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30 अप्रैल 2017

आंव रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार

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आपके शरीर को और स्वास्थ्य को पेचिश या आंव रोग से बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है चिकित्सा की भाषा में कहें तो इसे डीसेण्ट्री(Dysentery)कहा जाता है अपच और अजीर्ण की अवस्था हो तो कठोर कब्ज की स्थिति पैदा होती है या पतले दस्त लग जाते हैं या पाचन ठीक न हो तो मल में चिकनापन आ जाता है जिसे आंव भी कहते हैं और थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार मल निकलता है-

आंव रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार

यह रोग यदि जल्दी ठीक न किया जा सके तो बहुत लम्बा, कठिन साध्य और कभी-कभी असाध्य स्थिति में पहुंच जाता है और इसका आक्रमण प्रायः अकस्मात होता है और इसके साथ ज्वर भी हो सकता है इसकी विकृति मुख्य रूप से बड़ी आंत में होती है मल में कफ की मात्रा ज्यादा होती है साथ ही वायु का भी प्रकोप रहता है इसके कीटाणु मुख मार्ग से शरीर में प्रवेश करते हैं और आंतों में पहुंचकर वहां अपना निवास बना लेते हैं इस व्याधि का प्रकोप ग्रीष्म और वर्षा काल में विशेष रूप से होता है-

उदर में मरोड़ और दर्द होना, बार-बार दस्त होना, दस्त होने के बाद थोड़ी देर में फिर हाजत होना, मुंह सूखना, प्यास लगना, जीभ पर मैल की परत जमना, दस्त होते समय मरोड़ होना, मल के साथ रक्त आना, नाड़ी कभी मन्द कभी तेज, बुखार की हरारत आदि लक्षण शुरू में ही प्रकट हो जाते हैं-


आंव-रोग का प्राकृतिक(Naturopathy)चिकित्सा से उपचार-


1- इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को कुछ दिनों तक रसाहार पोषक तत्वों (सफेद पेठे का पानी, खीरे का रस, लौकी का रस, नींबू का पानी, संतरा का रस, अनानास का रस, मठ्ठा तथा नारियल पानी) का अपने भोजन में उपयोग करना चाहिए-

2- रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक अपने भोजन में फलों का सेवन करना चाहिए और कुछ दिनों तक फल, सलाद और अंकुरित पदार्थों का सेवन करना चाहिए-इसके कुछ दिनों के बाद रोगी को सामान्य भोजन का सेवन करना चाहिए-

3- इसके अलावा इस रोग का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को एनिमा क्रिया करनी चाहिए ताकि उसका पेट साफ हो सके-

4- रोगी के पेट पर सप्ताह में एक बार मिट्टी की गीली पट्टी करनी चाहिए तथा सप्ताह में एक बार उपवास भी रखना चाहिए-

5- आंव रोग से पीडि्त रोगी को घबराना नहीं चाहिए तथा रोगी को अपना उपचार करने के साथ-साथ गर्म पानी में दही एवं थोड़ा नमक डालकर सेवन करना चाहिए-

6- इस रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन सुबह तथा शाम को मट्ठा पीना चाहिए-इस प्रकार से रोगी का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से करने से आंव रोग ठीक हो सकता है-

7- इस रोग से पीड़ित रोगी को पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए ताकि शरीर में पानी का कमी न हों क्योंकि शरीर में पानी की कमी के कारण कमजोरी आ जाती है-

8- आंव रोग से पीड़ित रोगी को नारियल का पानी और चावल का पानी पिलाना काफी फायदेमंद होता है और यदि रोगी का जी मिचला रहा हो तो उसे हल्का गर्म पानी पीकर उल्टी कर देनी चाहिए ताकि उसका पेट साफ हो जाए-

नोट-  हमेशा चीजो को ढक कर  रक्खे तथा बाजार में खुली चीजो के खाने से परहेज करे-

पुरानी आव या आंतों की सूजन(कोलाइटिस)का उपचार-



सामग्री-


बेल का गूदा-           100 ग्राम
सौंफ-                     100 ग्राम 
इसबग़ोल की भूसी- 100 ग्राम
छोटी इलायची-         10 ग्राम 

आप इन उपर लिखी चारों चीजों का कूट पीसकर दरदरा चूर्ण बना लें तथा फिर उसमें 300 ग्राम देसी खाँड़ या बूरा मिलाकर किसी काँच की शीशी में सुरक्षित रख लें-


उपयोग की विधि- 


आप लगभग दस ग्राम दवा सुबह नाश्ता के पहले ताजा पानी के साथ लें और शाम को खाना खाने के बाद दस ग्राम दवा गुनगुने जल के साथ या दूध के साथ लें (यदि आवश्यकता समझे तो दोपहर को भी दवा खाना खाने के बाद ताजा जल से दवा खा सकते है)एक सप्ताह के बाद फायदा अवश्य होगा लेकिन करीब 45 दिन दवा खाकर छोड़ दें-यह दवा पेट के मल को साफ करेगी और पुरानी आव या आंतों को सूजन (कोलाइटिस) जड़ से साफ कर देगी-

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आंव या पेचिश का उपचार कैसे करें
Upcharऔर प्रयोग-

आंव या पेचिश का उपचार कैसे करें

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आंव(Dysentery)आने का रोग किसी भी व्यक्ति को हो जाता है तो उसे घबराना नहीं चाहिए बल्कि इसका इलाज सही तरीके से करना चाहिए-मल त्याग करते समय या उससे कुछ समय पहले अंतड़ियों में दर्द, टीस या ऐंठन की शिकायत हो तो समझ लेना चाहिए कि यह पेचिश का रोग है-इस रोग में पेट में विकारों के कारण अंतड़ी के नीचे की तरफ कुछ सूजन आ जाती है और उस हालत में मल के साथ आंव(Dysentery)या खून आने लगता है-

आंव या पेचिश का उपचार कैसे करें


यदि मरोड़ के साथ खून भी आए तो इसे रक्तातिसार कहते हैं एक प्रकार का जीवाणु आंतों में चला जाता है जो पेचिश(Dysentery)की बीमारी पैदा कर देता है यह रोग पेट में विभिन्न दोषों के कुपित होने की वजह से हो जाता है-

यह रोग मक्खियों से फैलता है इसमें रोग के जीवाणु रोगी के मल में ही मौजूद रहते हैं जब कभी पेचिश(Dysentery)का रोगी खुले में मल त्याग करता है तो उस पर मक्खियां आकर बैठ जाती हैं वे उन जीवाणुओं को अपने साथ ले जाती हैं और खुली हुई खाने-पीने की चीजों पर छोड़ देती हैं फिर जो व्यक्ति उन वस्तुओं को खाता है उनके साथ वे जीवाणु उसके पेट में चले जाते हैं और इस तरह उस व्यक्ति को भी पेचिश की बीमारी हो जाती है-

आंव या पेचिश के लक्षण-


1- कच्चा और कम पचा भोजन भी पेट में कुछ समय तक पड़ा रहता है तो वह सड़कर पाचन संस्थान में घाव पैदा कर देता है इससे भी आंव(Dysentery)का रोग हो जाता है-

2- शुरू में नाभि के पास तथा अंतड़ियों में दर्द होता है और लगता है जैसे कोई चाकू से आंतों को काट रहा है इसके बाद गुदा द्वार से पतला,लेसदार और दुर्गंधयुक्त मल बाहर निकलना शुरू हो जाता है पेट हर समय तना रहता है और बार-बार पाखाना आता है तथा मल बहुत थोड़ी मात्रा में निकलता है जिसमें आंव और खून मिला होता है कभी-कभी बुखार भी आ जाता है-

3- जब आंव आने का रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो इसके कारण व्यक्ति के मल के साथ एक प्रकार का गाढ़ा तेलीय पदार्थ निकलता है आंव रोग से पीड़ित मनुष्य को भूख भी नहीं लगती है रोगी को हर वक्त आलस्य, काम में मन न लगना, मन बुझा-बुझा रहना तथा अपने आप में साहस की कमी महसूस होती है-

आंव या पेचिश(Dysentery) का उपचार-



1- दस ग्राम सूखा पुदीना और दस ग्राम अजवायन तथा एक चुटकी सेंधा नमक और दो बड़ी इलायची के दाने लेकर आप इन सबको पीसकर चूर्ण बना लें तथा सुबह-शाम भोजन के बाद एक-एक चम्मच चूर्ण मट्ठे या ताजे पानी के साथ लें-

2- पुरानी पेचिश में तीन-चार दिन तक काली गाजर का रस सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करें-

3- आम की गुठली को सुखा लें फिर उसमें से गिरी निकालकर पीसें और दो चम्मच चूर्ण दही या मट्ठे के साथ सेवन करें-

4- चार-पांच कालीमिर्च मुख में रखकर चूसें तथा थोड़ी देर बाद आधा गिलास गुनगुना पानी पी लें-

