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30 अप्रैल 2017

आंव रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार

आपके शरीर को और स्वास्थ्य को पेचिश या आंव रोग से बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है चिकित्सा की भाषा में कहें तो इसे डीसेण्ट्री(Dysentery)कहा जाता है अपच और अजीर्ण की अवस्था हो तो कठोर कब्ज की स्थिति पैदा होती है या पतले दस्त लग जाते हैं या पाचन ठीक न हो तो मल में चिकनापन आ जाता है जिसे आंव भी कहते हैं और थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार मल निकलता है-

आंव रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार

यह रोग यदि जल्दी ठीक न किया जा सके तो बहुत लम्बा, कठिन साध्य और कभी-कभी असाध्य स्थिति में पहुंच जाता है और इसका आक्रमण प्रायः अकस्मात होता है और इसके साथ ज्वर भी हो सकता है इसकी विकृति मुख्य रूप से बड़ी आंत में होती है मल में कफ की मात्रा ज्यादा होती है साथ ही वायु का भी प्रकोप रहता है इसके कीटाणु मुख मार्ग से शरीर में प्रवेश करते हैं और आंतों में पहुंचकर वहां अपना निवास बना लेते हैं इस व्याधि का प्रकोप ग्रीष्म और वर्षा काल में विशेष रूप से होता है-

उदर में मरोड़ और दर्द होना, बार-बार दस्त होना, दस्त होने के बाद थोड़ी देर में फिर हाजत होना, मुंह सूखना, प्यास लगना, जीभ पर मैल की परत जमना, दस्त होते समय मरोड़ होना, मल के साथ रक्त आना, नाड़ी कभी मन्द कभी तेज, बुखार की हरारत आदि लक्षण शुरू में ही प्रकट हो जाते हैं-


आंव-रोग का प्राकृतिक(Naturopathy)चिकित्सा से उपचार-


1- इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को कुछ दिनों तक रसाहार पोषक तत्वों (सफेद पेठे का पानी, खीरे का रस, लौकी का रस, नींबू का पानी, संतरा का रस, अनानास का रस, मठ्ठा तथा नारियल पानी) का अपने भोजन में उपयोग करना चाहिए-

2- रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक अपने भोजन में फलों का सेवन करना चाहिए और कुछ दिनों तक फल, सलाद और अंकुरित पदार्थों का सेवन करना चाहिए-इसके कुछ दिनों के बाद रोगी को सामान्य भोजन का सेवन करना चाहिए-

3- इसके अलावा इस रोग का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को एनिमा क्रिया करनी चाहिए ताकि उसका पेट साफ हो सके-

4- रोगी के पेट पर सप्ताह में एक बार मिट्टी की गीली पट्टी करनी चाहिए तथा सप्ताह में एक बार उपवास भी रखना चाहिए-

5- आंव रोग से पीडि्त रोगी को घबराना नहीं चाहिए तथा रोगी को अपना उपचार करने के साथ-साथ गर्म पानी में दही एवं थोड़ा नमक डालकर सेवन करना चाहिए-

6- इस रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन सुबह तथा शाम को मट्ठा पीना चाहिए-इस प्रकार से रोगी का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से करने से आंव रोग ठीक हो सकता है-

7- इस रोग से पीड़ित रोगी को पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए ताकि शरीर में पानी का कमी न हों क्योंकि शरीर में पानी की कमी के कारण कमजोरी आ जाती है-

8- आंव रोग से पीड़ित रोगी को नारियल का पानी और चावल का पानी पिलाना काफी फायदेमंद होता है और यदि रोगी का जी मिचला रहा हो तो उसे हल्का गर्म पानी पीकर उल्टी कर देनी चाहिए ताकि उसका पेट साफ हो जाए-

नोट-  हमेशा चीजो को ढक कर  रक्खे तथा बाजार में खुली चीजो के खाने से परहेज करे-

पुरानी आव या आंतों की सूजन(कोलाइटिस)का उपचार-



सामग्री-


बेल का गूदा-           100 ग्राम

सौंफ-                     100 ग्राम 
इसबग़ोल की भूसी- 100 ग्राम
छोटी इलायची-         10 ग्राम 

आप इन उपर लिखी चारों चीजों का कूट पीसकर दरदरा चूर्ण बना लें तथा फिर उसमें 300 ग्राम देसी खाँड़ या बूरा मिलाकर किसी काँच की शीशी में सुरक्षित रख लें-



उपयोग की विधि- 


आप लगभग दस ग्राम दवा सुबह नाश्ता के पहले ताजा पानी के साथ लें और शाम को खाना खाने के बाद दस ग्राम दवा गुनगुने जल के साथ या दूध के साथ लें (यदि आवश्यकता समझे तो दोपहर को भी दवा खाना खाने के बाद ताजा जल से दवा खा सकते है)एक सप्ताह के बाद फायदा अवश्य होगा लेकिन करीब 45 दिन दवा खाकर छोड़ दें-यह दवा पेट के मल को साफ करेगी और पुरानी आव या आंतों को सूजन (कोलाइटिस) जड़ से साफ कर देगी-

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Upcharऔर प्रयोग-

1 टिप्पणी:

  1. LING CHHOTA, DHEELA OR TEDHA HA TO AAJMAIYE YE NUSKHA
    NILL SHUKRANUO KA GUARANTEE KE SATH SAFAL AYURVEDIC TREATMENT
    LING ME UTTEJNA ATE HI VIRYA NIKAL JATA HAI TO KHAYEN YE NUSKHA
    http://jameelshafakhana.com

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