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प्राण मुद्रा कैसे करें इससे क्या लाभ है

प्राण मुद्रा को प्राणशक्ति का एक मात्र केंद्र माना जाता है इसके नियमित प्रयोग से प्राणशक्ति बढ़ती है और आपका शरीर निरोग भी रहता है आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से कई परेशानिया जैसे की बार-बार सर्दी-जुकाम होना, बुखार आना हो जाता है प्राण मुद्रा(Prana Mudra)के नित्य अभ्यास से आपका प्रतिरोधक तंत्र अधिक मजबूत बनता है-

प्राण मुद्रा कैसे करें इससे क्या लाभ है

प्राण शक्ति प्रबल होने पर मनुष्य के लिए किसी भी प्रतिकूल परिस्थितियों में धैर्यवान रहना अत्यंत सहज हो जाता है प्राण शक्ति ही आपके जीवन को सुखद बनाती है दिल के रोग में रामबाण तथा आंखो की ज्योति बढाने में प्राण मुद्रा(Prana Mudra)बहुत लाभदायक है-

प्राण मुद्रा(Prana Mudra)को करने से आपको इन रोगों में भी लाभ होता है जैसे-थॉयरायड का बढ़ना,जोड़ों में अस्थिरता,भूलने की आदत,नींद न आना(अनिद्रा),पेट में जलन,कब्ज और एसिडिटी,मूत्र मार्ग में जलन होना,दुर्गंधयुक्त पसीना आना,पीलिया या समय से पहले बुढ़ापा आना-

प्राण मुद्रा करने के लिए आप पद्मासन या सिद्धासन में बैठ जाएँ  तथा रीढ़ की हड्डी सीधी रखें अब आप अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रख लें तथा हथेलियाँ ऊपर की तरफ रहें हाथ की सबसे छोटी अंगुली(कनिष्ठा)एवं इसके बगल वाली अंगुली(अनामिका)के पोर को अंगूठे के पोर से लगा दें बस आपको इस बात का ख्याल रहे की इनमे बहुत अधिक दबाव ना बने और बची हुई दो उँगलियों को सीधा रखा जाता है इसका अभ्यास आप कहीं भी और कभी भी कर सकते है-

प्राण मुद्रा(Prana Mudra)में सावधानियां-


प्राणमुद्रा से प्राणशक्ति बढती है यह शक्ति इन्द्रिय, मन और भावों के उचित उपयोग से धार्मिक बनती है परन्तु यदि इसका सही उपयोग न किया जाए तो यही शक्ति इन्द्रियों को आसक्ति, मन को अशांति और भावों को बुरी तरफ भी ले जा सकती है इसलिए प्राणमुद्रा से बढ़ने वाली प्राणशक्ति का संतुलन बनाकर रखना चाहिए-

प्राण मुद्रा(Prana Mudra)करने का समय व अवधि-


प्राणमुद्रा को एक दिन में अधिकतम 48 मिनट तक किया जा सकता है यदि एक बार में 48 मिनट तक करना संभव न हो तो प्रातः,दोपहर एवं सायं 16-16 मिनट कर सकते है-

प्राण मुद्रा(Prana Mudra)से होने वाले लाभ-


1- प्राणमुद्रा को पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर करने से शक्ति जागृत होकर ऊर्ध्वमुखी हो जाती है जिससे आपके शरीर के चक्र जाग्रत होते हैं एवं नियमित अभ्यास से आपका शरीर अलौकिक शक्तियों से युक्त हो जाता है-

2- प्राणमुद्रा में जल,पृथ्वी एवं अग्नि तत्व एक साथ मिलने से शरीर में रासायनिक परिवर्तन होता है जिससे आपके व्यक्तित्व का विकास होता है-

3- प्राणमुद्रा ह्रदय रोग में रामबाण है एवं नेत्रज्योति बढाने में यह मुद्रा बहुत सहायक है तथा आंखों से जुड़ी कई परेशानियां भी दूर होती है अगर आपके आँखों के चश्मा का नम्बर ज्यादा है तो आपको नियमित इस मुद्रा का अभ्यास करना शुरू कर देना चाहिए-

4- इस मुद्रा के निरंतर अभ्यास से प्राण शक्ति की कमी दूर होकर व्यक्ति तेजस्वी बनता है-

5- प्राण मुद्रा से लकवा रोग के कारण आई कमजोरी दूर होकर शरीर शक्तिशाली बनता है यदि आपके शरीर में पृथ्वी और जल तत्व की कमी से कुछ विकार है तो प्राण मुद्रा से आप उन विकारो को ठीक कर सकते है-

6- इस मुद्रा के निरंतर अभ्यास से मन की बैचेनी और कठोरता को दूर होती है एवं एकाग्रता बढ़ती है-

7- जिन महिलाओ को मासिक धर्म के दौरान बहुत दर्द होता है उन्हें इसे करने से फायदा मिलता है-उच्च रक्तचाप के मरीजो के लिए भी यह आसन लाभदायक है यदि आपको छोटी छोटी बात पर क्रोध आता है और चिड़चिड़ापन महसूस होता है तो इसे करने से इन सभी चीजों में कमी आती है-

8- जिन लोगो की सहनशीलता कम होती है और लगातार थकान बनी रहती है तो उन्हें इस मुद्रा को करने से ताकत मिलती है तथा प्राण मुद्रा त्वचा के रोगों को भी ठीक करता है इससे लाल त्वचा, त्वचा पर चकत्ते, पित्ती आदि रोग भी ठीक होते है-


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