5- दो चम्मच जामुन का रस और दो चम्मच गुलाबजल आप दोनों को मिलाकर उसमें जरा-सी खांड़ या मिश्री डालकर तीन-चार दिन तक पिएं-

6- अनारदाना,सौंफ तथा धनिया-इन तीनों को 100-100 ग्राम की मात्र में कूट-पीसकर चूर्ण बना लें फिर आप इसमें थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर दिन भर में चार बार नीम की सात-आठ कोंपलें और मिश्री के साथ सेवन करें-

7- एक कप गरम पानी में दस ग्राम बबूल का गोंद डाल दें और थोड़ी देर बाद जब बबूल फूल जाए तो पानी में मथकर उसे सेवन करें ये मल को बांधता है-

8- कच्चे केले का रस एक चम्मच सुबह और एक चम्मच शाम को जीरा या कालीमिर्च के साथ सेवन करें-

9- एक चम्मच ईसबगोल की भूसी 250 ग्राम दूध में भिगो दें और जब भूसी फूल जाए तो रात को जरा-सी सोंठ और जरा-सा जीरा मिलाकर सेवन करें-

10- पुराने आंव को ठीक करने के लिए प्रतिदिन सुबह बिना कुछ खाए-पिए दो चम्मच अदरक का रस जरा-सा सेंधा नमक डालकर सेवन करें या फिर पुरानी पेचिश में आधा चम्मच सोंठ का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें-

11- बीस ग्राम फिटकिरी और तीन ग्राम अफीम पीसकर मिला लें तथा इसमें से दो रत्ती दवा सुबह-शाम पानी के साथ लें-

12- छोटी हरड़ का चूर्ण घी में तल लें फिर वह चूर्ण एक चुटकी और चार ग्राम सौंफ का चूर्ण मिलाकर दें-

13- जामुन के पेड़ की छाल 25 ग्राम की मात्र में लेकर सुखा लें फिर उसका काढ़ा बनाएं और ठंडा होने पर दो चम्मच शहद मिलाकर पी जाएं-

14- खूनी पेचिश में मट्ठे के साथ एक चुटकी जावित्री लेने से भी काफी लाभ होता है-

15- सौंफ का तेल पांच या छ: बूंदें एक चम्मच चीनी में रोज दिन में चार बार लें-

16- पेचिश रोग में नीबू की शिकंजी या दही के साथ जरा-सी मेथी का चूर्ण बहुत लाभदयक है-

17- सेब के छिलके में जरा-सी कालीमिर्च डालकर चटनी पीस लें अब इस चटनी को सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करें-

18- पेचिश होने पर आधे कप अनार के रस में चार चम्मच पपीते का रस मिलाकर पिएं-

19- केले की फली को बीच से तोड़कर उसमें एक चम्मच कच्ची खांड़ रखकर खाएं तथा एक बार में दो केले से अधिक न खाएं-

परहेज-

1- जितना हो सके आप बासी भोजन, मिर्च-मसालेदार पदार्थ, देर से पचने वाली चीजें, चना, मटर, मूंग आदि का सेवन न करें-

2- वायु बनाने वाले पदार्थ खाने से भी पेचिश में आराम नहीं मिलता है अत: बेसन, मेदा, आलू, गोभी, टमाटर, बैंगन, भिण्डी, करेला, टिण्डे आदि नहीं खाना चाहिए- 

3- रोगी को भूख लगने पर मट्ठे के साथ मूंग की दाल की खिचड़ी दें- 

4- पानी में नीबू निचोड़कर दिनभर में चार गिलास पानी पिएं-इससे पेचिश के कारण होने वाली पेट की खुश्की दूर होती रहेगी- 

5- भोजन के साथ पतला दही, छाछ, मट्ठा आदि अवश्य लें तथा सुबह-शाम खुली हवा में टहलें और स्नान करने से पहले सरसों या तिली के तेल की शरीर में मालिश अवश्य करें-रात को सोते समय दूध के साथ ईसबगोल की भूसी एक चम्मच की मात्रा में लेने से सुबह सारा आंव निकल जाता है-

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बाद में-

Upcharऔर प्रयोग-

गैस नाशक गैसहर चूर्ण आप घर में बनायें

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यदि आप चाहते है कि कोई अच्छा सा गैसहर(Gashar)चूर्ण मिल जाए तो आप परेशान क्यों हैं आइये आप अपने घर पर ये गैसहर चूर्ण बना ले तथा ये गैसहर चूर्ण आपको बाजार के बने चूर्ण से सस्ता व ताजा भी मिलेगा-

गैस नाशक गैसहर चूर्ण आप घर में बनायें

सबसे पहले आप छोटी हरड़(बाल हर्र)एक किलो लेकर इन्हें साफ करके दही की छाछ (मही) में भींगने को डाल दें आप यदि सुबह फूलने को छाछ में डालें तो दूसरे दिन सुबह छाछ मे से निकाल कर पानी से साफ करके फिर इसे छाया में कपड़े पर डाल कर सुखा लीजिये और जब सूख जाएं तब फिर पुन: छाछ में डालिये-इस छाछ में डालकर इसे सुखाने को 'मही की भावना' देना कहते हैं-इस प्रकार आप इन हर्रों को मही की 3-4-6 (छ: बार तक) भावनाएं दीजिये-अब भावना देने के बाद, सूख जाने पर इसे आप महीन-महीन पीस लीजिये और बारीक चलनी से छान लीजिये -

अब आप इस प्रकार बनाये गए एक किलो छोटी हरड़ के चूर्ण में पाव किलो(250 ग्राम)अजवाइन पीस कर मिला लीजिये और फिर इस चूर्ण में काला नमक आप अपनी रुचि अनुसार मिला लीजिये-बस आपका उत्तम गैसहर(Gashar)चूर्ण तैयार है-आप कम बनाना चाहें तो इसकी मात्रा आधी कर लें लेकिन भावना आपको चार से छ बार ही देना है-

चूर्ण सेवन विधि-


भोजन के बाद सेहत के अनुसार आप यह चूर्ण गुनगुने पानी से लें-(ठंडा पानी से भी ले सकते है)

लाभ-


इससे आपकी पाचन शक्ति भी बढ़ती है और दस्त साफ होते हैं तथा कब्ज भी नहीं होती है-

गैस का दर्द दूर करने के लिये यह अचूक और शर्तिया दवा है-
इसका नियमित सेवन भी कर सकते है कोई साइड इफेक्ट नहीं है तथा गैस की तकलीफ आपको कभी भी नहीं होगी-

यदि आपको ये तकलीफ है तो बस 5-6 मिनिट मे ही आराम होता है-

गैसहर(Gashar)चूर्ण बनाने की दूसरी विधि-


आप इन हर्रों को रेत में भूंज लीजिये भूनने पर खूब फूलती है फिर इन्हें पीस लीजिये ये जल्दी पिस जाते है और पांच ग्राम की मात्रा गुनगुने पानी से सेवन करे-

गैसहर(Gashar)चूर्ण बनाने की तीसरी विधि-


इसी  चूर्ण में 60 ग्राम सनाय(सोनामुखी)की पत्ती को हलका भुनकर चूर्ण बनाकर डालने से पुराने से पुराना बध्दकोष्ट (कब्ज) भी हफते भर में ठीक हो जाता है-सनाय की पत्ती, बिना भून का डालने से, पेट में भरोड़ आती है इसलिये इसे हल्का अवश्य ही भून लें-

पेट की गैस की बीमारी यदि पुरानी न हो तो निम्नलिखित पेट की गैस-निवारक चटनी के सेवन से लाभ प्राप्त किया जा सकता है-

गैस(Gas)निवारक चटनी-


मुनक्का (बीज निकाल कर) -30 ग्राम
अदरक- 6 ग्राम
सौंफ बड़ी- 6 ग्राम
काली मिर्च- 3 ग्राम
सेंधा नमक - 3 ग्राम (या स्वादानुसार)-(ये सभी चीजे बाजार में आसानी से उपलब्ध है)

इन पांचों वस्तुओं को थोड़े पानी में पीसकर चटनी बना लें अब इसे दोनों समय भोजन के समय रोटी या चावल के साथ आवश्यकतानुसार 1-2 चम्मच चटनी की भांति चाटें-आपको पेट की गैस और पेट खराबी में आराम मिलेगा-

नोट-


एक लौंग और एक इलायची प्रत्येक भोजन व नाश्ता के बाद लें लेते हैं तो आपको कभी भी एसिडिटी व गैस नहीं होती है-

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Upcharऔर प्रयोग-

29 अप्रैल 2017

पेट दर्द के लिए घर पे बनाये ये चूर्ण

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आज हम आपके लिए लाये  है एक पेट दर्द(Abdominal Pain)और गैस के इलाज के लिए एक ऐसा चूर्ण जिसे आप घर पर भी बना कर रख सकते है और फिर जरुरत पड़ने पर आप इसका प्रयोग करे-

