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तैलपूर्ण उपचार क्या है

समय के साथ हर चीज बदलती है इसी नियम का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि आजकल की आधुनिक जीवन शैली जो आधुनिक कम और नुकसानदेह ज्यादा मालूम पड़ती है आज कल बदलते पर्यावरण और मिलावटी खानपान से जहाँ शरीर के पोषण मिलने में बाधा रूप बन रहा है वही जीवन की मूलभूत जीवन शैली में आए इस फेरबदल ने हमे प्राकृतिक स्वास्थ से भी दूर कर दिया है-

तैलपूर्ण उपचार क्या है

आजकल की फास्ट लाइफ की वजह से ना तो लोगो को उचित ओर हितकर आराम मिल रहा है और ना ही शरीर को उचित व्यायाम मिल पा रहा है मिलावट ने जहां हमारी रसोई से असली घी गायब कर दिया है वही असली तैल जो कि विटामिन डी के उत्तम स्त्रोत थे उसकी जगह आज रिफाइंड आयल ने ले ली है-

चूँकि रिफाइंड आयल की लागत कम और मुनाफा ज्यादा है तथा इसकी शेल्फ लाइफ भी असली तेलों के मुकाबले कई ज्यादा है यानी छपी हुई एक्सपायरी डेट में अगर तेल ना भी बिके तो कम्पनिया इसे रिपैकिंग करके बेचती रहती है इसीलिए इन तेलों के इतने विज्ञापन चलाए जाते है और लोगो की सेहत से खिलवाड़ करके एक मोटा मुनाफा ऐंठा जाता है बेचने वालों को अपने मुनाफे से मतलब है जनता भी अपनी आँखों पर पट्टी बाँध कर इसे उपयोग करती जा रही है-

अब यह तो हुई भोजन में लेने वाली तेलों की बात पर अब बढ़ते फैशन में बालों में तेल लगाने का चलन भी कम हो गया है और बाजारू हेयरॉइल्स में पैराफिन आयल याने पेट्रोलियम तेल का उपयोग मुनाफा कमाने के चक्कर मे हो रहा है इससे भी बालों और  सिर की त्वचा को पोषण नही मिलता है जिससे शरीर में वायु कुपित होकर हेयर फॉलिकल्स को वीक करता है जिससे बाल झड़ना, टूटना और रूसी की समस्या भी अब आम बात हो गई है-

फास्ट लाइफ और बिजी शेड्यूल के चलते स्नेहनम या अभ्यंगम या तेल मालिश जैसी स्वास्थ उपयोगी आदते तो विलुप्त हो रही है जिससे त्वचा में नमी नही रहती और आपकी त्वचा सूखी हो जाती है तथा अपना लचीलापन ओर चमक खो देती है और ऊपर से बाजार में उपलब्ध ये कॉस्मेटिक्स क्रीम और लोशन असर से ज्यादा नुकसान ही करते है और परिणाम स्वरूप शरीर मे नमी ओर लुब्रिकेशन की कमी हो जाती है जिससे युवा उम्र में ही हड्डियों में स्टीफनेस, कटकट सी आवाज आना, पीठ दर्द, कमर दर्द, घुटने का दर्द, सर्वाइकल, एड़ी दुखना, हड्डियों के दर्द, रूखी त्वचा, त्वचा में खुजली, बालो में रूसी या बालो का झड़ना जैसी आम समस्या हो जाती है-

तैलपूर्ण उपचार-


आज जो हम आपको एक उपाय बता रहे है वो ना सिर्फ प्रीवेंटिव है बल्कि क्योर याने इलाज भी है इसके लिए आपको सिर्फ छुट्टी  के दिन हफ्ते में एक बार सिर्फ 30 मिनिट का एक प्रयोग करना है-

सामग्री-


गाय का देशी घी
तिल या सरसो का शुद्ध तेल

सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाए अब(एक सहायक व्यक्ति से)पैरों की उंगलियों के नाखूनों में तिल या सरसो के हल्के गर्म तेल की एक एक बूंद डाले यह आपको दसो उंगलियों के नाखून में करना है इसके बाद नाभि में तिल का तेल उतना डालें जिससे नाभि भर जाए फिर दोनों कानो में तिल तेल की 5-6 बूंद डाले-

अब गाय का घी को हल्का गर्म करके पिघला ले नाक के दोनों नथुनों में 2-2 बूंद घी डाले तथा आंखों में भी एक एक बूंद घी डाले तथा मुँह में एक चमच घी डाले लेकिन आप इसे पिये नही बस मुंह में रख कर आंखे बंद करके लेटे रहे तथा सामान्य श्वासों श्वास लेते रहे बीस से तीस मिनिट यूँ ही लेटे रहे और फिर मुंह का घी फेंक दे और आप स्नान कर ले-

यह तैल पुरण प्रयोग शरीर की कुदरति चिकनाई ओर नमी की पूर्ति करता है इससे आपके दांत मजबूत होते है मसूड़े मजबूत होते है मुह से छालों में आराम मिलता है तथा कफ आधिक्य के रोगों में भी तथा सर दर्द, आंखे दर्द, खर्राटे, असमय बाल सफेद होना, गंजा होना, नाखूनों का टूटना तथा मस्तिष्क के विकारों मे भी यह विधि काफी लाभदायक है यह उपाय हर सप्ताह करने से मालिश के फायदे मिलते है और असमय आने वाले बुढापे को टाला जा सकता है-

प्रस्तुती-

Dr.Chetna Kanchan Bhagat

Whatsup No- 8779397519

Upcharऔर प्रयोग-

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