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3 अप्रैल 2017

खड़े होकर भोजन से क्या-क्या हानियाँ है

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आज की सबसे बड़ी बात ये है कि हम सभी सुविधा के गुलाम है और जब हम किसी सुविधा के आदी(गुलाम)हो जाते है या फिर जब कोई चीज प्रतिष्ठा का प्रश्न बना दी जाती है या फिर आप यूँ कहें कि जब कोई चीज घर-घर में पहुँच जाती है तब वह चाहे कितनी भी अवैज्ञानिक ही क्यों न हो चाहे कितने ही रोग पैदा कराने वाली क्यूँ न हो लेकिन हम अपने मानसिक विकारों(लत, दिखावा, भेड़चाल आदि)के कारण उसकी असलियत को जानना ही नहीं चाहते है-

खड़े होकर भोजन से क्या-क्या हानियाँ है

यदि कोई आपको सच्चाई से अवगत भी कराना चाहे तो वह व्यक्ति आपको दक़ियानूसी लगता है और इन मानसिक विकारों के कारण हमारे दिमाग मे सैकड़ों तर्क उठने लगते है हमारे ऋषियों की हर परम्पराओं मे वैज्ञानिकता थी ये बात आज लोग कब समझेंगे बस ये बात आपको समझने की आवश्यकता है-

क्या आपको पता है कि खड़े होकर खाने से आपको क्या-क्या हानियाँ होती है तो फिर आप अब इस लेख को एक बार पूरा अवश्य पढ़ लें-वैसे करना तो आपको अपने ही मन की है क्युकि आखिर आपकी प्रतिष्ठा का सवाल है जो किसी भी कीमत पर कमतर नहीं आंकी जानी चाहिये भले ही आपको कितना ही नुकसान हो रहा हो-

खड़े होकर समारोह में भोजन करने से-


1- सबसे पहले आप जान लें कि विवाह समारोह आदि मे मेहमानो को खड़े होकर भोजन कराने से मेहमान का अपमान होता है जब आप ये मानते है कि 'अथिति देवो भव:'

2- यजमान और मेहमान के लिए भोजन की सही प्रकार से व्यवस्था के बगैर आपका समारोह सफल नही होता है क्युकि मनुष्य के जीवन में आहार-निंद्रा-मैथुन का बहुत ही महत्व है-

3- आहार या भोजन सभ्य समाज में यजमान और मेहमान के लिए आदर सम्मान का प्रतीक है आज से 30-35 साल पहले घर में मेहमान आता था या किसी प्रसंग में जाते थे तो मान मनुहार और अड़ोसी पडोसी को बुलाकर आदर सहित आसन पर बैठाकर पाटले पर थाली रखकर आग्रह पूर्वक खाने की वानगी परोसकर भारतीय परंपरा से जिमाते थे जिसमे यजमान आग्रह करता था और मेहमान ना-ना करते हुए आवश्यकता से अधिक प्रसन्नता से खाते थे तथा जाते-जाते उन्हें भी आने का न्योता देते थे और जब कभी यजमान मेहमान बनकर जाते थे तो उनसे बदला न ले रहे हो इस प्रकार उन्हें ठूस-ठूस कर आग्रह से खिलाते थे-

4- आज समय बदलता रहा ज्यादातर लोग पच्छिमी सभ्यता में आ गये और पैसे कमाने की होड़ में पड़ गये हैं जबकि सच यही है कि लोगों के पास मेहमानों के लिए समय ही नही है लोग इसी शादी-ब्याहों में रात्रि भोजन में हजारो महमानो को बुलाते है स्वरुचि भोज के नाम पर खड़े खड़े खिलाते है हर काउन्टर पर लाइन में लेकर हाथ की डिश में रखकर भीड़ में एक दुसरे से बचके-बचाकर खाना खाते देखा जाता है जहाँ न तो लड़के या लडकी पक्ष वाले कही दूर तक नजर नही आता है कैटर्स(Catters)के लोग ही दीखते है-

5- धार्मिक सम्भारम्भ में भी भोजन करने के लिए स्वरुची भोजन ही रखते है वहां भी सभी लोग खड़े-खड़े खाने का और खिलाने का फैशन चल पड़ा है जो शास्त्रोक्त या वैज्ञानिक दृष्टि से बिलकुल भी उचित नही है-

