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पूजा में अक्षत समर्पण का अभिप्राय क्या है

अक्षत यानि कि पूर्णता का प्रतीक यानि जो टूटा न हो जो अखंडित न हो वही अक्षत पूर्णता का प्रतीक है इसलिए आप हमेशा ही ध्यान रक्खे कि आप जब भी भगवान् को चावल चढ़ाए तो ध्यान रक्खे कि आपका चावल विखंडित(टूटा)न हो-

पूजा में अक्षत समर्पण का अभिप्राय क्या है

पूजा में अक्षत का महत्व-


अखंडित और स्वच्छ चावल शिवलिंग पर चढाने से शिवजी अति-प्रसन्न होते है और भक्तों को अखंडित चावल की तरह ही अखंडित धन, मान-सम्मान प्रदान करते हैं और श्रद्धालुओं को जीवनभर धन-धान्य की कमी नहीं होती हैं-

पूजन के समय अक्षत इस मंत्र के साथ भगवान को समर्पित किए जाते हैं-

'अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुङ्कमाक्ता: सुशोभिता: मया निवेदिता भक्त्या: गृहाण परमेश्वर '

भावार्थ-


 हे परमेश्वर कुंकुम के रंग से सुशोभित यह अक्षत आपको समर्पित कर रहा हूं, कृपया आप इसे स्वीकार करें-

अन्न में अक्षत यानि चावल को श्रेष्ठ माना जाता है-इसे देवताओं का अन्न भी कहा गया है अर्थात देवताओं का प्रिय अन्न है चावल-अत: इसे सुगंधित द्रव्य कुंकुम के साथ आपको अर्पित कर रहे हूँ आप इसे ग्रहण कर आप भक्त की भावना को स्वीकार करें-

अक्षत चढ़ाने का अभिप्राय यह है कि हमारा पूजन अक्षत की तरह पूर्ण हो तथा अन्न में श्रेष्ठ होने के कारण भगवान को चढ़ाते समय यह भाव रहता है कि जो कुछ भी अन्न हमें प्राप्त होता है वह भगवान की कृपा से ही मिलता है अत: हमारे अंदर यह भावना भी बनी रहे-इसका सफेद रंग हमारे जीवन में शांति का प्रतीक है-अत: हमारे प्रत्येक कार्य की पूर्णता ऐसी हो कि उसका फल हमें शांति प्रदान करे-इसीलिए पूजन में अक्षत एक अनिवार्य सामग्री है ताकि ये भाव हमारे अंदर हमेशा बने रहें-


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