23 जून 2018

आप जाने बीमारियों का मनोविज्ञान

What is the Psychology of Diseases


आधुनिक चिकित्सा के मुताबिक हर मनुष्य शरीर में सिर्फ लार्ज कलेक्शन ऑफ लिविंग टिश्यूज (Large Collection of Living Tissues) ही है पर आयुर्वेद या दूसरी कोई भी वैकल्पिक चिकित्सा मनुष्य को सिर्फ शरीर तक सीमित ना रखते हुए मन और आत्मा तक जाती है इसीलिए जब आप कोई भी होलिस्टिक थेरेपी अपनाते हैं तब चिकित्सक आपको आपकी पसंद, नापसन्द, आपका स्वभाव, आपका व्यवहार, आपकी आदते, आपके विचार, आपकी दिनचर्या ओर शारीरिक नित्य कर्म हर पहलू को भी जाँचता है-

आप जाने बीमारियों का मनोविज्ञान

आप जाने बीमारियों का मनोविज्ञान (Psychology of Diseases)-


आज की चिकित्सा प्रणाली-


1- भारतीय और् चायनीज चिकित्सा प्रणाली में जहां वैध्य या चिकित्सक को ईश्वर तुल्य माना है वही आधुनिक चिकित्सा प्रणाली (Modern Medical System) चिकित्सा को व्यवसाय का एक रूप मानती है यह भी सत्य है कि इमरजंसी में आधुनिक चिकित्सा प्रणाली ही कार्य सक्षम है लेकिन इतनी रिसर्च और डेवलेपमेंट के बाद भी बहुतायत यह प्रणाली रोगों का तो इलाज करती है पर रोगी को निरोगी नही करती क्योंकि यह चिकित्सा प्रणाली सिर्फ सिम्पटम को ही मिटाती है रोगों के जड़ को नही मिटाती है-

आप जाने बीमारियों का मनोविज्ञान

2- आज के युग की यह सबसे बड़ी कमजोरी या चूक कहे तो हर व्यक्ति स्वास्थ के प्रति जागरूक होते हुए भी ढेरो दवाई ओर हजारों के चेकअप करवाते हुए भी स्वयं को स्वस्थ (Healthy) महसूस नही कर पा रहा है-

3- क्योंकि आधुनिक चिकित्सा प्रणाली (Modern Medical System) मानवी को शरीर तक सीमित मानकर शारीरिक सिम्पटम्स और पैथोलॉजी लैब के आंकड़े को ही स्वास्थ्य का आधार मानकर चलते है जबकि हमारा आयुर्वेद मानता है "मुंडे मुंडे मतीर भिन्ने" यानि हर व्यक्ति की अपनी अनोखी एक प्रकृति होती है और हर व्यक्ति का अपना अलग एक मानसिक स्वभाव (Mental Temperament) या कॉन्स्टिट्यूशन होता है-

4- शारीरिक दुख ही हमें मानसिक रोग (Mental Illness) का संकेत देता है अगर हम अपने पौराणिक ग्रंथों पर नजर दें तो महर्षि चार्वाक, महात्मा बुद्ध आदि महान लोगों ने शारीरिक दुख का कारण मन को ही माना है महर्षि चार्वाक ने तो योग के साथ मन को संयमित रखने के लिए विभिन्न प्रकार के योगों को अपने दर्शन शास्त्र में बताएं है पर आज हम सभी लोग जागरूकता की कमी और भागदौड़ भरी जिंदगी के चलते हम एंटीबायोटिक, पेनकिलर, स्टिरॉयड , हार्मोन्स ट्रीटमेंट्स के आदी हो चुके है-

5- मानसिक चिंताओं की वजह से आज डायबिटीजहार्ट प्रॉब्लम, आंखे ओर दांत कमजोर होना, एलर्जी, ब्लड प्रेशर और महिलाओं की मासिक संभावित समस्याए अब आम बात हो गई है और इसके चलते आज के युग मे सारे रिसोर्सिस, उत्तम आहार, उत्तम चिकित्सा, उत्तम लाइफ स्टाइल होते हुए भी हम उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त करने में असफल ही हो रहें है-

प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

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