत आपको ज्योति के प्रकाश के अतिरिक्त कुछ नहीं दिखाई देगा तथा उस ज्योति में संकल्पित व्यक्ति व कार्य भी प्रकाशवान होने लगेगा ये भी हो सकता है कि इस आकृति के अनुरूप ही घटनाएँ जीवन में घटित होने लगेंगी तथा इस अवस्था के साथ ही आपकी आँखों में एक विशिष्ट तरह का तेज आ जाएगा जब भी आप किसी पर नजरें डालेंगे तो वह आपके मनोनुकूल कार्य करने लगेगा-

इस सिद्धि का उपयोग सकारात्मक तथा निरापद कार्यों में करने से त्राटक शक्ति की वृद्धि होने लगती है दृष्टिमात्र से अग्नि उत्पन्न करने वाले योगियों में भी त्राटक योग सिद्धि रहती है इस सिद्धि से मन में एकाग्रता, संकल्प शक्ति व कार्य सिद्धि के योग बनते हैं कमजोर नेत्र ज्योति वालों को इस साधना को शनैः-शनैः वृद्धिक्रम में करना चाहिए-

त्राटक(Tratak)ध्यान विधि-


आप अपने कमरे के दरवाजे बंद कर लें एक बड़ा दर्पण अपने सामने रख लें तथा कमरे में अंधेरा होना चाहिए और दर्पण के बगल में आप एक छोटी सी लौ दीपक, मोमबत्ती या लैंप को जला कर रक्खें फिर आप लौ को इस प्रकार रखें कि वह सीधे दर्पण में प्रतिबिंबित न हो बस केवल आपका चेहरा ही दर्पण में प्रतिबिंबित हो अब आप लगातार दर्पण में अपनी स्वयं की आंखों में देखें बस पलक न झपकाएं यह चालीस मिनट का प्रयोग है आप इसे पहले दिन बीस मिनट से शुरू करें और धीरे-धीरे फिर समय को बढायें-

दो या तीन दिन में ही आप अपनी आंखों को बिना पलक झपकाए देखने में समर्थ हो जाएंगे और यदि आंसू आएं तो आप उन्हें आने दें लेकिन दृढ़ रहें कि पलक न झपके और लगातार अपनी आंखों में देखते रहें दृष्टि का कोण न बदलें-बस आंखों में देखते रहें -अपनी ही आंखों में-

द्रश्य का दिखना-

इसके प्रयोग से दो या तीन दिन में ही आप एक बहुत ही विचित्र घटना से अवगत होंगे-आपका चेहरा नया रूप लेने लगेगा-आप घबरा भी सकते हैं-दर्पण में आपका चेहरा बदलने लगेगा-कभी-कभी बिलकुल ही भिन्न चेहरा वहां होगा, जिसे आपने कभी नहीं देखा या जाना है कि वह आपका है-असल में ये सभी चेहरे आपके हैं-अचेतन मन का विस्फोट होना प्रारंभ हो रहा है-ये चेहरे-ये मुखौटे सभी आपके हैं हो सकता है कभी-कभी कोई ऐसा चेहरा भी आ सकता है जो कि आपके पिछले जन्म से संबंधित हो-

एक सप्ताह लगातार चालीस मिनट तक देखते रहने के बाद एक फिल्म की भांति हो जाएगा-बहुत से चेहरे जल्दी-जल्दी आते रहेंगे और तीन सप्ताह के बाद-अब आपको स्मरण भी नहीं रहेगा कि आपका चेहरा कौन सा है-क्योंकि आपने इतने चेहरों को आते-जाते देखा है-अब तीन सप्ताह के बाद-सबसे विचित्र घटना घटेगी आप देखेगें कि अचानक दर्पण में कोई भी चेहरा नहीं है बस दर्पण खाली है और आप सिर्फ शून्य में झांक रहे हैं-

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Upcharऔर प्रयोग-

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