पेट दर्द  के लिए घर पे बनाये ये चूर्ण

सामग्री-


हींग -                10 ग्राम
कालीमिर्च -       10 ग्राम
अजवाइन -        10 ग्राम
छोटी हरड़-         10 ग्राम
शुद्ध सज्जीखार- 10 ग्राम
सेंधा नमक-       10 ग्राम

आप इन सभी चीजो को बारीक कूट-पीस ले फिर एक महीन कपडे से छान कर फिर इसे एक कांच की  शीशी में सुरक्षित रख ले-

मात्रा व सेवन विधि-


पेट दर्द(Abdominal Pain)के लिए एक चम्मच चूर्ण पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें यदि पेट में गैस बढ़े तो भी सेवन करें-

लाभ-


यह चूर्ण वायु तथा वात के छोटे-मोटे रोगों को दूर करता है इसके सेवन से पेट की अग्नि ठीक होती है तथा अपान वायु बाहर निकल जाती है और कब्ज दूर होता है यह बच्चों के लिए भी उपयोगी है-


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Upcharऔर प्रयोग-

हैजे की गोली आप घर पर बना सकते हैं

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गर्मी का मौसम शुरू हो गया है और कभी भी किसी को हैजे(Cholera)की शिकायत हो जाती है या फिर बदहजमी की भी शिकायत हो जाती है तो आइये आप घर पे ही छुट्टी के दिन आप इन गोलियों का निर्मार्ण कर लें ये वटी आपको कभी भी अचानक है हैजे(Cholera)या विशुचिका और बदहजमी में तथा शूल,जुकाम,दस्त में आपके काम आएगी-

हैजे की गोली आप घर पर बना सकते हैं

सामग्री-


देशी कपूर - 10 ग्राम 
शुद्ध हींग- 10 ग्राम 
लहसुन छिला हुआ-10 ग्राम 
प्याज का रस -आवश्यकता अनुसार 

हैजे(Cholera)की वटी बनाने की विधि-


कपूर+शुद्ध हींग+लहसुन छिला हुआ इन सबको आप प्याज के रस में तीन घन्टे खरल(घोटे)करे फिर आप इसके बाद इसकी आप 250 मिलीग्राम वजन की गोलियां(वटी) बना ले और इसे छाँव में सुखा के आप किसी कांच की शीशी में रख ले -

उपयोग की मात्रा-


एक-एक गोली आधा-आधा घन्टे पर प्याज के रस के साथ देते रहे या एक ग्राम शक्कर के साथ निगलवा सकते है या फिर हैजा की स्थिति में हर आधे-आधे घंटे पर एक दो गोली बर्फ जैसे ठन्डे जल से देते रहे जब रोग का प्रकोप कम हो जाए तो गोली देने का अंतराल बढ़ा देना चाहिए-

लाभ-


हैजा(डायरिया-विशुचिका)में ये गुटिका अच्छा लाभ करती है तथा अपचन(बदहजमी),शूल,जुकाम,और दस्तों(अतिसार) को दूर कर अग्नि प्रदीप्त करती है इस वटी के सेवन से रोग के बाद होने वाली निर्बलता भी नहीं आती है और  कमजोर ह्रदय वालो को भी इसका सेवन निर्भय होकर कराया जा सकता है-


Upcharऔर प्रयोग-

28 अप्रैल 2017

थायराइड होने पर क्या लक्षण होते हैं

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थायरायड ग्रंथि(Thyroid Gland)गर्दन में श्वास नली के ऊपर एवं स्वर यन्त्र के दोनों ओर दो भागों में बनी होती है थायराइड मानव शरीर मे पाए जाने वाले एंडोक्राइन ग्लैंड(Endocrine gland)में से एक है यह थाइराक्सिन हार्मोन बनाती है जिससे शरीर के ऊर्जा क्षय, प्रोटीन उत्पादन एवं अन्य हार्मोन के प्रति होने वाली संवेदनशीलता नियंत्रित होती है यह ग्रंथि शरीर के मेटाबॉल्जिम को नियंत्रण करती है यानि जो भोजन हम खाते हैं यह उसे उर्जा में बदलने का काम करती है इसके अलावा यह हृदय, मांसपेशियों, हड्डियों व कोलेस्ट्रोल को भी प्रभावित करती है-

थायराइड होने पर क्या लक्षण होते हैं

लक्षण(Symptoms)-


1- शुरुआती दौर में थायराइड(Thyroid)के किसी भी लक्षण का पता आसानी से नहीं चल पाता है क्योंकि गर्दन में छोटी सी गांठ सामान्य ही मान ली जाती है और जब तक इसे गंभीरता से लिया जाता है तब तक यह भयानक रूप ले लेता है-

2- यह सिर्फ एक बढ़ा हुआ थायराइड ग्रंथि (Thyroid gland) है जिसमें थायराइड हार्मोन बनाने की क्षमता कम हो जाती है थायराइड की समस्या पिट्यूटरी ग्रंथि(Pituitary gland)के कारण भी होती है क्यों कि यह थायरायड ग्रंथि हार्मोन को उत्पादन करने के संकेत नहीं दे पाती है-

3- भोजन में आयोडीन(Iodine)की कमी या ज्यादा इस्तेमाल भी थायराइड(Thyroid)की समस्या पैदा करता है तथा कई बार कुछ दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव भी थायराइड की वजह होते हैं-इसोफ्लावोन गहन सोया प्रोटीन, कैप्सूल, और पाउडर के रूप में सोया उत्पादों का जरूरत से ज्यादा प्रयोग भी थायराइड होने के कारण हो सकते है-

4- जब तनाव(Tension)का स्तर बढ़ता है तो इसका सबसे ज्यादा असर हमारी थायरायड ग्रंथि पर पड़ता है यह ग्रंथि हार्मोन के स्राव को बढ़ा देती है-

5- यदि आप के परिवार में किसी को थायराइड(Thyroid)की समस्या है तो आपको थायराइड होने की संभावना ज्यादा रहती है यह थायराइड का सबसे अहम कारण है-ग्रेव्स रोग(Graves' disease)थायराइड का सबसे बड़ा कारण है इसमें थायरायड ग्रंथि से थायरायड हार्मोन का स्राव बहुत अधिक बढ़ जाता है ग्रेव्स रोग ज्यादातर 20और 40 की उम्र के बीच होता है-

6- थायराइड(Thyroid)का अगला कारण है गर्भावस्था(Pregnancy)जिसमें प्रसवोत्तर अवधि भी शामिल है गर्भावस्था एक स्त्री के जीवन में ऐसा समय होता है जब उसके पूरे शरीर में बड़े पैमाने पर परिवर्तन होता है और वह तनाव ग्रस्त रहती है तथा रजोनिवृत्ति भी थायराइड का कारण है क्योंकि रजोनिवृत्ति(Menopause) के समय एक महिला में कई प्रकार के हार्मोनल परिवर्तन होते है जो कई बार थायराइड की वजह बनती है-

7- थाइराइड होने पर कब्ज(Constipation) की समस्या शुरू हो जाती है खाना पचाने में दिक्कत होती है साथ ही खाना आसानी से गले से नीचे नहीं उतरता है तो शरीर के वजन पर भी असर पड़ता है तथा थाइराइड होने पर शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम़जोर हो जाती है इम्यून सिस्टम(Immune System) कमजोर होने के चलते उसे कई बीमारियां लगी रहती हैं-

8- थाइराइड की समस्या से ग्रस्त आदमी को जल्द थकान होने लगती है उसका शरीर सुस्त रहता है वह आलसी हो जाता है और शरीर की ऊर्जा समाप्त होने लगती है-

9- थाइराइड से ग्रस्त व्यक्ति की त्वचा सूखने लगती है त्वचा में रूखापन(Acrimony) आ जाता है त्वचा के ऊपरी हिस्से के सेल्स की क्षति होने लगती है जिसकी वजह से त्वचा रूखी-रूखी हो जाती है-

10- वैसे हर व्यक्ति का शरीर का तापमान सामान्य यानी 98.4 डिग्री फॉरनहाइट(37 डिग्री सेल्सियस)होता है लेकिन थायरायड ग्रसित रोगी का शरीर और हाथ-पैर ठंडे रहते हैं-

11- थाइराइड(thyroid) की समस्या होने पर आदमी हमेशा डिप्रेशन(depression)में रहने लगता है तथा उसका किसी भी काम में मन नहीं लगता है दिमाग की सोचने और समझने की शक्ति कमजोर हो जाती है और उसकी याददास्त  भी कमजोर हो जाती है-

12- थाइराइड होने पर आदमी के बाल झड़ने लगते हैं तथा गंजापन(alopecia) होने लगता है साथ ही साथ उसके भौहों के बाल भी झड़ने लगते है-

13- थाइराइड होने पर आदमी को जुकाम होने लगता है यह नार्मल जुकाम से अलग होता है और ठीक नहीं होता है तथा मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और साथ ही साथ कमजोरी का होना भी थायराइड की समस्या के लक्षण हो सकते है-

14- थाइराइड की समस्या होने पर शारीरिक व मानसिक विकास धीमा हो जाता है अगर आपको इनमे से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरन्त अपने डाक्टर से संपर्क करें आपको थाइराइड समस्या हो सकती है-

