22 जून 2017

दवाई और चिकित्सा का भ्रामक जाल क्या है

What is the Misleading  Practice of Medicine and Treatment


आजकल हर व्यक्ति अपने जीवन में जल्दी में है और सबसे बड़ी बात ये है कि स्वास्थ्य (Health) के प्रति भी उतनी ही जल्दी में है बस भागदौड़ भरी जिंदगी और भीड़ का हिस्सा बनने में लोग बीमार बनते जा रहे है और सबसे बड़ा दुर्भाग्य कहें तो उन्हें स्वास्थ के बारे में सही ढंग की जानकारी देने वाला कोई भी नही है-

दवाई और चिकित्सा का भ्रामक जाल क्या है

दवाई और चिकित्सा (Medicine and Treatment) का भ्रामक जाल-


1- सबसे मजे की बात तो यह है कि रोगी की तरह अब तो चिकित्सक भी जल्दी में रहते है जल्दी में रोगी की समस्या सुनकर बिना कोई सवाल-जवाब किये पैथोलोजिकल टेस्ट (Pathological Test) और फिर बाद में दवाई लिख के दे देते है रोगी को न इसके साइड इफेक्ट्स (Side effects) बताते है और ना ही यह बताते है कि यह चिकित्सा सिर्फ कंट्रोल मेथड है ना कि ये कम्प्लीट क्योर है-

2- एक विशेष समस्या ये है कि जब रोगी समय, पैसे और स्वास्थ्य गवांकर हमारे पास आते है और जब हम उनको उचित और योग्य सलाह देते है तब उनको सलाह भी हजम नही होती है उनको लगता है कि जब मै इतनी आधुनिक दवा (Modern Medicine) से ठीक ना हुआ तो यह पान-फल-फूलो से क्या ठीक होऊंगा-

3- अब बात आती है धैर्य की तो कोई भी नैसर्गिक चिकित्सा पद्धति (Natural Medicine) को कम से कम 90 दिन लगते है शरीर को डिटॉक्सीफाय (Detoxify) करके पूरी तरह से रिपेयर करने की आवश्यकता है किन्तु रोगी पास इतना भी समय नही होता कि वो अपनी स्वास्थ समस्याए बिना किसी साइड इफेक्ट्स के कम्प्लीट खत्म करे-उनको तो बस लक्षणों को तुरन्त दबाने वाली गोली चाहिए बाकी भले ही रोग अंदर ओर फ़ैल कर अपनी जड़ें मजबूत करता रहे-

4- आप आखिर क्यों नहीं समझते है कि रोगों के लक्षणों को दबाकर उसको शरीर मे स्थाई बनने का मौका हम देते जा रहे है और इसी मूर्खता या क्रूरता के चलते आजकल किडनी, केंसर, लिवर , ह्रदय ओर स्त्रियों के रोगों के रोगियों की लंबी कतारें आज हम अस्पताल में देख सकते है-

5- आप एसिडिटी की दवाई लेने जाओ और डॉक्टर रोज की गोली की लत लगा देते है पर यह नही बताते की इससे आंतों की बुरी अवस्था होती है इससे आपको अल्सर भी हो सकता है आप PCOD की दवाई लो PCOD तो वेसे ही रहता है और 6 महीने में थायरॉड सम्बंधित बीमारी आपको अलग से शुरू हो जाती है-

6- शुगर के लिए ली जाने वाली गोली आपकी लिवर ओर किडनी पर अन्याय ही करती है पर हमें रोग होना या ना होना सिर्फ रिपोर्ट पर ही आधारित है ऐसा आप लोगों को बताया जाता है अरे भाई शुगर कंट्रोल हो गई पर पेशंट को थकावट लगती है उसका क्या ? उसकी किडनी लिवर धीरे-धीरे अपनी कार्यक्षमता गवा रहे है उसका जवाब कोई भी चिकित्सक आपको नही दे पाएगा-क्योंकि वो भी तो आप ही कि तरह जल्दी में है ना...!

7- याद रहे इस जगत में धैर्य ओर सकारत्मकता का कोई सबटिट्यूट नही है ईश्वर ने हमे हमें एक अनमोल शरीर दिया है जहाँ तक मेरे अनुभव में लोग बीमारी से कम पर इलाज के साइड इफेक्ट्स से ज्यादा परेशान होते हुए देखा है जबकि स्वास्थ परिचर्या कोई व्यापार नही है कि आपने कंसल्टेशन फीस दे दी दवा की कीमत चुका दी और बदले में स्वास्थ खरीद लिया-

8- जब बड़े बड़े अस्पताल के प्रवेश द्वार पर लिखा होता है कि We only treat the disease...He cures.. तब पेशंट को कुछ असामान्य नही लगता पर जब एक निसर्ग उपचारक यह बात कहता है कि हम कोशिश कर रहे है बाकी स्वास्थ देना परमात्मा के वश में है तब लोग उन पर और् उनकी काबिलियत पर तुरन्त शक करते है और अनेकों सवाल मै ठीक होऊंगा की नही ऐसा संशय मन मे पालते है-

9- इसका कोई साइड इफेक्ट्स तो नही यह सवाल बार-बार निसरगोपचारक को पूछा जाता है जबकि यह सवाल यदि आपने किसी एलोपैथिक चिकित्सक से पूछा होता तो शायद आपको साइड इफेक्ट्स की लंबी लिस्ट मिल जाती और आप उन साइड इफेक्ट्स के कुचक्र से अवश्य ही बच जाते-

10- क्या आप जानते है कि एलोपैथी में आपका जुखाम तक ठीक करने की सामर्थ तक नहीं है दवा लेने के बाद डॉक्टर आपको ये कहता है तीन दिन लगेगें जबकि रोगी बिना दवा लिए ही अपनी सेल्फ हीलिंग सिस्टम या खान-पान को ही थोडा कंट्रोल कर ले तो जुखाम वैसे भी तीन दिन में ठीक हो ही जाता है लेकिन लोगों को बस तुरंत आराम के चक्कर में एलोपैथी का भूत जो सवार है उसके लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता है पहले हमारी दादी-नानी घर के नुस्खे से ही ये छोटे मोटे रोग को चुटकियों में भगा देती थी तब उनके पास कोई डिग्री आदि भी नहीं होती थी-

11- आज जितना हम अग्रेजी दवाओं के सम्पर्क में आते गए है परिणाम स्वरूप एक रोग के ठीक करने के चक्कर में अन्य दूसरे रोगों को बिन बुलाये मेहमान की तरह अपने अंदर समाते जा रहे है ये अज्ञानता और समयाभाव का ही परिणाम है-

दवाई और चिकित्सा का भ्रामक जाल क्या है

12- एक विशेष बात का उल्लेख भी करना आवश्यक है कि एलोपैथी चिकित्सक के पास जाने पर रोगी सिर्फ अपना रोग ही बता सकता है सवाल जवाब नहीं करता है बस चिकित्सक ने पैड पर दवा लिखी और मेडिकल में जाके पेमेंट करके दवा ले आये वहां रोगी ये सवाल नहीं करता है-

13- याद रहे शरीर मे रोग होना 99% हमारे गलत जीवन शैली का नतीजा है तो उसे ठीक करने में हमारे आचार, विचार, आहार सब मे बदलाव की जरूरत अवश्य होती है सच मानिये तो रोगों की चिकित्सा करना भी एक साधना ही है जिसमे चिकित्सक और रोगी दोनों की तन और मन की भूमिका बेहद महत्व पूर्ण है-

प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

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