24 जून 2017

अल्‍सर का उपचार क्या है

Treatment of Ulcers


आम भाषा में अल्‍सर जिसे अक्सर लोग आमाशय का अल्‍सर (Gastric Ulcer) या पेप्टिक अल्‍सर कहते हैं आपके आमाशय या छोटी आँत के ऊपरी हिस्से में फोड़े या घाव जैसे होते हैं अल्‍सर उस समय बनते हैं जब भोजन को पचाने वाला अम्ल आमाशय या आँत की दीवार को क्षति पहुँचाता है-

अल्‍सर का उपचार क्या है

पहले यह माना जाता था कि अल्‍सर तनाव, पोषण या जीवनशैली के कारण होता है किन्तु वैज्ञानिकों को अब यह ज्ञात हुआ है कि ज्यादातर अल्सर एक प्रकार के जीवाणु हेलिकोबैक्टर पायलोरी या एच. पायलोरी द्वारा होता है और यदि अल्सर का उपचार न किया जाये तो ये और भी विकराल रूप धारण कर लेते हैं-अल्सर का शाब्दिक अर्थ है-घाव और यह शरीर के भीतर कहीं भी हो सकता है जैसे- मुंह, आमाशय, आंतों आदि में-

परन्तु अल्सर शब्द का प्रयोग प्राय: आंतों में घाव या फोड़े के लिए किया जाता है यह एक घातक रोग है लेकिन उचित आहार से अल्सर एक-दो सप्ताह में ठीक हो सकता है-

अधिक मात्रा में चाय, कॉफी, शराब, खट्टे व गरम पदार्थ, तीखे तथा जलन पैदा करने वाली चीजें, मसाले वाली वस्तुएं आदि खाने से प्राय: अल्सर हो जाता है इसके अलावा अम्लयुक्त भोजन, अधिक चिन्ता, ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, कार्यभार का दबाव, शीघ्र काम निपटाने का तनाव, बेचैनी आदि से भी अल्सर बन जाता है पेप्टिक अल्सर में आमाशय तथा पक्वाशय में घाव हो जाते हैं तथा धीरे-धीरे ऊतकों को भी हानि पहुंचनी शुरू हो जाती है इसके द्वारा पाचक रसों की क्रिया ठीक प्रकार से नहीं हो पाती है फिर वहां फोड़ा बन जाता है-

लक्षण-


पेट में हर समय जलन होती रहती है खट्टी-खट्टी डकारें आती हैं सिर चकराता है और खाया-पिया वमन के द्वारा निकल जाता है पित्त जल्दी-जल्दी बढ़ता है तथा भोजन में अरुचि हो जाती है हमेशा कब्ज रहता है और जब रोग बढ़ जाता है तो मल के साथ खून आना शुरू हो जाता है पेट की जलन छाती तक बढ़ जाती है तथा शरीर कमजोर हो जाता है और मन बुझा-बुझा सा रहता है रोगी चिड़चिड़ा हो जाता है तथा वह बात-बात पर क्रोध प्रकट करने लगता है-

पेट में किसी प्रकार के जख्म या दर्द का एहसास होना एवं आंतों में जलन की शिकायत होना तथा पेट के ऊपरी भाग में दर्द एवं जलन होना एवं गर्म पेय पीने के बाद असहजता का अनुभव होना आदि भी इसके लक्षण हैं-

अल्सर का घरेलु उपचार-


1- यदि पेट में जांच कराने के बाद घाव का पता चले तो संतरे का रस सुबह-शाम आधा-आधा कप इस्तेमाल करें इससे भी घाव भर जाता है-

2- पिसे हुए आंवले का दो चम्मच चूर्ण रात को एक कप पानी में भिगो दें तथा सुबह उसमें आधा चम्मच पिसी हुई सोंठ, चौथाई चम्मच जीरा तथा दो चम्मच पिसी हुई मिश्री मिलाकर सेवन करें-

3- अल्सर के रोगियों को दो केले कुचलकर उनमें तुलसी के पत्तों का रस एक चम्मच की मात्रा में मिलाकर खाना चाहिए-

4- यदि अल्सर के कारण पेट में दर्द की शिकायत हो तो एक चम्मच जीरा, एक चुटकी सेंधा नमक तथा दो रत्ती घी में भुनी हुई हींग इन सबको चूर्ण के रूप में सुबह-शाम भोजन के बाद खाएं तथा ऊपर से मट्ठा पिएं-

5- छोटी हरड़ दो, मुनक्का बीज रहित दो तथा अजवायन एक चम्मच-तीनों की चटनी बनाकर दो खुराक करें और इसे सुबह-शाम लें-

6- कच्चे केले की सब्जी बनाकर उसमें एक चुटकी हींग मिलाकर खाएं यह अल्सर में बहुत फायदा करती है-

7- एक चम्मच आंवले के मुरब्बे का रस तथा एक कप अनार का रस आप दोनों को मिलाकर सुबह के समय भोजन से पहले लें-

8- छोटी हरड़ एक, अजवायन एक चम्मच, धनिया दो चम्मच, जीरा एक चम्मच तथा हींग दो रत्ती इन सबका चूर्ण बनाकर दो खुराक करें और भोजन के बाद एक-एक खुराक मट्ठे के साथ लें-

अल्सर होने पर क्या खाएं क्या नहीं-


1- इस रोग में भोजन के बाद आमाशय के ऊपरी हिस्से में दर्द होने लगता है इसलिए रोगी को थोड़ी-सी हींग पानी में घोलकर लेना चाहिए -

2- रोगी को खाली दूध, दही, खोए तथा मैदा की चीजें नहीं खानी चाहिए-

3- यदि दोपहर को केवल उबली हुई सब्जियों जैसे-लौकी, तरोई, परवल, पालक, टिण्डे आदि का सेवन करें तो रोग जल्दी चला जाता है

4- अल्सर में मूली, खीरा, ककड़ी, तरबूज, खट्टी चीजें जैसे- इमली और खटाई नहीं खानी चाहिए-

5- सुबह नाश्ते में हल्की चाय एवं बिस्कुट लेना चाहिए तथा रात को हल्का भोजन करना बहुत लाभदायक होता है और तम्बाकू, कैफीन, अंडा, मांस, मछली, की तकलीफ को बढ़ा देता है इसलिए इनका भी प्रयोग न करें-

इसे भी ध्यान दें-


रात के खाने और सोने के बीच कम-से-कम दो घंटे का अंतर होना चाहिए-

अल्‍सर के रोगी को भरपेट भोजन नहीं करना चाहिए इसकी जगह थोड़ा-थोड़ा भोजन पांच-छ: बार में करें क्योंकि भोजन का पचना पहली शर्त होती है तथा भरपेट भोजन से अल्सर पर दवाब पड़ सकता है और खाया-पिया उल्टी के रूप में निकल सकता है- 

चाय बहुत हल्की पिएं और यदि चाय की जगह पपीते, मौसमी, अंगूर या सेब का रस लें तो लाभकारी होगा भोजन के बाद टहलने का कार्य अवश्य करें- 

पानी उबला हुआ सेवन करें भोजन के बाद अपनी टुण्डी पर सरसों का तेल लगा लें तथा रात को सोने से पूर्व पेट पर सरसों का तेल मलें साथ ही पैर के तलवों पर भी तेल की मालिश करें-

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