This website about Treatment and use for General Problems and Beauty Tips ,Sexual Related Problems and his solution for Male and Females. Home treatment,Ayurveda treatment ,Homeopathic Remedies. Ayurveda treatment tips in Hindi and also you can read about health Related problems and treatment for male and female

8 जुलाई 2017

ल्यूकोडर्मा(Leukoderma)का आयुर्वेदिक उपचार

By
ल्यूकोडर्मा(Leucoderma)एक प्रकार का त्वचा का रोग है जिसमें त्वचा के रंग में सफेद चकते पड़ जाते हैं ल्यूकोडर्मा यानी की सफेद दाग के नाम से भी जानते है धीरे-धीरे यह दाग बढ़ने लगते हैं यह दाग हाथों, पैरों, चेहरे, होठों आदि पर छोटे रूप में होते हैं फिर ये बडे़ सफेद दाग का रूप ले लेते हैं-

बावची(Psoralea Corylifolia)

हमने पिछली पोस्ट में आपको बताया था कि ल्यूकोडर्मा(Leukoderma)क्या है इसके लक्षण कारण और क्या आहार लें इस पोस्ट में हम आपको इसके इलाज के लिए कुछ आयुर्वेदिक उपचार से अवगत कराते है-
जब आप सभी प्रकार से और हर तरह से इलाज करके निराश हो गए हों तब आप ये दवाई जरूर एक बार प्रयोग करे-

सफ़ेद दाग(Leucoderma)के कुछ आयुर्वेदिक प्रयोग-


सामग्री-

बावची(Psoralea Corylifolia)150 ग्राम
खैर की छाल(Catechu Bark)- 650 ग्राम
परवल की जड़- 300 ग्राम
देशी गाय का घी- 800 ग्राम
भृंगराज- 40 ग्राम
जवासा- 40 ग्राम
कुटकी- 40 ग्राम
गूगल- 80 ग्राम

बनाने की विधि-


1- सबसे पहले आप 650 ग्राम खैर की छाल व 150 ग्राम बावची(Psoralea Corylifolia)को मोटा-मोटा कूट कर रख ले अब इसके बाद 150 ग्राम बावची, भृंगराज, परवल व जवासे को भी बारीक पीस ले और अब गूगल के छोटे टुकड़े बना ले-

2- इसके बाद 650 ग्राम खैर की छाल + 150 ग्राम बावची को 6.500 किलो पानी मे पकाए आप इसे धीमी आग पर पकाए और जब लगभग 1/500 (डेढ़ किलो) ग्राम पानी रह जाए तब आप इसे छान ले तथा ठंडा होने पर जो बचा हुआ अंश है उसे कपड़े मे से निचोड़ ले अब यह काढ़ा साफ बर्तन मे एक रात के लिए रख ले तथा सुबह ऊपर का साफ पानी निथार ले और जो अंश नीचे बैठ जाए उसे आप छोड़ दे-

3- अब एक पीतल की कली की हुई कड़ाही(ना मिले तो लौहे की कड़ाही)मे 800 ग्राम देशी घी व का 1/500 (डेढकिलो) काढ़ा व बाकी बारीक पीसा हुआ पाउडर व गूगल के टुकड़े मिलाकर धीमी आग पर फिर पकाए तथा बीच-बीच में इसे कड़छी से हिलाते रहे-कुछ समय बाद कड़ाही मे नीचे काला काला चिपचिपा अंश दिखाई देगा इसे एक सलाई पर रुई लपेट कर इस पर घी लगाए तथा इस घी लगी रुई को जलाए-यदि चटर-चटर की आवाज आए तो समझे अभी पकाना बाकी है और यदि बिना किसी आवाज के रुई जल जाए तो फिर आग बंद कर दे-जब लगभग सारा पानी जल जाए और केवल घी रह जाए तो आग बंद कर दे-उसके बाद कड़ाही के हल्का ठंडा होने पर ध्यान से घी को एक सूखे बर्तन मे निकाल ले-

4- ध्यान ये रखना होगा कि घी पकाते समय मिश्रण पूरी तरह न जले और जब तली मे शहद जैसा गाढ़ा बच जाए तब आग बंद करके घी को आप अलग कर ले-घी अलग करते समय बर्तन मे जरा सा काले रंग का काढ़ा भी आ जाता है इसलिए बर्तन से घी को एक चौड़े मुंह की काँच की शीशी मे डाल ले-