Read More-  थायराइड की जांच आप कब कराये

Upcharऔर प्रयोग-

थायराइड ग्रंथि की समस्या और आयुर्वेदिक उपचार

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थायराइड ग्रंथि की कार्यकुशलता में आयी गड़बड़ी को जान बूझकर अनदेखा कर देने पर हायपोथारायडिज्म की स्थिति में रक्त में कोलेस्टरोल की मात्रा बढ़ जाती है इसके फलस्वरूप व्यक्ति के स्ट्रोक या हार्ट-एटैक से पीड़ित होने की संभावना बढ़ जाती है और कई बार हायपो-थारायडिज्म की स्थिति में रोगी में बेहोशी छा सकती है तथा शरीर का तापक्रम खतरनाक  स्तर तक गिर जाता है-

थायराइड ग्रंथि की समस्या और आयुर्वेदिक उपचार

थायराइड(Thyroid)ग्रंथि की गड़बड़ी से क्या उपद्रव-


1- योग के जरिए भी थायराइड से बचा जा सकता है खासकर कपालभाती करने से थायराइड की समस्या से निजात पाया जा सकता है-

2- ज्यादातर मामलों में थायराइड(Thyroid)या इसके संक्रमति भाग को निकालने की सर्जरी की जाती है और बाद में बची हुई कोशिकाओं को नष्ट करने या दोबारा इस समस्या के होने पर रेडियोएक्टिव आयोडीन उपचार किया जाता है-

3- थायराइड(Thyroid)को सर्जरी के माध्यम से हटाते हैं और उसकी जगह मरीज को हमेशा थायराइड रिप्लेसमेंट हार्मोन लेना पड़ता है कई बार केवल उन गांठों को भी हटाया जाता है जिनमें कैंसर मौजूद है जबकि दोबारा होने पर रेडियोएक्टिव आयोडीन उपचार के तहत आयोडीन की मात्रा से उपचार किया जाता है-

4- सर्जरी के बाद रेडियोएक्टिव आयोडीन की खुराक मरीज के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यह कैंसर की सूक्ष्म कोशिकाओं को मार देती है इसके अलावा ल्यूटेटियम ऑक्ट्रियोटाइड उपचार से भी इसका इलाज किया जाता है-

5- थायरॉइड ग्रंथि से कितने कम या ज्यादा मात्रा में हार्मोन्स निकल रहे हैं,यह खून की जांच से पता लगाया जाता है-खून की जांच तीन तरह से की जाती है टी-3, टी-4 और टीएसएच से-इसमें हार्मोन्स के स्तर का पता लगाया जाता है तथा मरीज स्थिति देखकर डॉक्टर तय करते हैं कि उसको कितनी मात्रा में दवा की खुराक दी जाए-

6- हायपरथायरॉइड के मरीजों को Thyroid-थायरॉइड हार्मोन्स को ब्लॉक करने के लिए अलग किस्म की दवा दी जाती है- हाइपोथायरॉयडिज्म का इलाज करने के लिए आरंभ में ऐल-थायरॉक्सीन सोडियम का इस्तेमाल किया जाता है जो थायरॉइड हार्मोन्स के स्त्राव को नियंत्रित करता है तकरीबन 90 प्रतिशत मामलों में दवा ताउम्र खानी पड़ती है और पहली ही स्टेज पर इस बीमारी का इलाज करा लिया जाए तो रोगी की दिनचर्या आसान हो जाती है-

7- थायराइड की समस्या से पीड़ित लोगों के लिए भी कचनार का फूल बहुत ही गुणकारी है इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति लगातार दो महीने तक कचनार के फूलों की सब्जी अथवा पकौड़ी बनाकर खाएं तो उन्हें आराम मिलता है-

8- खाने मे बैंगन, सिंघाडा, जामुन आदि बैंगनी रंग की वस्तुओं में आयोडिन होता है-पानी की कठोरता कम करने हेतु अजवाईन का नित्य प्रयोग करने व बोर की जड़ को दूध के साथ एवं विदारिकन्द की जड को दूध के साथ उबाल कर पीने एवं आयुर्वेद के सिद्धान्तों दिनचर्या, ऋतुचर्या का पालन कर एवं मानसिक तनाव से दूर रहकर थायराइड रोग से बचा जा सकता है-

हाइपोथायरायडिज्म(Hypothyroidism)आयुर्वेदिक इलाज-


1- हाइपोथायरायडिज्म(Hypothyroidism)से पीड़ित लोग थकान और हार्मोनल असंतुलन  से पीड़ित होते हैं अगर वे खुद को पूरी तरह से ठीक करना चाहते हैं तो उनको अपने आहार पे और उनके दवाईंयों पे ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होती हैं-

2- हाइपो-थायरायडिज्म से पीड़ित लोगों को दूध का उपभोग करना चाहिए-

3- हाइपो-थायरायडिज्म के उपचार में सहायता के लिए इन लोगों को कुछ विशिष्ट सब्जियां जैसे ककडी आदि बडी मात्रा में खाने को भी कहा जाता हैं-

4- मूंग की दाल और चने की दाल की तरह दलहन हाइपो-थायरायडिज्म(Hypothyroidism)के उपचार में मदद करते हैं-

5- चावल और जौ खाए-

6- योग थायरॉयड ग्रंथि को स्थिर करने में मदद करता है-सर्वांगासन और सुर्यनमस्कार जैसे विभिन्न आसन थायरॉयड ग्रंथि को पर्याप्त थायराइड हार्मोन का उत्पान करने में मदद करते हैं-

7- थायराइड हार्मोन का अधिक उत्पादन करने में प्राणायाम थायरॉयड ग्रंथि को मदद करता है-

8- गोक्षुरा, ब्राम्ही,जटामासी,पुनरवना जैसी कई जड़ी बूटियाँ हाइपो-थायरायडिज्म(Hypothyroidism)के लिए आयुर्वेदिक इलाज में उपयोग की जाती हैं-

9- आयोडीन की कमी के कारण हाइपो-थायरायडिज्म होता हैं-आयोडीन की उच्च मात्रा होनें वाले खाद्य पदार्थ खाने सें इस हालत में सुधार होने में मदद मिलेगी-

10- हायपो-थायरायडिज्म के लिए आयुर्वेदिक इलाज में महायोगराज गुग्गुलु और अश्वगंधा के साथ  भी इलाज किया जाता हैं-

11- उचित उपचार  और एक उचित आहार के साथ नियमित रूप से व्यायाम की मदद के साथ हाइपो थायरायडिज्म से पीड़ित लोग जल्दी ठीक हो सकते हैं-

पीठ पे कूबड़ निकलना-


माँसपेशियों में कमजोरी आने लगती है हड्डियाँ सिकुड़कर व्यक्ति की ऊँचाई कम होकर कूबड़ निकलता है कम आगे की ओर झुक जाती है इन सभी समस्याओं से बचने के लिए नियमित रक्त परीक्षण करने के साथ रोगी को सोते समय शवासन का प्रयोग करते हुए तकिए का उपयोग नहीं करना चाहिए उसी प्रकार सोते-सोते टीवी देखने या किताब पढ़ने से बचना चाहिए भोजन में हरी सब्जियों का भरपूर प्रयोग करें और आयो‍डीन युक्त नमक का प्रयोग भोजन में करें-

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Upcharऔर प्रयोग-

थायराइड मरीज का डाईट चार्ट कैसा होना चाहियें

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लाइफ स्‍टाइल और खान-पान में अनियमितता बरतने के कारण ही लोगों को थायराइड(Thyroid)की समस्‍या होती है यदि अगर शुरूआत में ही खानपान का ध्‍यान रखा जाए तो थायराइड की समस्‍या होने की संभावना बहुत ही कम होती है थायराइड मरीज Diet Chart कैसा हो हम आपको उसकी जानकारी देते हैं-

थायराइड मरीज का डाईट चार्ट कैसा होना चाहियें

संक्षिप्त परिचय-


ये थायराइड(Thyroid)बहुत ही आवश्‍यक ग्रंथि है यह ग्रंथि गले के अगले-निचले हिस्‍से में होती है थायराइड(Thyroid)को साइलेंट किलर भी कहा जाता है क्‍योंकि इसका लक्षण एक साथ नही दिखता है अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए तो आदमी की मौत हो सकती है यह ग्रंथि होती तो बहुत छोटी है लेकिन हमारे शरीर को स्‍वस्‍थ्‍य रखने में इसका बहुत योगदान होता है-

Thyroid-थाइराइड एक प्रकार की इंडोक्राइन ग्रंथि(Indokrain gland) है जो कुछ हार्मोन के स्राव के लिए जिम्‍मेदार होती है यदि थाइराइड ग्रंथि अच्‍छे से काम करना बंद कर दे तो शरीर में कई समस्‍यायें शुरू हो जाती हैं शरीर से हार्मोन का स्राव प्रभावित हो जाता है लेकिन यदि Thyroid-थायराइड ग्रंथि कम या अधिक सक्रिय हो तब भी शरीर को प्रभावित करती है-

