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लिंग मुद्रा कैसे करें इससे क्या लाभ हैं

लिंग मुद्रा(Linga Mudra)मुद्रा का प्रयोग शिव,रूद्र,भैरव साधना में किया जाता है लिंग मुद्रा,योनी मुद्रा,महायोनी मुद्रा आदि का तंत्र साधना में अत्यधिक महत्व है लेकिन इन मुद्राओं को कब कहाँ और कैसे इसे ईष्ट को प्रदर्शित कर उन्हें प्रसन्न किया जाये यह गुरु के मार्गदर्शन में बताया जाता है साधना क्रम में इसे करने के कई फायदे होते हैं एक तो सम्बंधित ईश्वर प्रसन्न होता है और दुसरे साधक के शरीर पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है यह सब एक गोपनीय विषय होता है जो सामाजिक माध्यमों पर पूर्ण बताने लायक नहीं होता है-

लिंग मुद्रा कैसे करें इससे क्या लाभ हैं

लेकिन गृहस्थ जीवन में लिंग मुद्रा(Linga Mudra)के प्रयोग से आप अपने शरीर की अनावश्यक कैलोरी को हटाकर मोटापे को कम कर सकते हैं शरीर में अधिक सर्दी महसूस होने या शीत बाधा होने पर लिंग मुद्रा के प्रयोग से शीघ्र लाभ होता है इसे अधिक देर तक करने से सर्दियों में भी पसीना आता है-

मुद्रा बलगम को रोककर फेफड़ों को शक्ति प्रदान करती है लेकिन लिंग मुद्रा(Linga Mudra)का प्रयोग आप सिर्फ आवश्यकतानुसार ही करें क्युकि शरीर में उष्णता उत्पन्न करनेवाली इस मुद्रा को अधिक लम्बे समय तक और स्वेच्छानुसार नहीं करना चाहिए-

लिंग मुद्रा के लिए सबसे पहले आप किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठ जाएँ फिर आप दोनों हाथों की अँगुलियों को परस्पर एक-दूसरे में फसायें(आप दिए गए चित्र के अनुसार)एक अंगूठे को सीधा रखें तथा दूसरे अंगूठे से सीधे अंगूठे के पीछे से लाकर घेरा बना दें-

लिंग मुद्रा(Linga Mudra)में सावधानियाँ-

पित्त प्रकृति वाले व्यक्तियों को लिंग मुद्रा नही करनी चाहिए तथा गर्मी के मौसम में इस मुद्रा को अधिक समय तक नहीं करना चाहिए-लिंग मुद्रा से शरीर मे गर्मी उत्पन्न होती है इसलिए इस मुद्रा को करने के पश्चात् यदि आपको गर्मी महसूस हो तो तुरंत पानी पी लेना चाहिए ध्यान रहे कि लिंग मुद्रा को नियत समय से अधिक नही करना चाहिए अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि संभव है-

लिंग मुद्रा(Linga Mudra)करने का समय व अवधि-


लिंग मुद्रा को प्रातः और सायं 16-16 मिनट तक करना चाहिए तथा बीमारी खत्म होने पर आप नियमित सिर्फ दो मिनिट से ज्यादा इस मुद्रा का अभ्यास न करे-

लिंग मुद्रा(Linga Mudra)से होने वाले लाभ-


1- यह मुद्रा पुरुषत्व का प्रतीक है इसीलिए इसे लिंग मुद्रा कहा जाता है लिंग मुद्रा के अभ्यास से साधक में स्फूर्ति एवं उत्साह का संचार होता है लिंग मुद्रा आपके ब्रह्मचर्य की रक्षा करती है तथा आपके व्यक्तित्व को शांत व आकर्षक बनाती है जिससे व्यक्ति आन्तरिक स्तर पर प्रसन्न रहता है-

2- सर्दी से ठिठुरता व्यक्ति यदि कुछ समय तक लिंग मुद्रा कर ले तो आश्चर्यजनक रूप से उसकी ठिठुरन दूर हो जाती है-

3- यदि आपको सर्दी लगकर बुखार आ रहा हो तो लिंग मुद्रा तुरंत असरकारक सिद्ध होती है-

4- लिंग मुद्रा पुरूषों के समस्त यौन रोगों में अचूक है इस मुद्रा के प्रयोग से स्त्रियों के मासिक स्त्राव सम्बंधित अनियमितता ठीक होती हैं-

5- लिंग मुद्रा के अभ्यास से जीर्ण नजला,जुकाम, साइनुसाइटिस,अस्थमा व निमन् रक्तचाप का रोग नष्ट हो जाता है तथा लिंग मुद्रा के नियमित अभ्यास से कफयुक्त खांसी एवं छाती की जलन नष्ट हो जाती है-

6- लिंग मुद्रा के नियमित अभ्यास से अतिरिक्त कैलोरी बर्न होती हैं और परिणाम स्वरुप मोटापा रोग समाप्त हो जाता है-

7- यदि आपकी नाभि अपने स्थान से बार बार हट जाती है तो लिंग मुद्रा के अभ्यास से टली हुई नाभि पुनः अपने स्थान पर आ जाती हैं-


Upcharऔर प्रयोग-

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