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22 मार्च 2018

रूट कनाल आपके लिए कब जरुरी है

Needed for you Root Canal


दांतों में जब कीड़ा काफी बढ़ जाता है और दांत में गहरा सूराख कर देता है और जड़ों तक इसका इंफेक्शन फैल जाता है तो रूट कनाल (Root Canal) किया जाता है जिन टिस्यू (Tissues) में इंफेक्शन हो गया है उन्हें Sterilization करके दांत में एक मटीरियल भर दिया जाता है ताकि वह बरकरार रहे यानी दांत ऊपर से पहले जैसा ही रहता है और काम करता है जबकि दांत की ब्लड सप्लाई काट देते हैं इससे कोई नुकसान नहीं होता है लेकिन हां दांत में इंफेक्शन या किसी और बीमारी की आशंका खत्म हो जाती है-

रूट कनाल आपके लिए कब जरुरी है

रूट कनाल (Root Canal)-


रूट कनाल (Root Canal) की प्रकिया में अक्सर दांत के टूटने की आशंका बढ़ जाती है इसलिए जरूरी है कि दांत पर Crown लगाया जाए इससे दांत का फ्रेक्चर भी रुकता है और लुक भी पहले जैसा बना रहता है-कभी-कभी रूट कनाल फेल भी हो जाती है और उसमें मवाद (Pus) पड़ जाता है तब डॉक्टर ये तय करता है दांत निकालें या नहीं तो ऐसी स्थिति में फिर से इलाज किया जाता है रूट कनाल के इस पूरे प्रॉसेस में चार-पांच सिटिंग लगती हैं-

ठंडा-गरम (Cold-Hot) लगना-


दांत के टूटने, नींद में किटकिटाने, घिसने के बाद, मसूड़ों की जड़ें दिखने और दांतों में कीड़ा लगने पर ठंडा-गरम लगने लगता है और कई बार बेहद दबाव के साथ ब्रश (Brsh) करने से भी दांत घिस जाते हैं और दांत सेन्सेटिव (Sensitive) बन जाते हैं इसलिए ध्यान रक्खे कि ज्यादा दबाव से ब्रश न करें और आप क्रोध में भी दांत पीसने से बचें-

इलाज (Treatment)-


इसका इलाज वजह के मुताबिक होता है फिर भी आमतौर पर डॉक्टर इसके लिए मेडिकेटेड टूथपेस्ट की सलाह देते हैं-जैसे कि सेंसोडाइन, थर्मोसील रैपिड एक्शन, सेंसोफॉर्म, कोलगेटिव सेंसटिव आदि-

वैसे आप बिना डॉक्टर की सलाह लिए भी इन्हें इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन दो-तीन महीने के बाद भी समस्या बनी रहे तो आप डॉक्टर को अवश्य ही दिखाएं-

सांस में बदबू (Breath Stink)-


अधिकतर 95 फीसदी मामलों में मसूड़े और दांत (Gums and Teeth) की ढंग से सफाई न होने और उनमें सड़न व बीमारी होने पर मुंह से बदबू आती है तथा कुछ मामलों में पेट खराब होना या मुंह की लार का गाढ़ा होना भी इसकी वजह होती है जादा प्याज और लहसुन आदि खाने से भी मुंह से बदबू आने लगती है-

इलाज (Treatment)-


लौंग, इलायची चबाने से इससे छुटकारा मिल जाता है या थोड़ी देर तक शुगर-फ्री च्यूइंगगम चबाने से मुंह की बदबू के अलावा दांतों में फंसा कचरा भी निकल जाता है तथा इससे दांतों की मसाज भी हो जाती है इसके लिए बाजार में कई तरह के माउथवॉश भी मिलते हैं-

पायरिया (Pyorrhea)-


मुंह से बदबू आने लगे, मसूड़ों में सूजन और खून निकलने लगे और चबाते हुए दर्द होने लगे तो पायरिया हो सकता है पायरिया होने पर दांत के पीछे सफेद-पीले रंग की परत बन जाती है और कई बार हड्डी गल जाती है और दांत हिलने लगता है पायरिया की मूल वजह दांतों की ढंग से सफाई न करना है-

इलाज (Treatment)-


पायरिया का सर्जिकल और नॉन सर्जिकल दोनों तरह से इलाज होता है इसका शुरू में इलाज कराने से सर्जरी की नौबत नहीं आती है-क्लीनिंग, डीप क्लीनिंग (मसूड़ों के नीचे) और फ्लैप सर्जरी से पायरिया का ट्रीटमंट होता है-

दांत निकालना कब जरूरी-


दांत अगर पूरा खोखला हो गया हो और भयंकर इन्फेक्शन हो गया हो या मसूड़ों की बीमारी से दांत हिल गए हों या बीमारी दांतों की जड़ तक पहुंच गई हो तो फिर इस स्थिति में दांत निकालना जरूरी हो जाता है-

प्रस्तुती- Satyan Srivastava

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