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योग का एक संक्षिप्त इतिहास

हम आज योग दिवस के बारे में चर्चा करते है 21 तारीख को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस(International Yoga Day)था तो हमारे कुछ पाठक ने हमें प्रेरित किया कि हम योग के बारे में भी विधिवत सम्पूर्ण जानकारी दें तो हमें भी लगा कि योग का हमारे स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण स्थान है योग(Yoga)का वर्णन वेदों में और उपनिषदों में और फिर गीता में भी मिलता है हमारा प्रयास आप तक योग की जानकारी को सम्पूर्ण क्रम से और व्यवस्थित रूप आप तक पंहुचाएं-


योग का एक संक्षिप्त इतिहास

प्रस्तुत लेख योग और स्वास्थ्य(Yoga and Health)के बारे में लेख प्रारम्भ करने से पहले आपको योग का इतिहास(History of Yoga)आपको बताना आवश्यक समझता हूँ आइये जाने क्या है योग का इतिहास-


योग का संक्षिप्त इतिहास(History of Yoga)-


योग का उपदेश सर्वप्रथम हिरण्यगर्भ ब्रह्मा ने सनकादिकों को उसके पश्चात विवस्वान(सूर्य)को दिया था बाद में यह दो शखाओं में विभक्त हो गया-एक ब्रह्मयोग और दूसरा कर्मयोग 

ब्रह्मयोग की परम्परा सनक, सनन्दन, सनातन, कपिल, आसुर‍ि, वोढु और पच्चंशिख नारद-शुकादिकों ने शुरू की थी यह ब्रह्मयोग लोगों के बीच में ज्ञान, अध्यात्म और सांख्‍य योग नाम से प्रसिद्ध हुआ-दूसरी कर्मयोग की परम्परा विवस्वान की है-विवस्वान ने मनु को, मनु ने इक्ष्वाकु को, इक्ष्वाकु ने राजर्षियों एवं प्रजाओं को योग का उपदेश दिया था उक्त सभी बातों का वेद और पुराणों में उल्लेख मिलता है वेद को संसार की प्रथम पुस्तक माना जाता है जिसकी उत्पत्ति काल लगभग 10000 वर्ष पूर्व का माना जाता है और पुरातत्ववेत्ताओं अनुसार योग की उत्पत्ति 5000 ई.पू. में हुई थी-आगे गुरु-शिष्य परम्परा के द्वारा योग का ज्ञान परम्परागत तौर पर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मिलता रहा है-

भारतीय योग जानकारों के अनुसार योग की उत्पत्ति भारत में लगभग 5000 वर्ष से भी अधिक समय पहले हुई थी योग की सबसे आश्चर्यजनक खोज 1920 के शुरुआत में हुई उस समय पुरातत्व वैज्ञानिकों ने 'सिंधु सरस्वती सभ्यता' को खोजा था जिसमें प्राचीन हिंदू धर्म और योग की परंपरा होने के सबूत मिलते हैं-


योग ग्रंथ योग सूत्र-


वेद, उपनिषद्, भगवद गीता, हठ योग प्रदीपिका, योग दर्शन, शिव संहिता और विभिन्न तंत्र ग्रंथों में योग विद्या का उल्लेख मिलता है इन सभी को आधार बनाकर पतंजलि ने योग सूत्र लिखा-योग पर लिखा गया सर्वप्रथम सुव्यव्यवस्थित ग्रंथ है "योगसूत्र "

योगसूत्र को पांतजलि ने 200 ई.पूर्व लिखा था इस ग्रंथ पर अब तक हजारों भाष्य लिखे गए हैं लेकिन कुछ खास भाष्यों का यहां उल्लेख लिखते हैं-

व्यास भाष्य-


व्यास भाष्य का रचना काल 200-400 ईसा पूर्व का माना जाता है महर्षि पतंजलि का ग्रंथ योग सूत्र योग की सभी विद्याओं का ठीक-ठीक संग्रह माना जाता है इसी रचना पर व्यासजी के 'व्यास भाष्य' को योग सूत्र पर लिखा प्रथम प्रामाणिक भाष्य माना जाता है व्यास द्वारा महर्षि पतंजलि के योग सूत्र पर दी गई विस्तृत लेकिन सुव्यवस्थित व्याख्या है-

तत्त्ववैशारदी-


पतंजलि योगसूत्र के व्यास भाष्य के प्रामाणिक व्याख्याकार के रूप में वाचस्पति मिश्र का 'तत्त्ववैशारदी' प्रमुख ग्रंथ माना जाता है वाचस्पति मिश्र ने योगसूत्र एवं व्यास भाष्य दोनों पर ही अपनी व्याख्या दी है तत्त्ववैशारदी का रचना काल 841 ईसा पश्चात माना जाता है-

योगवार्तिक-


विज्ञानभिक्षु का समय विद्वानों के द्वारा 16वीं शताब्दी के मध्य में माना जाता है योगसूत्र पर महत्वपूर्ण व्याख्या विज्ञानभिक्षु की प्राप्त होती है जिसका नाम ‘योगवार्तिक’ है।

भोजवृत्ति-



भोज के राज्य का समय 1075-1110 विक्रम संवत माना जाता है धरेश्वर भोज के नाम से प्रसिद्ध व्यक्ति ने योग सूत्र पर जो 'भोजवृत्ति' नामक ग्रंथ लिखा है वह भोजवृत्ति योगविद्वजनों के बीच समादरणीय एवं प्रसिद्ध माना जाता है कुछ इतिहासकार इसे 16वीं सदी का ग्रंथ मानते हैं-

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