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5 फ़रवरी 2017

पृथ्वी मुद्रा कैसे करें इसके क्या लाभ हैं

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पृथ्वी मुद्रा(Prithvi Mudra)द्वारा मनुष्य अपने भौतिक अंतरत्व में पृथ्वी तत्व को जाग्रत करता है और शरीर में बढ़ने वाले अग्नि तत्व को घटाने में मदद करता है इसलिए इसे अग्नि शामक मुद्रा भी कहते है इस मुद्रा को करने से पृथ्वी तत्व बढ़कर सम हो जाता है यह तत्व महत्वपूर्ण घटक है इस मुद्रा के अभ्यास से नए घटक बनते है और मजबूत होते है दूसरे शब्दों में कहें तो, इस मुद्रा के प्रभाव से जीवन शक्ति, ताकत और सहनशक्ति बढ़ाई जा सकती है पृथ्वी मुद्रा की मदद से सूंघने में परेशानी आना, ज्यादा कफ बनना या पित्त जैसी बीमारियो का भी नाश हो जाता है-

पृथ्वी मुद्रा कैसे करें इसके क्या लाभ हैं

पृथ्वी मुद्रा(Prithvi Mudra)के लिए सबसे पहले आप वज्रासन की स्थिति में दोनों पैरों के घुटनों को मोड़कर बैठ जाएं तथा रीढ़ की हड्डी सीधी रहे एवं दोनों पैर अंगूठे के आगे से मिले रहने चाहिए और आपकी एड़िया सटी रहें तथा नितम्ब का भाग एड़ियों पर टिकाना लाभकारी होता है और यदि आप यदि वज्रासन में न बैठ सकें तो फिर पदमासन या सुखासन में भी बैठ सकते हैं-अब दोनों हांथों को घुटनों पर रखें तथा आपकी हथेलियाँ ऊपर की तरफ रहें-अपने हाथ की अनामिका अंगुली(सबसे छोटी अंगुली के पास वाली अंगुली)के अगले पोर को अंगूठे के ऊपर के पोर से स्पर्श कराएँ  और आपके हाथ की बाकी सारी अंगुलिया बिल्कुल सीधी रहें-

पृथ्वी मुद्रा(Prithvi Mudra)में सावधानियां-


वैसे तो पृथ्वी मुद्रा को किसी भी आसन में किया जा सकता है परन्तु इसे वज्रासन में करना अधिक लाभकारी है अतः यथासंभव इस मुद्रा को वज्रासन में बैठकर ही करना चाहिए-

पृथ्वी मुद्रा(Prithvi Mudra)करने का समय व अवधि-


पृथ्वी मुद्रा को आप प्रातः एवं सायं 24-24 मिनट करना चाहिए-वैसे किसी भी समय एवं कहीं भी इस मुद्रा को कर सकते हैं-

पृथ्वी मुद्रा(Prithvi Mudra)से होने वाले लाभ-


1- हस्त मुद्राओं में पृथ्वी मुद्रा का बहुत महत्व है यह हमारे भीतर के पृथ्वी तत्व को जागृत करती है पृथ्वी मुद्रा के अभ्यास से मन में वैराग्य भाव उत्पन्न होता है-

2- जिस प्रकार से पृथ्वी माँ प्रत्येक स्थिति जैसे-सर्दी,गर्मी,वर्षा आदि को सहन करती है एवं प्राणियों द्वारा मल-मूत्र आदि से स्वयं गन्दा होने के वाबजूद उन्हें क्षमा कर देती है क्युकि पृथ्वी माँ आकार में ही नही वरन ह्रदय से भी विशाल है पृथ्वी मुद्रा के अभ्यास से इसी प्रकार के गुण साधक में भी विकसित होने लगते हैं यह मुद्रा विचार शक्ति को उनन्त बनाने में मदद करती है-

3- जिन लोगों को भोजन न पचने का या गैस का रोग हो उनको भोजन करने के बाद 5 मिनट तक वज्रासन में बैठकर पृथ्वी मुद्रा करने से अत्यधिक लाभ होता है-

4- पृथ्वी मुद्रा के अभ्यास से आंख, कान, नाक और गले के समस्त रोग दूर हो जाते हैं तथा  पृथ्वी मुद्रा आपको समय से पहले बाल सफेद होने की समस्या और तनाव के कारण होने वाले हाइपरटेंशन में भी राहत दिलाता है-

5- पृथ्वी मुद्रा करने से कंठ सुरीला हो जाता है और इस मुद्रा को करने से गले में बार-बार खराश होना, गले में दर्द रहना जैसे रोगों में बहुत लाभ होता है-

6- पृथ्वी मुद्रा से मन में हल्कापन महसूस होता है एवं शरीर ताकतवर और मजबूत बनता है-

7- पृथ्वी मुद्रा को प्रतिदिन करने से महिलाओं की खूबसूरती बढ़ती है और चेहरा सुंदर हो जाता है एवं पूरे शरीर में चमक पैदा हो जाती है-

8- पृथ्वी मुद्रा के अभ्यास से स्मृति शक्ति बढ़ती है एवं मस्तिष्क में ऊर्जा बढ़ती है-

9- पृथ्वी मुद्रा करने से दुबले-पतले लोगों का वजन बढ़ता है शरीर में ठोस तत्व और तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए पृथ्वी मुद्रा सर्वोत्तम है लेकिन कैसे ? पढने के लिए नीचे दिए लिंक को क्लिक करें-

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