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पैल्विक दर्द के लिए प्राकृतिक उपचार

पेडू का दर्द(Pelvic Pain)क्या होता है कहीं आप भी इस दर्द से पीड़ित तो नहीं हैं ये वो दर्द है जो अक्सर पेट के निचले हिस्से में होता है और कभी-कभी यह असहनीय हो जाता है कई बार महिलायें इस दर्द को अनदेखा भी कर देतीं है लेकिन इस दर्द को अनदेखा करना बहुत बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है और इससे आपको यूरिन इनफेक्शन(Urine Infections)भी हो सकता है-

पैल्विक दर्द के लिए प्राकृतिक उपचार

जी हाँ हम पेल्विक पेन(Pelvic Pain)की ही बात कर रहें हैं कई महिलाएं इस दर्द से गुजरती हैं और खासकर जब लड़कियां युवावस्था में प्रवेश करती हैं तो उन्हें पेडू के दर्द(Pelvic Pain)की शिकायत रहती है यह रोग प्राय: माताओ बहनो को होता है यह अक्सर(Menopause)के वक्त होता है जिसका असहनीय दर्द होता है  कई बार ये ज्यादा देर तक यूरिन के रुक जाने से भी हो जाता है यह पेडू का दर्द की अपनी कोई बीमारी नही होती है यह एक अलग रोग है जिसको डिसमेनोरिया कहते है

वैसे तो यह दर्द उचित उपचार से ठीक हो सकता है लेकिन यह भी जरूरी नहीं कि पेट के निचले हिस्से में होने वाला दर्द पेल्विक पेन ही हो इसलिए सबसे पहले इस दर्द की पहचान करना भी जरूरी है-

पेडू के दर्द(Pelvic Pain)के लक्षण-


1- सच तो ये है कि इसका केवल एक लक्षण ही नहीं है यह समस्या ऐसी है कि डॉक्टर भी जल्दी आपको पेल्विक पेन का कोई उपयुक्त कारण या लक्षण नहीं बता पाते हैं  क्यूंकि कारण यह है कि ये भी जरूरी नहीं इसका दर्द पेट में ही हो पेल्विक पेन मूत्राशय, आंत, फैलोपियन ट्यूब या गर्भाशय में भी आपको हो सकता है-

2- यह पेडू का दर्द लिम्फ नोड्स और कभी-कभी रक्त वाहिकाओं के कारण भी हो सकता है तथा इसके अलावा भी कई कारण हो सकते हैं जिनसे कि आपको पेल्विक पेन हो सकता है यह दर्द पेडू में सूजन होने के कारण भी हो सकता है लेकिन इस स्थिति में दर्द आम तौर पर मासिक चक्र के पहले शुरू होता है और फिर इसके अंत तक बना रहता है इससे गर्भाशय प्रभावित हो सकता है और भित्ति-पेशी में ग्रंथि ऊतकों का अतिक्रमण हो सकता है-

3- मूत्र मार्ग से जुड़े रोगों के भी इसी तरह के लक्षण होते हैं जैसे- गुर्दे की पथरी, बार-बार पेशाब जाना व मूत्रमार्ग में रुकावट आदि और अक्सर मूत्र मार्ग में संक्रमण के कारण लोग पेशाब के दौरान और पेशाब के बाद गंभीर दर्द से जूझते हैं-

4- पेडू का दर्द(Pelvic Pain)कुछ लोगों को मांसपेशियों के रोग, मोच व हर्निया की समस्या के कारण भी हो सकता है तथा इसके अलावा यह समस्या यौन शोषण के कारण पहुंचे आघात  या सेक्स संबंधों के कारण भी हो सकती है तथा कई बार एक ही स्थान पर एक ही स्थिति में बैठे रहने से भी दर्द हो सकता है-

5- ये गर्भाशय से प्रासटाग्लैन्डिन रसायन के अधिक मात्रा की वजह से होती है जो गर्भाशय को संकुचित करता है यह ज्यादा बनने से उन महिलाओ को परेसान भी करती है जो घर के काम काज से दूरी बना कर रखती है क्युकी इसका अवशोषण नहीं हो पाता है-

