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7 फ़रवरी 2017

शून्य मुद्रा कैसे करें इसके क्या लाभ हैं

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शून्य मुद्रा हमारे शरीर के भीतर आकाश तत्व का प्रतिनिधित्व करती है हमारे हाथों की मध्यमा अँगुली का संबंध आकाश से जुड़ा माना गया है शून्य मुद्रा(Shunya Mudra)मुख्य रूप से हमारी श्रवण क्षमता को बढ़ाती है चूँकि सूर्य मुद्रा हमारे भीतर के अग्नि तत्व को संचालित करती है इस अँगुली का संबंध सूर्य और यूरेनस ग्रह से है और सूर्य ऊर्जा स्वास्थ्य का प्रतिनिधित्व करती है-
शून्य मुद्रा कैसे करें इसके क्या लाभ हैं

शून्य मुद्रा(Shunya Mudra)के करने से कान में किसी भी प्रकार के दर्द में आराम मिलता है साथ ही कान में पस निकलने पर इस मुद्रा के नियमित प्रयोग करने से कान का पस आना बंद होजाता है कान का बहरापन भी इस मुद्रा से ठीक किया जा सकता है-

मध्यमा अँगुली(बीच की अंगुली)को हथेलियों की ओर मोड़ते हुए अँगूठे से उसके प्रथम पोर को दबाते हुए बाकी की अँगुलियों को सीधा रखने से शून्य मुद्रा बनती हैं प्रातःकाल जल्दी उठकर नहाने के बाद योग करते समय इस शून्य मुद्रा(Shunya Mudra)को दोनों हाथों से करना चाहिए तथा इस समय आपका मन बिलकुल शांत होना चाहिए तभी इन मुंद्रा का सही प्रभाव होता है इस मुद्रा को चार से पांच मिनट तक करने से अधिक प्रभाव पड़ता है-

शून्य मुद्रा(Shunya Mudra)में सावधानियाँ-


भोजन करने ने के तुरंत पहले या बाद में शून्य मुद्रा न करें किसी आसन में बैठकर एकाग्रचित्त होकर शून्य मुद्रा करने से अधिक लाभ होता है-

शून्य मुद्रा(Shunya Mudra)करने का समय व अवधि-


शून्य मुद्रा को प्रतिदिन तीन बार प्रातः दोपहर और सायं पंद्रह मिनट के लिए करना चाहिए या फिर आप प्रात: काल एक बार में भी 45 मिनट तक कर सकते हैं-

शून्य मुद्रा(Shunya Mudra)से होने वाले लाभ-


1- शून्य मुद्रा के निरंतर अभ्यास से स्वाभाव में उन्मुक्तता आती है इस मुद्रा से एकाग्रचित्तता बढती है तथा शून्य मुद्रा से आपकी इच्छा शक्ति मजबूत होती है-

2- शून्य मुद्रा के निरंतर अभ्यास से कान के रोग जैसे कान में दर्द, बहरापन, कान का बहना, कानों में अजीब-अजीब सी आवाजें आना आदि समाप्त हो जाते हैं और कान दर्द होने पर शून्य मुद्रा को मात्र पांच मिनट तक करने से दर्द में चमत्कारिक प्रभाव होता है-

3- शून्य मुद्रा गले के लगभग सभी रोगों में लाभकारी है तथा यह शून्य मुद्रा थायराइड ग्रंथि के रोग भी दूर करती है-

4- शून्य मुद्रा शरीर के आलस्य को कम कर स्फूर्ति जगाती है तथा इस मुद्रा को करने से मानसिक तनाव भी समाप्त हो जाता है-


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