1 अप्रैल 2017

आप अपना घर बनायें अपना आशियाना नहीं

हम सभी के जीवन में घर(Home)एक सुंदर सा नाम है जहाँ सभी लोग संयुक्त रूप से रहते है वही 'घर' कहलाता है और किसी भी कारण अगर इसी घर में विधटन हो जाए तो घर तो सिर्फ आशियाना(बसेरा)बन कर रह जाता है जिसमे रहते हुए वो सुन्दरता नहीं रह जाती है जो 'घर' में होती है-

आप अपना घर बनायें अपना आशियाना नहीं

घर की सुन्दरता आशियाने की सुन्दरता से कई गुना जादा होती है घर में प्रेम है और 'आशियाने' में वैभव अवश्य हो सकता है लेकिन वहां आपसी 'प्रेम' नहीं होता है जी हाँ हम आशियाने को कितने ही सुख सुविधाओं से परिपूर्ण करके रक्खे लेकिन हम 'घर' की तरह संतुष्ट कभी नहीं हो सकते है -

'घर' में माँ-बाप, भाई-बहन, दादा-दादी अन्य सभी लोग एक दूसरे के साथ जुड़े हुए-एक दूसरे का सम्मान करते हुए दुःख सुख में एक दूसरे के साथ कंधे-से कन्धा मिला कर एक जुटता से रहते हैं जहां सारे जहाँन का अस्थाई 'वैभव' भी फीका हो जाता है-

'आशियाने' का 'वैभव' आपको शारीरिक सुख तो अवश्य दे सकता है लेकिन मानसिक संतोष तो सिर्फ 'घर' में ही समाहित हुआ करता है-आज संयुक्त परिवार बहुत कम हो गए है आज दिनों-दिन घर टूटते जा रहें है और 'आशियाने' का निर्मार्ण बहुत तेजी से होता जा रहा है ये आशियाने तो बन गए लेकिन घर(Home)से दूरियां बढ़ गई परिणाम-शारीरिक परेशानी आती गई और मानसिक संताप का उदय भी हुआ है अब आपके पास पैसा है वैभव है लेकिन आपके पास घर वाला प्यार नहीं है आप वास्तविक ममता-प्यार-दुलार खरीद पाने में असमर्थ हो गए हैं-

बस आपकी जिन्दगी सिर्फ हाय-हेल्लो में ही सिमट कर रह गई है पहले आँगन के बटवारे हुए और धीरे-धीरे ये आँगन भी खतम हो गए जहाँ चौपाल लगा करती थी अब तो उसकी जगह लोग नेट की दुनियां में समाते जा रहें हैं लोगों के पास आपसी सम्बन्धो के लिए भी समय नहीं रहा है सभी एक दूसरे से दूर होते जा रहें हैं एक नया ट्रेन्ड बढ़ गया है-नेट पे ही सारे अनजाने लोगो से हाय हेल्लो बर्थ डे विश ,बधाई कार्ड , शोक संवेदना तक दी जाने लगी है-कुछ लोग तो कही भी घूमने जाए फोटो खिचाये या सेल्फी लें बस फेसबुक पे अपलोड कर देते हैं और झूठी वाह-वाही और तसल्ली से अपना मन भर लेते है क्युकि आप अपनों को तो छोड़ते जा रहे है तो कौन आपको अपना बनाएगा-

आपने देखा होगा किसी ब्लॉग या वेवसाईट पर एक HOME का या होम का सिम्बल होता है जानते है आप उस होम में ही पूरा वेबसाईट समाया है होम पे क्लिक करते है पूरी वेवसाईट आपके सामने होती है इसमें ही सब कुछ समाया है लेकिन उसी वेबसाईट में लेबल(टैग)का भी आप्शन भी दिखेगा लेकिन वो सिर्फ अपने बारे में ही बतायेगा शायद आपको मेरी बात अर्थहीन लगेंगी तो फिर दोष हमारा नहीं आप कुछ समझने के लिए मस्तिष्क पर जोर देने से भी कतराते हैं यदि वास्तव में जीवन में संतुष्ट रहना है तो घर बनाए जबकि आशियाना तो 'पक्षी' भी बना लेते है-

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