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18 मार्च 2017

वर्तमान में महिलाओं की बदलती अवधारणा

आज वर्तमान में महिलाओं(Women)की बदलती हुई अवधारणा ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है कुछ वर्षो पूर्व महिलाओं में शर्म,संकोच और डर का समावेश हुआ करता था पहले की सभी महिलायें शादीशुदा जिंदगी को एक कर्तव्य समझ कर निभाती रहती थीं लेकिन वर्तमान में आज अब वहीं महिलायें अपनी महत्वाकांक्षा को बिना किसी की परवाह किए खुलकर प्रदर्शन करती हैं-
वर्तमान में महिलाओं की बदलती अवधारणा

वैसे भी काम-क्रीडा एक दिलचस्पी का विषय रहा है लेकिन आज शारीरिक सुख की चाह में अधिकतर महिलाएं मर्यादा को दरकिनार करते हुए इतना आगे निकल गई है उनके लिए दिल से पहले शारीरिक सुख की बात ज्यादा मायने रखती है और सिर्फ इतना ही नहीं है कहीं-कहीं ये भी देखने को आता है कि कुछ स्त्रियाँ अपने अंतर्मन और यौनाकांक्षाओं के चलते एक पति को छोड़ दूसरे का सहारा लेने से भी पीछे नहीं हटती हैं आज इस प्रकार की घटनाएं अमूमन देखने को मिल रही है-

आजकल स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास इस प्रकार की महिलाओं की संख्या में दिनों-दिन इजाफा दिखाई दे रहा है जो अपने यौन-जीवन को बेहतर बनाने के लिए चिकित्सकीय सहायता भी चाहती हैं क्योंकि वो अपनी सेक्सुअल लाइफ से खुश नहीं होती हैं स्त्रीरोग विशेषज्ञ को ये महिलायें खुलकर बताती हैं कि वो अपने पति से संतुष्ट नहीं हो पाती है और उनका मन करता है कि वो अपनी संतुष्टि कहीं और से पूरी कर लें-

सच मानियें तो वाकई आज महिलाओं की तस्वीर बदलती जा रही है स्त्री भी अपने लिए चरम सुख प्राप्त करना चाहती हैं और ये शायद उनके लिए उपयुक्त भी है आखिर जीवन में यौन तृप्ति उनका भी मौलिक अधिकार है जबकि इसके विपरीत पुरुष में यौन रोगों की अधिकता तेजी से बढ़ गई है हमारे पास जब सौ सवाल इनबॉक्स में होते है तो 85% सिर्फ सेक्स से रिलेटेड ही सवाल होते है पुरुषों को में भी कामुकता की प्रवृति इस कदर बढती दिखाई दे रही है जो परिपक्व अवस्था से पहले ही अपना आत्म-संयम खोने को तैयार है जिसके परिणाम अब द्रष्टिगोचर होने लगें है-

आज महिलाओं के लिए यौन संबंध केवल विवाह के बाद की क्रिया नहीं रह गई है बल्कि अब यौन संबंध उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हो गया है भारतीय महिलाओं का नजरिया तेजी से सेक्स के प्रति बदल रहा हैं आधुनिक महिलायें तो शादी के बाद ही नहीं बल्कि शादी के पहले भी इस सुख का आनंद लेना चाहती हैं स्त्री में आधुनिक विचार बहुत बदल गए हैं वे अपनी इच्छाओं का सामाजिक दबाव के कारण दमन नहीं करती हैं बल्कि कई महिलायें तो बिना किसी संकोच के सेक्स की पहल भी करती हैं-

यदि इस बात को गहराई पूर्ण देखा जायें तो बदलती जीवनशैली में नारी का जो उदय हो रहा है वह बंधनों को जोडऩे वाला नहीं बल्कि तोडऩे वाला है उनके लिए यौन संबंधों का इस्तेमाल चाय की चुस्की की तरह सहज हो गया है जिस देश में पूजनीय राम की पत्नी सीता को भी अग्नि परीक्षा देनी पड़ी थी वहीं आज की स्त्री किसी भी परीक्षा में विश्वास नहीं करती है और अपनी यौन जिज्ञाषा पूर्ण करने के लिए किसी भी हद को पार करने को तत्पर दिखाई दे रही है बात कुछ कडवी अवश्य हो सकती है लेकिन हकीकत में समझना आवश्यक है कि लज्जा,शर्म,ही नारी का आभूषण हुआ करता है-

कुछ वर्षो पहले सब कुछ नार्मल वैवाहिक जीवन था किसी महिला की यौन संबंधों की भूख सामाजिक और परिवारिक रिश्तों को से उपर नहीं हुआ करती थी परन्तु आज शादी के बाद पति-पत्नी परिवार से अलग अपनी जिन्दगी को बिना किसी व्यवधान के यौन सुख के साथ जीना पसंद करते है इस कारण भी परिवार का विघटन होना भी एक कारण है आज महिलाएं कामसुख की तलाश में अपनों से ही किनारा करने लगी हैं सीधी बात कहें तो यौन संबंधों की भूख सामाजिक और परिवारिक रिश्तों की लक्ष्मण रेखा पर भारी पड़ रही है-



पारिवारिक संबंधो के पहलू बदल चुके हैं पहले पुरुष को ही सेक्स में भरपूर आनंद उठाने व पराई नारी से संबंध बनाने का अधिकार था-वहीं आज की औरतें सेक्स की पूर्ति के लिए पर पुरुष के कंधे पर सर रखने में संकोच नहीं करती हैं धीरे-धीरे पच्छिमी सभ्यता की तरफ जाते जा रहें है-

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