6- आगुन्तको या मेहमानों को खाना राजशाही अंदाज़ में गद्दी तकिया पाटला बिछाकर खिलाने से जयणा का पालन होता है आपका मेहमान जितना खा सकता है उतना ही लेगा इससे उसका झूठा नही छूटेगा और अन्नपूर्णा देवी का सम्मान भी होगा-

खड़े होकर भोजन करने से हानियाँ(Buffet System's Disadvantage)-


1- क्या आप जानते है कि खड़े होकर भोजन करने से निचले अंगों में वात रोग(कब्ज, गैस, घुटनों का दर्द, कमर दर्द आदि)बढ़ते है और फिर आप जानते ही है कि कब्ज तो बीमारियों का बादशाह है-

2- खड़े होकर खाना खाना खाने से मोटापा, अपच, कब्ज, एसि़डिटी आदि पेट संबंधी बीमारियां होती हैं-

3- खड़े होकर भोजन करने से कब्ज की समस्या होती है इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि जब हम खड़े होकर भोजन करते हैं तो उस समय हमारी आंते सिकुड़ जाती हैं और भोजन ठीक से नहीं पच पाता है तथा धीरे-धीरे भूंख भी कम होने लगती है-

4- खड़े होकर भोजन करने से यौन रोगो की संभावना प्रबल होती है जिसमे नपुंसकता, किडनी की बीमारियाँ, पथरी रोग आदि भी होने की संभावना अधिक होती है-

5- खड़े होकर समरोह में भोजन करने पर पैरो में जूते चप्पल होने से पैर गरम रहते है जबकि आयुर्वेद के अनुसार भोजन करते समय पैर ठंडे रहने चाहिए इसलिए हमारे देश में भोजन करने से पहले हाथ के साथ पैर धोने की परंपरा बनायी गई है-

6- बार बार कतार मे लगने से बचने के लिए थाली को अधिक भर लिया जाता है जिससे जूठन अधिक छोडी जाती है और फिर भोजन को छोड़ देने से अन्न देवता का अपमान है खड़े होकर भोजन करने की आदत असुरो की है हम भारतीयों की परम्परा नहीं है-

7- जिस पात्र मे परोसा जाता है वह सदैव पवित्र होना चाहिए लेकिन इस परंपरा में झूठे हाथो के लगने से ये पात्र भी अपवित्र हो जाते है और एक ही चम्मचा  का बार-बार झूठी थाली या प्लेट से टच होने से हम सब सामूहिक झूठन खाते है किसी की भी व्यक्ति की बीमारी को हम खुले तौर आमन्त्रण देते है-

बैठ कर खाने से स्वास्थ-लाभ-


1- पंगत मे भोजन कराने से उस व्यक्ति की शान होती है वह वह व्यक्ति गुणी होता है भोजन अपने हाथों से कराने से अतिथि सम्मान की भावना प्रबल होती है तथा सामने वाला भी आपकी सेवा-भाव से प्रसन्न होता है-

2- जमीन पर सुखासन अवस्था में बैठकर खाने से आप कई स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त कर शरीर को ऊर्जावान और स्फूर्तिवान बना सकते हैं जमीन पर बैठकर खाना खाते समय हम एक विशेष योगासन की अवस्था में बैठते हैं जिसे सुखासन कहा जाता है और सुखासन पद्मासन का एक रूप है सुखासन से स्वास्थ्य संबंधी वे सभी लाभ प्राप्त होते हैं जो पद्मासन से प्राप्त होते हैं-

3- बैठकर खाना खाने से हम अच्छे से खाना खा सकते हैं इस आसन से मन की एकाग्रता बढ़ती है जबकि इसके विपरीत खड़े होकर भोजन करने से यदि गौर करें तो देखेगें कि मन कभी एकाग्र नहीं रहता है तो मित्रो आप धीरे-धीरे इस प्रथा बदले और रोगों से खुद एवं अतिथि को भी सुरक्षित करने में अपना योगदान करे-

4- अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी हो तो अपने मित्रों को अवश्य शेयर करना न भूलें जिससे लोगों में जागरूकता बढे और हम अपनी संस्कृति को बढावा दे सकें-



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