प्रयोग विधि-

यह घी लगाने व खाने मे प्रयोग करे जिसको रोग कम हो उसे एक समय व जिसे रोग अधिक हो उसे सुबह नाश्ते के बाद व रात को सोने से पहले प्रयोग करे-

मात्रा(Quantity)-

आप 10 ग्राम छोटे बच्चो को भी दे सकते हैं या कम मात्रा मे तथा इसको लगाने से कुछ दिन के बाद दाग का रंग बदलने लगता है यदि इसको लगाने से जलन हो तो बीच-बीच मे इसका प्रयोग बंद कर दे उस समय नारियल का तेल लगाए तथा बाद मे जब जलन शांत हो जाए तब फिर दवाई लगाना शुरू कर दे यदि दाग पर दवाई लगाकर ऊपर किसी भी पेड़ का पत्ता रख कर बांधने से जल्दी लाभ होता है- 

किसी किसी को इस दवाई के लगभग 20 दिन के प्रयोग के बाद शरीर मे जलन व गर्मी महसूस होने लगती है तब इसे बीच मे बन्द कर दे इस दवाई के समय नारियल खाने व नारियल का पानी पीने से जलन नहीं होती है-

विटिलिगो(Vitiligo)के लिए आयुर्वेदिक योग-


40 ग्राम मूली के पिसे हुए बीज को 60 ग्राम सिरके में एक कांच के बर्तन में डाले तथा इसमें एक ग्राम संखिया भी पीस कर डाल दे अब इसे रात भर खुले आसमान के नीचे खुला रक्खे ताकि ओस की बुँदे इसमें गिरते रहे और सुबह इस बर्तन को उठा ले अब इस दवा को सोते समय सफ़ेद दागो पर लगाए बस ध्यान रहे इसे आँखों के आस पास न लगाए न हो होठो पे लगाए क्युकि इसमें संखिया है जो कि एक विष है -

होठो पर सफ़ेद दाग(Leukoderma)प्रयोग करे-


गंधक, लाल चीता(चित्रक)की जड़, हरताल, त्रिफला बराबर की मात्रा में ले इन सब को जल में घोटकर गोली बना ले और छाया में सुखा ले और अब इस गोली को जल में घिस कर लेप को दाग पर रोज लगाए-

श्वेत कुष्ठ(Leukoderma)पर एक अन्य प्रयोग-


100 ग्राम हल्दी तथा 100 ग्राम बाकुची(Psoralea Corylifolia)के बीज को पीस कर 1500 मिलीलीटर पानी में पकाए जब पानी लगभग 300 ग्राम बचे तब इसमें 150 ग्राम सरसों का तेल डालकर फिर पकाए जब सारा पानी जल जाए और तेल मात्र बचे तब उतार ले तथा ठंडा होने पर कांच की शीशी में भर कर रख ले सुबह-शाम इस तेल को सफ़ेद दागों पर लगाने से लाभ  होता है-

एक और सरल प्रयोग-


आप बावची(Psoralea Corylifolia)का एक  दाना सुबह पानी से खाली पेट ले फिर अगले दिन दो  दाने ले बस इसी तरह एक-एक करके आप बढ़ाते हुए 21 तक बढ़ाए तथा फिर एक-एक कम करते हुए वापस एक दाने पर ले आए फिर दोबारा बढ़ाते हुए एक से 21 तक व 21 से 1 तक ले आए-यह प्रयोग 3-4 बार करने से सफ़ेद दाग ठीक हो जाते हैं इस प्रयोग से कभी कभी बीच मे गर्मी लगने लगे तो फिर आगे ना बढ़ाए बस आप वहीं से कम करना शुरू कर दे वैसे नारियल का पानी पीने व नारियल की गिरि खाने से गर्मी लगने कि समस्या कम हो जाती है अधिक लाभ के लिए रात को 2 कप पानी मे 2 चम्मच आंवला चूर्ण डाल दे और सुबह छान कर इस पानी से बावची के दाने ले तो गर्मी नहीं लगती-

Read Next Post-

ल्यूकोडर्मा(Leukoderma)का होम्योपैथी इलाज
अगली पोस्ट में
Upcharऔर प्रयोग-

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें