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18 अप्रैल 2017

छोटे बच्चों में सुखा रोग का राई मुनिया से उपचार

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इस बीमारी में बच्चों का शरीर बिल्कुल कमजोर हो जाता है उन्हें पतले-पतले दस्त होने लगते है और वे बहुत रोते रहते है यह बीमारी उन बच्चो में ज्यादा पाई जाती है जिन बच्चों में विटामिन डी और कैल्शियम की मात्रा कम होती है जो बच्चे माँ का दूध भरपूर मात्रा में पीते है उन्हें सूखा रोग होने की सम्भावना कम होती है लेकिन इस बीमारी को ठीक करने के लिए आयुर्वेद में एक आसन और सरल उपाय है जो इस प्रकार से है-

छोटे बच्चों में सुखा रोग का राई मुनिया से उपचार

निम्नलिखित शिकायतों पर अनुभूत उपाय-


यदि किन्ही कारणों से बच्चे कमजोर रह जाते हे या अच्छा खानपान होने के बावजूद बच्चों का विकास सामान्य से कम होता है तो बच्चे जल्दी बीमार पड़ते है और दवाओं का असर नहीं के बराबर या फिर कम होता है या देरी से चलना या देरी से बोलना या बच्चे में फॉक्स की कमी या बातों पर रिस्पांड कम देना तथा स्नायुओं का ढीलापन शरीर दुबला और कमजोरी यह सारी शिकायते आजकल के बच्चों में आम रूप से देखी भी जा रही है और ऐसे केस में डॉक्टर भी बच्चों की कुछ ख़ास सहायता नही कर पाते हैं तो चलिए  इस तरह की तकलीफों से छुटकारा पाने का एक सस्ता आसान और कारगर प्रयोग हम आज आपको बताते है- 

सामग्री-

राई मुनिया(Raimuniya)के पत्ते- 200 ग्राम
नीलगिरी तेल-  5-6 बुँदे
चूना और कत्था लगाया हुआ खाने का पान- एक पीस

बनाने की विधि-

यह प्रयोग प्राचीन और पारंपरिक है तो इसे पारम्परिक विधि से ही सिध्द करना होगा आप राई मुनिया(Raimuniya)के पत्तो को सील बट्टे पर बारीक पीस ले तथा अब खाने वाला पान भी पीस ले फिर आप इन दोनों को अच्छी तरह मिलाएं तथा अब इसमें 5-6 बुँदे नीलगिरी के तेल की मिलाए और इसे अच्छी तरह मिक्स करें अब प्रयोग करने के लिए आपका मिश्रण तैयार है-

प्रयोग विधि-

1- सबसे पहले आप बच्चे को पेट के बल लेटा दे तथा अब यह मिश्रण एक ही दिशा में हल्का दबाव देकर बच्चे की पीठ पर लगाए ध्यान रहे कि आपके सहयोग के लिए एक अन्य व्यक्ति का रहना भी आवश्यक है इस मिश्रण को थोड़ा सा मलते ही त्वचा से कांटे नुमा चीज बहार आने लगती है इसे आपका सहयोगी व्यक्ति हटाता रहे ठीक इसी तरह पैरों में भी करना है-

2- जब यह क्रिया समाप्त हो जाए और कांटे निकल जाए तब आप गुनगुने पानी से साफ कर ले और नारियल तेल लगा दे-यह प्रयोग आप 6 माह से 7-8 साल के बच्चों तक कर सकते है-

3- आप इस प्रयोग को पहले हफ्ते में एक बार करे फिर दूसरे महीने में आप 15 दिन में करे और जरूरत पड़े तो माह में एक बार करे-

4- इस प्रयोग से बच्चों का विकास जल्दी होता है स्नायु और त्वचा दोनों ही इन्हेंस होती है तथा सूखा रोग से पीड़ित बच्चे का शरीर भरने लगता है-ऑटिज्म और मेंटली चेलेंज बच्चों में यह ट्रीटमेंट बहुत असर करती है तथा इससे बच्चों में स्फूर्ति आती है और इम्युनिटी सिस्टम में भी काफी बढ़ोतरी देखने को  मिलती है-

आप डायरेक्ट पोस्ट प्राप्त करें-

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Upcharऔर प्रयोग-

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