थायराइड(Thyroid)मरीज डाईट चार्ट-


1- आप अपनी डाइट चार्ट में ऐसे खाद्य-पदार्थों को शामिल कीजिए जिसमें आयोडीन(Iodine)की भरपूर मात्रा हो क्‍योंकि आयोडीन की मात्रा थायराइड फंक्‍शन(Thyroid Function)को प्रभावित करती है-

2- समुद्री जीवों में सबसे ज्‍यादा आयोडीन(Iodine)पाया जाता है समुद्री शैवाल, समुद्र की सब्जियों और मछलियों में आयोडीन की भरपूर मात्रा होती है-

3- कॉपर और आयरन(Iron) युक्‍त आहार के सेवन करने से भी थाडायराइड फंक्‍शन(Thyroid Function) में बढ़ोतरी होती है-काजू, बादाम और सूरजमुखी के बीज में कॉपर की मात्रा होती है और हरी और पत्‍तेदार सब्जियों में आयरन की भरपूर मात्रा होती है-

4- पनीर और हरी मिर्च तथा टमाटर थायराइड गंथि(Thyroid Gland)के लिए फायदेमंद हैं-

5- थायराइड मरीज को विटामिन और मिनरल्‍स युक्‍त आहार खाने से थायराइड फंक्‍शन में वृद्धि होती है और प्‍याज, लहसुन, मशरूम में ज्‍यादा मात्रा में विटामिन पाया जाता है थायराइड मरीज(Thyroid Patients)को इसका सेवन अवश्य ही करना चाहिए-

6- कम वसायुक्‍त आइसक्रीम और दही का भी सेवन थायराइड के मरीजों के लिए फायदेमंद है गाय का दूध भी थायराइड के मरीजों को पीना चाहिए-

7- थायराइड मरीज के लिए नारियल का तेल(coconut oil) भी थायराइड फंक्‍शन में वृद्धि करता है नारियल तेल का प्रयोग सब्‍जी बनाते वक्‍त भी किया जा सकता है-

थायराइड(Thyroid)के रोगी क्या न खायें-


1- सोया और उससे बने खाद्य-पदार्थों का सेवन बिलकुल मत कीजिए- जंक और फास्‍ट फूड(Junk and fast foods) भी थायराइड ग्रंथि को प्रभावित करते हैं- इसलिए फास्‍ट फूड को अपनी आदत मत बनाइए-

2- ब्राक्‍कोली, गोभी जैसे खाद्य-पदार्थ थायराइड फंक्‍शन को कमजोर करते हैं-

3- थायराइड के मरीजों को डाइट चार्ट का पालन करना चाहिए साथ ही नियमित रूप से योगा और एक्‍सरसाइज भी जरूरी है नियमित व्‍यायाम करने से भी थायराइड फंक्‍शन में वृद्धि होती है थायराइड की समस्‍या बढ़ रही हो तो चिकित्‍सक से संपर्क अवश्‍य कीजिए-

4- जहाँ तक हो सके तो थायराइड में होम्योपैथी की दवा का सहारा लेना चाहिए- इससे जहां कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है वहीं इसके प्रभाव के बाद मरीज को जिंदगी भर दवा की जरूरत नहीं पड़ती-

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Upcharऔर प्रयोग-

थायराइड की जांच आप कब कराये

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प्रत्येक व्यक्ति को पैंतीस वर्ष के बाद प्रत्येक पांच वर्षों में  एक बार स्वयं के थायराइड ग्रंथि(Thyroid gland)की कार्यकुशलता की जांच अवश्य ही करवा लेनी चाहिए खासकर उन लोगों में जिनमें इस समस्या के होने की संभावना अधिक हो उन्हें अक्सर जांच करवा लेनी चाहिए-

थायराइड की जांच आप कब कराये

हायपो-थायराईडिज्म(Haypo-Thayraidijm) महिलाओं में 60  की उम्र को पार कर जाने पर अक्सर देखा जाता है जबकि हायपर-थायराईडिज्म 60 से ऊपर की महिलाओं और पुरुषों दोनों में  ही पाया जा सकता है- हाँ ,दोनों ही स्थितियों में रोगी  का  पारिवारिक इतिहास अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू होता है-

थायराइड(Thyroid)नेक-टेस्ट क्या है-


आईने में अपने गर्दन के सामने वाले हिस्से पर अवश्य गौर करें और यदि आपको कुछ अलग सा महसूस हो रहा हो तो चिकित्सक से अवश्य ही परामर्श लें-अपनी गर्दन को पीछे की और झुकायें और थोड़ा पानी निगलें और कॉलर की हड्डी के ऊपर एडम्स-एप्पल से नीचे कोई उभार नजर आये तो इस प्रक्रिया को एक दो बार दुहरायें और तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें-

थायराइड(Thyroid)की समस्या को कैसे जाने-


यदि आपके चिकित्सक को आपके थायराइड(Thyroid)ग्रंथि से सम्बंधित किसी समस्या से पीड़ित होने का शक उत्पन्न होता है तो आपके रक्त की जांच ही एकमात्र   सरल उपाय है -

टी .एस .एच  (थायराइड-स्टिमुलेटिंग-हारमोन ) के स्तर की जांच इस में महत्वपूर्ण मानी जाती है - टी .एस .एच. - एक मास्टर हार्मोन  है जो थायराईड ग्रंथि(Thyroid gland) पर अपना नियंत्रण बनाए रखता है  यदि टी. एस .एच .का स्तर अधिक है तो इसका मतलब है आपकी थायराइड ग्रंथि कम काम (हायपो-थायराडिज्म ) कर रही है   और इसके विपरीत  टी. एस .एच  का स्तर कम होना थायराइड ग्रंथि के हायपर-एक्टिव होने (हायपर-थायराईडिज्म) की स्थिति की और इंगित करता  है चिकित्सक इसके अलावा आपके रक्त में थायराइड हारमोन टी .थ्री .एवं टी .फोर . की जांच भी करा सकते है-

Hashimoto-Disease के कारण उत्पन्न Hypothyroidism-


हायपो-थारायडिज्म का एक प्रमुख कारण हाशिमोटो-डिजीज होता है यह एक ऑटो-इम्यून-डीजीज है जिसमें शरीर खुद ही थायराइड ग्रंथि को नष्ट करने लग जाता है जिस कारण  थायराइड(Thyroid)ग्रंथि “थायराक्सिन” का निर्माण नहीं कर पाती है-इस रोग का पारिवारिक इतिहास भी मिलता है -

Hypothyroidism के अन्य कारण-


पीयूष ग्रंथि (PITUITARY GLAND) टी. एस .एच (थायराइड-स्टिमुलेटिंग-हारमोन) को उत्पन्न करती है जो थायराइड की कार्यकुशलता के लिए जिम्मेदार होता है अतः पीयूष ग्रंथि (PITUITARY GLAND)के पर्याप्त मात्रा में  टी. एस .एच  उत्पन्न न कर पाने के कारण भी हायपो-थायराईडिज्म उत्पन्न हो सकता है इसके अलावा Thyroid-थायराइड ग्रंथि पर प्रतिकूल असर डालने वाली दवाएं भी इसका कारण हो सकती हैं -

Graves Disease के कारण हायपर-थायराईडिज्म-


हायपर-थायराईडिज्म का एक प्रमुख कारण ग्रेव्स डीजीज होता है यह भी एक ऑटो-इम्यून डीजीज है जो थायराइड ग्रंथि पर हमला करता है  इससे थायराइड ग्रंथि से “थायराक्सिन” हार्मोन का निर्माण बढ़ जाता है और हायपर-थायराईडिज्म की स्थिति पैदा हो जाती है जिसकी पहचान व्यक्ति की आँखों को देखकर की जा सकती है जो नेत्रगोलक से बाहर की ओर निकली सी प्रतीत होती हैं-

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Upcharऔर प्रयोग-

थायरायड ग्रंथियों का असंतुलन होना

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आधुनिक जीवन में व्यक्ति अनेक चिंताओं से ग्रसित है जैसे परिवार की चिंताएँ तथा आपसी स्त्री-पुरुषों के संबंध या आत्मसम्मान को बनाए रखना कि लोग क्या कहेंगे आदि अनेक चिंताओं के विषय हैं और इन्ही तनावग्रस्त जीवन शैली से थायराइड(Thyroid)का रोग बढ़ रहा है आज हम इसी गहन विषय को लेकर थायरायड ग्रंथियों का असंतुलन(Imbalance of thyroid glands)पोस्ट आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे है-

