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शरीर पर काले तिल उभरना क्या मेलानोमा के लक्षण है

शरीर पर काले तिल के रंग और आकार में बदलाव का होना मेलानोमा के लक्षण है ये त्वचा के मेलेनिन प्रोड्यूस करने वाले मेलानोसाइट्स(Melanocytes)में विकसित होता है मेलेनोमा मस्सों या तिल में होना प्रारम्भ होता है यह त्वचा के भीतर भी हो सकता है लेकिन देखने में ये एकदम सामान्य सा लगता है-

शरीर पर काले तिल उभरना क्या मेलानोमा के लक्षण है

मेलानोमा के लक्षण जैसे-जैसे पुराने पड़ते जाएंगे वहां खुजली की समस्या होने लगती है चेहरे के तिल या मस्सों के रंगों में परिवर्तन हो या फिर शरीर के तिलों के आस-पास की त्वचा में खुजली हो या त्वचा लाल हो जाए या मस्सों से खून आये तो इसे गंभीरता से लेते हुए इसका इलाज करना चाहिए इसका तुरंत इलाज ना कराने पर खून भी निकलता है वैसे तो यह बीमारी उन लोगों में अधिक होती है जो अधिक जादा सनबाथ लेते हैं-

मेलानोमा एक तरह का कैंसर है जो सूरज की रोशनी से अधिक प्रभावित होता है तथा इसकी शुरुआत तिल और मस्सों से होती है तो किसी भी तिल और मस्सों के आकार के बदलाव को आप बिलकुल भी हल्के में ना लें आप इस बीमारी से बचने के लिए कोशिश करें कि कम से कम धूप में निकलें यदि धूप में निकलने की जरूरत है तो फिर आप त्वचा पर अच्छे से सनस्क्रीन लगाएं और अपने शरीर को पूरी तरह से ढकें तथा इस रोग की शुरुवात होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें-आइये हम आपको इसके हर्बल इलाज बताते हैं जिन्हें अपनाकर आप मेलानोमा से त्वचा को बचा सकते हैं-

मेलानोमा(Melanoma)का हर्बल इलाज-

1- चाय के पौधे का तेल या टी ट्री आयल भी मेलानोमा में बेहद फायदेमंद है इसमें एंटीबेक्टेरिअल, एंटीसेप्टिक, एंटी माइक्रोबियल और एंटी फंगल गुण पाये जाते हैं जो कि त्वचा कि हर समस्या में लाभकारी है इस तेल को संक्रमित त्वचा पर दिन में दो बार लगाएं आपको अवश्य ही फायदा होगा-

2- रोजमैरी(एक प्रकार की सुगंधित मेंहदी)को सालों से मेलेनोमा के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है रोजमैरी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी कार्सिनोजेनिक प्रॉपर्टीज होती हैं रोजमैरी त्वचा में स्किन कैंसर सेल्स(Skin Cancer Cells)को बनने से रोकती हैं और मेलानोमा को प्राकर्तिक रूप से ठीक करती है आप भी इसका इस्तेमाल कर लाभ उठा सकते हैं-

3- रसभरी(Raspberry)प्राकर्तिक फल है जो कि मेलानोमा बनाने वाले इफेक्टिव स्किन सेल्स को मार देता है रसभरी में अस्कोब्र्यल और अल्लान्टोनिन दो प्रमुख कॉम्पोनेन्ट हैं जो एक्टिव होते हैं यह ना केवल मेलानोमा से त्वचा को बचाते हैं बल्कि त्वचा ऊतकों की मरम्मत भी करते हैं रसभरी को त्वचा पर डायरेक्ट लगाया जा सकता है और खाया भी जा सकता है लेकिन इसके बीज चबाना ज्यादा फायदेमंद होता है आप अपनी सुविधा के अनुसार उपयोग कर सकते हैं-

4- हल्दी(Turmeric)में मौजूद करक्यूमिन इसका मुख्य हिस्सा होता है जो कि एंटी कैंसर और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है हल्दी हमारे रोज के खाने का हिस्सा है हल्दी(Turmeric)मेलेनोमा सेल्स की ग्रोथ को रोकती है और त्वचा की रक्षा करती है इसलिए आप हल्दी का इस्तेमाल जरूर करें-

5- बैंगन(Brinjal)से बनी क्रीम या अर्क भी मेलानोमा के उपचार में बेहद फायदेमंद है चूँकि वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से बैंगन सोलनसए फैमिली से आता है और टमाटर, आलू और बेल भी इसी फैमिली का हिस्सा हैं जिनके भी अपने अपने अलग लाभ हैं-

6- अल्पाइन दूधवेच(Alpine Milkvetch)मेलानोमा के इलाज के लिए प्राकर्तिक और सुरक्षित उपाय है अल्पाइन मिल्क्वेच के रस में एंटी इंफ्लामंट्री और एंटी एक्सीडेंट और एंटी ट्यूमर गुण पाये जाते हैं यह कैंसर सेल्स को मारने का एक नेचुरल किलर है आपके लिए यह बहुत ही फायदेमंद साबित हो सकता है-

7- यदि मेलानोमा से ग्रसित हैं या शरीर पर मेलानोमा के लक्षण दिखाई दे रहे हो तो इंफ्लामेंशन बढ़ाने वाले भोजन या खाद्य पदार्थ से दूर रहना चाहिए-जिसमें चीनी, फ़ास्ट फ़ूड और हाई ओमेगा 6 वाले खाद्य पदार्थ शामिल हैं आप इसका अवश्य ही ध्यान रखें-

ध्यान दें कि-हल्दी से मेलानोमा यानी काले तिल उभरना रुक सकता है अगली पोस्ट में हम आपको हल्दी से बने अचार का सेवन करने की विधि बताएगें जिसे पढना न भूलें-

प्रस्तुति-

Satyan Srivastava



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