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12 अप्रैल 2017

क्या आपके दांतों में भी ठंडा-गर्म की शिकायत है

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इनेमल हमारे दांतों का सुरक्षा कवच होता है जो हमारे दांतो को कठोर चीजों से पूर्णतया सुरक्षा प्रदान करती है जो लोग काफी जोर लगाकर टूथब्रश करते हैं तो उनके दांतों का संवेदनशील(Sensitive)होना भी लाज़मी है और जब किसी कारण से दांतों से इनेमल(Enamel)की कोटिंग हट जाती है तो फिर दांतों में कुछ भी ठंडा या गर्म खाने पर काफी तेज़ की टीस होती है-

क्या आपके दांतों में भी ठंडा-गर्म की शिकायत है

दांतों के संवेदनशील(Sensitive)लिए ध्यान रक्खें-


दांतों में संवेदनशीलता(Sensitivity)की ये समस्या महीने भर से लेकर सालों-साल तक रह सकती है दरअसल संवेदनशील दांतों के पीछे मुंह के बैक्‍टीरिया और प्‍लेग भी कफी हद तक जिम्‍मेदार होते हैं संवेदनशील(Sensitive)दांतों के लिए बाजार में कई खास तरह के टूथपेस्ट(Toothpaste)भी आज मौजूद हैं तो आपको चाहिए कि दातों में ठंडा-गरम लगने पर साधारण टूथपेस्ट की जगह आप इन  टूथपेस्ट का भी उपयोग कर सकते है-

आप ध्यान रक्खें कि व्हाइटनर युक्त टूथपेस्ट(Whitener Toothpaste)का उपयोग न करें चूँकि ये टूथपेस्ट आपके दांतों पर कठोरता से काम करते हैं जिससे आपकी तकलीफ और भी बढ़ जाती है तथा साथ ही आप हमेशा नरम टूथब्रश(Toothbrush)का सही प्रकार से इस्तेमाल करें ताकी आपके दांतों और मसूढ़ों पर ज्यादा जोर ना पड़े साथ ही ब्रश को भी हल्‍के हल्‍के हाथों से ही दांतों पर चलाएं-

यदि फिर भी आपको भी दांतों में ठंडा या गरम महसूस होता हो तो आप अपने बचाव के लिये निम्न घरेलू उपचार भी अपना सकते हैं-

1- सबसे पहले आप के लिए जरुरी है कि आप संवेदनशीलता(Sensitivity)पहुंचाने वाले बहुत ज्‍यादा ठंडा या गरम आहार ना खाएं-

2- अम्लीय खाद्य पदार्थ जैसे फलों के रस, शीतल पेय, सिरका, रेड वाइन, चाय, आइसक्रीम और अम्लीय खट्टे फल टमाटर, सलाद ड्रेसिंग और अचार आदि न खाएं और अगर आप इन्‍हें खाते भी हैं तो फिर खाने के बाद में टूथब्रश कर लें चूँकि ये आहार आपके दांतों के इनेमल को घिस देते हैं

3- आप अधिक चीनी युक्‍त आहार न खाएं क्‍योंकि यह दांतों में बड़ी ही तेजी के साथ लगती है आप ऐसे आहारों को पहचाने जो आपके दांतों में लगते हैं उनसे दूर ही रहने का प्रयास करें- 

4- हल्‍के गरम पानी में दो चम्‍मच नमक डालकर घोल बनाएं अब इस घोल से सुबह और रात को सोने से पहले कुल्‍ला करें-यह एक आयुर्वेदिक उपचार है जो काफी काम आता है- 

5- एक चम्‍मच सरसों के तेल में एक छोटा चम्‍मच सेंधा नमक मिलाएं अब आप इस मिश्रण से दांतों और मसूढ़ों की हल्‍के-हल्‍के हाथों की उँगलियों से मसाज करें कम-से कम ऐसा आप पांच मिनट अवश्य ही करे फिर आप साफ़ जल से कुल्ला करें-

6- यदि आपको जादा ही संवेदनशीलता(Sensitivity)है तो आप दिन में दो बार एक-एक चम्मच काले तिल को अवश्य पूरे मुंह में चबाते हुए घुमाएं इससे संवेदनशीलता में काफी आराम मिलता है-

7- तिल, सरसों का तेल और नारियल का तेल तीनो का एक-एक चम्मच करके अच्छी तरह मिला लें तथा इस तेल से दांतों और मसूड़ों की मसाज करें-उसके बाद गुनगुने पानी से मुंह साफ कर लें-कुछ दिन ऐसा करने पर आपको खुद ही फर्क नजर आने लगेगा-

8- जब आपके दांतों डेंटीन की परत भी खत्म हो जाए और नस बाहर आ जाए तो फिर आपको रूट कैनाल कराना पड़ता है या फिर जब दांत में कीड़ा गहरा सुराख कर देता है और संक्रमण जड़ों तक फैल जाता है तो रूट कैनाल किया जाता है जिन टिश्यू में संक्रमण हो जाता है फिर उन्हें स्टरलाइज्ड करके दांत में एक मैटीरियल भर दिया जाता है इसमें दांत ऊपर से पहले जैसा ही रहता है लेकिन दांत की रक्त आपूर्ति काट दी जाती है इससे दांत में किसी भी तरह की बीमारी या संक्रमण की आशंका समाप्त हो जाती है-

9- डेंटीन(दंत धातु)के बाहर आ जाने पर फिलिंग करना जरूरी हो जाता है। फिलिंग न कराने पर दांत में ठंडा-गरम व खट्टा-मीठा लगता रहता है जिससे दांत में दर्द होने लगता है और पस बन जाती है दांतों में तात्कालिक, सिल्वर, कंपोजिट, जीआईसी फिलिंग करवा सकते हैं लेकिन डॉक्टर स्थिति देखने के बाद ही निर्णय लेते हैं कि कौन-सी फिलिंग करनी है-


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