थायरायड ग्रंथियों का असंतुलन होना

व्यक्तिगत जीवन की चिंताएँ जैसे बच्चों का भविष्य-महँगाई में जीवन जीना- आतंक वाद तथा आपसी परिवार में संबंध आदि अनेक बातें व्यक्ति को चिंताओं से घेरे हुए हैं किशोरों की भी चिंताएँ हैं जैसे उनको माताओं से डर है कि कभी डायरियाँ, कॉपियाँ, एस एम एस न पढ़ लें तथा किशोरियों को वजन बढ़ने की चिंताएँ- किशोर मित्र(Boyfriend)बनाए रखने की चिंताएँ, सौंदर्य(Beauty)निखारने के लिए साधनों की प्राप्ति की चिंताएँ आदि चिंताएँ आत्मिक शक्ति को कम करती हैं ब़ड़ी आयु के लोग आने वाले बुढ़ापे से चिंतित हैं कई लोग स्वास्थ्य और भविष्य के प्रति चिंतित हैं ये सब लोग किसी न किसी रूप से मानसिक स्तर पर चिंतित हैं तो कुछ इनके विपरीत मिला जुला वर्ग है- जो कि आलस्य प्रेमी है-

अधिकतर ऊँचे तकिए लगाकर सोने या टी वी देखने- किताब पढ़ने से भी पीनियल(Pineal)और पिट्यूटरी ग्रंथियों(Pituitary glands) के कार्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है जो Thyroid Glands-थायराइड ग्रन्थि पर परोक्ष रूप से दिखाई देता है इन स्थितियों में हाइपो थायराइड रोग होने की आशंका है-

यदि आपके वजन में अचानक घटने या बढ़ने जैसा परिवर्तन सामने आ रहा हो तो यह थायराइड ग्रंथि(Thyroid Gland)से समबन्धित समस्या की ओर आपका ध्यान दिला सकता है तथा वजन का अचानक बढ़ जाना थायरोक्सिन हार्मोन(Thyroxine hormone) की कमी(हायपो-थायराईडिज्म)के कारण उत्पन्न हो सकता है इसके विपरीत यदि "थायरोक्सिन" की आवश्यक मात्रा से अधिक  उत्पत्ति होने से(हायपर-थायराईडिज्म )की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिसमें अचानक वजन कम होने लग जाता है  इन दोनों ही स्थितियों में  से हायपो-थायराईडिज्म एक आम समस्या के रूप में  सामने आता है-

थायरॉयड ग्रंथि(Thyroid Glands)से असंतुलन से होने वाले रोग-

अल्प स्राव (Hypothyrodism)-


Low secretion से शारीरिक व् मानसिक वृद्धि मंद हो जाती है -बच्चों में इसकी कमी से CRETINISM नामक रोग हो जाता है-12 से 14 वर्ष के बच्चे की शारीरिक वृद्धि 4 से 6 वर्ष के बच्चे जितनी ही रह जाती है-

ह्रदय स्पंदन एवं श्वास की गति मंद हो जाती है हड्डियों की वृद्धि रुक जाती है और वे झुकने लगती हैं तथा मेटाबालिज्म की क्रिया मंद हो जाती हैं  शरीर का वजन बढ़ने लगता है एवं शरीर में सुजन भी आ जाती है-

सोचने व बोलने की क्रिया मंद पड़ जाती है त्वचा रुखी हो जाती है तथा त्वचा के नीचे अधिक मात्रा में वसा एकत्र हो जाने के कारण आँख की पलकों में सूजन आ जाती है-शरीर का ताप कम हो जाता है और बाल झड़ने लगते हैं तथा ” गंजापन ” की स्थिति आ जाती है-

थायरायड ग्रंथि(Thyroid gland)का अतिस्राव-


शरीर का ताप सामान्य से अधिक हो जाता है  ह्रदय की धड़कन व् श्वास की गति बढ़ जाती है तथा अनिद्रा, उत्तेजना तथा घबराहट जैसे लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं शरीर का वजन कम होने लगता है-

कई लोगों की हाँथ-पैर की उँगलियों में कम्पन उत्पन्न हो जाता है  गर्मी सहन करने की क्षमता कम हो जाती है मधुमेह रोग(Diabetes)होने की प्रबल सम्भावना बन जाती है-घेंघा रोग(Goitre)उत्पन्न हो जाता है तथा शरीर में आयोडीन की कमी हो जाती है-

पैराथायरायड ग्रंथियों(Parathyroid glands)का असंतुलन-


पैराथायरायड ग्रंथियां पैराथार्मोन हार्मोन(Paratharmon hormones)स्रवित करती हैं यह हार्मोन रक्त और हड्डियों में कैल्शियम व् फास्फोरस की मात्रा को संतुलित रखता है इस हार्मोन की कमी से हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं तथा जोड़ों के रोग भी उत्पन्न हो जाते हैं-

थायराइड होने पर क्या लक्षण होते हैं

पैराथार्मोन(Paratharmon)की अधिकता से रक्त से हड्डियों का कैल्शियम तेजी से मिलने लगता है फलस्वरूप हड्डियाँ अपना आकार खोने लगती हैं तथा रक्त में अधिक कैल्शियम(calcium)पहुँचने से गुर्दे की पथरी भी होनी प्रारंभ हो जाती है-

नोट-

थायरायड के कई टेस्ट हैं जैसे - T -3 , T -4 , FTI , तथा TSH -इनके द्वारा थायरायड ग्रंथि की स्थिति का पता चल जाता है लेकिन कई बार थायरायड ग्रंथि में कोई विकार नहीं होता परन्तु पियुष ग्रंथि के ठीक प्रकार से कार्य न करने के कारण थायरायड ग्रंथि को उत्तेजित करने वाले हार्मोन -TSH (Thyroid Stimulating hormone) ठीक प्रकार नहीं बनते और थायरायड से होने वाले रोग लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं-

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Upcharऔर प्रयोग-

27 अप्रैल 2017

योग द्वारा थायराइड चिकित्सा कैसे करें

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थायराइड(Thyroid)की योग चिकित्सा के लिए आप सबसे पहले किसी जानकार योगाचार्य से सम्पर्क करे और कुछ दिन उनके सानिध्य में रह कर सभी प्रणायाम को सही तरीके से सीख ले फिर आप इसे स्वयं भी कर सकते है यदि आप इन बताये गए प्रणायाम का विधिवत प्रयोग करते है तो यकीन जानिये कि थायरायड(Thyroid)से आपको अवश्य मुक्ति मिल जायेगी ये सभी प्राणायाम प्रातः नित्यकर्म से निवृत्त होकर खाली पेट ही करें-

योग द्वारा थायराइड चिकित्सा कैसे करें

उज्जायी प्राणायाम(Uzzayi Pranayama)-


सबसे पहले आप पद्मासन या सुखासन में बैठकर आँखें बंद कर लें और अपनी जिह्वा को तालू से सटा दें अब कंठ से श्वास को इस प्रकार खींचे कि गले से ध्वनि व् कम्पन उत्पन्न होने लगे-इस प्राणायाम को दस से बढाकर बीस बार तक प्रति-दिन करें-

नाड़ीशोधन प्राणायाम(Nadhishodn Pranayama)-


कमर-गर्दन सीधी रखकर एक नाक से धीरे-धीरे लंबी गहरी श्वास लेकर दूसरे स्वर से निकालें फिर उसी स्वर से श्वास लेकर दूसरी नाक से छोड़ें आप 10 बार यह प्रक्रिया करें-

ध्यानयोग(Yoga meditation)-


इसमें आप आँखें बंद कर मन को सामान्य श्वास-प्रश्वास पर ध्यान करते हुए मन में श्वास भीतर आने पर 'सो' और श्वास बाहर निकालते समय 'हम' का विचार 5 से 10 मिनट करें-

ब्रह्ममुद्रा(Brhmmudra)-


वज्रासन में या कमर सीधी रखकर बैठें और गर्दन को 10 बार ऊपर-नीचे चलाएँ- दाएँ-बाएँ 10 बार चलाएँ और 10 बार सीधे-उल्टे घुमाएँ-

मांजरासन(Manjrasn)-


चौपाये की तरह होकर गर्दन-कमर ऊपर-नीचे 10 बार चलाना चाहिए-

उष्ट्रासन(Ustrasana)-


घुटनों पर खड़े होकर पीछे झुकते हुए एड़ियों को दोनों हाथों से पकड़कर गर्दन पीछे झुकाएँ और पेट को आगे की तरफ उठाएँ इस तरह 10-15 श्वास-प्रश्वास करें-

शशकासन(Shashcasn)-


वज्रासन में बैठकर सामने झुककर 10-15 बार श्वास -प्रश्वास करें-

मत्स्यासन(Mtsyasn)-


वज्रासन या पद्मासन में बैठकर कोहनियों की मदद से पीछे झुककर गर्दन लटकाते हुए सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन से स्पर्श करें और 10-15 श्वास-प्रश्वास करें-

सर्वांगासन(Srwangasn)-


पीठ के बल लेटकर हाथों की मदद से पैर उठाते हुए शरीर को काँधों पर रोकें इस तरह 10-15 श्वास-प्रश्वास करें-