6- यदि आपको पेट के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत छह महीने से ज्यादा हो गई है तो आपके लिए बेहतर यही होगा कि एक बार आप डॉक्टर से सलाह ले लें आजकल आंकड़ों के मुताबिक लगभग 20 प्रतिशत लोग इस क्रोनिक पेल्विक पेन(Pelvic Pain)से ग्रस्त हैं लेकिन ज्यादातर महिलाएं इसके लक्षण को पहचान नहीं पाती और अंजाने में इस समस्या की शिकार हो जाती हैं तो अगर आप इसके लक्षणों को भांप लें तो आप इस समस्या से मुक्ति पा सकती हैं क्यूंकि यह दर्द आपको कुछ-कुछ चिड़चिड़ा भी बना देता है-

पेल्विक पेन में क्या-क्या जांच होती है-


इसके लिए आपको चिकित्सकीय उपचार की कुछ प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है इसमें डॉक्टर दर्द का उचित कारण जानने के लिए आपकी जांच करवा सकते हैं और पेडू की जांच भी कर सकते हैं तथा इसके अलावा ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड जांच भी हो सकती है यदि रोगी क्लैमाइडिया और सूजाक संक्रमण से पीड़ित तो नहीं है इसके लिए डॉक्टर पैप स्मीयर जांच भी कर सकते हैं यदि इन सब जांचों के बाद भी कई बार डॉक्टर दर्द का उचित कारण पता नहीं कर पाते है तो फिर वे अंतिम स्थिति में वे लेप्रोस्कोपी का सहारा लेते हैं अगर इसके बाद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकलता तो डॉक्टर यह पता लगाते हैं कि रोगी को कोई मानसिक समस्या या आघात से ग्रस्त तो नहीं है-

आप कुछ घरेलू उपचार आजमा सकते है-


हो सकता है कि इस दर्द में आपको पेनकिलर से कुछ देर तक राहत तो मिल सकती है लेकिन इससे समस्या और बढ़ भी सकती है इसलिए हमेशा ऐसे दर्द के लिए उपचार डॉक्टर के निर्देश से ही होना चाहिये बस शुरुआती दौर में यह समस्या दवाओं से ठीक हो सकती है लेकिन यदि समस्या दवाओं से ठीक नहीं होती तो हार्मोन थेरेपी की जाती है यही इसका अंतिम उपाय लेप्रोस्कोपिक उपचार है-

घरेलू प्रयोग-


यदि आपको पीरियड सही नही आता हो तो एक गिलास पानी में आधा चम्मच तुलसी का रस डालकर उबाले और जब आधा रहे तब इसे पिए पेडू के दर्द और पीरियड दोनों में लाभ दायक है-

पेड़ू दर्द में प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार-


पेडू दर्द के रोग में जब तक रोगी का दर्द न ठीक हो जाए तब तक उसे उपवास रखना चाहिए या फिर रसाहार करना चाहिए तथा रोगी को हल्के गर्म पानी में आधा कागजी नीबू का रस डालकर दोनों समय एनिमा लेना चाहिए-जब रोगी व्यक्ति एनिमा लेता है तो उससे आधा घण्टा पहले तक उसे अपने पेड़ू पर मिट्टी की पट्टी भी रखनी चाहिए इससे रोगी व्यक्ति को दर्द में काफी आराम मिलता है इसके अलावा रोगी को दिन में तीन से चार लीटर पानी में कागजी नींबू या संतरे  रस मिलाकर पीना चाहिए-

सुबह तथा शाम के समय में रोगी व्यक्ति को गर्म पानी पीना चाहिए-

रोगी के पेड़ू पर दस मिनट तक गर्म मिट्टी बांधने के बाद तुरंत ठंडी पट्टी की मिट्टी आधे घण्टे तक बांधने या गर्म ठंडी सेंक देने से पेडू का दर्द चला जाता है इसके बाद दो बार पेड़ू के भाग पर भाप देने से भी दर्द शीघ्र ठीक हो जाता है-

पेडू दर्द से पीड़ित रोगी को रात के समय में अपनी कमर पर भीगी पट्टी बांधनी चाहिए इससे आराम मिलता है-

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Upchar और प्रयोग-


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