भुजंगासन(Bhujangasan)-


पीठ के बल लेटकर हथेलियाँ कंधों के नीचे जमाकर नाभि तक उठाकर 10- 15 श्वास-प्रश्वास करें-

धनुरासन(Dhanurasana)-


पेट के बल लेटकर दोनों टखनों को पकड़कर गर्दन, सिर, छाती और घुटनों को ऊपर उठाकर 10-15 श्वास-प्रश्वास करें-

शवासन(Shavasana)-


पीठ के बल लेटकर, शरीर ढीला छोड़कर 10-15 श्वास-प्रश्वास लंबी-गहरी श्वास लेकर छोड़ें तथा 30 साधारण श्वास करें और आँखें बंद रखें-


नोट- किसी योग्य योग शिक्षक से सभी आसन की जानकारी ले के ही करे-

थायरायड की एक्युप्रेशर(Accupressure)चिकित्सा-


एक्युप्रेशर चिकित्सा के अनुसार थायरायड व् पैराथायरायड के प्रतिबिम्ब केंद्र दोनों हांथो एवं पैरों के अंगूठे के बिलकुल नीचे व् अंगूठे की जड़ के नीचे ऊँचे उठे हुए भाग में स्थित हैं-

थायरायड के अल्पस्राव की अवस्था में इन केन्द्रों पर घडी की सुई की दिशा में अर्थात बाएं से दायें प्रेशर दें तथा अतिस्राव की स्थिति में प्रेशर दायें से बाएं(घडी की सुई की उलटी दिशा में)देना चाहिए-इसके साथ ही पियुष ग्रंथि के भी प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर भी प्रेशर देना चाहिए-

विशेष-


प्रत्येक केंद्र पर एक से तीन मिनट तक प्रतिदिन दो बार प्रेशर दें-पियुष ग्रंथि के केंद्र पर पम्पिंग मैथेड(पम्प की तरह दो-तीन सेकेण्ड के लिए दबाएँ फिर एक दो सेकेण्ड के लिए ढीला छोड़ दें)से प्रेशर देना चाहिए-

आप किसी एक्युप्रेशर चिकित्सक से संपर्क करके आप उन केन्द्रों को एक बार समझ सकते है और फिर स्वयं भी कर सकते है-

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Upcharऔर प्रयोग-

26 अप्रैल 2017

थायरायड की प्राकृतिक चिकित्सा कैसे करें

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आज थायरायड(Thyroid)की प्राकृतिक चिकित्सा के लिए हम आज आपको आहार-चिकित्सा ठंडा-गर्म सेक और स्नान तथा गले पर मिट्टी द्वारा किए गए उपचार से अवगत करायेगें इस पोस्ट को समझ कर आप ये घरेलू उपचार स्वयं भी कर सकते है थायरायड(Thyroid)चिकित्सा के दौरान आप किस-किस चीज का परहेज करे ये भी बताएगें-

थायरायड की प्राकृतिक चिकित्सा कैसे करें

आहार चिकित्सा(Diet therapy)-


थायरायड रोगी सादा सुपाच्य भोजन,मट्ठा,दही,नारियल का पानी,मौसमी फल, ताज़ी  हरी साग-सब्जियां, अंकुरित गेंहूँ, चोकर सहित आंटे की रोटी को अपने भोजन में अवस्य ही शामिल करें-

क्या करें परहेज-


मिर्च-मसाला,तेल,अधिक नमक, चीनी, खटाई, चावल, मैदा, चाय, काफी, नशीली वस्तुओं, तली-भुनी चीजों, रबड़ी,मलाई, मांस, अंडा जैसे खाद्यों से परहेज रखें-अगर आप सफ़ेद नमक (समुन्द्री नमक) खाते है तो उसे तुरन्त बंद कर दे और सैंधा नमक ही खाने में प्रयोग करे- सिर्फ़ और सिर्फ सैंधा नमक ही खाए सब जगह-

गले की गर्म-ठंडी(Warm-cold)सेंक के लिए-


एक गर्म पानी की रबड़ की थैली, गर्म पानी, एक छोटा तौलिया, एक भगौने में ठण्डा पानी आदि व्यवस्था करें-

कैसे करें-

सर्वप्रथम रबड़ की थैली में गर्म पानी भर लें -ठण्डे पानी के भगौने में छोटा तौलिया डाल लें-गर्म सेंक बोतल से एवं ठण्डी सेंक तौलिया को ठण्डे पानी में भिगोकर-निचोड़कर निम्न क्रम से गले के ऊपर गर्म-ठण्डी सेंक करें -

3 मिनट गर्म -1 मिनट ठण्डी
3 मिनट गर्म -1 मिनट ठण्डी
3 मिनट गर्म -1 मिनट ठण्डी
3 मिनट गर्म -3 मिनट ठण्डी

इस प्रकार कुल 18 मिनट तक यह उपचार करें-आप इसे दिन में दो बार प्रातः और सांय कर सकते हैं-

गले की पट्टी लपेट उपचार-


एक सूती मार्किन का कपडा, लगभग 4 इंच चौड़ा एवं इतना लम्बा कि गर्दन पर तीन लपेटे लग जाएँ और इतनी ही लम्बी एवं 5-6 इंच चौड़ी गर्म कपडे की पट्टी लें-

कैसे करें-

सर्वप्रथम सूती कपडे को ठण्डे पानी में भिगोकर निचोड़ लें तत्पश्चात गले में लपेट दें इसके ऊपर से गर्म कपडे की पट्टी को इस तरह से लपेटें कि नीचे वाली सूती पट्टी पूरी तरह से ढक जाये -इस प्रयोग को रात्रि सोने से पहले आप 45 मिनट के लिए करें-

गले पर मिटटी कि पट्टी-


आप जमीन से लगभग तीन फिट नीचे की साफ मिटटी की व्यवस्था करें और एक गर्म कपडे का टुकड़ा रख ले-

कैसे करें-

लगभग चार इंच लम्बी व् तीन इंच चौड़ी एवं एक इंच मोटी मिटटी की पट्टी को बनाकर गले पर रखें तथा गर्म कपडे से मिटटी की पट्टी को पूरी तरह से ढक दें - इस प्रयोग को दोपहर को 45 मिनट के लिए करें-

विशेष-

आप मिटटी को 6-7 घंटे पहले पानी में भिगो दें- तत्पश्चात उसकी लुगदी जैसी बनाकर पट्टी बनायें-

मेहन स्नान(Mehn bath)-


कैसे करें-

आप सबसे पहले एक बड़े टब में खूब ठण्डा पानी भर कर उसमें एक बैठने की चौकी रख लें-ध्यान रहे कि टब में पानी इतना न भरें कि चौकी डूब जाये और अब आप उस टब के अन्दर चौकी पर बैठ जाएँ तथा पैर टब के बाहर एवं सूखे रहें फिर एक सूती कपडे की डेढ़-दो फिट लम्बी पट्टी लेकर अपनी जननेंद्रिय के अग्रभाग पर लपेट दें एवं बाकी बची पट्टी को टब में इस प्रकार डालें कि उसका कुछ हिस्सा पानी में डूबा रहे-अब इस पट्टी को जिसे आपने जननेंद्रिय पर लपेटा था-टब से पानी ले-लेकर लगातार भिगोते रहें-इस प्रयोग को पांच से दस मिनट तक करें- तत्पश्चात शरीर में गर्मी लाने के लिए 10-15 मिनट तेजी से टहलें-

थायरायड  के लिए हरे पत्ते वाले धनिये(Coriander leaf)की ताजा चटनी बना कर एक बडा चम्मच एक गिलास पानी में घोल कर पीना चाहिए-ये एक दम ठीक हो जाएगा-बस धनिया देसी हो उसकी सुगन्ध अच्छी हो-

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Upcharऔर प्रयोग-

गर्भावस्था में आप क्या खाए

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माँ बनने की सुखद अनुभूति सिर्फ एक माँ ही जान सकती है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अपने गर्भ में पलते शिशु के लिए आपको जरुरी सभी पोषक तत्व मिल सकेंगे इसलिए ये यह जरुरी है कि आप ये भी जाने कि गर्भावस्था(Pregnancy)में क्या खाए-

गर्भावस्था में आप क्या खाए

गर्भावस्था में कैसा हो आहार-


1- आपको गर्भावस्था(Pregnancy)के दौरान कुछ और अधिक कैलोरी की भी ज़रूरत होगी-गर्भावस्था में सही आहार का मतलब है कि आप क्या खा रही हैं न कि ये कि आप कितना खा रही हैं सबसे पहले आप जंक फूड का सेवन सीमित मात्रा में करें-क्योंकि इसमें केवल कैलोरी(Calories) ज्यादा होती है और पोषक तत्व कम या न के बराबर होते हैं-

2- आपका आहार शुरुआत से ही ठीक नहीं है तो यह और भी महत्वपूर्ण है कि आप अब स्वस्थ आहार खाएं- आपको अब और अधिक विटामिन और खनिज- विशेष रूप से फॉलिक एसिड(Folic acid)और आयरन(iron) की जरूरत है-

3- आपको मलाईरहित (Skimmed) दूध, दही, छाछ, पनीर लेना चाहिए क्युकि इन खाद्य पदार्थों में कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन बी -12 की उच्च मात्रा होती है अगर आपको लैक्टोज असहिष्णुता है या फिर दूध और दूध से बने उत्पाद नहीं पचते हैं तो अपने खाने के बारे में अपने डॉक्टर से अवश्य बात करें-

4- अगर आप मांस नहीं खाती हैं तो शाकाहारीयों को प्रोटीन के लिए प्रतिदिन 45 ग्राम मेवे और 2/3 कप फलियों की आवश्यकता होती है एक अंडा, 14 ग्राम मेवे या ¼ कप फलियां लगभग 28 ग्राम मांस, मुर्गी या मछली के बराबर मानी जाती हैं-

5- आप खासकर पानी और ताजा फलों के रस का अवश्य सेवन करे- ये भी सुनिश्चित करें कि आप साफ उबला हुआ या फ़िल्टर किया पानी ही पियें तथा घर से बाहर जाते समय अपना पानी साथ लेकर जाएं या फिर प्रतिष्ठित ब्रांड का बोतल बंद पानी ही पीएं क्युकि अधिकांश रोग जलजनित विषाणुओं की वजह से ही होते हैं आप डिब्बाबंद जूस का सेवन कम ही करें-क्योंकि इनमें बहुत अधिक चीनी होती है-

6- घी, मक्खन. नारियल के दूध और तेल में संतृप्त वसा(Saturated fat)की उच्च मात्रा होती है जो की अधिक गुणकारी नहीं होती है तथा वनस्पति घी में ट्रांसफैट अधिक होती है अत: वे संतृप्त वसा की तरह ही शरीर के लिए अच्छी नहीं हैं-वनस्पति तेल(Vegetable oil)वसा का एक बेहतर स्त्रोत है क्योंकि इसमें असंतृप्त वसा(Unsaturated fats)अधिक होती है।

7- अपने गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए आपको अपने आहार में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन शामिल करने की आवश्यकता है-

8- आपको कितना भोजन करने की जरुरत है इस बात का सर्वोत्तम संकेत आपकी अपनी भूख है और हो सकता है आप पाएं कि भोजन की मात्रा आपकी गर्भावस्था के दौरान बदलती रहती है-

9- ये हो सकता है पहले कुछ हफ्तों में आपको समुचित भोजन करने की इच्छा न हो जबकि विशेष तौर पर यदि आपको मिचली या या उल्टी हो रही है यदि ऐसा हो तो आप कोशिश करें की दिन भर में छोटी मात्रा में-लेकिन कई बार कुछ भोजन करती रहें-अपनी गर्भावस्था के मध्य हिस्से में आपको पहले की तरह ही भूख लग सकती है या फिर भूख में कुछ बढ़ोतरी भी हो सकती है और हो सकता है आप सामान्य से अधिक खाना चाहें-गर्भावस्था के अंत में आपकी भूख संभवत: बढ़ जाएगी और यदि आपको अम्लता, जलन या खाने के बाद पेट भारी सा महसूस होता है तो आपके लिए थोड़े-थोड़े अंतराल पर छोटा-छोटा भोजन करना सही रहेगा तथा जब भूख लगे तब खाएं आप ज्यादा कैलोरी युक्त कम पोषण वाले व्यंजनों की बजाय स्वस्थ भोजन चुनें-

10- कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनसे गर्भावस्था के दौरान आपको दूर रहना चाहिए ये आपके शिशु के लिए असुरक्षित साबित हो सकते हैं जैसे-अपाश्च्युरिकृत दूध और इससे बने डेयरी उत्पादों का सेवन गर्भावस्था में सुरक्षित नहीं है क्यूंकि इनमें ऐसे विषाणुओं के होने की संभावना रहती है जिनसे पेट के संक्रमण और तबियत खराब होने का खतरा रहता है-

11- गर्भावस्था के समय विषाक्त भोजन आपको बहुत बीमार कर सकता है क्योंकि संक्रमण के प्रति आप अधिक संवेदनशील होती हैं-कहीं बाहर खाना खाते समय भी पनीर से बने व्यंजनों जैसे टिक्का और कच्चे पनीर के सैंडविच आदि के सेवन से बचें क्योंकि पनीर ताजा है या नहीं आपको यह बता पाना मुश्किल हो सकता है-

12- सफेद, फफुंदीदार पपड़ी वाली चीज़ जैसे ब्री और कैमेम्बर्ट या फिर नीली (ब्लू वेन्ड)चीज़- इसके अलावा भेड़ या बकरी आदि के दूध से बनी अपाश्च्युरिकृत मुलामय चीज से भी दूर रहें-इन सभी तरह की चीज़ में लिस्टीरिया जीवाणु होने का खतरा रहता है जिससे लिस्टिरिओसिस(Listeriosis)नामक संक्रमण हो सकता है- यह संक्रमण आपके अजन्मे शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है-

13- कच्चा या अधपका मांस- मुर्गी और अंडे-इन सभी में हानिकारक जीवाणु होने की संभावना रहती है इसलिए सभी किस्म के मांस को तब तक पकाएं-जब तक कि उनसे सभी गुलाबी निशान हट जाएं-अंडे भी सख्त होने तक अच्छी तरह पकाएं-

14- डिब्बाबंद मछली अक्सर नमक के घोल में संरक्षित करके रखी जाती हैं और अधिक नमक शरीर में पानी के अवधारण की वजह बन सकता है-इसलिए डिब्बाबंद मछली का पानी अच्छी तरह निकाल दें और प्रसंस्कृत मछली का सेवन कभी-कभी ही करें

15- गर्भावस्था में अत्याधिक शराब पीने से बच्चों में शारीरिक दोष, सीखने की अक्षमता और भावनात्मक समस्याएं पैदा हो सकती हैं-इसलिए यदि आप एल्कोहल का सेवन करती भी है तो गर्भावस्था के दौरान शराब छोड़ देनी चाहिए-

16- ध्यान रखें कि सभी महिलाओं में एक समान वजन नहीं बढ़ता है अपनी गर्भावस्था में आपका वजन कितना बढ़ता है यह कई कारणों पर निर्भर करता है इसलिए स्वस्थ आहार खाने की ओर ध्यान दें-स्टार्चयुक्त कार्बोहाइड्रेट, फल और सब्जियों, प्रोटीन की उचित मात्रा और दूध और डेयरी उत्पादों का सेवन करें- वसा और शर्करा का कम मात्रा में उपभोग करें-

17- गर्भावस्था में जब आपका वजन बढ़ता है तो इसके साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि वजन कितनी मात्रा में बढ़ा है ये भी हो सकता है पहली तिमाही में आपका वजन कुछ ज्यादा नहीं बढ़े तथा फिर दूसरी तिमाही में इसमें निरंतर वृद्धि होनी चाहिए और तीसरी तिमाही में आपका वजन सबसे अधिक बढ़ता है-क्योंकि गर्भ में आपका शिशु भी सबसे ज्यादा इसी तिमाही में बढ़ता है-यदि आपका वजन 90 किलोग्राम से अधिक या 50 किलोग्राम से कम है तो आपकी डॉक्टर एक विशेष आहार की सलाह दे सकती है-

18- ये भी हो सकता है की आपको भूख न हो, परन्तु यह संभावना है कि आपका शिशु भूखा हो इसलिए हर चार घंटे कुछ खाने की कोशिश करनी चाहिए तथा कभी-कभी सुबह या फिर सारे दिन की मिचली, कुछ खाद्य पदार्थों को नापसंद करना, अम्लता या अपच के कारण खाना खाने में मुश्किल हो सकती है इसलिए आप दिन में तीन बार बड़े भोजन करने की बजाय पांच या छह बार कम मात्रा में भोजन का सेवन करने की कोशिश करें- आपके शिशु को नियमित रूप से आहार की जरूरत है और आपको अपनी ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने की जरूरत है तो कोशिश करें की सही समय पर खाना ज़रूर खाएं- उच्च फाइबर और पूर्ण अनाज के भोजन खाने से आपका पेट ज्यादा देर तक भरा हुआ रहेगा और ये अधिक पौष्टिक भी होंगे-

19- आप गर्भवती हैं इसलिए आपको अपने सभी पंसदीदा खाद्य पदार्थ छोड़ने की आवश्यकता नहीं है परन्तु प्रसंस्कृत(PROCESSED)या अत्याधिक तला हुआ भोजन एवं स्नैक्स तथा चीनी से भरे मिष्ठान आपके आहार का मुख्य हिस्सा नहीं होने चाहिए-आईसक्रीम की बजाय एक केला खाएं अथवा कैलोरियों से भरपूर जलेबी की जगह बादाम या केसर का दूध पीएं-यदि आपको कभी-कभी चॉकलेट या गुलाब जामुन खाने का मन हो-तो संकोच न करें बल्कि उसके हर एक निवाले का आनंद भी लें-


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